संज्ञा-सर्वनाम, विशेषण और पुनरुक्ति दोष
पुनरुक्ति दोष सबसे आसानी से पकड़ में आने वाली अशुद्धि है — एक ही बात दो बार कही गई हो। संज्ञा-सर्वनाम और विशेषण की अशुद्धियाँ उसी के साथ यहाँ हैं, कुल 70 वाक्य शुद्ध रूप सहित।
संज्ञा और सर्वनाम की अशुद्धि
इस वर्ग की सबसे बड़ी भूल निजवाचक सर्वनाम ‘अपना’ को भूल जाना है। नियम सीधा है — जब कर्ता और स्वामी एक ही व्यक्ति हो, तब ‘मेरा’, ‘तुम्हारा’, ‘उसका’ की जगह ‘अपना’ आएगा। इसलिए ‘मैंने मेरा काम कर लिया’ अशुद्ध है और ‘मैंने अपना काम कर लिया’ शुद्ध। यही नियम ‘तुमने अपनी पुस्तक कहाँ रखी’ और ‘आप अपना नाम बताइए’ पर भी लागू होता है। दूसरी भूल संकेतवाचक सर्वनामों के रूप में होती है — बोलचाल के ‘ये’, ‘वो’ लेखन में ‘यह’ और ‘वह’ हो जाते हैं, और तिरछे रूप में ‘इन बात’ नहीं, ‘इस बात’ चलता है, क्योंकि ‘बात’ एकवचन है। तीसरी भूल अनिश्चयवाचक सर्वनामों के साथ वचन की है; ‘कोई भी व्यक्ति’ के साथ एकवचन क्रिया आएगी, बहुवचन नहीं। और चौथी बात शिष्टाचार की है, जिसे हिंदी बहुत गंभीरता से लेती है — जब कर्ता में एक से अधिक पुरुष हों तो क्रम होता है मध्यम पुरुष, फिर अन्य पुरुष, और सबसे अंत में उत्तम पुरुष; इसलिए ‘तुम, वह और मैं चलेंगे’ शुद्ध है, ‘मैं, तुम और वह चलेंगे’ नहीं। दोष के समय यह क्रम उलट जाता है, यानी गलती अपने ऊपर लेते समय ‘मैं’ पहले आता है।
संज्ञा और सर्वनाम की अशुद्धियाँ
- मैंने मेरा काम कर लिया।मैंने अपना काम कर लिया।सर्वनामकर्ता और स्वामी एक हों तो ‘अपना’
- तुमने तुम्हारी पुस्तक कहाँ रखी?तुमने अपनी पुस्तक कहाँ रखी?सर्वनाम
- वह उसका घर गया।वह अपने घर गया।सर्वनाम
- हमने हमारा निर्णय सुना दिया।हमने अपना निर्णय सुना दिया।सर्वनाम
- आप आपका नाम बताइए।आप अपना नाम बताइए।सर्वनाम
- राम ने राम की पुस्तक ली।राम ने अपनी पुस्तक ली।सर्वनाम
- ये पुस्तक मेरी है।यह पुस्तक मेरी है।सर्वनामलेखन में ‘ये’ बहुवचन के लिए
- वो लड़का अच्छा है।वह लड़का अच्छा है।सर्वनाम
- इन बात का ध्यान रखो।इस बात का ध्यान रखो।सर्वनाम
- उन आदमी ने यही कहा।उस आदमी ने यही कहा।सर्वनाम
- कोई भी व्यक्ति आ सकते हैं।कोई भी व्यक्ति आ सकता है।सर्वनाम
- प्रत्येक बच्चों को इनाम मिला।प्रत्येक बच्चे को इनाम मिला।संज्ञा
- मैं, तुम और वह कल चलेंगे।तुम, वह और मैं कल चलेंगे।सर्वनामपुरुष-क्रम — मध्यम, अन्य, उत्तम
- मैं और तुम वहाँ जाएँगे।तुम और मैं वहाँ जाएँगे।सर्वनाम
- हम जा रहा हूँ।हम जा रहे हैं।सर्वनाम
- मैं आपको कहता हूँ कि सुनिए।मैं आपसे कहता हूँ कि सुनिए।सर्वनाम
- सब कोई यही कहते हैं।सब यही कहते हैं।सर्वनाम
- यह बात मेरे समझ में नहीं आई।यह बात मेरी समझ में नहीं आई।सर्वनाम
- उसने स्वयं अपने आप यह काम किया।उसने स्वयं यह काम किया।सर्वनाम
- जो व्यक्ति मेहनत करता है, वे सफल होते हैं।जो व्यक्ति मेहनत करता है, वह सफल होता है।सर्वनाम
- मेरे को यह पुस्तक चाहिए।मुझे यह पुस्तक चाहिए।सर्वनाम
- तेरा नाम क्या है, महोदय?आपका नाम क्या है, महोदय?सर्वनामआदर के संबोधन के साथ मध्यम पुरुष का आदरसूचक रूप
विशेषण संबंधी अशुद्धि
विशेषण की भूलें तीन शक्लों में आती हैं। पहली शक्ल है उत्तमावस्था पर फिर से ‘सबसे’ लगा देना। ‘सर्वश्रेष्ठ’ का अर्थ ही है ‘सबमें श्रेष्ठ’, इसलिए ‘सबसे सर्वश्रेष्ठ’ कहना वही बात दो बार कहना है; यही हाल ‘सबसे सर्वोत्तम’ और ‘सबसे योग्यतम’ का है। दूसरी शक्ल है भाववाचक संज्ञा को विशेषण की जगह बिठा देना। ‘मधुरता’, ‘कठिनाई’, ‘सुंदरता’ संज्ञाएँ हैं, विशेषण नहीं; इसलिए ‘उसका स्वभाव बहुत मधुरता है’ अशुद्ध और ‘उसका स्वभाव बहुत मधुर है’ शुद्ध होगा। तीसरी शक्ल है परिमाण के विशेषणों का ढेर लगा देना — ‘बहुत अत्यधिक’, ‘कई सारे’, ‘कुछ थोड़ा’, ‘बहुत बड़ा भारी’। इनमें दोनों शब्द एक ही काम कर रहे होते हैं, इसलिए एक को हटाना पड़ता है। इसके साथ एक बात स्त्रीलिंग विशेषणों की भी याद रखिए — संस्कृत से आए कुछ विशेषणों का स्त्रीलिंग रूप अलग होता है। ‘विद्वान’ का स्त्रीलिंग ‘विदुषी’ है, ‘श्रीमान’ का ‘श्रीमती’, ‘महान’ का ‘महती’। इसलिए ‘वह विद्वान महिला है’ नहीं, ‘वह विदुषी महिला है’ कहा जाएगा। और अंत में, गुणवाचक विशेषण संज्ञा के लिंग-वचन पर चलता है, इसलिए ‘बहुत सारा मेहनत’ नहीं, ‘बहुत मेहनत’ या ‘बहुत सारी मेहनत’ ही बनेगा।
विशेषण संबंधी अशुद्धियाँ
- वह सबसे सर्वश्रेष्ठ छात्र है।वह सर्वश्रेष्ठ छात्र है।विशेषण‘सर्वश्रेष्ठ’ में ‘सबसे’ पहले से है
- यह सबसे सर्वोत्तम उपाय है।यह सर्वोत्तम उपाय है।विशेषण
- सभी विद्यार्थियों में वह सबसे योग्यतम है।सभी विद्यार्थियों में वह सबसे योग्य है।विशेषण
- मुझे बहुत अत्यधिक खुशी हुई।मुझे अत्यधिक खुशी हुई।विशेषण
- कई सारे लोग वहाँ आए।कई लोग वहाँ आए।विशेषण
- मुझे कुछ थोड़ा पानी चाहिए।मुझे थोड़ा पानी चाहिए।विशेषण
- उसका बहुत बड़ा भारी नुकसान हुआ।उसका बहुत बड़ा नुकसान हुआ।विशेषण
- यह बहुत भारी वजनदार पत्थर है।यह बहुत भारी पत्थर है।विशेषण
- उसका स्वभाव बहुत मधुरता है।उसका स्वभाव बहुत मधुर है।विशेषणभाववाचक संज्ञा विशेषण की जगह नहीं ले सकती
- यह कार्य बहुत कठिनाई है।यह कार्य बहुत कठिन है।विशेषण
- इस बगीचे की सुंदरता दृश्य मनोहर है।इस बगीचे का दृश्य मनोहर है।विशेषण
- वह विद्वान महिला है।वह विदुषी महिला है।विशेषण‘विद्वान’ का स्त्रीलिंग ‘विदुषी’
- उन्होंने देश की महान सेवा की।उन्होंने देश की महती सेवा की।विशेषणभाववाचक स्त्रीलिंग संज्ञा के साथ ‘महान’ का रूप ‘महती’ होता है
- उसने बहुत सारा मेहनत किया।उसने बहुत मेहनत की।विशेषण
- वह दो-तीन दिनों तक आया नहीं।वह दो-तीन दिनों तक नहीं आया।पदक्रम‘दिनों तक’ शुद्ध है; भूल केवल निषेध-शब्द ‘नहीं’ के स्थान की है
- यह पुस्तक अधिक उपयोगी से है।यह पुस्तक अधिक उपयोगी है।विशेषण
- राम श्याम से ज़्यादा अधिक बुद्धिमान है।राम श्याम से अधिक बुद्धिमान है।विशेषण
- वह प्रायः अकसर देर से आता है।वह प्रायः देर से आता है।विशेषण
- मैंने उसे संपूर्ण पूरी बात बता दी।मैंने उसे पूरी बात बता दी।विशेषण
- यह अत्यंत सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रश्न है।यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रश्न है।विशेषण
- उसकी आवाज में बड़ी मिठास मीठी है।उसकी आवाज में बड़ी मिठास है।विशेषण
- वह एक ईमानदारी व्यक्ति है।वह एक ईमानदार व्यक्ति है।विशेषण
पुनरुक्ति दोष — एक ही बात दो बार
पुनरुक्ति दोष उस भूल को कहते हैं जहाँ एक ही अर्थ दो शब्दों से दोहरा दिया जाता है। ‘केवल मात्र एक सुझाव’ में ‘केवल’ और ‘मात्र’ दोनों का अर्थ एक ही है, इसलिए दोनों साथ नहीं चलेंगे; कोई एक रखना होगा। यह दोष प्रायः इसलिए होता है कि हमें शब्द का पूरा अर्थ मालूम नहीं होता। ‘आत्मकथा’ का अर्थ ही है अपनी कथा, इसलिए ‘अपनी आत्मकथा’ में ‘अपनी’ फालतू है। ‘कृपया’ में कृपा पहले से मौजूद है, इसलिए ‘कृपया कृपा करके’ भारी पड़ जाता है। ‘सर्वप्रथम’ में ‘सर्व’ है, इसलिए ‘सबसे सर्वप्रथम’ गलत है। ‘वापस’ का अर्थ लौटना है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से ‘वापस लौट आया’ में दोहराव माना जाता है। ‘अनेक’ स्वयं बहुवचन है, इसलिए ‘अनेकों’ और फिर ‘बार-बार’ — दोनों एक साथ रखना दोहरी भूल है। इस वर्ग को पकड़ने का एक आसान तरीक़ा है — वाक्य में से एक शब्द हटाकर पढ़िए; यदि अर्थ में जरा भी कमी न आए तो वही शब्द अनावश्यक था। ध्यान रहे, ‘धीरे-धीरे’, ‘बार-बार’, ‘घर-घर’ जैसे शब्द-युग्म पुनरुक्ति दोष नहीं हैं; वे हिंदी की अपनी शैली हैं और अर्थ में तीव्रता जोड़ते हैं।
पुनरुक्ति दोष से बनी अशुद्धियाँ
- यह केवल मात्र एक सुझाव है।यह केवल एक सुझाव है।‘केवल’ और ‘मात्र’ का अर्थ एक ही
- उसने अपनी आत्मकथा लिखी।उसने आत्मकथा लिखी।‘आत्मकथा’ में ‘अपनी’ पहले से है
- कृपया आप कृपा करके बताइए।कृपया बताइए।
- वह वापस लौट आया।वह लौट आया।
- सर्वसम्मति से सभी ने प्रस्ताव पास किया।सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ।
- प्रत्येक हर छात्र को पुस्तक मिली।प्रत्येक छात्र को पुस्तक मिली।
- दोनों आपस में एक-दूसरे से लड़ पड़े।दोनों एक-दूसरे से लड़ पड़े।
- वह निरंतर लगातार पढ़ता रहा।वह निरंतर पढ़ता रहा।
- मुझे अत्यंत बहुत दुख हुआ।मुझे अत्यंत दुख हुआ।
- वह पुनः फिर से आया।वह पुनः आया।
- सबसे सर्वप्रथम उन्होंने भाषण दिया।सर्वप्रथम उन्होंने भाषण दिया।
- आज वर्तमान में स्थिति बदल चुकी है।वर्तमान में स्थिति बदल चुकी है।
- मृतक की लाश का परीक्षण हुआ।शव का परीक्षण हुआ।
- उसने स्वयं अपने आप निर्णय लिया।उसने स्वयं निर्णय लिया।
- यह एकमात्र अकेला रास्ता है।यह एकमात्र रास्ता है।
- प्रातःकाल के समय सुबह वह टहलता है।प्रातःकाल वह टहलता है।
- अनेकों बार मैंने उसे बार-बार समझाया।मैंने उसे अनेक बार समझाया।
- वह अपनी स्वयं की गाड़ी से आया।वह अपनी गाड़ी से आया।
- पीछे विगत वर्ष वर्षा कम हुई।विगत वर्ष वर्षा कम हुई।
- जन्म जयंती पर कार्यक्रम हुआ।जयंती पर कार्यक्रम हुआ।‘जयंती’ में जन्म का अर्थ निहित
- यह मेरी निजी व्यक्तिगत राय है।यह मेरी व्यक्तिगत राय है।
- सभा में उपस्थित सब लोग मौजूद थे।सभा में सब लोग उपस्थित थे।
- आगे भविष्य में ऐसा नहीं होगा।भविष्य में ऐसा नहीं होगा।
- यह घटना लगभग सौ वर्ष पूर्व पहले घटी।यह घटना लगभग सौ वर्ष पूर्व घटी।
- चारों तरफ़ चारों ओर पानी भरा था।चारों ओर पानी भरा था।
- मैंने आपकी बात सुन ली, अतः इसलिए अब चलता हूँ।मैंने आपकी बात सुन ली, अतः अब चलता हूँ।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aवह सबसे सर्वश्रेष्ठ छात्र है।
- Bवह सबसे श्रेष्ठतम छात्र है।
- Cवह सर्वश्रेष्ठतम छात्र है।
- Dवह सर्वश्रेष्ठ छात्र है।
व्याख्या
‘सर्वश्रेष्ठ’ का अर्थ ही है सबमें श्रेष्ठ। उत्तमावस्था पर दोबारा ‘सबसे’ या ‘तम’ जोड़ना पुनरुक्ति दोष है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aमैंने मेरा काम कर लिया।
- Bमैंने अपना काम कर लिया।
- Cमैं अपना काम कर लिया।
- Dमैंने अपने काम कर लिया।
व्याख्या
जब कर्ता और स्वामी एक ही हों, तब निजवाचक सर्वनाम ‘अपना’ आता है, ‘मेरा’ नहीं। तीसरे विकल्प में सकर्मक भूतकाल का ‘ने’ भी छूट गया है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aवह वापस लौट आया।
- Bवह लौट आया।
- Cवह वापस लौटकर वापस आया।
- Dवह पुनः फिर से लौट आया।
व्याख्या
‘वापस’ और ‘लौटना’ दोनों एक ही बात कहते हैं, इसलिए दोनों साथ रखने पर पुनरुक्ति दोष बनता है। यही बात ‘पुनः फिर से’ पर भी लागू होती है।
प्रश्न 4
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aमैं, तुम और वह कल चलेंगे।
- Bमैं और तुम कल चलेंगे।
- Cवह, मैं और तुम कल चलेंगे।
- Dतुम, वह और मैं कल चलेंगे।
व्याख्या
हिंदी में एक से अधिक पुरुष कर्ता होने पर क्रम होता है — पहले मध्यम पुरुष, फिर अन्य पुरुष, और सबसे अंत में उत्तम पुरुष। ‘मैं’ को आगे रखना शिष्टाचार की दृष्टि से अशुद्ध माना जाता है।
प्रश्न 5
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aवह विदुषी महिला है।
- Bवह विद्वान महिला है।
- Cवह विद्वानी महिला है।
- Dवह विदुष महिला है।
व्याख्या
संस्कृत से आए कुछ विशेषणों का स्त्रीलिंग रूप अलग बनता है। ‘विद्वान’ का स्त्रीलिंग ‘विदुषी’ है, ठीक वैसे ही जैसे ‘महान’ का ‘महती’।