विलोम शब्द — Patwari नोट्स
विलोम (विपरीतार्थक) शब्द वे हैं जिनका अर्थ किसी शब्द के अर्थ से बिलकुल उलटा होता है। परीक्षाओं में अक्सर किसी शब्द का सही विलोम चुनने के प्रश्न आते हैं, जहाँ विकल्पों में उसी शब्द-परिवार के समानार्थी शब्द जान-बूझकर मिलाए जाते हैं ताकि विलोम व पर्यायवाची में भ्रम पैदा हो।
- कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
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विलोम शब्द क्या हैं?
जिन शब्दों का अर्थ किसी शब्द के अर्थ से पूरी तरह उल्टा या विपरीत होता है, उन्हें विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं — जैसे 'दिन' का विलोम 'रात', 'सुख' का विलोम 'दुख'। हिंदी में विलोम बनाने के मुख्यतः दो तरीके हैं: पहला, पूरी तरह अलग शब्द से (जैसे राजा-रंक), और दूसरा, मूल शब्द में निषेधसूचक उपसर्ग (अ, अन, नि, वि, दुर, कु) जोड़कर (जैसे ज्ञान-अज्ञान, आस्तिक-नास्तिक)।
इस तरह के प्रश्नों में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विकल्पों में मूल शब्द के ही समानार्थी (पर्यायवाची) शब्द रख दिए जाते हैं, जिससे परीक्षार्थी भ्रमित हो जाएँ। जैसे 'मुक्त' का सही विलोम 'बद्ध' (बँधा हुआ) है, पर विकल्पों में 'मोक्ष' और 'निर्वाण' जैसे शब्द रखे जा सकते हैं जो 'मुक्ति' के ही पर्यायवाची हैं, विपरीत अर्थ बिलकुल नहीं देते।
एक और बात ध्यान देने योग्य है — कुछ शब्दों के प्रसंग के अनुसार एक से अधिक विलोम हो सकते हैं। जैसे 'गुरु' का अर्थ जब 'भारी' हो तो विलोम 'लघु' होगा, पर जब 'गुरु' का अर्थ 'शिक्षक' हो तो उसका विलोम 'शिष्य' माना जाता है। ऐसे में वाक्य या गद्यांश का प्रसंग देखकर ही तय करें कि शब्द किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, तभी सही विलोम चुना जा सकता है। परीक्षा में प्रसंग-आधारित शब्द प्रायः गद्यांश के भीतर ही दिए जाते हैं, इसलिए विकल्प देखने से पहले वाक्य को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
इसलिए विलोम याद करते समय हमेशा मूल शब्द के सटीक अर्थ के साथ-साथ उसके प्रसंग को भी ध्यान में रखना चाहिए, ताकि परीक्षा में भ्रामक विकल्पों से आसानी से बचा जा सके।
परीक्षा में पूछे गए विलोम-युग्म
| शब्द | सही विलोम | भ्रामक विकल्प (पर्यायवाची, विलोम नहीं) |
|---|---|---|
| संन्यासी | गृहस्थ | जंगल वासी, उपवन वासी, सदाचारी (कोई भी विपरीत अर्थ नहीं देता) |
| अनुकूल | प्रतिकूल | अनुसार, अनुरूप (ये 'अनुकूल' के ही समानार्थी हैं) |
| मुक्त | बद्ध | मोक्ष, निर्वाण, कैवल्य (ये 'मुक्ति' के ही पर्यायवाची हैं) |
विलोम बनाने के दो तरीके — विस्तार से
पहला तरीका है मूल शब्द में निषेधसूचक उपसर्ग जोड़ना, जैसा ऊपर देखा — यह तरीका ज्यादातर तत्सम (संस्कृत-मूल) शब्दों पर लागू होता है और अनुमान लगाना अपेक्षाकृत आसान है। दूसरा तरीका है पूरी तरह भिन्न शब्द का प्रयोग, जहाँ मूल शब्द और उसके विलोम का कोई भाषिक (रूपात्मक) संबंध नहीं होता, जैसे राजा-रंक, दिन-रात, अमीर-गरीब — इन्हें सीधे शब्द-युग्म के रूप में याद रखना पड़ता है, क्योंकि इनका अनुमान उपसर्ग के नियम से नहीं लगाया जा सकता।
परीक्षा में दोनों तरह के विलोम पूछे जाते हैं, इसलिए तैयारी करते समय दोनों श्रेणियों की अलग-अलग सूची बनाना बेहतर रणनीति है — एक सूची में उपसर्ग-आधारित विलोम (ज्ञान-अज्ञान, आस्तिक-नास्तिक) और दूसरी सूची में पूर्णतः भिन्न-शब्द वाले विलोम (राजा-रंक, शत्रु-मित्र)।
एक तीसरी, कम प्रचलित श्रेणी भी होती है जहाँ स्त्रीलिंग-पुल्लिंग बदलने से विपरीत भाव जैसा आभास मिलता है (जैसे राजा-रानी), पर व्याकरण की दृष्टि से यह लिंग-परिवर्तन है, विलोम नहीं — क्योंकि दोनों शब्दों का मूल अर्थ (शासक) एक ही है, केवल लिंग अलग है। परीक्षा में ऐसे विकल्पों को पहचानकर सावधानी से बाहर करना चाहिए, क्योंकि ऊपर से यह विलोम जैसा लग सकता है।
तैयारी करते समय हर शब्द के विलोम के साथ-साथ उसका अर्थ भी समझना जरूरी है, क्योंकि बिना अर्थ जाने केवल शब्द-जोड़े रटने पर प्रसंग बदलते ही (जैसे बहु-अर्थी शब्दों में) भ्रम होने की संभावना बढ़ जाती है।
उपसर्ग से विलोम बनाने के सामान्य नियम
- अ/अन उपसर्ग
- ज्ञान → अज्ञान, आदि → अनादि, संतोष → असंतोष
- नि उपसर्ग
- कलंक → निष्कलंक, आशा → निराशा (यहाँ 'निर्' रूप में)
- वि उपसर्ग
- स्वदेश → विदेश, योग → वियोग (मिलन का विपरीत)
- दुर/कु उपसर्ग
- भाग्य → दुर्भाग्य, पुत्र → कुपुत्र
पूरी तरह भिन्न शब्दों से बनने वाले विलोम
| शब्द | विलोम | टिप्पणी |
|---|---|---|
| राजा | रंक | दोनों पूर्णतः भिन्न मूल के शब्द हैं, उपसर्ग से संबंध नहीं |
| शत्रु | मित्र | सामाजिक संबंध बताने वाले भिन्न-मूल शब्द |
| जय | पराजय | यहाँ 'परा' उपसर्ग से विलोम बना है |
| स्वर्ग | नरक | पूर्णतः भिन्न मूल के शब्द |
| आरंभ | अंत | भिन्न मूल के शब्द, कोई सामान्य उपसर्ग नहीं |
सभी विलोम उपसर्ग जोड़कर नहीं बनते — कई शब्द-युग्म ऐतिहासिक रूप से ही अलग-अलग शब्दों से बने हैं, इन्हें सीधे याद रखना पड़ता है।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
विलोम के प्रश्न में हर विकल्प पर खुद से पूछें — 'क्या यह शब्द मूल शब्द का बिलकुल उल्टा भाव देता है, या वही/मिलता-जुलता भाव?' अगर वही भाव मिले (जैसे मुक्ति के समानार्थी मोक्ष/निर्वाण), वह विकल्प काट दें — परीक्षा में यही सबसे आम ट्रैप है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विलोम शब्द किसे कहते हैं?+
जिन शब्दों का अर्थ किसी शब्द के अर्थ से पूरी तरह विपरीत हो, उन्हें विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं, जैसे 'सुख' का विलोम 'दुख'।
विलोम और पर्यायवाची में क्या अंतर है?+
पर्यायवाची शब्दों का अर्थ एक जैसा या मिलता-जुलता होता है, जबकि विलोम शब्दों का अर्थ पूरी तरह उल्टा होता है — जैसे 'सुख' का पर्यायवाची 'आनंद' है और विलोम 'दुख'।
उपसर्ग लगाकर विलोम बनाने के मुख्य उपसर्ग कौन-से हैं?+
अ, अन, नि/निर्, वि, दुर, कु जैसे निषेधसूचक उपसर्ग मूल शब्द में जोड़कर अक्सर विलोम बनाया जाता है, जैसे ज्ञान-अज्ञान, आशा-निराशा।
क्या एक शब्द के एक से अधिक विलोम हो सकते हैं?+
हाँ, जब शब्द के प्रसंग के अनुसार अलग-अलग अर्थ हों, तो उसके विलोम भी अलग-अलग हो सकते हैं — जैसे 'गुरु' (भारी) का विलोम 'लघु' है, पर 'गुरु' (शिक्षक) का विलोम 'शिष्य' है।