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शब्द-भेद — हिंदी के विकारी और अविकारी शब्द

‘वह धीरे चला’ में ‘धीरे’ क्रियाविशेषण है; ‘वह धीमा लड़का है’ में ‘धीमा’ विशेषण। शब्द वही काम कर रहा लगता है, पर भेद अलग है — क्योंकि भेद शब्द से नहीं, वाक्य में उसके काम से तय होता है। यही इस पूरे अध्याय की कुंजी है।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

शब्द-भेद किस आधार पर बनते हैं

व्याकरण में शब्दों को दो तरह से बाँटा जाता है, और दोनों बँटवारे अलग-अलग सवालों का जवाब देते हैं। पहला बँटवारा यह पूछता है कि शब्द वाक्य में क्या काम कर रहा है — नाम बता रहा है, नाम की जगह ले रहा है, गुण बता रहा है, या काम बता रहा है। इसी से आठ शब्द-भेद निकलते हैं। दूसरा बँटवारा यह पूछता है कि शब्द का रूप बदलता है या नहीं — इसी से विकारी और अविकारी दो वर्ग बनते हैं।

विकारी शब्द वे हैं जिनका रूप लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार बदल जाता है। ये चार हैं — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। ‘लड़का’ से ‘लड़के’, ‘अच्छा’ से ‘अच्छी’, ‘जाता’ से ‘जाती’ — रूप बदल रहा है, इसलिए विकारी।

अविकारी शब्द वे हैं जिनका रूप कभी नहीं बदलता। इन्हें अव्यय कहते हैं — ‘अ + व्यय’, यानी जिसका व्यय न हो, जो ख़र्च न हो। क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक — चारों अव्यय के ही भेद हैं। ‘धीरे’ चाहे लड़का चले या लड़की, ‘धीरे’ ही रहेगा।

सबसे ज़रूरी बात अंत में: भेद शब्द का स्थायी गुण नहीं है, वाक्य में उसके काम से तय होता है। ‘सोना’ एक वाक्य में संज्ञा है (सोना महँगा है) और दूसरे में क्रिया (मुझे सोना है)। इसलिए प्रश्न हल करते समय शब्द को अलग से मत देखिए — वाक्य में उसका काम देखिए।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया विशेषण, कारक, अव्यय’ एक ही बिंदु में — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 01-07-2026 (2024 के पाठ्यक्रम में इसी बिंदु में ‘उपसर्ग’ भी था; 2026 में उपसर्ग अलग बिंदु ‘उपसर्ग एवं प्रत्यय’ में है) · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तरप्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय, क्रिया’ — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 23-06-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं

आठ शब्द-भेद — एक तालिका में

शब्द-भेदक्या बताता हैवर्गउदाहरण
संज्ञाकिसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान, भाव का नामविकारीराम, नदी, मिठास, सेना
सर्वनामसंज्ञा के बदले आने वाला शब्दविकारीमैं, तू, वह, कोई, जो
विशेषणसंज्ञा या सर्वनाम की विशेषताविकारीअच्छा, लाल, दो, थोड़ा
क्रियाकार्य का होना या करनाविकारीपढ़ना, जाता है, खाया
क्रियाविशेषणक्रिया की विशेषताअविकारीधीरे, आज, यहाँ, बहुत
संबंधबोधकसंज्ञा-सर्वनाम का दूसरे शब्द से संबंधअविकारीके ऊपर, के बिना, के पास
समुच्चयबोधकदो शब्दों या वाक्यों को जोड़नाअविकारीऔर, तथा, किंतु, या
विस्मयादिबोधकमन का आकस्मिक भावअविकारीअरे!, वाह!, हाय!

हर शब्द-भेद विस्तार से — सात पृष्ठ

संज्ञा — पाँच भेद और भाववाचक बनाने के नियम

व्यक्तिवाचक से द्रव्यवाचक तक, और वह नियम जिससे किसी भी शब्द से भाववाचक संज्ञा बनाई जा सकती है।

सर्वनाम — छह भेद और हिंदी के ग्यारह सर्वनाम

पुरुषवाचक से प्रश्नवाचक तक, और ‘आप’ का वह दोहरा काम जिस पर प्रश्न बनता है।

विशेषण — चार भेद, प्रविशेषण और तुलना की तीन अवस्थाएँ

विशेष्य और विशेषण का अंतर, और वह जगह जहाँ विशेषण सर्वनाम जैसा दिखने लगता है।

क्रिया — सकर्मक-अकर्मक, धातु और रचना के पाँच भेद

कर्म से पहचान का सीधा तरीक़ा, तथा प्रेरणार्थक और नामधातु क्रिया।

क्रियाविशेषण — चार भेद और विशेषण से अंतर

‘धीरे’ और ‘धीमा’ का फ़र्क़ — वह एक प्रश्न जिससे दोनों हमेशा अलग हो जाते हैं।

अव्यय — चार भेद और निपात

संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक और वे छोटे शब्द जो अर्थ में बल भरते हैं।

कारक — आठ कारक और विभक्ति चिह्न

करण और अपादान दोनों में ‘से’ आता है — अंतर कैसे पकड़ें, यही इस अध्याय की सबसे बड़ी उलझन है।