प्रत्यय: कृत् और तद्धित प्रत्यय, भेद, उदाहरण — Patwari नोट्स
इस पेज पर प्रत्यय की परिभाषा, कृत् और तद्धित प्रत्ययों के भेद, संस्कृत-हिंदी-उर्दू प्रत्ययों के उदाहरण और प्रत्यय लगने पर होने वाले स्वर-परिवर्तन के नियम दिए गए हैं। परीक्षाओं में इस टॉपिक के ज़्यादातर विकल्प गलत विच्छेद से बनाकर भ्रमित करने की कोशिश करते हैं, इसलिए नियम पक्के होना जरूरी है।
- कक्षा 1–8 स्तर
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प्रत्यय क्या है?
प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द या धातु के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं और उसके अर्थ या शब्द-भेद में परिवर्तन कर देते हैं। 'प्रत्यय' = प्रति + अय, अर्थात् साथ चलने वाला। जैसे — मीठा + आस = मिठास (विशेषण से भाववाचक संज्ञा), समाज + इक = सामाजिक (संज्ञा से विशेषण), पढ़ + आई = पढ़ाई (धातु से संज्ञा)।
प्रत्यय का भी उपसर्ग की तरह स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता। प्रत्यय लगने पर मूल शब्द में प्रायः परिवर्तन होता है — आदि स्वर की वृद्धि (दिन → दैनिक), अंत्य स्वर का लोप (भारत + ईय = भारतीय, 'त' का 'अ' लुप्त) या स्वर का ह्रस्व होना (मीठा → मिठास, बूढ़ा → बुढ़ापा)।
प्रत्यय के दो मुख्य भेद हैं: कृत् प्रत्यय, जो क्रिया के मूल रूप (धातु) के अंत में लगते हैं, और तद्धित प्रत्यय, जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या अव्यय के अंत में लगते हैं। कृत् प्रत्यय से बने शब्द 'कृदंत' और तद्धित प्रत्यय से बने शब्द 'तद्धितांत' कहलाते हैं। कुछ पुस्तकें विभक्ति-चिह्नों (ने, को, से) को भी प्रत्यय मानती हैं, पर परीक्षा में प्रश्न आमतौर पर शब्द-रचना वाले प्रत्ययों पर ही आते हैं।
कृत् प्रत्यय (धातु + प्रत्यय)
| भेद | प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्तृवाचक (करने वाला) | अक, वाला, हार, ऐया | पाठक, लेखक, गायक, पढ़नेवाला, राखनहार, गवैया |
| कर्मवाचक (जिस पर क्रिया हो) | औना, नी | खिलौना, बिछौना, सुँघनी |
| करणवाचक (साधन) | न, नी, ई | बेलन, झाड़न, कतरनी, कटनी, रेती |
| भाववाचक (क्रिया का भाव) | आई, आवट, आहट, आव, अन, ती | पढ़ाई, लिखावट, घबराहट, बहाव, चलन, बढ़ती |
| क्रियाद्योतक (क्रिया का बोध) | ता, आ, कर | बहता पानी, लिखा पत्र, पढ़कर |
संस्कृत कृत् प्रत्यय भी हिंदी में खूब चलते हैं: अक (नायक), तव्य (कर्तव्य), अनीय (पूजनीय, दर्शनीय), क्त/त (ज्ञात, गत), ति (कृति, गति)।
तद्धित प्रत्यय (संज्ञा/विशेषण आदि + प्रत्यय)
| भेद | प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्तृवाचक | कार, एरा, ची, ई, दार | स्वर्णकार, सपेरा, तबलची, तेली, दुकानदार |
| भाववाचक | ता, त्व, पन, पा, आस, आहट, इमा | मानवता, बंधुत्व, बचपन, बुढ़ापा, मिठास, कड़वाहट, लालिमा |
| संबंधवाचक | इक, ईय, ई, इम, एरा | सामाजिक, भारतीय, पंजाबी, पश्चिम, चचेरा |
| गुणवाचक / स्वामित्व | वान, मान, वती, आलु, ईला | धनवान, बुद्धिमान, गुणवती, दयालु, रंगीला |
| ऊनवाचक (लघुता) | इया, ई, ड़ी | डिबिया, खटिया, टोकरी, पगड़ी |
| गणनावाचक | ला, रा, था, ठा, गुना | पहला, तीसरा, चौथा, छठा, दुगुना |
| सादृश्यवाचक | सा, सरीखा, हरा | नीला-सा, चाँद सरीखा, सुनहरा |
| अपत्यवाचक (संतान/वंश) | अ, एय, इ | मानव (मनु), वासुदेव (वसुदेव), कौंतेय (कुंती), दाशरथि (दशरथ) |
उर्दू-फ़ारसी तद्धित प्रत्यय: गार (मददगार), दान (कलमदान), खाना (दवाखाना), बाज़ (दग़ाबाज़), मंद (अक़्लमंद)।
इक, ईय, अ प्रत्यय और स्वर-वृद्धि के नियम
संस्कृत के तद्धित प्रत्यय इक, अ, एय लगने पर मूल शब्द के पहले स्वर की प्रायः वृद्धि होती है: अ → आ, इ/ई/ए → ऐ, उ/ऊ/ओ → औ। उदाहरण: समाज + इक = सामाजिक, धर्म + इक = धार्मिक, वर्ष + इक = वार्षिक, दिन + इक = दैनिक, इतिहास + इक = ऐतिहासिक, वेद + इक = वैदिक, भूगोल + इक = भौगोलिक, मनु + अ = मानव, शिव + अ = शैव।
इसीलिए 'सामाजिक' में प्रत्यय 'इक' है, 'अक' या 'क' नहीं — 'सा' का आ वृद्धि से आया है, प्रत्यय से नहीं। 'ईय' प्रत्यय में वृद्धि नहीं होती, केवल अंतिम 'अ' लुप्त होता है: भारत + ईय = भारतीय, राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय, स्वर्ग + ईय = स्वर्गीय। 'इम' प्रत्यय: पश्च + इम = पश्चिम, अग्र + इम = अग्रिम, अंत + इम = अंतिम।
सावधानी: हर '-इक' या '-ईक' से अंत होने वाला शब्द प्रत्यय-युक्त नहीं होता। 'सटीक' (स + टीका) में अंत का 'ईक' प्रत्यय नहीं है; 'ठीक' और 'नज़दीक' भी ऐसे ही उदाहरण हैं। पहचान की कसौटी यही है कि प्रत्यय हटाने पर बचा भाग सार्थक मूल शब्द हो — रस (रसिक), वर्ण (वर्णिक), धर्म (धार्मिक)।
उपसर्ग + मूल + प्रत्यय: पूरा विच्छेद
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| वैज्ञानिक | वि | ज्ञान | इक |
| अस्वाभाविक | अ | स्वभाव | इक |
| सुगंधित | सु | गंध | इत |
| परिश्रमी | परि | श्रम | ई |
| अपमानित | अप | मान | इत |
| निर्दयता | निर् | दया | ता |
एक शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैं। पहले उपसर्ग अलग करें, फिर प्रत्यय, बीच में मूल शब्द बचेगा।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
'मूल शब्द बताओ, प्रत्यय अपने-आप मिलेगा': विकल्प देखने से पहले मूल शब्द लिखें — भारत, मनु, पश्च, समाज। फिर जो बचे, वही प्रत्यय है; और शब्द के आरंभ में आया आ/ऐ/औ प्रायः वृद्धि है, प्रत्यय नहीं। धातु से जुड़ा = कृत्, संज्ञा/विशेषण से जुड़ा = तद्धित।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृत् और तद्धित प्रत्यय में क्या अंतर है?+
कृत् प्रत्यय धातु (क्रिया के मूल रूप) में लगते हैं, जैसे पढ़ + आई = पढ़ाई। तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या अव्यय में लगते हैं, जैसे मानव + ता = मानवता।
'मानव' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?+
मानव = मनु + अ। तद्धित 'अ' प्रत्यय लगने पर 'म' की वृद्धि 'मा' और 'उ' का 'व' हो जाता है।
'सामाजिक' में प्रत्यय 'इक' है या 'इक' के साथ कुछ और?+
केवल 'इक'। समाज + इक = सामाजिक; 'स' का 'सा' होना आदि स्वर की वृद्धि है।