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REET लेवल 1 व 2 · हिंदी

सर्वनाम

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सर्वनाम वे शब्द हैं जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं। REET में गद्यांश से रेखांकित शब्द देकर उसका शब्द-भेद (सर्वनाम है या नहीं) पहचानने के प्रश्न बार-बार आते हैं, जहाँ सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण के बीच का महीन अंतर परखा जाता है।

  • REET 2024 में 3 प्रश्न
  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के तीनों प्रश्न गद्यांश से रेखांकित शब्द (‘हमारा’, ‘हमने’, ‘उसका’) देकर उसका शब्द-भेद पूछने वाले थे, और तीनों का आधिकारिक उत्तर सर्वनाम था। ध्यान देने की बात यह है कि जब सर्वनाम किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बताए (जैसे ‘उसका घर’ में ‘उसका’), तो व्याकरण की दृष्टि से यह सार्वनामिक विशेषण भी कहा जा सकता है — पर REET के विकल्पों में जब ‘सर्वनाम’ और ‘विशेषण’ दोनों साथ न हों, या सीधा भेद पूछा जाए, तो आधिकारिक उत्तर सर्वनाम ही माना गया है।

सर्वनाम क्या है?

संज्ञा के बार-बार प्रयोग से बचने के लिए उसके स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं — जैसे ‘राम स्कूल गया, राम ने किताब पढ़ी’ की जगह ‘राम स्कूल गया, उसने किताब पढ़ी’ कहना अधिक स्वाभाविक है, यहाँ ‘उसने’ सर्वनाम है। हिंदी में मुख्य रूप से 11 मूल सर्वनाम शब्द माने जाते हैं — मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ — इन्हीं से बाकी सभी रूप (मेरा, तुम्हारा, उसका, हमने आदि) बनते हैं।

हिंदी व्याकरण में सर्वनाम के छह भेद माने जाते हैं: पुरुषवाचक (मैं, तू, वह), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), संबंधवाचक (जो...सो), प्रश्नवाचक (कौन, क्या) और निजवाचक (आप, स्वयं, खुद)।

सर्वनाम के वचन और पुरुष के अनुसार क्रिया का रूप भी बदलता है, इसलिए वाक्य में सही सर्वनाम चुनना व्याकरणिक शुद्धता के लिए भी जरूरी है — जैसे ‘मैं जाता हूँ’ में उत्तम पुरुष एकवचन के अनुसार क्रिया ‘हूँ’ आई है, जबकि ‘हम जाते हैं’ में बहुवचन के अनुसार ‘हैं’ आया है। REET में कभी-कभी वाक्य-शुद्धि के प्रश्नों में गलत सर्वनाम-क्रिया मेल (जैसे ‘वह जाते हैं’ की जगह ‘वह जाता है’ होना चाहिए) पहचानने को भी कहा जाता है, इसलिए सर्वनाम को क्रिया के साथ जोड़कर भी अभ्यास करना चाहिए।

‘आप’ शब्द का प्रयोग दोतरफा होता है — सम्मानसूचक मध्यम पुरुष सर्वनाम के रूप में (जैसे ‘आप कैसे हैं?’) और स्वयं के लिए निजवाचक सर्वनाम के रूप में (जैसे ‘मैं आप ही यह काम करूँगा’); वाक्य के प्रसंग से ही यह भेद तय होता है। अधिकांश सर्वनाम स्वयं में लिंग-निरपेक्ष होते हैं, और वाक्य में क्रिया उस संज्ञा के लिंग के अनुसार प्रयुक्त होती है जिसके स्थान पर सर्वनाम आया है — बार-बार संज्ञा दोहराने से बचाकर सर्वनाम भाषा को संक्षिप्त व सहज बनाते हैं।

अभ्यास के लिए कोई भी छोटा गद्यांश लेकर उसमें आए हर सर्वनाम को रेखांकित करें और उसका भेद (पुरुषवाचक/निश्चयवाचक/आदि) लिखने का अभ्यास करें — इससे गद्यांश-आधारित प्रश्नों में रेखांकित पद का भेद पहचानने की गति और सटीकता, दोनों बेहतर होती हैं।

सर्वनाम के छह भेद

भेदउदाहरण शब्दप्रयोगउदाहरण वाक्य
पुरुषवाचक सर्वनाममैं, तू, तुम, हम, वह, वेबोलने वाला, सुनने वाला या जिसकी बात हो रही हो, उसके स्थान परमैं स्कूल जाता हूँ।
निश्चयवाचक सर्वनामयह, वह, ये, वेकिसी निश्चित व्यक्ति/वस्तु की ओर संकेत करने के लिएयह मेरी किताब है।
अनिश्चयवाचक सर्वनामकोई, कुछअनिश्चित व्यक्ति/वस्तु के लिए, जब नाम निश्चित न होकोई दरवाजे पर खड़ा है।
संबंधवाचक सर्वनामजो, सोदो वाक्यों/उपवाक्यों को आपस में जोड़ने के लिएजो मेहनत करता है, सो सफल होता है।
प्रश्नवाचक सर्वनामकौन, क्याप्रश्न पूछने के लिएतुम कौन हो?
निजवाचक सर्वनामआप, स्वयं, खुदकर्ता स्वयं अपने लिए प्रयोग करेमैं अपना काम स्वयं करता हूँ।

सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में अंतर

यह भेद REET में सबसे ज्यादा भ्रम पैदा करता है। जब सर्वनाम शब्द (यह, वह, कोई, कुछ) अकेले संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त हो, तो वह सर्वनाम है — जैसे ‘वह आया’। लेकिन जब यही शब्द किसी संज्ञा से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बताए, तो व्याकरण में उसे सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है — जैसे ‘वह लड़का आया’ में ‘वह’ संज्ञा ‘लड़का’ के पहले आकर विशेषण की तरह काम कर रहा है।

‘हमारा’, ‘हमने’, ‘उसका’ जैसे रूप मूल सर्वनाम (हम, वह) से कारक-चिह्न (का, ने) जुड़ने पर बनते हैं। परीक्षा में जब विकल्पों में ‘सार्वनामिक विशेषण’ न हो और केवल संज्ञा-सर्वनाम-विशेषण-क्रिया में चुनना हो, तो ऐसे रूपों को सर्वनाम ही माना जाता है क्योंकि वे मूल रूप से किसी संज्ञा (व्यक्ति) के स्थान पर आए शब्द से बने हैं।

पुरुषवाचक सर्वनाम को आगे तीन उप-भेदों में भी बाँटा जाता है — उत्तम पुरुष (बोलने वाला: मैं, हम), मध्यम पुरुष (सुनने वाला: तू, तुम, आप) और अन्य पुरुष (जिसके बारे में बात हो रही हो: वह, वे)। REET में पुरुषवाचक सर्वनाम के प्रश्न कभी-कभी इन उप-भेदों के आधार पर भी पूछे जाते हैं, इसलिए ‘हम’ को उत्तम पुरुष बहुवचन और ‘वे’ को अन्य पुरुष बहुवचन के रूप में याद रखना उपयोगी रहता है।

इस भेद को ठीक से समझ लेने के बाद विशेषण टॉपिक में सार्वनामिक विशेषण पढ़ना भी आसान हो जाता है, क्योंकि दोनों जगह मूल नियम एक ही है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

कक्षा में एक छोटी कहानी सुनाकर बार-बार आने वाली संज्ञाओं (राम, सीता) को सर्वनाम (वह, उसने) से बदलने का अभ्यास कराएँ — इससे प्रयोग की समझ बढ़ती है।

शिक्षण सामग्री

छह भेदों के अलग-अलग रंग के कार्ड पर उदाहरण शब्द लिखकर वर्गीकरण खेल कक्षा 6-8 में कारगर रहता है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे ‘यह’, ‘वह’, ‘कोई’ जैसे शब्दों को हमेशा सर्वनाम मान लेते हैं, भले ही वे संज्ञा से पहले आकर विशेषण का काम कर रहे हों — वाक्य में स्थिति देखकर ही तय करना सिखाएँ।

आकलन

5 वाक्य देकर रेखांकित शब्द का भेद पूछें (सर्वनाम या सार्वनामिक विशेषण), और सर्वनाम के 6 भेदों में से हर एक का एक-एक उदाहरण लिखवाएँ।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

अगर ‘यह/वह/कोई’ के ठीक बाद कोई संज्ञा (व्यक्ति/वस्तु का नाम) आए, तो प्रश्न-विकल्पों में ‘सार्वनामिक विशेषण’ देखें; न हो तो सर्वनाम चुनें। अगर ये शब्द अकेले संज्ञा की जगह खड़े हों (कोई संज्ञा साथ न हो), तो निश्चित रूप से सर्वनाम हैं।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 74 से 83 तक के उत्तर दीजिए । प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का प्रकाश विश्व भर में फैल रहा है । इस महान भारतीय संस्कृति के वैशिष्ट्य बिंदु निम्नानुसार है - प्राचीनता-भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यंत प्राचीन है । सरस्वती-सैंधव सभ्यता की खोज एवं उत्खनन से प्राप्त सामग्री का मूल्य आँकना संभव नहीं है । यह प्राप्त सामग्री आज भी हमारा गौरव है । इनका संरक्षण एवं अध्ययन हमारा ध्येय होना चाहिए । निरंतरता-भारतीय संस्कृति की धारा निर्बाध रूप से हजारों वर्षों से बहती चली आ रही है । सैंधव सभ्यता से प्राप्त देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भारतीयों के लिए पूजनीय हैं । अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना मूल स्वरूप स्थायी बनाए रखा है । आध्यात्मिकता-अध्यात्म भारतीय संस्कृति का प्राण तत्त्व है । हमारी संस्कृति का विकास तपोवनों और आश्रमों में हुआ है । ग्रहणशीलता-बाहरी तत्त्वों को आत्मसात् करने की क्षमता और समन्वित जीवनशैली भारतीय संस्कृति का प्रमुख गुण है । भारतीय संस्कृति की प्रेरक व्यवस्था व्यक्ति को नैतिक रूप से दृढ़ कर मानव बनाती है । भारतीय संस्कृति का सौंदर्य सार्वभौमिक है ।

प्रश्न 81

“यह प्राप्त सामग्री आज भी हमारा गौरव है ।” वाक्य में प्रयुक्त ‘हमारा’ शब्द निम्नलिखित में से है -

  1. Aसंज्ञा
  2. Bसर्वनाम
  3. Cक्रिया-विशेषण
  4. Dक्रिया

व्याख्या

‘हमारा’ शब्द ‘हम’ (उत्तम पुरुष सर्वनाम) का संबंध कारक रूप है, जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। इसलिए यह सर्वनाम है (कुछ व्याकरण इसे सार्वनामिक विशेषण भी कहते हैं, पर विकल्पों में ‘सर्वनाम’ ही उपयुक्त है)।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31-40 तक के उत्तर दीजिए : आम आदमी के लिए विज्ञान का मतलब क्या है ? विज्ञान मानव सभ्यता और संस्कृति का एक रूप है । आधुनिक विज्ञान ने इस नैसर्गिक सादगी व सौन्दर्य को हाशिए पर डाल कर विज्ञान को एक औपचारिक ढाँचे में कैद कर लिया है । विज्ञान एक औजार बन गया है जिससे प्रकृति के रहस्यों को खोलने की कोशिश की जाती हैं । इस प्रक्रिया में आम इंसान का संबंध इससे कट गया है । ‘विज्ञान पूर्वाग्रहों से मुक्त ज्ञान का भण्डार है’- ऐसा कहा जाता है । विज्ञान को विकास से जोड़ा जाता है । यह सरासर गलत है । जिन आदिवासियों ने सदियों प्रकृति के साथ सम्मानजनक रिश्ता बनाए रखा, आज हमने उन्हें ‘अविकसित’ मान लिया है । मानव का मानव से संबंध हानि-लाभ पर निर्धारित हो रहा है ।

प्रश्न 39

‘..... आज हमने उन्हें अविकसित मान लिया है ।’ दिए गए वाक्य में रेखांकित शब्द है (रेखांकित शब्द : ‘हमने’)

  1. Aसंज्ञा
  2. Bसर्वनाम
  3. Cविशेषण
  4. Dक्रिया

व्याख्या

‘हमने’ = ‘हम’ + ‘ने’ (कर्ता कारक चिह्न)। ‘हम’ उत्तम पुरुष पुरुषवाचक सर्वनाम है जो बोलने वाले के नाम के स्थान पर आता है। अतः रेखांकित शब्द सर्वनाम है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 90 तक उत्तर दीजिए । ‘संस्कृति’ शब्द का संबंध संस्कार से है जिसका अर्थ है संशोधन करना, उत्तम बनाना, परिष्कार करना । अंग्रेजी शब्द ‘कल्चर’ में वही धातु है जो ‘एग्रीकल्चर’ में है । इसका भी अर्थ ‘पैदा करना, सुधारना’ है । संस्कारों से किसी व्यक्ति अथवा जाति का विकास गतिपूर्वक होता है । जातीय संस्कारों को ही संस्कृति कहते हैं । संस्कृति एक समूहवाचक शब्द है । जलवायु के अनुकूल रहन-सहन की विधियाँ और विचार-परंपराएँ जाति के लोगों में दृढ़मूल हो जाने से जाति के संस्कार बन जाते हैं । इनको प्रत्येक व्यक्ति अपनी निजी प्रकृति के अनुकूल न्यूनाधिक मात्रा में पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त करता है । ये संस्कार व्यक्ति के घरेलू जीवन तथा सामाजिक जीवन में परिलक्षित होते हैं । मनुष्य अकेला रहकर भी इनसे छुटकारा नहीं पा सकता । संस्कृति का बाह्य पक्ष भी होता है और आंतरिक भी । उसका बाह्य पक्ष आंतरिक का प्रतिबिम्ब नहीं तो उससे संबंधित अवश्य रहता है । हमारे बाह्य आचार, हमारे विचारों और मनोवृत्तियों के परिचायक होते हैं । संस्कृति एक देश-विशेष की उपज होती है, उसका संबंध देश के भौतिक वातावरण और उसके पालित, पोषित एवं परिवर्द्धित विचारों से होता है । भाषा संस्कृति का अंग है, फिर भी वह हमारी जातीय मनोवृत्ति की परिचायिका होती है ।

प्रश्न 83

‘उसका बाह्य पक्ष आंतरिक का प्रतिबिम्ब नहीं तो उससे संबंधित अवश्य रहता है’ वाक्य में प्रयुक्त ‘उसका’ शब्द है

  1. Aक्रिया
  2. Bविशेषण
  3. Cसंज्ञा
  4. Dसर्वनाम

व्याख्या

‘उसका’ = ‘वह’ (अन्य पुरुष सर्वनाम) + ‘का’ (संबंध कारक)। यहाँ ‘उसका’ पिछले वाक्य की संज्ञा ‘संस्कृति’ के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है, इसलिए आधिकारिक उत्तर सर्वनाम है। (संज्ञा से पहले आने के कारण इसे सार्वनामिक विशेषण भी कहा जा सकता है, पर विकल्पों में मूल शब्द-भेद सर्वनाम ही अपेक्षित है।)

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘जो परिश्रम करता है, सो सफल होता है’ वाक्य में ‘जो...सो’ किस प्रकार का सर्वनाम है?

  1. Aप्रश्नवाचक सर्वनाम
  2. Bसंबंधवाचक सर्वनाम
  3. Cनिजवाचक सर्वनाम
  4. Dअनिश्चयवाचक सर्वनाम

व्याख्या

‘जो...सो’ दो उपवाक्यों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहा जाता है। प्रश्नवाचक सर्वनाम (कौन, क्या) प्रश्न पूछने के लिए प्रयुक्त होते हैं, जो यहाँ नहीं हो रहा।

प्रश्न 2

‘मैं अपना काम स्वयं करता हूँ’ वाक्य में ‘स्वयं’ किस प्रकार का सर्वनाम है?

  1. Aपुरुषवाचक सर्वनाम
  2. Bनिश्चयवाचक सर्वनाम
  3. Cनिजवाचक सर्वनाम
  4. Dप्रश्नवाचक सर्वनाम

व्याख्या

‘स्वयं’ कर्ता द्वारा अपने लिए प्रयुक्त होता है, यह दर्शाने के लिए कि कार्य स्वयं किया गया न कि किसी और ने कराया। ऐसे सर्वनाम को निजवाचक सर्वनाम कहते हैं।

प्रश्न 3

‘कोई दरवाजे पर खड़ा है’ वाक्य में ‘कोई’ किस प्रकार का सर्वनाम है?

  1. Aनिश्चयवाचक सर्वनाम
  2. Bअनिश्चयवाचक सर्वनाम
  3. Cसंबंधवाचक सर्वनाम
  4. Dपुरुषवाचक सर्वनाम

व्याख्या

‘कोई’ यहाँ किसी अनिश्चित (अज्ञात) व्यक्ति की ओर संकेत कर रहा है, जिसका नाम या पहचान स्पष्ट नहीं है — इसलिए यह अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।

प्रश्न 4

‘वह लड़का मेहनती है’ वाक्य में ‘वह’ शब्द है

  1. Aसर्वनाम
  2. Bसार्वनामिक विशेषण
  3. Cक्रिया-विशेषण
  4. Dसंज्ञा

व्याख्या

यहाँ ‘वह’ अकेले संज्ञा के स्थान पर नहीं आया बल्कि संज्ञा ‘लड़का’ से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है, इसलिए यह सार्वनामिक विशेषण है, शुद्ध सर्वनाम नहीं।

प्रश्न 5

हिंदी में मूल सर्वनाम शब्दों की संख्या मानी जाती है

  1. A6
  2. B8
  3. C11
  4. D13

व्याख्या

हिंदी व्याकरण में 11 मूल सर्वनाम शब्द माने जाते हैं — मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ। इन्हीं से बाकी सभी रूप (मेरा, उसका आदि) बनते हैं।

प्रश्न 6

‘तुम कौन हो?’ वाक्य में ‘कौन’ सर्वनाम है

  1. Aप्रश्नवाचक सर्वनाम
  2. Bनिश्चयवाचक सर्वनाम
  3. Cसंबंधवाचक सर्वनाम
  4. Dनिजवाचक सर्वनाम

व्याख्या

‘कौन’ का प्रयोग यहाँ प्रश्न पूछने के लिए हुआ है, इसलिए यह प्रश्नवाचक सर्वनाम है। कौन और क्या — दोनों मुख्य प्रश्नवाचक सर्वनाम हैं।

प्रश्न 7

‘हमने उसे पत्र लिखा’ वाक्य में ‘हमने’ शब्द है

  1. Aसंज्ञा
  2. Bसर्वनाम
  3. Cविशेषण
  4. Dक्रिया

व्याख्या

‘हमने’ = ‘हम’ (पुरुषवाचक सर्वनाम) + ‘ने’ (कर्ता कारक चिह्न)। ‘हम’ बोलने वालों के समूह के स्थान पर प्रयुक्त संज्ञा-प्रतिस्थापी शब्द है, इसलिए यह सर्वनाम है।

प्रश्न 8

सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण के भेद को कक्षा में स्पष्ट करने का सबसे उपयुक्त तरीका है

  1. Aदोनों को एक ही समझाकर आगे बढ़ जाना
  2. Bएक ही शब्द (जैसे ‘वह’) को दो अलग वाक्यों में — अकेले और संज्ञा के साथ — प्रयोग करके तुलना कराना
  3. Cकेवल परिभाषा रटवाना
  4. Dइस भेद को परीक्षा के लिए जरूरी न बताना

व्याख्या

सबसे प्रभावी तरीका यह है कि एक ही शब्द को अकेले (सर्वनाम रूप में) और संज्ञा के साथ (सार्वनामिक विशेषण रूप में) दोनों वाक्यों में दिखाकर तुलना कराई जाए — इससे बच्चे स्थिति के अनुसार भेद करना सीखते हैं।

प्रश्न 9

‘यह मेरी किताब है’ वाक्य में ‘मेरी’ शब्द किस मूल सर्वनाम से बना है?

  1. Aतू
  2. Bमैं
  3. Cवह
  4. Dआप

व्याख्या

‘मेरी’ मूल सर्वनाम ‘मैं’ का संबंध-कारक रूप है (मैं → मेरा/मेरी/मेरे)। यह उत्तम पुरुष पुरुषवाचक सर्वनाम के अंतर्गत आता है।

प्रश्न 10

‘कुछ ठीक नहीं लग रहा है’ वाक्य में ‘कुछ’ सर्वनाम है

  1. Aनिश्चयवाचक सर्वनाम
  2. Bअनिश्चयवाचक सर्वनाम
  3. Cप्रश्नवाचक सर्वनाम
  4. Dनिजवाचक सर्वनाम

व्याख्या

‘कुछ’ यहाँ अकेले किसी अनिश्चित वस्तु/स्थिति के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है (किसी संज्ञा से पहले नहीं आया), इसलिए यह अनिश्चयवाचक सर्वनाम है। ध्यान रहे, ‘कुछ लोग’ जैसे प्रयोग में ‘कुछ’ संज्ञा से पहले आकर विशेषण (अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण) का काम करता है, शुद्ध सर्वनाम नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वनाम किसे कहते हैं?+

संज्ञा के बार-बार प्रयोग से बचने के लिए उसके स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं, जैसे मैं, तू, वह, यह, कोई।

सर्वनाम के कितने भेद होते हैं?+

हिंदी व्याकरण में सर्वनाम के छह भेद माने जाते हैं — पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, संबंधवाचक, प्रश्नवाचक और निजवाचक।

सर्वनाम से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 3 प्रश्न आए थे, सभी गद्यांश से रेखांकित शब्द का भेद पहचानने पर आधारित। भाषा-I/II में यह हर साल का नियमित टॉपिक है।

सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषण में क्या अंतर है?+

जब सर्वनाम शब्द अकेले संज्ञा के स्थान पर आए तो वह सर्वनाम है; जब वही शब्द किसी संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताए, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

पुरुषवाचक सर्वनाम के कितने उप-भेद हैं?+

पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन उप-भेद हैं — उत्तम पुरुष (मैं, हम), मध्यम पुरुष (तू, तुम, आप) और अन्य पुरुष (वह, वे), जो क्रमशः बोलने वाले, सुनने वाले और जिसके बारे में बात हो रही हो, उसे दर्शाते हैं।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए