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Patwari परीक्षा · Hindi Grammar

अपठित गद्यांश हल करने की विधि, प्रश्न-प्रकार और ट्रिक्स — Patwari नोट्स

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इस पेज में अपठित गद्यांश को कम समय में सही हल करने की विधि, हर तरह के प्रश्न की पहचान और गद्यांश के साथ पूछे जाने वाले राजस्थानी भाषा-साहित्य के तथ्य एक जगह हैं। भाषा खंड में गद्यांश से सीधे अंक मिलते हैं, इसलिए यह हिंदी का सबसे भरोसेमंद स्कोरिंग हिस्सा है।

  • कक्षा 6–10 पठन-बोध स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें
21 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Rajasthani languages — Wikipedia

अपठित गद्यांश क्या है और परीक्षा इससे क्या जाँचती है

अपठित गद्यांश (Unseen Passage) वह गद्य-अंश है जो पाठ्यपुस्तक से बाहर का होता है और परीक्षार्थी ने पहले नहीं पढ़ा होता। इसके प्रश्न याद की हुई जानकारी नहीं, बल्कि पठन-बोध (Reading Comprehension) जाँचते हैं — यानी पढ़कर मुख्य विचार पकड़ना, संदर्भ से शब्द का अर्थ समझना, तथ्य और निष्कर्ष में भेद करना और भाषा के व्याकरणिक रूप पहचानना।

गद्यांश प्रायः शिक्षा, पर्यावरण, श्रम, मानव सभ्यता, नैतिक मूल्य या राजस्थान की संस्कृति जैसे विषयों पर होता है। प्रश्न सामान्यतः सीधे होते हैं, पर विकल्प ऐसे बनाए जाते हैं कि जल्दबाज़ी में पढ़ने वाला 'आधा सही' विकल्प चुन ले। इसलिए उत्तर हमेशा गद्यांश के आधार पर देना है, अपनी राय या सामान्य ज्ञान के आधार पर नहीं।

गद्यांश हल करने की 6-चरण विधि

चरणक्या करेंक्यों
1. पहला पठनपूरा गद्यांश एक बार तेज़ी से पढ़ें, बीच में न रुकेंविषय और लेखक का दृष्टिकोण समझने के लिए
2. प्रश्न पढ़ेंसभी प्रश्न और विकल्प देखेंपता चले कि गद्यांश में क्या खोजना है
3. दूसरा पठनध्यान से पढ़ें; मुख्य वाक्य, संख्या, नाम और कठिन शब्द चिह्नित करेंउत्तर वाले वाक्य जल्दी मिलें
4. उत्तर-स्थल खोजेंहर प्रश्न के लिए संबंधित पंक्ति पर लौटेंयाददाश्त के भरोसे गलती न हो
5. विकल्प काटेंगद्यांश से बाहर की, अति-व्यापक या उलटी बात वाले विकल्प हटाएँ'आधे सही' विकल्प से बचाव
6. शीर्षक/केंद्रीय भाव अंत मेंसभी प्रश्नों के बाद शीर्षक वाला प्रश्न करेंतब तक पूरा आशय साफ़ हो चुका होता है

शीर्षक और केंद्रीय भाव वाले प्रश्न सबसे अंत में करना समय भी बचाता है और सटीकता भी बढ़ाता है।

प्रश्नों के प्रकार और उन्हें हल करने की ट्रिक

प्रश्न का प्रकारकैसे पहचानेंहल करने की ट्रिक
शीर्षक (Title)'उपयुक्त शीर्षक है'संक्षिप्त, पूरे गद्यांश को समेटने वाला; केवल एक अनुच्छेद से जुड़ा या बहुत व्यापक शीर्षक गलत
केंद्रीय भाव / मूल संदेश'मुख्य संदेश', 'प्रमुख विचार'प्रायः पहले या अंतिम वाक्य में; पूरा गद्यांश किस बात को सिद्ध कर रहा है
तथ्यात्मक प्रश्न'गद्यांश के अनुसार…'उत्तर गद्यांश में सीधे लिखा होता है; पंक्ति खोजकर मिलाएँ
असंगत/असत्य कथन'असंगत है', 'नहीं है'हर विकल्प को गद्यांश से मिलाएँ; जो गद्यांश में न हो या उलटा हो वही उत्तर
शब्दार्थ'शब्द का अर्थ है'संदर्भ वाला वाक्य पढ़ें; उपसर्ग-प्रत्यय तोड़ें (बे+घर = बिना घर)
पर्यायवाची/विलोम'समानार्थी', 'विपरीतार्थक'शब्द का तत्सम रूप सोचें; विलोम में उपसर्ग बदलें (आदर–अनादर)
व्याकरणिक प्रश्नसंधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय, शब्द-भेदगद्यांश का शब्द अलग करके नियम लगाएँ; अर्थ से मदद लें

शब्दार्थ वाले प्रश्न: संदर्भ और शब्द-रचना से अर्थ निकालें

शब्दार्थ के प्रश्न सबसे जल्दी हल होते हैं, बशर्ते शब्द को उसके वाक्य में पढ़ा जाए। 'क्लांति रहित परिश्रम' जैसे प्रयोग में 'रहित' शब्द बताता है कि क्लांति कोई ऐसी चीज़ है जो परिश्रम में बाधा बनती है — यानी थकान। इसी तरह 'बेघर' में 'बे-' (बिना) उपसर्ग है, जैसे बेईमान, बेचैन, बेकार में।

कुछ उपयोगी उपसर्ग: अ/अन (अभाव — अज्ञान, अनादर), निर/निस (रहित — निर्धन, निश्चल), सु (अच्छा — सुगम), दुर/दुस (बुरा/कठिन — दुर्गम, दुष्कर), ना (नहीं — नापसंद), बे (बिना — बेघर)। कुछ प्रत्यय: -ता, -त्व (भाववाचक — मानवता, मनुष्यत्व), -ईय (संबंधी — राष्ट्रीय), -इक (सामाजिक)। उपसर्ग-प्रत्यय पहचानते ही आधे विकल्प अपने आप कट जाते हैं।

गद्यांशों में कभी-कभी राजस्थानी कहावतें और शब्द भी आते हैं। 'करम री सगळै बाजै' में 'सगळै' का अर्थ सर्वत्र (सब जगह) है और 'अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे' में 'अणूतो' का अर्थ अधिक है — अर्थात अधिक धन सुख-शांति छीन लेता है। ऐसे शब्दों में भी पूरी कहावत का भाव समझकर ही अर्थ चुनें।

राजस्थानी साहित्य: प्रमुख रचनाकार और रचनाएँ

रचनारचनाकारयाद रखने योग्य बात
वचनिका अचलदास खीची रीशिवदास गाडणगागरोन के शासक अचलदास खीची के युद्ध का वर्णन
वीर सतसई, वंश भास्करसूर्यमल्ल मीसणबूँदी के राजकवि; वीर रस की डिंगल रचनाएँ
बेलि क्रिसन रुकमणी रीपृथ्वीराज राठौड़ (पीथल)कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित काव्य
चेतावनी रा चूंगट्याकेसरीसिंह बारहठ13 सोरठे; महाराणा फतहसिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में न जाने की प्रेरणा
पाथल अर पीथलकन्हैयालाल सेठियामहाराणा प्रताप और पृथ्वीराज राठौड़ के प्रसंग पर कविता
सैनाणीमेघराज 'मुकुल'हाड़ी रानी द्वारा निशानी के रूप में अपना शीश भेजने की कथा
बादळी, लूचंद्रसिंह बिरकालीमरुस्थल की प्रकृति पर काव्य
बातां री फुलवारी, अलेखूं हिटलरविजयदान देथा (बिज्जी)राजस्थानी लोककथाओं के पुनर्लेखन के लिए प्रसिद्ध
तास रौ घर (नाटक)यादवेन्द्र शर्मा 'चंद्र'राजस्थानी नाटक; परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है

'चेतावनी रा चूंगट्या' (केसरीसिंह बारहठ) और 'पाथल अर पीथल' (कन्हैयालाल सेठिया) — दोनों मेवाड़ के महाराणाओं से जुड़ी रचनाएँ हैं, इसलिए परीक्षा में इनके रचनाकार आपस में न मिलाएँ।[स्रोत 1]

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'पहले प्रश्न, फिर गद्यांश' नहीं — 'पहले एक तेज़ पठन, फिर प्रश्न, फिर ध्यान से पठन' अपनाएँ। और 'असंगत' वाले प्रश्न में जो विकल्प गद्यांश में लिखा ही न हो, वह अपने-आप में संदिग्ध है; उसे पहले जाँचें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपठित गद्यांश का शीर्षक कैसे चुनें?+

शीर्षक छोटा, आकर्षक और पूरे गद्यांश के मुख्य विचार को समेटने वाला होना चाहिए। किसी एक अनुच्छेद या उदाहरण पर आधारित, या विषय से बहुत व्यापक शीर्षक सही नहीं होता।

क्या गद्यांश के प्रश्नों में अपना सामान्य ज्ञान इस्तेमाल करें?+

नहीं। उत्तर वही सही है जो गद्यांश के आधार पर सिद्ध हो। कई बार कोई विकल्प सामान्यतः सत्य होता है, पर गद्यांश में न होने से गलत माना जाता है।

गद्यांश खंड में राजस्थानी साहित्य क्यों पूछा जाता है?+

कई परीक्षाओं के भाषा प्रश्न-पत्रों में गद्यांश के साथ-साथ राजस्थानी भाषा और साहित्य से जुड़े प्रश्न भी शामिल होते हैं, जैसे वीर सतसई, सैनाणी और चेतावनी रा चूंगट्या के रचनाकार। इसलिए प्रमुख राजस्थानी रचनाएँ और रचनाकार याद रखना लाभदायक है।

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आधिकारिक स्रोत

  1. Rajasthani languages — Wikipedia
  2. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 — NCERT