कारक
कारक बताता है कि वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया से क्या संबंध है। REET में गद्यांश या वाक्य से रेखांकित पद देकर उसका कारक पहचानने के प्रश्न आते हैं, जहाँ ‘से’ और ‘में/पर’ जैसी एक ही विभक्ति के अलग-अलग कारकों में प्रयोग को पहचानना सबसे जरूरी कौशल है।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
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REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 के दोनों प्रश्न वाक्य में रेखांकित पद का कारक पहचानने वाले थे। पहले में ‘विशु रोहन से फुर्तीला है’ में ‘से’ को अपादान कारक बताया गया (क्योंकि यह तुलना का भाव दे रहा है, साधन का नहीं), और दूसरे में ‘तीन बजने पर’ में ‘पर’ को अधिकरण कारक बताया गया (समय/आधार का बोध)। यानी REET में एक ही विभक्ति-चिह्न (जैसे ‘से’) के अलग-अलग संदर्भ में अलग कारक बनने की समझ बार-बार जाँची जाती है।
कारक क्या है?
वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं, और इस संबंध को बताने वाले चिह्न (जैसे ने, को, से, के लिए, का, में, पर) विभक्ति कहलाते हैं। हिंदी व्याकरण में आठ कारक माने जाते हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन।
इनमें से करण और अपादान — दोनों में विभक्ति ‘से’ ही आती है, पर भाव अलग होता है। करण कारक में ‘से’ किसी क्रिया के साधन (जिससे काम हुआ) का बोध कराता है — जैसे ‘वह कलम से लिखता है’। अपादान कारक में ‘से’ किसी वस्तु के अलग होने, तुलना या दूरी का भाव देता है — जैसे ‘पेड़ से पत्ता गिरा’ (अलगाव) या ‘विशु रोहन से फुर्तीला है’ (तुलना)।
कारक की पहचान के लिए सबसे भरोसेमंद तरीका है वाक्य में क्रिया से प्रश्न पूछना — जैसे ‘किसने किया?’ पूछने पर जो उत्तर मिले वह कर्ता है, ‘किसको/किसे?’ पूछने पर कर्म, ‘किससे/किसके द्वारा (साधन)?’ पूछने पर करण, ‘किसके लिए?’ पूछने पर संप्रदान, ‘किससे (अलग/तुलना)?’ पूछने पर अपादान, ‘किसका/किसकी/किसके?’ पूछने पर संबंध और ‘कहाँ/कब?’ पूछने पर अधिकरण कारक का पता चलता है। यह प्रश्न-पद्धति खासकर तब उपयोगी है जब विभक्ति-चिह्न लुप्त (शून्य) हो या एक ही चिह्न कई कारकों में आ रहा हो।
ध्यान रहे कि कारक और विभक्ति एक चीज़ नहीं हैं — कारक संज्ञा/सर्वनाम और क्रिया के बीच का संबंध है, जबकि विभक्ति (ने, को, से, का आदि) उस संबंध को दर्शाने वाला चिह्न मात्र है। संस्कृत में परंपरागत रूप से छह कारक पढ़ाए जाते हैं, जबकि हिंदी में संबंध और संबोधन जोड़कर आठ कारक माने जाते हैं। जब कर्ता या कर्म के साथ कोई स्पष्ट विभक्ति-चिह्न न दिखे (जैसे ‘राम पढ़ता है’), तो उसे शून्य विभक्ति कहा जाता है, और ऐसी स्थिति में भी वाक्य से प्रश्न पूछकर सही कारक पहचाना जा सकता है।
यह प्रश्न-आधारित पद्धति अभ्यास से और मजबूत होती है, इसलिए रोज़ किसी एक गद्यांश से 4-5 वाक्य लेकर हर रेखांकित पद का कारक इसी तरीके से जाँचने की आदत डालें। इससे परीक्षा में नए, अनदेखे वाक्यों में भी कारक सही पहचानने की क्षमता मजबूत होती है।
कर्ता कारक में ‘ने’ कब आता और कब नहीं
कर्ता कारक की विभक्ति ‘ने’ हमेशा नहीं आती — यह एक नियम-आधारित प्रयोग है जो REET में अक्सर उलझाता है। सामान्यतः सकर्मक क्रिया (जिसका कर्म हो) के भूतकाल में कर्ता के साथ ‘ने’ आता है, जैसे ‘राम ने पत्र लिखा’। लेकिन अकर्मक क्रिया (जिसका कोई कर्म नहीं) में, या वर्तमान/भविष्य काल के अधिकांश रूपों में, कर्ता के साथ ‘ने’ नहीं आता — जैसे ‘राम सोता है’ (वर्तमान, अकर्मक) या ‘राम पत्र लिखेगा’ (भविष्य)। यही कारण है कि कर्ता कारक को कभी ‘ने’ सहित और कभी बिना ‘ने’ (शून्य विभक्ति) के पहचाना जाता है।
आठ कारक, विभक्ति और उदाहरण
| कारक | विभक्ति चिह्न | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्ता कारक | ने / शून्य | राम ने पत्र लिखा |
| कर्म कारक | को / शून्य | मोहन ने सीता को किताब दी |
| करण कारक | से / के द्वारा (साधन का भाव) | वह कलम से लिखता है |
| संप्रदान कारक | को / के लिए | माँ ने बच्चे के लिए खिलौना खरीदा |
| अपादान कारक | से (अलगाव/तुलना का भाव) | पेड़ से पत्ता गिरा; विशु रोहन से फुर्तीला है |
| संबंध कारक | का / के / की | यह राम का घर है |
| अधिकरण कारक | में / पर | पुस्तक मेज़ पर है; तीन बजने पर |
| संबोधन कारक | हे / अरे / ओ | हे राम! रक्षा करो |
ध्यान दें: करण और अपादान दोनों में ‘से’ आता है, तथा कर्म और संप्रदान दोनों में ‘को’ आ सकता है — भाव (साधन/अलगाव या कर्म/उद्देश्य) से ही सही कारक तय होता है।
करण-अपादान और संप्रदान-कर्म में अंतर कैसे करें
करण और अपादान दोनों में ‘से’ आता है, इसलिए प्रश्न में भाव देखना जरूरी है — अगर ‘से’ किसी साधन/उपकरण की ओर इशारा करे (किससे किया), तो करण; अगर अलगाव, दूरी या तुलना की ओर इशारा करे (किससे अलग हुआ, किससे तुलना), तो अपादान। इसी तरह संप्रदान और कर्म दोनों में ‘को’ आ सकता है — अगर ‘को’ से यह पता चले कि कोई वस्तु किसी के लिए दी/भेजी जा रही है (जिसके लिए), तो संप्रदान; अगर ‘को’ क्रिया का सीधा प्रभाव पाने वाला (जिसे कुछ किया गया) बताए, तो कर्म कारक।
करण कारक का एक और उपयोग कर्मवाच्य (पैसिव वॉइस) के वाक्यों में होता है, जहाँ मूल कर्ता को ‘के द्वारा’ या ‘से’ लगाकर करण की तरह दिखाया जाता है — जैसे ‘मोहन ने पत्र लिखा’ (कर्तृवाच्य) को कर्मवाच्य में बदलने पर ‘मोहन के द्वारा पत्र लिखा गया’ बनता है, जहाँ ‘मोहन के द्वारा’ करण कारक के रूप में प्रयुक्त हुआ है। यह जोड़ ‘वाच्य’ नामक अगले टॉपिक से भी जुड़ता है, इसलिए दोनों को साथ पढ़ना फायदेमंद रहता है।
कक्षा में इसका उपयोग
| गतिविधि | उदाहरण |
|---|---|
| एक ही वाक्य में विभक्ति बदलकर कारक-भेद दिखाना | ‘कलम से लिखना’ (करण) बनाम ‘घर से निकलना’ (अपादान) |
| रोज़मर्रा के वाक्यों में विभक्ति-चिह्न रेखांकित कर पहचान कराना | ‘राम ने मोहन को किताब दी’ में ने-कर्ता, को-संप्रदान |
| कारक-चार्ट बनाकर आठों कारक व उनकी विभक्ति साथ-साथ दिखाना | कक्षा की दीवार पर स्थायी चार्ट टांगना |
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
जब भी ‘से’ दिखे, पहले पूछें — ‘क्या यह साधन (किससे किया) बता रहा है या अलगाव/तुलना (किससे अलग/किससे ज्यादा)?’ पहला जवाब करण कारक देगा, दूसरा अपादान कारक। यही एक सवाल REET के ज्यादातर करण-अपादान वाले प्रश्न हल कर देता है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 90
“विशु रोहन से फुर्तीला है ।” वाक्य में रेखांकित पद में कौन-सा कारक है ?
- Aसंप्रदान कारक
- Bअधिकरण कारक
- Cअपादान कारक
- Dकरण कारक
व्याख्या
‘विशु रोहन से फुर्तीला है ।’ में ‘से’ तुलना का भाव व्यक्त कर रहा है। तुलना और अलग होने के भाव में प्रयुक्त ‘से’ अपादान कारक का चिह्न होता है। करण कारक के ‘से’ में साधन का भाव होता है (जैसे — कलम से लिखता है), जो यहाँ नहीं है।
प्रश्न 90
“प्रतियोगिता ठीक तीन बजने पर शुरू होगी ।” वाक्य में निम्नलिखित में से कारक है-
- Aसंबंध कारक
- Bकरण कारक
- Cसंप्रदान कारक
- Dअधिकरण कारक
व्याख्या
‘तीन बजने पर’ में ‘पर’ विभक्ति समय/आधार का बोध करा रही है। ‘में, पर’ अधिकरण कारक की विभक्तियाँ हैं, इसलिए यहाँ अधिकरण कारक है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
‘राम ने पत्र लिखा’ वाक्य में ‘राम ने’ में कौन-सा कारक है?
- Aकर्म कारक
- Bकर्ता कारक
- Cकरण कारक
- Dअधिकरण कारक
व्याख्या
जो कार्य करता है उसे कर्ता कहते हैं, और भूतकाल की सकर्मक क्रिया में कर्ता के साथ ‘ने’ विभक्ति आती है। ‘राम ने’ यहाँ लिखने की क्रिया करने वाला है, इसलिए यह कर्ता कारक है।
प्रश्न 2
‘मोहन ने सीता को किताब दी’ वाक्य में ‘सीता को’ में कौन-सा कारक है?
- Aकर्म कारक
- Bसंप्रदान कारक
- Cअपादान कारक
- Dअधिकरण कारक
व्याख्या
यहाँ किताब सीता के लिए दी जा रही है, यानी जिसके लिए कोई वस्तु दी/भेजी जाए, वह संप्रदान कारक कहलाता है — विभक्ति ‘को’/‘के लिए’ होती है।
प्रश्न 3
‘छत से पानी टपक रहा है’ वाक्य में ‘छत से’ में कौन-सा कारक है?
- Aकरण कारक
- Bअपादान कारक
- Cसंप्रदान कारक
- Dसंबंध कारक
व्याख्या
यहाँ ‘से’ पानी के अलग होकर गिरने (अलगाव) का भाव दे रहा है, साधन का नहीं। जिस ‘से’ में अलगाव/दूरी का भाव हो, वह अपादान कारक कहलाता है।
प्रश्न 4
‘वह चाकू से सेब काटता है’ वाक्य में ‘चाकू से’ में कौन-सा कारक है?
- Aअपादान कारक
- Bकरण कारक
- Cकर्म कारक
- Dअधिकरण कारक
व्याख्या
यहाँ ‘चाकू से’ काटने के साधन (उपकरण) को बता रहा है, इसलिए यह करण कारक है। जिस ‘से’ में साधन का भाव हो (जिससे कार्य किया गया), वह करण कारक कहलाता है।
प्रश्न 5
‘यह मोहन का घर है’ वाक्य में ‘मोहन का’ में कौन-सा कारक है?
- Aसंबंध कारक
- Bअधिकरण कारक
- Cकरण कारक
- Dकर्म कारक
व्याख्या
‘का/के/की’ विभक्ति दो संज्ञाओं के बीच स्वामित्व या संबंध बताती है, इसलिए इसे संबंध कारक कहते हैं। ‘मोहन का घर’ में घर मोहन का है, यह संबंध दिखाया जा रहा है।
प्रश्न 6
‘बच्चे बगीचे में खेल रहे हैं’ वाक्य में ‘बगीचे में’ में कौन-सा कारक है?
- Aकरण कारक
- Bअपादान कारक
- Cअधिकरण कारक
- Dसंबंध कारक
व्याख्या
‘में/पर’ विभक्ति क्रिया के होने के स्थान या आधार का बोध कराती है, इसे अधिकरण कारक कहते हैं। ‘बगीचे में’ खेलने की क्रिया का स्थान बता रहा है।
प्रश्न 7
‘हे ईश्वर! हमारी रक्षा करो’ वाक्य में ‘हे ईश्वर’ में कौन-सा कारक है?
- Aकर्ता कारक
- Bसंबोधन कारक
- Cकरण कारक
- Dसंप्रदान कारक
व्याख्या
जब किसी को पुकारा या संबोधित किया जाए, तो वह संबोधन कारक कहलाता है, जिसके चिह्न ‘हे’, ‘अरे’, ‘ओ’ आदि होते हैं। ‘हे ईश्वर’ में ईश्वर को पुकारा जा रहा है।
प्रश्न 8
करण और अपादान कारक में मुख्य अंतर है
- Aकरण में ‘से’ साधन बताता है, अपादान में ‘से’ अलगाव/तुलना बताता है
- Bदोनों में कोई अंतर नहीं है
- Cकरण में हमेशा ‘को’ आता है
- Dअपादान में हमेशा ‘का’ आता है
व्याख्या
दोनों में विभक्ति ‘से’ समान होती है, पर करण कारक में यह साधन (जिससे कार्य किया गया) बताता है, जबकि अपादान कारक में अलग होने, दूरी या तुलना का भाव देता है।
प्रश्न 9
कारक-भेद पढ़ाते समय शिक्षक के लिए सबसे उपयुक्त कक्षा-गतिविधि है
- Aकेवल आठों कारकों के नाम रटवाना
- Bएक ही विभक्ति (जैसे ‘से’) के अलग-अलग वाक्यों में अलग भाव दिखाकर तुलना कराना
- Cबिना उदाहरण के परिभाषा देना
- Dकारक को पाठ्यक्रम से हटा देना
व्याख्या
कारक में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक ही विभक्ति (से, को, में) कई कारकों में आ सकती है। इसे स्पष्ट करने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि उसी विभक्ति के अलग-अलग भाव वाले वाक्य साथ-साथ दिखाकर तुलना कराई जाए।
प्रश्न 10
‘गंगा हिमालय से निकलती है’ वाक्य में ‘हिमालय से’ में कौन-सा कारक है?
- Aकरण कारक
- Bअपादान कारक
- Cसंप्रदान कारक
- Dसंबंध कारक
व्याख्या
यहाँ ‘से’ उद्गम-स्थान से अलग होकर निकलने का भाव बता रहा है (कहाँ से निकली), साधन का नहीं। जिस ‘से’ में उत्पत्ति-स्रोत या अलगाव का भाव हो, वह अपादान कारक कहलाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कारक किसे कहते हैं?+
वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं, और इसे बताने वाले चिह्न विभक्ति कहलाते हैं।
हिंदी में कुल कितने कारक होते हैं?+
हिंदी व्याकरण में आठ कारक माने जाते हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन।
कारक से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से 2 प्रश्न आए थे, दोनों वाक्य में रेखांकित पद का कारक पहचानने पर आधारित।
करण और अपादान कारक में ‘से’ का अंतर कैसे पहचानें?+
अगर ‘से’ साधन/उपकरण बताए (जिससे काम हुआ), तो करण कारक; अगर अलगाव, दूरी या तुलना बताए (जिससे अलग हुआ/जिससे ज्यादा), तो अपादान कारक।
कारक पहचानने का सबसे आसान तरीका क्या है?+
क्रिया से उपयुक्त प्रश्न पूछें — जैसे ‘किसने किया’ (कर्ता), ‘किसे’ (कर्म), ‘किससे/साधन’ (करण), ‘किसके लिए’ (संप्रदान) — जो उत्तर मिले, वही उस कारक को दर्शाता है।
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- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए