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अनावश्यक शब्द, मुहावरा-प्रयोग और वाक्य-गठन

ये तीन अशुद्धियाँ व्याकरण से ज़्यादा अर्थ से जुड़ी हैं — ज़रूरत से ज़्यादा या कम शब्द, मुहावरे का ग़लत रूप, और वाक्य की बनावट जिससे अर्थ ही बदल जाए। कुल 70 वाक्य शुद्ध रूप सहित।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

अनावश्यक शब्द और शब्द-लोप

यह वर्ग पुनरुक्ति से थोड़ा अलग है। पुनरुक्ति में एक ही अर्थ दो बार आता है, जबकि यहाँ या तो कोई शब्द बिना काम के बैठा रहता है या फिर ज़रूरी शब्द गिर जाता है। अनावश्यक शब्द का सबसे आम उदाहरण है ‘पर’ — ‘यहाँ पर’, ‘वहाँ पर’, ‘कहाँ पर’ में ‘पर’ का कोई काम नहीं, क्योंकि ‘यहाँ’ और ‘वहाँ’ स्वयं स्थान बता रहे हैं। इसी तरह ‘लगभग करीब दस लोग’ में दो अनुमान-सूचक शब्द एक साथ आ गए हैं। दूसरी ओर शब्द-लोप का सबसे आम उदाहरण है ‘कि’ का गिर जाना — ‘मुझे विश्वास है वह आएगा’ में ‘है’ के बाद ‘कि’ चाहिए। योजक शब्दों की जोड़ियाँ भी यहीं टूटती हैं। हिंदी में कुछ जोड़े तय हैं और उन्हें आपस में मिलाया नहीं जा सकता — ‘यद्यपि’ के साथ ‘तथापि’ आता है, ‘लेकिन’ नहीं; ‘चूँकि’ के साथ ‘इसलिए’ आता है; ‘न केवल’ के साथ ‘बल्कि’ या ‘वरन्’; ‘जैसे ही’ के साथ ‘वैसे ही’; ‘ज्यों ही’ के साथ ‘त्यों ही’। और ‘क्योंकि’ के साथ ‘इसलिए’ नहीं आता, क्योंकि दोनों एक ही कारण को दो बार बता देते हैं। इन जोड़ियों को एक बार कागज पर लिख लेने से इस वर्ग के आधे प्रश्न अपने आप सध जाते हैं।

अनावश्यक शब्द और शब्द-लोप की अशुद्धियाँ

  • मुझे यहाँ पर आकर अच्छा लगा।मुझे यहाँ आकर अच्छा लगा।अनावश्यक शब्द
  • वहाँ पर बहुत भीड़ थी।वहाँ बहुत भीड़ थी।अनावश्यक शब्द
  • आज के दिन विद्यालय में छुट्टी है।आज विद्यालय में छुट्टी है।अनावश्यक शब्द
  • लगभग करीब दस लोग आए थे।लगभग दस लोग आए थे।अनावश्यक शब्द
  • वह भी साथ में गया।वह भी गया।अनावश्यक शब्द
  • यह बात सत्य और सच है।यह बात सत्य है।अनावश्यक शब्द
  • मुझे लगता है कि शायद कि वह आएगा।मुझे लगता है कि शायद वह आएगा।अनावश्यक शब्द
  • उसने अपने हाथ से लिखकर पत्र लिखा।उसने अपने हाथ से पत्र लिखा।अनावश्यक शब्द
  • मुझे विश्वास है वह आएगा।मुझे विश्वास है कि वह आएगा।शब्द-लोपआश्रित उपवाक्य से पहले ‘कि’ आवश्यक
  • मुझे तुमसे कुछ कहना।मुझे तुमसे कुछ कहना है।शब्द-लोप
  • वह इतना गरीब है कि उसके पास खाने को भी नहीं।वह इतना गरीब है कि उसके पास खाने को कुछ भी नहीं है।शब्द-लोप
  • यद्यपि वह गरीब है लेकिन ईमानदार है।यद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है।योजक‘यद्यपि’ के साथ ‘तथापि’
  • क्योंकि वह बीमार था इसलिए नहीं आया।चूँकि वह बीमार था, इसलिए नहीं आया।योजक
  • जैसे ही वह आया तैसे ही मैं चला गया।जैसे ही वह आया, वैसे ही मैं चला गया।योजक
  • ज्यों ही घंटी बजी त्यों वह उठ गया।ज्यों ही घंटी बजी, त्यों ही वह उठ गया।योजक
  • वह न केवल आया, लेकिन रुका भी।वह न केवल आया, बल्कि रुका भी।योजक
  • यदि तुम मेहनत करोगे लेकिन सफल होगे।यदि तुम मेहनत करोगे तो सफल होगे।योजक
  • वह मुझसे बड़ा है उम्र।वह मुझसे उम्र में बड़ा है।शब्द-लोप
  • मैं आपका आभारी आपके सहयोग के लिए।मैं आपके सहयोग के लिए आपका आभारी हूँ।शब्द-लोप
  • उसे न पढ़ने का शौक न लिखने का।उसे न पढ़ने का शौक है, न लिखने का।शब्द-लोप
  • मैं यह कहना चाहता हूँ कि मेरा कहना यह है कि वह निर्दोष है।मैं यह कहना चाहता हूँ कि वह निर्दोष है।अनावश्यक शब्द
  • इस कारण से कि वह बीमार था, नहीं आया।चूँकि वह बीमार था, इसलिए नहीं आया।अनावश्यक शब्द
  • वह अपने घर को वापस चला गया।वह अपने घर लौट गया।अनावश्यक शब्द
  • उसने मुझसे पूछा कि तुम कहाँ जा रहे हो?उसने मुझसे पूछा कि मैं कहाँ जा रहा हूँ।वाक्य-गठनअप्रत्यक्ष कथन में पुरुष और चिह्न दोनों बदलते हैं

मुहावरों के प्रयोग की अशुद्धि

मुहावरा हिंदी का सबसे कसा हुआ हिस्सा है — उसके शब्द तय होते हैं और उन्हें बदला नहीं जा सकता। ‘कान धरना’ में ‘धरना’ की जगह ‘देना’ रख दीजिए तो मुहावरा टूट जाता है, भले ही अर्थ समझ में आ जाए। इसी तरह ‘आड़े हाथों लेना’ में ‘हाथों’ बहुवचन में ही रहेगा, ‘नाकों चने चबाना’ में ‘नाकों’ ही चलेगा, और ‘बाल की खाल निकालना’ में ‘निकालना’ ही आएगा, ‘उखाड़ना’ नहीं। दूसरी बड़ी भूल मुहावरे के भीतर लिंग और वचन की होती है। मुहावरे में जो संज्ञा है, क्रिया उसी के अनुसार चलेगी — ‘दाल’ स्त्रीलिंग है इसलिए ‘उसकी दाल नहीं गली’, ‘घुटने’ बहुवचन है इसलिए ‘घुटने टेक दिए’, ‘दाँत’ बहुवचन है इसलिए ‘दाँत खट्टे कर दिए’। तीसरी भूल वाक्य में मुहावरे को जोड़ते समय कर्ता के रूप की होती है। ‘हाथ धो बैठना’ अकर्मक की तरह चलता है, इसलिए ‘मैं उससे हाथ धो बैठा’ शुद्ध है, ‘मैंने उससे हाथ धो बैठा’ नहीं। एक बात और — मुहावरा हमेशा वाक्य में ढलकर आता है, अकेला खड़ा नहीं रहता; इसलिए परीक्षा में ‘घड़ों पानी पड़ना’ जैसे मुहावरे के साथ ‘उस पर’ लगाना ज़रूरी हो जाता है।

मुहावरों के प्रयोग में होने वाली अशुद्धियाँ

  • उसने मेरी बात पर ध्यान नहीं धरा।उसने मेरी बात पर कान नहीं धरा।मुहावरा ‘कान धरना’ है; ‘ध्यान धरना’ नहीं
  • मैंने उसे आड़े हाथ लिया।मैंने उसे आड़े हाथों लिया।
  • उसे नाक के चने चबाने पड़े।उसे नाकों चने चबाने पड़े।
  • वह बाल की खाल उखाड़ता रहता है।वह बाल की खाल निकालता रहता है।
  • उसका दाल नहीं गली।उसकी दाल नहीं गली।‘दाल’ स्त्रीलिंग
  • उसने अपना नाक कटा लिया।उसने अपनी नाक कटा ली।
  • राम ने शत्रु के आगे घुटने टेक दिया।राम ने शत्रु के आगे घुटने टेक दिए।
  • यह सुनकर उसके हाथ-पैर फूल गया।यह सुनकर उसके हाथ-पैर फूल गए।
  • मैंने उससे हाथ धो बैठा।मैं उससे हाथ धो बैठा।
  • मुझे उसकी बातों में आ गया।मैं उसकी बातों में आ गया।
  • उसने आसमान से तारे तोड़ लाए।वह आसमान से तारे तोड़ लाया।
  • उसने अपनी आँखों का पानी मर गया।उसकी आँखों का पानी मर गया।
  • वह अपने पाँव पर खड़ा हुआ।वह अपने पैरों पर खड़ा हुआ।
  • वह घड़ों पानी पड़ गया।उस पर घड़ों पानी पड़ गया।
  • उसने तिल को ताड़ बना दिया।उसने तिल का ताड़ बना दिया।
  • उसने मेरे कान भर दिया।उसने मेरे कान भर दिए।
  • यह काम टेढ़ी खीर का है।यह काम टेढ़ी खीर है।
  • उसने गागर में सागर भर दी।उसने गागर में सागर भर दिया।
  • उसने बात की बतंगड़ बना दी।उसने बात का बतंगड़ बना दिया।
  • शत्रु के दाँत खट्टे कर दिया।शत्रु के दाँत खट्टे कर दिए।
  • वह लकीर की फकीर है और अपनी ही चलाता है।वह लकीर का फकीर है और अपनी ही चलाता है।
  • वह अपने मुँह से मियाँ मिट्ठू बनता है।वह अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनता है।
  • मैंने उसकी बात पर आँखें मूँद ली।मैंने उसकी बात पर आँखें मूँद लीं।
  • उसने मेरे सामने नाक रगड़ा।उसने मेरे सामने नाक रगड़ी।

वाक्य-गठन और अर्थ की अशुद्धि

यह आखिरी वर्ग सबसे सूक्ष्म है, क्योंकि यहाँ व्याकरण का कोई एक नियम नहीं टूटता — टूटता अर्थ है। सबसे आम भूल यह है कि विशेषण या उपवाक्य उस शब्द से दूर बैठ जाता है जिसका वह वर्णन कर रहा है, और वाक्य दो अर्थ देने लगता है। ‘यह मकान मेरे पिताजी का है जो बहुत पुराना है’ पढ़कर पता नहीं चलता कि पुराना मकान है या पिताजी; इसे ‘यह बहुत पुराना मकान मेरे पिताजी का है’ करना पड़ेगा। दूसरी भूल विरोधी अर्थ वाले शब्दों को एक साथ रख देने की है — ‘मुझे यह कहते हुए दुख है कि आप सफल हुए’ में दुख और सफलता आपस में टकरा रहे हैं। तीसरी भूल विराम-चिह्न की है; प्रश्नवाचक वाक्य के अंत में प्रश्नचिह्न न लगाना या सामान्य कथन के अंत में लगा देना दोनों अशुद्धियाँ हैं। ‘मुझे आश्चर्य है कि वह कैसे आया?’ में प्रश्न पूछा ही नहीं गया, इसलिए वहाँ पूर्ण विराम आएगा। और चौथी भूल वाक्य को अनावश्यक रूप से लंबा खींच देने की है — एक वाक्य में तीन-तीन ‘जो…वह’ जोड़ देने से पाठक भटक जाता है। परीक्षा में इस वर्ग का प्रश्न पहचानने का तरीक़ा यह है कि वाक्य पढ़कर खुद से पूछिए — क्या यहाँ एक से अधिक अर्थ निकल सकते हैं? यदि हाँ, तो वहीं अशुद्धि है।

वाक्य-गठन और अर्थ की अशुद्धियाँ

  • यह मकान मेरे पिताजी का है जो बहुत पुराना है।यह बहुत पुराना मकान मेरे पिताजी का है।वाक्य-गठनविशेषण-उपवाक्य अपनी संज्ञा के पास रहे
  • मुझे आश्चर्य है कि वह कैसे आया?मुझे आश्चर्य है कि वह कैसे आया।विराम-चिह्न
  • क्या तुम कल आओगे।क्या तुम कल आओगे?विराम-चिह्न
  • गुरुजी ने शिष्य को आशीर्वाद दिया और वह चला गया।गुरुजी ने शिष्य को आशीर्वाद दिया और शिष्य चला गया।वाक्य-गठन‘वह’ किसके लिए है, यह स्पष्ट नहीं था
  • मैंने एक अंधे आदमी को देखा जिसके पास आँखें नहीं थीं।मैंने एक अंधे आदमी को देखा।अर्थ-दोष
  • उसकी मृत्यु हो गई और वह मर गया।उसकी मृत्यु हो गई।अर्थ-दोष
  • उसने अपने जीवन की सारी जिंदगी गाँव में बिताई।उसने सारी जिंदगी गाँव में बिताई।अर्थ-दोष
  • उसे भूख से खाना नहीं खाया गया।भूख न होने के कारण उससे खाना नहीं खाया गया।अर्थ-दोष
  • मैं तुम्हें वह पुस्तक दूँगा जो मैंने कल पढ़ी थी जो बहुत अच्छी थी।मैं तुम्हें वह पुस्तक दूँगा जो मैंने कल पढ़ी थी और जो बहुत अच्छी थी।वाक्य-गठन
  • आप कृपया अपना पत्र भेजने की कृपा करें।कृपया अपना पत्र भेजिए।वाक्य-गठन
  • वह चोरी करते हुए पकड़ा गया और उसे इनाम मिला।वह चोरी करते हुए पकड़ा गया और उसे दंड मिला।अर्थ-दोष
  • राम श्याम से मिलने गया, वह बहुत खुश था।राम श्याम से मिलने गया और राम बहुत खुश था।वाक्य-गठन
  • मैंने सड़क पर चलते हुए एक टूटी हुई घड़ी देखी।सड़क पर चलते हुए मैंने एक टूटी हुई घड़ी देखी।वाक्य-गठन
  • सभा में मुख्य अतिथि के रूप में मंत्रीजी के द्वारा उपस्थित थे।सभा में मुख्य अतिथि के रूप में मंत्रीजी उपस्थित थे।वाक्य-गठन
  • बिना पढ़े हुए परीक्षा में सफलता मिलना संभव नहीं है।बिना पढ़े परीक्षा में सफलता मिलना संभव नहीं है।वाक्य-गठन
  • मुझे यह कहते हुए दुख है कि आप सफल हुए।मुझे यह कहते हुए दुख है कि आप सफल नहीं हो सके।अर्थ-दोष
  • वह घर पहुँचा और खाना खाया और सो गया और सुबह उठा।घर पहुँचकर उसने खाना खाया, फिर सो गया और सुबह उठा।वाक्य-गठन
  • इस पुस्तक में लेखक ने अपने विचार प्रकट किए हैं जो बहुत उपयोगी है।इस पुस्तक में लेखक ने अपने विचार प्रकट किए हैं, जो बहुत उपयोगी हैं।वाक्य-गठन
  • मैंने उसको बहुत समझाया परंतु वह नहीं माना लेकिन चला गया।मैंने उसको बहुत समझाया, परंतु वह नहीं माना और चला गया।वाक्य-गठन
  • हिंदी भाषा हमारी राष्ट्रभाषा की भाषा है।हिंदी हमारी राजभाषा है।अर्थ-दोष‘भाषा … की भाषा’ पुनरुक्ति है; साथ ही संविधान में हिंदी ‘राजभाषा’ है, ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं
  • वह बीमार था इसलिए उसने दवा खाई और स्वस्थ हो गया इसलिए काम पर गया।वह बीमार था, इसलिए दवा खाकर स्वस्थ हुआ और काम पर गया।वाक्य-गठन
  • मेरे को ऐसा लगता है कि यह बात सही होगी शायद।मुझे लगता है कि शायद यह बात सही हो।वाक्य-गठन

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aयद्यपि वह गरीब है, तथापि ईमानदार है।
  2. Bयद्यपि वह गरीब है, लेकिन ईमानदार है।
  3. Cयद्यपि वह गरीब है, मगर ईमानदार है।
  4. Dक्योंकि वह गरीब है, इसलिए ईमानदार है।

व्याख्या

हिंदी में योजक शब्दों की जोड़ियाँ तय हैं — ‘यद्यपि’ का साथी ‘तथापि’ है। और चौथा विकल्प तो गरीबी को ईमानदारी का कारण बता रहा है, जो अर्थ की अशुद्धि है।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aउसका दाल नहीं गला।
  2. Bउसका दाल नहीं गली।
  3. Cउसकी दाल नहीं गली।
  4. Dउसकी दाल नहीं गला।

व्याख्या

मुहावरे के भीतर भी लिंग का नियम चलता है। ‘दाल’ स्त्रीलिंग है, इसलिए सर्वनाम ‘उसकी’ और क्रिया ‘गली’ दोनों स्त्रीलिंग होंगी।

प्रश्न 3

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमैंने उसे आड़े हाथ लिया।
  2. Bमैंने उसे आड़े हाथ से लिया।
  3. Cमैंने उसे आड़ा हाथ लिया।
  4. Dमैंने उसे आड़े हाथों लिया।

व्याख्या

मुहावरे के शब्द तय होते हैं और उन्हें बदला नहीं जा सकता। शुद्ध मुहावरा ‘आड़े हाथों लेना’ है, जिसमें ‘हाथों’ बहुवचन में ही रहेगा।

प्रश्न 4

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमुझे यहाँ पर आकर अच्छा लगा।
  2. Bमुझको यहाँ पर आकर अच्छा लगा।
  3. Cमुझे यहाँ आकर अच्छा लगा।
  4. Dमेरे को यहाँ आकर अच्छा लगा।

व्याख्या

‘यहाँ’ स्वयं स्थान बता रहा है, इसलिए उसके बाद ‘पर’ अनावश्यक शब्द है। और ‘मेरे को’ हिंदी का मानक रूप नहीं है — ‘मुझे’ या ‘मुझको’ ही चलेगा।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aउसने अपनी आँखों का पानी मर गया।
  2. Bउसका आँखों का पानी मर गया।
  3. Cउसकी आँखों का पानी मर गई।
  4. Dउसकी आँखों का पानी मर गया।

व्याख्या

‘आँखों का पानी मरना’ अकर्मक की तरह चलता है, इसलिए कर्ता ‘ने’ नहीं लेगा। क्रिया ‘पानी’ से मेल खाएगी, जो पुल्लिंग है।

प्रश्न 6

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aमुझे विश्वास है वह अवश्य आएगा।
  2. Bमुझे विश्वास हुआ कि वह अवश्य आता।
  3. Cमुझे विश्वास है कि वह अवश्य आएगा।
  4. Dमेरे को विश्वास है कि वह अवश्य आएगा।

व्याख्या

आश्रित उपवाक्य को मुख्य वाक्य से जोड़ने के लिए ‘कि’ ज़रूरी है; उसे गिरा देना शब्द-लोप की अशुद्धि है। ‘मेरे को’ मानक रूप नहीं है।

प्रश्न 7

निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —

  1. Aउसने मेरे कान भर दिया।
  2. Bउसने मेरा कान भर दिए।
  3. Cउसने मेरे कान भरी।
  4. Dउसने मेरे कान भर दिए।

व्याख्या

मुहावरे ‘कान भरना’ में ‘कान’ बहुवचन में चलता है, इसलिए क्रिया भी बहुवचन में आएगी। मुहावरे के भीतर वचन का मेल उतना ही ज़रूरी है जितना साधारण वाक्य में।