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काल, अन्वय और पदक्रम की अशुद्धियाँ

ये तीन अशुद्धियाँ वाक्य की बनावट से जुड़ी हैं, शब्दों से नहीं — क्रिया का काल, कर्ता-कर्म-क्रिया का आपसी मेल, और शब्दों का क्रम। कुल 68 वाक्य शुद्ध रूप सहित।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

काल और क्रिया की अशुद्धि

इस वर्ग की सबसे आम भूल यह है कि वाक्य में समय बताने वाला शब्द कुछ कह रहा होता है और क्रिया कुछ और। ‘मैं कल दिल्ली जाता हूँ’ में ‘कल’ भविष्य की ओर इशारा कर रहा है पर क्रिया वर्तमान की है; शुद्ध रूप ‘मैं कल दिल्ली जाऊँगा’ होगा। दूसरी भूल तब होती है जब एक ही वाक्य के दो हिस्से अलग-अलग काल में चले जाते हैं — ‘जब मैं पहुँचा तो वह जा चुका है’ में पहला हिस्सा भूत का है और दूसरा वर्तमान का; दोनों को एक ही काल में लाना पड़ेगा, यानी ‘वह जा चुका था’। तीसरी भूल शर्त वाले वाक्यों में होती है। ‘यदि…तो’ वाले वाक्य में दोनों क्रियाएँ एक ही रूप में चलती हैं — ‘यदि वह आता तो मैं जाता’; इनमें से एक को भविष्य में खींच लेना अशुद्धि है। और चौथी भूल, जो सबसे ज़्यादा अंक गँवाती है, वह ‘चाहना’ और ‘होना’ के साथ आने वाली क्रियार्थक संज्ञा की है। ‘मुझे पुस्तक पढ़ना है’ अशुद्ध है, क्योंकि यहाँ ‘पढ़ना’ कर्म ‘पुस्तक’ के लिंग पर चलेगा और ‘पढ़नी’ हो जाएगा। इसी नियम से ‘उसे रोटी खानी है’, ‘मुझे चिट्ठी लिखनी है’ और ‘उसने पुस्तक देनी चाही’ बनते हैं।

काल और क्रिया की अशुद्धियाँ

  • मैं कल दिल्ली जाता हूँ।मैं कल दिल्ली जाऊँगा।काल
  • वह कल आया है।वह कल आया था।काल
  • जब मैं पहुँचा तो वह जा चुका है।जब मैं पहुँचा तो वह जा चुका था।काल
  • मैं पढ़ रहा हूँ जब वह आया।मैं पढ़ रहा था जब वह आया।काल
  • यदि वह आता तो मैं जाऊँगा।यदि वह आता तो मैं जाता।कालशर्त वाले वाक्य में दोनों क्रियाएँ एक रूप में
  • यदि तुम मेहनत करते तो सफल हो जाओगे।यदि तुम मेहनत करते तो सफल हो जाते।काल
  • उसने कल खाना खा लिया है।उसने कल खाना खा लिया था।काल
  • मुझे यह पुस्तक पढ़ना है।मुझे यह पुस्तक पढ़नी है।क्रियाक्रियार्थक संज्ञा कर्म के लिंग पर चलती है
  • उसे रोटी खाना है।उसे रोटी खानी है।क्रिया
  • मुझे चिट्ठी लिखना है।मुझे चिट्ठी लिखनी है।क्रिया
  • उसने मुझे पुस्तक देना चाहा।उसने मुझे पुस्तक देनी चाही।क्रिया
  • मुझे दवा पीना है।मुझे दवा पीनी है।क्रिया
  • राम रोटी खाया।राम ने रोटी खाई।क्रिया
  • हम लोग कल फिल्म देखने गया।हम लोग कल फिल्म देखने गए।क्रिया
  • वह गया हुआ है।वह गया है।क्रिया
  • राम ने पत्र लिखा जा रहा है।राम द्वारा पत्र लिखा जा रहा है।क्रियाकर्मवाच्य में कर्ता ‘द्वारा’ लेता है
  • मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप आइए।मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप आएँ।क्रिया
  • वह बीमार होने के कारण नहीं आ सका था इसलिए।वह बीमार होने के कारण नहीं आ सका।क्रिया
  • तुम आओ तो मैं चलता।तुम आओ तो मैं चलूँ।क्रिया
  • बारिश होने लगा तो हम लौट आए।बारिश होने लगी तो हम लौट आए।क्रिया
  • उसे यह काम करना पड़ेगा था।उसे यह काम करना पड़ा था।काल
  • मैंने कल तुमसे मिलूँगा।मैं कल तुमसे मिलूँगा।क्रिया
  • वह सुबह से पढ़ रहा था और अब भी पढ़ता है।वह सुबह से पढ़ रहा है।काल
  • गाड़ी छूट गई जब मैं पहुँचा।जब मैं पहुँचा, तब तक गाड़ी छूट चुकी थी।काल

अन्वय की अशुद्धि — कर्ता, कर्म और क्रिया का आपसी मेल

अन्वय का मतलब है मेल। हिंदी में क्रिया किससे मेल खाएगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वाक्य में ‘ने’ लगा है या नहीं। जब कर्ता के साथ ‘ने’ नहीं होता, तब क्रिया कर्ता के लिंग-वचन पर चलती है — ‘लड़कियाँ गीत गाती हैं’। पर जैसे ही कर्ता ‘ने’ ले लेता है, वह क्रिया से कट जाता है और क्रिया कर्म के पीछे चलने लगती है — ‘सीता ने रोटी बनाई’, क्योंकि यहाँ ‘रोटी’ स्त्रीलिंग है, ‘सीता’ का लिंग अब मायने नहीं रखता। यही कारण है कि ‘राम ने पुस्तक पढ़ी’ शुद्ध है, ‘राम ने पुस्तक पढ़ा’ नहीं। एक तीसरी स्थिति भी है — जब कर्म भी ‘को’ ले ले, तब क्रिया न कर्ता से मेल खाती है न कर्म से, वह हमेशा एकवचन पुल्लिंग में ठहर जाती है, जैसे ‘पुलिस ने चोरों को पकड़ा’। इसके अलावा दो छोटी बातें और हैं। पहली, यदि कर्ता में एक पुल्लिंग और एक स्त्रीलिंग दोनों हों तो क्रिया पुल्लिंग बहुवचन में जाएगी — ‘मोहन तथा उसकी बहन आए’। दूसरी, स्त्रीलिंग बहुवचन कर्म के साथ क्रिया के अंत में चंद्रबिंदु लगता है — ‘माँ ने रोटियाँ बनाईं’, ‘उसने चिट्ठियाँ लिखीं’। यह चंद्रबिंदु छोड़ देना परीक्षा में पकड़ी जाने वाली भूल है।

अन्वय संबंधी अशुद्धियाँ

  • सीता ने रोटी बनाया।सीता ने रोटी बनाई।‘ने’ के बाद क्रिया कर्म पर चलती है
  • राम ने पुस्तक पढ़ा।राम ने पुस्तक पढ़ी।
  • उसने अपनी गलती स्वीकार किया।उसने अपनी गलती स्वीकार की।
  • मैंने चिट्ठी लिखा।मैंने चिट्ठी लिखी।
  • उसने पानी पिया और रोटी खाया।उसने पानी पिया और रोटी खाई।
  • उसने यह बात कहा।उसने यह बात कही।
  • माँ ने रोटियाँ बनाई।माँ ने रोटियाँ बनाईं।स्त्रीलिंग बहुवचन कर्म पर चंद्रबिंदु
  • उसने चिट्ठियाँ लिखी।उसने चिट्ठियाँ लिखीं।
  • मैंने पुस्तकें पढ़ी।मैंने पुस्तकें पढ़ीं।
  • लड़कियाँ गीत गाता है।लड़कियाँ गीत गाती हैं।
  • राम और श्याम जा रहा है।राम और श्याम जा रहे हैं।
  • मोहन तथा उसकी बहन आई।मोहन तथा उसकी बहन आए।मिश्रित लिंग होने पर पुल्लिंग बहुवचन
  • आप क्या कर रहा है?आप क्या कर रहे हैं?
  • पिताजी बाज़ार गया।पिताजी बाज़ार गए।
  • मेरे भाई-बहन सब पढ़ता है।मेरे भाई-बहन सब पढ़ते हैं।
  • हम लोग खाना खा चुका है।हम लोग खाना खा चुके हैं।
  • बच्चे खेल रहा है।बच्चे खेल रहे हैं।
  • देश की सीमा पर सैनिक तैनात है।देश की सीमा पर सैनिक तैनात हैं।
  • तुम कहाँ गया था?तुम कहाँ गए थे?
  • मुझे हिंदी और अंग्रेज़ी आती है।मुझे हिंदी और अंग्रेज़ी आती हैं।
  • राम का बड़ा भाई श्याम हैं।राम का बड़ा भाई श्याम है।
  • उसने दोनों पुस्तकें लौटाई।उसने दोनों पुस्तकें लौटाईं।

पदक्रम की अशुद्धि — शब्दों का सही क्रम

हिंदी का सामान्य क्रम है — कर्ता, फिर समय या स्थान, फिर कर्म, और सबसे अंत में क्रिया। ‘मैं कल दिल्ली जाऊँगा’ इसी क्रम पर बना है। जब क्रिया बीच में आ जाती है या कर्म वाक्य के अंत में खिसक जाता है, तो वाक्य कान को अटपटा लगने लगता है — ‘मैं कल जाऊँगा दिल्ली’। यह भूल अकसर इसलिए होती है कि हम अंग्रेज़ी का क्रम हिंदी पर चढ़ा देते हैं, जहाँ क्रिया कर्म से पहले आती है। दूसरी बात विशेषण की है — विशेषण हमेशा अपनी संज्ञा से ठीक पहले बैठता है, इसलिए ‘एक सुंदर फूल’ शुद्ध है और ‘सुंदर एक फूल’ नहीं। तीसरी और सबसे नाजुक बात ‘केवल’, ‘भी’, ‘तक’ जैसे शब्दों की है। ये जहाँ रखे जाते हैं वहीं का अर्थ पकड़ लेते हैं, इसलिए इनकी जगह बदलने से वाक्य अशुद्ध नहीं होता, अर्थ बदल जाता है। ‘केवल मैं यह काम कर सकता हूँ’ का अर्थ है कि दूसरा कोई नहीं कर सकता; ‘मैं केवल यह काम कर सकता हूँ’ का अर्थ है कि मैं और कोई काम नहीं कर सकता। परीक्षा में जब पूछा जाए कि वाक्य में अशुद्धि कहाँ है, तो देखिए कि ‘केवल’ या ‘भी’ उस शब्द के पास है या नहीं जिस पर जोर देना था।

पदक्रम संबंधी अशुद्धियाँ

  • मैं कल जाऊँगा दिल्ली।मैं कल दिल्ली जाऊँगा।
  • यह है मेरी पुस्तक।यह मेरी पुस्तक है।
  • आपका पत्र मिला मुझे।मुझे आपका पत्र मिला।
  • सुंदर एक फूल खिला।एक सुंदर फूल खिला।विशेषण संज्ञा से ठीक पहले
  • राम को मैंने देखा कल बाज़ार में।मैंने कल राम को बाज़ार में देखा।
  • वह खाता है रोज़ फल।वह रोज़ फल खाता है।
  • मुझे चाहिए एक पुस्तक।मुझे एक पुस्तक चाहिए।
  • नहीं वह आया।वह नहीं आया।
  • बहुत वह अच्छा लड़का है।वह बहुत अच्छा लड़का है।
  • उसने कहा कि वह आएगा कल।उसने कहा कि वह कल आएगा।
  • सोकर वह उठा देर से।वह देर से सोकर उठा।
  • पुस्तक रखी है मेरी।मेरी पुस्तक रखी है।
  • आज है बुधवार।आज बुधवार है।
  • मुझको दीजिए पानी।मुझको पानी दीजिए।
  • क्या तुम जाओगे कल?क्या तुम कल जाओगे?
  • पढ़ता है राम पुस्तक।राम पुस्तक पढ़ता है।
  • मैंने देखा एक सपना।मैंने एक सपना देखा।
  • बहुत दिनों बाद मिला वह मुझसे।बहुत दिनों बाद वह मुझसे मिला।
  • वह बाज़ार गया सामान लाने।वह सामान लाने बाज़ार गया।
  • वह कल आएगा ऐसा मुझे लगता है।मुझे लगता है कि वह कल आएगा।
  • उसने बुलाया मुझे अपने घर।उसने मुझे अपने घर बुलाया।
  • गया वह अपने गाँव।वह अपने गाँव गया।

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aसीता ने रोटी बनाई।
  2. Bसीता ने रोटी बनाया।
  3. Cसीता रोटी बनाया।
  4. Dसीता ने रोटी बनाये।

व्याख्या

कर्ता ‘ने’ ले चुका है, इसलिए क्रिया कर्ता से नहीं, कर्म से मेल खाएगी। ‘रोटी’ स्त्रीलिंग एकवचन है, इसलिए ‘बनाई’ ही आएगा।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमुझे पुस्तक पढ़ना है।
  2. Bमुझे पुस्तक पढ़नी है।
  3. Cमुझको पुस्तक पढ़ना है।
  4. Dमैं पुस्तक पढ़नी है।

व्याख्या

‘ना’ वाली क्रियार्थक संज्ञा कर्म के लिंग पर चलती है। कर्म ‘पुस्तक’ स्त्रीलिंग है, इसलिए ‘पढ़ना’ बदलकर ‘पढ़नी’ हो जाएगा।

प्रश्न 3

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमाँ ने रोटियाँ बनाईं।
  2. Bमाँ ने रोटियाँ बनाई।
  3. Cमाँ ने रोटियाँ बनाया।
  4. Dमाँ रोटियाँ बनाईं।

व्याख्या

कर्म स्त्रीलिंग बहुवचन हो तो क्रिया के अंत में चंद्रबिंदु लगता है। यही चंद्रबिंदु छोड़ देना इस अध्याय की सबसे चुपचाप कट जाने वाली भूल है।

प्रश्न 4

निम्नलिखित में अशुद्ध वाक्य है —

  1. Aपुलिस ने चोरों को पकड़े।
  2. Bपुलिस ने चोरों को पकड़ा।
  3. Cपुलिस ने चोर पकड़े।
  4. Dपुलिस चोरों को पकड़ने गई।

व्याख्या

जब कर्ता ‘ने’ और कर्म ‘को’ दोनों लगे हों, तब क्रिया किसी से मेल नहीं खाती और एकवचन पुल्लिंग में ठहर जाती है। इसीलिए ‘पकड़ा’ शुद्ध है और ‘पकड़े’ अति-सुधार।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गए।
  2. Bमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गई।
  3. Cमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गया।
  4. Dमोहन तथा उसकी बहन विद्यालय गईं।

व्याख्या

कर्ता में एक पुल्लिंग और एक स्त्रीलिंग दोनों हों तो क्रिया पुल्लिंग बहुवचन में जाती है। यही नियम मिश्रित कर्ताओं पर हर बार लगता है।

प्रश्न 6

निम्नलिखित वाक्य में अशुद्धि है — ‘उसने अपनी गलती स्वीकार किया।’

  1. Aउसने
  2. Bस्वीकार किया
  3. Cअपनी गलती
  4. Dइस वाक्य में कोई अशुद्धि नहीं है

व्याख्या

कर्ता ‘ने’ ले चुका है, इसलिए क्रिया कर्म ‘गलती’ से मेल खाएगी। ‘गलती’ स्त्रीलिंग है, अतः शुद्ध रूप ‘स्वीकार की’ होगा।

प्रश्न 7

निम्नलिखित वाक्य में अशुद्धि है — ‘मैं कल दिल्ली जाता हूँ।’

  1. Aमैं
  2. Bकल
  3. Cजाता हूँ
  4. Dदिल्ली

व्याख्या

वाक्य में ‘कल’ भविष्य की ओर इशारा कर रहा है, पर क्रिया वर्तमान काल में है। समय-सूचक शब्द और क्रिया का काल एक होना चाहिए, इसलिए ‘जाऊँगा’ आएगा।

प्रश्न 8

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aजब मैं पहुँचा तब वह जा चुका है।
  2. Bजब मैं पहुँचा तब वह जा चुका था।
  3. Cजब मैं पहुँचता तब वह जा चुका था।
  4. Dजब मैंने पहुँचा तब वह जा चुका था।

व्याख्या

एक ही वाक्य के दोनों हिस्से एक ही काल में रहने चाहिए। पहला हिस्सा भूतकाल का है, इसलिए दूसरा भी भूतकाल में आएगा। चौथे विकल्प में अकर्मक क्रिया पर ‘ने’ की भूल अलग से है।