संक्षिप्तीकरण
संक्षिप्तीकरण में लगभग 150 शब्दों का गद्यांश देकर उसे लगभग एक-तिहाई शब्दों में लिखने को कहा जाता है — यानी लगभग 50 शब्द। इसमें अंक इस बात पर नहीं मिलते कि आपने कितना सुंदर लिखा, बल्कि इस बात पर कि कितना छोड़ पाए। यही इसे कठिन बनाता है।
संक्षिप्तीकरण क्या है
संक्षिप्तीकरण किसी गद्यांश का ऐसा लघु रूप है जिसमें मूल की सब आवश्यक बातें आ जाएँ और कोई अनावश्यक बात न बचे। आयोग के पाठ्यक्रम में इसका माप स्पष्ट है — गद्यावतरण लगभग 150 शब्द का होगा और संक्षेप उसका लगभग एक-तिहाई। इसलिए व्यावहारिक रूप से आपको लगभग 50 शब्दों में लिखना है, और उसमें दो-चार शब्द की छूट ही मानी जाती है।
अधिकतर अभ्यर्थी यहाँ एक ही भूल दोहराते हैं — वे मूल गद्यांश के वाक्य छोटे करते चले जाते हैं। यह संक्षिप्तीकरण नहीं है, यह काट-छाँट है। सही विधि यह है कि पहले पूरे गद्यांश का केंद्रीय भाव पकड़ा जाए, फिर उसी भाव को अपने शब्दों में एक बार, नए सिरे से लिखा जाए। जो लिखने के बाद बचता है वह संक्षेप है; जो काटने के बाद बचता है वह अधूरा गद्यांश है।
नियम — जो हर संक्षेप पर लागू होते हैं
| क्रम | नियम | कारण |
|---|---|---|
| 1 | शब्द-सीमा लगभग एक-तिहाई | यही आयोग ने निर्धारित की है; इससे अधिक लिखने पर अंक कटते हैं |
| 2 | अन्य पुरुष में लिखिए | मूल में ‘मैं’ हो तब भी संक्षेप ‘लेखक का कहना है’ की शैली में आता है |
| 3 | भूतकाल में लिखिए | संक्षेप पहले कही गई बात का विवरण है |
| 4 | एक ही अनुच्छेद | संक्षेप को टुकड़ों में नहीं बाँटा जाता |
| 5 | उदाहरण, उद्धरण और अलंकार छोड़ दीजिए | ये भाव को सजाते हैं, बनाते नहीं |
| 6 | अपनी राय न जोड़िए | जो मूल में नहीं है वह संक्षेप में आ ही नहीं सकता |
| 7 | शीर्षक दीजिए | प्रश्न में माँगा जाए तब अनिवार्य, अन्यथा भी अंक बढ़ाता है |
| 8 | अंत में शब्द-संख्या लिखिए | परीक्षक को दिखता है कि आपने सीमा का ध्यान रखा |
पाँच चरणों की विधि
पहला — दो बार पढ़िए
पहली बार सामान्य गति से, यह जानने के लिए कि बात किस बारे में है। दूसरी बार धीरे, यह देखने के लिए कि लेखक असल में कहना क्या चाहता है। एक बार पढ़कर लिखने बैठना सबसे बड़ी भूल है।
दूसरा — केंद्रीय भाव एक वाक्य में लिखिए
हाशिये पर एक वाक्य लिखिए — ‘यह गद्यांश यह कह रहा है कि…’। यदि यह एक वाक्य ठीक बन गया तो शेष संक्षेप उसी के इर्द-गिर्द अपने आप बन जाएगा।
तीसरा — आवश्यक और अनावश्यक अलग कीजिए
मूल में पेंसिल से वे अंश रेखांकित कीजिए जिनके बिना बात अधूरी रह जाएगी। उदाहरण, दोहराव, विशेषणों की झड़ी और उद्धरण प्रायः अनावश्यक ही निकलते हैं।
चौथा — मूल देखे बिना लिखिए
अब गद्यांश को ढककर, केवल अपने एक वाक्य और रेखांकित बिंदुओं के सहारे संक्षेप लिखिए। मूल सामने रखकर लिखने पर उसी की भाषा उतर आती है और संक्षेप बनता ही नहीं।
पाँचवाँ — शब्द गिनिए और काटिए
पहली बार में प्रायः साठ-सत्तर शब्द बनते हैं। अब उन्हें पचास तक लाइए — विशेषण पहले हटाइए, फिर दो वाक्यों को एक कीजिए। शब्द गिनकर अंत में कोष्ठक में लिख दीजिए।
हल किया हुआ उदाहरण — 1
नीचे का गद्यांश और उसका संक्षेप दोनों इसी पृष्ठ के लिए तैयार किए गए हैं। पहले गद्यांश पढ़िए, फिर स्वयं संक्षेप लिखने का प्रयास कीजिए, और उसके बाद ही नीचे का उत्तर देखिए।
जल संरक्षण को प्रायः एक तकनीकी विषय मान लिया जाता है, जिसका समाधान बड़े बाँधों, नहरों और पाइपलाइनों में खोजा जाता है। राजस्थान का अनुभव कुछ और ही कहता है। इस प्रदेश के गाँवों में सदियों से टाँका, नाड़ी, जोहड़ और बावड़ी जैसी व्यवस्थाएँ चलती रही हैं, जिन्हें न किसी अभियंता ने बनाया था और न किसी विभाग ने। वे इसलिए टिकी रहीं क्योंकि उनकी देखरेख करने वाला पूरा समाज था। जिस दिन यह जिम्मेदारी समाज के हाथ से निकलकर केवल सरकार के पास चली गई, उसी दिन से ये संरचनाएँ टूटने लगीं। आज जब जल संकट फिर सामने है, तो समाधान केवल नई तकनीक में नहीं, उस पुरानी सामूहिक जिम्मेदारी को लौटाने में भी है। तकनीक ढाँचा खड़ा कर सकती है, उसे बचाए रखने का काम तो समाज ही करेगा।
इसी गद्यांश का संक्षेप
- शीर्षक
- जल संरक्षण और सामूहिक जिम्मेदारी
- संक्षेप
- जल संरक्षण केवल तकनीक का विषय नहीं है। राजस्थान की टाँका, नाड़ी और बावड़ी जैसी परंपरागत व्यवस्थाएँ इसलिए टिकी रहीं क्योंकि उनकी देखभाल पूरा समाज करता था। यह जिम्मेदारी अकेले सरकार पर आते ही वे टूटने लगीं। आज के जल संकट का हल नई तकनीक के साथ उसी सामूहिक जिम्मेदारी को लौटाने में है। (52 शब्द)
ध्यान दीजिए कि संक्षेप में मूल का कोई पूरा वाक्य ज्यों का त्यों नहीं उतरा है, फिर भी मूल की कोई आवश्यक बात छूटी नहीं है। ‘न किसी अभियंता ने बनाया था और न किसी विभाग ने’ जैसा वाक्य सुंदर है, पर भाव के लिए अनिवार्य नहीं — इसलिए वह छोड़ दिया गया। यही चुनाव संक्षिप्तीकरण का असली कौशल है।
हल किया हुआ उदाहरण — 2
दूसरा गद्यांश पहले से थोड़ा कठिन है, क्योंकि इसमें दो पक्ष रखे गए हैं और संक्षेप में दोनों आने चाहिए।
किसी भी भाषा की परीक्षा में यह प्रश्न बार-बार उठता है कि शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है या सम्प्रेषण। एक पक्ष कहता है कि नियम ही भाषा की रीढ़ हैं; जिस दिन वर्तनी और व्याकरण ढीले पड़ जाएँगे, उस दिन भाषा अपनी सटीकता खो देगी और एक ही वाक्य के दस अर्थ निकलने लगेंगे। दूसरा पक्ष कहता है कि भाषा अंततः बोलने-समझने के लिए है, और जो बात सामने वाले तक पहुँच गई, वह सफल भाषा है, चाहे उसमें दो-चार त्रुटियाँ रह गई हों। वास्तव में दोनों बातें एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। शुद्धता सम्प्रेषण को रोकती नहीं, उसे भरोसेमंद बनाती है; और सम्प्रेषण शुद्धता को व्यर्थ नहीं ठहराता, उसे उद्देश्य देता है। परीक्षा की दृष्टि से भी और व्यवहार की दृष्टि से भी, उपयोगी वही भाषा है जो शुद्ध भी हो और पहुँचे भी।
इसी गद्यांश का संक्षेप
- शीर्षक
- शुद्धता और सम्प्रेषण
- संक्षेप
- भाषा में शुद्धता और सम्प्रेषण को प्रायः आमने-सामने रखा जाता है। एक पक्ष नियमों को भाषा की रीढ़ मानता है, दूसरा बात पहुँच जाने को पर्याप्त। लेखक के अनुसार दोनों विरोधी नहीं हैं — शुद्धता सम्प्रेषण को भरोसेमंद बनाती है और सम्प्रेषण शुद्धता को उद्देश्य देता है। उपयोगी भाषा वही है जो शुद्ध भी हो और पहुँचे भी। (56 शब्द)
शब्द गिनना सीखिए, अनुमान मत लगाइए
अभ्यास करते समय हर बार शब्द गिनकर लिखिए, अनुमान से नहीं। दस-बारह बार गिनने के बाद आँख को अपने आप अंदाज़ा हो जाता है कि पचास शब्द कितनी पंक्तियों में आते हैं — आपकी अपनी लिखावट में, जो हर किसी की अलग होती है। परीक्षा में यही अंदाज़ा काम आता है, क्योंकि वहाँ गिनने में लगा समय सोचने से कटता है।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RPSC RAS मुख्य परीक्षा | प्रश्न-पत्र IV, इकाई I (सामान्य हिन्दी) का भाग ब · ‘संक्षिप्तीकरण — गद्यावतरण का लगभग एक–तिहाई शब्दों में संक्षिप्तीकरण (गद्यावतरण की शब्द सीमा लगभग 150 शब्द)’ · 30 अंक वाले भाग का एक बिंदु — पाठ्यक्रम दिनांक 09-01-2026 |
यहाँ केवल वही परीक्षा दी गई है जिसका आधिकारिक पाठ्यक्रम पढ़ा जा चुका है। वर्णनात्मक लेखन अन्य भर्तियों में भी आता है, पर उनका नाम और भार उनके अपने पाठ्यक्रम से मिलाए बिना नहीं जोड़ा गया।
स्रोत और सामग्री के बारे में
यह पृष्ठ RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा योजना, दिनांक 09-01-2026 पर आधारित है। आयोग का अपना नोट भी ध्यान रखिए — परीक्षा योजना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, अंक और प्रश्न-संख्या में बदलाव संभव है। इस पृष्ठ के सभी गद्यांश, उदाहरण और नमूना उत्तर पढ़ाने के लिए स्वयं तैयार किए गए हैं।