लिंग, वचन और कारक की अशुद्धियाँ
वाक्य की अशुद्धियों की सबसे बड़ी जड़ यही तीन हैं — संज्ञा का लिंग, वचन का मेल, और कारक-चिह्न का ठिकाना। कुल 80 वाक्य, बाईं ओर अशुद्ध और दाईं ओर शुद्ध रूप।
लिंग संबंधी अशुद्धि — संज्ञा का लिंग और उसका असर
हिंदी की हर संज्ञा का एक लिंग होता है, और उस संज्ञा से जुड़ा विशेषण, सर्वनाम और क्रिया — तीनों उसी लिंग को ओढ़ लेते हैं। गड़बड़ तब होती है जब संज्ञा का लिंग ही हमें ठीक से मालूम नहीं होता। ‘दही’, ‘पत्र’, ‘समाचार’, ‘वेतन’, ‘चश्मा’, ‘सुझाव’ — ये सब पुल्लिंग हैं, इसलिए ‘मीठा दही’, ‘अच्छा समाचार’, ‘अपना चश्मा’ चलेगा। दूसरी ओर ‘आत्मा’, ‘नाक’, ‘भूख’, ‘छत’, ‘धूल’, ‘फसल’, ‘जान’, ‘भीड़’, ‘रौनक’ स्त्रीलिंग हैं, इसलिए ‘मेरी आत्मा’, ‘लंबी नाक’, ‘भूख लगी’ होगा। एक बात यहाँ ध्यान रखने की है — ‘आत्मा’ आकारांत होते हुए भी स्त्रीलिंग है और ‘चश्मा’ आकारांत होते हुए पुल्लिंग; इसलिए केवल अंतिम मात्रा देखकर लिंग तय करना जोखिम भरा है। जहाँ संदेह हो, वहाँ एक घरेलू जाँच काम आती है — शब्द के आगे ‘अच्छा’ और ‘अच्छी’ दोनों रखकर बोलिए; जो कान को सहज लगे वही प्रायः सही होता है। और सबसे बड़ी बात, लिंग की भूल अकेली नहीं आती; वह विशेषण और क्रिया दोनों को अपने साथ गलत कर देती है, इसीलिए एक ही वाक्य में दो-दो गलतियाँ दिखती हैं।
लिंग संबंधी अशुद्धियाँ — बाईं ओर अशुद्ध वाक्य, दाईं ओर शुद्ध वाक्य
- मुझे तुम्हारी पत्र मिला।मुझे तुम्हारा पत्र मिला।‘पत्र’ पुल्लिंग है, इसलिए सर्वनाम भी पुल्लिंग होगा
- यह एक अच्छी समाचार है।यह एक अच्छा समाचार है।‘समाचार’ पुल्लिंग
- उसकी दही खराब हो गई।उसका दही खराब हो गया।‘दही’ पुल्लिंग, इसलिए क्रिया भी बदलेगी
- मेरा आत्मा दुखी है।मेरी आत्मा दुखी है।आकारांत होने पर भी ‘आत्मा’ स्त्रीलिंग
- मुझे भूख लगा है।मुझे भूख लगी है।
- उसका नाक बहुत लंबा है।उसकी नाक बहुत लंबी है।‘नाक’ स्त्रीलिंग
- कमरे में ठंडी हवा आ रहा है।कमरे में ठंडी हवा आ रही है।
- वहाँ एक बड़ा नदी बहती है।वहाँ एक बड़ी नदी बहती है।विशेषण संज्ञा के लिंग पर चलता है
- यह मेरी घर है।यह मेरा घर है।
- आपकी पुस्तक बहुत अच्छा है।आपकी पुस्तक बहुत अच्छी है।
- दही बहुत मीठी है।दही बहुत मीठा है।
- मैंने अपनी चश्मा खो दिया।मैंने अपना चश्मा खो दिया।‘चश्मा’ पुल्लिंग
- मेरी दुख कोई नहीं समझता।मेरा दुख कोई नहीं समझता।
- यह कविता बहुत सुंदर लिखा गया है।यह कविता बहुत सुंदर लिखी गई है।
- सभा में बहुत भीड़ था।सभा में बहुत भीड़ थी।‘भीड़’ स्त्रीलिंग
- उसकी वेतन बढ़ गया।उसका वेतन बढ़ गया।
- मुझे तुम्हारी सलाह अच्छा लगा।मुझे तुम्हारी सलाह अच्छी लगी।
- गाय का दूध बहुत मीठी होती है।गाय का दूध बहुत मीठा होता है।
- बाज़ार में आज बहुत रौनक था।बाज़ार में आज बहुत रौनक थी।‘रौनक’ स्त्रीलिंग
- उसने अपना टोपी पहनी।उसने अपनी टोपी पहनी।
- मेरा जान बच गई।मेरी जान बच गई।
- इस साल फसल अच्छा हुआ।इस साल फसल अच्छी हुई।
- उसकी शरीर कमजोर है।उसका शरीर कमजोर है।
- यह मेरा कॉपी है।यह मेरी कॉपी है।
- उसने मुझे एक अच्छी सुझाव दिया।उसने मुझे एक अच्छा सुझाव दिया।
- आपका पत्र मिली।आपका पत्र मिला।
- मेरी मकान बहुत दूर है।मेरा मकान बहुत दूर है।
- इस कमरे की छत ऊँचा है।इस कमरे की छत ऊँची है।
- उसकी आँख में धूल पड़ गया।उसकी आँख में धूल पड़ गई।‘धूल’ स्त्रीलिंग
वचन संबंधी अशुद्धि — एकवचन और बहुवचन का मेल
वचन की भूल दो तरह से होती है। पहली तब, जब संज्ञा को बहुवचन बनाना भूल जाते हैं — ‘मैंने दो पुस्तक खरीदी’ में ‘दो’ तो बहुवचन बता रहा है, पर ‘पुस्तक’ एकवचन में ही पड़ा रह गया; शुद्ध रूप ‘मैंने दो पुस्तकें खरीदीं’ होगा। दूसरी तब, जब संज्ञा तो बहुवचन बन गई पर क्रिया एकवचन में छूट गई — ‘उसके बाल बहुत लंबा है’। यहाँ एक बात खास तौर पर याद रखने लायक है: हिंदी के कुछ शब्द हमेशा बहुवचन में ही चलते हैं, चाहे गिनती में वे एक ही क्यों न हों — ‘प्राण’, ‘दर्शन’, ‘आँसू’, ‘हस्ताक्षर’, ‘होश’, ‘समाचार’ के साथ प्रायः बहुवचन क्रिया आती है। इसीलिए ‘आपके दर्शन कब होंगे’ शुद्ध है और ‘आपका दर्शन कब होगा’ नहीं। दूसरी ओर ‘प्रत्येक’, ‘हर’ और ‘कोई भी’ के साथ हमेशा एकवचन आता है, इसलिए ‘प्रत्येक विद्यार्थियों को’ अशुद्ध और ‘प्रत्येक विद्यार्थी को’ शुद्ध है। और एक शब्द से सावधान रहिए — ‘अनेकों’। ‘अनेक’ स्वयं बहुवचन है, उस पर दोबारा बहुवचन का चिह्न लगाना अशुद्धि है, जबकि ‘सैकड़ों’ और ‘हजारों’ पर यह चिह्न ठीक बैठता है क्योंकि वे मूलतः संख्यावाची हैं।
वचन संबंधी अशुद्धियाँ
- मेरा प्राण निकल गया।मेरे प्राण निकल गए।‘प्राण’ सदा बहुवचन में
- उसके बाल बहुत लंबा है।उसके बाल बहुत लंबे हैं।
- आपका दर्शन कब होगा?आपके दर्शन कब होंगे?‘दर्शन’ सदा बहुवचन में
- मेरा हस्ताक्षर ले लीजिए।मेरे हस्ताक्षर ले लीजिए।
- वहाँ बहुत सारे लोग था।वहाँ बहुत सारे लोग थे।
- मैंने दो पुस्तक खरीदी।मैंने दो पुस्तकें खरीदीं।
- उसने चार रोटी खाई।उसने चार रोटियाँ खाईं।
- कई विद्यार्थी अनुपस्थित था।कई विद्यार्थी अनुपस्थित थे।
- उसकी आँसू निकल आए।उसके आँसू निकल आए।
- यहाँ अनेक प्रकार के फूल खिलता है।यहाँ अनेक प्रकार के फूल खिलते हैं।
- मेरे पास दो कलम है।मेरे पास दो कलमें हैं।
- दस रुपया दे दो।दस रुपये दे दो।
- उसके दाँत साफ़ है।उसके दाँत साफ़ हैं।
- इस पुस्तक के अनेक संस्करण छपा।इस पुस्तक के अनेक संस्करण छपे।
- प्रत्येक विद्यार्थियों को पुस्तक मिलेगी।प्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तक मिलेगी।‘प्रत्येक’ के साथ एकवचन
- हर लोग यही कहते हैं।सब लोग यही कहते हैं।‘हर’ के साथ एकवचन ही चलता है
- सारे लड़का मैदान में हैं।सारे लड़के मैदान में हैं।
- मेरी दोनों आँख दुख रही है।मेरी दोनों आँखें दुख रही हैं।
- आप कहाँ जा रहा है?आप कहाँ जा रहे हैं?आदरार्थ बहुवचन
- गुरुजी आज नहीं आया।गुरुजी आज नहीं आए।आदरार्थ बहुवचन
- अनेकों लोग वहाँ गए।अनेक लोग वहाँ गए।‘अनेक’ स्वयं बहुवचन है
- उसके होश उड़ गया।उसके होश उड़ गए।
- इस विषय पर अनेकों पुस्तकें हैं।इस विषय पर अनेक पुस्तकें हैं।
- मेरे दोनों हाथ दुख रहा है।मेरे दोनों हाथ दुख रहे हैं।
कारक और विभक्ति की अशुद्धि — ने, को, से, का का सही ठिकाना
कारक की भूलें परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछी जाती हैं, और इनमें भी सबसे बड़ा जाल ‘ने’ है। नियम यह है कि ‘ने’ केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल में कर्ता के साथ आता है — ‘राम ने रोटी खाई’। वर्तमान और भविष्य में ‘ने’ नहीं आता, इसलिए ‘राम ने घर जाता है’ अशुद्ध है। और अकर्मक क्रियाओं के साथ तो यह किसी भी काल में नहीं आता, इसलिए ‘मैंने वहाँ गया’, ‘बालक ने रोया’, ‘उसने सोया’ — तीनों गलत हैं। दूसरी बड़ी भूल ‘को’ की है। जहाँ क्रिया स्वयं गति बता रही हो, वहाँ ‘को’ जोड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती; ‘वह विद्यालय जाता है’ शुद्ध है, ‘वह विद्यालय को जाता है’ बेवजह भारी। तीसरी भूल ‘को’ और ‘से’ के बीच होती है — कहने की क्रिया में सुनने वाला ‘से’ लेता है, ‘को’ नहीं; इसलिए ‘मैंने उससे कहा’ शुद्ध और ‘मैंने उसे कहा’ अशुद्ध है। चौथी भूल संबंधकारक में होती है — ‘का’, ‘के’, ‘की’ आगे आने वाले शब्द के लिंग-वचन पर चलते हैं, इसलिए ‘उसका पिताजी का नाम’ नहीं, ‘उसके पिताजी का नाम’ होगा। और पाँचवीं, करण कारक में ‘के द्वारा’ को हर जगह घसीट लाना — साधारण औजार के लिए केवल ‘से’ काफी है, ‘चाकू से फल काटा’, न कि ‘चाकू के द्वारा’।
कारक और विभक्ति की अशुद्धियाँ
- राम ने घर जाता है।राम घर जाता है।वर्तमान काल में ‘ने’ नहीं आता
- मैंने वहाँ गया।मैं वहाँ गया।‘जाना’ अकर्मक है, ‘ने’ नहीं लेगा
- सीता ने पत्र लिखती है।सीता पत्र लिखती है।
- बालक ने रोया।बालक रोया।‘रोना’ अकर्मक
- उसने सोया।वह सोया।
- वह विद्यालय को जाता है।वह विद्यालय जाता है।
- पिताजी बाज़ार को गए हैं।पिताजी बाज़ार गए हैं।
- मैं गाँव के लिए जा रहा हूँ।मैं गाँव जा रहा हूँ।
- मैंने उसे कहा।मैंने उससे कहा।कहने की क्रिया में श्रोता ‘से’ लेता है
- राम ने श्याम को कहा।राम ने श्याम से कहा।
- यह पुस्तक मेरे को दे दो।यह पुस्तक मुझे दे दो।
- वह मेरे को नहीं जानता।वह मुझे नहीं जानता।
- उसका पिताजी का नाम मोहन है।उसके पिताजी का नाम मोहन है।
- उसका सिर में दर्द है।उसके सिर में दर्द है।
- उसने चाकू के द्वारा फल काटा।उसने चाकू से फल काटा।
- वह गाड़ी पर बैठकर आया।वह गाड़ी में बैठकर आया।
- मैं विद्यालय पर जा रहा हूँ।मैं विद्यालय जा रहा हूँ।
- वह कुर्सी पर से उठा।वह कुर्सी से उठा।
- वह अपने से बड़ों को आदर करता है।वह अपने से बड़ों का आदर करता है।
- इस विषय पर मुझे कोई ज्ञान नहीं है।इस विषय का मुझे कोई ज्ञान नहीं है।
- मैं यह काम कर लिया।मैंने यह काम कर लिया।सकर्मक भूतकाल में ‘ने’ अनिवार्य
- बच्चा दूध पी लिया।बच्चे ने दूध पी लिया।
- वह मुझे एक पुस्तक दिया।उसने मुझे एक पुस्तक दी।
- वह मुझे से रूठा है।वह मुझसे रूठा है।
- उसने रोटी को खाया।उसने रोटी खाई।निर्जीव कर्म के साथ ‘को’ अनावश्यक; और ‘को’ हटते ही क्रिया कर्म ‘रोटी’ से मेल खाकर ‘खाई’ हो जाती है
- मुझे इस काम के लिए कोई आपत्ति नहीं।मुझे इस काम से कोई आपत्ति नहीं।
- राम को अपने भाई से मिलने गया।राम अपने भाई से मिलने गया।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aमैंने सोया।
- Bमैंने रात भर सोया।
- Cमैं रात भर सोया।
- Dमुझने रात भर सोया।
व्याख्या
‘सोना’ अकर्मक क्रिया है और अकर्मक क्रिया का कर्ता किसी भी काल में ‘ने’ नहीं लेता। यही वह अति-सुधार है जो भूतकाल का नियम हर जगह लगा देने से पैदा होता है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aप्रत्येक विद्यार्थियों को पुस्तक मिली।
- Bप्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तक मिली।
- Cहर विद्यार्थियों को पुस्तक मिली।
- Dप्रत्येक विद्यार्थी को पुस्तक मिले।
व्याख्या
‘प्रत्येक’ और ‘हर’ के साथ संज्ञा सदा एकवचन में रहती है, और क्रिया भी कर्म ‘पुस्तक’ के अनुसार स्त्रीलिंग एकवचन में आएगी।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में शुद्ध वाक्य है —
- Aअनेकों लोग सभा में आए।
- Bअनेकों लोग सभा में आया।
- Cअनेक लोग सभा में आए।
- Dअनेक लोग सभा में आया।
व्याख्या
‘अनेक’ स्वयं बहुवचन है, उस पर दोबारा बहुवचन का चिह्न लगाना अशुद्धि है। ध्यान रहे, ‘सैकड़ों’ और ‘हजारों’ पर यह चिह्न शुद्ध है क्योंकि वे संख्यावाची हैं।