अपठित गद्यांश: हल करने की विधि, प्रश्नों के प्रकार और राजस्थानी साहित्य — REET नोट्स
इस पेज में अपठित गद्यांश को कम समय में सही हल करने की विधि, हर तरह के प्रश्न की पहचान और REET 2024 में गद्यांश के साथ पूछे गए राजस्थानी भाषा-साहित्य के तथ्य एक जगह हैं। भाषा I और II दोनों में गद्यांश से सीधे अंक मिलते हैं, इसलिए यह हिंदी का सबसे भरोसेमंद स्कोरिंग हिस्सा है।
- REET 2024 में 10 प्रश्न
- कक्षा 6–10 पठन-बोध स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से जुड़े 10 प्रश्न आए। 3 प्रश्न गद्यांश के शब्दों के अर्थ पर थे — ‘बेघर’ (उपसर्ग ‘बे’ से बना), ‘क्लांति’ (थकान) और राजस्थानी शब्द ‘सगळै’ (सर्वत्र)। एक प्रश्न राजस्थानी कहावत के शब्द ‘अणूतो’ (अधिक) का अर्थ पूछता था। बाकी 6 प्रश्न गद्यांश से बाहर जाकर राजस्थानी साहित्य पर थे — ‘वचनिका अचलदास खीची री’, ‘वीर सतसई’, ‘तास रौ घर’, ‘अलेखूं हिटलर’, ‘सैनाणी’ और ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ के रचनाकार। यानी गद्यांश में संदर्भ से अर्थ निकालने की क्षमता और राजस्थानी भाषा-साहित्य की बुनियादी जानकारी, दोनों जाँची जाती हैं।
अपठित गद्यांश क्या है और REET इससे क्या जाँचती है
अपठित गद्यांश (Unseen Passage) वह गद्य-अंश है जो पाठ्यपुस्तक से बाहर का होता है और परीक्षार्थी ने पहले नहीं पढ़ा होता। इसके प्रश्न याद की हुई जानकारी नहीं, बल्कि पठन-बोध (Reading Comprehension) जाँचते हैं — यानी पढ़कर मुख्य विचार पकड़ना, संदर्भ से शब्द का अर्थ समझना, तथ्य और निष्कर्ष में भेद करना और भाषा के व्याकरणिक रूप पहचानना।
REET में गद्यांश प्रायः शिक्षा, पर्यावरण, श्रम, मानव सभ्यता, नैतिक मूल्य या राजस्थान की संस्कृति जैसे विषयों पर होता है। प्रश्न सामान्यतः सीधे होते हैं, पर विकल्प ऐसे बनाए जाते हैं कि जल्दबाज़ी में पढ़ने वाला ‘आधा सही’ विकल्प चुन ले। इसलिए उत्तर हमेशा गद्यांश के आधार पर देना है, अपनी राय या सामान्य ज्ञान के आधार पर नहीं।
गद्यांश हल करने की 6-चरण विधि
| चरण | क्या करें | क्यों |
|---|---|---|
| 1. पहला पठन | पूरा गद्यांश एक बार तेज़ी से पढ़ें, बीच में न रुकें | विषय और लेखक का दृष्टिकोण समझने के लिए |
| 2. प्रश्न पढ़ें | सभी प्रश्न और विकल्प देखें | पता चले कि गद्यांश में क्या खोजना है |
| 3. दूसरा पठन | ध्यान से पढ़ें; मुख्य वाक्य, संख्या, नाम और कठिन शब्द चिह्नित करें | उत्तर वाले वाक्य जल्दी मिलें |
| 4. उत्तर-स्थल खोजें | हर प्रश्न के लिए संबंधित पंक्ति पर लौटें | याददाश्त के भरोसे गलती न हो |
| 5. विकल्प काटें | गद्यांश से बाहर की, अति-व्यापक या उलटी बात वाले विकल्प हटाएँ | ‘आधे सही’ विकल्प से बचाव |
| 6. शीर्षक/केंद्रीय भाव अंत में | सभी प्रश्नों के बाद शीर्षक वाला प्रश्न करें | तब तक पूरा आशय साफ़ हो चुका होता है |
शीर्षक और केंद्रीय भाव वाले प्रश्न सबसे अंत में करना समय भी बचाता है और सटीकता भी बढ़ाता है।
प्रश्नों के प्रकार और उन्हें हल करने की ट्रिक
| प्रश्न का प्रकार | कैसे पहचानें | हल करने की ट्रिक |
|---|---|---|
| शीर्षक (Title) | ‘उपयुक्त शीर्षक है’ | संक्षिप्त, पूरे गद्यांश को समेटने वाला; केवल एक अनुच्छेद से जुड़ा या बहुत व्यापक शीर्षक गलत |
| केंद्रीय भाव / मूल संदेश | ‘मुख्य संदेश’, ‘प्रमुख विचार’ | प्रायः पहले या अंतिम वाक्य में; पूरा गद्यांश किस बात को सिद्ध कर रहा है |
| तथ्यात्मक प्रश्न | ‘गद्यांश के अनुसार…’ | उत्तर गद्यांश में सीधे लिखा होता है; पंक्ति खोजकर मिलाएँ |
| असंगत/असत्य कथन | ‘असंगत है’, ‘नहीं है’ | हर विकल्प को गद्यांश से मिलाएँ; जो गद्यांश में न हो या उलटा हो वही उत्तर |
| शब्दार्थ | ‘शब्द का अर्थ है’ | संदर्भ वाला वाक्य पढ़ें; उपसर्ग-प्रत्यय तोड़ें (बे+घर = बिना घर) |
| पर्यायवाची/विलोम | ‘समानार्थी’, ‘विपरीतार्थक’ | शब्द का तत्सम रूप सोचें; विलोम में उपसर्ग बदलें (आदर–अनादर) |
| व्याकरणिक प्रश्न | संधि, समास, उपसर्ग, प्रत्यय, शब्द-भेद | गद्यांश का शब्द अलग करके नियम लगाएँ; अर्थ से मदद लें |
शब्दार्थ वाले प्रश्न: संदर्भ और शब्द-रचना से अर्थ निकालें
शब्दार्थ के प्रश्न सबसे जल्दी हल होते हैं, बशर्ते शब्द को उसके वाक्य में पढ़ा जाए। ‘क्लांति रहित परिश्रम’ जैसे प्रयोग में ‘रहित’ शब्द बताता है कि क्लांति कोई ऐसी चीज़ है जो परिश्रम में बाधा बनती है — यानी थकान। इसी तरह ‘बेघर’ में ‘बे-’ (बिना) उपसर्ग है, जैसे बेईमान, बेचैन, बेकार में।
कुछ उपयोगी उपसर्ग: अ/अन (अभाव — अज्ञान, अनादर), निर/निस (रहित — निर्धन, निश्चल), सु (अच्छा — सुगम), दुर/दुस (बुरा/कठिन — दुर्गम, दुष्कर), ना (नहीं — नापसंद), बे (बिना — बेघर)। कुछ प्रत्यय: -ता, -त्व (भाववाचक — मानवता, मनुष्यत्व), -ईय (संबंधी — राष्ट्रीय), -इक (सामाजिक)। उपसर्ग-प्रत्यय पहचानते ही आधे विकल्प अपने आप कट जाते हैं।
REET के गद्यांशों में राजस्थानी कहावतें और शब्द भी आते हैं। ‘करम री सगळै बाजै’ में ‘सगळै’ का अर्थ सर्वत्र (सब जगह) है और ‘अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे’ में ‘अणूतो’ का अर्थ अधिक है — अर्थात अधिक धन सुख-शांति छीन लेता है। ऐसे शब्दों में भी पूरी कहावत का भाव समझकर ही अर्थ चुनें।
राजस्थानी साहित्य: REET में पूछे गए रचनाकार और रचनाएँ
| रचना | रचनाकार | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| वचनिका अचलदास खीची री | शिवदास गाडण | गागरोन के शासक अचलदास खीची के युद्ध का वर्णन |
| वीर सतसई, वंश भास्कर | सूर्यमल्ल मीसण | बूँदी के राजकवि; वीर रस की डिंगल रचनाएँ |
| बेलि क्रिसन रुकमणी री | पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) | कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित काव्य |
| चेतावनी रा चूंगट्या | केसरीसिंह बारहठ | 13 सोरठे; महाराणा फतहसिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में न जाने की प्रेरणा |
| पाथल अर पीथल | कन्हैयालाल सेठिया | महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज राठौड़ के प्रसंग पर कविता |
| सैनाणी | मेघराज ‘मुकुल’ | हाड़ी रानी द्वारा निशानी के रूप में अपना शीश भेजने की कथा |
| बादळी, लू | चंद्रसिंह बिरकाली | मरुस्थल की प्रकृति पर काव्य |
| बातां री फुलवारी, अलेखूं हिटलर | विजयदान देथा (बिज्जी) | राजस्थानी लोककथाओं के पुनर्लेखन के लिए प्रसिद्ध |
| तास रौ घर (नाटक) | यादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’ | राजस्थानी नाटक; REET 2024 में पूछा गया |
‘चेतावनी रा चूंगट्या’ (केसरीसिंह बारहठ) और ‘पाथल अर पीथल’ (कन्हैयालाल सेठिया) — दोनों मेवाड़ के महाराणाओं से जुड़ी रचनाएँ हैं, इसलिए परीक्षा में इनके रचनाकार आपस में न मिलाएँ।[स्रोत 1]
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि (कक्षा 3–5)
छोटा अनुच्छेद पढ़वाकर हर बच्चे से एक शीर्षक लिखवाएँ; फिर चर्चा करें कि कौन-सा शीर्षक पूरे अनुच्छेद पर लागू होता है और कौन-सा केवल एक वाक्य पर।
गतिविधि (कक्षा 6–8)
समूहों को गद्यांश देकर तथ्यात्मक, अनुमान-आधारित और शब्दार्थ — तीनों तरह के प्रश्न बनवाएँ और दूसरे समूह से हल करवाएँ। घर से एक राजस्थानी कहावत लाकर उसका हिंदी अर्थ बताने की गतिविधि मातृभाषा और मानक हिंदी के बीच सेतु बनाती है।
शिक्षण सामग्री
बाल-पत्रिकाओं और अख़बार के छोटे अनुच्छेद, शब्दकोश, उपसर्ग-प्रत्यय चार्ट, स्थानीय कहावतों की कक्षा-सूची।
आम भ्रांतियाँ
बच्चे अपनी राय या सामान्य ज्ञान से उत्तर लिखते हैं और कठिन शब्द पर अटककर पढ़ना छोड़ देते हैं। बार-बार पूछें — ‘गद्यांश में यह कहाँ लिखा है?’ और शब्दकोश से पहले संदर्भ से अर्थ का अनुमान लगवाएँ।
आकलन का विचार
अपरिचित अनुच्छेद पर पाँच प्रश्न दें — एक शीर्षक, एक केंद्रीय भाव, दो तथ्यात्मक और एक शब्दार्थ; उत्तर के साथ गद्यांश की वह पंक्ति भी रेखांकित करवाएँ जहाँ से उत्तर मिला।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
‘पहले प्रश्न, फिर गद्यांश’ नहीं — ‘पहले एक तेज़ पठन, फिर प्रश्न, फिर ध्यान से पठन’ अपनाएँ। और ‘असंगत’ वाले प्रश्न में जो विकल्प गद्यांश में लिखा ही न हो, वह अपने-आप में संदिग्ध है; उसे पहले जाँचें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 34
गद्यांश में प्रयुक्त ‘बेघर’ शब्द का अर्थ है
- Aजिसके पास दो घर हों
- Bजिसका कोई घर ना हो
- Cविशाल घर वाला
- Dऊँची छत वाला घर
व्याख्या
‘बेघर’ शब्द ‘बे’ (रहित/बिना) + ‘घर’ से बना है, जिसका अर्थ है — जिसका कोई घर न हो। गद्यांश में भी मनुष्य को भोजन की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान भटकने वाला बेघर प्राणी बताया गया है। अतः विकल्प (B) सही है।
प्रश्न 58
गद्यांश में प्रयुक्त ‘क्लांति’ शब्द का अर्थ है
- Aउत्साह
- Bओज
- Cथकान
- Dप्रेम
व्याख्या
‘क्लांति’ का अर्थ है थकान या थकावट। गद्यांश में ‘क्लांति रहित परिश्रम’ का अर्थ है — बिना थके किया गया परिश्रम। ‘उत्साह’ और ‘ओज’ इसके लगभग विपरीत भाव हैं।
प्रश्न 44
गद्यांश में प्रयुक्त राजस्थानी शब्द ‘सगळै’ का अर्थ है –
- Aसर्वत्र
- Bगंदा
- Cगलने योग्य
- Dभाग्य
व्याख्या
राजस्थानी में ‘सगळै’ का अर्थ है ‘सब जगह/सबमें’ अर्थात् सर्वत्र। ‘करम री सगळै बाजै’ का भाव है कि कर्म (भाग्य/किस्मत) का ही सब जगह बोलबाला है। अतः सही अर्थ ‘सर्वत्र’ है।
प्रश्न 57
‘वचनिका अचलदास खीची री’ रचना के रचयिता हैं –
- Aमीरा बाई
- Bचंद बरदाई
- Cशिवदास गाडण
- Dपृथ्वी राज राठौड़
व्याख्या
‘वचनिका अचलदास खीची री’ राजस्थानी साहित्य की प्रसिद्ध वचनिका है, जिसकी रचना शिवदास गाडण ने की। इसमें गागरोन के शासक अचलदास खीची के युद्ध का वर्णन है। ‘पृथ्वीराज रासो’ चंद बरदाई की तथा ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ पृथ्वीराज राठौड़ की रचना है।
प्रश्न 68
राजस्थानी काव्य की प्रसिद्ध कृति ‘वीर सतसई’ किस कवि की रचना है ?
- Aकन्हैया लाल सेठिया
- Bपृथ्वीराज राठौड़
- Cसंकरदान सामोर
- Dसूर्यमल्ल मीसण
व्याख्या
‘वीर सतसई’ राजस्थानी (डिंगल) काव्य की प्रसिद्ध कृति है, जिसकी रचना बूँदी के राजकवि सूर्यमल्ल मीसण ने की। पृथ्वीराज राठौड़ ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ के रचयिता हैं।
प्रश्न 89
राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार यादवेन्द्र शर्मा चंद्र द्वारा लिखित नाटक है-
- Aपन्नाधाय
- Bढोला मरवण
- Cतास रौ घर
- Dधरमजुद्ध
व्याख्या
राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार यादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’ द्वारा लिखित नाटक ‘तास रौ घर’ है। उन्होंने उपन्यासों व कहानियों के साथ कई नाटक भी लिखे। आधिकारिक उत्तर-कुंजी में भी विकल्प (C) सही माना गया है।
प्रश्न 49
गद्यांश में प्रयुक्त ‘अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे’ कहावत में ‘अणूतो’ शब्द का हिन्दी अर्थ है
- Aअनूठा
- Bअधिक
- Cअद्भुत
- Dअल्प
व्याख्या
राजस्थानी शब्द ‘अणूतो’ का अर्थ है बहुत अधिक या हद से ज़्यादा। ‘अणूतो धन सुख-सान्ति ने खोस लेवे’ का अर्थ है— अधिक धन सुख-शांति छीन लेता है। अतः ‘अणूतो’ का हिन्दी अर्थ ‘अधिक’ है।
प्रश्न 57
निम्नलिखित में से ‘विजयदान देथा’ की रचना है
- Aरणमल्ल छंद
- Bअलेखूं हिटलर
- Cनुकती-दाणा
- Dआज रौ सरवण
व्याख्या
‘अलेखूं हिटलर’ राजस्थानी के प्रसिद्ध कथाकार विजयदान देथा (बिज्जी) की रचना है। उनकी राजस्थानी रचनाओं में ‘बातां री फुलवारी’, ‘रूंख’ और ‘अलेखूं हिटलर’ प्रमुख हैं। अतः उत्तर (B) है।
प्रश्न 63
‘सैनाणी’ कविता के रचनाकार हैं
- Aमेघराज ‘मुकुल’
- Bचन्द्र सिंह
- Cरामनाथ कविया
- Dसत्यप्रकाश जोशी
व्याख्या
‘सैनाणी’ राजस्थानी की प्रसिद्ध वीर-रस कविता है, जिसके रचनाकार मेघराज ‘मुकुल’ हैं। यह कविता हाड़ी रानी द्वारा अपने पति को सैनाणी (निशानी) के रूप में अपना शीश भेजने की कथा पर आधारित है।
प्रश्न 65
‘चेतावनी रा चूंगट्या’ रचना के रचनाकार हैं
- Aसूर्यमल्ल मीसण
- Bकेसरीसिंह बारहठ
- Cडॉ. नारायणसिंह भाटी
- Dबावजी चतुरसिंह
व्याख्या
‘चेतावनी रा चूंगट्या’ केसरीसिंह बारहठ की प्रसिद्ध रचना है। इसमें 13 सोरठों के माध्यम से उदयपुर के महाराणा फतहसिंह को 1903 के दिल्ली दरबार में न जाने के लिए प्रेरित किया गया था। सूर्यमल्ल मीसण ‘वंश भास्कर’ और ‘वीर सतसई’ के रचनाकार हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
अपठित गद्यांश के प्रश्न मुख्य रूप से किस क्षमता का आकलन करते हैं?
- Aरटने की क्षमता
- Bसुलेख की क्षमता
- Cपठन-बोध की क्षमता
- Dउच्चारण की क्षमता
व्याख्या
अपठित गद्यांश पाठ्यपुस्तक से बाहर का होता है, इसलिए इससे याद की हुई जानकारी नहीं, बल्कि पढ़कर समझने (पठन-बोध) की क्षमता जाँची जाती है।
प्रश्न 2
‘निर्धन’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग का अर्थ है —
- Aअच्छा
- Bसहित
- Cरहित
- Dअधिक
व्याख्या
‘निर्’ उपसर्ग ‘रहित/बिना’ का अर्थ देता है, इसलिए निर्धन = धन से रहित। ‘सु’ अच्छा और ‘स’ सहित का अर्थ देता है।
प्रश्न 3
गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक चुनते समय सबसे महत्वपूर्ण कसौटी है —
- Aशीर्षक पूरे गद्यांश के मुख्य विचार को समेटे
- Bशीर्षक गद्यांश के केवल पहले वाक्य से लिया गया हो
- Cशीर्षक लंबा और विस्तृत हो
- Dशीर्षक में कठिन तत्सम शब्द हों
व्याख्या
अच्छा शीर्षक संक्षिप्त होता है और पूरे गद्यांश के केंद्रीय भाव को व्यक्त करता है। केवल एक वाक्य या अंश पर आधारित शीर्षक अधूरा होता है।
प्रश्न 4
‘क्लांति’ शब्द का विलोम है —
- Aथकान
- Bस्फूर्ति
- Cश्रम
- Dक्लेश
व्याख्या
‘क्लांति’ का अर्थ थकान है, इसलिए इसका विपरीत भाव स्फूर्ति (ताज़गी) है। ‘थकान’ इसका पर्याय है, जबकि ‘श्रम’ और ‘क्लेश’ विपरीत अर्थ नहीं देते।
प्रश्न 5
‘वीर सतसई’ और ‘वंश भास्कर’ के रचनाकार हैं —
- Aपृथ्वीराज राठौड़
- Bसूर्यमल्ल मीसण
- Cकेसरीसिंह बारहठ
- Dशिवदास गाडण
व्याख्या
बूँदी के राजकवि सूर्यमल्ल मीसण ने ‘वीर सतसई’ और ‘वंश भास्कर’ की रचना की। पृथ्वीराज राठौड़ ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ के रचनाकार हैं।
प्रश्न 6
‘पाथल अर पीथल’ कविता के रचनाकार हैं —
- Aकन्हैयालाल सेठिया
- Bमेघराज ‘मुकुल’
- Cचंद्रसिंह बिरकाली
- Dविजयदान देथा
व्याख्या
‘पाथल अर पीथल’ कन्हैयालाल सेठिया की प्रसिद्ध राजस्थानी कविता है। मेघराज ‘मुकुल’ ‘सैनाणी’ के और चंद्रसिंह बिरकाली ‘बादळी’ के रचनाकार हैं।
प्रश्न 7
‘बादळी’ और ‘लू’ किस राजस्थानी कवि की रचनाएँ हैं?
- Aसत्यप्रकाश जोशी
- Bयादवेन्द्र शर्मा ‘चंद्र’
- Cसूर्यमल्ल मीसण
- Dचंद्रसिंह बिरकाली
व्याख्या
‘बादळी’ और ‘लू’ प्रकृति-कवि चंद्रसिंह बिरकाली की प्रसिद्ध राजस्थानी काव्य-रचनाएँ हैं, जिनमें मरुस्थल की प्रकृति का चित्रण है।
प्रश्न 8
गद्यांश पर आधारित ‘असंगत कथन’ वाले प्रश्न में सबसे पहले कौन-सा विकल्प संदिग्ध माना जाना चाहिए?
- Aजो गद्यांश में शब्दशः लिखा हो
- Bजो गद्यांश की किसी बात के उलट हो या उसमें लिखा ही न हो
- Cजो सबसे छोटा हो
- Dजो सबसे अंत में दिया गया हो
व्याख्या
असंगत कथन वह है जो गद्यांश से मेल न खाए — या तो गद्यांश की बात के उलट हो या उसमें कहीं कहा ही न गया हो। विकल्प की लंबाई या क्रम से उत्तर तय नहीं होता।
प्रश्न 9
कक्षा 5 की शिक्षिका चाहती हैं कि बच्चे कठिन शब्दों का अर्थ शब्दकोश देखने से पहले स्वयं समझने का प्रयास करें। इसके लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि है —
- Aआसपास के वाक्यों के संदर्भ से अर्थ का अनुमान लगवाना
- Bशब्दों की सूची रटवाना
- Cहर शब्द का अर्थ श्यामपट पर लिख देना
- Dशब्दों को पाँच-पाँच बार लिखवाना
व्याख्या
संदर्भ से अर्थ का अनुमान लगवाने से बच्चों में स्वतंत्र पठन-बोध की क्षमता विकसित होती है। रटवाना या अर्थ सीधे बता देना बच्चों को निष्क्रिय बनाता है।
प्रश्न 10
अपठित गद्यांश हल करने की दृष्टि से कौन-सा क्रम सबसे उपयुक्त है?
- Aशीर्षक वाला प्रश्न सबसे पहले, फिर गद्यांश पढ़ना
- Bगद्यांश का केवल अंतिम अनुच्छेद पढ़ना
- Cकेवल प्रश्न पढ़कर अनुमान से उत्तर देना
- Dगद्यांश का तेज़ पठन → प्रश्न पढ़ना → ध्यान से पुनः पठन → शीर्षक अंत में
व्याख्या
पहले तेज़ पठन से विषय समझ आता है, फिर प्रश्न पढ़कर ध्यानपूर्वक पठन से उत्तर-स्थल मिलते हैं। शीर्षक अंत में करने पर पूरे गद्यांश का आशय स्पष्ट रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में अपठित गद्यांश से कितने प्रश्न आते हैं?+
प्रश्नों की संख्या हर पाली में बदलती है। REET 2024 में भाषा I/II (30-30 प्रश्न) में गद्यांश और उससे जुड़े शब्दार्थ के प्रश्न आए, और इसी खंड के साथ राजस्थानी साहित्य के प्रश्न भी पूछे गए। इस पेज से जुड़े कुल 10 प्रश्न थे।
अपठित गद्यांश का शीर्षक कैसे चुनें?+
शीर्षक छोटा, आकर्षक और पूरे गद्यांश के मुख्य विचार को समेटने वाला होना चाहिए। किसी एक अनुच्छेद या उदाहरण पर आधारित, या विषय से बहुत व्यापक शीर्षक सही नहीं होता।
क्या गद्यांश के प्रश्नों में अपना सामान्य ज्ञान इस्तेमाल करें?+
नहीं। उत्तर वही सही है जो गद्यांश के आधार पर सिद्ध हो। कई बार कोई विकल्प सामान्यतः सत्य होता है, पर गद्यांश में न होने से गलत माना जाता है।
REET 2024 में गद्यांश खंड में राजस्थानी साहित्य क्यों पूछा गया?+
REET 2024 के भाषा प्रश्न-पत्र में राजस्थानी भाषा और साहित्य से जुड़े प्रश्न भी शामिल थे, जैसे वीर सतसई, सैनाणी और चेतावनी रा चूंगट्या के रचनाकार। इसलिए प्रमुख राजस्थानी रचनाएँ और रचनाकार याद रखना लाभदायक है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए