क्रिया — Patwari नोट्स
क्रिया हिंदी वाक्य की रीढ़ है और पद-परिचय (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, अव्यय) की पहचान का एक अनिवार्य भाग है। इस पेज में क्रिया के सभी प्रमुख भेद — सकर्मक, अकर्मक, प्रेरणार्थक, संयुक्त, पूर्वकालिक व नामधातु — उदाहरण सहित समझाए गए हैं, ताकि किसी भी वाक्य में क्रिया का भेद झटपट पहचाना जा सके।
- कक्षा 4–8 स्तर
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क्रिया की परिभाषा और वाक्य में भूमिका
जिस शब्द से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं। हिंदी वाक्य में क्रिया वह पद है जो कर्ता या कर्म से जुड़कर वाक्य को पूर्ण करती है और धातु (मूल रूप) में प्रत्यय जोड़कर बनती है — जैसे 'पढ़' धातु से 'पढ़ना', 'पढ़ता', 'पढ़ेगा' आदि रूप बनते हैं।
हिंदी में क्रिया को मुख्यतः दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है — पहला, कर्म की उपस्थिति के आधार पर (सकर्मक/अकर्मक/द्विकर्मक), और दूसरा, रचना व प्रयोग के आधार पर (प्रेरणार्थक, संयुक्त, नामधातु, पूर्वकालिक आदि)। परीक्षा में दोनों वर्गीकरणों से प्रश्न बन सकते हैं, इसलिए दोनों को साथ-साथ समझना जरूरी है।
कर्म के आधार पर क्रिया के भेद
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| सकर्मक क्रिया | जिस क्रिया का फल कर्ता से निकलकर कर्म पर पड़े; 'क्या' पूछने पर उत्तर मिले | राम ने पत्र लिखा (क्या लिखा? — पत्र) |
| अकर्मक क्रिया | जिस क्रिया का फल कर्ता तक ही सीमित रहे, कोई कर्म न हो | बच्चा सोता है |
| द्विकर्मक क्रिया | जिस क्रिया के साथ दो कर्म (मुख्य व गौण) आएँ | माँ ने बच्चे को दूध पिलाया |
| अपूर्ण अकर्मक क्रिया | जिस अकर्मक क्रिया का अर्थ पूरा करने के लिए पूरक (complement) शब्द चाहिए | राम अध्यापक बना (यहाँ 'अध्यापक' के बिना अर्थ अधूरा रहता) |
रचना/प्रयोग के आधार पर अन्य प्रमुख भेद
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रेरणार्थक क्रिया | जिसमें कर्ता स्वयं कार्य न कर, किसी अन्य से करवाए | माँ ने बच्चे को पढ़ाया (प्रथम प्रेरणार्थक); माँ ने बच्चे को पढ़वाया (द्वितीय प्रेरणार्थक) |
| संयुक्त क्रिया | दो क्रियाएँ मिलकर एक ही क्रिया का बोध कराएँ (मुख्य क्रिया + रंजक क्रिया) | वह पढ़ने लगा (आरंभ), वह खा चुका (समाप्ति), वह चल सकता है (सामर्थ्य) |
| नामधातु क्रिया | संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी क्रिया | शर्म से शरमाना, लाज से लजाना, हाथ से हथियाना |
| पूर्वकालिक क्रिया | जब एक ही कर्ता की दो क्रियाओं में से पहली क्रिया दूसरी से पहले पूरी हो; प्रायः '-कर/-करके' प्रत्यय | राम खाना खाकर सोया |
सहायक क्रिया और काल से संबंध
होना, रहना, सकना, चुकना, पाना जैसी सहायक क्रियाएँ मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर काल, वाच्य और भाव को स्पष्ट करती हैं — जैसे 'वह जा रहा है' में 'रहा है' सहायक क्रिया वर्तमान काल की सातत्यता दर्शाती है।
सहायक क्रिया अकेले वाक्य में पूरा अर्थ नहीं देती, वह हमेशा किसी मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर ही काम करती है। इसके विपरीत संयुक्त क्रिया में दोनों क्रियाएँ मिलकर एक नया, विशेष भाव (जैसे आरंभ, समाप्ति, सामर्थ्य, अनुमति) उत्पन्न करती हैं — यही दोनों में मूल अंतर है। परीक्षा में इन दोनों को अलग पहचानने के लिए यह देखें कि दूसरी क्रिया मूल क्रिया के अर्थ में कोई नया भाव जोड़ रही है या केवल काल/वाच्य स्पष्ट कर रही है।
सकर्मक बनाम अकर्मक पहचानने की कसौटी
- प्रश्न-परीक्षण
- क्रिया के साथ 'क्या' या 'किसे' पूछें — उत्तर मिले तो सकर्मक, न मिले तो अकर्मक
- उदाहरण जोड़ी
- 'वह सोता है' (अकर्मक) बनाम 'वह किताब पढ़ता है' (सकर्मक, क्या पढ़ता है? — किताब)
- अपवाद पर ध्यान
- कुछ क्रियाएँ (जैसे 'सोना') सामान्यतः अकर्मक होती हैं, पर सजातीय कर्म के साथ सकर्मक जैसा व्यवहार भी कर सकती हैं — जैसे 'वह गहरी नींद सोया'
धातु से बनने वाले क्रिया-रूपों के उदाहरण
| मूल धातु | सामान्य क्रिया | प्रेरणार्थक रूप |
|---|---|---|
| पढ़ | पढ़ना | पढ़ाना / पढ़वाना |
| लिख | लिखना | लिखाना / लिखवाना |
| सो | सोना | सुलाना / सुलवाना |
| उठ | उठना | उठाना / उठवाना |
प्रथम प्रेरणार्थक रूप प्रायः -आना प्रत्यय से, द्वितीय प्रेरणार्थक रूप -वाना प्रत्यय से बनता है
याद रखने की ट्रिक
'क्या/किसे' पूछकर पहचानें — यदि क्रिया के साथ 'क्या' पूछने पर स्पष्ट उत्तर (कर्म) मिले तो वह सकर्मक है, नहीं तो अकर्मक; प्रेरणार्थक पहचानने के लिए देखें कि कर्ता खुद काम कर रहा है या करवा रहा है। '-वाना' प्रत्यय दिखे तो द्वितीय प्रेरणार्थक और '-आना' प्रत्यय दिखे तो प्रथम प्रेरणार्थक समझें — यह छोटी-सी पहचान परीक्षा में समय बचाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्रिया परीक्षा में कैसे पूछी जाती है?+
प्रायः किसी वाक्य में रेखांकित क्रिया का भेद (सकर्मक/अकर्मक/प्रेरणार्थक आदि) पहचानने या दिए गए विकल्पों में से सही भेद चुनने के रूप में पूछी जाती है।
सकर्मक और अकर्मक क्रिया में मुख्य अंतर क्या है?+
सकर्मक क्रिया का फल कर्म (वस्तु/व्यक्ति) पर पड़ता है और 'क्या' पूछने पर उत्तर मिलता है, जबकि अकर्मक क्रिया का फल केवल कर्ता तक सीमित रहता है और कोई कर्म नहीं होता।
प्रेरणार्थक क्रिया के कितने रूप होते हैं?+
दो — प्रथम प्रेरणार्थक (कर्ता किसी और से सीधे कार्य करवाए, जैसे पढ़ाना) और द्वितीय प्रेरणार्थक (कर्ता किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से कार्य करवाए, जैसे पढ़वाना)।
संयुक्त क्रिया और सहायक क्रिया में क्या अंतर है?+
सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर सिर्फ काल/वाच्य दिखाती है (जैसे 'जा रहा है'), जबकि संयुक्त क्रिया दो क्रियाओं के मेल से नया विशेष भाव (आरंभ, समाप्ति, सामर्थ्य) देती है (जैसे 'पढ़ने लगा')।
द्विकर्मक क्रिया की पहचान कैसे करें?+
जिस वाक्य में क्रिया के साथ दो कर्म आएँ — एक मुख्य कर्म (वस्तु) और एक गौण कर्म (व्यक्ति) — उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं, जैसे 'माँ ने बच्चे को दूध पिलाया' में 'दूध' मुख्य और 'बच्चे को' गौण कर्म है।