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Patwari परीक्षा · Hindi Grammar

विशेषण — Patwari नोट्स

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विशेषण वे शब्द हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, परिमाण) बताते हैं। परीक्षा में गद्यांश से रेखांकित शब्द देकर उसका शब्द-भेद पूछा जाता है, जहाँ सार्वनामिक विशेषण को सर्वनाम से अलग पहचानना सबसे जरूरी कौशल है।

  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 7 मिनट पढ़ें
21 सितंबर 2026 को सत्यापित

विशेषण क्या है?

जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, रंग, आकार, संख्या, परिमाण) बताकर उसके अर्थ को सीमित या स्पष्ट करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं — जैसे 'सुंदर लड़की' में 'सुंदर' विशेषण है। जिस संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताई जाए, उसे विशेष्य कहा जाता है।

हिंदी व्याकरण में विशेषण के चार प्रमुख भेद माने जाते हैं: गुणवाचक (गुण/दोष/रंग/आकार बताने वाले — अच्छा, लाल, मीठा), संख्यावाचक (संख्या बताने वाले — एक, दो, कुछ), परिमाणवाचक (मात्रा/नाप बताने वाले — दो किलो, थोड़ा) और सार्वनामिक (सर्वनाम जो संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताए — यह, वह, कौन-सा)।

विशेषण और विशेष्य का क्रम हिंदी में सामान्यतः विशेषण पहले और विशेष्य बाद में होता है (जैसे 'सुंदर लड़की'), जो अंग्रेज़ी के समान क्रम है, पर कविता व साहित्यिक भाषा में यह क्रम कभी-कभी पलट भी जाता है (जैसे 'लड़की सुंदर है' में विशेषण उद्देश्य-पूरक के रूप में बाद में आता है)। इसके अलावा एक ही वाक्य में एक से अधिक विशेषण भी आ सकते हैं, जैसे 'वह एक लंबा, दुबला, ईमानदार युवक है' — यहाँ लंबा और दुबला गुणवाचक हैं तथा 'एक' संख्यावाचक विशेषण है। परीक्षा में ऐसे मिश्रित वाक्यों में हर विशेषण का भेद अलग-अलग पहचानना आना चाहिए।

विशेषण के भेद और उदाहरण

भेदउपभेदउदाहरण
गुणवाचक विशेषणगुण, दोष, रंग, आकार, स्वाद, अवस्थाअच्छा लड़का, लाल फूल, मीठा फल, प्राचीन काल
संख्यावाचक विशेषणनिश्चित (गणनावाचक: एक, दो; क्रमवाचक: पहला, दूसरा) और अनिश्चित (कुछ, कई, अनेक)दो किताबें (निश्चित), कई लोग (अनिश्चित)
परिमाणवाचक विशेषणनिश्चित (नाप-तौल से मापी गई मात्रा) और अनिश्चित (अंदाज़न मात्रा)दो लीटर दूध (निश्चित), थोड़ा दूध (अनिश्चित)
सार्वनामिक विशेषणसर्वनाम शब्द जो संज्ञा से पहले आकर उसकी ओर संकेत करेयह भूमि, वह लड़का, कौन-सा छात्र

विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ

गुणवाचक विशेषणों की तुलना करने के लिए हिंदी में तीन अवस्थाएँ मानी जाती हैं — मूलावस्था (सामान्य गुण बताना, जैसे 'लघु'), उत्तरावस्था या तुलनात्मक अवस्था (दो वस्तुओं की तुलना करना, जैसे 'लघुतर' यानी दूसरे से छोटा) और उत्तमावस्था (सबसे अधिक/श्रेष्ठ बताना, जैसे 'लघुतम' यानी सबसे छोटा)। ये रूप संस्कृत के 'तर' और 'तम' प्रत्यय जोड़कर बनते हैं — जैसे उच्च-उच्चतर-उच्चतम, अधिक-अधिकतर-अधिकतम।

इस अवधारणा को गुणवाचक विशेषण के साथ जोड़कर पढ़ना परीक्षा में फायदेमंद है, क्योंकि कई बार प्रश्न में सीधे विशेषण का भेद नहीं बल्कि उसकी तुलनात्मक अवस्था पहचानने को कहा जाता है — जैसे 'सुंदरतम' शब्द में यह पूछा जा सकता है कि यह किस अवस्था का उदाहरण है (उत्तर: उत्तमावस्था)।

ध्यान रहे कि सभी गुणवाचक विशेषणों में 'तर'-'तम' प्रत्यय स्वाभाविक ढंग से नहीं जुड़ते — कुछ मूल हिंदी (तद्भव) विशेषणों में तुलना 'से अधिक', 'से ज्यादा' या 'सबसे' जैसे शब्द जोड़कर की जाती है (जैसे 'अच्छा' से 'सबसे अच्छा'), जबकि तत्सम (संस्कृत-मूल) विशेषणों में सीधे प्रत्यय जुड़ जाते हैं (उच्च-उच्चतम)। परीक्षा में यह भेद पहचानना भी उपयोगी है कि कौन-सा विशेषण किस तरीके से अपनी तुलनात्मक अवस्था बनाता है।

विशेष्य उस संज्ञा/सर्वनाम को कहते हैं जिसकी विशेषता विशेषण द्वारा बताई जाती है — जैसे 'सुंदर लड़की' में 'लड़की' विशेष्य है। गुणवाचक विशेषण पहचानने का सबसे आसान तरीका है संज्ञा से पहले 'कैसा/कैसी/कैसे' प्रश्न पूछना — जो उत्तर मिले वही गुणवाचक विशेषण होगा।

एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि विशेषण भी लिंग-वचन के अनुसार अपना रूप बदल सकता है, विशेषकर जब वह विशेष्य के ठीक पहले आए — जैसे 'अच्छा लड़का' (पुल्लिंग एकवचन), 'अच्छी लड़की' (स्त्रीलिंग एकवचन) और 'अच्छे लड़के' (पुल्लिंग बहुवचन)। ध्यान दें कि सभी विशेषण इस तरह नहीं बदलते — 'सुंदर', 'ईमानदार' जैसे कुछ विशेषण हर लिंग-वचन में एक जैसे ही रहते हैं (सुंदर लड़का, सुंदर लड़की)। परीक्षा में वाक्य-शुद्धि के प्रश्नों में विशेषण-विशेष्य के गलत लिंग-वचन मेल को पहचानना भी पूछा जा सकता है, इसलिए इस नियम को उदाहरणों के साथ ठीक से समझ लेना चाहिए।

सार्वनामिक विशेषण की पहचान

जब 'यह', 'वह', 'कोई', 'कौन-सा' जैसे सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता या पहचान बताते हैं (न कि स्वयं संज्ञा का स्थान लेते हैं), तो उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है। जैसे 'यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है' में 'यह' अकेला संज्ञा के स्थान पर नहीं आया, बल्कि 'भूमि' के साथ जुड़कर उसकी ओर इशारा कर रहा है — इसलिए यह सार्वनामिक विशेषण है, शुद्ध सर्वनाम नहीं। यह भेद 'सर्वनाम' टॉपिक से सीधे जुड़ा है, इसलिए दोनों को साथ पढ़ना फायदेमंद है।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

अगर 'यह/वह/कौन-सा' के ठीक बाद कोई संज्ञा आए, तो सार्वनामिक विशेषण समझें; अगर वे अकेले खड़े हों (आगे कोई संज्ञा न हो), तो सर्वनाम समझें। यह एक ही नियम सर्वनाम और विशेषण — दोनों टॉपिक में काम आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेषण किसे कहते हैं?+

जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, परिमाण) बताकर उसके अर्थ को सीमित या स्पष्ट करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।

विशेषण के कितने भेद होते हैं?+

हिंदी व्याकरण में विशेषण के चार प्रमुख भेद माने जाते हैं — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक और सार्वनामिक विशेषण।

सार्वनामिक विशेषण और सर्वनाम में क्या अंतर है?+

जब सर्वनाम शब्द अकेले संज्ञा के स्थान पर आए तो वह सर्वनाम है; जब वही शब्द संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताए, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ कितनी होती हैं?+

तीन — मूलावस्था (सामान्य गुण, जैसे लघु), उत्तरावस्था/तुलनात्मक अवस्था (दो की तुलना, जैसे लघुतर) और उत्तमावस्था (सबसे अधिक, जैसे लघुतम), जो 'तर' और 'तम' प्रत्यय जोड़कर बनती हैं।

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