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Patwari परीक्षा · Hindi Grammar

पर्यायवाची शब्द — Patwari नोट्स

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पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द वे शब्द हैं जिनका अर्थ एक जैसा या मिलता-जुलता होता है। परीक्षाओं में अक्सर गद्यांश के किसी शब्द का सही समानार्थी चुनने या पूरे समूह में से सही पर्यायवाची-सेट पहचानने के प्रश्न आते हैं, इसलिए बारीक अर्थ-भेद समझना जरूरी है।

  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 8 मिनट पढ़ें

पर्यायवाची शब्द क्या हैं?

जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा या लगभग एक जैसा होता है, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं — जैसे 'जल' के पर्यायवाची हैं पानी, नीर, सलिल, वारि। हिंदी में संस्कृत मूल के कारण एक ही वस्तु के लिए कई-कई पर्यायवाची मिलते हैं, विशेषकर प्रकृति (जल, वायु, अग्नि), शरीर के अंग और सामान्य संज्ञाओं (मनुष्य, स्त्री, राजा) के लिए।

ध्यान रहे कि पूर्ण रूप से एक जैसे अर्थ वाले शब्द कम ही मिलते हैं — अधिकतर पर्यायवाची शब्दों में अर्थ की हल्की छाया (nuance) अलग होती है, इसलिए वाक्य में प्रसंग देखकर ही सही शब्द चुनना चाहिए। जैसे 'गृह' और 'सदन' दोनों 'घर' के पर्यायवाची हैं, पर 'सदन' का प्रयोग औपचारिक संदर्भों (राष्ट्रपति सदन) में अधिक होता है।

पर्यायवाची शब्द चुनते समय लिंग और वचन का भी ध्यान रखना जरूरी है — कई बार एक ही अर्थ के शब्द अलग-अलग लिंग के होते हैं और वाक्य में सीधे एक-दूसरे की जगह नहीं रखे जा सकते। जैसे 'स्त्री' के पर्यायवाची 'नारी', 'महिला', 'वनिता' सभी स्त्रीलिंग हैं, इसलिए वाक्य में क्रिया व विशेषण का रूप भी स्त्रीलिंग ही रहेगा। इसी तरह कुछ पर्यायवाची शब्द केवल एकवचन या बहुवचन में ही स्वाभाविक लगते हैं। परीक्षा के प्रश्नों में सीधे लिंग-वचन नहीं पूछा जाता, पर वाक्य-प्रयोग वाले प्रश्नों में यह समझ अप्रत्यक्ष रूप से काम आती है।

यह भी याद रखें कि पर्यायवाची शब्द मुख्यतः तत्सम (संस्कृत-मूल) होते हैं, हालांकि कुछ तद्भव शब्द भी इस सूची में शामिल होते हैं; और चूँकि यह पाठ्यक्रम मुख्यतः शुद्ध हिंदी-संस्कृत शब्दावली तक सीमित रहता है, अंग्रेज़ी-मूल शब्दों के पर्यायवाची परीक्षा में सामान्यतः नहीं पूछे जाते। तैयारी में सबसे बड़ी चूक यही होती है कि विद्यार्थी शब्दों को बिना प्रसंग समझे यंत्रवत रट लेते हैं, जिससे मिलते-जुलते पर भिन्न-अर्थी शब्दों वाले विकल्पों में आसानी से भ्रमित हो जाते हैं।

कुछ शब्दों के अनेक पर्यायवाची होने के बावजूद उनके प्रयोग की आवृत्ति अलग-अलग होती है — जैसे 'जल' की तुलना में 'पानी' रोज़मर्रा की भाषा में अधिक प्रचलित है, जबकि 'सलिल', 'वारि' जैसे शब्द मुख्यतः साहित्यिक या काव्यात्मक भाषा में मिलते हैं। परीक्षा की तैयारी करते समय इस भेद को समझना फायदेमंद है क्योंकि गद्यांश-आधारित प्रश्नों में प्रायः प्रचलित शब्द ही सही उत्तर के रूप में अपेक्षित होता है।

परीक्षा में बार-बार पूछे गए पर्यायवाची-समूह

शब्दपर्यायवाचीमिलते-जुलते पर गलत विकल्प
वस्त्रपट, चीर, अंबर, वसन, परिधानअंबु (जल), पुष्कर (कमल), करवाल (तलवार)
जंगलअरण्य, कानन, कांतार, विपिन, अटवी, वनविटप, द्रुम, पादप (ये 'वृक्ष' के पर्यायवाची हैं)
इंसान/मनुष्यमानव, मनुज, मानुष, नरअनिल (हवा), महीप (राजा), मीत (मित्र), मारुत (पवन)
वृक्षतरु, द्रुम, विटप, पादपकानन (जंगल), पुष्कर (कमल/तालाब)
सूर्यरवि, भानु, दिनकर, सूरज, आदित्यनिशाकर, विधु (ये 'चंद्रमा' के पर्यायवाची हैं)
पर्वतगिरि, शैल, अचल, पहाड़सरिता, तटिनी (ये 'नदी' के पर्यायवाची हैं)
जलपानी, नीर, सलिल, वारि, तोयअंबर (आकाश), अनल (आग) — दोनों जल के पर्यायवाची नहीं
राजानृप, महीप, भूपति, नरेशप्रजा, मंत्री (राजा से जुड़े पर अलग पद के शब्द, पर्यायवाची नहीं)

परीक्षाओं में अक्सर एक विकल्प में ऐसे शब्द मिलाए जाते हैं जो असल में किसी दूसरे शब्द का पर्यायवाची होते हैं — जैसे 'वृक्ष' के पर्यायवाची को 'जंगल' के विकल्प में डाल देना।

गद्यांश में शब्दार्थ पहचानने की रणनीति

जब गद्यांश में किसी शब्द (जैसे 'प्रमाण') का अर्थ पूछा जाए, तो शब्द को अलग से याद करने के बजाय पूरे वाक्य के प्रसंग में पढ़ें। उदाहरण के लिए 'प्रचुरता का प्रमाण' जैसी पंक्ति में 'प्रमाण' का अर्थ 'सबूत' होता है, जबकि 'प्रमाद' (असावधानी) और 'प्रमत्त' (मतवाला) जैसे मिलते-जुलते दिखने वाले शब्द भ्रम पैदा करने के लिए विकल्पों में रखे जा सकते हैं। ऐसे प्रश्नों में उच्चारण की समानता नहीं, प्रसंग में सही अर्थ देखना चाहिए।

पर्यायवाची शब्दों के पीछे एक रोचक कारण यह भी है कि संस्कृत में एक ही वस्तु के अलग-अलग गुणों के आधार पर अलग-अलग नाम रखे गए — जैसे सूर्य को 'दिनकर' (दिन बनाने वाला), 'भानु' (चमकने वाला) और 'आदित्य' (अदिति का पुत्र) कहा गया, यानी हर पर्यायवाची किसी न किसी विशेषता या पौराणिक संदर्भ से जुड़ा है। परीक्षा में सीधे शब्द रटने के बजाय अगर इस पृष्ठभूमि को समझ लिया जाए, तो अनजान शब्द भी अर्थ के आधार पर पहचानना आसान हो जाता है।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

जब विकल्प में सभी शब्दों को एक साथ 'सही समूह' चुनना हो, तो हर शब्द को बारी-बारी काटें — अगर समूह में एक भी शब्द किसी और वस्तु का पर्यायवाची निकले (जैसे विटप = वृक्ष, न कि जंगल), पूरा विकल्प गलत हो जाता है। एक गलत शब्द पूरा विकल्प रद्द कर देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?+

जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा या लगभग एक जैसा हो, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं, जैसे जल के पर्यायवाची — पानी, नीर, सलिल।

पर्यायवाची और समानार्थी शब्द में क्या फर्क है?+

व्यवहार में दोनों शब्द एक ही अर्थ में प्रयोग होते हैं — दोनों का मतलब है वे शब्द जिनका भाव लगभग समान हो।

पर्यायवाची शब्द याद करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?+

अलग-अलग शब्द रटने की बजाय विषयवार समूह (जल, वृक्ष, स्त्री, राजा) बनाकर याद करें और हर शब्द को एक वाक्य में प्रयोग करके देखें, इससे प्रसंग-भेद भी स्पष्ट होता है।

क्या पर्यायवाची शब्द चुनते समय लिंग का ध्यान रखना जरूरी है?+

हाँ, ज्यादातर पर्यायवाची शब्द मूल शब्द के समान लिंग के होते हैं, इसलिए वाक्य में प्रयोग करते समय क्रिया व विशेषण का रूप भी उसी के अनुसार बदलना चाहिए।

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आधिकारिक स्रोत

  1. पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द — हिन्दी व्याकरण, विकिपीडिया