मुख्य सामग्री पर जाएं
REET L1+L2 · हिंदी (भाषा I/II)

अपठित गद्यांश: हल करने की विधि, प्रश्नों के प्रकार और राजस्थानी साहित्य — REET नोट्स

Read this in English →

इस पेज में अपठित गद्यांश को कम समय में सही हल करने की विधि, हर तरह के प्रश्न की पहचान और REET 2024 में गद्यांश के साथ पूछे गए राजस्थानी भाषा-साहित्य के तथ्य एक जगह हैं। भाषा I और II दोनों में गद्यांश से सीधे अंक मिलते हैं, इसलिए यह हिंदी का सबसे भरोसेमंद स्कोरिंग हिस्सा है।

  • REET 2024 में 10 प्रश्न
  • कक्षा 6–10 पठन-बोध स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में इस टॉपिक से जुड़े 10 प्रश्न आए। 3 प्रश्न गद्यांश के शब्दों के अर्थ पर थे — ‘बेघर’ (उपसर्ग ‘बे’ से बना), ‘क्लांति’ (थकान) और राजस्थानी शब्द ‘सगळै’ (सर्वत्र)। एक प्रश्न राजस्थानी कहावत के शब्द ‘अणूतो’ (अधिक) का अर्थ पूछता था। बाकी 6 प्रश्न गद्यांश से बाहर जाकर राजस्थानी साहित्य पर थे — ‘वचनिका अचलदास खीची री’, ‘वीर सतसई’, ‘तास रौ घर’, ‘अलेखूं हिटलर’, ‘सैनाणी’ और ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ के रचनाकार। यानी गद्यांश में संदर्भ से अर्थ निकालने की क्षमता और राजस्थानी भाषा-साहित्य की बुनियादी जानकारी, दोनों जाँची जाती हैं।

अपठित गद्यांश क्या है और REET इससे क्या जाँचती है

अपठित गद्यांश (Unseen Passage) वह गद्य-अंश है जो पाठ्यपुस्तक से बाहर का होता है और परीक्षार्थी ने पहले नहीं पढ़ा होता। इसके प्रश्न याद की हुई जानकारी नहीं, बल्कि पठन-बोध (Reading Comprehension) जाँचते हैं — यानी पढ़कर मुख्य विचार पकड़ना, संदर्भ से शब्द का अर्थ समझना, तथ्य और निष्कर्ष में भेद करना और भाषा के व्याकरणिक रूप पहचानना।

REET में गद्यांश प्रायः शिक्षा, पर्यावरण, श्रम, मानव सभ्यता, नैतिक मूल्य या राजस्थान की संस्कृति जैसे विषयों पर होता है। प्रश्न सामान्यतः सीधे होते हैं, पर विकल्प ऐसे बनाए जाते हैं कि जल्दबाज़ी में पढ़ने वाला ‘आधा सही’ विकल्प चुन ले। इसलिए उत्तर हमेशा गद्यांश के आधार पर देना है, अपनी राय या सामान्य ज्ञान के आधार पर नहीं।

गद्यांश हल करने की 6-चरण विधि

चरणक्या करेंक्यों
1. पहला पठनपूरा गद्यांश एक बार तेज़ी से पढ़ें, बीच में न रुकेंविषय और लेखक का दृष्टिकोण समझने के लिए
2. प्रश्न पढ़ेंसभी प्रश्न और विकल्प देखेंपता चले कि गद्यांश में क्या खोजना है
3. दूसरा पठनध्यान से पढ़ें; मुख्य वाक्य, संख्या, नाम और कठिन शब्द चिह्नित करेंउत्तर वाले वाक्य जल्दी मिलें
4. उत्तर-स्थल खोजेंहर प्रश्न के लिए संबंधित पंक्ति पर लौटेंयाददाश्त के भरोसे गलती न हो
5. विकल्प काटेंगद्यांश से बाहर की, अति-व्यापक या उलटी बात वाले विकल्प हटाएँ‘आधे सही’ विकल्प से बचाव
6. शीर्षक/केंद्रीय भाव अंत मेंसभी प्रश्नों के बाद शीर्षक वाला प्रश्न करेंतब तक पूरा आशय साफ़ हो चुका होता है

शीर्षक और केंद्रीय भाव वाले प्रश्न सबसे अंत में करना समय भी बचाता है और सटीकता भी बढ़ाता है।

प्रश्नों के प्रकार और उन्हें हल करने की ट्रिक

प्रश्न का प्रकारकैसे पहचानेंहल करने की ट्रिक
शीर्षक (Title)‘उपयुक्त शीर्षक है’संक्षिप्त, पूरे गद्यांश को समेटने वाला; केवल एक अनुच्छेद से जुड़ा या बहुत व्यापक शीर्षक गलत
केंद्रीय भाव / मूल संदेश‘मुख्य संदेश’, ‘प्रमुख विचार’प्रायः पहले या अंतिम वाक्य में; पूरा गद्यांश किस बात को सिद्ध कर रहा है
तथ्यात्मक प्रश्न‘गद्यांश के अनुसार…’उत्तर गद्यांश में सीधे लिखा होता है; पंक्ति खोजकर मिलाएँ
असंगत/असत्य कथन‘असंगत है’, ‘नहीं है’हर विकल्प को गद्यांश से मिलाएँ; जो गद्यांश में न हो या उलटा हो वही उत्तर
शब्दार्थ‘शब्द का अर्थ है’संदर्भ वाला वाक्य पढ़ें; उपसर्ग-प्रत्यय तोड़ें (बे+घर = बिना घर)
पर्यायवाची/विलोम‘समानार्थी’, ‘विपरीतार्थक’शब्द का तत्सम रूप सोचें; विलोम में उपसर्ग बदलें (आदर–अनादर)
व्याकरणिक प्रश्नसंधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय, शब्द-भेदगद्यांश का शब्द अलग करके नियम लगाएँ; अर्थ से मदद लें

शब्दार्थ वाले प्रश्न: संदर्भ और शब्द-रचना से अर्थ निकालें

शब्दार्थ के प्रश्न सबसे जल्दी हल होते हैं, बशर्ते शब्द को उसके वाक्य में पढ़ा जाए। ‘क्लांति रहित परिश्रम’ जैसे प्रयोग में ‘रहित’ शब्द बताता है कि क्लांति कोई ऐसी चीज़ है जो परिश्रम में बाधा बनती है — यानी थकान। इसी तरह ‘बेघर’ में ‘बे-’ (बिना) उपसर्ग है, जैसे बेईमान, बेचैन, बेकार में।

कुछ उपयोगी उपसर्ग: अ/अन (अभाव — अज्ञान, अनादर), निर/निस (रहित — निर्धन, निश्चल), सु (अच्छा — सुगम), दुर/दुस (बुरा/कठिन — दुर्गम, दुष्कर), ना (नहीं — नापसंद), बे (बिना — बेघर)। कुछ प्रत्यय: -ता, -त्व (भाववाचक — मानवता, मनुष्यत्व), -ईय (संबंधी — राष्ट्रीय), -इक (सामाजिक)। उपसर्ग-प्रत्यय पहचानते ही आधे विकल्प अपने आप कट जाते हैं।

REET के गद्यांशों में राजस्थानी कहावतें और शब्द भी आते हैं। ‘करम री सगळै बाजै’ में ‘सगळै’ का अर्थ सर्वत्र (सब जगह) है और ‘अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे’ में ‘अणूतो’ का अर्थ अधिक है — अर्थात अधिक धन सुख-शांति छीन लेता है। ऐसे शब्दों में भी पूरी कहावत का भाव समझकर ही अर्थ चुनें।

राजस्थानी साहित्य: REET में पूछे गए रचनाकार और रचनाएँ

रचनारचनाकारयाद रखने योग्य बात
वचनिका अचलदास खीची रीशिवदास गाडणगागरोन के शासक अचलदास खीची के युद्ध का वर्णन
वीर सतसई, वंश भास्करसूर्यमल्ल मीसणबूँदी के राजकवि; वीर रस की डिंगल रचनाएँ
बेलि क्रिसन रुकमणी रीपृथ्वीराज राठौड़ (पीथल)कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित काव्य
चेतावनी रा चूंगट्याकेसरीसिंह बारहठ13 सोरठे; महाराणा फतहसिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में न जाने की प्रेरणा
पाथल अर पीथलकन्हैयालाल सेठियामहाराणा प्रताप और पृथ्वीराज राठौड़ के प्रसंग पर कविता
सैनाणीमेघराज ‘मुकुल’हाड़ी रानी द्वारा निशानी के रूप में अपना शीश भेजने की कथा
बादळी, लूचंद्रसिंह बिरकालीमरुस्थल की प्रकृति पर काव्य
बातां री फुलवारी, अलेखूं हिटलरविजयदान देथा (बिज्जी)राजस्थानी लोककथाओं के पुनर्लेखन के लिए प्रसिद्ध
तास रौ घर (नाटक)यादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’राजस्थानी नाटक; REET 2024 में पूछा गया

‘चेतावनी रा चूंगट्या’ (केसरीसिंह बारहठ) और ‘पाथल अर पीथल’ (कन्हैयालाल सेठिया) — दोनों मेवाड़ के महाराणाओं से जुड़ी रचनाएँ हैं, इसलिए परीक्षा में इनके रचनाकार आपस में न मिलाएँ।[स्रोत 1]

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि (कक्षा 3–5)

छोटा अनुच्छेद पढ़वाकर हर बच्चे से एक शीर्षक लिखवाएँ; फिर चर्चा करें कि कौन-सा शीर्षक पूरे अनुच्छेद पर लागू होता है और कौन-सा केवल एक वाक्य पर।

गतिविधि (कक्षा 6–8)

समूहों को गद्यांश देकर तथ्यात्मक, अनुमान-आधारित और शब्दार्थ — तीनों तरह के प्रश्न बनवाएँ और दूसरे समूह से हल करवाएँ। घर से एक राजस्थानी कहावत लाकर उसका हिंदी अर्थ बताने की गतिविधि मातृभाषा और मानक हिंदी के बीच सेतु बनाती है।

शिक्षण सामग्री

बाल-पत्रिकाओं और अख़बार के छोटे अनुच्छेद, शब्दकोश, उपसर्ग-प्रत्यय चार्ट, स्थानीय कहावतों की कक्षा-सूची।

आम भ्रांतियाँ

बच्चे अपनी राय या सामान्य ज्ञान से उत्तर लिखते हैं और कठिन शब्द पर अटककर पढ़ना छोड़ देते हैं। बार-बार पूछें — ‘गद्यांश में यह कहाँ लिखा है?’ और शब्दकोश से पहले संदर्भ से अर्थ का अनुमान लगवाएँ।

आकलन का विचार

अपरिचित अनुच्छेद पर पाँच प्रश्न दें — एक शीर्षक, एक केंद्रीय भाव, दो तथ्यात्मक और एक शब्दार्थ; उत्तर के साथ गद्यांश की वह पंक्ति भी रेखांकित करवाएँ जहाँ से उत्तर मिला।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

‘पहले प्रश्न, फिर गद्यांश’ नहीं — ‘पहले एक तेज़ पठन, फिर प्रश्न, फिर ध्यान से पठन’ अपनाएँ। और ‘असंगत’ वाले प्रश्न में जो विकल्प गद्यांश में लिखा ही न हो, वह अपने-आप में संदिग्ध है; उसे पहले जाँचें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न-संख्या 31 से 34 तक के उत्तर दीजिए : बहुत समय पहले, एक मनुष्य ने अकस्मात् दो पत्थरों को इकट्ठा कर रगड़ा और आग पैदा की । इस प्रकार उसने एक लाभदायक खोज की; परन्तु हम लोग इस मनुष्य का नाम नहीं जानते हैं । मनुष्य एक बेघर, विचरने वाला प्राणी था जो कि अपने खाने की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान जाता रहता था । किसी ने खेती-बाड़ी की खोज की । अब उसे कोई दु:ख नहीं रहा । इससे मनुष्य के रहने के ढंग में एक महान परिवर्तन आया । वह एक किसान बन गया और अपने खाने के लिए अनाज उगाने लगा । अब उसे भोजन की खोज में इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं थी । काफी समय के पश्चात् किसी ने पहिये का आविष्कार किया ।

प्रश्न 34

गद्यांश में प्रयुक्त ‘बेघर’ शब्द का अर्थ है

  1. Aजिसके पास दो घर हों
  2. Bजिसका कोई घर ना हो
  3. Cविशाल घर वाला
  4. Dऊँची छत वाला घर

व्याख्या

‘बेघर’ शब्द ‘बे’ (रहित/बिना) + ‘घर’ से बना है, जिसका अर्थ है — जिसका कोई घर न हो। गद्यांश में भी मनुष्य को भोजन की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान भटकने वाला बेघर प्राणी बताया गया है। अतः विकल्प (B) सही है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न-संख्या 51 से 58 तक के उत्तर दीजिए । अधिकतर लोग विष्णु को पालनकर्त्ता मानकर उनकी उपासना करते हैं; विष्णु पालन करते हैं तथा महेश संहार करते हैं । इस पर विश्वास करके यदि कृषक को ही विष्णु कहें तो कोई अतिशयोक्ति न होगी । आकाश में उड़ने वाले स्वतंत्र पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाला मानव, यहाँ तक कि जलचर भी कृषकों पर ही निर्भर है । तपस्या भरा त्याग, अभिमान रहित उदारता और क्लांति रहित परिश्रम का यदि चित्र देखना है तो आप भारतीय कृषक को देखिए । वह स्वयं न खाकर दूसरों को खिलाता है, स्वयं न पहनकर दूसरों को वस्त्र देता है । उसके अनुपम त्याग की समानता कोई नहीं कर सकता है । भारतीय कृषक की आकृति में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों कोई वीतराग संन्यासी हो । जिसे न दु:ख में दु:ख और न सुख में सुख की कामना है; जिसे न अज्ञान से आत्म-ग्लानि होती है और न दरिद्रता से दीनता । यह वह कर्मयोगी है जो फल प्राप्ति की इच्छा से रहित होकर कर्म में तल्लीन रहता है ।

प्रश्न 58

गद्यांश में प्रयुक्त ‘क्लांति’ शब्द का अर्थ है

  1. Aउत्साह
  2. Bओज
  3. Cथकान
  4. Dप्रेम

व्याख्या

‘क्लांति’ का अर्थ है थकान या थकावट। गद्यांश में ‘क्लांति रहित परिश्रम’ का अर्थ है — बिना थके किया गया परिश्रम। ‘उत्साह’ और ‘ओज’ इसके लगभग विपरीत भाव हैं।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 41 से 46 तक के उत्तर लिखिए : उपभोक्तावादी संस्कृति सामंती संस्कृति का रूप नहीं है, बल्कि यह उपभोग के साधनों की प्रचुरता का प्रमाण है । पहले यह साधन बड़े-बड़े पूँजीपतियों को उपलब्ध होते थे क्योंकि लोगों का मानना था कि ‘करम री सगळै बाजै’ । वे श्रम में विश्वास नहीं रखते थे । आज आम आदमी को भी सभी सुविधाएँ मिलने लगी हैं । पहले सामंती लोग ही मोटरकार और हवाई-जहाज की यात्रा का आनन्द ले पाते थे, पर अब मध्यमवर्गीय व्यक्ति भी इन सबका सुख ले रहा है । अत: यह सामंती संस्कृति का विकसित रूप नहीं है, बल्कि जन-जन की समृद्धि का प्रतीक है ।

प्रश्न 44

गद्यांश में प्रयुक्त राजस्थानी शब्द ‘सगळै’ का अर्थ है –

  1. Aसर्वत्र
  2. Bगंदा
  3. Cगलने योग्य
  4. Dभाग्य

व्याख्या

राजस्थानी में ‘सगळै’ का अर्थ है ‘सब जगह/सबमें’ अर्थात् सर्वत्र। ‘करम री सगळै बाजै’ का भाव है कि कर्म (भाग्य/किस्मत) का ही सब जगह बोलबाला है। अतः सही अर्थ ‘सर्वत्र’ है।

प्रश्न 57

‘वचनिका अचलदास खीची री’ रचना के रचयिता हैं –

  1. Aमीरा बाई
  2. Bचंद बरदाई
  3. Cशिवदास गाडण
  4. Dपृथ्वी राज राठौड़

व्याख्या

‘वचनिका अचलदास खीची री’ राजस्थानी साहित्य की प्रसिद्ध वचनिका है, जिसकी रचना शिवदास गाडण ने की। इसमें गागरोन के शासक अचलदास खीची के युद्ध का वर्णन है। ‘पृथ्वीराज रासो’ चंद बरदाई की तथा ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ पृथ्वीराज राठौड़ की रचना है।

प्रश्न 68

राजस्थानी काव्य की प्रसिद्ध कृति ‘वीर सतसई’ किस कवि की रचना है ?

  1. Aकन्हैया लाल सेठिया
  2. Bपृथ्वीराज राठौड़
  3. Cसंकरदान सामोर
  4. Dसूर्यमल्ल मीसण

व्याख्या

‘वीर सतसई’ राजस्थानी (डिंगल) काव्य की प्रसिद्ध कृति है, जिसकी रचना बूँदी के राजकवि सूर्यमल्ल मीसण ने की। पृथ्वीराज राठौड़ ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ के रचयिता हैं।

प्रश्न 89

राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार यादवेन्द्र शर्मा चंद्र द्वारा लिखित नाटक है-

  1. Aपन्नाधाय
  2. Bढोला मरवण
  3. Cतास रौ घर
  4. Dधरमजुद्ध

व्याख्या

राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार यादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’ द्वारा लिखित नाटक ‘तास रौ घर’ है। उन्होंने उपन्यासों व कहानियों के साथ कई नाटक भी लिखे। आधिकारिक उत्तर-कुंजी में भी विकल्प (C) सही माना गया है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 45 से 50 तक के उत्तर दीजिए : आज हमारा सामाजिक ढाँचा चरमराने लगा है । भाई-बहिन के संबंधों में भी प्रेम तिरोहित होता जा रहा है । निकम्मे रहकर मनुष्यों की चिन्तन-शक्ति थक गई है । बिस्तरों और आसनों पर सोते-सोते मन के घोड़े हार गये हैं । सारा जीवन निचुड़ चुका है । स्वप्न पुराने हो चुके हैं । आज मनुष्य पैसा कमाने की मशीन बन चुका है । सारा समाज अर्थ प्रधान होता जा रहा है । सिर्फ धन और धन कमाने की लालसा के चलते व्यक्ति यह भूल बैठा है कि- ‘अणूतो धन सुख सान्ति ने खोस लेवे ।’ भौतिक वस्तुओं को पाने की चाहना अग्नि सदृश सदैव प्रज्वलित रहती है ।

प्रश्न 49

गद्यांश में प्रयुक्त ‘अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे’ कहावत में ‘अणूतो’ शब्द का हिन्दी अर्थ है

  1. Aअनूठा
  2. Bअधिक
  3. Cअद्भुत
  4. Dअल्प

व्याख्या

राजस्थानी शब्द ‘अणूतो’ का अर्थ है बहुत अधिक या हद से ज़्यादा। ‘अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे’ का अर्थ है— अधिक धन सुख-शांति छीन लेता है। अतः ‘अणूतो’ का हिन्दी अर्थ ‘अधिक’ है।

प्रश्न 57

निम्नलिखित में से ‘विजयदान देथा’ की रचना है

  1. Aरणमल्ल छंद
  2. Bअलेखूं हिटलर
  3. Cनुकती-दाणा
  4. Dआज रौ सरवण

व्याख्या

‘अलेखूं हिटलर’ राजस्थानी के प्रसिद्ध कथाकार विजयदान देथा (बिज्जी) की रचना है। उनकी राजस्थानी रचनाओं में ‘बातां री फुलवारी’, ‘रूंख’ और ‘अलेखूं हिटलर’ प्रमुख हैं। अतः उत्तर (B) है।

प्रश्न 63

‘सैनाणी’ कविता के रचनाकार हैं

  1. Aमेघराज ‘मुकुल’
  2. Bचन्द्र सिंह
  3. Cरामनाथ कविया
  4. Dसत्यप्रकाश जोशी

व्याख्या

‘सैनाणी’ राजस्थानी की प्रसिद्ध वीर-रस कविता है, जिसके रचनाकार मेघराज ‘मुकुल’ हैं। यह कविता हाड़ी रानी द्वारा अपने पति को सैनाणी (निशानी) के रूप में अपना शीश भेजने की कथा पर आधारित है।

प्रश्न 65

‘चेतावनी रा चूंगट्या’ रचना के रचनाकार हैं

  1. Aसूर्यमल्ल मीसण
  2. Bकेसरीसिंह बारहठ
  3. Cडॉ. नारायणसिंह भाटी
  4. Dबावजी चतुरसिंह

व्याख्या

‘चेतावनी रा चूंगट्या’ केसरीसिंह बारहठ की प्रसिद्ध रचना है। इसमें 13 सोरठों के माध्यम से उदयपुर के महाराणा फतहसिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में न जाने के लिए प्रेरित किया गया था। सूर्यमल्ल मीसण ‘वंश भास्कर’ और ‘वीर सतसई’ के रचनाकार हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

अपठित गद्यांश के प्रश्न मुख्य रूप से किस क्षमता का आकलन करते हैं?

  1. Aरटने की क्षमता
  2. Bसुलेख की क्षमता
  3. Cपठन-बोध की क्षमता
  4. Dउच्चारण की क्षमता

व्याख्या

अपठित गद्यांश पाठ्यपुस्तक से बाहर का होता है, इसलिए इससे याद की हुई जानकारी नहीं, बल्कि पढ़कर समझने (पठन-बोध) की क्षमता जाँची जाती है।

प्रश्न 2

‘निर्धन’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग का अर्थ है —

  1. Aअच्छा
  2. Bसहित
  3. Cरहित
  4. Dअधिक

व्याख्या

‘निर्’ उपसर्ग ‘रहित/बिना’ का अर्थ देता है, इसलिए निर्धन = धन से रहित। ‘सु’ अच्छा और ‘स’ सहित का अर्थ देता है।

प्रश्न 3

गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक चुनते समय सबसे महत्वपूर्ण कसौटी है —

  1. Aशीर्षक पूरे गद्यांश के मुख्य विचार को समेटे
  2. Bशीर्षक गद्यांश के केवल पहले वाक्य से लिया गया हो
  3. Cशीर्षक लंबा और विस्तृत हो
  4. Dशीर्षक में कठिन तत्सम शब्द हों

व्याख्या

अच्छा शीर्षक संक्षिप्त होता है और पूरे गद्यांश के केंद्रीय भाव को व्यक्त करता है। केवल एक वाक्य या अंश पर आधारित शीर्षक अधूरा होता है।

प्रश्न 4

‘क्लांति’ शब्द का विलोम है —

  1. Aथकान
  2. Bस्फूर्ति
  3. Cश्रम
  4. Dक्लेश

व्याख्या

‘क्लांति’ का अर्थ थकान है, इसलिए इसका विपरीत भाव स्फूर्ति (ताज़गी) है। ‘थकान’ इसका पर्याय है, जबकि ‘श्रम’ और ‘क्लेश’ विपरीत अर्थ नहीं देते।

प्रश्न 5

‘वीर सतसई’ और ‘वंश भास्कर’ के रचनाकार हैं —

  1. Aपृथ्वीराज राठौड़
  2. Bसूर्यमल्ल मीसण
  3. Cकेसरीसिंह बारहठ
  4. Dशिवदास गाडण

व्याख्या

बूँदी के राजकवि सूर्यमल्ल मीसण ने ‘वीर सतसई’ और ‘वंश भास्कर’ की रचना की। पृथ्वीराज राठौड़ ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ के रचनाकार हैं।

प्रश्न 6

‘पाथल अर पीथल’ कविता के रचनाकार हैं —

  1. Aकन्हैयालाल सेठिया
  2. Bमेघराज ‘मुकुल’
  3. Cचंद्रसिंह बिरकाली
  4. Dविजयदान देथा

व्याख्या

‘पाथल अर पीथल’ कन्हैयालाल सेठिया की प्रसिद्ध राजस्थानी कविता है। मेघराज ‘मुकुल’ ‘सैनाणी’ के और चंद्रसिंह बिरकाली ‘बादळी’ के रचनाकार हैं।

प्रश्न 7

‘बादळी’ और ‘लू’ किस राजस्थानी कवि की रचनाएँ हैं?

  1. Aसत्यप्रकाश जोशी
  2. Bयादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’
  3. Cसूर्यमल्ल मीसण
  4. Dचंद्रसिंह बिरकाली

व्याख्या

‘बादळी’ और ‘लू’ प्रकृति-कवि चंद्रसिंह बिरकाली की प्रसिद्ध राजस्थानी काव्य-रचनाएँ हैं, जिनमें मरुस्थल की प्रकृति का चित्रण है।

प्रश्न 8

गद्यांश पर आधारित ‘असंगत कथन’ वाले प्रश्न में सबसे पहले कौन-सा विकल्प संदिग्ध माना जाना चाहिए?

  1. Aजो गद्यांश में शब्दशः लिखा हो
  2. Bजो गद्यांश की किसी बात के उलट हो या उसमें लिखा ही न हो
  3. Cजो सबसे छोटा हो
  4. Dजो सबसे अंत में दिया गया हो

व्याख्या

असंगत कथन वह है जो गद्यांश से मेल न खाए — या तो गद्यांश की बात के उलट हो या उसमें कहीं कहा ही न गया हो। विकल्प की लंबाई या क्रम से उत्तर तय नहीं होता।

प्रश्न 9

कक्षा 5 की शिक्षिका चाहती हैं कि बच्चे कठिन शब्दों का अर्थ शब्दकोश देखने से पहले स्वयं समझने का प्रयास करें। इसके लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि है —

  1. Aआसपास के वाक्यों के संदर्भ से अर्थ का अनुमान लगवाना
  2. Bशब्दों की सूची रटवाना
  3. Cहर शब्द का अर्थ श्यामपट पर लिख देना
  4. Dशब्दों को पाँच-पाँच बार लिखवाना

व्याख्या

संदर्भ से अर्थ का अनुमान लगवाने से बच्चों में स्वतंत्र पठन-बोध की क्षमता विकसित होती है। रटवाना या अर्थ सीधे बता देना बच्चों को निष्क्रिय बनाता है।

प्रश्न 10

अपठित गद्यांश हल करने की दृष्टि से कौन-सा क्रम सबसे उपयुक्त है?

  1. Aशीर्षक वाला प्रश्न सबसे पहले, फिर गद्यांश पढ़ना
  2. Bगद्यांश का केवल अंतिम अनुच्छेद पढ़ना
  3. Cकेवल प्रश्न पढ़कर अनुमान से उत्तर देना
  4. Dगद्यांश का तेज़ पठन → प्रश्न पढ़ना → ध्यान से पुनः पठन → शीर्षक अंत में

व्याख्या

पहले तेज़ पठन से विषय समझ आता है, फिर प्रश्न पढ़कर ध्यानपूर्वक पठन से उत्तर-स्थल मिलते हैं। शीर्षक अंत में करने पर पूरे गद्यांश का आशय स्पष्ट रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में अपठित गद्यांश से कितने प्रश्न आते हैं?+

प्रश्नों की संख्या हर पाली में बदलती है। REET 2024 में भाषा I/II (30-30 प्रश्न) में गद्यांश और उससे जुड़े शब्दार्थ के प्रश्न आए, और इसी खंड के साथ राजस्थानी साहित्य के प्रश्न भी पूछे गए। इस पेज से जुड़े कुल 10 प्रश्न थे।

अपठित गद्यांश का शीर्षक कैसे चुनें?+

शीर्षक छोटा, आकर्षक और पूरे गद्यांश के मुख्य विचार को समेटने वाला होना चाहिए। किसी एक अनुच्छेद या उदाहरण पर आधारित, या विषय से बहुत व्यापक शीर्षक सही नहीं होता।

क्या गद्यांश के प्रश्नों में अपना सामान्य ज्ञान इस्तेमाल करें?+

नहीं। उत्तर वही सही है जो गद्यांश के आधार पर सिद्ध हो। कई बार कोई विकल्प सामान्यतः सत्य होता है, पर गद्यांश में न होने से गलत माना जाता है।

REET 2024 में गद्यांश खंड में राजस्थानी साहित्य क्यों पूछा गया?+

REET 2024 के भाषा प्रश्न-पत्र में राजस्थानी भाषा और साहित्य से जुड़े प्रश्न भी शामिल थे, जैसे वीर सतसई, सैनाणी और चेतावनी रा चूंगट्या के रचनाकार। इसलिए प्रमुख राजस्थानी रचनाएँ और रचनाकार याद रखना लाभदायक है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. BSER — REET 2024 आधिकारिक प्रश्न-पत्र व अंतिम उत्तर-कुंजी (मूल PDF; बोर्ड पोर्टल पर अब उपलब्ध नहीं)
  2. Rajasthani languages — Wikipedia
  3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 — NCERT

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए