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REET लेवल 1 व 2 · हिंदी

लोकोक्तियाँ

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लोकोक्तियाँ लोक-जीवन के अनुभव से बनी पूर्ण-वाक्य जैसी उक्तियाँ हैं, जो मुहावरों से अलग होती हैं। REET में हर बार कोई लोकोक्ति देकर उसका निहितार्थ पूछा जाता है या किसी स्थिति के लिए सही लोकोक्ति चुनने को कहा जाता है, इसलिए अर्थ के साथ-साथ प्रयोग का संदर्भ भी याद रखना जरूरी है।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के चार प्रश्नों में एक तो सीधे यह पहचानने का था कि दिए विकल्पों में से कौन-सी उक्ति वास्तव में लोकोक्ति है (मुहावरे से अलग करके), और बाकी तीन प्रश्नों में किसी प्रसिद्ध लोकोक्ति (‘हाथ कंगन को आरसी क्या’, ‘दाल भात में मूसलचंद’, ‘तन पर नहीं लत्ता...’) का सही निहितार्थ या किसी स्थिति के लिए उपयुक्त लोकोक्ति चुनने को कहा गया। यानी लोकोक्ति व मुहावरे का भेद और अर्थ दोनों समान महत्व रखते हैं।

लोकोक्ति क्या है और मुहावरे से कैसे अलग है?

लोकोक्ति किसी घटना, कहानी या लोक-अनुभव के सार को व्यक्त करने वाली प्रसिद्ध, स्वतंत्र और पूर्ण उक्ति होती है — जैसे ‘हाथ कंगन को आरसी क्या’। यह अपने-आप में पूरा वाक्य होती है और काल, वचन, पुरुष के अनुसार नहीं बदलती।

मुहावरा इसके विपरीत एक शब्द-समूह (वाक्यांश) होता है, जो वाक्य में जुड़कर ही पूरा अर्थ देता है और प्रायः ‘-ना’ क्रिया-रूप में समाप्त होता है (जैसे ‘नाकों चने चबवाना’) — इसका रूप वाक्य में काल-वचन के अनुसार बदलता है (‘चबवाया’, ‘चबवा रहा है’)। सरल पहचान यह है — अगर उक्ति अपने-आप में पूरा वाक्य लगे और कहानी/अनुभव से जुड़ी हो तो लोकोक्ति; अगर वह वाक्यांश हो और किसी क्रिया के साथ पूरा अर्थ बने तो मुहावरा।

एक और उपयोगी पहचान-बिंदु यह है कि लोकोक्ति में प्रायः कोई सीख, नैतिक शिक्षा या जीवन-अनुभव का सार छिपा होता है, जबकि मुहावरा केवल किसी क्रिया या भाव को अलंकृत ढंग से व्यक्त करने का साधन है, उसमें कोई नैतिक सीख जरूरी नहीं। उदाहरण के लिए ‘नौ दो ग्यारह होना’ मुहावरा है जो सिर्फ ‘भाग जाना’ बताता है, जबकि ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ लोकोक्ति है जो कर्मफल की एक पूरी सीख देती है। यह भेद रटने के बजाय समझने से याद रखना ज्यादा आसान हो जाता है, क्योंकि तब हर नई उक्ति को इस तराजू पर तौला जा सकता है।

व्यवहार में ‘कहावत’ और ‘लोकोक्ति’ शब्द प्रायः एक ही अर्थ में प्रयोग होते हैं, दोनों ही लोक-अनुभव पर आधारित प्रचलित उक्तियाँ हैं। क्षेत्रीय बोलियों (जैसे राजस्थानी) की अपनी कहावतें भी उसी बोली में लोकोक्ति ही मानी जाती हैं, पर REET के हिंदी खंड में मानक हिंदी में प्रचलित लोकोक्तियाँ ही पूछी जाती हैं। लोकोक्तियों का प्रयोग निबंध, भाषण और साक्षात्कार जैसे औपचारिक संदर्भों में भी होता है, बशर्ते उसका अर्थ और प्रसंग दोनों सही ढंग से मेल खाते हों।

लोकोक्ति के प्रश्न हल करते समय पहले यह पहचानें कि वाक्य में उक्ति के सामान्य/शाब्दिक अर्थ पर आधारित कोई विकल्प तो नहीं दिया गया — ऐसे विकल्प अक्सर गलत होते हैं क्योंकि वे लोकोक्ति के व्यावहारिक सबक को नहीं पकड़ते, केवल शब्दों का सतही अनुवाद देते हैं।

REET में पूछी गई प्रमुख लोकोक्तियाँ और उनका अर्थ

लोकोक्तिअर्थ
अरहर की टट्टी गुजराती तालामामूली वस्तु की रक्षा के लिए बहुत महँगा/भारी प्रबंध करना
हाथ कंगन को आरसी क्याजो बात स्वयं स्पष्ट दिखे, उसके लिए प्रमाण की जरूरत नहीं
दाल भात में मूसलचंददो लोगों के आपसी काम में अनावश्यक तीसरे व्यक्ति का दखल देना
तन पर नहीं लत्ता, पान खाये अलबत्ताहैसियत से बाहर जाकर दिखावटी रहन-सहन या शौक करना
थोथा चना बाजे घनागुणहीन/कम योग्यता वाला व्यक्ति अधिक दिखावा या शोर करता है
इन तिलों में तेल नहींजहाँ से किसी लाभ की उम्मीद न हो
अंधों में काना राजाअयोग्य लोगों के बीच थोड़ी योग्यता वाला भी श्रेष्ठ मान लिया जाता है
नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चलीबहुत बुरे काम करने के बाद अच्छा दिखने का दिखावा करना
एक अनार सौ बीमारएक ही वस्तु/पद के लिए बहुत सारे दावेदार होना

REET में लोकोक्ति का शाब्दिक अर्थ नहीं, बल्कि उसका व्यावहारिक निहितार्थ (implied meaning) पूछा जाता है।

निहितार्थ पहचानने की रणनीति

लोकोक्ति के प्रश्नों में अक्सर एक विकल्प शाब्दिक अर्थ देता है और एक विकल्प वास्तविक निहितार्थ। जैसे ‘हाथ कंगन को आरसी क्या’ में एक विकल्प ‘हाथ में कंगन पहने जाते हैं’ (शाब्दिक, गलत) था और सही विकल्प ‘प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती’ (वास्तविक भाव) था। हमेशा उस विकल्प को चुनें जो लोकोक्ति के पीछे का व्यावहारिक सबक बताए, शब्दशः अनुवाद नहीं।

लोकोक्तियाँ राजस्थान सहित पूरे उत्तर भारत के लोक-जीवन, कृषि, पारिवारिक संबंधों और व्यवहार-कुशलता से गहराई से जुड़ी हैं, इसलिए ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा से चली आ रही हैं। REET जैसी परीक्षा में इन्हें पूछने का मकसद यह जाँचना है कि भावी शिक्षक भाषा के सांस्कृतिक व व्यावहारिक पक्ष को भी समझते हैं, केवल किताबी व्याकरण को ही नहीं — इसलिए कक्षा में पढ़ाते समय भी इन्हें बच्चों के आसपास के जीवन से जोड़कर सिखाना कारगर रहता है।

इसलिए हर लोकोक्ति को पढ़ते समय स्वयं से पूछें कि इसके पीछे का व्यावहारिक सबक क्या है, न कि केवल शब्दों का शाब्दिक अनुवाद क्या बनता है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

हर हफ्ते एक लोकोक्ति को छोटी कहानी या रोज़मर्रा की घटना से जोड़कर सुनाएँ, फिर बच्चों से उसी अर्थ की कोई और स्थिति बतवाएँ — इससे निहितार्थ याद रहता है।

शिक्षण सामग्री

लोकोक्ति और उसके अर्थ की चित्रकथा (कॉमिक-स्ट्रिप) या पोस्टर कक्षा 6-8 में रुचि बढ़ाने में मदद करता है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे लोकोक्ति और मुहावरे को एक ही समझ लेते हैं क्योंकि दोनों लोक-भाषा के अलंकृत प्रयोग हैं — रूप (पूर्ण वाक्य बनाम वाक्यांश) और बदलाव-क्षमता के आधार पर स्पष्ट भेद कराएँ।

आकलन

5 प्रसिद्ध लोकोक्तियाँ देकर उनका निहितार्थ लिखवाएँ, और 3 उक्तियाँ देकर पूछें कि इनमें से कौन-सी लोकोक्ति है और कौन-सी मुहावरा।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

अगर उक्ति अपने-आप में पूरा वाक्य जैसी लगे (काल-वचन के अनुसार नहीं बदलती) और किसी कहानी/अनुभव की सीख जैसी लगे — तो लोकोक्ति समझें। अगर वह ‘-ना’ में खत्म होने वाला वाक्यांश हो जिसे वाक्य में जोड़ना पड़े — तो मुहावरा समझें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 36

निम्नलिखित में से ‘लोकोक्ति’ है

  1. Aनया-पुराना करना
  2. Bअरहर की टट्टी गुजराती ताला
  3. Cताँतिया जवान
  4. Dबछिया का ताऊ होना

व्याख्या

लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य जैसी स्वतंत्र उक्ति होती है, जबकि मुहावरा वाक्यांश होता है जो प्रायः ‘-ना’ क्रिया रूप में समाप्त होता है। ‘अरहर की टट्टी गुजराती ताला’ एक लोकोक्ति है, जिसका अर्थ है — मामूली वस्तु की रक्षा के लिए बहुत कीमती प्रबंध करना। ‘नया-पुराना करना’ और ‘बछिया का ताऊ होना’ मुहावरे हैं।

प्रश्न 53

“हाथ कंगन को आरसी क्या ?” लोकोक्ति का निहितार्थ है –

  1. Aहाथ में कंगन पहने जाते हैं
  2. Bप्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती
  3. Cकंगन को दर्पण में देखना चाहिए
  4. Dकंगन शृंगार का आवश्यक अंग है

व्याख्या

‘हाथ कंगन को आरसी क्या’ का अर्थ है — जो बात प्रत्यक्ष दिखाई दे रही हो, उसके लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। हाथ में पहना कंगन देखने के लिए आरसी (दर्पण) की जरूरत नहीं पड़ती। अन्य विकल्प केवल शाब्दिक अर्थ हैं, निहितार्थ नहीं।

प्रश्न 74

“दो व्यक्तियों के काम की बातों में तीसरे का हस्तक्षेप करना ।” के आशय हेतु उपयुक्त लोकोक्ति है-

  1. Aथोथा चना बाजे घना
  2. Bबावन तोले पाव रत्ती
  3. Cइन तिलों में तेल नहीं
  4. Dदाल भात में मूसलचंद

व्याख्या

‘दाल भात में मूसलचंद’ लोकोक्ति का प्रयोग तब होता है जब कोई व्यक्ति दो लोगों के बीच की बात या काम में अनावश्यक दखल दे। ‘थोथा चना बाजे घना’ का अर्थ है गुणहीन व्यक्ति का अधिक दिखावा, और ‘इन तिलों में तेल नहीं’ का अर्थ है किसी से कुछ मिलने की आशा न होना।

प्रश्न 64

‘तन पर नहीं लत्ता पान खाये अलबत्ता’ लोकोक्ति का निकटतम अर्थ वाला विकल्प है

  1. Aमनुष्य का रहन-सहन उसकी हैसियत से बाहर होना ।
  2. Bजितने का माल उससे ज्यादा व्यय करना ।
  3. Cअभावग्रस्त होने का प्रदर्शन करना ।
  4. Dपान खाने का शौकीन ।

व्याख्या

‘तन पर नहीं लत्ता, पान खाये अलबत्ता’ का आशय है— शरीर पर ढंग का कपड़ा नहीं, फिर भी पान खाने का शौक। यह ऐसे व्यक्ति पर कहा जाता है जो अपनी हैसियत से बाहर रहन-सहन या दिखावा करता है। अतः (A) निकटतम अर्थ है; (C) इसके उलट भाव है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘अंधों में काना राजा’ लोकोक्ति का अर्थ है

  1. Aअयोग्य लोगों के बीच थोड़ी योग्यता वाला भी श्रेष्ठ मान लिया जाता है
  2. Bअंधे व्यक्ति को राजा बना देना
  3. Cराजा की आँखें कमजोर होना
  4. Dकाना व्यक्ति सबसे बुद्धिमान होता है

व्याख्या

‘अंधों में काना राजा’ का निहितार्थ है कि जहाँ सब औसत से कम हों, वहाँ थोड़ी-सी भी योग्यता वाला व्यक्ति श्रेष्ठ मान लिया जाता है। यह शाब्दिक कथन नहीं बल्कि तुलनात्मक स्थिति पर व्यंग्य है।

प्रश्न 2

‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ लोकोक्ति किस स्थिति के लिए प्रयुक्त होती है?

  1. Aजब कोई अपनी कमी छिपाकर दूसरों/परिस्थितियों को दोष दे
  2. Bजब आँगन वास्तव में टेढ़ा हो
  3. Cजब कोई अच्छा नृत्य करे
  4. Dजब घर की साफ-सफाई अच्छी हो

व्याख्या

यह लोकोक्ति उस व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होती है जो अपनी असमर्थता या कमी को स्वीकार करने की बजाय बाहरी परिस्थितियों को दोष देता है।

प्रश्न 3

निम्नलिखित में से लोकोक्ति है

  1. Aआँखें दिखाना
  2. Bजिसकी लाठी उसकी भैंस
  3. Cनौ दो ग्यारह होना
  4. Dकान भरना

व्याख्या

‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ अपने-आप में पूर्ण वाक्य है और शक्तिशाली का ही हक चलने की सीख देता है, इसलिए यह लोकोक्ति है। शेष तीनों वाक्यांश हैं जो ‘-ना’ रूप में समाप्त होते हैं, अतः मुहावरे हैं।

प्रश्न 4

‘ऊँट के मुँह में जीरा’ लोकोक्ति का अर्थ है

  1. Aआवश्यकता से बहुत कम मात्रा में कुछ मिलना
  2. Bऊँट को जीरा खिलाना
  3. Cबहुत अधिक भोजन मिलना
  4. Dकिसी चीज़ का स्वाद कड़वा होना

व्याख्या

यह लोकोक्ति तब प्रयोग होती है जब किसी की जरूरत के मुकाबले उसे मिलने वाली वस्तु बहुत कम हो — जैसे विशाल ऊँट के लिए एक चुटकी जीरा नाकाफी होता है।

प्रश्न 5

‘आम के आम गुठलियों के दाम’ लोकोक्ति किस स्थिति को दर्शाती है?

  1. Aएक ही काम से दोहरा लाभ होना
  2. Bआम की कीमत बढ़ना
  3. Cगुठली बेचना घाटे का सौदा होना
  4. Dकोई लाभ न होना

व्याख्या

‘आम के आम गुठलियों के दाम’ का निहितार्थ है कि किसी एक काम से मुख्य लाभ के साथ-साथ अतिरिक्त (गौण) लाभ भी मिल जाए, यानी दोहरा फायदा।

प्रश्न 6

किस स्थिति के लिए ‘छाछ भी फूँक-फूँक कर पीना’ लोकोक्ति उपयुक्त है?

  1. Aएक बार धोखा खाने के बाद हर छोटी बात में भी अत्यधिक सावधानी बरतना
  2. Bगर्म छाछ पीने की आदत
  3. Cस्वादिष्ट भोजन की तलाश
  4. Dजल्दबाजी में खाना खाना

व्याख्या

यह लोकोक्ति तब प्रयोग होती है जब कोई व्यक्ति पहले किसी नुकसान/धोखे का अनुभव कर चुका हो और अब सामान्य से अधिक हर बात में सतर्कता बरतता हो, जबकि दूध की तरह छाछ ठंडी होने पर भी उसे फूँककर पीता है।

प्रश्न 7

‘जैसी करनी वैसी भरनी’ लोकोक्ति का भाव है

  1. Aअपने कर्मों का फल स्वयं भोगना पड़ता है
  2. Bकाम बाँटकर करना चाहिए
  3. Cमेहनत करने पर पैसा मिलता है
  4. Dदूसरों की मदद करना

व्याख्या

‘जैसी करनी वैसी भरनी’ का अर्थ है कि व्यक्ति को अपने अच्छे या बुरे कर्मों का परिणाम खुद ही भुगतना पड़ता है — यह कर्मफल के सिद्धांत पर आधारित प्रसिद्ध लोकोक्ति है।

प्रश्न 8

लोकोक्ति और मुहावरे में मुख्य व्याकरणिक अंतर है

  1. Aलोकोक्ति पूर्ण व अपरिवर्तनीय वाक्य होती है, मुहावरा वाक्यांश होता है जो काल-वचन से बदलता है
  2. Bदोनों बिलकुल एक जैसे होते हैं
  3. Cलोकोक्ति केवल कविता में प्रयोग होती है
  4. Dमुहावरे हमेशा लोकोक्ति से लंबे होते हैं

व्याख्या

लोकोक्ति स्वतंत्र, पूर्ण और अपरिवर्तनीय वाक्य होती है, जबकि मुहावरा वाक्यांश है जिसका रूप वाक्य में काल, वचन व पुरुष के अनुसार बदलता रहता है।

प्रश्न 9

कक्षा में लोकोक्तियाँ पढ़ाते समय सबसे प्रभावी तरीका है

  1. Aकेवल शब्दशः अर्थ रटवाना
  2. Bहर लोकोक्ति को कहानी या रोज़मर्रा की घटना से जोड़कर निहितार्थ समझाना
  3. Cलोकोक्तियों की सूची परीक्षा से एक दिन पहले देना
  4. Dइन्हें पाठ्यक्रम से हटा देना

व्याख्या

लोकोक्ति का असली सबक (निहितार्थ) तभी स्थायी रूप से समझ आता है जब उसे किसी वास्तविक स्थिति या कहानी से जोड़ा जाए — केवल शब्दशः अर्थ रटने से गहरा भाव पकड़ में नहीं आता।

प्रश्न 10

‘बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद’ लोकोक्ति किस स्थिति पर लागू होती है?

  1. Aजिस व्यक्ति को किसी वस्तु/गुण की समझ ही न हो, वह उसका महत्व नहीं जान सकता
  2. Bबंदर द्वारा अदरक खाना
  3. Cअदरक का स्वाद तीखा होना
  4. Dजानवरों को खाना खिलाना

व्याख्या

यह लोकोक्ति उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होती है जिसे किसी वस्तु, कला या गुण की कोई समझ नहीं है, इसलिए वह उसका सही मूल्य या महत्व नहीं आँक सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकोक्ति किसे कहते हैं?+

किसी घटना या लोक-अनुभव के सार को व्यक्त करने वाली, अपने-आप में पूर्ण-वाक्य जैसी प्रसिद्ध उक्ति को लोकोक्ति कहते हैं, जैसे ‘हाथ कंगन को आरसी क्या’।

लोकोक्तियों से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 4 प्रश्न आए थे — निहितार्थ पहचानने और मुहावरे से भेद करने पर आधारित। भाषा-I/II में यह हर साल का नियमित हिस्सा है।

लोकोक्ति और मुहावरे में मुख्य अंतर क्या है?+

लोकोक्ति अपने-आप में पूर्ण वाक्य होती है और नहीं बदलती, जबकि मुहावरा वाक्यांश होता है जो वाक्य में जुड़कर काल-वचन के अनुसार बदलता है और प्रायः ‘-ना’ में समाप्त होता है।

लोकोक्तियाँ याद रखने का आसान तरीका क्या है?+

हर लोकोक्ति को एक छोटी कहानी या रोज़मर्रा की घटना से जोड़कर याद करें, केवल शब्दशः अर्थ रटने से निहितार्थ भूल जाता है।

क्या हर लोकोक्ति में कोई नैतिक सीख होती है?+

अधिकतर लोकोक्तियों में कोई जीवन-अनुभव या नैतिक सीख छिपी होती है, जबकि मुहावरे में ऐसा जरूरी नहीं — मुहावरा मुख्यतः किसी क्रिया या भाव को अलंकृत ढंग से व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए