शब्द भेद (स्रोत के आधार पर): तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज और राजस्थानी बोलियाँ — REET नोट्स
इस पेज में उत्पत्ति (स्रोत) के आधार पर शब्दों के चार भेद — तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज — पहचान के नियमों और परीक्षा में बार-बार आने वाले उदाहरणों के साथ दिए गए हैं। साथ ही REET 2024 में इसी खंड के साथ पूछी गई राजस्थानी बोलियों और शब्दों की जानकारी भी है, क्योंकि उस वर्ष इस टॉपिक से जुड़े 11 प्रश्नों में से 6 राजस्थानी भाषा पर थे।
- REET 2024 में 11 प्रश्न
- कक्षा 6–10 व्याकरण स्तर
- 7 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से जुड़े 11 प्रश्न आए, जो दो हिस्सों में बँटे थे। 5 प्रश्न शब्द-स्रोत पर थे — ‘चन्द्र’, ‘अश्वत्थ’, ‘आचार’ तत्सम; ‘आदमी’ विदेशी; और ‘मातृ’ का तद्भव रूप ‘माता’। शैली सीधी थी: शब्द देकर उसका भेद पूछना या तत्सम देकर तद्भव पूछना। शेष 6 प्रश्न राजस्थानी भाषा पर थे — कौन-सी बोली राजस्थानी की है/नहीं है (मैथिली नहीं; ढूँढाड़ी, हाड़ौती हाँ), कौन-सी बोली मुख्यतः राजस्थान के बाहर बोली जाती है (मालवी), और राजस्थानी शब्दों के अर्थ (उनाळौ = गर्मी का मौसम, सोगरा = बाजरे की रोटी)।
स्रोत के आधार पर शब्द-भेद: चार वर्ग
हिंदी का शब्द-भंडार अनेक स्रोतों से बना है, इसलिए उत्पत्ति (स्रोत/इतिहास) के आधार पर शब्दों के चार भेद किए जाते हैं। (1) तत्सम — ‘तत् + सम’ अर्थात ‘उसके (संस्कृत के) समान’; संस्कृत के वे शब्द जो हिंदी में बिना बदले ज्यों-के-त्यों प्रयुक्त होते हैं, जैसे अग्नि, सूर्य, चन्द्र, आचार, अश्वत्थ। (2) तद्भव — ‘तत् + भव’ अर्थात ‘उससे (संस्कृत से) उत्पन्न’; संस्कृत के शब्द जो पालि, प्राकृत, अपभ्रंश से गुज़रते हुए बदले रूप में हिंदी में आए, जैसे आग, सूरज, चाँद।
(3) देशज — ‘देश में जन्मे’; जिनका स्रोत संस्कृत या कोई विदेशी भाषा नहीं, बल्कि लोक-व्यवहार और स्थानीय बोलियाँ हैं, जैसे लोटा, पगड़ी, खिड़की, झाड़ू, डिबिया, ठेठ, तेंदुआ। (4) विदेशज (विदेशी/आगत) — अन्य देशों की भाषाओं से आए शब्द, जैसे आदमी, किताब, स्कूल, चाय। दो भिन्न स्रोतों के मेल से बने शब्द संकर शब्द कहलाते हैं, जैसे रेलगाड़ी (अंग्रेज़ी रेल + हिंदी गाड़ी), टिकटघर।
ध्यान रहे, शब्दों के भेद अन्य आधारों पर भी होते हैं — रचना के आधार पर रूढ़, यौगिक, योगरूढ़; प्रयोग/रूपांतरण के आधार पर विकारी और अविकारी; अर्थ के आधार पर एकार्थी, अनेकार्थी, पर्यायवाची, विलोम। REET में प्रश्न का ‘स्रोत के आधार पर’, ‘उत्पत्ति के आधार पर’ या ‘इतिहास के आधार पर’ वाक्यांश इसी पेज वाले चार भेदों की ओर संकेत करता है।
तत्सम और तद्भव पहचानने के नियम
| तत्सम में मिलने वाला रूप | तद्भव में बदलकर | उदाहरण (तत्सम → तद्भव) |
|---|---|---|
| ऋ | रि/उ/अ | मातृ → माता/माँ, भ्रातृ → भाई |
| ष | स या ख | वर्षा → बरखा, शीर्ष → सीस |
| क्ष | ख या छ | क्षेत्र → खेत, अक्षि → आँख, पक्षी → पंछी |
| श्र / श | स | श्रावण → सावन, शत → सौ |
| संयुक्त व्यंजन | एक व्यंजन, पूर्व स्वर दीर्घ | हस्त → हाथ, सप्त → सात, दुग्ध → दूध |
| व | ब | वधू → बहू, वचन → बचन |
| म/न (अनुस्वार-युक्त) | चंद्रबिंदु (ँ) | ग्राम → गाँव, दंत → दाँत, कंटक → काँटा |
| रेफ-युक्त संयुक्ताक्षर (र्ण, र्म, र्य) | रेफ हटकर सरल रूप | कर्ण → कान, कर्म → काम, कार्य → काज |
नियम संकेत हैं, पक्का प्रमाण नहीं — अंतिम निर्णय शब्द के संस्कृत मूल से होता है। इसलिए आम उदाहरण याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
परीक्षा में बार-बार आने वाले तत्सम–तद्भव जोड़े
| तत्सम | तद्भव | तत्सम | तद्भव |
|---|---|---|---|
| अग्नि | आग | अश्रु | आँसू |
| चन्द्र | चाँद | सूर्य | सूरज |
| हस्त | हाथ | कर्ण | कान |
| दुग्ध | दूध | दधि | दही |
| घृत | घी | ग्राम | गाँव |
| क्षेत्र | खेत | कर्म | काम |
| मयूर | मोर | उष्ट्र | ऊँट |
| सर्प | साँप | रात्रि | रात |
| आम्र | आम | मुख | मुँह |
| सप्त | सात | शत | सौ |
| पिप्पल | पीपल | श्रावण | सावन |
| दंत | दाँत | ओष्ठ | होंठ |
| मातृ | माता / माँ | भ्रातृ | भाई |
| वधू | बहू | अक्षि | आँख |
| उच्च | ऊँचा | कार्य | काज |
विदेशज (आगत) शब्द: भाषा के अनुसार
| स्रोत भाषा | उदाहरण |
|---|---|
| अरबी | अदालत, किताब, कानून, कलम, इनाम, औलाद |
| फ़ारसी | दुकान, गुलाब, चश्मा, दरवाज़ा, ज़मीन |
| अरबी-फ़ारसी (उर्दू के माध्यम से) | आदमी, हवा, दुनिया |
| तुर्की | तोप, चाकू, कैंची, बहादुर, कुली, बेगम |
| अंग्रेज़ी | स्कूल, स्टेशन, डॉक्टर, टिकट, रेल |
| पुर्तगाली | कमरा, अलमारी, चाबी, तौलिया, बाल्टी, पादरी |
| फ़्रांसीसी | कारतूस, कूपन |
| जापानी / चीनी | रिक्शा / चाय, लीची |
विदेशी शब्द हिंदी में आकर प्रायः हिंदी के व्याकरणिक नियम अपना लेते हैं — जैसे किताब का बहुवचन ‘किताबें’।
राजस्थानी की प्रमुख बोलियाँ और क्षेत्र
| बोली | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|
| मारवाड़ी | जोधपुर, नागौर, जैसलमेर, पाली — क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे विस्तृत |
| मेवाड़ी | उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा |
| ढूँढाड़ी (जयपुरी) | जयपुर, टोंक और आसपास |
| हाड़ौती | कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़ |
| मेवाती | अलवर, भरतपुर क्षेत्र |
| शेखावाटी | सीकर, चूरू, झुंझुनूँ |
| वागड़ी | डूँगरपुर, बाँसवाड़ा |
| मालवी | मुख्यतः मध्य प्रदेश का मालवा क्षेत्र; राजस्थान में झालावाड़-प्रतापगढ़ के आसपास |
मैथिली, मगही (बिहार), बघेली, बुंदेली, छत्तीसगढ़ी और बाँगरू (हरियाणा) राजस्थानी की बोलियाँ नहीं हैं। REET 2024 में आए राजस्थानी शब्द: उनाळौ = गर्मी का मौसम, सियाळो = सर्दी का मौसम, सोगरा = बाजरे की रोटी।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि (कक्षा 4–5)
‘शब्द-परिवार’ खेल: बोर्ड पर ‘हाथ, आग, दूध’ लिखें और बच्चों से पूछें कि दादी-नानी या पाठ्यपुस्तक में इनके ‘बड़े’ रूप (हस्त, अग्नि, दुग्ध) कहीं सुने हैं? जोड़ियाँ बनाकर दीवार पर ‘शब्द-वृक्ष’ लगाएँ।
गतिविधि (कक्षा 6–8)
समूहों को अख़बार की कतरन दें; वे शब्दों को तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी के चार डिब्बों में छाँटें और बताएँ कि पहचान किस संकेत (ष, क्ष, ऋ, नुक़्ता) से की।
शिक्षण सामग्री
चार रंगों के शब्द-कार्ड, तत्सम-तद्भव मिलान चार्ट, स्थानीय (राजस्थानी) शब्दों की कक्षा-सूची।
आम भ्रांतियाँ
हर कठिन शब्द को तत्सम और हर आसान शब्द को देशज मान लेना; ‘आदमी’, ‘कमरा’ जैसे रोज़ के शब्दों को हिंदी मूल का समझना; तद्भव को ‘गलत’ या ‘गँवारू’ मानना। स्पष्ट करें कि तद्भव और देशज शब्द भी मानक हिंदी का हिस्सा हैं।
आकलन का विचार
10 तत्सम शब्द देकर उनके तद्भव रूप लिखवाएँ और 5 शब्दों का स्रोत पहचानकर कारण लिखवाएँ; घर की बोली के 5 शब्द और उनके मानक हिंदी रूप भी लिखवाएँ।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
तत्सम पहचानने का तेज़ संकेत: शब्द में ऋ, ष, क्ष, ज्ञ, त्र या आधे अक्षर वाला संयुक्त व्यंजन हो और उसे बोलने में ‘किताबी’ लगे — प्रायः तत्सम। उसी का बोलचाल वाला सरल रूप (चंद्रबिंदु, ख, स) — तद्भव। नुक़्ता (ज़, फ़) या ‘-आना/-खाना’ जैसी ध्वनि — प्रायः अरबी-फ़ारसी। राजस्थानी बोलियों के प्रश्न में बिहार, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से और हरियाणा की बोलियों को तुरंत बाहर करें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 41
राजस्थानी की ‘बोली’ नहीं मानी जाती है
- Aमालवी
- Bमैथिली
- Cमेवाती
- Dबागड़ी
व्याख्या
मैथिली राजस्थानी की बोली नहीं है; यह मुख्यतः बिहार में बोली जाने वाली भाषा है (संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल)। मालवी, मेवाती और बागड़ी राजस्थानी की बोलियाँ मानी जाती हैं। अतः उत्तर (B) है।
प्रश्न 48
निम्न में से ‘राजस्थानी’ की एक बोली मानी जाती है
- Aबाँगरू
- Bबघेली
- Cमगही
- Dढूँढाड़ी
व्याख्या
ढूँढाड़ी (जयपुरी) राजस्थानी की प्रमुख बोली है, जो जयपुर और आसपास के क्षेत्र में बोली जाती है। बाँगरू हरियाणा की, बघेली मध्य प्रदेश (पूर्वी हिन्दी वर्ग) की और मगही बिहार की बोली है।
प्रश्न 84
‘गर्मी का मौसम’ के अर्थ में प्रयुक्त संगत राजस्थानी शब्द है -
- Aउनाळौ
- Bसियाळो
- Cअगुणो
- Dबड़णो
व्याख्या
राजस्थानी में गर्मी के मौसम को ‘उनाळौ’ कहा जाता है। ‘सियाळो’ सर्दी के मौसम के लिए प्रयुक्त शब्द है, इसलिए वह गलत है। अतः सही उत्तर (A) है।
प्रश्न 86
राजस्थानी की कौन-सी बोली राजस्थान के बाहर मुख्यत: बोली जाती है ?
- Aमारवाड़ी
- Bढूँढाड़ी
- Cमेवाड़ी
- Dमालवी
व्याख्या
मालवी बोली राजस्थानी की बोली मानी जाती है, पर यह मुख्यतः राजस्थान के बाहर मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र (जैसे इंदौर, उज्जैन) में बोली जाती है; राजस्थान में इसका क्षेत्र झालावाड़-प्रतापगढ़ के आसपास सीमित है। मारवाड़ी, ढूँढाड़ी और मेवाड़ी मुख्यतः राजस्थान के भीतर बोली जाती हैं।
प्रश्न 35
स्रोत के आधार पर ‘चन्द्र’ शब्द है –
- Aतत्सम
- Bदेशज
- Cविदेशी
- Dतद्भव
व्याख्या
संस्कृत के जो शब्द हिन्दी में बिना परिवर्तन के ज्यों-के-त्यों प्रयुक्त होते हैं, वे तत्सम कहलाते हैं। ‘चन्द्र’ संस्कृत का मूल शब्द है, अतः तत्सम है। इसका तद्भव रूप ‘चाँद’ है।
प्रश्न 55
राजस्थानी शब्द ‘सोगरा’ का हिन्दी रूप है –
- Aमक्के की रोटी
- Bबाजरे की रोटी
- Cगेहूँ की रोटी
- Dचावल की रोटी
व्याख्या
राजस्थानी में ‘सोगरा’ बाजरे की मोटी रोटी को कहते हैं, जो राजस्थान का पारंपरिक भोजन है।
प्रश्न 79
मातृ का तद्भव रूप है-
- Aमात्र
- Bमंत्र
- Cमाथा
- Dमाता
व्याख्या
संस्कृत का मूल शब्द ‘मातृ’ है, जिससे हिन्दी में प्रचलित रूप ‘माता’ बना है; दिए गए विकल्पों में यही इसका रूपांतरित (तद्भव) रूप है। ‘मात्र’, ‘मंत्र’ और ‘माथा’ का ‘मातृ’ से कोई संबंध नहीं है।
प्रश्न 81
‘अश्वत्थ’ शब्द है-
- Aतत्सम
- Bतद्भव
- Cदेशज
- Dविदेशी
व्याख्या
‘अश्वत्थ’ (पीपल का वृक्ष) संस्कृत का शब्द है जो हिन्दी में ज्यों-का-त्यों प्रयुक्त होता है, इसलिए यह तत्सम है। इसका तद्भव/प्रचलित रूप ‘पीपल’ है।
प्रश्न 34
‘आदमी’ शब्द है
- Aतद्भव
- Bविदेशी
- Cतत्सम
- Dदेशज
व्याख्या
‘आदमी’ शब्द अरबी-फ़ारसी मूल का है (आदम से बना), जो हिन्दी में ज्यों-का-त्यों प्रयुक्त होता है। दूसरी भाषाओं से आए ऐसे शब्द ‘विदेशी’ (आगत) शब्द कहलाते हैं। अतः सही उत्तर विदेशी है।
प्रश्न 43
निम्नलिखित में से राजस्थानी बोलियों में सम्मिलित है
- Aछत्तीसगढ़ी
- Bबुन्देली
- Cमगही
- Dहाड़ौती
व्याख्या
हाड़ौती राजस्थानी की एक प्रमुख बोली है, जो कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़ (हाड़ौती क्षेत्र) में बोली जाती है। छत्तीसगढ़ी और बुन्देली पूर्वी/पश्चिमी हिन्दी की बोलियाँ हैं तथा मगही बिहारी हिन्दी की बोली है।
प्रश्न 89
‘आचार’ शब्द है
- Aतत्सम
- Bतद्भव
- Cदेशज
- Dविदेशी
व्याख्या
‘आचार’ संस्कृत का शब्द है (आ + चर् धातु) जो हिन्दी में बिना बदले प्रयुक्त होता है, इसलिए यह तत्सम है। इसी से बना ‘अचार’ जैसा शब्द भिन्न अर्थ का है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
‘दुग्ध’ का तद्भव रूप है —
- Aदही
- Bदूध
- Cघी
- Dमक्खन
व्याख्या
संस्कृत का ‘दुग्ध’ बदलकर हिंदी में ‘दूध’ बना। ‘दही’ का तत्सम ‘दधि’ और ‘घी’ का तत्सम ‘घृत’ है।
प्रश्न 2
निम्न में से तत्सम शब्द है —
- Aखेत
- Bआँख
- Cक्षेत्र
- Dसावन
व्याख्या
‘क्षेत्र’ संस्कृत का ज्यों-का-त्यों शब्द है; इसका तद्भव ‘खेत’ है। ‘आँख’ (अक्षि) और ‘सावन’ (श्रावण) तद्भव हैं।
प्रश्न 3
‘ऊँट’ का तत्सम रूप है —
- Aउच्च
- Bउष्ण
- Cऊष्मा
- Dउष्ट्र
व्याख्या
‘ऊँट’ संस्कृत ‘उष्ट्र’ से बना तद्भव शब्द है। ‘उष्ण’ का अर्थ गर्म और ‘उच्च’ का तद्भव ‘ऊँचा’ है।
प्रश्न 4
‘अलमारी’ और ‘चाबी’ शब्द किस भाषा से हिंदी में आए हैं?
- Aअरबी
- Bपुर्तगाली
- Cतुर्की
- Dफ़्रांसीसी
व्याख्या
अलमारी, चाबी, कमरा, तौलिया, बाल्टी जैसे शब्द पुर्तगाली भाषा से हिंदी में आए हैं।
प्रश्न 5
निम्न में से देशज शब्द है —
- Aलोटा
- Bपुस्तक
- Cकिताब
- Dकलम
व्याख्या
‘लोटा’ लोक-व्यवहार से बना देशज शब्द है। ‘पुस्तक’ तत्सम है, जबकि ‘किताब’ और ‘कलम’ अरबी मूल के विदेशी शब्द हैं।
प्रश्न 6
‘रेलगाड़ी’ शब्द किस प्रकार का है?
- Aसंकर
- Bदेशज
- Cतत्सम
- Dतद्भव
व्याख्या
‘रेलगाड़ी’ अंग्रेज़ी के ‘रेल’ और हिंदी के ‘गाड़ी’ के मेल से बना है; दो भिन्न स्रोतों के मेल से बने शब्द संकर कहलाते हैं।
प्रश्न 7
कौन-सा युग्म सही नहीं है?
- Aकर्ण – कान
- Bसप्त – सात
- Cमयूर – मोर
- Dवधू – बेटी
व्याख्या
‘वधू’ का तद्भव ‘बहू’ है, ‘बेटी’ नहीं। शेष तीनों तत्सम–तद्भव युग्म सही हैं।
प्रश्न 8
निम्न में से कौन-सी राजस्थानी की बोली है?
- Aबुंदेली
- Bमगही
- Cवागड़ी
- Dछत्तीसगढ़ी
व्याख्या
वागड़ी डूँगरपुर-बाँसवाड़ा क्षेत्र की राजस्थानी बोली है। बुंदेली और छत्तीसगढ़ी हिंदी की अन्य बोलियाँ हैं और मगही बिहार की बोली है।
प्रश्न 9
कक्षा 7 में शिक्षक चाहते हैं कि बच्चे तत्सम-तद्भव का भेद रटने के बजाय समझें। सबसे प्रभावी गतिविधि है —
- Aबच्चों द्वारा बोले जाने वाले तद्भव शब्दों से शुरू करके उनके तत्सम रूप खोजना और बदलाव के पैटर्न पहचानना
- Bपरिभाषा दस बार लिखवाना
- Cकेवल शब्द-सूची बोलकर लिखवाना
- Dविदेशी शब्दों का प्रयोग प्रतिबंधित करना
व्याख्या
परिचित शब्दों से शुरू करके पैटर्न (क्ष → ख, संयुक्त व्यंजन का सरल होना) स्वयं पहचानना ‘ज्ञात से अज्ञात’ और आगमन पद्धति पर आधारित सक्रिय अधिगम है।
प्रश्न 10
एक बच्चा लिखता है — ‘मेरी माँ ने सोगरा बनाया।’ हिंदी शिक्षक के लिए उचित प्रतिक्रिया है —
- Aशब्द को गलत बताकर काट देना
- Bबच्चे की बोली के शब्द को स्वीकारते हुए उसका मानक हिंदी अर्थ (बाजरे की रोटी) कक्षा में साझा करना
- Cबच्चे को राजस्थानी शब्द बोलने से मना करना
- Dवाक्य को बिना किसी चर्चा के छोड़ देना
व्याख्या
घर की भाषा का सम्मान करते हुए उसे मानक हिंदी से जोड़ना बहुभाषिकता को संसाधन मानने का तरीका है। शब्द काटना या मना करना बच्चे का आत्मविश्वास घटाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तत्सम और तद्भव शब्द में क्या अंतर है?+
तत्सम शब्द संस्कृत के ज्यों-के-त्यों रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं (अग्नि, हस्त), जबकि तद्भव शब्द संस्कृत से उत्पन्न होकर बदले रूप में आते हैं (आग, हाथ)।
‘आदमी’ शब्द तत्सम है या विदेशी?+
‘आदमी’ अरबी-फ़ारसी मूल का विदेशी (आगत) शब्द है, जो ‘आदम’ से बना है। REET 2024 में यही प्रश्न पूछा गया था।
देशज शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।+
जिन शब्दों का स्रोत न संस्कृत है, न कोई विदेशी भाषा, बल्कि जो लोक-व्यवहार और स्थानीय बोलियों से बने हैं, वे देशज हैं — जैसे लोटा, पगड़ी, खिड़की, झाड़ू, डिबिया।
राजस्थानी की कौन-सी बोली मुख्यतः राजस्थान के बाहर बोली जाती है?+
मालवी — यह मुख्यतः मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में बोली जाती है, जबकि राजस्थान में इसका क्षेत्र झालावाड़-प्रतापगढ़ के आसपास सीमित है।
REET में शब्द-भेद से कितने प्रश्न आते हैं?+
संख्या हर पाली में बदलती है। REET 2024 में इस टॉपिक से जुड़े 11 प्रश्न आए — 5 शब्द-स्रोत पर और 6 राजस्थानी बोलियों व शब्दों पर।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए