वाच्य — Patwari नोट्स
वाच्य क्रिया के उस रूप को कहते हैं जो बताता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से कौन प्रधान है — यह वाक्य-रचना की एक बुनियादी इकाई है। इस पेज में कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य व भाववाच्य की पहचान और परिवर्तन के नियम उदाहरण सहित समझाए गए हैं, ताकि परीक्षा में वाच्य-परिवर्तन के प्रश्न आसानी से हल हो सकें।
- कक्षा 6–8 स्तर
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वाच्य की परिभाषा
क्रिया के उस रूप को वाच्य कहते हैं, जिससे यह पता चलता है कि वाक्य में क्रिया का व्यापार (कार्य) कर्ता, कर्म या भाव में से किसके साथ प्रधान रूप से जुड़ा है। हिंदी में वाच्य के तीन भेद माने जाते हैं — कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य।
वाच्य पहचानने के लिए सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वाक्य में क्रिया किसके लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार बदल रही है। यदि क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है तो कर्तृवाच्य, यदि कर्म के अनुसार बदलती है तो कर्मवाच्य, और यदि क्रिया कभी नहीं बदलती (चाहे कर्ता या कर्म कोई भी हो) तो भाववाच्य समझना चाहिए। यह तीन-चरण जाँच अधिकांश वाच्य-प्रश्नों को हल करने के लिए पर्याप्त है।
वाच्य के तीन भेद
| भेद | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्तृवाच्य | क्रिया का रूप कर्ता के लिंग-वचन-पुरुष के अनुसार बदलता है; कर्ता प्रधान होता है | मोहन पत्र लिखता है |
| कर्मवाच्य | क्रिया का रूप कर्म के अनुसार बदलता है; कर्ता के साथ 'से/के द्वारा' आता है और क्रिया के साथ 'जाना' धातु जुड़ती है | पत्र मोहन के द्वारा लिखा जाता है |
| भाववाच्य | क्रिया सदैव अन्य पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग रूप में रहती है; प्रायः अकर्मक क्रिया व असमर्थता/निषेध के भाव में प्रयुक्त | मुझसे चला नहीं जाता |
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलने के नियम
कर्ता के साथ लगा 'ने' कारक-चिह्न हटाकर 'से' या 'के द्वारा' जोड़ें। कर्म को वाक्य के आरंभ में लाकर प्रधान बना दें। मुख्य क्रिया की धातु के साथ 'जाना' क्रिया जोड़ें और उसे कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदलें — उदाहरण: 'राकेश किताब पढ़ रहा है' (कर्तृवाच्य) से 'राकेश के द्वारा किताब पढ़ी जा रही है' (कर्मवाच्य) बनता है।
काल (tense) के अनुसार कर्मवाच्य के रूप में भी बदलाव आता है — वर्तमान काल में 'जाता है/जाती है', भूतकाल में 'गया/गई', और भविष्य काल में 'जाएगा/जाएगी' जोड़ा जाता है। इसलिए वाच्य बदलते समय मूल वाक्य का काल पहचानना पहला कदम है, ताकि कर्मवाच्य रूप भी उसी काल में बने। इसी तरह कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में लौटते समय कर्म को हटाकर मूल कर्ता को कर्ता-कारक में वापस लाना होता है, और क्रिया को कर्ता के लिंग-वचन के अनुसार फिर से ढालना होता है।
वाच्य-परिवर्तन के उदाहरण
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य |
|---|---|
| राम पत्र लिखता है | राम के द्वारा पत्र लिखा जाता है |
| शिक्षिका बच्चों को पढ़ाती है | शिक्षिका के द्वारा बच्चों को पढ़ाया जाता है |
| मजदूर दीवार बनाता है | मजदूर द्वारा दीवार बनाई जाती है |
| किसान खेत जोतता है | किसान द्वारा खेत जोता जाता है |
भाववाच्य पहचानने के संकेत
- क्रिया का रूप
- सदैव अन्य पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग — कर्ता या कर्म के लिंग-वचन से कोई प्रभाव नहीं
- सामान्य प्रयोग
- असमर्थता, निषेध या अनुमति न होने के भाव में — जैसे 'मुझसे चला नहीं जाता', 'अब बैठा नहीं जाता'
- कर्ता का कारक
- भाववाच्य में कर्ता के साथ प्रायः 'से' कारक-चिह्न आता है, 'ने' नहीं
- प्रयोग की सीमा
- भाववाच्य प्रायः अकर्मक क्रियाओं के साथ ही बनता है; सकर्मक क्रियाओं का सीधा भाववाच्य रूप बहुत कम प्रचलित है
तीनों वाच्य एक साथ — तुलना
मूल वाक्य
कर्तृवाच्यबच्चे पत्र लिखते हैं
कर्मवाच्यबच्चे पत्र लिखते हैं
भाववाच्यबच्चों से चला नहीं जाता
बना हुआ वाच्य-रूप
कर्तृवाच्य(मूल रूप, परिवर्तन नहीं)
कर्मवाच्यबच्चों द्वारा पत्र लिखा जाता है
भाववाच्यभाववाच्य प्रायः अकर्मक क्रिया (जैसे यहाँ चलना) के साथ असमर्थता दिखाने के लिए बनता है, इसलिए यहाँ अलग आधार-वाक्य लिया गया है
कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य एक ही घटना के दो रूप हैं, जिनमें क्रिया कर्म ("पत्र") के अनुसार बदलती है; भाववाच्य के लिए अकर्मक क्रिया का अलग उदाहरण लिया गया है क्योंकि भाववाच्य वाले वाक्य में कोई कर्म ही नहीं होता।
याद रखने की ट्रिक
क्रिया किसके अनुसार बदल रही है, वही वाच्य तय करता है — कर्ता के अनुसार बदले तो कर्तृवाच्य, कर्म के अनुसार बदले तो कर्मवाच्य, और कभी न बदले (सदा अन्य पुरुष-एकवचन-पुल्लिंग रहे) तो भाववाच्य। परीक्षा में जल्दी जाँचने के लिए वाक्य में कर्ता और कर्म दोनों को लिंग-वचन बदलकर देखें — जो भी बदलने पर क्रिया का रूप बदले, वही वाच्य तय करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाच्य परीक्षा में कैसे पूछा जाता है?+
प्रायः किसी वाक्य को एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलने या दिए गए वाक्य का वाच्य-भेद पहचानने के रूप में पूछा जाता है।
कर्मवाच्य और भाववाच्य में मुख्य अंतर क्या है?+
कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदलती है, जबकि भाववाच्य में क्रिया सदैव अन्य पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग रूप में ही रहती है, चाहे कर्ता या कर्म कोई भी हो।
भाववाच्य किन क्रियाओं के साथ अधिक प्रयुक्त होता है?+
भाववाच्य प्रायः अकर्मक क्रियाओं (चलना, बैठना, रोना) के साथ और असमर्थता या निषेध के भाव में प्रयुक्त होता है, सकर्मक क्रियाओं में इसका प्रयोग दुर्लभ है।
कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में बदलने का सबसे आसान तरीका क्या है?+
कर्ता के साथ 'के द्वारा/से' जोड़ें, कर्म को वाक्य के आरंभ में लाएँ और मुख्य क्रिया के साथ 'जाना' धातु जोड़कर उसे कर्म के लिंग-वचन अनुसार बदलें।
क्या हर सकर्मक क्रिया का कर्मवाच्य बनाया जा सकता है?+
हाँ, सामान्यतः हर सकर्मक क्रिया (जिसका कर्म स्पष्ट हो) का कर्मवाच्य रूप बनाया जा सकता है, जबकि अकर्मक क्रियाओं में सीधा कर्मवाच्य नहीं बनता, उनमें भाववाच्य ही प्रयुक्त होता है। विद्यार्थी अक्सर भाववाच्य को कर्मवाच्य समझ बैठते हैं, क्योंकि दोनों में क्रिया के साथ 'जाना' धातु जुड़ती है — अंतर पहचानने के लिए देखें कि क्रिया कर्म के अनुसार बदल रही है (कर्मवाच्य) या हमेशा एक जैसी ही रहती है (भाववाच्य)।