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REET लेवल 1 व 2 · हिंदी

वाक्यांश के लिए एक शब्द

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‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ में लंबे वाक्यांश के भाव को एक सटीक शब्द में समेटना सिखाया जाता है। REET में यह टॉपिक अक्सर गद्यांश से जोड़कर पूछा जाता है, जहाँ ध्वनि में मिलते-जुलते पर अर्थ में अलग शब्दों के बीच सही चुनाव करना पड़ता है।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में इस टॉपिक से चार प्रश्न आए — तीन सीधे वाक्यांश देकर एक शब्द पूछने वाले थे (जैसे ‘विष्णु की उपासना करने वाला’ → वैष्णव, ‘मुक्ति पाने का इच्छुक’ → मुमुक्षु, ‘आत्मा से संबंधित ज्ञान’ → अध्यात्म), और एक गद्यांश-आधारित शब्दार्थ का था (‘तिरोहित’ = लुप्त)। इन सभी में विकल्पों में ध्वनि से मिलते-जुलते संस्कृत-मूल शब्द (जैसे मुमुक्षु/मुमूर्षु/पिपासु/जिज्ञासु) रखे गए थे, इसलिए बारीक अर्थ-भेद जानना जरूरी है।

वाक्यांश के लिए एक शब्द क्या है?

जब किसी बड़े वाक्यांश (कई शब्दों के समूह) के पूरे भाव को एक ही शब्द में व्यक्त किया जाता है, तो उसे ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ या ‘अनेक शब्दों के लिए एक शब्द’ कहते हैं। जैसे ‘जिसे बुलाया न गया हो’ के लिए ‘अनाहूत’, ‘जो कहा न जा सके’ के लिए ‘अकथनीय’। भाषा में संक्षिप्तता और स्पष्टता लाने के लिए यह प्रयोग बहुत उपयोगी है, और निबंध व औपचारिक लेखन में भी इसका सीधा असर दिखता है।

REET में पूछे गए ज्यादातर शब्द संस्कृत मूल के तत्सम शब्द होते हैं, जिनमें उपसर्ग (अ, अन, वि, सु, दुर) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं — जैसे ‘मुमुक्षु’ में ‘मुक्ति की इच्छा’ का भाव मूल धातु ‘मुच्’ से आता है, वहीं ‘मुमूर्षु’ में ‘मरने की इच्छा’ का भाव धातु ‘मृ’ से आता है। दोनों सुनने में लगभग एक-जैसे लगते हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग ठीक से याद रखना जरूरी है।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ और सामान्य ‘शब्दार्थ’ (किसी शब्द का सीधा अर्थ) एक जैसे नहीं हैं। शब्दार्थ में हम एक शब्द से दूसरे शब्द (लगभग पर्यायवाची) की ओर जाते हैं, जबकि यहाँ हम एक पूरे वाक्यांश (कई शब्दों) से एक ही मानक शब्द तक पहुँचते हैं। इसी कारण इस टॉपिक की तैयारी करते समय वाक्यांश को ठीक से पढ़ना और उसके हर शब्द का भाव समझना जरूरी है, केवल अंतिम शब्द या मुख्य संज्ञा को पकड़ लेने से गलत उत्तर चुनने का खतरा रहता है — जैसे ‘आत्मा से संबंधित ज्ञान’ में अगर केवल ‘ज्ञान’ शब्द पर ध्यान दिया जाए तो ‘विद्वता’ जैसा गलत उत्तर चुना जा सकता है, जबकि सही उत्तर ‘अध्यात्म’ है।

एक व्यावहारिक बात यह भी ध्यान रखें कि हर वाक्यांश के लिए सामान्यतः एक ही मानक और प्रचलित शब्द परीक्षा में सही माना जाता है, इसलिए विकल्पों में जो शब्द सबसे सटीक व प्रचलित रूप में वाक्यांश का भाव दे, उसी को चुनना चाहिए, भले ही कोई अन्य शब्द भी लगभग मिलता-जुलता भाव दे रहा हो।

REET में पूछे गए शब्द और मिलते-जुलते भ्रामक विकल्प

वाक्यांशसही एक शब्दमिलते-जुलते पर गलत विकल्प
विष्णु की उपासना करने वालावैष्णवकौस्तुभ (विष्णु की मणि), वैजयन्त (इंद्र का महल/ध्वज)
आत्मा से संबंधित ज्ञानअध्यात्मसार्वभौमिक (सब जगह लागू), ध्येय (लक्ष्य)
मुक्ति पाने का इच्छुकमुमुक्षुमुमूर्षु (मरणासन्न), पिपासु (प्यासा), जिज्ञासु (जानने का इच्छुक)
जिसे बुलाया न गया होअनाहूतआमंत्रित (जिसे बुलाया गया हो — विपरीत अर्थ)
जो पहले न पढ़ा गया होअपठितअश्रुत (जो सुना न गया हो), अदृश्य (जो दिखे न)
जिसका इलाज न हो सकेअसाध्यअचूक (जो चूके नहीं), अनिवार्य (जो टाला न जा सके)

गद्यांश में शब्दार्थ पहचानने की रणनीति

गद्यांश आधारित प्रश्नों में सीधे शब्द का शब्दकोश-अर्थ नहीं, बल्कि वाक्य में उसका प्रसंग-अनुसार अर्थ पूछा जाता है। जैसे REET 2024 में ‘प्रेम तिरोहित होता जा रहा है’ पंक्ति में ‘तिरोहित’ का अर्थ ‘लुप्त/ओझल’ था। विकल्पों में ‘तिरस्कार’ (अपमान) रखा गया था जो ध्वनि में मिलता-जुलता लगता है पर अर्थ बिलकुल अलग है — ऐसे प्रश्नों में ध्वनि-साम्य के जाल में न फँसें, वाक्य का पूरा भाव पढ़ें।

इन शब्दों में अक्सर एक ही उपसर्ग (अ, अन, नि, सु, दुर) कई शब्दों में दोहराया जाता है, इसलिए उपसर्ग का अर्थ समझ लेना पूरे परिवार के शब्द याद रखने में मदद करता है — जैसे ‘अ’ उपसर्ग निषेध (न होना) दिखाता है: अजेय (न जीता जा सके), अकथनीय (कहा न जा सके), अगम्य (पहुँचा न जा सके), असाध्य (ठीक न हो सके)। एक बार यह पैटर्न पकड़ में आ जाए, तो नए वाक्यांशों का भी अनुमान लगाना आसान हो जाता है, भले ही वह शब्द पहले कभी न पढ़ा हो।

अभ्यास के लिए रोज़ाना समाचार-पत्र या पाठ्यपुस्तक के किसी अनुच्छेद में से 2-3 ऐसे वाक्यांश ढूँढ़ने की आदत डालें जिन्हें एक शब्द में समेटा जा सके — इससे परीक्षा में नए, अनदेखे वाक्यांश भी पहचानने की क्षमता विकसित होती है, केवल पहले से रटी सूची पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

रोज़ एक नया वाक्यांश बोर्ड पर लिखकर बच्चों से एक शब्द बनवाने को कहें और उसका प्रयोग तुरंत एक वाक्य में करवाएँ — इससे शब्द याद के साथ-साथ प्रयोग भी आता है।

शिक्षण सामग्री

वाक्यांश और उनके एक-शब्द-रूप की जोड़ी वाले फ्लैशकार्ड कक्षा 6-8 में खेल-खेल में अभ्यास कराने के लिए उपयोगी हैं।

सामान्य भ्रांति

बच्चे ध्वनि में मिलते-जुलते शब्दों (मुमुक्षु-मुमूर्षु, जिज्ञासु-पिपासु) को गड्डमड्ड कर देते हैं क्योंकि दोनों संस्कृत-मूल के करीबी दिखने वाले शब्द हैं — हर जोड़ी को अलग-अलग उदाहरण वाक्य से स्पष्ट करें।

आकलन

5 सामान्य वाक्यांश देकर एक शब्द लिखवाएँ और उल्टा भी करें — एक शब्द देकर उसका वाक्यांश-अर्थ पूछें, इससे दोनों दिशा में समझ जाँची जा सकती है।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

जब दो विकल्प सुनने में लगभग एक जैसे लगें (जैसे मुमुक्षु/मुमूर्षु), तो शब्द के बीच का एक अक्षर ध्यान से देखें और मूल धातु से जोड़कर याद करें — ‘मुक्ति’ से मुमुक्षु, ‘मृत्यु’ से मुमूर्षु। यह ट्रिक REET जैसे परीक्षाओं में सबसे ज्यादा गच्चा खाने वाले जोड़े सुलझाती है।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न-संख्या 51 से 58 तक के उत्तर दीजिए । अधिकतर लोग विष्णु को पालनकर्त्ता मानकर उनकी उपासना करते हैं; विष्णु पालन करते हैं तथा महेश संहार करते हैं । इस पर विश्वास करके यदि कृषक को ही विष्णु कहें तो कोई अतिशयोक्ति न होगी । आकाश में उड़ने वाले स्वतंत्र पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाला मानव, यहाँ तक कि जलचर भी कृषकों पर ही निर्भर है । तपस्या भरा त्याग, अभिमान रहित उदारता और क्लांति रहित परिश्रम का यदि चित्र देखना है तो आप भारतीय कृषक को देखिए । वह स्वयं न खाकर दूसरों को खिलाता है, स्वयं न पहनकर दूसरों को वस्त्र देता है । उसके अनुपम त्याग की समानता कोई नहीं कर सकता है । भारतीय कृषक की आकृति में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों कोई वीतराग संन्यासी हो । जिसे न दु:ख में दु:ख और न सुख में सुख की कामना है; जिसे न अज्ञान से आत्म-ग्लानि होती है और न दरिद्रता से दीनता । यह वह कर्मयोगी है जो फल प्राप्ति की इच्छा से रहित होकर कर्म में तल्लीन रहता है ।

प्रश्न 53

‘विष्णु की उपासना करने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aकौस्तुभ
  2. Bवैजयन्त
  3. Cपरीक्षित
  4. Dवैष्णव

व्याख्या

विष्णु की उपासना करने वाले को ‘वैष्णव’ कहते हैं (जैसे शिव के उपासक को ‘शैव’)। ‘कौस्तुभ’ विष्णु द्वारा धारण की जाने वाली मणि है और ‘वैजयन्त’ इन्द्र के महल/ध्वज का नाम है, अतः ये उपयुक्त नहीं हैं।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 74 से 83 तक के उत्तर दीजिए । प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का प्रकाश विश्व भर में फैल रहा है । इस महान भारतीय संस्कृति के वैशिष्ट्य बिंदु निम्नानुसार है - प्राचीनता-भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यंत प्राचीन है । सरस्वती-सैंधव सभ्यता की खोज एवं उत्खनन से प्राप्त सामग्री का मूल्य आँकना संभव नहीं है । यह प्राप्त सामग्री आज भी हमारा गौरव है । इनका संरक्षण एवं अध्ययन हमारा ध्येय होना चाहिए । निरंतरता-भारतीय संस्कृति की धारा निर्बाध रूप से हजारों वर्षों से बहती चली आ रही है । सैंधव सभ्यता से प्राप्त देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भारतीयों के लिए पूजनीय हैं । अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना मूल स्वरूप स्थायी बनाए रखा है । आध्यात्मिकता-अध्यात्म भारतीय संस्कृति का प्राण तत्त्व है । हमारी संस्कृति का विकास तपोवनों और आश्रमों में हुआ है । ग्रहणशीलता-बाहरी तत्त्वों को आत्मसात् करने की क्षमता और समन्वित जीवनशैली भारतीय संस्कृति का प्रमुख गुण है । भारतीय संस्कृति की प्रेरक व्यवस्था व्यक्ति को नैतिक रूप से दृढ़ कर मानव बनाती है । भारतीय संस्कृति का सौंदर्य सार्वभौमिक है ।

प्रश्न 78

‘आत्मा से संबंधित ज्ञान’ वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है -

  1. Aसार्वभौमिक
  2. Bध्येय
  3. Cअध्यात्म
  4. Dआत्मसात्

व्याख्या

आत्मा और परमात्मा से संबंधित ज्ञान या चिंतन को ‘अध्यात्म’ कहते हैं। ‘सार्वभौमिक’ का अर्थ सब जगह लागू होने वाला, ‘ध्येय’ का अर्थ लक्ष्य और ‘आत्मसात्’ का अर्थ अपने में समा लेना है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31 से 40 तक के उत्तर लिखिए : भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ पर सभी ऋतुएँ समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक रहती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता रहा है और मुक्ति पाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक-व्यवहारों से भी परिचित थे । आज भी वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन शुभ माने जाते हैं ।

प्रश्न 37

‘मुक्ति पाने का इच्छुक’ वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है –

  1. Aमुमूर्ष
  2. Bमुमुक्षु
  3. Cपिपासु
  4. Dजिज्ञासु

व्याख्या

मोक्ष या मुक्ति पाने की इच्छा रखने वाले को ‘मुमुक्षु’ कहते हैं। ‘मुमूर्षु’ मरणासन्न (मरने की इच्छा/अवस्था वाला) व्यक्ति है, ‘पिपासु’ प्यासा और ‘जिज्ञासु’ जानने की इच्छा रखने वाला होता है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 45 से 50 तक के उत्तर दीजिए : आज हमारा सामाजिक ढाँचा चरमराने लगा है । भाई-बहिन के संबंधों में भी प्रेम तिरोहित होता जा रहा है । निकम्मे रहकर मनुष्यों की चिन्तन-शक्ति थक गई है । बिस्तरों और आसनों पर सोते-सोते मन के घोड़े हार गये हैं । सारा जीवन निचुड़ चुका है । स्वप्न पुराने हो चुके हैं । आज मनुष्य पैसा कमाने की मशीन बन चुका है । सारा समाज अर्थ प्रधान होता जा रहा है । सिर्फ धन और धन कमाने की लालसा के चलते व्यक्ति यह भूल बैठा है कि- ‘अणूतो धन सुख सान्ति ने खोस लेवे ।’ भौतिक वस्तुओं को पाने की चाहना अग्नि सदृश सदैव प्रज्वलित रहती है ।

प्रश्न 46

‘तिरोहित’ शब्द का अर्थ है

  1. Aलुप्त
  2. Bप्रकाशित
  3. Cलालायित
  4. Dतिरस्कार

व्याख्या

‘तिरोहित’ का अर्थ है छिपा हुआ या लुप्त (ओझल) हो जाना। गद्यांश में ‘प्रेम तिरोहित होता जा रहा है’ का आशय है कि प्रेम लुप्त होता जा रहा है। ‘तिरस्कार’ ध्वनि में मिलता-जुलता है पर अर्थ (अपमान) भिन्न है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘जिसे बुलाया न गया हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aआमंत्रित
  2. Bअनाहूत
  3. Cअभ्यागत
  4. Dआगंतुक

व्याख्या

जिसे बुलाया न गया हो उसे ‘अनाहूत’ कहते हैं। ‘आमंत्रित’ इसका विपरीत अर्थ (बुलाया गया) देता है, और ‘अभ्यागत’/‘आगंतुक’ का अर्थ मेहमान/आने वाला है, बुलावे से संबंध नहीं दर्शाता।

प्रश्न 2

‘जो कहा न जा सके’ वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है

  1. Aअकथनीय
  2. Bअकल्पनीय
  3. Cअगम्य
  4. Dअटल

व्याख्या

जो कहा न जा सके, उसे ‘अकथनीय’ कहते हैं। ‘अकल्पनीय’ का अर्थ है जिसकी कल्पना न की जा सके, ‘अगम्य’ का अर्थ है जहाँ पहुँचा न जा सके, और ‘अटल’ का अर्थ है न बदलने वाला — ये तीनों भिन्न भाव देते हैं।

प्रश्न 3

‘जिसे जीता न जा सके’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aअजेय
  2. Bअटल
  3. Cअद्वितीय
  4. Dअक्षय

व्याख्या

जिसे जीता न जा सके उसे ‘अजेय’ कहते हैं। ‘अटल’ का अर्थ न डिगने वाला, ‘अद्वितीय’ का अर्थ अनूठा और ‘अक्षय’ का अर्थ कभी न घटने वाला है।

प्रश्न 4

‘जो हमेशा रहने वाला हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aशाश्वत
  2. Bक्षणिक
  3. Cअस्थायी
  4. Dनश्वर

व्याख्या

जो हमेशा रहने वाला हो, उसे ‘शाश्वत’ कहते हैं। ‘क्षणिक’ का अर्थ है थोड़ी देर रहने वाला, ‘अस्थायी’ का अर्थ है न टिकने वाला और ‘नश्वर’ का अर्थ है नष्ट हो जाने वाला — तीनों विपरीत भाव देते हैं।

प्रश्न 5

‘जिसका कोई शत्रु न हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aअजातशत्रु
  2. Bनिडर
  3. Cअद्वितीय
  4. Dशत्रुहीन

व्याख्या

जिसका कोई शत्रु न हो, उसे ‘अजातशत्रु’ कहा जाता है (युधिष्ठिर की उपाधि के रूप में प्रसिद्ध)। ‘निडर’ का अर्थ निर्भय है, जो अलग भाव है।

प्रश्न 6

‘जो पहले कभी न हुआ हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aअभूतपूर्व
  2. Bअसंभव
  3. Cअकल्पनीय
  4. Dअनुपम

व्याख्या

जो पहले कभी न हुआ हो, उसे ‘अभूतपूर्व’ कहते हैं। ‘असंभव’ का अर्थ है जो हो ही न सके, और ‘अनुपम’ का अर्थ है जिसकी उपमा न हो — दोनों भिन्न अर्थ देते हैं।

प्रश्न 7

‘जो उपकार करने वाला हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aस्वार्थी
  2. Bपरोपकारी
  3. Cकृतघ्न
  4. Dधर्मपरायण

व्याख्या

जो दूसरों का उपकार (भला) करने वाला हो, उसे ‘परोपकारी’ कहते हैं। ‘स्वार्थी’ इसका विपरीत भाव देता है, ‘कृतघ्न’ का अर्थ है उपकार न मानने वाला, और ‘धर्मपरायण’ का अर्थ है धर्म में लीन — दोनों भिन्न भाव के शब्द हैं।

प्रश्न 8

‘आत्मा से संबंधित ज्ञान’ पढ़ाते समय शिक्षक के लिए कक्षा में सबसे उपयुक्त तरीका है

  1. Aकेवल सूची बोर्ड पर लिखकर रटवाना
  2. Bवाक्यांश को कहानी/उदाहरण से जोड़कर अर्थ स्पष्ट करना, फिर वाक्य-प्रयोग कराना
  3. Cबच्चों को खुद से शब्दकोश खोजने के लिए छोड़ देना
  4. Dइस टॉपिक को छोड़कर आगे बढ़ जाना

व्याख्या

अमूर्त वाक्यांशों (जैसे ‘आत्मा से संबंधित ज्ञान’) को बच्चे तभी ठीक से याद रखते हैं जब उन्हें उदाहरण या संदर्भ (कहानी, रोज़मर्रा की बात) से जोड़ा जाए और तुरंत वाक्य में प्रयोग कराया जाए, केवल रटने से भूल जाते हैं।

प्रश्न 9

‘जो कम बोलता हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aमितभाषी
  2. Bवाचाल
  3. Cमूक
  4. Dवाग्मी

व्याख्या

जो कम बोलता हो, उसे ‘मितभाषी’ कहते हैं। ‘वाचाल’ का अर्थ बहुत बोलने वाला (विपरीत), ‘मूक’ का अर्थ बिलकुल न बोलने वाला और ‘वाग्मी’ का अर्थ अच्छा वक्ता है।

प्रश्न 10

‘जो सब कुछ जानता हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द है

  1. Aसर्वज्ञ
  2. Bजिज्ञासु
  3. Cविद्वान
  4. Dअल्पज्ञ

व्याख्या

जो सब कुछ जानता हो, उसे ‘सर्वज्ञ’ कहते हैं। ‘जिज्ञासु’ का अर्थ जानने की इच्छा रखने वाला है (जानता नहीं, जानना चाहता है), और ‘अल्पज्ञ’ का अर्थ थोड़ा जानने वाला है — बिलकुल विपरीत भाव।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ किसे कहते हैं?+

जब किसी लंबे वाक्यांश के पूरे भाव को एक ही शब्द में व्यक्त किया जाए, उसे वाक्यांश के लिए एक शब्द कहते हैं, जैसे ‘जिसे बुलाया न गया हो’ के लिए ‘अनाहूत’।

इस टॉपिक से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इससे 4 प्रश्न आए थे, अक्सर गद्यांश से जुड़े शब्दार्थ के रूप में। भाषा-I/II में यह हर साल का नियमित टॉपिक है।

इसे ‘अनेक शब्दों के लिए एक शब्द’ भी क्यों कहा जाता है?+

क्योंकि कभी-कभी एक शब्द नहीं बल्कि कई शब्दों (वाक्यांश) के भाव को एक शब्द में समेटा जाता है, इसलिए दोनों नाम प्रचलित हैं और एक ही अवधारणा को दर्शाते हैं।

वाक्यांश के लिए एक शब्द और शब्दार्थ में क्या अंतर है?+

शब्दार्थ में एक शब्द का सीधा अर्थ (लगभग पर्यायवाची) पूछा जाता है, जबकि वाक्यांश के लिए एक शब्द में पूरे वाक्यांश (कई शब्दों के समूह) के सम्मिलित भाव को एक शब्द में व्यक्त करना होता है।

क्या ‘वाक्यांश के लिए एक शब्द’ का उल्टा भी पूछा जा सकता है?+

हाँ, कभी-कभी एक शब्द देकर उसका वाक्यांश-रूप में अर्थ पूछा जाता है — जैसे ‘अनाहूत’ का अर्थ बताने को कहा जा सकता है, इसलिए दोनों दिशाओं में अभ्यास जरूरी है।

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बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए