मुख्य सामग्री पर जाएं
Patwari परीक्षा · Hindi Grammar

अव्यय — Patwari नोट्स

Read this in English →

इस पेज पर अव्यय (अविकारी शब्द) की परिभाषा, उसके पाँचों भेद, क्रियाविशेषण और समुच्चयबोधक के उपभेद तथा क्रियाविशेषण और संबंधबोधक का सबसे भ्रमित करने वाला अंतर उदाहरणों सहित दिया गया है।

  • कक्षा 1–8 स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें

अव्यय क्या है?

अव्यय वे शब्द हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक या काल के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता; इन्हें अविकारी शब्द भी कहते हैं। 'अव्यय' का अर्थ ही है — जिसका व्यय (क्षय/परिवर्तन) न हो। जैसे — 'लड़का धीरे चलता है', 'लड़की धीरे चलती है', 'लड़के धीरे चलते हैं' — क्रिया बदली, पर 'धीरे' वैसा ही रहा।

अव्यय के पाँच भेद पढ़ाए जाते हैं: (1) क्रियाविशेषण, (2) संबंधबोधक, (3) समुच्चयबोधक, (4) विस्मयादिबोधक और (5) निपात। कई पुस्तकें पहले चार को ही अव्यय मानकर निपात को अलग रखती हैं। प्रश्न में जो विकल्प दिए हों, उन्हीं के आधार पर उत्तर चुनें।

रेखांकित शब्द का भेद पहचानने का तीन-चरण तरीका: (1) देखें शब्द किससे जुड़ा है — क्रिया से (कब, कहाँ, कैसे, कितना बताता है) तो क्रियाविशेषण; (2) संज्ञा/सर्वनाम के बाद 'के, की, से' के साथ आकर संबंध जोड़ता है तो संबंधबोधक; (3) दो शब्दों या उपवाक्यों के बीच पुल बनता है तो समुच्चयबोधक। वाक्य से अलग, केवल भाव प्रकट करे और प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) के साथ आए तो विस्मयादिबोधक; और किसी शब्द पर ज़ोर डाले तो निपात। यह क्रम याद रहे तो रेखांकित-शब्द वाले लगभग सभी प्रश्न हल हो जाते हैं।

क्रियाविशेषण के भेद (अर्थ के आधार पर)

भेदक्या बताता हैउदाहरण
कालवाचकक्रिया का समय (कब?)आज, कल, अभी, तुरंत, प्रतिदिन, सदा, कभी-कभी
स्थानवाचकक्रिया का स्थान या दिशा (कहाँ?)यहाँ, वहाँ, भीतर, बाहर, ऊपर, नीचे, इधर, दूर, पास
परिमाणवाचकक्रिया की मात्रा (कितना?)बहुत, थोड़ा, कम, अधिक, ख़ूब, बिल्कुल, इतना
रीतिवाचकक्रिया का ढंग (कैसे?)धीरे-धीरे, ध्यानपूर्वक, गतिपूर्वक, अचानक, सचमुच, ठीक, शायद, नहीं

'पूर्वक' से बने शब्द — ध्यानपूर्वक, सावधानीपूर्वक, गतिपूर्वक — क्रिया के होने का ढंग बताते हैं, इसलिए रीतिवाचक क्रियाविशेषण हैं।

क्रियाविशेषण बनाम संबंधबोधक

एक ही शब्द — भीतर, बाहर, ऊपर, पास, आगे, पीछे — दोनों रूपों में आ सकता है। नियम: जब वह अकेले आकर क्रिया की विशेषता बताए तो क्रियाविशेषण ('भीतर जाओ', 'बच्चे बाहर खेल रहे हैं'); जब वह संज्ञा/सर्वनाम के बाद 'के', 'की', 'से' के साथ आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्द से जोड़े तो संबंधबोधक ('घर के भीतर', 'मेज़ के ऊपर')।

उदाहरण के लिए, 'घर के भीतर जाओ' वाक्य में 'भीतर' शब्द अकेले आया है और क्रिया की दिशा बता रहा है, इसलिए यह स्थानवाचक क्रियाविशेषण है — न कि संबंधबोधक, जो तभी बनता वाक्य में 'के भीतर' के रूप में संज्ञा से जुड़ा होता। परीक्षा में यह ध्यान रखें कि प्रश्न क्या पूछ रहा है — भेद (संबंधबोधक/क्रियाविशेषण) या उपभेद (स्थान/काल/रीति)।

समुच्चयबोधक (योजक) अव्यय

भेदउपभेदशब्दउदाहरण
समानाधिकरण (समान स्तर के शब्द/उपवाक्य जोड़ें)संयोजकऔर, तथा, एवं, वराम और श्याम आए।
विभाजक / विकल्पसूचकया, अथवा, वा, कि, चाहे…चाहे, न…नचाय लोगे या दूध?
विरोधदर्शकपर, परंतु, किंतु, लेकिन, बल्किमैं आता परंतु तुमने बुलाया नहीं।
परिणामदर्शकइसलिए, अतः, अतएव, सोवर्षा हुई, इसलिए मेला रद्द हुआ।
व्यधिकरण (प्रधान उपवाक्य से आश्रित उपवाक्य जोड़ें)कारणवाचक / हेतुवाचकक्योंकि, चूँकि, इसलिए किवह नहीं आया क्योंकि बीमार था।
उद्देश्यवाचकताकि, जिससे कि, किमेहनत करो ताकि सफल हो सको।
संकेतवाचकयदि…तो, जो…तो, यद्यपि…तथापि, चाहे…परयदि वर्षा हुई तो फ़सल अच्छी होगी।
स्वरूपवाचककि, अर्थात्, यानी, मानोउसने कहा कि वह आएगा।

'इसलिए' परिणामदर्शक (समानाधिकरण) है, जबकि 'इसलिए कि' कारण बताने वाला व्यधिकरण योजक है।

संबंधबोधक, विस्मयादिबोधक और निपात

भेदपहचानउदाहरण
संबंधबोधकसंज्ञा/सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्द से बताएके साथ, के बिना, के कारण, के लिए, की ओर, के समान, की अपेक्षा, के भीतर
विस्मयादिबोधकहर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, स्वीकृति आदि भाव प्रकट करे; वाक्य से व्याकरणिक संबंध नहींवाह!, शाबाश! (हर्ष), हाय!, उफ़! (शोक), अरे!, ओह! (आश्चर्य), छि!, धिक्! (घृणा), हाँ!, अच्छा! (स्वीकृति)
निपातकिसी शब्द पर बल देने या अर्थ में विशेषता लाने के लिएही, भी, तो, तक, मात्र, भर, सिर्फ़ — 'मैं भी चलूँगा', 'राम ही आया'

संबंधबोधक के अर्थ-आधारित उपभेद भी पूछे जाते हैं: सादृश्यवाचक (के समान, की तरह), हेतुवाचक (के कारण, के मारे), विरोधवाचक (के विरुद्ध, के खिलाफ़), दिशावाचक (की ओर, की तरफ़)।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'अलग करो, पूरा बचे? — समानाधिकरण': योजक हटाकर देखें, दोनों हिस्से स्वतंत्र पूरे वाक्य बनें तो समानाधिकरण (और, परंतु, या, इसलिए); एक हिस्सा दूसरे पर टिका हो तो व्यधिकरण (क्योंकि, ताकि, यदि…तो)। और '-पूर्वक' वाला शब्द क्रिया के साथ आए तो प्रायः रीतिवाचक क्रियाविशेषण होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अव्यय के कितने भेद होते हैं?+

पाँच — क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक और निपात। कुछ पुस्तकें निपात को अलग मानकर चार भेद बताती हैं।

समानाधिकरण और व्यधिकरण समुच्चयबोधक में क्या अंतर है?+

समानाधिकरण समान स्तर के शब्दों/स्वतंत्र उपवाक्यों को जोड़ता है (और, परंतु, या)। व्यधिकरण एक प्रधान और एक आश्रित उपवाक्य को जोड़ता है (क्योंकि, ताकि, यदि…तो)।

'परंतु' कौन-सा अव्यय है?+

'परंतु' समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय है, जिसका उपभेद विरोधदर्शक है।

निपात क्या होते हैं?+

ही, भी, तो, तक, मात्र, भर जैसे शब्द जो किसी शब्द पर बल देते हैं, निपात कहलाते हैं — जैसे 'मैं ही जाऊँगा'।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT पाठ्यपुस्तकें — हिंदी (वसंत, दूर्वा आदि) एवं व्याकरण अभ्यास
  2. केंद्रीय हिंदी निदेशालय — देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण