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वाक्य शुद्धि

शब्द अलग-अलग शुद्ध हों, यह ज़रूरी नहीं कि वाक्य भी शुद्ध हो। ‘सीता ने रोटी बनाया’ में एक भी शब्द गलत नहीं लिखा गया, फिर भी वाक्य अशुद्ध है, क्योंकि यहाँ क्रिया कर्म से मेल नहीं खा रही। वाक्य शुद्धि का पूरा अध्याय इसी बात पर टिका है — हिंदी में शब्द अकेले खड़े नहीं रहते, वे आपस में लिंग, वचन, पुरुष, कारक और काल का रिश्ता निभाते हैं, और जहाँ यह रिश्ता टूटता है वहीं अशुद्धि जन्म लेती है। इसलिए यह पृष्ठ आपको अशुद्ध वाक्यों की कोई लंबी सूची रटाने नहीं जा रहा। यहाँ वाक्यों को अशुद्धि के प्रकार के अनुसार बाँटा गया है — लिंग की भूल अलग, वचन की अलग, कारक की अलग, अन्वय की अलग — और हर वर्ग से पहले यह समझाया गया है कि वह भूल होती क्यों है, यानी कौन-सा नियम टूट रहा है। एक बार यह पकड़ में आ जाए तो आप नया वाक्य देखकर भी बता सकेंगे कि उसमें गड़बड़ कहाँ है। परीक्षा में यही काम आता है, क्योंकि प्रश्न-पत्र में वही वाक्य दोबारा नहीं आता जो आपने रटा था; आता वही नियम है जो आपने समझा था।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

अशुद्धि आती कहाँ से है — चार असली जड़ें

पहली जड़ बोलचाल है। हम रोज़ जो हिंदी बोलते हैं उसमें आधे नियम ढीले पड़ चुके हैं — ‘मुझे रोटी खाना है’ बोलने में किसी को खटकता नहीं, पर लिखने में यह अशुद्ध है, शुद्ध रूप ‘मुझे रोटी खानी है’ होगा। दूसरी जड़ बोली का असर है। राजस्थान, हरियाणा और पूर्वांचल की बोलियों में कर्ता के साथ ‘ने’ का प्रयोग अलग ढंग से चलता है, इसीलिए ‘मैंने वहाँ गया’ और ‘राम ने घर जाता है’ जैसे वाक्य इतनी आसानी से निकल जाते हैं। तीसरी जड़ अंग्रेज़ी की छाया है — अंग्रेज़ी में क्रिया कर्म का लिंग नहीं देखती, इसलिए अंग्रेज़ी में सोचकर हिंदी लिखने वाला ‘उसने पुस्तक पढ़ा’ लिख बैठता है। और चौथी जड़, जो सबसे महँगी पड़ती है, अति-सुधार है। कोई एक बार सुन लेता है कि भूतकाल में ‘ने’ लगता है और फिर ‘मैंने सोया’, ‘बच्चे ने रोया’ लिखने लगता है, जबकि सोना और रोना अकर्मक क्रियाएँ हैं और इनके साथ ‘ने’ आता ही नहीं। इन चारों जड़ों को पहचान लेना आधी तैयारी है।

अशुद्धि के बारह कारण — चार पेजों में

वाक्य शुद्धि के वे नियम जिनसे सबसे ज़्यादा प्रश्न बनते हैं

नियमकब लगता हैउदाहरण
सकर्मक क्रिया के भूतकाल में कर्ता ‘ने’ लेता हैकेवल भूतकाल, केवल सकर्मक क्रियाराम ने रोटी खाई — पर ‘राम ने घर जाता है’ अशुद्ध
अकर्मक क्रिया के साथ ‘ने’ कभी नहींसोना, रोना, हँसना, जाना, बैठना जैसी क्रियाएँमैं सोया; बालक रोया — ‘मैंने सोया’ अशुद्ध
‘ने’ लगते ही क्रिया कर्म पर चलती हैकर्ता ‘ने’ ले चुका हो और कर्म ‘को’ न लेसीता ने रोटी बनाई; राम ने पुस्तक पढ़ी
कर्म भी ‘को’ ले ले तो क्रिया एकवचन पुल्लिंग‘ने’ और ‘को’ दोनों उपस्थित होंपुलिस ने चोरों को पकड़ा
स्त्रीलिंग बहुवचन कर्म पर क्रिया में चंद्रबिंदुरोटियाँ, पुस्तकें, चिट्ठियाँ जैसे कर्ममाँ ने रोटियाँ बनाईं; उसने चिट्ठियाँ लिखीं
क्रियार्थक संज्ञा कर्म के लिंग पर चलती है‘है’ या ‘चाहा’ के साथ आने वाली ‘ना’ वाली क्रियामुझे पुस्तक पढ़नी है; उसे रोटी खानी है
कर्ता और स्वामी एक हों तो ‘अपना’मेरा, तुम्हारा, उसका की जगहमैंने अपना काम किया; आप अपना नाम बताइए
‘प्रत्येक’, ‘हर’, ‘कोई भी’ के साथ एकवचनगणना चाहे कितनी भी होप्रत्येक विद्यार्थी को — ‘प्रत्येक विद्यार्थियों को’ अशुद्ध
प्राण, दर्शन, आँसू, हस्ताक्षर, होश सदा बहुवचनचाहे एक ही की बात होआपके दर्शन कब होंगे; मेरे हस्ताक्षर ले लीजिए
‘अनेक’ पर दोबारा बहुवचन नहीं‘अनेकों’ कभी नहीं — पर ‘सैकड़ों’, ‘हजारों’ शुद्धअनेक लोग आए
उत्तमावस्था पर फिर ‘सबसे’ नहींसर्वश्रेष्ठ, सर्वोत्तम, योग्यतम जैसे रूपों मेंसर्वश्रेष्ठ छात्र — ‘सबसे सर्वश्रेष्ठ’ अशुद्ध
भाववाचक संज्ञा विशेषण की जगह नहीं लेतीमधुरता, कठिनाई, सुंदरतास्वभाव मधुर है — ‘स्वभाव मधुरता है’ अशुद्ध
योजक जोड़ियाँ तय हैंयद्यपि–तथापि, चूँकि–इसलिए, न केवल–बल्कि, ज्यों ही–त्यों हीयद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है
पुरुष-क्रम — मध्यम, अन्य, उत्तमएक से अधिक पुरुष कर्ता में होंतुम, वह और मैं चलेंगे
कहने की क्रिया में श्रोता ‘से’ लेता हैकहना, पूछना, बोलनामैंने उससे कहा — ‘मैंने उसे कहा’ अशुद्ध
गति की क्रिया के साथ ‘को’ अनावश्यकजाना, पहुँचना, लौटनावह विद्यालय जाता है — ‘विद्यालय को’ भारी
मुहावरे के शब्द बदले नहीं जातेआड़े हाथों लेना, नाकों चने चबाना, गागर में सागर भरनाबाल की खाल निकालना — ‘उखाड़ना’ अशुद्ध
एक अर्थ दो शब्दों से न कहेंकेवल मात्र, वापस लौटना, सबसे सर्वप्रथमकेवल एक सुझाव; वह लौट आया

जाल — जो वाक्य पहले से शुद्ध हैं, उन्हें मत ‘सुधारिए’

इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक नियम न जानने से नहीं, बल्कि नियम को हर जगह घसीट ले जाने से कटते हैं। छात्र सुन लेता है कि भूतकाल में ‘ने’ लगता है और फिर ‘मैंने सोया’, ‘बच्चे ने रोया’, ‘उसने हँसा’ लिखने लगता है — जबकि सोना, रोना और हँसना अकर्मक क्रियाएँ हैं और इनका कर्ता कभी ‘ने’ नहीं लेता। इसी तरह कोई पढ़ लेता है कि ‘अनेकों’ अशुद्ध है और फिर ‘सैकड़ों’ तथा ‘हजारों’ को भी काट देता है, जबकि ये दोनों शुद्ध हैं, क्योंकि ये संख्यावाची शब्दों से बने हैं और इनका बहुवचन-रूप मानक है। तीसरा जाल कर्म के ‘को’ का है — जब कर्म ‘को’ ले लेता है तब क्रिया न कर्ता से मेल खाती है न कर्म से, वह एकवचन पुल्लिंग में ठहर जाती है; इसलिए ‘पुलिस ने चोरों को पकड़ा’ बिल्कुल शुद्ध है और उसे ‘पकड़े’ करना नई अशुद्धि है। इसलिए प्रश्न हल करते समय एक जाँच और जोड़िए — जो विकल्प सबसे ज़्यादा ‘सुधारा हुआ’ दिख रहा हो, उस पर सबसे पहले शक कीजिए।

ये वाक्य पहले से शुद्ध हैं — इनमें बदलाव करने पर ही अशुद्धि बनती है

पहले से शुद्ध वाक्यलोग इसे ‘सुधारकर’ क्या बना देते हैंयह सुधार गलत क्यों है
मैं रात भर सोया।मैंने रात भर सोया।‘सोना’ अकर्मक है, उसका कर्ता ‘ने’ नहीं लेता
बालक जोर से रोया।बालक ने जोर से रोया।‘रोना’ अकर्मक है
वह खिलखिलाकर हँसा।उसने खिलखिलाकर हँसा।‘हँसना’ अकर्मक है
सैकड़ों लोग सभा में आए।सैकड़ो लोग सभा में आए।‘सैकड़ों’ का यही मानक रूप है, ‘अनेकों’ वाला नियम यहाँ नहीं लगता
पुलिस ने चोरों को पकड़ा।पुलिस ने चोरों को पकड़े।कर्म ‘को’ ले चुका है, इसलिए क्रिया एकवचन पुल्लिंग में ही रहेगी
मुझे तुम्हारी याद आती है।मुझे तुम्हारा याद आता है।‘याद’ स्त्रीलिंग है
मैं विद्यालय जाता हूँ।मैं विद्यालय को जाता हूँ।गति की क्रिया के साथ ‘को’ अनावश्यक है
प्रत्येक छात्र को पुस्तक मिली।प्रत्येक छात्रों को पुस्तक मिली।‘प्रत्येक’ के साथ एकवचन ही आता है
राम ने पत्र लिखा।राम पत्र लिखा।सकर्मक भूतकाल में ‘ने’ हटाना अशुद्धि है
वह धीरे-धीरे चलने लगा।वह धीरे चलने लगा।‘धीरे-धीरे’ पुनरुक्ति दोष नहीं, हिंदी का शब्द-युग्म है
उसकी आँखें भर आईं।उसकी आँखें भर आई।स्त्रीलिंग बहुवचन पर चंद्रबिंदु अनिवार्य है
मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ।मुझे मेरी गलती का अहसास हुआ।कर्ता और स्वामी एक हैं, इसलिए ‘अपनी’ ही आएगा

दोनों रूप चलते हैं — यहाँ विकल्प काटने में जल्दबाजी मत कीजिए

रूप एकरूप दोस्थिति
मुझे पानी चाहिए।मुझको पानी चाहिए।‘मुझे’ और ‘मुझको’ दोनों मानक हैं; ‘मेरे को’ अशुद्ध है
यद्यपि वह थका था, तथापि चलता रहा।वह थका था, फिर भी चलता रहा।एक संस्कृतनिष्ठ और एक सहज शैली — दोनों शुद्ध
पुस्तकें, कॉपियाँ आदि लाइए।पुस्तकें, कॉपियाँ इत्यादि लाइए।‘आदि’ और ‘इत्यादि’ दोनों चलते हैं
मुझे दो पुस्तकें चाहिए।मुझे दो पुस्तकें चाहिएँ।बहुवचन में ‘चाहिए’ और ‘चाहिएँ’ दोनों स्वीकृत हैं
यह केवल एक सुझाव है।यह सिर्फ़ एक सुझाव है।‘केवल’ और ‘सिर्फ़’ दोनों शुद्ध; ‘केवल मात्र’ अशुद्ध
मुझे इसकी ज़रूरत है।मुझे इसकी आवश्यकता है।एक आम बोलचाल का, एक तत्सम — दोनों शुद्ध
वह नहीं आया, क्योंकि वह बीमार था।चूँकि वह बीमार था, इसलिए नहीं आया।दोनों जोड़ियाँ शुद्ध हैं; ‘क्योंकि…इसलिए’ एक साथ अशुद्ध
पिताजी घर आए हैं।पिताजी घर आ गए हैं।दोनों शुद्ध; अर्थ में केवल पूर्णता का अंतर है

ये आठ भूलें सबसे ज़्यादा अंक ले जाती हैं

पहली — अकर्मक क्रिया के कर्ता पर ‘ने’ लगा देना, जैसे ‘मैंने सोया’। दूसरी — ‘ने’ लगने के बाद भी क्रिया को कर्ता के लिंग पर चलाना, जैसे ‘सीता ने रोटी बनाया’। तीसरी — स्त्रीलिंग बहुवचन कर्म के साथ क्रिया पर चंद्रबिंदु भूल जाना, जैसे ‘माँ ने रोटियाँ बनाई’। चौथी — ‘मुझे पुस्तक पढ़ना है’ लिखना, जबकि क्रियार्थक संज्ञा कर्म के लिंग पर चलकर ‘पढ़नी’ हो जाती है। पाँचवीं — अपनेपन वाली जगह पर ‘अपना’ की जगह ‘मेरा’ या ‘तुम्हारा’ रख देना। छठी — ‘केवल मात्र’, ‘वापस लौटना’, ‘सबसे सर्वप्रथम’ जैसे दोहराव। सातवीं — ‘यद्यपि’ के साथ ‘लेकिन’ और ‘क्योंकि’ के साथ ‘इसलिए’ जोड़ देना। और आठवीं, जो सबसे चुपचाप अंक काटती है — मुहावरे के शब्द बदल देना, जैसे ‘बाल की खाल निकालना’ की जगह ‘बाल की खाल उखाड़ना’ लिख देना।

परीक्षा में उत्तर चुनने का व्यावहारिक क्रम

वाक्य सामने आते ही पूरा विकल्प पढ़कर अंदाजा मत लगाइए; चार जाँचें क्रम से लगाइए। पहली जाँच — क्रिया पर उँगली रखिए और पूछिए कि वह किससे मेल खा रही है। यदि कर्ता ‘ने’ ले चुका है तो क्रिया कर्म से मेल खानी चाहिए, वरना कर्ता से। दूसरी जाँच — वाक्य में समय बताने वाला कोई शब्द है या नहीं; ‘कल’, ‘अभी’, ‘पिछले वर्ष’ जैसा शब्द दिखे तो क्रिया का काल उससे मिलाइए। तीसरी जाँच — कोई शब्द दो बार अपना काम तो नहीं कर रहा; एक-एक शब्द हटाकर पढ़िए, जिसे हटाने पर अर्थ न घटे वही अनावश्यक है। चौथी जाँच — सर्वनाम किसकी ओर इशारा कर रहा है; यदि एक से ज़्यादा उत्तर संभव हों तो वहीं अर्थ की अशुद्धि छिपी है। इन चार जाँचों के बाद भी दो विकल्प बचें तो उसे चुनिए जो कम ‘सुधारा हुआ’ दिखता हो, क्योंकि इस अध्याय का सबसे बड़ा जाल अति-सुधार ही है।

त्वरित पुनरावृत्ति — बाईं ओर अशुद्ध वाक्य, दाईं ओर शुद्ध वाक्य

अशुद्धशुद्ध
मैंने वहाँ गया।मैं वहाँ गया।
राम ने घर जाता है।राम घर जाता है।
बालक ने रोया।बालक रोया।
सीता ने रोटी बनाया।सीता ने रोटी बनाई।
राम ने पुस्तक पढ़ा।राम ने पुस्तक पढ़ी।
माँ ने रोटियाँ बनाई।माँ ने रोटियाँ बनाईं।
मुझे पुस्तक पढ़ना है।मुझे पुस्तक पढ़नी है।
उसे रोटी खाना है।उसे रोटी खानी है।
मैंने उसे कहा।मैंने उससे कहा।
वह विद्यालय को जाता है।वह विद्यालय जाता है।
यह पुस्तक मेरे को दे दो।यह पुस्तक मुझे दे दो।
उसका पिताजी का नाम मोहन है।उसके पिताजी का नाम मोहन है।
मैंने मेरा काम कर लिया।मैंने अपना काम कर लिया।
आप आपका नाम बताइए।आप अपना नाम बताइए।
मुझे तुम्हारी पत्र मिला।मुझे तुम्हारा पत्र मिला।
मेरा आत्मा दुखी है।मेरी आत्मा दुखी है।
उसका नाक बहुत लंबा है।उसकी नाक बहुत लंबी है।
सभा में बहुत भीड़ था।सभा में बहुत भीड़ थी।
मेरा प्राण निकल गया।मेरे प्राण निकल गए।
आपका दर्शन कब होगा?आपके दर्शन कब होंगे?
मैंने दो पुस्तक खरीदी।मैंने दो पुस्तकें खरीदीं।
प्रत्येक विद्यार्थियों को पुस्तक मिलेगी।प्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तक मिलेगी।
अनेकों लोग वहाँ गए।अनेक लोग वहाँ गए।
गुरुजी आज नहीं आया।गुरुजी आज नहीं आए।
मैं कल दिल्ली जाता हूँ।मैं कल दिल्ली जाऊँगा।
यदि वह आता तो मैं जाऊँगा।यदि वह आता तो मैं जाता।
जब मैं पहुँचा तो वह जा चुका है।जब मैं पहुँचा तो वह जा चुका था।
लड़कियाँ गीत गाता है।लड़कियाँ गीत गाती हैं।
मोहन तथा उसकी बहन आई।मोहन तथा उसकी बहन आए।
मैं कल जाऊँगा दिल्ली।मैं कल दिल्ली जाऊँगा।
सुंदर एक फूल खिला।एक सुंदर फूल खिला।
ये पुस्तक मेरी है।यह पुस्तक मेरी है।
इन बात का ध्यान रखो।इस बात का ध्यान रखो।
मैं, तुम और वह कल चलेंगे।तुम, वह और मैं कल चलेंगे।
वह सबसे सर्वश्रेष्ठ छात्र है।वह सर्वश्रेष्ठ छात्र है।
उसका स्वभाव बहुत मधुरता है।उसका स्वभाव बहुत मधुर है।
वह विद्वान महिला है।वह विदुषी महिला है।
यह केवल मात्र एक सुझाव है।यह केवल एक सुझाव है।
वह वापस लौट आया।वह लौट आया।
सबसे सर्वप्रथम उन्होंने भाषण दिया।सर्वप्रथम उन्होंने भाषण दिया।
मुझे यहाँ पर आकर अच्छा लगा।मुझे यहाँ आकर अच्छा लगा।
लगभग करीब दस लोग आए थे।लगभग दस लोग आए थे।
यद्यपि वह गरीब है लेकिन ईमानदार है।यद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है।
मुझे विश्वास है वह आएगा।मुझे विश्वास है कि वह आएगा।
उसने बाल की खाल उखाड़ी।उसने बाल की खाल निकाली।
मैंने उसे आड़े हाथ लिया।मैंने उसे आड़े हाथों लिया।
उसका दाल नहीं गली।उसकी दाल नहीं गली।
शत्रु के दाँत खट्टे कर दिया।शत्रु के दाँत खट्टे कर दिए।
मुझे आश्चर्य है कि वह कैसे आया?मुझे आश्चर्य है कि वह कैसे आया।
उसकी मृत्यु हो गई और वह मर गया।उसकी मृत्यु हो गई।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB पटवारीसंयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड · 22 प्रश्न / 44 अंक वाले खंड का भाग
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
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RPSC पुलिस उप-निरीक्षकप्रश्न-पत्र I — सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक
RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I · खंड I का भाग
RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम · खंड प्रथम का भाग
REETहिंदी भाषा I / II · 30 अंक प्रत्येक
राजस्थान उच्च न्यायालय LDCहिंदी खंड · 50 प्रश्न / 100 अंक

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aसीता ने रोटी बनाई।
  2. Bसीता ने रोटी बनाया।
  3. Cसीता रोटी बनाया।
  4. Dसीता ने रोटी बनाये।

व्याख्या

कर्ता ‘ने’ ले चुका है, इसलिए क्रिया कर्ता से नहीं, कर्म से मेल खाएगी। ‘रोटी’ स्त्रीलिंग एकवचन है, इसलिए ‘बनाई’ ही आएगा।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमैंने सोया।
  2. Bमैंने रात भर सोया।
  3. Cमैं रात भर सोया।
  4. Dमुझने रात भर सोया।

व्याख्या

‘सोना’ अकर्मक क्रिया है और अकर्मक क्रिया का कर्ता किसी भी काल में ‘ने’ नहीं लेता। यही वह अति-सुधार है जो भूतकाल का नियम हर जगह लगा देने से पैदा होता है।

प्रश्न 3

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमुझे पुस्तक पढ़ना है।
  2. Bमुझे पुस्तक पढ़नी है।
  3. Cमुझको पुस्तक पढ़ना है।
  4. Dमैं पुस्तक पढ़नी है।

व्याख्या

‘ना’ वाली क्रियार्थक संज्ञा कर्म के लिंग पर चलती है। कर्म ‘पुस्तक’ स्त्रीलिंग है, इसलिए ‘पढ़ना’ बदलकर ‘पढ़नी’ हो जाएगा।

प्रश्न 4

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमैंने उसे कहा कि वह आ जाए।
  2. Bमैं उससे कहा कि वह आ जाए।
  3. Cमैंने उसको कहा कि वह आ जाए।
  4. Dमैंने उससे कहा कि वह आ जाए।

व्याख्या

कहने की क्रिया में सुनने वाला अपादान की तरह ‘से’ लेता है, ‘को’ नहीं। साथ ही सकर्मक भूतकाल में कर्ता के साथ ‘ने’ अनिवार्य है।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमाँ ने रोटियाँ बनाईं।
  2. Bमाँ ने रोटियाँ बनाई।
  3. Cमाँ ने रोटियाँ बनाया।
  4. Dमाँ रोटियाँ बनाईं।

व्याख्या

कर्म स्त्रीलिंग बहुवचन हो तो क्रिया के अंत में चंद्रबिंदु लगता है। यही चंद्रबिंदु छोड़ देना इस अध्याय की सबसे चुपचाप कट जाने वाली भूल है।

प्रश्न 6

निम्नलिखित वाक्य में अशुद्धि है — ‘मैंने अपनी सारी पुस्तकें उसको दे दी।’

  1. Aमैंने
  2. Bअपनी सारी पुस्तकें
  3. Cउसको
  4. Dदे दी

व्याख्या

यहाँ ‘को’ उसको यानी संप्रदान के साथ लगा है, कर्म ‘पुस्तकें’ के साथ नहीं। इसलिए क्रिया कर्म से मेल खाएगी और स्त्रीलिंग बहुवचन के कारण ‘दे दीं’ होगी।

प्रश्न 7

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aप्रत्येक विद्यार्थियों को पुस्तक मिली।
  2. Bप्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तक मिली।
  3. Cहर विद्यार्थियों को पुस्तक मिली।
  4. Dप्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तक मिले।

व्याख्या

‘प्रत्येक’ और ‘हर’ के साथ संज्ञा सदा एकवचन में रहती है, और क्रिया भी कर्म ‘पुस्तक’ के अनुसार स्त्रीलिंग एकवचन में आएगी।

प्रश्न 8

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aअनेकों लोग सभा में आए।
  2. Bअनेकों लोग सभा में आया।
  3. Cअनेक लोग सभा में आए।
  4. Dअनेक लोग सभा में आया।

व्याख्या

‘अनेक’ स्वयं बहुवचन है, उस पर दोबारा बहुवचन का चिह्न लगाना अशुद्धि है। ध्यान रहे, ‘सैकड़ों’ और ‘हजारों’ पर यह चिह्न शुद्ध है क्योंकि वे संख्यावाची हैं।

प्रश्न 9

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aवह सबसे सर्वश्रेष्ठ छात्र है।
  2. Bवह सबसे श्रेष्ठतम छात्र है।
  3. Cवह सर्वश्रेष्ठतम छात्र है।
  4. Dवह सर्वश्रेष्ठ छात्र है।

व्याख्या

‘सर्वश्रेष्ठ’ का अर्थ ही है सबमें श्रेष्ठ। उत्तमावस्था पर दोबारा ‘सबसे’ या ‘तम’ जोड़ना पुनरुक्ति दोष है।

प्रश्न 10

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aयद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है।
  2. Bयद्यपि वह गरीब है, लेकिन ईमानदार है।
  3. Cयद्यपि वह गरीब है, मगर ईमानदार है।
  4. Dक्योंकि वह गरीब है, इसलिए ईमानदार है।

व्याख्या

हिंदी में योजक शब्दों की जोड़ियाँ तय हैं — ‘यद्यपि’ का साथी ‘तथापि’ है। और चौथा विकल्प तो गरीबी को ईमानदारी का कारण बता रहा है, जो अर्थ की अशुद्धि है।

प्रश्न 11

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमैंने मेरा काम कर लिया।
  2. Bमैंने अपना काम कर लिया।
  3. Cमैं अपना काम कर लिया।
  4. Dमैंने अपने काम कर लिया।

व्याख्या

जब कर्ता और स्वामी एक ही हों, तब निजवाचक सर्वनाम ‘अपना’ आता है, ‘मेरा’ नहीं। तीसरे विकल्प में सकर्मक भूतकाल का ‘ने’ भी छूट गया है।

प्रश्न 12

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aउसका दाल नहीं गला।
  2. Bउसका दाल नहीं गली।
  3. Cउसकी दाल नहीं गली।
  4. Dउसकी दाल नहीं गला।

व्याख्या

मुहावरे के भीतर भी लिंग का नियम चलता है। ‘दाल’ स्त्रीलिंग है, इसलिए सर्वनाम ‘उसकी’ और क्रिया ‘गली’ दोनों स्त्रीलिंग होंगी।

प्रश्न 13

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमैंने उसे आड़े हाथ लिया।
  2. Bमैंने उसे आड़े हाथ से लिया।
  3. Cमैंने उसे आड़ा हाथ लिया।
  4. Dमैंने उसे आड़े हाथों लिया।

व्याख्या

मुहावरे के शब्द तय होते हैं और उन्हें बदला नहीं जा सकता। शुद्ध मुहावरा ‘आड़े हाथों लेना’ है, जिसमें ‘हाथों’ बहुवचन में ही रहेगा।

प्रश्न 14

निम्नलिखित में अशुद्ध वाक्य है —

  1. Aपुलिस ने चोरों को पकड़े।
  2. Bपुलिस ने चोरों को पकड़ा।
  3. Cपुलिस ने चोर पकड़े।
  4. Dपुलिस चोरों को पकड़ने गई।

व्याख्या

जब कर्ता ‘ने’ और कर्म ‘को’ दोनों लगे हों, तब क्रिया किसी से मेल नहीं खाती और एकवचन पुल्लिंग में ठहर जाती है। इसीलिए ‘पकड़ा’ शुद्ध है और ‘पकड़े’ अति-सुधार।

प्रश्न 15

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aवह वापस लौट आया।
  2. Bवह लौट आया।
  3. Cवह वापस लौटकर वापस आया।
  4. Dवह पुनः फिर से लौट आया।

व्याख्या

‘वापस’ और ‘लौटना’ दोनों एक ही बात कहते हैं, इसलिए दोनों साथ रखने पर पुनरुक्ति दोष बनता है। यही बात ‘पुनः फिर से’ पर भी लागू होती है।

प्रश्न 16

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमुझे यहाँ पर आकर अच्छा लगा।
  2. Bमुझको यहाँ पर आकर अच्छा लगा।
  3. Cमुझे यहाँ आकर अच्छा लगा।
  4. Dमेरे को यहाँ आकर अच्छा लगा।

व्याख्या

‘यहाँ’ स्वयं स्थान बता रहा है, इसलिए उसके बाद ‘पर’ अनावश्यक शब्द है। और ‘मेरे को’ हिंदी का मानक रूप नहीं है — ‘मुझे’ या ‘मुझको’ ही चलेगा।

प्रश्न 17

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमैं, तुम और वह कल चलेंगे।
  2. Bमैं और तुम कल चलेंगे।
  3. Cवह, मैं और तुम कल चलेंगे।
  4. Dतुम, वह और मैं कल चलेंगे।

व्याख्या

हिंदी में एक से अधिक पुरुष कर्ता होने पर क्रम होता है — पहले मध्यम पुरुष, फिर अन्य पुरुष, और सबसे अंत में उत्तम पुरुष। ‘मैं’ को आगे रखना शिष्टाचार की दृष्टि से अशुद्ध माना जाता है।

प्रश्न 18

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गए।
  2. Bमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गई।
  3. Cमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गया।
  4. Dमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गईं।

व्याख्या

कर्ता में एक पुल्लिंग और एक स्त्रीलिंग दोनों हों तो क्रिया पुल्लिंग बहुवचन में जाती है। यही नियम मिश्रित कर्ताओं पर हर बार लगता है।

प्रश्न 19

निम्नलिखित वाक्य में अशुद्धि है — ‘उसने अपनी गलती स्वीकार किया।’

  1. Aउसने
  2. Bस्वीकार किया
  3. Cअपनी गलती
  4. Dइस वाक्य में कोई अशुद्धि नहीं है

व्याख्या

कर्ता ‘ने’ ले चुका है, इसलिए क्रिया कर्म ‘गलती’ से मेल खाएगी। ‘गलती’ स्त्रीलिंग है, अतः शुद्ध रूप ‘स्वीकार की’ होगा।

प्रश्न 20

निम्नलिखित वाक्य में अशुद्धि है — ‘मैं कल दिल्ली जाता हूँ।’

  1. Aमैं
  2. Bकल
  3. Cजाता हूँ
  4. Dदिल्ली

व्याख्या

वाक्य में ‘कल’ भविष्य की ओर इशारा कर रहा है, पर क्रिया वर्तमान काल में है। समय-सूचक शब्द और क्रिया का काल एक होना चाहिए, इसलिए ‘जाऊँगा’ आएगा।

प्रश्न 21

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aउसने अपनी आँखों का पानी मर गया।
  2. Bउसका आँखों का पानी मर गया।
  3. Cउसकी आँखों का पानी मर गई।
  4. Dउसकी आँखों का पानी मर गया।

व्याख्या

‘आँखों का पानी मरना’ अकर्मक की तरह चलता है, इसलिए कर्ता ‘ने’ नहीं लेगा। क्रिया ‘पानी’ से मेल खाएगी, जो पुल्लिंग है।

प्रश्न 22

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aवह विदुषी महिला है।
  2. Bवह विद्वान महिला है।
  3. Cवह विद्वानी महिला है।
  4. Dवह विदुष महिला है।

व्याख्या

संस्कृत से आए कुछ विशेषणों का स्त्रीलिंग रूप अलग बनता है। ‘विद्वान’ का स्त्रीलिंग ‘विदुषी’ है, ठीक वैसे ही जैसे ‘महान’ का ‘महती’।

प्रश्न 23

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aजब मैं पहुँचा तब वह जा चुका है।
  2. Bजब मैं पहुँचा तब वह जा चुका था।
  3. Cजब मैं पहुँचता तब वह जा चुका था।
  4. Dजब मैंने पहुँचा तब वह जा चुका था।

व्याख्या

एक ही वाक्य के दोनों हिस्से एक ही काल में रहने चाहिए। पहला हिस्सा भूतकाल का है, इसलिए दूसरा भी भूतकाल में आएगा। चौथे विकल्प में अकर्मक क्रिया पर ‘ने’ की भूल अलग से है।

प्रश्न 24

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमुझे विश्वास है वह अवश्य आएगा।
  2. Bमुझे विश्वास हुआ कि वह अवश्य आता।
  3. Cमुझे विश्वास है कि वह अवश्य आएगा।
  4. Dमेरे को विश्वास है कि वह अवश्य आएगा।

व्याख्या

आश्रित उपवाक्य को मुख्य वाक्य से जोड़ने के लिए ‘कि’ ज़रूरी है; उसे गिरा देना शब्द-लोप की अशुद्धि है। ‘मेरे को’ मानक रूप नहीं है।

प्रश्न 25

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aउसने मेरे कान भर दिया।
  2. Bउसने मेरा कान भर दिए।
  3. Cउसने मेरे कान भरी।
  4. Dउसने मेरे कान भर दिए।

व्याख्या

मुहावरे ‘कान भरना’ में ‘कान’ बहुवचन में चलता है, इसलिए क्रिया भी बहुवचन में आएगी। मुहावरे के भीतर वचन का मेल उतना ही ज़रूरी है जितना साधारण वाक्य में।