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REET Level 1 व 2 · हिंदी (भाषा I/II)

प्रत्यय (Pratyay): कृत् और तद्धित प्रत्यय, भेद, उदाहरण — REET हिंदी व्याकरण

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इस पेज पर प्रत्यय की परिभाषा, कृत् और तद्धित प्रत्ययों के भेद, संस्कृत-हिंदी-उर्दू प्रत्ययों के उदाहरण और प्रत्यय लगने पर होने वाले स्वर-परिवर्तन के नियम दिए गए हैं। REET 2024 में प्रत्यय के 5 प्रश्न आए, जिनमें ज़्यादातर गलत विच्छेद वाले विकल्पों से भ्रमित करते थे।

  • REET 2024 में 5 प्रश्न
  • कक्षा 1–8 स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में प्रत्यय के 5 प्रश्न आए: भारतीय (ईय), मानव (अ), पश्चिम (इम), सामाजिक (इक) में प्रत्यय पहचानना, और 'किस शब्द में इक प्रत्यय नहीं है' (सटीक)। हर प्रश्न में विकल्प गलत विच्छेद से बने थे — जैसे 'तीय', 'अक', 'इम्'। सही उत्तर तभी मिलता है जब आप मूल शब्द सही पहचानें (भारत, मनु, पश्च, समाज) और जानें कि प्रत्यय लगने पर पहला स्वर बदल सकता है (स → सा, म → मा)।

प्रत्यय क्या है?

प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द या धातु के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं और उसके अर्थ या शब्द-भेद में परिवर्तन कर देते हैं। 'प्रत्यय' = प्रति + अय, अर्थात् साथ चलने वाला। जैसे — मीठा + आस = मिठास (विशेषण से भाववाचक संज्ञा), समाज + इक = सामाजिक (संज्ञा से विशेषण), पढ़ + आई = पढ़ाई (धातु से संज्ञा)।

प्रत्यय का भी उपसर्ग की तरह स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता। प्रत्यय लगने पर मूल शब्द में प्रायः परिवर्तन होता है — आदि स्वर की वृद्धि (दिन → दैनिक), अंत्य स्वर का लोप (भारत + ईय = भारतीय, 'त' का 'अ' लुप्त) या स्वर का ह्रस्व होना (मीठा → मिठास, बूढ़ा → बुढ़ापा)।

प्रत्यय के दो मुख्य भेद हैं: कृत् प्रत्यय, जो क्रिया के मूल रूप (धातु) के अंत में लगते हैं, और तद्धित प्रत्यय, जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या अव्यय के अंत में लगते हैं। कृत् प्रत्यय से बने शब्द 'कृदंत' और तद्धित प्रत्यय से बने शब्द 'तद्धितांत' कहलाते हैं। कुछ पुस्तकें विभक्ति-चिह्नों (ने, को, से) को भी प्रत्यय मानती हैं, पर REET में प्रश्न शब्द-रचना वाले प्रत्ययों पर ही आते हैं।

कृत् प्रत्यय (धातु + प्रत्यय)

भेदप्रत्ययउदाहरण
कर्तृवाचक (करने वाला)अक, वाला, हार, ऐयापाठक, लेखक, गायक, पढ़नेवाला, राखनहार, गवैया
कर्मवाचक (जिस पर क्रिया हो)औना, नीखिलौना, बिछौना, सुँघनी
करणवाचक (साधन)न, नी, ईबेलन, झाड़न, कतरनी, कटनी, रेती
भाववाचक (क्रिया का भाव)आई, आवट, आहट, आव, अन, तीपढ़ाई, लिखावट, घबराहट, बहाव, चलन, बढ़ती
क्रियाद्योतक (क्रिया का बोध)ता, आ, करबहता पानी, लिखा पत्र, पढ़कर

संस्कृत कृत् प्रत्यय भी हिंदी में खूब चलते हैं: अक (नायक), तव्य (कर्तव्य), अनीय (पूजनीय, दर्शनीय), क्त/त (ज्ञात, गत), ति (कृति, गति)।

तद्धित प्रत्यय (संज्ञा/विशेषण आदि + प्रत्यय)

भेदप्रत्ययउदाहरण
कर्तृवाचककार, एरा, ची, ई, दारस्वर्णकार, सपेरा, तबलची, तेली, दुकानदार
भाववाचकता, त्व, पन, पा, आस, आहट, इमामानवता, बंधुत्व, बचपन, बुढ़ापा, मिठास, कड़वाहट, लालिमा
संबंधवाचकइक, ईय, ई, इम, एरासामाजिक, भारतीय, पंजाबी, पश्चिम, चचेरा
गुणवाचक / स्वामित्ववान, मान, वती, आलु, ईलाधनवान, बुद्धिमान, गुणवती, दयालु, रंगीला
ऊनवाचक (लघुता)इया, ई, ड़ीडिबिया, खटिया, टोकरी, पगड़ी
गणनावाचकला, रा, था, ठा, गुनापहला, तीसरा, चौथा, छठा, दुगुना
सादृश्यवाचकसा, सरीखा, हरानीला-सा, चाँद सरीखा, सुनहरा
अपत्यवाचक (संतान/वंश)अ, एय, इमानव (मनु), वासुदेव (वसुदेव), कौंतेय (कुंती), दाशरथि (दशरथ)

उर्दू-फ़ारसी तद्धित प्रत्यय: गार (मददगार), दान (कलमदान), खाना (दवाखाना), बाज़ (दग़ाबाज़), मंद (अक़्लमंद)।

इक, ईय, अ प्रत्यय और स्वर-वृद्धि के नियम

संस्कृत के तद्धित प्रत्यय इक, अ, एय लगने पर मूल शब्द के पहले स्वर की प्रायः वृद्धि होती है: अ → आ, इ/ई/ए → ऐ, उ/ऊ/ओ → औ। उदाहरण: समाज + इक = सामाजिक, धर्म + इक = धार्मिक, वर्ष + इक = वार्षिक, दिन + इक = दैनिक, इतिहास + इक = ऐतिहासिक, वेद + इक = वैदिक, भूगोल + इक = भौगोलिक, मनु + अ = मानव, शिव + अ = शैव।

इसीलिए 'सामाजिक' में प्रत्यय 'इक' है, 'अक' या 'क' नहीं — 'सा' का आ वृद्धि से आया है, प्रत्यय से नहीं। 'ईय' प्रत्यय में वृद्धि नहीं होती, केवल अंतिम 'अ' लुप्त होता है: भारत + ईय = भारतीय, राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय, स्वर्ग + ईय = स्वर्गीय। 'इम' प्रत्यय: पश्च + इम = पश्चिम, अग्र + इम = अग्रिम, अंत + इम = अंतिम।

सावधानी: हर '-इक' या '-ईक' से अंत होने वाला शब्द प्रत्यय-युक्त नहीं होता। 'सटीक' (स + टीका) में अंत का 'ईक' प्रत्यय नहीं है; 'ठीक' और 'नज़दीक' भी ऐसे ही उदाहरण हैं। पहचान की कसौटी यही है कि प्रत्यय हटाने पर बचा भाग सार्थक मूल शब्द हो — रस (रसिक), वर्ण (वर्णिक), धर्म (धार्मिक)।

उपसर्ग + मूल + प्रत्यय: पूरा विच्छेद

शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
वैज्ञानिकविज्ञानइक
अस्वाभाविकअस्वभावइक
सुगंधितसुगंधइत
परिश्रमीपरिश्रमई
अपमानितअपमानइत
निर्दयतानिर्दयाता

एक शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैं। पहले उपसर्ग अलग करें, फिर प्रत्यय, बीच में मूल शब्द बचेगा।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि: 'शब्द फ़ैक्ट्री' (कक्षा 4–8)

एक मूल शब्द (जैसे 'मीठा') देकर समूहों से प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनवाएँ — मिठास, मिठाई। फिर हर नए शब्द का शब्द-भेद पूछें (विशेषण → संज्ञा), ताकि बच्चे समझें कि प्रत्यय शब्द-भेद भी बदलता है।

शिक्षण सामग्री

प्रत्यय पहिया: भीतर का गोल घूमने वाला पहिया मूल शब्दों का, बाहर का प्रत्ययों का। घुमाकर सार्थक जोड़ी बनने पर बच्चा शब्द और अर्थ लिखे।

आम भ्रांति

'सामाजिक' में 'आजिक' या 'अक' प्रत्यय मान लेना — क्योंकि बच्चे वृद्धि से आए 'आ' को प्रत्यय का हिस्सा समझते हैं। उपाय: दिन → दैनिक, वर्ष → वार्षिक जैसे जोड़े बोर्ड पर साथ लिखकर वृद्धि का पैटर्न स्वयं खोजने दें।

कक्षा 1–3 स्तर

सरल हिंदी प्रत्ययों से शुरुआत करें — वाला (दूधवाला), ई (पंजाबी), इया (डिबिया), पन (बचपन) — जो बच्चे रोज़ बोलते हैं।

आकलन विचार

पाठ्यपुस्तक के एक अनुच्छेद से प्रत्यय-युक्त शब्द छाँटकर तालिका भरवाएँ: शब्द, मूल शब्द, प्रत्यय, कृत्/तद्धित। एक-दो 'जाल' शब्द (ठीक, सटीक) भी शामिल करें।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'मूल शब्द बताओ, प्रत्यय अपने-आप मिलेगा': विकल्प देखने से पहले मूल शब्द लिखें — भारत, मनु, पश्च, समाज। फिर जो बचे, वही प्रत्यय है; और शब्द के आरंभ में आया आ/ऐ/औ प्रायः वृद्धि है, प्रत्यय नहीं। धातु से जुड़ा = कृत्, संज्ञा/विशेषण से जुड़ा = तद्धित।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न-संख्या 51 से 58 तक के उत्तर दीजिए । अधिकतर लोग विष्णु को पालनकर्त्ता मानकर उनकी उपासना करते हैं; विष्णु पालन करते हैं तथा महेश संहार करते हैं । इस पर विश्वास करके यदि कृषक को ही विष्णु कहें तो कोई अतिशयोक्ति न होगी । आकाश में उड़ने वाले स्वतंत्र पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाला मानव, यहाँ तक कि जलचर भी कृषकों पर ही निर्भर है । तपस्या भरा त्याग, अभिमान रहित उदारता और क्लांति रहित परिश्रम का यदि चित्र देखना है तो आप भारतीय कृषक को देखिए । वह स्वयं न खाकर दूसरों को खिलाता है, स्वयं न पहनकर दूसरों को वस्त्र देता है । उसके अनुपम त्याग की समानता कोई नहीं कर सकता है । भारतीय कृषक की आकृति में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों कोई वीतराग संन्यासी हो । जिसे न दु:ख में दु:ख और न सुख में सुख की कामना है; जिसे न अज्ञान से आत्म-ग्लानि होती है और न दरिद्रता से दीनता । यह वह कर्मयोगी है जो फल प्राप्ति की इच्छा से रहित होकर कर्म में तल्लीन रहता है ।

प्रश्न 52

‘भारतीय’ शब्द में ‘प्रत्यय’ है

  1. Aभार
  2. Bतीय
  3. Cईय
  4. Dभारती

व्याख्या

‘भारतीय’ शब्द ‘भारत’ मूल शब्द में ‘ईय’ प्रत्यय जोड़कर बना है (भारत + ईय = भारतीय)। इसी प्रकार राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय। ‘तीय’ गलत विच्छेद है क्योंकि मूल शब्द ‘भारत’ है, ‘भार’ नहीं।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 74 से 83 तक के उत्तर दीजिए । प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का प्रकाश विश्व भर में फैल रहा है । इस महान भारतीय संस्कृति के वैशिष्ट्य बिंदु निम्नानुसार है - प्राचीनता-भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यंत प्राचीन है । सरस्वती-सैंधव सभ्यता की खोज एवं उत्खनन से प्राप्त सामग्री का मूल्य आँकना संभव नहीं है । यह प्राप्त सामग्री आज भी हमारा गौरव है । इनका संरक्षण एवं अध्ययन हमारा ध्येय होना चाहिए । निरंतरता-भारतीय संस्कृति की धारा निर्बाध रूप से हजारों वर्षों से बहती चली आ रही है । सैंधव सभ्यता से प्राप्त देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भारतीयों के लिए पूजनीय हैं । अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना मूल स्वरूप स्थायी बनाए रखा है । आध्यात्मिकता-अध्यात्म भारतीय संस्कृति का प्राण तत्त्व है । हमारी संस्कृति का विकास तपोवनों और आश्रमों में हुआ है । ग्रहणशीलता-बाहरी तत्त्वों को आत्मसात् करने की क्षमता और समन्वित जीवनशैली भारतीय संस्कृति का प्रमुख गुण है । भारतीय संस्कृति की प्रेरक व्यवस्था व्यक्ति को नैतिक रूप से दृढ़ कर मानव बनाती है । भारतीय संस्कृति का सौंदर्य सार्वभौमिक है ।

प्रश्न 83

मानव शब्द में प्रत्यय है -

  1. Aव
  2. Bअव
  3. Cआव
  4. Dअ

व्याख्या

‘मानव’ शब्द ‘मनु’ में ‘अ’ प्रत्यय लगाकर बना है (मनु + अ = मानव), अर्थात् मनु की संतान। तद्धित ‘अ’ प्रत्यय लगने पर आदि स्वर में वृद्धि (म → मा) और ‘उ’ का ‘व’ हो जाता है, जैसे शिव + अ = शैव।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31 से 40 तक के उत्तर लिखिए : भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ पर सभी ऋतुएँ समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक रहती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता रहा है और मुक्ति पाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक-व्यवहारों से भी परिचित थे । आज भी वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन शुभ माने जाते हैं ।

प्रश्न 33

किस विकल्प में ‘इक’ प्रत्यय का प्रयोग नहीं हुआ है ?

  1. Aसटीक
  2. Bरसिक
  3. Cधार्मिक
  4. Dवर्णिक

व्याख्या

‘रसिक’ (रस + इक), ‘धार्मिक’ (धर्म + इक) और ‘वर्णिक’ (वर्ण + इक) में ‘इक’ प्रत्यय लगा है। ‘सटीक’ शब्द ‘स + टीक’ (उपसर्ग ‘स’ = सहित) से बना है; इसके अंत का ‘ईक’ प्रत्यय नहीं बल्कि मूल शब्द ‘टीक’ का भाग है। अतः सटीक में ‘इक’ प्रत्यय नहीं है।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न संख्या 77 से 86 तक के उत्तर दीजिए । भारतीय मन संपूर्ण प्रकृति और नदियों का भी मातृ स्वरूप में दर्शन करता है । गंगा को हम माता कहते हैं, तुलसी को हमने माता माना, अश्वत्थ वृक्ष की हमने पूजा की और इन सबके माध्यम से समाज के मन में प्रकृति के प्रति एक पूज्य भाव उत्पन्न किया । हम तो कबूतरों, चिड़ियों को दाना चुगाते हैं, हम तो चींटियों तक को आटा डालते हैं क्योंकि इन सबके अस्तित्व का कोई प्रयोजन है । इस विश्व के प्रत्येक पेड़-पौधे, जीव-जंतु का अपना प्रयोजन है । इस प्रयोजन को जानकर सारे विश्व की रचना में उसका क्या स्थान है, इसको पहचानकर उसको बनाए रखें, तभी समन्वय ठीक से बैठेगा । इसी को हमारे यहाँ धर्म कहा है । उसको पहचानकर, उसके नियमों को जानकर तदनुसार यदि हम अपनी सारी रचना और विकास-पथ का उपयोग करेंगे तो प्रकृति के साथ शायद हमारा सुसंगत विकास हो सकेगा । हमारी प्राचीन काल से ही यह अवधारणा रही है कि प्रकृति के साथ मिलकर चलो और इसलिए प्रकृति के प्रति पूज्यभाव हमने उत्पन्न किया । पृथ्वी को हमने माता कहा है । धरती धारण करती है इसीलिए उसे माता कहा । वास्तव में जिस धरा और प्रकृति के सहारे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व निर्भर है, वही आज संकटग्रस्त हो गई है । पश्चिम की उपभोगवादी दृष्टि से प्रकृति के अमर्यादित उपभोग का विचार विकसित हुआ है । हमारी प्रथा संयमित उपभोग की है । हमारे वर्तमान के लिए भी यही विकास-पथ श्रेष्ठ है और यही शेष संसार को नष्ट होने के मार्ग से बचाने वाला मार्गदर्शक विकास-पथ हो सकता है ।

प्रश्न 80

‘पश्चिम’ शब्द में प्रत्यय है-

  1. Aईम
  2. Bपश्च्
  3. Cइम
  4. Dइम्

व्याख्या

‘पश्चिम’ शब्द ‘पश्च्’ मूल में ‘इम’ प्रत्यय जोड़कर बना है (पश्च् + इम = पश्चिम)। ‘पश्च्’ मूल शब्द है, प्रत्यय नहीं; ‘ईम’ और ‘इम्’ प्रत्यय के शुद्ध रूप नहीं हैं।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 90 तक उत्तर दीजिए । ‘संस्कृति’ शब्द का संबंध संस्कार से है जिसका अर्थ है संशोधन करना, उत्तम बनाना, परिष्कार करना । अंग्रेजी शब्द ‘कल्चर’ में वही धातु है जो ‘एग्रीकल्चर’ में है । इसका भी अर्थ ‘पैदा करना, सुधारना’ है । संस्कारों से किसी व्यक्ति अथवा जाति का विकास गतिपूर्वक होता है । जातीय संस्कारों को ही संस्कृति कहते हैं । संस्कृति एक समूहवाचक शब्द है । जलवायु के अनुकूल रहन-सहन की विधियाँ और विचार-परंपराएँ जाति के लोगों में दृढ़मूल हो जाने से जाति के संस्कार बन जाते हैं । इनको प्रत्येक व्यक्ति अपनी निजी प्रकृति के अनुकूल न्यूनाधिक मात्रा में पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त करता है । ये संस्कार व्यक्ति के घरेलू जीवन तथा सामाजिक जीवन में परिलक्षित होते हैं । मनुष्य अकेला रहकर भी इनसे छुटकारा नहीं पा सकता । संस्कृति का बाह्य पक्ष भी होता है और आंतरिक भी । उसका बाह्य पक्ष आंतरिक का प्रतिबिम्ब नहीं तो उससे संबंधित अवश्य रहता है । हमारे बाह्य आचार, हमारे विचारों और मनोवृत्तियों के परिचायक होते हैं । संस्कृति एक देश-विशेष की उपज होती है, उसका संबंध देश के भौतिक वातावरण और उसके पालित, पोषित एवं परिवर्द्धित विचारों से होता है । भाषा संस्कृति का अंग है, फिर भी वह हमारी जातीय मनोवृत्ति की परिचायिका होती है ।

प्रश्न 82

‘सामाजिक’ शब्द में प्रत्यय है

  1. Aअ
  2. Bअक
  3. Cइक
  4. Dक

व्याख्या

‘सामाजिक’ = समाज + इक। ‘इक’ प्रत्यय लगने पर पहले स्वर की वृद्धि होती है (स → सा), जैसे— समाज → सामाजिक, इतिहास → ऐतिहासिक। अतः प्रत्यय ‘इक’ है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'पूजनीय' शब्द में प्रत्यय है —

  1. Aईय
  2. Bअनीय
  3. Cनीय
  4. Dइय

व्याख्या

पूजनीय = पूज् + अनीय। 'अनीय' संस्कृत कृत् प्रत्यय है (दर्शनीय, माननीय)। 'ईय' लगाने पर बचा भाग 'पूजन्' सही मूल नहीं बनता।

प्रश्न 2

'दैनिक' शब्द में प्रत्यय है —

  1. Aनिक
  2. Bइक
  3. Cऐनिक
  4. Dक

व्याख्या

दैनिक = दिन + इक। 'इक' लगने पर 'दि' की वृद्धि होकर 'दै' बना है।

प्रश्न 3

कृत् प्रत्यय से बना शब्द है —

  1. Aमिठास
  2. Bबचपन
  3. Cलिखावट
  4. Dमानवता

व्याख्या

लिखावट = लिख (धातु) + आवट, इसलिए कृत् प्रत्यय है। मिठास (मीठा), बचपन (बच्चा), मानवता (मानव) संज्ञा/विशेषण से बने तद्धित शब्द हैं।

प्रश्न 4

'कौंतेय' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?

  1. Aएय
  2. Bतेय
  3. Cय
  4. Dईय

व्याख्या

कौंतेय = कुंती + एय (कुंती का पुत्र)। अपत्यवाचक 'एय' प्रत्यय लगने पर 'कु' की वृद्धि 'कौ' हुई है।

प्रश्न 5

किस शब्द में ऊनवाचक (लघुतावाचक) प्रत्यय है?

  1. Aडिबिया
  2. Bदयालु
  3. Cसुनहरा
  4. Dदुकानदार

व्याख्या

डिबिया = डिब्बा + इया, जो छोटे डिब्बे का बोध कराता है। दयालु गुणवाचक, सुनहरा सादृश्यवाचक और दुकानदार कर्तृवाचक है।

प्रश्न 6

'अग्रिम' में प्रत्यय है —

  1. Aरिम
  2. Bइम
  3. Cइम्
  4. Dम

व्याख्या

अग्रिम = अग्र + इम, जैसे पश्च + इम = पश्चिम, अंत + इम = अंतिम।

प्रश्न 7

'अस्वाभाविक' शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय क्रमशः हैं —

  1. Aअ, इक
  2. Bअस्, इक
  3. Cअ, क
  4. Dस्व, इक

व्याख्या

अस्वाभाविक = अ + स्वभाव + इक। 'स्व' का 'स्वा' होना वृद्धि है; उपसर्ग 'अ' और प्रत्यय 'इक' है।

प्रश्न 8

किस शब्द में भाववाचक 'पन' प्रत्यय है?

  1. Aअपनापन
  2. Bपवन
  3. Cसपना
  4. Dजीवन

व्याख्या

अपनापन = अपना (सर्वनाम) + पन। पवन रूढ़ शब्द है, सपना 'स्वप्न' का तद्भव है और जीवन = जीव् + अन; इनमें 'पन' प्रत्यय नहीं है।

प्रश्न 9

कक्षा 6 में प्रत्यय पढ़ाते समय बच्चों को सबसे अधिक समझ किस गतिविधि से मिलेगी?

  1. Aप्रत्ययों की सूची रटवाना
  2. Bमूल शब्द से प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनवाना और उनका वाक्य में प्रयोग कराना
  3. Cकेवल परिभाषा लिखवाना
  4. Dपाठ के कठिन शब्दों का श्रुतलेख

व्याख्या

शब्द-निर्माण और प्रयोग से बच्चा देखता है कि प्रत्यय अर्थ व शब्द-भेद कैसे बदलता है। यह सक्रिय, संदर्भ-आधारित अधिगम है।

प्रश्न 10

'राष्ट्रीय' शब्द का सही विच्छेद है —

  1. Aराष्ट्र + ईय
  2. Bराष्ट्री + य
  3. Cराष्ट् + रीय
  4. Dराष्ट्र + इय

व्याख्या

राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय। 'ईय' लगने पर मूल शब्द का अंतिम 'अ' लुप्त हो जाता है, वृद्धि नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में प्रत्यय से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में हिंदी भाषा I व II से प्रत्यय के 5 प्रश्न आए — भारतीय, मानव, पश्चिम, सामाजिक के प्रत्यय और 'इक' प्रत्यय वाले शब्द की पहचान।

कृत् और तद्धित प्रत्यय में क्या अंतर है?+

कृत् प्रत्यय धातु (क्रिया के मूल रूप) में लगते हैं, जैसे पढ़ + आई = पढ़ाई। तद्धित प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या अव्यय में लगते हैं, जैसे मानव + ता = मानवता।

'मानव' शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?+

मानव = मनु + अ। तद्धित 'अ' प्रत्यय लगने पर 'म' की वृद्धि 'मा' और 'उ' का 'व' हो जाता है।

'सामाजिक' में प्रत्यय 'इक' है या 'इक' के साथ कुछ और?+

केवल 'इक'। समाज + इक = सामाजिक; 'स' का 'सा' होना आदि स्वर की वृद्धि है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT पाठ्यपुस्तकें — हिंदी (वसंत, दूर्वा आदि) एवं व्याकरण अभ्यास
  2. केंद्रीय हिंदी निदेशालय — देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण
  3. BSER — REET 2024 आधिकारिक प्रश्न-पत्र व अंतिम उत्तर-कुंजी (मूल PDF; बोर्ड पोर्टल पर अब उपलब्ध नहीं)

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए