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अध्याय 1 · आर्थिक समीक्षा 2025-26
कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण
Transforming Agriculture & Food Systems
राजस्थान की कृषि-खाद्य प्रणाली — उत्पादन, सिंचाई, MSP, योजनाएं व आँकड़े।
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दृष्टि — विकसित राजस्थान 2047
Vision — Viksit Rajasthan 2047
PreMains
अध्याय का दृष्टि-वक्तव्य
- लक्ष्य: वर्ष 2047 तक राजस्थान को भारत की अग्रणी कृषि-शक्ति बनाना — बेहतर उत्पादकता, अधिक किसान-आय और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ।
- रणनीति: पशुधन सशक्तीकरण, सहकारी-संचालित अर्थव्यवस्था और उन्नत कृषि-प्रौद्योगिकी से समतापूर्ण ग्रामीण विकास।
- साधन: संतृप्ति-आधारित जलग्रहण हस्तक्षेप, वनारोपण, जैव-विविधता संरक्षण व जलवायु-अनुकूलित कृषि से क्षरित भूमि की पुनर्बहाली एवं जल सुरक्षा।
- प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म सिंचाई व कटाई-उपरांत नवाचारों से एक आत्मनिर्भर, अनुकूलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण।
- कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो अधिकांश खाद्यान्न तथा उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
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कृषि का योगदान एवं वृद्धि (GVA)
Contribution & Growth of Agriculture (GVA)
PreMains
A. सकल मूल्य वर्धन (GVA) में कृषि व संबद्ध क्षेत्र
| संकेतक | स्थिर मूल्यों पर | प्रचलित मूल्यों पर |
|---|---|---|
| GVA में हिस्सेदारी | 25.33% | 25.74% |
| वृद्धि दर | 0.22% | 3.47% |
| मूल्य (₹) | 2.23 लाख करोड़ | 4.41 लाख करोड़ |
| वार्षिक वृद्धि (2021-22→2025-26) CAGR | 3.82% | 8.10% |
B. कृषि के उपक्षेत्रों का योगदान (प्रचलित मूल्यों पर)
| उपक्षेत्र | योगदान | परिवर्तन |
|---|---|---|
| पशुधन | 49.35% | 5.20% वृद्धि |
| फसल क्षेत्र | 42.61% | 5.01% कमी |
| वानिकी एवं लॉगिंग | 7.49% | 2.67% वृद्धि |
| मत्स्य क्षेत्र | 0.54% | 0.87% वृद्धि |
2025-26 में फसल क्षेत्र का GVA (प्रचलित) ₹1.88 लाख करोड़ व पशुधन क्षेत्र ₹2.17 लाख करोड़; पशुधन आय में दूध का प्रमुख योगदान।
सकल मूल्य उत्पाद (GVO) में प्रमुख फसलें
- रबी की शीर्ष फसलें (योगदान क्रम): 1. गेहूँ, 2. राई व सरसों, 3. चना।
- खरीफ की शीर्ष फसलें: 1. बाजरा, 2. मूंगफली, 3. मूंग।
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बागवानी — क्षेत्रफल, उत्पादन, उत्पादकता (2024-25)
Horticulture — Area, Production, Productivity (2024-25)
Pre
| विवरण | फल | सब्जी | मसाले |
|---|---|---|---|
| क्षेत्रफल (हेक्टेयर) | 92,993 | 2,04,755 | 13,64,822 |
| उत्पादन (मैट्रिक टन) | 13,84,606 | 28,60,484 | 14,69,559 |
| उत्पादकता (किग्रा/हेक्टेयर) | 14,889 | 13,970 | 1,077 |
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भू-उपयोग (Land Use)
Land Use
PreMains
- राज्य का कुल क्षेत्रफल: 343.43 लाख हेक्टेयर।
| भूमि प्रकार | प्रतिशत |
|---|---|
| शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल | 53.02% |
| बंजर भूमि | 10.11% |
| वानिकी | 8.30% |
| ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि | 6.85% |
| कृषि के अतिरिक्त अन्य उपयोगी भूमि | 5.96% |
| अन्य चालू पड़त भूमि | 5.62% |
| चालू पड़त | 5.22% |
| स्थायी चारागाह | 4.81% |
| वृक्षों के झुंड तथा बाग | 0.11% |
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जोतधारक (Land Holdings)
Operational Land Holdings
PreMains
प्रचलित जोतधारक — कृषि गणना 2015-16 (परिवर्तन: 2010-11 से)
| विवरण | मान | परिवर्तन |
|---|---|---|
| कुल जोतों का क्षेत्रफल | 208.73 लाख हेक्टेयर | 1.24% कमी |
| कुल प्रचलित जोतों की संख्या | 76.55 लाख | 11.14% वृद्धि |
| औसत जोत आकार | 2.73 हेक्टेयर | 11.07% कमी |
जोत आकार-वर्ग अनुसार (क्षेत्रफल हिस्सा)
| जोत वर्ग | हिस्सा | परिवर्तन (क्षेत्रफल) |
|---|---|---|
| सीमांत (1 हे. से कम) | 40.12% | 19.79% वृद्धि |
| लघु (1–2 हे.) | 21.90% | 10.50% वृद्धि |
| अर्द्ध-मध्यम (2–4 हे.) | 18.50% | 5.67% वृद्धि |
| मध्यम (4–10 हे.) | 14.79% | 0.27% कमी |
| बड़े (10 हे. से अधिक) | 4.69% | 13.20% कमी |
2010-11 की तुलना में सीमांत, लघु, अर्द्ध-मध्यम व मध्यम जोतों की संख्या बढ़ी; बड़े वर्ग की जोतों की संख्या में 11.14% कमी।
महिला प्रचलित जोतधारक (2015-16)
- संख्या: 7.75 लाख (41.94% वृद्धि)।
- क्षेत्रफल: 16.55 लाख हेक्टेयर (24.44% वृद्धि)।
| महिला जोत वर्ग | परिवर्तन (% वृद्धि) |
|---|---|
| सीमांत (1 हे. से कम) | 49.55% |
| लघु (1–2 हे.) | 20.77% |
| अर्द्ध-मध्यम (2–4 हे.) | 14.97% |
| मध्यम (4–10 हे.) | 11.74% |
| बड़े (10 हे. से अधिक) | 2.97% |
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कृषि जलवायु क्षेत्र (10 Zones)
Agro-Climatic Zones (10)
PreMains
- राज्य में कुल 10 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं।
- विशेषताएँ: विविध फसलें (खाद्यान्न, नकदी, बागवानी) उगाने की क्षमता; मिश्रित खेती की संभावना; आय-स्रोतों में विविधता; जलवायु व आर्थिक चुनौतियों के प्रति बढ़ती सहनशीलता।
- क्षेत्र परिभाषित करने के 4 आधार: 1. जलवायु, 2. मिट्टी के प्रकार, 3. स्थलाकृति, 4. फसल पैटर्न।
- उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का 61% भाग रेगिस्तानी/अर्द्ध-रेगिस्तानी (वर्षा-निर्भर); दक्षिण-पूर्वी 39% भू-भाग उपजाऊ।
| क्षेत्र | प्रमुख जिले | खरीफ | रबी |
|---|---|---|---|
| 1. शुष्क पश्चिमी मैदानी (I-A) | जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा | बाजरा, मोठ, तिल, जीरा | गेहूँ, सरसों |
| 2. उत्तरी पश्चिमी सिंचित मैदानी (I-B) | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ | कपास, ग्वार | गेहूँ, सरसों, चना |
| 3. अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी (I-C) | बीकानेर, जैसलमेर, चूरू आंशिक (रतनगढ़, सरदारशहर, बीदासर, सुजानगढ़) | बाजरा, मोठ, ग्वार | गेहूँ, सरसों, चना |
| 4. अन्तःस्थलीय अन्तवर्ती मैदानी (II-A) | सीकर, चूरू (उक्त तहसील छोड़कर), झुंझुनू, नागौर, डीडवाना-कुचामन | बाजरा, ग्वार, दलहन | सरसों, चना |
| 5. लूनी नदी अन्तवर्ती मैदानी (II-B) | पाली, जालोर, सिरोही (पिंडवाड़ा/आबूरोड़ छोड़कर), ब्यावर आंशिक | बाजरा, ग्वार, तिल | गेहूँ, सरसों |
| 6. अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानी (III-A) | जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, ब्यावर (आंशिक) | बाजरा, ग्वार, ज्वार | गेहूँ, सरसों, चना |
| 7. बाढ़ सम्भाव्य पूर्वी मैदानी (III-B) | अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर | बाजरा, ग्वार, मूंगफली | गेहूँ, जौ, सरसों, चना |
| 8. अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदानी (IV-A) | उदयपुर, चित्तौड़गढ़ (बड़ी सादड़ी छोड़कर), राजसमंद, भीलवाड़ा, सिरोही आंशिक | मक्का, दलहन, ज्वार | गेहूँ, चना |
| 9. आर्द्र दक्षिणी मैदानी (IV-B) | बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़ आंशिक (बड़ी सादड़ी) | मक्का, चावल, ज्वार, उड़द | गेहूँ, चना |
| 10. आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानी (V) | कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ | ज्वार, सोयाबीन | गेहूँ, चना |
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कृषि के प्रकार
Types of Agriculture
Pre
मौसम / फसल चक्र आधारित
- रबी: गेहूँ, सरसों, जौ, चना।
- खरीफ: बाजरा, मक्का, मूंगफली, कपास।
- जायद (तीसरा मौसम)।
उपयोग आधारित
- खाद्यान्न — अनाज: गेहूँ, बाजरा, चावल; दलहन: मूंग, चना, मसूर।
- व्यापारिक/वाणिज्यिक: तिलहन, गन्ना, कपास, ग्वार, जीरा, धनिया, मैथी।
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कृषि उत्पादन (2025-26)
Agricultural Production (2025-26)
PreMains
- कुल खाद्यान्न उत्पादन: 283.98 लाख मैट्रिक टन (LMT) — 8.28% की कमी।
| वर्ग | उत्पादन (LMT) | खरीफ | रबी |
|---|---|---|---|
| अनाज | 236.85 | 69.03 (26.71% कमी) | 167.82 (3.35% कमी) |
| दलहन | 47.13 | 20.52 (2.34% वृद्धि) | 26.61 (22.34% वृद्धि) |
अन्य प्रमुख फसलें (2025-26)
| फसल | उत्पादन | परिवर्तन |
|---|---|---|
| तिलहन | 100.46 LMT | 7.18% वृद्धि |
| गन्ना | 3.61 LMT | 22.37% कमी |
| कपास | 17.94 लाख गांठें | 0.34% वृद्धि |
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फसलों में राजस्थान का स्थान
Rajasthan's Rank in Crops
PreMains
- प्रथम स्थान: बाजरा, राई/सरसों, कुल तिलहन, ग्वार, मोटा अनाज।
- द्वितीय: मूंगफली। तृतीय: कुल दलहन, चना, सोयाबीन।
| फसल | प्रथम | द्वितीय | तृतीय | राजस्थान का राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान (%) |
|---|---|---|---|---|
| ग्वार | राजस्थान | हरियाणा | गुजरात | 88.80 |
| राई/सरसों | राजस्थान | मध्य प्रदेश | उत्तर प्रदेश | 43.43 |
| बाजरा | राजस्थान | उत्तर प्रदेश | गुजरात | 41.34 |
| कुल तिलहन | राजस्थान | मध्य प्रदेश | गुजरात | 23.61 |
| मोटा अनाज | राजस्थान | कर्नाटक | उत्तर प्रदेश | 14.21 |
| मूंगफली | गुजरात | राजस्थान | मध्य प्रदेश | 19.91 |
| चना | मध्य प्रदेश | महाराष्ट्र | राजस्थान | 17.39 |
| कुल दलहन | मध्य प्रदेश | महाराष्ट्र | राजस्थान | 13.76 |
| सोयाबीन | मध्य प्रदेश | महाराष्ट्र | राजस्थान | 8.96 |
स्रोत: भारत सरकार द्वारा प्रकाशित कृषि सांख्यिकी-2024। साथ ही, राज्य में पहली बार पृथक कृषि बजट (2022-23) 'समृद्ध किसान-खुशहाल राजस्थान' विचार के साथ प्रस्तुत हुआ।
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उत्पादकता — चुनौतियाँ व उपाय
Productivity — Challenges & Measures
Mains
कम उत्पादकता की चुनौतियाँ
- जल संकट व अनियमित मानसून; जलवायु परिवर्तन/शुष्क प्रदेश; वित्तीय संसाधनों का अभाव; भंडारण व विपणन समस्याएँ; तकनीकी नवाचार से असहजता; सीमित कृषि योग्य भूमि।
उत्पादकता बढ़ाने के उपाय
- जल संरक्षण तकनीक — ड्रिप सिंचाई; सूखा-प्रतिरोधी फसलें — बाजरा, दालें; कृषि वानिकी व पशुपालन का एकीकरण।
- मिट्टी क्षरण रोकना — फसल चक्र, शून्य जुताई (पड़त भूमि), वर्षा जल संचयन, रासायनिक व जैविक उर्वरकों का संतुलित उपयोग।
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बीज (Seed)
Seed
PreMains
मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना
शुरुआत
2017
विस्तार
2018-19 — सभी 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में (पूरे राज्य में)
उद्देश्य
किसान स्वयं के खेतों में अच्छी किस्म के बीज बनाएँ; गेहूँ, जौ, चना, ज्वार, सोयाबीन, सरसों, मूंग, मोठ, उड़द की 10 वर्ष से कम पुरानी किस्मों का बीज उत्पादन; नई किस्मों हेतु निःशुल्क बीज मिनीकिट
नोडल एजेंसी
राजस्थान राज्य बीज निगम लि. (RSSCL) — उत्पादन/खरीद/प्रसंस्करण/आपूर्ति
बीज प्रमाणन
राजस्थान राज्य बीज एवं जैविक उत्पादन प्रमाणन एजेंसी
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उर्वरक एवं मृदा स्वास्थ्य
Fertilizer & Soil Health
PreMains
मृदा स्वास्थ्य कार्ड
- शुरुआत: 19 फरवरी 2015, सूरतगढ़ (गंगानगर) से; मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस — 19 फरवरी।
- 2022-23 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में विलय; सभी 352 ब्लॉक में लागू।
- 2025-26 में 4.15 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी।
गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना
उद्देश्य
रासायनिक उर्वरक कम कर जैविक/नैनो उर्वरक को बढ़ावा
सहायता
प्रत्येक ब्लॉक में 50 किसानों को वर्मी कम्पोस्ट हेतु प्रति किसान ₹10,000 तक
आवेदन
राज किसान पोर्टल (ऑनलाइन)
कृषि क्लीनिक (Agri Clinic)
सेवाएँ
मृदा परीक्षण, फसल जानकारी, कीट/रोग उपचार
स्थान
सभी जिला मुख्यालयों पर
प्रस्तावित
2024-25 में 20 (स्थापित), 2025-26 में 13 (प्रगतिशील)
नमो ड्रोन दीदी योजना
उद्देश्य
ड्रोन से नैनो यूरिया व कीटनाशक छिड़काव (विस्तार: अध्याय 10)
सहायता
महिला SHG को 1070 कृषि ड्रोन व वाहन हेतु ऋण पर 3% ब्याज अनुदान
- राजीविका (महिला संचालित): पशु सखी — 37,369 व कृषि सखी — 36,787 कार्यरत।
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कृषि ऋण / साख
Agricultural Credit
PreMains
सहकारी ढाँचा
- केन्द्रीय सहकारी बैंक (अल्पकालिक ऋण): 29; प्राथमिक भूमि विकास बैंक (दीर्घकालिक): 36।
- कुल 42,858 सहकारी समितियाँ — 23 संघ, 24 दुग्ध संघ, 38 उपभोक्ता थोक दुकानें, 285 सामान्य व फल-सब्जी विपणन समितियाँ, 9,086 प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS)।
- 2025-26 में 1,432 PACS, 288 LAMPS (वृहद आदिवासी बहुउद्देश्यीय) व 32 महिला बहुउद्देश्यीय समितियों के गठन की अनुमति।
- महिला सहकारिता: 1,035 राजीविका महिला सर्वांगीण विकास समितियाँ; 8.70 लाख+ महिलाएँ लाभान्वित।
- शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन फसली ऋण; समय पर अदायगी वाले किसानों को राज्य द्वारा ब्याज अनुदान।
प्रमुख ऋण योजनाएँ
राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना
शुरुआत
अक्टूबर 2022
लाभ
लघु/सीमांत कृषक परिवार सदस्य को गैर-कृषक गतिविधि हेतु ₹2 लाख तक ऋण
सहकार किसान कल्याण योजना
ऋण
फसल ऋण के अतिरिक्त कृषि संबंधी ज़रूरत हेतु; केन्द्रीय सहकारी बैंक व ग्राम सेवा समितियों द्वारा अधिकतम ₹10 लाख
कृषि उपज गिरवी ऋण योजना
दर
कृषि उपज गिरवी रखने पर 3% की दर से ऋण
सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
प्रयोग
अल्पकालीन फसल ऋण वितरण
स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना
प्रायोजक
राष्ट्रीय बैंक
ऋण
गैर-कृषि हेतु ₹50 हजार तक; अवधि 5 वर्ष
राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड (GCC)
उद्देश्य
कृषि+डेयरी परिवारों को सहयोग व पशुधन संरक्षण
ऋण
₹1 लाख तक ब्याज-मुक्त अल्पकालीन ऋण
लक्ष्य/बजट
2.5 लाख दुग्ध उत्पादक परिवार; ₹150 करोड़; RAJSSO पोर्टल (राज सहकार एप)
कृषि अवसंरचना निधि (AIF)
प्रारंभ/अवधि
15 मई 2020; 2020 से 2032
उद्देश्य
फार्म-गेट अवसंरचना; ₹1 लाख करोड़ की निधि
ब्याज सहायता
₹2 करोड़ तक के ऋणों पर 3% प्रतिवर्ष
🛡️
फसल बीमा
Crop Insurance
Pre
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
प्रारंभ
18 फरवरी 2016
दायरा
खाद्यान्न (अनाज, मोटा अनाज, दालें), तिलहन व वाणिज्यिक फसलें
प्रीमियम दरें
| फसल वर्ग | प्रीमियम |
|---|---|
| खरीफ | 2% |
| रबी | 1.5% |
| वाणिज्यिक/बागवानी | 5% |
खरीफ 2020 से असिंचित क्षेत्रों हेतु 30% व सिंचित हेतु 25% अधिकतम प्रीमियम पर अनुदान भारत सरकार द्वारा वहन।
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सतत कृषि एवं बागवानी
Sustainable Agriculture & Horticulture
PreMains
राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)
फोकस
फलोद्यान, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, जल संग्रहण व प्याज भंडारण संरचना
विस्तार
राजस्थान के 41 जिलों में
उपलब्धि (दिस. 2025)
2,358 हे. फलोद्यान; 19 वर्मी-कम्पोस्ट इकाई; 19 जल संचयन संरचना; 1,129 कम-लागत प्याज भंडारण संरचना
राष्ट्रीय बांस मिशन
प्रकार
केन्द्रीय प्रायोजित — उच्च तकनीक व लघु बांस नर्सरी, कौशल प्रशिक्षण
एग्रो फोरेस्ट्री योजना
2025-26
3 स्थानों पर 4 उच्च-तकनीक नर्सरी; बजट ₹285 लाख
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
शुरुआत
2007-08; केन्द्र:राज्य 60:40
उत्कृष्टता केंद्र
धौलपुर, सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, बस्सी (जयपुर), नांता (कोटा)
🚜
कृषि सुधार — प्रमुख मिशन
Key Missions for Agri Reform
PreMains
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM)
गेहूँ व दलहन
2007-08 से; गेहूँ 18 जिले, दलहन 41 जिले
मोटे अनाज
2018-19 से; मक्का 9 जिले, जौ 9 जिले
पोषक अनाज (श्री अन्न)
2018-19 से; बाजरा 28 जिले, ज्वार 11 जिले
वाणिज्यिक
कपास हेतु 18 जिले
नोट
2025-26 से दलहन को 'दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन' में शामिल
दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन
अवधि
2025-26 से 2030-31
फोकस
तुअर/उड़द/मसूर; NAFED द्वारा 100% खरीद; PM-AASHA (PSS); प्रोटीन वृद्धि
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (तिलहन)
वित्त
60:40 (केन्द्र:राज्य); ब्रीडर बीज 100% केन्द्रीय
TBO
6 ट्री-बॉर्न ऑयलसीड्स: ऑलिव, महुआ, नीम, जोजोबा, करंज, जेट्रोफा
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA)
वित्त
60:40 (केन्द्र:राज्य)
IFS प्रकार
पशुधन/बागवानी/कृषि-वानिकी आधारित प्रणाली, वर्मीकम्पोस्ट, मधुमक्खी पालन
परम्परागत कृषि विकास योजना
फोकस
जैविक खेती; क्लस्टर व PGS आधारित
Adaptive Trial Centre (ATC) व जैविक खेती
पुरस्कार
जैविक खेती अपनाने वाले 3 किसानों को प्रतिवर्ष ₹1 लाख प्रोत्साहन
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन
शुरुआत
2025-26; केन्द्र प्रायोजित
क्लस्टर
कुल 2,000 (केन्द्रीय 1,800 + राज्य 200); 2.50 लाख किसान, ₹1 लाख हेक्टेयर
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
शुरुआत/अवधि
11 अक्टूबर 2025; 6 वर्ष
एकीकरण
11 मंत्रालयों/विभागों की 36 योजनाएँ; देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों में
राजस्थान के जिले
8 — बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, पाली, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, नागौर
चयन आधार
निम्न उत्पादकता, फसल सघनता, औसत से कम क्रेडिट मानक
🏭
कटाई के बाद प्रबंधन
Post-Harvest Management
PreMains
भंडारण
- प्रमुख एजेंसी: राजस्थान राज्य भंडारण निगम (RSWC)।
- 36 जिलों में 97 गोदाम; दिसंबर 2025 तक कुल क्षमता 17.25 लाख मैट्रिक टन।
- 2025-26 में उपयोग 8.25 लाख मैट्रिक टन (कुल क्षमता का 48%)। राज्य सर्वाधिक भंडार-शुल्क छूट देता है।
| श्रेणी | शुल्क छूट |
|---|---|
| SC/ST किसान | 70% |
| किसान उत्पादक संगठन | 60% |
| सामान्य किसान | 30% |
| सहकारी समितियाँ | 10% |
प्रसंस्करण
Rising Rajasthan Summit 2024
MoU
कुल 2,524 समझौता ज्ञापन अंतिम रूप
PM सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना (PM-FME)
नोडल/वित्त
RSAMB; 60:40; अवधि 2021–2025-26
अनुदान
इकाई हेतु लागत का 35% या ₹10 लाख; SHG को ₹40,000 सीड मनी; साझा अवसंरचना 35%/₹3 करोड़; ब्रांडिंग 50%; 8 जिलों में 8 इन्क्यूबेशन सेंटर
राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव 2025
आयोजन
8 सितंबर 2025, बिड़ला ऑडिटोरियम जयपुर; CM द्वारा 'राज स्पाइस एप' (RSAMB) शुभारंभ
RIPS 2024 (निवेश संवर्धन नीति)
एग्रो/फूड
सामान्य: पूँजी निवेश का 50% या ₹1.5 करोड़; SC/ST/महिला: +5% पूँजी सब्सिडी
अन्य नीति
फूड पार्क विकास व भूमि आवंटन नीति, 2024
विपणन
- राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड: 1974; कृषि विपणन निदेशालय: 1980।
- कृषक उपहार योजना (जनवरी 2022): ई-नाम पर ₹10,000 बिक्री पर 1 कूपन + मूल्य-गुणक अनुसार अतिरिक्त कूपन।
- सहकारी विपणन: 285 क्रय-विक्रय व फल-सब्जी समितियाँ। राष्ट्रीय सहकारी मसाला मेला 2025: 9-18 मई 2025, जवाहर कला केंद्र जयपुर।
- सहकारी उपभोक्ता संरचना: 38 सहकारी थोक भंडार (33 जिला स्तर); शीर्ष संस्था CONFED।
🐄
पशुधन (Livestock)
Livestock
PreMains
- पशुगणना 2019: 568.01 लाख पशुधन — देश के कुल का 10.60%।
- पशुधन केवल सहायक नहीं, एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है जो अकाल में किसान को सुरक्षा देती है।
देश के कुल में राजस्थान का हिस्सा (प्रजातिवार)
| प्रजाति | हिस्सा |
|---|---|
| ऊंट | 84.43% |
| बकरियां | 14.00% |
| भैंस | 12.47% |
| भेड़ | 10.64% |
| गौवंश | 7.24% |
उत्पादन एवं राष्ट्रीय योगदान (2023-24)
- दुग्ध उत्पादन में राष्ट्रीय योगदान 14.51%; ऊन उत्पादन में 47.53%।
| दूध | अंडे | मांस | ऊन |
|---|---|---|---|
| 34,733 हजार टन | 3,087 मिलियन | 247 हजार टन | 160 लाख किग्रा |
- कुक्कुट विकास: 146 लाख; प्रशिक्षण केंद्र — अजमेर।
पशुधन विकास — सेवाएँ व उपलब्धियाँ
- पशुपालकों हेतु कॉल सेंटर 1962 (24 फरवरी 2024 से): 536 मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन; टोल-फ्री 1962 (108 की तर्ज पर)।
- पशुमित्र योजना: टैगिंग, टीकाकरण, बीमा, कृत्रिम गर्भाधान (नस्ल सुधार)।
- ऊँट संरक्षण अनुदान: नवजात ऊँट हेतु 2 किश्तों में ₹20,000 (जन्म के 0-2 माह व 1 वर्ष आयु पर)।
- पशुधन निःशुल्क स्वास्थ्य योजना: निःशुल्क दवाओं की संख्या 138 से बढ़ाकर 200।
- नया ढाँचा: 700 नए पशु चिकित्सा उपकेंद्र; 2 नए पशु चिकित्सालय; 151 उपकेंद्र → पशु चिकित्सालय; 101 पशु चिकित्सालय → प्रथम श्रेणी; 50 प्रथम श्रेणी → पॉलीक्लिनिक।
- RIDF ट्रेंच 31 के तहत नाबार्ड द्वारा 2025-26 में 310 पशु चिकित्सालयों के नवीन भवन हेतु ₹144.15 करोड़ स्वीकृत; 2,423 नए पद सृजित।
- 2025-26 में 59.82 लाख पशुओं का उपचार; 5.30 लाख+ पशुपालक लाभान्वित।
- FMD (खुरपका-मुंहपका) रोकथाम के 5वें चरण में 1.86 करोड़ गाय-भैंस का निःशुल्क टीकाकरण; LSD रोकथाम में 2025-26 के दौरान 108.30 लाख गायों का निःशुल्क टीकाकरण।
पशुधन किसान कल्याण — बीमा/पहलें
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना
प्रारंभ
दिसंबर 2025 — गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊँट हेतु निःशुल्क बीमा
लक्ष्य
42 लाख पशु (बजट 2025-26)
प्रीमियम
गाय/भैंस/ऊँट ₹40,000 प्रति पशु; भेड़/बकरी ₹4,000; 100% राज्य वहन
पं. दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा
अवधि
24 जून – 9 जुलाई 2025; बीमार पशु उपचार व टीकाकरण
ग्रामीण सेवा शिविर अभियान 2025
उपचार
21 लाख+ पशुओं का उपचार
राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना
लाभ
दुग्ध उत्पादक की दुर्घटना मृत्यु/स्थायी विकलांगता ₹5 लाख; आंशिक ₹2.5 लाख
चरण
नवाँ चरण 1 फरवरी 2025 – 31 जनवरी 2026
सरस सामूहिक आरोग्य बीमा योजना
चरण
कुल 19 चरण; जिला दुग्ध संघों द्वारा दुग्ध उत्पादकों का बीमा
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना
प्रारंभ/अनुदान
1 फरवरी 2019 से; अनुदान ₹2 से बढ़ाकर ₹5 प्रति लीटर (2022-23 से)
मछुआरों हेतु समूह दुर्घटना बीमा
तहत
राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, हैदराबाद
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)
प्रारंभ
2014-15; भेड़-बकरी नस्ल सुधार; उद्यम हेतु ऋण
डेयरी विकास (सहकारी समितियों द्वारा)
- राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन लि., जयपुर; 24 जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ; 19,643 डेयरी सहकारी समितियाँ।
🐮
गोपालन (Gopalan)
Cattle Care (Gopalan)
PreMains
- गोपालन विभाग की स्थापना: 13 मार्च 2014; ऐसा विभाग स्थापित करने वाला राजस्थान दूसरा राज्य।
- राज्य गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन निधि 2016 व 2021 के तहत गौशाला व नंदीशालाओं से देशी गौवंश नस्लों का संरक्षण।
गौशाला विकास योजना
सहायता
पंजीकृत गौशालाओं के ढाँचे हेतु अधिकतम ₹10 लाख (राज्य:जनता 90:10)
पंजीकृत गौशालाओं हेतु सहायता अनुदान
दर (1 अप्रैल 2025 से)
बड़े पशु ₹44→₹50 प्रति पशु/दिन; छोटे ₹22→₹25 प्रति पशु/दिन (270 दिन)
नंदीशाला जन सहभागिता / ग्राम गौशाला योजना
नंदीशाला
अनुमानित लागत ₹1.57 करोड़; अनुपात 90:10 (सरकार:जन)
ग्राम गौशाला
अनुमानित लागत ₹1 करोड़; अनुपात 90:10
वध/तस्करी से बचाए गौवंश हेतु अनुदान
सहायता
देखभाल हेतु अधिकतम 1 वर्ष तक
मूल्य संवर्धन प्रशिक्षण व 'गोपालक वाणी'
प्रशिक्षण
गौ उत्पाद प्रसंस्करण — जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, पाली
ई-न्यूज़लेटर
'गोपालक वाणी' — योजनाओं व नवाचारों की जानकारी
🐟
जलीय कृषि एवं मत्स्य पालन
Aquaculture & Fisheries
Pre
- उद्देश्य: सस्ता व प्रोटीनयुक्त आहार; जल संसाधन उपयोग से विकास; ग्रामीण/वंचित वर्ग को रोजगार।
- जल संसाधनों के आधार पर राजस्थान देश में 10वें स्थान पर।
- जल उपलब्धता: बड़े व मध्यम जलाशय 3.36 लाख हेक्टेयर; छोटे तालाब व टैंक 0.94 लाख हेक्टेयर (कुल जल क्षेत्र ~4.30 लाख हेक्टेयर)।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)
वर्ष
2020-21
उद्देश्य
मत्स्य उत्पादन व अवसंरचना; मछुआरों की आजीविका; जन आधार DBT से SNA स्पर्श पोर्टल द्वारा अनुदान
खारे पानी की जलीय कृषि प्रयोगशाला
स्थान/उद्देश्य
चूरू — शुष्क/अर्धशुष्क (खारे पानी) में जलीय कृषि संभावना
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किसान एवं कृषि श्रमिक कल्याण
Farmer & Farm-Labour Welfare
PreMains
मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
घोषणा
बजट 2024-25; PM किसान लाभार्थियों को अतिरिक्त सहायता
राशि
बजट 2025-26 में वार्षिक ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000; 71.79 लाख किसान लाभान्वित (₹1,000 DBT)
PM किसान पोर्टल
उपलब्धि
PM किसान सम्मान निधि लाभ प्राप्ति में राजस्थान प्रथम; लाभार्थी संख्या में देश में 5वाँ; 69.42 लाख किसानों की e-KYC व आधार सीडिंग पूर्ण
लघु/सीमांत वृद्ध किसान सम्मान पेंशन
पात्रता/राशि
पुरुष 58 वर्ष, महिला 55 वर्ष; 1 जनवरी 2026 से न्यूनतम पेंशन ₹1,250 + 50 प्रति माह
राजस्थान कृषक समर्थन योजना
बोनस
MSP पर प्रति क्विंटल ₹150 (बोनस)
MSP पर गेहूँ खरीद
विवरण
327 क्रय केंद्र; रबी विपणन 2025-26 (10 मार्च–30 जून 2025); MSP ₹2,425/क्विंटल
राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना
राहत
30 नवंबर 2018 तक बकाया अल्पकालिक फसल ऋण माफ; योजना 2019 में मध्यम/दीर्घकालिक ऋणों पर ₹2 लाख तक अतिरिक्त राहत
समेकित बाल विकास — पूरक पोषण
विवरण
महिला एवं बाल विकास विभाग; कॉनफेड के माध्यम से ~63,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को कवर
किसान कलेवा योजना
प्रारंभ/लाभ
जनवरी 2014; 'सुपर'/'अ'/'ब' श्रेणी मंडियों में ₹5 में गुणवत्तापूर्ण भोजन (फल-सब्जी मंडी छोड़कर)
महिला प्रशिक्षण
विवरण
ग्राम पंचायत स्तर पर 1-दिवसीय कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण; 30 महिला कृषकों को प्रति प्रशिक्षण ₹3,000
कृषि शिक्षा में छात्राओं हेतु प्रोत्साहन
राशि
उच्च माध्यमिक ₹15,000; स्नातक-स्नातकोत्तर ₹25,000; स्नातकोत्तर-PhD ₹40,000 प्रति छात्रा/वर्ष
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना
प्रारंभ/लाभ
2009 से; कार्यस्थल पर मृत्यु पर ₹2 लाख (कृषक, खेतिहर मजदूर, हम्माल)
महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना
प्रारंभ
2015
लाभ
प्रसूति सहायता (45 दिन मजदूरी, 2 अवधि); विवाह सहायता ₹75 हजार; मेधावी छात्रवृत्ति (60%+); गंभीर बीमारी पर ₹20 हजार; पितृत्व अवकाश 15 दिन