मुहावरे और लोकोक्तियाँ
भाषा जब केवल सूचना देना छोड़कर असर छोड़ने लगती है, तब उसमें मुहावरे और लोकोक्तियाँ आ जाती हैं। 'उसने काम बहुत जल्दी छोड़ दिया' एक सपाट वाक्य है; 'वह काम देखकर ही नौ दो ग्यारह हो गया' उसी बात को चेहरा दे देता है। यही पकड़ परीक्षक जाँचता है। मुहावरा शब्दों का वह जमा-जमाया समूह है जो अपने शब्दों के सीधे अर्थ से हटकर एक नया, लाक्षणिक अर्थ देता है। वह अपने आप में अधूरा रहता है — उसे वाक्य में बैठाना पड़ता है, और बैठाते समय वह काल, पुरुष और वचन के अनुसार बदलता है: 'हाथ धो बैठना' से 'वह नौकरी से हाथ धो बैठा', 'हम हाथ धो बैठेंगे'। इसीलिए कोशों में मुहावरे 'होना', 'करना', 'जाना', 'बैठना' जैसी क्रिया के मूल रूप के साथ लिखे मिलते हैं। लोकोक्ति, जिसे कहावत भी कहा जाता है, लोक-अनुभव का निचोड़ है और अपने आप में पूरा वाक्य होती है। 'अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत' को किसी सहारे की ज़रूरत नहीं — वह बोलते ही पूरी बात कह देती है, और उसका रूप जस का तस रहता है। मुहावरा वाक्य का अंग बनता है, लोकोक्ति स्वयं वाक्य होती है। राजस्थान की लगभग हर भर्ती परीक्षा के हिंदी भाग में यह प्रकरण आता है, क्योंकि इसमें रटने से ज़्यादा समझ की परीक्षा होती है और प्रश्न बनाना आसान होता है। इस पृष्ठ पर 200 से अधिक मुहावरे और 80 से अधिक लोकोक्तियाँ वर्णक्रम से दी गई हैं — प्रत्येक के साथ उसका सही अर्थ और एक ताजा वाक्य प्रयोग, जिससे केवल अर्थ याद न रहे, प्रयोग भी बैठ जाए।
मुहावरा और लोकोक्ति — अंतर जो सबसे ज़्यादा गलत होता है
परीक्षा में इस प्रकरण की सबसे बड़ी चूक यहीं होती है। कई पुस्तकें और कई वेबसाइटें दोनों को एक ही सूची में मिला देती हैं, जिससे अभ्यर्थी 'गागर में सागर भरना' और 'ऊँट के मुँह में जीरा' जैसे जोड़ों में अंतर नहीं कर पाता। अंतर याद करने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा परिभाषा रटना नहीं, बल्कि दो सवाल पूछना है — क्या यह अपने आप में पूरी बात कह रहा है, और क्या इसका रूप वाक्य के अनुसार बदलेगा। नीचे की तालिका इसी को व्यवस्थित करती है।
मुहावरा और लोकोक्ति का तुलनात्मक अंतर
मुहावरा
वाक्य-पूर्णताअपूर्ण अंश होता है, वाक्य में जोड़े बिना बात पूरी नहीं होती
रूप-परिवर्तनकाल, पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार रूप बदलता है
व्याकरणिक भूमिकावाक्य में क्रिया या क्रिया-पदबंध की तरह काम करता है
उद्देश्यकथन को सजीव और लाक्षणिक बनाना
शब्द-संरचनाप्रायः दो से चार शब्द; अधिकतर अंत में क्रिया का मूल रूप (होना, करना, जाना, बैठना), पर कुछ मुहावरे संज्ञा-पदबंध भी होते हैं जो वाक्य में होना/बनना के साथ चलते हैं — जैसे 'आँख का तारा', 'टेढ़ी खीर'
अर्थ का आधारलाक्षणिक या व्यंग्यार्थ, शब्दों के सीधे अर्थ से भिन्न
उदाहरणआँखों में धूल झोंकना, नौ दो ग्यारह होना, लोहे के चने चबाना
वाक्य में ढलने परठगी करने वाले ने उसकी आँखों में धूल झोंक दी
लोकोक्ति (कहावत)
वाक्य-पूर्णताअपने आप में पूरा वाक्य होती है, किसी सहारे की ज़रूरत नहीं
रूप-परिवर्तनरूप प्रायः स्थिर रहता है, जस का तस बोला जाता है
व्याकरणिक भूमिकास्वतंत्र वाक्य की तरह पूरी बात या निष्कर्ष कहती है
उद्देश्यअनुभव से निकली सीख, चेतावनी या व्यंग्य देना
शब्द-संरचनाप्रायः लंबी, कई बार दो टुकड़ों में और तुकबंदी के साथ
अर्थ का आधारलोक-अनुभव का सामान्य नियम, जो हर मिलती-जुलती स्थिति पर लागू होता है
उदाहरणनाच न जाने आँगन टेढ़ा, ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर
वाक्य में ढलने परजो खुद तैयारी नहीं करता, वही कहता है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा
तीन सेकंड की पहचान-जाँच
किसी भी पद को देखकर तीन प्रश्न क्रम से पूछिए। पहला — इसे जैसा है वैसा बोल दें तो बात पूरी हो जाती है? 'अंधों में काना राजा' बोलते ही बात पूरी है, अतः लोकोक्ति। 'कान भरना' अधूरा है, इसे किसी ने, किसी का, कब — बताना पड़ेगा, अतः मुहावरा। दूसरा — इसे बीते काल में बदलिए। 'कान भरना' से 'उसने कान भर दिए' सहज बनता है, यह मुहावरे की पहचान है। लोकोक्ति को इस तरह मोड़ने पर वह टूट जाती है या बेमानी लगती है। तीसरा — क्या अंत में 'होना, करना, देना, लेना, जाना, बैठना, पड़ना' जैसी क्रिया का मूल रूप है? यह प्रायः मुहावरे का चिह्न है। क्रिया न दिखे तो घबराइए नहीं — 'आँख का तारा' जैसे संज्ञा-रूप मुहावरे भी होते हैं; ऐसे में पहले दो प्रश्नों (पूर्णता और काल-परिवर्तन) से निर्णय कीजिए। तुक मिली हुई, दो हिस्सों वाली, उपदेश या व्यंग्य कहती पंक्ति प्रायः लोकोक्ति होती है। एक चेतावनी — लंबाई से धोखा न खाइए। 'आँखों में धूल झोंकना' लंबा है पर मुहावरा है, और 'ऊँट के मुँह में जीरा' छोटी है पर लोकोक्ति है। निर्णय पूर्णता से होता है, लंबाई से नहीं।
परीक्षा में प्रश्न किस रूप में आते हैं
प्रश्न के ढाँचे सीमित हैं, इसलिए उन्हें पहले पहचान लेना आधी तैयारी है।
पहला और सबसे आम रूप अर्थ-पहचान है — "'नौ दो ग्यारह होना' मुहावरे का अर्थ है —" और नीचे चार विकल्प। यहाँ गलती तब होती है जब विकल्पों में एक शब्दार्थ के पास वाला विकल्प जान-बूझकर रखा जाता है; ध्यान रखें कि उत्तर लाक्षणिक अर्थ होगा, शब्दों का सीधा अर्थ नहीं।
दूसरा रूप उलटा होता है — अर्थ देकर मुहावरा पूछा जाता है: "'बहुत प्रिय होना' अर्थ के लिए उपयुक्त मुहावरा है —"। इसमें अर्थ के आसपास के दो-तीन मुहावरे विकल्पों में डाले जाते हैं, इसलिए हर मुहावरे का अर्थ ठीक उसी बारीकी से याद होना चाहिए।
तीसरा रूप रिक्त स्थान है — वाक्य दिया जाता है और उसमें बैठने वाला मुहावरा पूछा जाता है। यहाँ केवल अर्थ जानना काफी नहीं, वाक्य का भाव और मुहावरे का रूप, दोनों मिलाने पड़ते हैं।
चौथा रूप वाक्य-प्रयोग की शुद्धता है — चार वाक्य देकर पूछा जाता है कि किसमें मुहावरे का प्रयोग सही हुआ है। यह सबसे ज़्यादा अंक कटाने वाला रूप है, क्योंकि यहाँ रटा हुआ अर्थ काम नहीं आता।
पाँचवाँ रूप वर्गीकरण है — दिया गया पद मुहावरा है या लोकोक्ति। यह छोटे-से प्रश्न में पूरा अंक देता है और ऊपर बताई तीन-प्रश्न जाँच से लगभग हमेशा हल हो जाता है।
छठा रूप लोकोक्ति का भाव पूछना है, जिसमें कहावत का सारांश चार वाक्यों में से चुनना होता है। यहाँ विकल्प प्रायः कहावत के शब्दों को दोहराकर भ्रमित करते हैं; उत्तर वह होगा जो स्थिति का सामान्य नियम कहे।
यह प्रकरण राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं के हिंदी भाग का स्थायी हिस्सा है। नीचे वही सूचना दी गई है जिसकी पुष्टि पाठ्यक्रम से होती है — प्रकरण-वार अंक-विभाजन आयोग प्रकाशित नहीं करता, इसलिए कोई अनुमानित संख्या नहीं दी गई है।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RSSB पटवारी | हिंदी और अंग्रेजी का संयुक्त भाग, कुल 22 प्रश्न और 44 अंक — इसी भाग के भीतर से मुहावरे-लोकोक्तियाँ आते हैं। |
| RSSB CET स्नातक स्तर | प्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर | प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB VDO | भाषा भाग के 50 प्रश्न और 50 अंक के भीतर। |
| RSSB LDC | प्रश्न-पत्र II, सामान्य हिंदी, 75 प्रश्न — व्याकरण खंड का नियमित प्रकरण। |
| RPSC RAS मुख्य परीक्षा | प्रश्न-पत्र IV, इकाई I (सामान्य हिन्दी) का भाग अ · ‘मुहावरे — मुहावरों का प्रयोग से अर्थ स्पष्ट’ तथा ‘कहावत / लोकोक्ति प्रयोग से अर्थ स्पष्ट’ — दोनों बिंदु · 30 अंक वाले भाग का हिस्सा — पाठ्यक्रम दिनांक 09-01-2026 |
| RPSC पुलिस उप-निरीक्षक | प्रश्न-पत्र I, सामान्य हिंदी, 100 प्रश्न और 200 अंक — यहाँ इस प्रकरण का महत्व सबसे अधिक है। |
| RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I में व्याकरण के अंतर्गत। |
| RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम में। |
| REET | हिंदी भाषा I तथा भाषा II, प्रत्येक 30 अंक — भाषा-शिक्षण और व्याकरण दोनों दृष्टि से। |
| राजस्थान उच्च न्यायालय LDC | हिंदी भाग, 50 प्रश्न और 100 अंक। |
ध्यान दें
एक बात ध्यान रखने योग्य है — वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों में यह प्रकरण बहुविकल्पीय रूप में नहीं, 'दिए गए मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए' के रूप में आता है, इसलिए अर्थ के साथ स्वयं शुद्ध वाक्य बनाने का अभ्यास भी आवश्यक है।
मुहावरे — अर्थ और वाक्य प्रयोग सहित (वर्णक्रम से)
नीचे मुहावरे पहले अक्षर के क्रम से दिए गए हैं। हर मुहावरे के साथ उसका परीक्षोपयोगी अर्थ और एक वाक्य दिया गया है। वाक्य जान-बूझकर रोज़मर्रा की उन स्थितियों से लिए गए हैं जिनसे राजस्थान का विद्यार्थी परिचित है — तैयारी, खेत, कस्बे का बाज़ार, घर-परिवार — क्योंकि परिचित संदर्भ में मुहावरा जल्दी बैठता है। पढ़ते समय सुझाव है कि पहले अर्थ ढककर वाक्य पढ़िए और अर्थ अनुमान लगाइए; इससे परीक्षा में वही कौशल काम आएगा।
मुहावरे — वर्णक्रम के चार हिस्से (कुल 247)
लोकोक्तियाँ
एक शब्द के अंतर से बदल जाने वाले अर्थ
परीक्षक सबसे ज़्यादा अंक इन जोड़ों पर काटता है, क्योंकि विकल्पों में दोनों साथ रखे जाते हैं। इन्हें जोड़े के रूप में ही याद करें, अलग-अलग नहीं। आँख का तारा का अर्थ है बहुत प्रिय, पर आँख का काँटा का अर्थ है जो खटकता हो — दोनों ठीक उलटे हैं। पानी-पानी होना का अर्थ है लज्जित होना, जबकि पानी फेर देना का अर्थ है किया हुआ काम बेकार कर देना; दोनों में 'पानी' है, भाव अलग। हाथ धो बैठना का अर्थ है पाई हुई वस्तु खो देना, और हाथ मलना का अर्थ है अवसर निकल जाने पर पछताना — पहला हानि है, दूसरा पछतावा। नाक कटना का अर्थ है प्रतिष्ठा जाना, नाक रगड़ना का अर्थ है दीनता से क्षमा माँगना, और नाक में दम करना का अर्थ है परेशान कर देना — एक ही अंग, तीन अलग भाव। कान भरना का अर्थ है चुगली करना, कान खड़े होना का अर्थ है सचेत हो जाना, और कान पर जूँ न रेंगना का अर्थ है ध्यान ही न देना। गागर में सागर भरना का अर्थ है थोड़े में बहुत कह देना, जबकि ऊँट के मुँह में जीरा का अर्थ है ज़रूरत के सामने बहुत थोड़ी वस्तु — पहला प्रशंसा है, दूसरा कमी बताता है; साथ ही पहला मुहावरा है और दूसरा लोकोक्ति। घाव पर नमक छिड़कना और जले पर नमक छिड़कना भाव में लगभग एक हैं, इसलिए यदि दोनों विकल्पों में हों तो प्रश्न का शब्द-चयन देखें; परीक्षा में प्रायः एक ही रखा जाता है। मक्खी मारना का अर्थ है बेकार बैठे रहना, पर मक्खन लगाना का अर्थ है चापलूसी करना। मुँह की खाना का अर्थ है बुरी तरह हारना, मुँह ताकना का अर्थ है दूसरे पर आश्रित रहना, और मुँह फुलाना का अर्थ है रूठ जाना। थाली का बैंगन का अर्थ है पक्ष बदलने वाला, और लोकोक्ति धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का का अर्थ है जो कहीं का न हो — आसपास के भाव हैं, पर एक अस्थिरता है और दूसरा निराश्रयता; साथ ही पहला मुहावरा है और दूसरी लोकोक्ति। टेढ़ी खीर का अर्थ है कठिन काम, जबकि बाएँ हाथ का खेल का अर्थ है बहुत सरल काम — यह जोड़ा सीधे विपरीत है और अक्सर एक साथ पूछा जाता है। अंधे की लाठी का अर्थ है एकमात्र सहारा, और अंधों में काना राजा का अर्थ है अयोग्यों में थोड़ा योग्य भी बड़ा — यहाँ यह भी याद रखें कि पहला मुहावरा और दूसरा लोकोक्ति है।
याद रखने की कारगर रणनीति
इस प्रकरण में सूची रटना सबसे कम काम आने वाला तरीक़ा है, क्योंकि सूची लंबी है और परीक्षा में प्रश्न पहचान का होता है, स्मरण का नहीं। कुछ तरीके व्यवहार में सबसे अच्छा परिणाम देते हैं।
पहला — अर्थ के बजाय चित्र याद करें। 'नौ दो ग्यारह होना' के साथ भागते व्यक्ति का दृश्य जोड़ दीजिए। दृश्य भूलता नहीं, शब्द भूल जाते हैं।
दूसरा — विषय के अनुसार गुच्छे बनाइए। शरीर के अंगों वाले मुहावरे एक साथ, पशु-पक्षी वाले एक साथ, जल-अग्नि वाले एक साथ। एक गुच्छे के दस मुहावरे अलग-अलग बिखरे तीस मुहावरों से ज़्यादा टिकते हैं।
तीसरा — रोज़ दस मुहावरे लेकर अपने वाक्य बनाइए, इस पृष्ठ के वाक्य दोहराइए नहीं। स्वयं बनाया वाक्य ही वाक्य-प्रयोग के प्रश्न में बचाता है, और वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों में तो यही सीधे अंक देता है।
चौथा — हर सप्ताह मिलते-जुलते जोड़ों की अलग सूची बनाइए। ऊपर दिए जोड़े आरंभ हैं; पढ़ते हुए जो जोड़ा आपको उलझाए, उसे उसी सूची में जोड़ते जाइए। परीक्षा में गलती इन्हीं जोड़ों पर होती है, नए मुहावरों पर नहीं।
पाँचवाँ — वर्गीकरण का अभ्यास अलग से कीजिए। बीस पद लेकर केवल यह तय कीजिए कि कौन मुहावरा है और कौन लोकोक्ति। यह एक मिनट का अभ्यास हर बार पूरा अंक बचाता है।
छठा — दोहराव का अंतराल बढ़ाते जाइए। एक दिन, तीन दिन, एक सप्ताह और एक महीने के अंतर पर दोहराने से वही सूची स्थायी स्मृति में उतर जाती है, जो रोज़ दोहराने पर भी अकेले नहीं उतरती।
अंत में एक बात — परीक्षा से पहले के दिनों में नया मुहावरा जोड़ने के बजाय पहले से पढ़े हुए को वाक्य के साथ दोहराना अधिक लाभ देता है। इस पृष्ठ की सूची इसी दोहराव के लिए बनी है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'नौ दो ग्यारह होना' मुहावरे का अर्थ है —
- Aचुपचाप भाग जाना
- Bगिनती भूल जाना
- Cहिसाब बढ़ा देना
- Dग्यारह बजे तक रुकना
व्याख्या
यहाँ अंक केवल ध्वनि के लिए हैं, गणना का कोई संबंध नहीं। ऐसे अंकवाले मुहावरों में विकल्प जान-बूझकर संख्या से जुड़ा अर्थ दिखाते हैं — उत्तर सदा लाक्षणिक अर्थ होगा।
प्रश्न 2
'आँख का काँटा होना' का अर्थ है —
- Aअत्यंत प्रिय होना
- Bखटकने वाला होना
- Cआँख में चोट लगना
- Dसतर्क रहना
व्याख्या
इसे 'आँख का तारा' के साथ जोड़े में याद रखिए — तारा प्रिय बताता है, काँटा अप्रिय। दोनों प्रायः एक ही प्रश्न के विकल्पों में रखे जाते हैं।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में लोकोक्ति कौन-सी है —
- Aलोहे के चने चबाना
- Bकान भरना
- Cनाच न जाने आँगन टेढ़ा
- Dगुड़ गोबर करना
व्याख्या
शेष तीनों के अंत में क्रिया का मूल रूप है और वे वाक्य में जोड़े बिना अधूरे हैं। 'नाच न जाने आँगन टेढ़ा' बोलते ही पूरी बात कह देती है, इसलिए लोकोक्ति है।
प्रश्न 4
'अपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों में दोष निकालना' — इस भाव की लोकोक्ति है —
- Aअंधों में काना राजा
- Bएक और एक ग्यारह
- Cऊँची दुकान फीका पकवान
- Dनाच न जाने आँगन टेढ़ा
व्याख्या
यहाँ दोष नर्तक में है, आँगन में नहीं। इसी कारण यह कहावत उस व्यक्ति पर लागू होती है जो अपनी कमी मानने के बजाय परिस्थिति को दोष देता है।
प्रश्न 5
'सूची में अपना नाम देखकर वह ............ ।' रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त मुहावरा है —
- Aफूला न समाया
- Bपानी-पानी हो गया
- Cआग बबूला हो गया
- Dनौ दो ग्यारह हो गया
व्याख्या
रिक्त स्थान वाले प्रश्नों में पहले वाक्य का भाव तय कीजिए। अपना नाम चयन-सूची में देखना हर्ष का प्रसंग है, और 'फूला न समाना' अत्यधिक हर्ष बताता है। शेष तीनों विकल्प क्रोध, लज्जा या पलायन के भाव देते हैं, जो यहाँ नहीं बैठते।
प्रश्न 6
'लोहे के चने चबाना' का अर्थ है —
- Aकठोर भोजन करना
- Bअत्यंत कठिन काम करना
- Cदाँत मज़बूत होना
- Dव्यर्थ परिश्रम करना
व्याख्या
'व्यर्थ परिश्रम करना' निकट लगता है पर भिन्न है — उसके लिए 'झख मारना' आता है। यह मुहावरा कठिनाई बताता है, निष्फलता नहीं।
प्रश्न 7
'जिसकी लाठी उसकी भैंस' —
- Aमुहावरा है
- Bविशेषण पदबंध है
- Cलोकोक्ति है
- Dसमास है
व्याख्या
यह अपने आप में पूरा वाक्य है और इसका रूप काल के अनुसार नहीं बदलता। रूप-परिवर्तन की जाँच लगाइए — 'जिसकी लाठी उसकी भैंस थी' कहना बेमानी लगेगा, यही लोकोक्ति का प्रमाण है।
प्रश्न 8
'गागर में सागर भरना' का अर्थ है —
- Aअसंभव कार्य करना
- Bबड़ा पात्र भर देना
- Cबहुत परिश्रम करना
- Dथोड़े शब्दों में बहुत कह देना
व्याख्या
यह प्रायः प्रशंसा के भाव में आता है, विशेषकर लेखन और भाषण के संदर्भ में। इसे 'ऊँट के मुँह में जीरा' से अलग रखिए, जो कमी बताती है और लोकोक्ति है।
प्रश्न 9
किस वाक्य में मुहावरे का प्रयोग शुद्ध हुआ है —
- Aठगों ने भोले किसानों की आँखों में धूल झोंक दी।
- Bउसने मिट्टी के मोल में महल खरीदा और आँखों में धूल झोंकी।
- Cधूल उड़ी तो उसकी आँखों में धूल झोंक गई।
- Dउसने आँखों में धूल झोंककर सड़क साफ की।
व्याख्या
'आँखों में धूल झोंकना' का अर्थ धोखा देना है, इसलिए वाक्य में ठगी या छल का संदर्भ आवश्यक है। शेष विकल्पों में शब्दों का सीधा अर्थ लिया गया है, जो प्रयोग को अशुद्ध बना देता है।
प्रश्न 10
'ऊँट के मुँह में जीरा' का भाव है —
- Aस्वादहीन भोजन
- Bआवश्यकता के सामने अत्यंत अल्प वस्तु
- Cअनुपयोगी वस्तु देना
- Dबड़े का छोटे से मेल
व्याख्या
यहाँ तुलना मात्रा की है — ऊँट की भूख के सामने जीरा नगण्य है। ध्यान दें कि यह कहावत के रूप में जस का तस बोली जाती है और काल के अनुसार नहीं बदलती, इसलिए लोकोक्ति मानी जाती है।
प्रश्न 11
'कान पर जूँ न रेंगना' का अर्थ है —
- Aरोग लग जाना
- Bगुप्त बात सुन लेना
- Cकहने पर भी ध्यान न देना
- Dबहुत सतर्क रहना
व्याख्या
इसे 'कान खड़े होना' का उलटा समझिए — वहाँ व्यक्ति सचेत होता है, यहाँ बिलकुल उपेक्षा करता है। 'कान' वाले मुहावरों का समूह बनाकर याद करना लाभदायक है।
प्रश्न 12
निम्नलिखित में से मुहावरा कौन-सा है —
- Aअब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत
- Bअंधा बाँटे रेवड़ी, फिर-फिर अपने को दे
- Cचार दिन की चाँदनी फिर अंधेरी रात
- Dआस्तीन का साँप
व्याख्या
'आस्तीन का साँप' वाक्य में जोड़े बिना अधूरा है — किसका, कौन, कब बताना पड़ेगा। शेष तीनों स्वतः पूर्ण कथन हैं।
प्रश्न 13
'थोथा चना बाजे घना' का आशय है —
- Aगुणहीन व्यक्ति अधिक दिखावा करता है
- Bखाली बर्तन शोर करता है
- Cचना सस्ता होता है
- Dपरिश्रम का फल मिलता है
व्याख्या
'खाली बर्तन शोर करता है' शब्दार्थ के निकट है और इसीलिए भ्रमित करता है। लोकोक्ति का उत्तर सदा वह होगा जो मनुष्य के आचरण का सामान्य नियम कहे, वस्तु का गुण नहीं।
प्रश्न 14
'हाथ मलना' मुहावरे का अर्थ है —
- Aकाम में जुट जाना
- Bअवसर निकल जाने पर पछताना
- Cहाथ साफ करना
- Dक्रोध प्रकट करना
व्याख्या
इसे 'हाथ धो बैठना' से अलग रखिए। वहाँ पाई हुई वस्तु खोई जाती है, यहाँ जो मिला ही नहीं उसका पछतावा होता है — हानि और पछतावे का यह अंतर पूछा जाता है।
प्रश्न 15
'सौ सुनार की एक लोहार की' का भाव है —
- Aसुनार लोहार से श्रेष्ठ है
- Bपरिश्रम से सफलता मिलती है
- Cअनेक छोटे प्रयासों पर एक निर्णायक प्रहार भारी पड़ता है
- Dकारीगरी में अंतर होता है
व्याख्या
यहाँ दो व्यवसायों की तुलना नहीं, आघात की शक्ति की तुलना है। कहावतों में व्यवसाय या पशु केवल रूपक होते हैं, विषय नहीं।
प्रश्न 16
'पानी फेर देना' का अर्थ है —
- Aसिंचाई करना
- Bलज्जित हो जाना
- Cशीतल कर देना
- Dकिया हुआ काम व्यर्थ कर देना
व्याख्या
'लज्जित हो जाना' वस्तुतः 'पानी-पानी होना' का अर्थ है, जो अलग मुहावरा है। एक ही शब्द से बने मुहावरों को जोड़े में याद करना इस गलती से बचाता है।
प्रश्न 17
'दूर के ढोल सुहावने' किस स्थिति पर लागू होती है —
- Aदूर से आकर्षक लगने वाली चीज निकट जाकर साधारण निकलना
- Bध्वनि दूर तक जाती है
- Cसंगीत मन प्रसन्न करता है
- Dदूरी से सम्मान बढ़ता है
व्याख्या
यह कहावत अनुभव और कल्पना के अंतर पर है। परीक्षा में इसे प्रायः बाहर की नौकरी, दूसरे शहर या दूसरे संस्थान के संदर्भ में दी गई स्थिति के साथ पूछा जाता है।
प्रश्न 18
'टेढ़ी खीर' का अर्थ है —
- Aस्वादिष्ट व्यंजन
- Bकठिन कार्य
- Cअनुचित बात
- Dसरल उपाय
व्याख्या
इसका सीधा विपरीत 'बाएँ हाथ का खेल' है, जिसका अर्थ अत्यंत सरल कार्य है। दोनों को एक साथ याद रखने पर विकल्पों में उलझन नहीं होती।
प्रश्न 19
'अपने पैरों पर खड़ा होना' का अर्थ है —
- Aसीधा खड़ा होना
- Bविरोध में डटना
- Cआत्मनिर्भर हो जाना
- Dयात्रा आरंभ करना
व्याख्या
मुहावरे में 'पैर' सामर्थ्य का प्रतीक है। ध्यान दें कि यह मुहावरा है, अतः वाक्य में 'खड़ा हुआ, खड़ी हुई, खड़े होंगे' — रूप बदलता है।
प्रश्न 20
'बगल में छुरी मुँह में राम-राम' का भाव है —
- Aधार्मिक प्रवृत्ति
- Bआत्मरक्षा की तैयारी
- Cसाहसी स्वभाव
- Dऊपर से मित्रता, भीतर से कपट
व्याख्या
यह कहावत कपट के उस रूप पर है जिसमें व्यवहार मधुर और नीयत विपरीत होती है। इससे मिलता भाव 'आस्तीन का साँप' में भी है, पर वह मुहावरा है और यह लोकोक्ति।
प्रश्न 21
'चोर की दाढ़ी में तिनका' किस अर्थ में प्रयुक्त होती है —
- Aअपराधी के व्यवहार से ही उसका दोष प्रकट हो जाता है
- Bचोर सरलता से पकड़ा जाता है
- Cझूठा प्रमाण गढ़ना
- Dसंदेह करना उचित है
व्याख्या
मुख्य बात व्यवहार है — बिना पूछे सफाई देना, अधिक सतर्क दिखना। 'चोर सरलता से पकड़ा जाता है' उसका परिणाम है, कहावत का भाव नहीं।
प्रश्न 22
'मुट्ठी गरम करना' का अर्थ है —
- Aहाथ सेंकना
- Bरिश्वत देना
- Cक्रोधित होना
- Dधन बचाना
व्याख्या
प्रशासनिक संदर्भ वाले वाक्यों में यह मुहावरा प्रायः आता है। ऐसे मुहावरों में शारीरिक क्रिया दिखाने वाला विकल्प, जैसे 'हाथ सेंकना', सदा भ्रम के लिए रखा जाता है।
प्रश्न 23
'गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है' का आशय है —
- Aअनाज में कीड़े लग जाते हैं
- Bपरिश्रम का फल सबको मिलता है
- Cदोषी के साथ निर्दोष भी हानि उठाता है
- Dसावधानी आवश्यक है
व्याख्या
यह कहावत सामूहिक दंड की स्थिति पर लागू होती है, जैसे कुछ लोगों की गलती पर पूरे समूह पर रोक लगना। 'अनाज में कीड़े लग जाते हैं' जैसा शब्दार्थ वाला विकल्प इसीलिए रखा जाता है।
प्रश्न 24
'घोड़े बेचकर सोना' का अर्थ है —
- Aव्यापार करना
- Bसंपत्ति बेच देना
- Cसब कुछ छोड़ देना
- Dनिश्चिंत होकर गहरी नींद सोना
व्याख्या
यहाँ घोड़े चिंता के प्रतीक हैं — चिंता बिक गई तो नींद पूरी। मुहावरों में वस्तु प्रायः भाव का प्रतीक होती है, वस्तु नहीं।
प्रश्न 25
निम्नलिखित युग्मों में कौन-सा वर्गीकरण सही है —
- A'नाक में दम करना' — मुहावरा
- B'कान भरना' — लोकोक्ति
- C'अंधों में काना राजा' — मुहावरा
- D'अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत' — मुहावरा
व्याख्या
जाँच सीधी है — 'नाक में दम करना' अधूरा है और काल के अनुसार बदलता है, अतः मुहावरा। शेष तीनों में वर्गीकरण उलटा कर दिया गया है।