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लोकोक्तियाँ (कहावतें)

लोकोक्ति एक पूरा वाक्य होती है जो अपने आप में एक बात कह देती है — मुहावरे की तरह वाक्य में ढाली नहीं जाती। यहाँ 93 लोकोक्तियाँ वर्णक्रम में, अर्थ और प्रयोग सहित दी गई हैं।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

लोकोक्तियाँ (कहावतें) — अर्थ और प्रयोग सहित

लोकोक्ति पूरे वाक्य के रूप में आती है, इसलिए यहाँ 'वाक्य प्रयोग' का अर्थ है — वह स्थिति दिखाना जिसमें कहावत सहज बैठती है। नीचे प्रत्येक कहावत का भाव और एक ऐसी स्थिति दी गई है जिसमें वह सही उतरती है। ध्यान दें कि कहावत का रूप नहीं बदला जाता; उसे जोड़ते समय 'यही तो है', 'इसी को कहते हैं', 'सच ही कहा गया है' जैसे जोड़ से पिरोया जाता है। परीक्षा में लोकोक्ति का भाव पूछा जाता है, शब्दार्थ नहीं — जैसे 'ऊँची दुकान फीका पकवान' में प्रश्न पकवान का नहीं, दिखावे और वास्तविकता के अंतर का है।

'अ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

अ

अंत भला सो भला

जिसका परिणाम अच्छा हो वही अच्छा माना जाता है

पूरे वर्ष उतार-चढ़ाव रहा, पर चयन हो गया — अंत भला सो भला।

अंधा बाँटे रेवड़ी, फिर-फिर अपने को दे

अधिकार पाकर व्यक्ति अपने ही लोगों को लाभ पहुँचाता है

समिति में सारे नाम उसी के परिचित निकले — अंधा बाँटे रेवड़ी, फिर-फिर अपने को दे।

अंधों में काना राजा

अयोग्यों के बीच थोड़ा योग्य भी बड़ा माना जाता है

जहाँ किसी ने पूरा पाठ्यक्रम नहीं पढ़ा, वहाँ आधा पढ़ा भी अंधों में काना राजा बन जाता है।

अक्ल बड़ी या भैंस

बुद्धि शरीर के बल से बड़ी होती है

छोटे कद के पहलवान ने दाँव से जीत दिखा दी कि अक्ल बड़ी या भैंस।

अधजल गगरी छलकत जाए

अल्पज्ञ व्यक्ति ही अधिक दिखावा करता है

दो पाठ पढ़कर वह सबको पढ़ाने चला, अधजल गगरी छलकत जाए।

अपना हाथ जगन्नाथ

अपने किए काम पर ही भरोसा होता है

नोट्स दूसरों से माँगने के बजाय स्वयं बनाओ, अपना हाथ जगन्नाथ।

अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है

अपने क्षेत्र में हर व्यक्ति साहसी बन जाता है

गाँव में उसकी दहाड़ सुनकर बुजुर्ग हँसे — अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है।

अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग

हर कोई अपनी ही बात कहे, तालमेल न हो

बैठक में कोई निर्णय नहीं हुआ, सबकी अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग थी।

अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत

अवसर निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ है

आवेदन की अंतिम तिथि बीत जाने पर वह परेशान हो रहा था, तब चाचा ने कहा — अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

'आ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

आ

आ बैल मुझे मार

जान-बूझकर मुसीबत को बुलाना

शांत विवाद में कूद पड़ना आ बैल मुझे मार कहने जैसा है।

आँख का अंधा नाम नयनसुख

गुण के विपरीत नाम होना

दुकान का नाम 'सस्ता भंडार' और भाव सबसे ऊँचे — आँख का अंधा नाम नयनसुख।

आँचल में दूध और आँखों में पानी

स्त्री का करुण और ममतामय स्वभाव

माँ की स्थिति ऐसी ही थी — आँचल में दूध और आँखों में पानी।

आगे कुआँ पीछे खाई

दोनों ओर संकट होना

नौकरी छोड़े तो आय बंद, न छोड़े तो तैयारी अधूरी — आगे कुआँ पीछे खाई।

आधा तीतर आधा बटेर

बेमेल जोड़, अनमेल मिश्रण

आधी हिंदी आधी अंग्रेजी में लिखा वह उत्तर आधा तीतर आधा बटेर लगा।

आप भला तो जग भला

अपना आचरण अच्छा हो तो संसार भी अच्छा लगता है

वे किसी की बुराई नहीं करते, मानते हैं — आप भला तो जग भला।

आम के आम गुठलियों के दाम

एक ही काम से दोहरा लाभ

तैयारी के नोट्स छोटे भाई के भी काम आ गए — आम के आम गुठलियों के दाम।

'उ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

उ

उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे

दोषी ही निर्दोष पर आरोप लगाने लगे

देर से आया और अध्यापक पर ही बरस पड़ा — उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।

'ऊ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ऊ

ऊँची दुकान फीका पकवान

बाहरी दिखावा अधिक, वास्तविक गुण कम

बड़े होर्डिंग वाली उस कोचिंग का परिणाम देखकर लगा — ऊँची दुकान फीका पकवान।

ऊँट के मुँह में जीरा

आवश्यकता के सामने अत्यंत थोड़ी वस्तु

पूरे गाँव के लिए दो टैंकर पानी ऊँट के मुँह में जीरा था।

'ए' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ए

एक अनार सौ बीमार

वस्तु थोड़ी और चाहने वाले बहुत

एक पद और तीन हजार आवेदन — एक अनार सौ बीमार।

एक और एक ग्यारह होते हैं

मिलकर काम करने से शक्ति कई गुना बढ़ जाती है

दोनों भाइयों ने साथ खेती सँभाली तो सब कहने लगे — एक और एक ग्यारह होते हैं।

एक पंथ दो काज

एक ही प्रयास से दो काम पूरे होना

शहर गया तो परीक्षा फॉर्म भी जमा किया और पुस्तकें भी ले आया — एक पंथ दो काज।

एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है

एक व्यक्ति के दोष से पूरे समूह की बदनामी होती है

एक की नकल से सारा केंद्र संदेह में आ गया — एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है।

एक हाथ से ताली नहीं बजती

झगड़े में दोनों पक्षों का हाथ होता है

पंच ने दोनों को समझाया कि एक हाथ से ताली नहीं बजती।

'ओ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ओ

ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर

काम आरंभ कर दिया तो कठिनाई से डरना व्यर्थ है

फॉर्म भर दिया है, अब कठिन पाठ्यक्रम से क्यों घबराते हो — ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर।

'क' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

क

कंगाली में आटा गीला

विपत्ति पर और विपत्ति आ जाना

फसल चौपट हुई और उसी बीच पशु भी बीमार पड़ गया — कंगाली में आटा गीला।

करेला और नीम चढ़ा

बुरे स्वभाव में और बुराई जुड़ जाना

पहले से क्रोधी और अब अधिकार भी मिल गया — करेला और नीम चढ़ा।

कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा

असंबद्ध चीजों को जोड़कर बेमेल रचना बना देना

चार पुस्तकों के टुकड़े मिलाकर बनाए उन नोट्स पर यही कहा जाएगा — कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा।

का वर्षा जब कृषी सुखानी

समय बीत जाने पर मिली सहायता व्यर्थ होती है

परीक्षा के बाद आई पुस्तक देखकर वह बोला — का वर्षा जब कृषी सुखानी।

काम प्यारा है चाम नहीं

काम महत्वपूर्ण है, दिखावट नहीं

चयन योग्यता से होता है, पहनावे से नहीं — काम प्यारा है चाम नहीं।

काला अक्षर भैंस बराबर

निरक्षर व्यक्ति के लिए लिखा हुआ बेकार होता है

जिसने पढ़ना ही न सीखा, उसके लिए मोटी पुस्तक काला अक्षर भैंस बराबर है।

कोयले की दलाली में हाथ काले

बुरे काम में पड़कर बदनामी मिलती ही है

नकल कराने वालों के साथ बैठे और नाम खराब हुआ — कोयले की दलाली में हाथ काले।

कौआ चला हंस की चाल

अपनी क्षमता छोड़कर दूसरे की नकल करना

अपनी विधि छोड़कर वह दूसरों की समय-सारणी अपनाने लगा — कौआ चला हंस की चाल।

'ख' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ख

खग जाने खग ही की भाषा

एक जैसे लोग ही एक-दूसरे को समझते हैं

दोनों की योजना सुनकर लगा — खग जाने खग ही की भाषा।

खरी मजूरी चोखा काम

उचित पारिश्रमिक मिले तो काम भी अच्छा होता है

मजदूरी समय पर देने वाले किसान के खेत सबसे साफ रहते हैं — खरी मजूरी चोखा काम।

खाली बैठे नाई बकरी का सिर मूँड़े

बेकार आदमी व्यर्थ के काम करता रहता है

दिन भर मोबाइल पर प्रश्न गिनता रहा — खाली बैठे नाई बकरी का सिर मूँड़े।

खोदा पहाड़ निकली चुहिया

बहुत परिश्रम के बाद अत्यंत तुच्छ परिणाम मिलना

महीनों चली जाँच का निष्कर्ष दो पंक्तियों का निकला — खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

'ग' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ग

गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास

अवसर देखकर रंग बदल लेना

जिस गुट में बैठे उसी की भाषा बोलने लगे — गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास।

गरजते बादल बरसते नहीं

जो अधिक शोर करते हैं वे काम नहीं करते

धमकियाँ बहुत दीं, हुआ कुछ नहीं — गरजते बादल बरसते नहीं।

गुड़ खाए गुलगुले से परहेज

असली बुराई करते हुए छोटी बात पर दिखावटी संकोच

पूरा दिन बरबाद करके आधे घंटे की देरी पर सफाई देना — गुड़ खाए गुलगुले से परहेज।

गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है

दोषी के साथ निर्दोष भी भुगतता है

कुछ की शरारत पर पूरी कक्षा को रोका गया — गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है।

'घ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

घ

घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध

अपने यहाँ के गुणी की कद्र नहीं होती

गाँव के ही शिक्षक को कोई नहीं पूछता और बाहर से आए को सब सुनते हैं — घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध।

घर की मुर्गी दाल बराबर

अपने पास की वस्तु का मूल्य कम आँकना

घर के पुस्तकालय में बैठने के बजाय वह दूर कोचिंग जाता है — घर की मुर्गी दाल बराबर।

'च' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

च

चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात

सुख थोड़े समय का होता है

उधार की चमक-दमक पर बुजुर्ग बोले — चार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात।

चोर की दाढ़ी में तिनका

अपराधी के व्यवहार से ही उसका दोष झलक जाता है

बिना पूछे ही वह सफाई देने लगा — चोर की दाढ़ी में तिनका।

चोर-चोर मौसेरे भाई

एक जैसे दुर्गुण वाले आपस में मिल जाते हैं

दोनों दलाल एक-दूसरे को बचाते रहे — चोर-चोर मौसेरे भाई।

चोरी और सीनाजोरी

दोष करके ऊपर से अकड़ दिखाना

पकड़े गए और झगड़ने लगे — चोरी और सीनाजोरी।

'ज' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ज

जल में रहकर मगर से बैर

जिसके आश्रय में रहना हो उससे शत्रुता करना

उसी विभाग में नौकरी और उसी से भिड़ंत — जल में रहकर मगर से बैर।

जहाँ चाह वहाँ राह

सच्ची इच्छा हो तो उपाय निकल आता है

बिजली नहीं थी तो लालटेन में पढ़ा — जहाँ चाह वहाँ राह।

जितने मुँह उतनी बातें

जितने लोग उतनी ही राय

परिणाम में देरी पर जितने मुँह उतनी बातें होने लगीं।

जिसकी लाठी उसकी भैंस

जो बलवान होता है अधिकार भी उसी का चलता है

पानी की बारी तय होते हुए भी ताकतवर ने पहले ले ली — जिसकी लाठी उसकी भैंस।

जिसके पैर न फटी बिवाई, वह क्या जाने पीर पराई

जिसने कष्ट न भोगा हो वह दूसरे का दुख नहीं समझता

कभी खेत में काम न किया और मजदूरी पर उपदेश दे रहा है — जिसके पैर न फटी बिवाई, वह क्या जाने पीर पराई।

जैसा देश वैसा भेष

स्थान के अनुसार आचरण ढाल लेना चाहिए

नई जगह जाकर उसने वहीं का ढंग अपना लिया — जैसा देश वैसा भेष।

'ड' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ड

डूबते को तिनके का सहारा

संकट में थोड़ी सहायता भी बड़ी लगती है

उस महीने मिली छोटी छात्रवृत्ति ने पढ़ाई बचा ली — डूबते को तिनके का सहारा।

'त' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

त

तेली का तेल जले, मशालची का दिल जले

हानि एक की हो और कुढ़े दूसरा

खर्च उसने किया और जलन पड़ोसी को हुई — तेली का तेल जले, मशालची का दिल जले।

'थ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

थ

थोथा चना बाजे घना

गुणहीन व्यक्ति अधिक शोर करता है

तैयारी आधी और दावे पूरे — थोथा चना बाजे घना।

'द' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

द

दीवार के भी कान होते हैं

गुप्त बात भी बाहर आ जाती है

ऐसी बात धीरे भी न कहो, दीवार के भी कान होते हैं।

दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम

असमंजस में दोनों अवसर खो देना

दो परीक्षाओं में उलझा रहा और दोनों छूट गईं — दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम।

दूर के ढोल सुहावने

दूर की चीजें आकर्षक लगती हैं, निकट जाकर भेद खुलता है

बड़े शहर की नौकरी में जाकर पता चला — दूर के ढोल सुहावने।

दोनों हाथ में लड्डू

दोनों ओर से लाभ होना

नौकरी भी पास और घर भी पास — दोनों हाथ में लड्डू।

'ध' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ध

धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का

जो कहीं का न हो

दोनों गुटों में हाँ मिलाकर वह धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का बन गया।

'न' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

न

न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी

असंभव शर्त रखकर काम टाल देना

वह कहता है पूरा पाठ्यक्रम रट लूँ तब परीक्षा दूँगा — न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी।

नाच न जाने आँगन टेढ़ा

अपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों में दोष निकालना

पढ़ाई नहीं की और कहता है पुस्तक अच्छी नहीं थी — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

नेकी और पूछ-पूछ

भलाई करने में पूछने की आवश्यकता नहीं

मदद करनी है तो कर दो, नेकी और पूछ-पूछ।

नौ नकद न तेरह उधार

थोड़ा तुरंत मिलना अधिक उधार से अच्छा है

नकद दाम कम मिले पर उसने दे दिया — नौ नकद न तेरह उधार।

'प' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

प

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

दूसरों को सिखाने वाले बहुत, स्वयं करने वाले कम

सबको समय-सारणी बताता है और स्वयं देर से उठता है — पर उपदेश कुशल बहुतेरे।

पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं

योग्यता के लक्षण आरंभ में ही प्रकट हो जाते हैं

पहली कक्षा से ही उसकी लगन दिखती थी — पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं।

पैसा पैसे को खींचता है

जिसके पास साधन हैं उसी के पास और आते हैं

दुकान चली तो निवेश भी बढ़ा — पैसा पैसे को खींचता है।

'ब' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ब

बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद

अयोग्य व्यक्ति गुण की परख नहीं कर सकता

उस दुर्लभ ग्रंथ को उसने रद्दी में डाल दिया — बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

बगल में छुरी मुँह में राम-राम

ऊपर से मीठा, भीतर से कपटी

सामने प्रशंसा और पीछे शिकायत — बगल में छुरी मुँह में राम-राम।

बाप बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपइया

व्यवहार में धन को सबसे अधिक महत्व मिलता है

रिश्ते तभी तक निभे जब तक लाभ रहा — बाप बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपइया।

बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख

कभी बिना माँगे बहुत मिलता है और माँगने पर कुछ नहीं

चुपचाप काम करता रहा और पुरस्कार मिल गया — बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख।

बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे

जोखिम का काम करने को कोई तैयार नहीं होता

शिकायत सबको थी, पर कहने कोई न गया — बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे।

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय

जैसा कर्म वैसा फल

वर्ष भर आलस किया और अच्छे अंक चाहता है — बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।

'भ' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

भ

भागते चोर की लंगोटी ही सही

पूरा न मिले तो जो मिले वही ले लेना

पूरा बकाया न मिला, आधा ही ले लिया — भागते चोर की लंगोटी ही सही।

'म' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

म

मन चंगा तो कठौती में गंगा

मन शुद्ध हो तो तीर्थ घर में ही है

वे दिखावे के आयोजन नहीं करते, मानते हैं — मन चंगा तो कठौती में गंगा।

मान न मान मैं तेरा मेहमान

जबरन संबंध जोड़ना

बिना बुलाए बैठक में आ गया — मान न मान मैं तेरा मेहमान।

मारे का घर बसे, भागे का न बसे

संघर्ष करने वाला टिकता है, भागने वाला नहीं

असफलता के बाद भी वह डटा रहा और आगे निकला — मारे का घर बसे, भागे का न बसे।

मियाँ की जूती मियाँ के सिर

किसी की चाल उसी पर उलट पड़ना

जो शर्त उसने रखी थी, उसी में फँस गया — मियाँ की जूती मियाँ के सिर।

'र' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

र

रस्सी जल गई पर बल नहीं गए

स्थिति बिगड़ने पर भी अकड़ बनी रहना

सब खो चुका पर घमंड वैसा ही — रस्सी जल गई पर बल नहीं गए।

'ल' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ल

लातों के भूत बातों से नहीं मानते

कुछ लोग समझाने से नहीं, कड़ाई से सुधरते हैं

चेतावनी काम न आई, जुर्माना लगा तब सुधरे — लातों के भूत बातों से नहीं मानते।

लोहा लोहे को काटता है

कठोर का सामना कठोर से ही होता है

चालाकी का जवाब सतर्कता से मिला — लोहा लोहे को काटता है।

'स' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

स

सब्र का फल मीठा होता है

धैर्य रखने पर परिणाम अच्छा मिलता है

तीन वर्ष डटे रहने के बाद चयन हुआ — सब्र का फल मीठा होता है।

समझदार को इशारा काफी

बुद्धिमान संकेत से ही बात समझ लेता है

एक बार टोकने पर उसने आदत बदल ली — समझदार को इशारा काफी।

सर मुँड़ाते ही ओले पड़े

काम आरंभ करते ही विघ्न आ जाना

पहले ही दिन पुस्तकें खो गईं — सर मुँड़ाते ही ओले पड़े।

सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है

पक्षपाती या मोहग्रस्त व्यक्ति को सब अपने मन जैसा दिखता है

उसे अपनी पद्धति में कोई दोष नहीं दिखता — सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है।

सीधी उँगली से घी नहीं निकलता

कुछ काम नरमी से नहीं होते

निवेदन से न हुआ, लिखित शिकायत करनी पड़ी — सीधी उँगली से घी नहीं निकलता।

सोने पर सुहागा

अच्छे पर और अच्छा

अच्छी उपज के साथ ऊँचा भाव मिला — सोने पर सुहागा।

सौ सुनार की एक लोहार की

बहुत छोटे प्रयासों पर एक निर्णायक प्रयास भारी पड़ता है

वर्ष भर की टालमटोल पर अंतिम चेतावनी भारी पड़ी — सौ सुनार की एक लोहार की।

'ह' से आरंभ होने वाली लोकोक्तियाँ

ह

हाथ कंगन को आरसी क्या

प्रत्यक्ष बात के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं

परिणाम सामने है, अब सफाई क्यों — हाथ कंगन को आरसी क्या।

हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और

कथनी और करनी में अंतर होना

नियम बनाए और स्वयं ही तोड़े — हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।

हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए

बिना खर्च अच्छा परिणाम मिल जाना

मुफ्त पुस्तकालय से तैयारी हो गई — हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए।

होनहार बिरवान के होत चीकने पात

होनहार के लक्षण आरंभ में ही दिख जाते हैं

छोटी आयु में ही उसका अनुशासन देखकर लोग कहते थे — होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में लोकोक्ति कौन-सी है —

  1. Aलोहे के चने चबाना
  2. Bकान भरना
  3. Cनाच न जाने आँगन टेढ़ा
  4. Dगुड़ गोबर करना

व्याख्या

शेष तीनों के अंत में क्रिया का मूल रूप है और वे वाक्य में जोड़े बिना अधूरे हैं। 'नाच न जाने आँगन टेढ़ा' बोलते ही पूरी बात कह देती है, इसलिए लोकोक्ति है।

प्रश्न 2

'अपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों में दोष निकालना' — इस भाव की लोकोक्ति है —

  1. Aअंधों में काना राजा
  2. Bएक और एक ग्यारह
  3. Cऊँची दुकान फीका पकवान
  4. Dनाच न जाने आँगन टेढ़ा

व्याख्या

यहाँ दोष नर्तक में है, आँगन में नहीं। इसी कारण यह कहावत उस व्यक्ति पर लागू होती है जो अपनी कमी मानने के बजाय परिस्थिति को दोष देता है।

प्रश्न 3

'जिसकी लाठी उसकी भैंस' —

  1. Aमुहावरा है
  2. Bविशेषण पदबंध है
  3. Cलोकोक्ति है
  4. Dसमास है

व्याख्या

यह अपने आप में पूरा वाक्य है और इसका रूप काल के अनुसार नहीं बदलता। रूप-परिवर्तन की जाँच लगाइए — 'जिसकी लाठी उसकी भैंस थी' कहना बेमानी लगेगा, यही लोकोक्ति का प्रमाण है।

प्रश्न 4

'ऊँट के मुँह में जीरा' का भाव है —

  1. Aस्वादहीन भोजन
  2. Bआवश्यकता के सामने अत्यंत अल्प वस्तु
  3. Cअनुपयोगी वस्तु देना
  4. Dबड़े का छोटे से मेल

व्याख्या

यहाँ तुलना मात्रा की है — ऊँट की भूख के सामने जीरा नगण्य है। ध्यान दें कि यह कहावत के रूप में जस का तस बोली जाती है और काल के अनुसार नहीं बदलती, इसलिए लोकोक्ति मानी जाती है।

प्रश्न 5

'थोथा चना बाजे घना' का आशय है —

  1. Aगुणहीन व्यक्ति अधिक दिखावा करता है
  2. Bखाली बर्तन शोर करता है
  3. Cचना सस्ता होता है
  4. Dपरिश्रम का फल मिलता है

व्याख्या

'खाली बर्तन शोर करता है' शब्दार्थ के निकट है और इसीलिए भ्रमित करता है। लोकोक्ति का उत्तर सदा वह होगा जो मनुष्य के आचरण का सामान्य नियम कहे, वस्तु का गुण नहीं।

प्रश्न 6

'सौ सुनार की एक लोहार की' का भाव है —

  1. Aसुनार लोहार से श्रेष्ठ है
  2. Bपरिश्रम से सफलता मिलती है
  3. Cअनेक छोटे प्रयासों पर एक निर्णायक प्रहार भारी पड़ता है
  4. Dकारीगरी में अंतर होता है

व्याख्या

यहाँ दो व्यवसायों की तुलना नहीं, आघात की शक्ति की तुलना है। कहावतों में व्यवसाय या पशु केवल रूपक होते हैं, विषय नहीं।

प्रश्न 7

'दूर के ढोल सुहावने' किस स्थिति पर लागू होती है —

  1. Aदूर से आकर्षक लगने वाली चीज निकट जाकर साधारण निकलना
  2. Bध्वनि दूर तक जाती है
  3. Cसंगीत मन प्रसन्न करता है
  4. Dदूरी से सम्मान बढ़ता है

व्याख्या

यह कहावत अनुभव और कल्पना के अंतर पर है। परीक्षा में इसे प्रायः बाहर की नौकरी, दूसरे शहर या दूसरे संस्थान के संदर्भ में दी गई स्थिति के साथ पूछा जाता है।

प्रश्न 8

'बगल में छुरी मुँह में राम-राम' का भाव है —

  1. Aधार्मिक प्रवृत्ति
  2. Bआत्मरक्षा की तैयारी
  3. Cसाहसी स्वभाव
  4. Dऊपर से मित्रता, भीतर से कपट

व्याख्या

यह कहावत कपट के उस रूप पर है जिसमें व्यवहार मधुर और नीयत विपरीत होती है। इससे मिलता भाव 'आस्तीन का साँप' में भी है, पर वह मुहावरा है और यह लोकोक्ति।

प्रश्न 9

'चोर की दाढ़ी में तिनका' किस अर्थ में प्रयुक्त होती है —

  1. Aअपराधी के व्यवहार से ही उसका दोष प्रकट हो जाता है
  2. Bचोर सरलता से पकड़ा जाता है
  3. Cझूठा प्रमाण गढ़ना
  4. Dसंदेह करना उचित है

व्याख्या

मुख्य बात व्यवहार है — बिना पूछे सफाई देना, अधिक सतर्क दिखना। 'चोर सरलता से पकड़ा जाता है' उसका परिणाम है, कहावत का भाव नहीं।

प्रश्न 10

'गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है' का आशय है —

  1. Aअनाज में कीड़े लग जाते हैं
  2. Bपरिश्रम का फल सबको मिलता है
  3. Cदोषी के साथ निर्दोष भी हानि उठाता है
  4. Dसावधानी आवश्यक है

व्याख्या

यह कहावत सामूहिक दंड की स्थिति पर लागू होती है, जैसे कुछ लोगों की गलती पर पूरे समूह पर रोक लगना। 'अनाज में कीड़े लग जाते हैं' जैसा शब्दार्थ वाला विकल्प इसीलिए रखा जाता है।