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Patwari परीक्षा · Hindi Grammar

शब्द भेद (स्रोत के आधार पर): तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज — Patwari नोट्स

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इस पेज में उत्पत्ति (स्रोत) के आधार पर शब्दों के चार भेद — तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज — पहचान के नियमों और परीक्षा में बार-बार आने वाले उदाहरणों के साथ दिए गए हैं। साथ ही राजस्थानी बोलियों और शब्दों की जानकारी भी है, क्योंकि यह खंड अक्सर राजस्थानी भाषा के प्रश्नों के साथ पूछा जाता है।

  • कक्षा 6–10 व्याकरण स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें
21 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Rajasthani languages — Wikipedia

स्रोत के आधार पर शब्द-भेद: चार वर्ग

हिंदी का शब्द-भंडार अनेक स्रोतों से बना है, इसलिए उत्पत्ति (स्रोत/इतिहास) के आधार पर शब्दों के चार भेद किए जाते हैं। (1) तत्सम — 'तत् + सम' अर्थात 'उसके (संस्कृत के) समान'; संस्कृत के वे शब्द जो हिंदी में बिना बदले ज्यों-के-त्यों प्रयुक्त होते हैं, जैसे अग्नि, सूर्य, चन्द्र, आचार, अश्वत्थ। (2) तद्भव — 'तत् + भव' अर्थात 'उससे (संस्कृत से) उत्पन्न'; संस्कृत के शब्द जो पालि, प्राकृत, अपभ्रंश से गुज़रते हुए बदले रूप में हिंदी में आए, जैसे आग, सूरज, चाँद।

(3) देशज — 'देश में जन्मे'; जिनका स्रोत संस्कृत या कोई विदेशी भाषा नहीं, बल्कि लोक-व्यवहार और स्थानीय बोलियाँ हैं, जैसे लोटा, पगड़ी, खिड़की, झाड़ू, डिबिया, ठेठ, तेंदुआ। (4) विदेशज (विदेशी/आगत) — अन्य देशों की भाषाओं से आए शब्द, जैसे आदमी, किताब, स्कूल, चाय। दो भिन्न स्रोतों के मेल से बने शब्द संकर शब्द कहलाते हैं, जैसे रेलगाड़ी (अंग्रेज़ी रेल + हिंदी गाड़ी), टिकटघर।

ध्यान रहे, शब्दों के भेद अन्य आधारों पर भी होते हैं — रचना के आधार पर रूढ़, यौगिक, योगरूढ़; प्रयोग/रूपांतरण के आधार पर विकारी और अविकारी; अर्थ के आधार पर एकार्थी, अनेकार्थी, पर्यायवाची, विलोम। परीक्षा में प्रश्न का 'स्रोत के आधार पर', 'उत्पत्ति के आधार पर' या 'इतिहास के आधार पर' वाक्यांश इसी पेज वाले चार भेदों की ओर संकेत करता है।

तत्सम और तद्भव पहचानने के नियम

तत्सम में मिलने वाला रूपतद्भव में बदलकरउदाहरण (तत्सम → तद्भव)
ऋरि/उ/अमातृ → माता/माँ, भ्रातृ → भाई
षस या खवर्षा → बरखा, शीर्ष → सीस
क्षख या छक्षेत्र → खेत, अक्षि → आँख, पक्षी → पंछी
श्र / शसश्रावण → सावन, शत → सौ
संयुक्त व्यंजनएक व्यंजन, पूर्व स्वर दीर्घहस्त → हाथ, सप्त → सात, दुग्ध → दूध
वबवधू → बहू, वचन → बचन
म/न (अनुस्वार-युक्त)चंद्रबिंदु (ँ)ग्राम → गाँव, दंत → दाँत, कंटक → काँटा
रेफ-युक्त संयुक्ताक्षर (र्ण, र्म, र्य)रेफ हटकर सरल रूपकर्ण → कान, कर्म → काम, कार्य → काज

नियम संकेत हैं, पक्का प्रमाण नहीं — अंतिम निर्णय शब्द के संस्कृत मूल से होता है। इसलिए आम उदाहरण याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।

परीक्षा में बार-बार आने वाले तत्सम–तद्भव जोड़े

तत्समतद्भवतत्समतद्भव
अग्निआगअश्रुआँसू
चन्द्रचाँदसूर्यसूरज
हस्तहाथकर्णकान
दुग्धदूधदधिदही
घृतघीग्रामगाँव
क्षेत्रखेतकर्मकाम
मयूरमोरउष्ट्रऊँट
सर्पसाँपरात्रिरात
आम्रआममुखमुँह
सप्तसातशतसौ
पिप्पलपीपलश्रावणसावन
दंतदाँतओष्ठहोंठ
मातृमाता / माँभ्रातृभाई
वधूबहूअक्षिआँख
उच्चऊँचाकार्यकाज

विदेशज (आगत) शब्द: भाषा के अनुसार

स्रोत भाषाउदाहरण
अरबीअदालत, किताब, कानून, कलम, इनाम, औलाद
फ़ारसीदुकान, गुलाब, चश्मा, दरवाज़ा, ज़मीन
अरबी-फ़ारसी (उर्दू के माध्यम से)आदमी, हवा, दुनिया
तुर्कीतोप, चाकू, कैंची, बहादुर, कुली, बेगम
अंग्रेज़ीस्कूल, स्टेशन, डॉक्टर, टिकट, रेल
पुर्तगालीकमरा, अलमारी, चाबी, तौलिया, बाल्टी, पादरी
फ़्रांसीसीकारतूस, कूपन
जापानी / चीनीरिक्शा / चाय, लीची

विदेशी शब्द हिंदी में आकर प्रायः हिंदी के व्याकरणिक नियम अपना लेते हैं — जैसे किताब का बहुवचन 'किताबें'।

राजस्थानी की प्रमुख बोलियाँ और क्षेत्र

बोलीमुख्य क्षेत्र
मारवाड़ीजोधपुर, नागौर, जैसलमेर, पाली — क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे विस्तृत
मेवाड़ीउदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा
ढूँढाड़ी (जयपुरी)जयपुर, टोंक और आसपास
हाड़ौतीकोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़
मेवातीअलवर, भरतपुर क्षेत्र
शेखावाटीसीकर, चूरू, झुंझुनूँ
वागड़ीडूँगरपुर, बाँसवाड़ा
मालवीमुख्यतः मध्य प्रदेश का मालवा क्षेत्र; राजस्थान में झालावाड़-प्रतापगढ़ के आसपास

मैथिली, मगही (बिहार), बघेली, बुंदेली, छत्तीसगढ़ी और बाँगरू (हरियाणा) राजस्थानी की बोलियाँ नहीं हैं। परीक्षाओं में अक्सर आए राजस्थानी शब्द: उनाळौ = गर्मी का मौसम, सियाळो = सर्दी का मौसम, सोगरा = बाजरे की रोटी।[स्रोत 1]

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

तत्सम पहचानने का तेज़ संकेत: शब्द में ऋ, ष, क्ष, ज्ञ, त्र या आधे अक्षर वाला संयुक्त व्यंजन हो और उसे बोलने में 'किताबी' लगे — प्रायः तत्सम। उसी का बोलचाल वाला सरल रूप (चंद्रबिंदु, ख, स) — तद्भव। नुक़्ता (ज़, फ़) या '-आना/-खाना' जैसी ध्वनि — प्रायः अरबी-फ़ारसी। राजस्थानी बोलियों के प्रश्न में बिहार, मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से और हरियाणा की बोलियों को तुरंत बाहर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तत्सम और तद्भव शब्द में क्या अंतर है?+

तत्सम शब्द संस्कृत के ज्यों-के-त्यों रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं (अग्नि, हस्त), जबकि तद्भव शब्द संस्कृत से उत्पन्न होकर बदले रूप में आते हैं (आग, हाथ)।

'आदमी' शब्द तत्सम है या विदेशी?+

'आदमी' अरबी-फ़ारसी मूल का विदेशी (आगत) शब्द है, जो 'आदम' से बना है।

देशज शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।+

जिन शब्दों का स्रोत न संस्कृत है, न कोई विदेशी भाषा, बल्कि जो लोक-व्यवहार और स्थानीय बोलियों से बने हैं, वे देशज हैं — जैसे लोटा, पगड़ी, खिड़की, झाड़ू, डिबिया।

राजस्थानी की कौन-सी बोली मुख्यतः राजस्थान के बाहर बोली जाती है?+

मालवी — यह मुख्यतः मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में बोली जाती है, जबकि राजस्थान में इसका क्षेत्र झालावाड़-प्रतापगढ़ के आसपास सीमित है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Rajasthani languages — Wikipedia
  2. NCERT पाठ्यपुस्तकें (हिंदी व्याकरण)