वाक्यांश के लिए एक शब्द
बोलते समय हम अक्सर घुमा-फिराकर बात कहते हैं — ‘वह आदमी जो सब कुछ जानता हो’, ‘वह जगह जहाँ पुस्तकें रखी जाती हैं’। लिखते समय यही घुमाव भारी पड़ता है। हिंदी के पास इन पूरे वाक्यांशों की जगह रख देने के लिए एक-एक सधा हुआ शब्द मौजूद है — सर्वज्ञ, पुस्तकालय। इसी को ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ कहते हैं। यह अध्याय भाषा को छोटा नहीं, कसा हुआ बनाता है; अर्थ वही रहता है, पर वाक्य में दम आ जाता है। राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं की दृष्टि से यह सबसे भरोसेमंद अध्यायों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें अंदाजा लगाने की गुंजाइश कम और याद रखने का फल तुरंत मिलता है — या तो शब्द आता है, या नहीं आता। इस पृष्ठ पर हमने 250 से अधिक शब्द विषय के अनुसार बाँटे हैं, ताकि आप उन्हें बिखरी हुई सूची की तरह नहीं, बल्कि जुड़े हुए परिवारों की तरह याद रख सकें। साथ में वे समूह अलग से रखे गए हैं जहाँ चार विकल्प आपस में बहुत मिलते-जुलते होते हैं और असली अंक वहीं कटते हैं। अंत में एक ऐसी तालिका है जिसका स्क्रीनशॉट लेकर आप परीक्षा से पहले पाँच मिनट में पूरा अध्याय दोहरा सकते हैं।
पढ़ने का सही तरीक़ा
इस अध्याय को रटने से पहले एक बात समझ लीजिए — अधिकांश शब्द किसी न किसी सूत्र से बने होते हैं। ‘ज्ञ’ जानने से जुड़ा है, इसलिए सर्वज्ञ, अल्पज्ञ, मर्मज्ञ, अभिज्ञ सब एक ही परिवार के हैं। ‘चर’ चलने से बना है, इसलिए जलचर, थलचर, नभचर, निशाचर एक साथ याद होते हैं। ‘आलय’ का अर्थ घर है, इसलिए पुस्तकालय, विद्यालय, चिकित्सालय, देवालय अपने आप खुल जाते हैं। जब आप एक शब्द के भीतर का टुकड़ा पहचान लेते हैं, तो उसी टुकड़े वाले दस शब्द मुफ़्त में हाथ लग जाते हैं। इसीलिए नीचे की सूची वर्णक्रम से नहीं, विषय से सजाई गई है। दूसरी बात — परीक्षा में प्रश्न शब्द से वाक्यांश की ओर भी पूछा जा सकता है और वाक्यांश से शब्द की ओर भी। इसलिए हर पंक्ति को दोनों दिशाओं में पढ़िए। तीसरी बात, और सबसे ज़रूरी — विकल्पों में गलत उत्तर कभी बेतुका नहीं होता। वह हमेशा पास का, मिलता-जुलता शब्द होता है। इसीलिए इस पृष्ठ पर ‘भ्रम वाले समूह’ अलग से दिए गए हैं; उन्हें सूची से भी ज़्यादा ध्यान से पढ़िए।
ये शब्द बनते कैसे हैं
हिंदी में एक शब्द किसी पूरे वाक्यांश की जगह ले लेता है, तो यह जादू नहीं होता — इसके पीछे तीन सीधे-सादे तरीके काम करते हैं। पहला तरीक़ा उपसर्ग का है, यानी शब्द के आगे जुड़ने वाला छोटा अंश। ‘अ’ और ‘अन्’ किसी बात का निषेध करते हैं, इसीलिए जो मरे नहीं वह अमर और जो जाना न जा सके वह अज्ञेय। ‘नि’ और ‘निर्’ अभाव बताते हैं — जिसमें दोष न हो वह निर्दोष। ‘सु’ अच्छाई जोड़ता है और ‘दुर्’ बुराई — सुशील और दुराचारी इसी नियम से बने हैं। दूसरा तरीक़ा प्रत्यय का है, यानी शब्द के पीछे जुड़ने वाला अंश। ‘-नीय’ और ‘-य’ योग्यता बताते हैं, ‘-कार’ करने वाले को बताता है, ‘-ज्ञ’ जानने वाले को और ‘-चर’ विचरण करने वाले को। तीसरा तरीक़ा समास का है, जिसमें दो पूरे शब्द जुड़कर एक नया अर्थ खड़ा कर देते हैं — ‘प्रत्यक्ष’ और ‘दर्शी’ मिलकर प्रत्यक्षदर्शी, ‘जित’ और ‘इंद्रिय’ मिलकर जितेंद्रिय। जब आप किसी अनजान विकल्प के सामने खड़े हों, तो उसे इन्हीं तीन औजारों से तोड़कर देखिए; अधिकतर बार अर्थ अपने आप सामने आ जाएगा और अंदाजा लगाने की नौबत ही नहीं आएगी।
एक ज़रूरी सावधानी
हर वाक्यांश का कोई एक ही शब्द हो, यह ज़रूरी नहीं। कई बार दो शब्द लगभग एक ही अर्थ देते हैं, जैसे किसी काम में निपुण व्यक्ति के लिए ‘दक्ष’ भी चलता है और ‘निपुण’ भी। ऐसी स्थिति में परीक्षा आपको दोनों विकल्पों में नहीं फँसाती; वह उस शब्द को उत्तर मानती है जो प्रश्न के शब्दों से सबसे पास बैठता हो। इसलिए विकल्प पढ़ते समय जल्दबाजी में पहला परिचित शब्द मत चुन लीजिए — चारों पढ़िए, फिर तय कीजिए कि प्रश्न में कही गई बात किसमें पूरी उतरती है। जहाँ दो विकल्प सचमुच बराबर लगें, वहाँ अधिक विशिष्ट शब्द चुनना प्रायः सही रहता है, क्योंकि प्रश्न-पत्र सामान्य शब्द को उत्तर नहीं बनाता।
आठ श्रेणियाँ — छह पेजों में
सबसे आम भूलें
पहली भूल — ‘द्विमासिक’ और ‘अर्धमासिक’ को उलट देना। द्विमासिक हर दो महीने पर होता है, अर्धमासिक महीने में दो बार। दूसरी भूल — ‘वादी’ और ‘प्रतिवादी’ का घालमेल; मुकदमा करने वाला वादी है, जिस पर मुकदमा हुआ वह प्रतिवादी। तीसरी भूल — ‘आत्मकथा’ के स्थान पर ‘जीवनी’ लिख देना; अपनी लिखी अपनी कहानी आत्मकथा है। चौथी भूल — ‘उभयचर’ को भोजन से जोड़ देना, जबकि वह निवास का शब्द है। पाँचवीं और सबसे महँगी भूल — ‘कृतज्ञ’ की जगह ‘कृतघ्न’ लिख देना; यहाँ आधे वर्ण के फ़र्क़ से अर्थ पूरा उलट जाता है। इन पाँचों को अलग कागज पर लिखकर सामने चिपका लीजिए।
याद रखने का सहारा
शब्द को टुकड़ों में तोड़िए, फिर वह कभी नहीं भूलेगा। ‘ज्ञ’ आया तो समझिए बात जानने की है; ‘चर’ आया तो चलने या रहने की; ‘आलय’ और ‘शाला’ आए तो जगह की; ‘कार’ आया तो बनाने वाले की; ‘वादी’ और ‘भाषी’ आए तो बोलने की; ‘हारी’ और ‘भक्षी’ आए तो खाने की। जब विकल्पों में चार मिलते-जुलते शब्द दिखें, तो पहले यह देखिए कि प्रश्न किस क्रिया की बात कर रहा है — खाने की, जानने की, रहने की या बोलने की। आधे विकल्प वहीं कट जाएँगे।
त्वरित पुनरावृत्ति — शब्द वर्णक्रम में, सामने उसका वाक्यांश (परीक्षा से पहले पाँच मिनट में दोहराने योग्य)
| एक शब्द | वाक्यांश |
|---|---|
| अकाट्य | जिसे काटा न जा सके |
| अगाध | जो बहुत गहरा हो |
| अग्रज | जो पहले जन्मा हो |
| अजर | जो कभी बूढ़ा न हो |
| अजातशत्रु | जिसका कोई शत्रु ही न हो |
| अजेय | जिसे जीता न जा सके |
| अतुलनीय | जिसकी तुलना न हो सके |
| अथाह | जिसकी गहराई नापी न जा सके |
| अद्वितीय | जिसके समान दूसरा न हो |
| अधिनायकतंत्र | जिसमें एक ही व्यक्ति का पूर्ण शासन हो |
| अनंत | जिसका कोई अंत न हो |
| अनभिज्ञ | जिसे किसी बात की जानकारी न हो |
| अनाथ | जिसके माता-पिता न हों |
| अनादि | जिसका कोई आदि न हो |
| अनुज | जो बाद में जन्मा हो |
| अभिज्ञ | जिसे किसी बात की जानकारी हो |
| अभिनेता | जो मंच पर अभिनय करता हो |
| अभियुक्त | जिस पर आरोप लगाया गया हो |
| अभूतपूर्व | जो पहले कभी न हुआ हो |
| अमर | जो कभी न मरे |
| अमावस्या | जिस रात चंद्रमा बिलकुल न दिखे |
| अराजकता | जहाँ कोई शासन ही न हो |
| अर्धमासिक | जो महीने में दो बार होता हो |
| अलौकिक | जो इस लोक से परे हो |
| अल्पज्ञ | जो थोड़ा जानता हो |
| असीम | जिसकी कोई सीमा न हो |
| आत्मकथा | अपने हाथों लिखी अपनी जीवन-कथा |
| आत्मश्लाघी | जो अपनी प्रशंसा आप करे |
| आस्तिक | जो ईश्वर के होने में विश्वास रखता हो |
| उभयचर | जो जल और थल दोनों में रह सके |
| ऊसर | वह भूमि जिसमें कुछ न उगे |
| औषधालय | वह स्थान जहाँ दवाइयाँ मिलती हैं |
| कर्तव्यपरायण | जो अपने कर्तव्य में लगा रहे |
| कारागार | वह स्थान जहाँ बंदी रखे जाते हैं |
| कृतघ्न | जो किए हुए उपकार को न माने |
| कृतज्ञ | जो किए हुए उपकार को मानता हो |
| क्षणिक | जो थोड़ी देर ही टिके |
| गद्य | जो छंद में न लिखा गया हो |
| चिकित्सालय | वह स्थान जहाँ रोगियों का इलाज होता है |
| छिद्रान्वेषी | जो दूसरों के दोष ही खोजता रहे |
| जनतंत्र | जिसमें जनता का शासन हो |
| जितेंद्रिय | जिसने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया हो |
| जीवनी | किसी दूसरे के द्वारा लिखी गई जीवन-कथा |
| टकसाल | वह स्थान जहाँ सिक्के ढाले जाते हैं |
| तपस्वी | जो तपस्या करता हो |
| त्रैमासिक | जो हर तीन महीने पर होता हो |
| दुर्लभ | जो कठिनाई से मिले |
| दूरदर्शी | जो आगे की बात पहले सोच ले |
| द्विमासिक | जो हर दो महीने पर होता हो |
| धर्मशाला | वह स्थान जहाँ यात्री ठहरते हैं |
| नास्तिक | जो ईश्वर के होने में विश्वास न रखता हो |
| निराकार | जिसका कोई आकार न हो |
| निर्लज्ज | जिसे लज्जा न आती हो |
| निर्वाचित | जो जनता द्वारा चुना गया हो |
| निशाचर | जो रात में घूमता हो |
| निष्कपट | जिसमें छल-कपट न हो |
| पद्य | जो छंद में लिखा गया हो |
| परोपकारी | जो दूसरों का भला करता हो |
| पाक्षिक | जो हर पखवाड़े होता हो |
| पुस्तकालय | वह स्थान जहाँ पुस्तकें रखी जाती हैं |
| पूर्णिमा | जिस दिन चंद्रमा पूरा दिखता है |
| प्रतिवादी | जिस पर मुकदमा किया जाता है |
| प्रत्यक्षदर्शी | जो घटना को अपनी आँखों से देखे |
| प्रत्याशी | जो चुनाव में खड़ा हो |
| मरुस्थल | वह रेतीला प्रदेश जहाँ पानी न हो |
| मर्मज्ञ | जो किसी विषय का भीतरी रहस्य जानता हो |
| मितभाषी | जो नपा-तुला बोलता हो |
| मिताहारी | जो थोड़ा खाकर रह जाए |
| मोक्ष | जन्म-मरण से छुटकारा |
| राजदूत | जो किसी दूसरे देश में अपने देश का प्रतिनिधि हो |
| लोलुप | जो किसी वस्तु की तीव्र लालसा रखे |
| वाचाल | जो बहुत बोलता हो |
| वादी | जो मुकदमा दायर करता है |
| विधवा | जिसका पति मर चुका हो |
| विधुर | जिसकी पत्नी मर चुकी हो |
| शताब्दी | सौ वर्षों का समूह |
| शस्त्रागार | वह स्थान जहाँ हथियार रखे जाते हैं |
| शाश्वत | जो सदा बना रहे |
| संगीतज्ञ | जो संगीत का जानकार हो |
| संग्रहालय | वह स्थान जहाँ पुरानी वस्तुएँ सँभालकर रखी जाती हैं |
| संपादक | जो पत्र-पत्रिका का संपादन करे |
| संवाददाता | जो समाचार एकत्र करे |
| समकालीन | जो उसी समय का हो |
| समीक्षक | जो समीक्षा करता हो |
| सर्वज्ञ | जो सब कुछ जानता हो |
| सर्वभक्षी | जो सब कुछ खा जाता हो |
| सहिष्णु | जो सब कुछ सह ले |
| सुशील | जिसका स्वभाव अच्छा हो |
| स्वावलंबी | जो अपने बल पर जीता हो |
परीक्षा में यह अध्याय कहाँ आता है
राजस्थान की लगभग हर भर्ती परीक्षा के हिंदी खंड में यह अध्याय किसी न किसी रूप में मौजूद रहता है। छोटे स्तर की परीक्षाओं में सीधा प्रश्न आता है — वाक्यांश दिया जाता है और चार शब्दों में से एक चुनना होता है। ऊँचे स्तर की परीक्षाओं में यही अध्याय वर्तनी और अर्थ-भेद के साथ मिलाकर पूछा जाता है, यानी शब्द तो सही चुनना ही है, उसकी वर्तनी भी सही पहचाननी है। नीचे की तालिका बताती है कि किस परीक्षा के किस खंड में यह अध्याय आपके काम आएगा।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RSSB पटवारी | संयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड · 22 प्रश्न / 44 अंक वाले खंड का भाग |
| RSSB CET स्नातक स्तर | प्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर | प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB VDO | भाषा खंड · 50 प्रश्न / 50 अंक वाले खंड का भाग |
| RSSB LDC | प्रश्न-पत्र II — सामान्य हिंदी · 75 प्रश्न |
| RPSC पुलिस उप-निरीक्षक | प्रश्न-पत्र I — सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक |
| RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I · खंड I का भाग |
| RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम · खंड प्रथम का भाग |
| REET | हिंदी भाषा I / II · 30 अंक प्रत्येक |
| राजस्थान उच्च न्यायालय LDC | हिंदी खंड · 50 प्रश्न / 100 अंक |
अंतिम बात — इसे याद कैसे रखें
इस अध्याय को एक ही बैठक में निगल जाने की कोशिश मत कीजिए; वह काम करता नहीं। बेहतर तरीक़ा यह है कि रोज़ एक वर्ग लीजिए — आज केवल स्थानवाची, कल केवल समयवाची — और उस वर्ग के हर शब्द से अपने मन में एक छोटा वाक्य बनाइए। शब्द जब वाक्य में बैठ जाता है, तो वह सूची की तरह नहीं, अनुभव की तरह याद रहता है। दूसरा तरीक़ा उल्टी दिशा का अभ्यास है: सूची को ढककर केवल शब्द देखिए और उसका वाक्यांश बोलिए। परीक्षा में प्रश्न किसी भी दिशा से आ सकता है, इसलिए दोनों दिशाओं में तैयारी चाहिए। तीसरा और सबसे उपयोगी तरीक़ा — इस पृष्ठ की भ्रम वाली तालिकाओं को सप्ताह में एक बार ज़रूर दोहराइए। सूची भूल भी जाएँ तो चलेगा, पर वे तालिकाएँ याद रहें तो चार में से दो विकल्प हर बार अपने आप कट जाएँगे, और यही आधी जीत है। ऊपर दी गई त्वरित पुनरावृत्ति तालिका का स्क्रीनशॉट अपने फ़ोन में रख लीजिए; परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े-खड़े पाँच मिनट में पूरा अध्याय एक बार आँखों के सामने से गुजर जाएगा।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
‘जिसे जीता न जा सके’ के लिए एक शब्द है —
- Aअजेय
- Bअजर
- Cअक्षय
- Dअटल
व्याख्या
‘जि’ धातु जीतने से जुड़ी है और ‘अ’ उपसर्ग निषेध करता है, इसलिए जो जीता न जा सके वह अजेय है। ‘अजर’ का अर्थ है जो बूढ़ा न हो, ‘अक्षय’ यानी जिसका क्षय न हो और ‘अटल’ यानी जो टले नहीं — तीनों का जीतने से कोई संबंध नहीं।
प्रश्न 2
‘जो किए हुए उपकार को न माने’ के लिए एक शब्द है —
- Aकृतज्ञ
- Bकृतघ्न
- Cकृतकार्य
- Dकृतार्थ
व्याख्या
यहाँ पूरा भेद अंतिम अंश पर टिका है। ‘ज्ञ’ जानने का भाव देता है, इसलिए उपकार को मानने वाला कृतज्ञ; ‘घ्न’ नष्ट करने का भाव देता है, इसलिए उपकार को मिटा देने वाला कृतघ्न। ‘कृतकार्य’ और ‘कृतार्थ’ का अर्थ है जिसका काम या प्रयोजन सिद्ध हो गया हो।
प्रश्न 3
‘जो जल और थल दोनों में रह सके’ के लिए एक शब्द है —
- Aजलचर
- Bनभचर
- Cउभयचर
- Dथलचर
व्याख्या
‘उभय’ का अर्थ है दोनों और ‘चर’ का अर्थ है विचरण करने वाला, इसलिए दोनों जगह रहने वाला उभयचर कहलाता है। शेष तीनों शब्द एक-एक ही स्थान बताते हैं — जल, आकाश और थल।
प्रश्न 4
‘जिसकी गहराई नापी न जा सके’ के लिए एक शब्द है —
- Aअनंत
- Bअसीम
- Cअगाध
- Dअथाह
व्याख्या
‘थाह’ का अर्थ है तल, इसलिए जिसका तल न मिले वह अथाह। ‘अगाध’ केवल बहुत गहरे होने का भाव देता है, नापने की असंभवता का नहीं। ‘अनंत’ अंत के अभाव और ‘असीम’ सीमा के अभाव से जुड़े हैं, गहराई से नहीं।
प्रश्न 5
‘जो हर दो महीने पर होता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aमासिक
- Bद्विमासिक
- Cत्रैमासिक
- Dअर्धमासिक
व्याख्या
संख्यावाचक अंश ही उत्तर तय करता है — ‘द्वि’ यानी दो, इसलिए दो महीने के अंतर पर होने वाला द्विमासिक। ‘अर्धमासिक’ इसका उलटा है, वह महीने में दो बार होता है; ‘त्रैमासिक’ तीन महीने पर और ‘मासिक’ हर महीने।
प्रश्न 6
‘वह स्थान जहाँ मुर्दे जलाए जाते हैं’ के लिए एक शब्द है —
- Aश्मशान
- Bकारागार
- Cटकसाल
- Dछावनी
व्याख्या
स्थानवाची शब्दों में वहाँ होने वाला काम ही पहचान है। श्मशान वह स्थान है जहाँ शव जलाए जाते हैं। कारागार बंदियों का, टकसाल सिक्के ढालने का और छावनी सेना के ठहरने का स्थान है।
प्रश्न 7
‘जिस पर मुकदमा दायर किया जाता है’ के लिए एक शब्द है —
- Aवादी
- Bसाक्षी
- Cप्रतिवादी
- Dअभियुक्त
व्याख्या
‘वाद’ यानी मुकदमा; जो उसे लाए वह वादी और ‘प्रति’ यानी सामने वाला पक्ष प्रतिवादी। ‘साक्षी’ केवल गवाही देता है, और ‘अभियुक्त’ वह है जिस पर अपराध का आरोप लगाया गया हो — दीवानी मुकदमे का सामने वाला पक्ष प्रतिवादी ही कहलाता है।
प्रश्न 8
‘अपने हाथों लिखी हुई अपनी जीवन-कथा’ के लिए एक शब्द है —
- Aजीवनी
- Bसंस्मरण
- Cआत्मकथा
- Dरेखाचित्र
व्याख्या
‘आत्म’ यानी स्वयं — अपनी लिखी अपनी कहानी आत्मकथा है। ‘जीवनी’ किसी दूसरे के द्वारा लिखी जाती है, ‘संस्मरण’ में लेखक दूसरों की यादें लिखता है और ‘रेखाचित्र’ किसी व्यक्ति का शब्दों में खींचा गया चित्र होता है।
प्रश्न 9
‘जो सब कुछ जानता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअभिज्ञ
- Bबहुज्ञ
- Cमर्मज्ञ
- Dसर्वज्ञ
व्याख्या
‘ज्ञ’ चारों में एक-सा है, भेद उसके पहले वाले अंश से बनता है। ‘सर्व’ यानी सब, इसलिए सब कुछ जानने वाला सर्वज्ञ। ‘अभिज्ञ’ किसी बात की जानकारी रखने वाला, ‘बहुज्ञ’ बहुत बातें जानने वाला और ‘मर्मज्ञ’ भीतरी रहस्य जानने वाला होता है।
प्रश्न 10
‘जिसका कोई शत्रु ही न हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअजातशत्रु
- Bनिर्भीक
- Cअपराजित
- Dअजेय
व्याख्या
‘अजातशत्रु’ का शाब्दिक अर्थ है जिसका शत्रु उत्पन्न ही न हुआ हो। ‘निर्भीक’ का अर्थ निडर है, ‘अपराजित’ का अर्थ जो हारा न हो और ‘अजेय’ का अर्थ जो जीता न जा सके — तीनों शत्रु के अभाव की बात नहीं कहते।
प्रश्न 11
‘जो नपा-तुला बोलता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aवाचाल
- Bमितभाषी
- Cमृदुभाषी
- Dमौन
व्याख्या
‘मित’ का अर्थ है नपा हुआ और ‘भाषी’ यानी बोलने वाला। ‘मृदुभाषी’ मीठा बोलने वाला है, मात्रा कम बोलने वाला नहीं; ‘वाचाल’ इसका उलटा है और ‘मौन’ तो बोलता ही नहीं।
प्रश्न 12
‘वह स्थान जहाँ सिक्के ढाले जाते हैं’ के लिए एक शब्द है —
- Aकोषागार
- Bभंडार
- Cटकसाल
- Dशस्त्रागार
व्याख्या
सिक्के जहाँ बनते या ढाले जाते हैं उसे टकसाल कहते हैं। ‘कोषागार’ वह स्थान है जहाँ कोष रखा जाता है, ‘भंडार’ जहाँ माल रखा जाता है और ‘शस्त्रागार’ जहाँ हथियार — तीनों रखने के स्थान हैं, बनाने के नहीं।
प्रश्न 13
‘जो ईश्वर के होने में विश्वास न रखता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aआस्तिक
- Bधर्मनिष्ठ
- Cसंन्यासी
- Dनास्तिक
व्याख्या
‘अस्ति’ यानी है; जो मानता है कि ईश्वर है वह आस्तिक, और ‘न’ के भाव से बना नास्तिक वह जो नहीं मानता। ‘धर्मनिष्ठ’ अपने धर्म पर दृढ़ रहने वाला है और ‘संन्यासी’ संसार त्यागने वाला — दोनों विश्वास के अभाव से जुड़े नहीं।
प्रश्न 14
‘जो बाद में जन्मा हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअनुज
- Bअग्रज
- Cअनुजा
- Dअग्रजा
व्याख्या
‘अनु’ उपसर्ग पीछे का भाव देता है, इसलिए बाद में जन्मा हुआ अनुज। ‘अग्र’ आगे का भाव देता है, इसलिए पहले जन्मा अग्रज। ‘अनुजा’ और ‘अग्रजा’ इन्हीं के स्त्रीलिंग रूप हैं, यानी छोटी और बड़ी बहन।
प्रश्न 15
‘जिसकी कोई सीमा न हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअथाह
- Bअसीम
- Cअगाध
- Dअनादि
व्याख्या
‘सीमा’ में ‘अ’ का निषेध जुड़कर असीम बनता है। ‘अथाह’ और ‘अगाध’ गहराई की बात कहते हैं, और ‘अनादि’ का अर्थ है जिसका आरंभ ही न हो — तीनों में सीमा का भाव नहीं है।
प्रश्न 16
‘जो देखने योग्य हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aपठनीय
- Bश्रव्य
- Cदर्शनीय
- Dग्राह्य
व्याख्या
‘-नीय’ और ‘-य’ प्रत्यय ‘योग्य’ का भाव देते हैं, इसलिए देखने योग्य दर्शनीय, पढ़ने योग्य पठनीय, सुनने योग्य श्रव्य और ग्रहण करने योग्य ग्राह्य। प्रश्न में क्रिया देखने की है, इसलिए दर्शनीय ही सही है।
प्रश्न 17
‘जिसने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aसंन्यासी
- Bब्रह्मचारी
- Cतपस्वी
- Dजितेंद्रिय
व्याख्या
‘जित’ यानी जीता हुआ और ‘इंद्रिय’ मिलकर जितेंद्रिय बनता है — जिसने इंद्रियों को जीत लिया। शेष तीनों शब्द जीवन-पद्धति बताते हैं, इंद्रिय-विजय नहीं।
प्रश्न 18
‘वह स्थान जहाँ दवाइयाँ मिलती हैं’ के लिए एक शब्द है —
- Aऔषधालय
- Bचिकित्सालय
- Cअनाथालय
- Dसंग्रहालय
व्याख्या
‘आलय’ का अर्थ घर है और उसके पहले वाला अंश बताता है कि वहाँ क्या है। औषध यानी दवा, इसलिए औषधालय। चिकित्सालय वह स्थान है जहाँ रोगी का इलाज होता है, अनाथालय अनाथ बालकों का और संग्रहालय पुरानी वस्तुओं का।
प्रश्न 19
‘जो दूसरों के दोष ही खोजता रहे’ के लिए एक शब्द है —
- Aपरोपकारी
- Bछिद्रान्वेषी
- Cसमदर्शी
- Dईर्ष्यालु
व्याख्या
‘छिद्र’ यानी दोष या कमी और ‘अन्वेषी’ यानी खोजने वाला — दोनों मिलकर छिद्रान्वेषी बनाते हैं। ‘ईर्ष्यालु’ केवल जलन रखता है, दोष खोजने का भाव नहीं देता; ‘परोपकारी’ और ‘समदर्शी’ तो गुणवाचक शब्द हैं।
प्रश्न 20
‘जिसमें रस न हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aसरस
- Bनिर्दोष
- Cनीरस
- Dविरक्त
व्याख्या
‘निर्’ उपसर्ग अभाव बताता है और ‘निर् + रस’ की संधि से नीरस बनता है। ‘सरस’ इसका उलटा है, ‘निर्दोष’ का अर्थ दोषरहित और ‘विरक्त’ का अर्थ मोह से हटा हुआ।
प्रश्न 21
‘जिसमें एक ही व्यक्ति का निरंकुश शासन हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aजनतंत्र
- Bकुलीनतंत्र
- Cराजतंत्र
- Dअधिनायकतंत्र
व्याख्या
‘तंत्र’ शासन-पद्धति बताता है और उसके पहले का अंश बताता है कि शासन किसके हाथ में है। ‘अधिनायक’ यानी सर्वोच्च स्वामी, इसलिए एक व्यक्ति का निरंकुश शासन अधिनायकतंत्र है। राजतंत्र वंश-परंपरा से चलने वाला शासन है, जनतंत्र जनता का और कुलीनतंत्र कुछ चुने हुए लोगों का।
प्रश्न 22
‘जो घटना को अपनी आँखों से देखे’ के लिए एक शब्द है —
- Aप्रत्यक्षदर्शी
- Bदूरदर्शी
- Cसमदर्शी
- Dसाक्षी
व्याख्या
‘प्रत्यक्ष’ यानी आँखों के सामने और ‘दर्शी’ यानी देखने वाला। ‘साक्षी’ वह है जो गवाही दे — उसने घटना स्वयं देखी हो, यह ज़रूरी नहीं। ‘दूरदर्शी’ आगे की सोचने वाला और ‘समदर्शी’ सबको समान समझने वाला होता है।
प्रश्न 23
‘जो कुछ भी न जानता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aअल्पज्ञ
- Bअज्ञ
- Cअनभिज्ञ
- Dअभिज्ञ
व्याख्या
‘ज्ञ’ के आगे केवल निषेधवाचक ‘अ’ लगने से अज्ञ बनता है, यानी जिसे कुछ भी ज्ञान न हो। ‘अल्पज्ञ’ थोड़ा जानता है, ‘अनभिज्ञ’ किसी विशेष बात से अनजान है और ‘अभिज्ञ’ तो जानकार होता है।
प्रश्न 24
‘वह भूमि जिसमें कुछ भी न उगे’ के लिए एक शब्द है —
- Aउर्वरा
- Bपरती
- Cऊसर
- Dमरुस्थल
व्याख्या
जिस भूमि में उपज होती ही न हो, उसे ऊसर कहते हैं। ‘उर्वरा’ इसका उलटा यानी उपजाऊ भूमि है, ‘परती’ वह भूमि है जो कुछ समय बिना जुती छोड़ दी गई हो — वह बंजर नहीं होती — और ‘मरुस्थल’ रेतीला प्रदेश है।
प्रश्न 25
‘जो शाक और मांस दोनों खा जाता हो’ के लिए एक शब्द है —
- Aशाकाहारी
- Bमांसाहारी
- Cउभयचर
- Dसर्वभक्षी
व्याख्या
‘भक्षी’ खाने वाले का भाव देता है और ‘सर्व’ यानी सब — इसलिए सब कुछ खा जाने वाला सर्वभक्षी। ‘उभयचर’ यहाँ सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि वह भोजन का नहीं, जल-थल दोनों में रहने का शब्द है।