पल्लवन
पल्लवन संक्षिप्तीकरण का ठीक उल्टा है। वहाँ बड़े को छोटा करना था, यहाँ एक सूक्ति, काव्य-पंक्ति या प्रसिद्ध कथन के भाव को लगभग 100 शब्दों में खोलना है। कठिनाई यह है कि खोलने का अर्थ फैलाना नहीं होता — जो सौ शब्द भरने के लिए लिखा जाता है, वह तुरंत पकड़ा जाता है।
पल्लवन क्या है
पल्लवन का शाब्दिक अर्थ है पल्लव यानी पत्तों का निकलना — किसी बीज जैसे छोटे वाक्य में जो भाव छिपा है, उसे विस्तार देकर पूरा वृक्ष बना देना। आयोग के पाठ्यक्रम में इसकी परिभाषा स्पष्ट है: ‘किसी सूक्ति, काव्य पंक्ति, प्रसिद्ध कथन आदि का भाव विस्तार’, और शब्द-सीमा लगभग 100 शब्द।
यह भाग ब का सबसे अधिक अंक देने वाला और सबसे अधिक गँवाने वाला बिंदु है। अंक इसलिए मिलते हैं कि यहाँ अभ्यर्थी की अपनी समझ दिखती है; और इसलिए जाते हैं कि बहुत से अभ्यर्थी सूक्ति का अर्थ बता देते हैं और वहीं रुक जाते हैं। अर्थ बताना पल्लवन नहीं है — अर्थ तो पहला वाक्य है, उसके बाद उस अर्थ को जीवन, समाज या व्यवहार से जोड़ना असली काम है।
पल्लवन के नियम
| क्रम | नियम | ध्यान रखने की बात |
|---|---|---|
| 1 | लगभग 100 शब्द | न 60, न 150 — सीमा का पालन स्वयं एक अंक है |
| 2 | अन्य पुरुष में लिखिए | ‘मैं मानता हूँ’ नहीं, ‘यह उक्ति बताती है’ |
| 3 | एक ही अनुच्छेद | पल्लवन को अनुच्छेदों में नहीं बाँटा जाता |
| 4 | मूल पंक्ति दोहराइए मत | उसे उद्धृत करना पर्याप्त है; बार-बार लिखना शब्द खाता है |
| 5 | एक ही उदाहरण दीजिए | उदाहरण भाव को ठोस करता है, पर दो उदाहरण जगह घेर लेते हैं |
| 6 | निष्कर्ष अवश्य दीजिए | अंतिम वाक्य में भाव फिर से, पर नए शब्दों में |
| 7 | सजावटी भाषा से बचिए | अलंकार और मुहावरों की भरमार भाव को ढक देती है |
चार चरणों की विधि
पहला — मूल भाव पकड़िए
सूक्ति को अपने शब्दों में एक वाक्य में लिखिए। यदि यह एक वाक्य नहीं बन रहा तो अभी लिखना शुरू मत कीजिए — इसका अर्थ है कि भाव अभी पकड़ में नहीं आया।
दूसरा — भाव को खोलिए
अब पूछिए — यह बात सच क्यों है? इसके पीछे कौन-सा कारण या अनुभव है? यही दूसरा-तीसरा वाक्य बनता है और यहीं पल्लवन वास्तव में आरंभ होता है।
तीसरा — जीवन से जोड़िए
एक छोटा उदाहरण दीजिए — व्यक्ति के जीवन से, समाज से या प्रशासन से। उदाहरण जितना सामान्य और पहचाना हुआ हो, उतना अच्छा; उसे समझाने में शब्द नहीं लगने चाहिए।
चौथा — निष्कर्ष पर लौटिए
अंतिम वाक्य में वही मूल भाव फिर कहिए, पर आरंभ वाले शब्दों में नहीं। इससे पल्लवन गोल घूमकर पूरा होता है और अधूरा नहीं लगता।
हल किया हुआ उदाहरण — 1
- मूल उक्ति
- ‘अधिकार माँगे नहीं जाते, योग्यता से अर्जित किए जाते हैं।’
- पल्लवन
- इस उक्ति का आशय यह है कि किसी पद, सम्मान या अवसर पर दावा केवल माँग से नहीं बनता, उसके पीछे अर्जित योग्यता होनी चाहिए। माँगा हुआ अधिकार अस्थायी होता है, क्योंकि जो देता है वही उसे लौटा भी सकता है; अर्जित अधिकार टिकाऊ होता है, क्योंकि उसका आधार व्यक्ति के भीतर होता है। प्रशासन में यह बात और स्पष्ट दिखती है — जिस अधिकारी ने अपने काम से भरोसा बनाया है, उसकी बात बिना दबाव के मानी जाती है, जबकि केवल पद के बल पर दी गई बात हर बार दोहरानी पड़ती है। इसलिए ऊर्जा माँग पर नहीं, पात्रता बनाने पर लगनी चाहिए। (97 शब्द)
हल किया हुआ उदाहरण — 2
- मूल पंक्ति
- ‘जो बीत गई सो बात गई।’
- पल्लवन
- यह पंक्ति बीती हुई बातों से चिपके रहने के विरुद्ध चेतावनी है। जो घट चुका है उसे बदला नहीं जा सकता, इसलिए उस पर बार-बार लौटना वर्तमान का समय भी नष्ट करता है और आगे बढ़ने की शक्ति भी। इसका अर्थ यह नहीं कि बीते से कुछ सीखा न जाए; सीख लेना अलग बात है और पछतावे में ठहर जाना अलग। जो विद्यार्थी पिछली असफलता को दोहराता रहता है, वह अगली तैयारी नहीं कर पाता, जबकि जो उसी असफलता से एक कमी पहचानकर आगे बढ़ता है, वह उसे अपने काम में लगा लेता है। बीती बात को स्मृति में रखिए, बोझ में नहीं। (100 शब्द)
हल किया हुआ उदाहरण — 3
- मूल उक्ति
- ‘भाषा समाज की सबसे बड़ी साझी संपत्ति है।’
- पल्लवन
- इस कथन में भाषा को संपत्ति कहा गया है, और वह भी साझी। संपत्ति इसलिए कि उसे पीढ़ियों ने बनाया है और वह आगे भी सौंपी जाती रहेगी; साझी इसलिए कि उस पर किसी एक व्यक्ति या वर्ग का स्वामित्व नहीं होता। जिस दिन कोई समूह यह मान बैठता है कि शुद्ध भाषा केवल उसी की है, उसी दिन भाषा सिकुड़ने लगती है। इसके विपरीत जो भाषा नए शब्द, नई बोलियाँ और नए बोलने वाले स्वीकार करती रहती है, वह बढ़ती जाती है। इसीलिए भाषा की रक्षा उसे बंद करके नहीं, उसका उपयोग बढ़ाकर होती है। (99 शब्द)
यह पहचानिए कि आपने पल्लवन लिखा या अर्थ
लिख चुकने के बाद अपने उत्तर का पहला वाक्य ढक दीजिए और शेष पढ़िए। यदि बाक़ी चार-पाँच वाक्यों में कुछ नया कहा गया है — कारण, उदाहरण, परिणाम — तो आपने पल्लवन लिखा है। यदि शेष वाक्य भी वही बात अलग शब्दों में दोहरा रहे हैं, तो आपने अर्थ लिखकर उसे लंबा कर दिया है, और यही सबसे अधिक अंक काटता है।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RPSC RAS मुख्य परीक्षा | प्रश्न-पत्र IV, इकाई I (सामान्य हिन्दी) का भाग ब · ‘पल्लवन — किसी सूक्ति, काव्य पंक्ति, प्रसिद्ध कथन आदि का भाव विस्तार (शब्द सीमा — लगभग 100 शब्द)’ · 30 अंक वाले भाग का एक बिंदु — पाठ्यक्रम दिनांक 09-01-2026 |
यहाँ केवल वही परीक्षा दी गई है जिसका आधिकारिक पाठ्यक्रम पढ़ा जा चुका है। वर्णनात्मक लेखन अन्य भर्तियों में भी आता है, पर उनका नाम और भार उनके अपने पाठ्यक्रम से मिलाए बिना नहीं जोड़ा गया।
स्रोत और सामग्री के बारे में
यह पृष्ठ RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा योजना, दिनांक 09-01-2026 पर आधारित है। आयोग का अपना नोट भी ध्यान रखिए — परीक्षा योजना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, अंक और प्रश्न-संख्या में बदलाव संभव है। इस पृष्ठ के सभी गद्यांश, उदाहरण और नमूना उत्तर पढ़ाने के लिए स्वयं तैयार किए गए हैं।