विलोम शब्द
भाषा सिर्फ़ यह नहीं बताती कि कोई चीज क्या है; वह यह भी बताती है कि वह चीज क्या नहीं है। जहाँ दिन है वहाँ रात की कल्पना अपने आप बन जाती है, और जहाँ लाभ है वहाँ हानि का अर्थ भी छिपा रहता है। ऐसे ही जोड़े बनाने वाले शब्दों को हिंदी व्याकरण में विलोम शब्द कहा जाता है। राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं में यह अध्याय हर बार आता है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें अंक पक्के मिलते हैं — बशर्ते आपने शब्द रटे न हों, बल्कि उनका अर्थ और बनावट समझी हो। यह पृष्ठ इसी सोच से बनाया गया है: पहले नियम, फिर वर्णक्रम से सजी लंबी सूची, फिर वे जाल जहाँ अच्छे-अच्छे विद्यार्थी फिसल जाते हैं, और अंत में अभ्यास।
विलोम शब्द किसे कहते हैं
जिस शब्द का अर्थ किसी दूसरे शब्द के अर्थ से ठीक उलटा हो, वह उसका विलोम शब्द कहलाता है। ‘विलोम’ का अर्थ ही है उलटा या प्रतिकूल दिशा वाला। इन्हें विपरीतार्थक शब्द भी कहा जाता है, क्योंकि इनका अर्थ एक-दूसरे के विपरीत होता है। ‘सुख’ का विलोम ‘दुख’ है, ‘उदय’ का ‘अस्त’ है, और ‘आय’ का ‘व्यय’ है। ध्यान दीजिए कि विलोम बनने के लिए दोनों शब्दों का एक ही कोटि का होना ज़रूरी है — यानी जिस तरह की बात एक शब्द कह रहा है, उसी तरह की उलटी बात दूसरा कहे।
इसका मतलब यह हुआ कि संज्ञा का विलोम संज्ञा होगा और विशेषण का विलोम विशेषण। ‘मित्रता’ का विलोम ‘शत्रुता’ है, ‘मित्र’ नहीं; और ‘मित्र’ का विलोम ‘शत्रु’ है, ‘शत्रुता’ नहीं। परीक्षा में यही बात विकल्पों के बीच छिपा दी जाती है। चार विकल्पों में से दो अक्सर सही अर्थ की दिशा में होते हैं, पर उनमें से एक ही सही रूप में होता है। इसलिए उत्तर चुनने से पहले एक क्षण रुककर देखिए कि प्रश्न वाला शब्द भाववाचक है, गुणवाचक है या क्रिया से बना है।
एक बात और। विलोम का अर्थ ‘निषेध’ नहीं है। ‘आना’ का विलोम ‘जाना’ है, ‘न आना’ नहीं। ‘न’ लगाकर किसी बात को मना कर देना अलग काम है, और उसके ठीक उलटे भाव वाला दूसरा शब्द ढूँढ़ना अलग। हिंदी में बहुत-से विलोम उपसर्ग से बनते हैं, इसलिए यह भ्रम स्वाभाविक है; पर जहाँ भाषा ने अपना स्वतंत्र शब्द दे रखा हो, वहाँ उपसर्ग वाला जोड़-तोड़ नहीं चलेगा।
एक छोटा-सा सूत्र
विलोम पूछा जाए तो मन में तीन बातें दोहराइए — अर्थ उलटा हो, शब्द-भेद वही रहे, और शब्द भाषा में सचमुच चलता हो। ‘सुबोध’ का उलटा भाव ‘जो आसानी से समझ न आए’ है और भाषा ने उसके लिए ‘दुर्बोध’ शब्द दे रखा है, इसलिए वही उत्तर है — ‘असुबोध’ जैसा बनाया हुआ शब्द नहीं।
विलोम — तीन पेजों में
परीक्षा में यह अध्याय कैसे पूछा जाता है
राजस्थान की परीक्षाओं में विलोम चार रूपों में आता है। सबसे सीधा रूप है — ‘अमुक शब्द का विलोम है’, जिसमें चार विकल्प दिए जाते हैं। दूसरा रूप नकारात्मक होता है, जिसमें पूछा जाता है कि दिए गए जोड़ों में से कौन-सा जोड़ा सही नहीं है; यह रूप औसत विद्यार्थी को सबसे अधिक भारी पड़ता है, क्योंकि इसमें चारों विकल्प जाँचने पड़ते हैं। तीसरा रूप जोड़ा-मिलान का है, जिसमें एक ओर शब्द और दूसरी ओर विलोम रखकर मिलाना होता है। चौथा रूप वाक्य में रिक्त स्थान का है, जहाँ वाक्य का भाव देखकर उलटा शब्द भरना पड़ता है।
तैयारी का सबसे काम का तरीक़ा यह है कि आप शब्दों को अकेले याद करने के बजाय जोड़ों में याद करें, और हर जोड़े को एक ही वाक्य में डालकर बोलें — जैसे ‘उसकी आय बढ़ी पर व्यय उससे भी तेज बढ़ा।’ इस तरह जोड़ा स्मृति में चित्र की तरह बैठ जाता है। दूसरा तरीक़ा यह है कि हर दिन उपसर्ग के अनुसार एक समूह लीजिए — आज केवल ‘निर्’ वाले शब्द, कल केवल ‘दुर्’ वाले। तीसरा तरीक़ा पुराने प्रश्नपत्रों से अपनी गलतियों की एक छोटी कॉपी बनाना है; परीक्षा से एक सप्ताह पहले वही कॉपी सबसे अधिक काम आती है।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RSSB पटवारी | सामान्य हिंदी · 22 प्रश्न / 44 अंक वाले संयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड का भाग |
| RSSB CET स्नातक स्तर | प्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर | प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB VDO | भाषा खंड · 50 प्रश्न / 50 अंक वाले भाषा खंड का भाग |
| RSSB LDC | प्रश्न-पत्र II — सामान्य हिंदी · 75 प्रश्न |
| RPSC पुलिस उप-निरीक्षक | प्रश्न-पत्र I — सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक |
| RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I · हिंदी विषय प्रश्न-पत्र का भाग |
| RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम · हिंदी विषय प्रश्न-पत्र का भाग |
| REET | हिंदी भाषा I / II · 30 अंक प्रत्येक |
| राजस्थान उच्च न्यायालय LDC | हिंदी खंड · 50 प्रश्न / 100 अंक |
अंतिम दोहराव के लिए तालिका
नीचे की तालिका परीक्षा से ठीक पहले देखने के लिए है। इसमें वे जोड़े रखे गए हैं जो राजस्थान की परीक्षाओं में सबसे अधिक बार आते हैं। इसे एक बार में पढ़ जाइए, फिर दाईं ओर हाथ रखकर स्वयं से पूछिए।
सबसे अधिक पूछे जाने वाले विलोम — त्वरित दोहराव
| शब्द | विलोम | शब्द | विलोम |
|---|---|---|---|
| उत्कर्ष | अपकर्ष | आविर्भाव | तिरोभाव |
| कृतज्ञ | कृतघ्न | ज्येष्ठ | कनिष्ठ |
| सुगम | दुर्गम | सापेक्ष | निरपेक्ष |
| स्थावर | जंगम | मूक | वाचाल |
| अनुराग | विराग | संयोग | वियोग |
| आस्तिक | नास्तिक | साक्षर | निरक्षर |
| सृष्टि | प्रलय | अनुलोम | विलोम |
| व्यष्टि | समष्टि | सुकाल | अकाल |
| आदान | प्रदान | अतिवृष्टि | अनावृष्टि |
| ह्रस्व | दीर्घ | सूक्ष्म | स्थूल |
| अल्पज्ञ | बहुज्ञ | उन्मुख | विमुख |
| प्रवृत्ति | निवृत्ति | सगुण | निर्गुण |
रोज़ का दस मिनट का अभ्यास
रोज़ दस जोड़े लीजिए और हर जोड़े से एक छोटा वाक्य बनाइए जिसमें दोनों शब्द साथ आएँ। महीने भर में तीन सौ जोड़े आपकी जबान पर चढ़ जाएँगे, और परीक्षा में इस अध्याय के प्रश्न आपको सोचने का समय नहीं, बल्कि समय बचाने का मौका देंगे।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
‘उत्कर्ष’ का विलोम है —
- Aअपकर्ष
- Bनिकर्ष
- Cप्रकर्ष
- Dविकर्ष
व्याख्या
‘उत्’ ऊपर की ओर ले जाता है और ‘अप’ नीचे की ओर, इसलिए उत्कर्ष का उलटा अपकर्ष है। ‘निकर्ष’ का अर्थ कसौटी है और ‘प्रकर्ष’ तो उत्कर्ष जैसा ही श्रेष्ठता-भाव रखता है — दोनों विलोम नहीं हैं।
प्रश्न 2
‘आविर्भाव’ का विलोम है —
- Aअभाव
- Bतिरोभाव
- Cप्रभाव
- Dदुर्भाव
व्याख्या
आविर्भाव यानी प्रकट होना और तिरोभाव यानी ओझल हो जाना। ‘अभाव’ का अर्थ न होना है, जो प्रकट होने का उलटा नहीं बल्कि अस्तित्व का निषेध है। यह भेद ध्यान में रखिए, क्योंकि यही विकल्प सबसे अधिक फँसाता है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा विलोम नहीं है?
- Aज्येष्ठ — कनिष्ठ
- Bस्थावर — जंगम
- Cमूक — बहरा
- Dकृतज्ञ — कृतघ्न
व्याख्या
मूक का संबंध बोलने से है, इसलिए उसका उलटा वह होगा जो बहुत बोले — वाचाल। बहरापन सुनने की क्षमता से जुड़ा है, इसलिए वह मूक का विलोम नहीं बनता। विलोम में हमेशा एक ही पैमाना रखना पड़ता है।
प्रश्न 4
‘साक्षर’ का विलोम है —
- Aअसाक्षर
- Bअनक्षर
- Cविक्षर
- Dनिरक्षर
व्याख्या
‘अक्षर से रहित’ के भाव में यहाँ ‘निर्’ उपसर्ग लगता है, इसलिए निरक्षर बनता है। ‘असाक्षर’ जोड़कर बनाया जा सकता है, पर भाषा में वह रूप नहीं चलता। बनाया हुआ रूप और प्रचलित रूप — यही अंतर परखा जाता है।
प्रश्न 5
‘सापेक्ष’ का विलोम है —
- Aनिरपेक्ष
- Bप्रत्यक्ष
- Cपरोक्ष
- Dअपेक्षित
व्याख्या
सापेक्ष यानी जो किसी अपेक्षा पर टिका हो; उसका उलटा वह है जिसे किसी अपेक्षा की आवश्यकता न हो — निरपेक्ष। ‘प्रत्यक्ष’ का जोड़ा अलग है, उसका विलोम ‘परोक्ष’ होता है।
प्रश्न 6
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा सही नहीं है?
- Aसुगम — दुर्गम
- Bसुबोध — असुबोध
- Cसुपात्र — कुपात्र
- Dसुकाल — अकाल
व्याख्या
जिन शब्दों के आगे ‘सु’ लगा हो, उनका विलोम प्रायः ‘दुर्’ या ‘कु’ से बनता है, ‘अ’ से नहीं। इसलिए सुबोध का विलोम दुर्बोध है। ‘असुबोध’ नियम की नकल करके बनाया गया रूप है, प्रचलित शब्द नहीं।
प्रश्न 7
‘अनुकूल’ का विलोम है —
- Aप्रतिकार
- Bअनुसार
- Cप्रतिकूल
- Dविपरीतार्थक
व्याख्या
‘अनु’ का भाव है पीछे-पीछे चलना और ‘प्रति’ का भाव है सामने खड़ा होना। यही दोनों उपसर्ग एक-दूसरे के सामने आकर अनुकूल–प्रतिकूल की जोड़ी बनाते हैं। यह जोड़ी वादी–प्रतिवादी और पक्ष–प्रतिपक्ष में भी वही काम करती है।
प्रश्न 8
‘व्यष्टि’ का विलोम है —
- Aसृष्टि
- Bवृष्टि
- Cदृष्टि
- Dसमष्टि
व्याख्या
व्यष्टि यानी अकेली इकाई और समष्टि यानी पूरा समूह। बाकी तीनों विकल्प केवल ‘ष्टि’ की तुक मिलाते हैं, अर्थ से इनका कोई संबंध नहीं। तुक देखकर उत्तर चुनना इस अध्याय की सबसे महँगी आदत है।
प्रश्न 9
‘ऋणात्मक’ का विलोम है —
- Aधनात्मक
- Bशून्य
- Cगुणात्मक
- Dसंख्यात्मक
व्याख्या
ऋण घटाने की दिशा है और धन बढ़ाने की, इसलिए जोड़ी ऋणात्मक–धनात्मक बनती है। शून्य बीच की स्थिति है; विलोम में बीच की स्थिति कभी उत्तर नहीं होती, दोनों छोर ही उत्तर होते हैं।
प्रश्न 10
‘अतिवृष्टि’ का विलोम है —
- Aअल्पवृष्टि
- Bअनावृष्टि
- Cमहावृष्टि
- Dवर्षा
व्याख्या
‘अति’ यानी आवश्यकता से अधिक वर्षा और ‘अनावृष्टि’ यानी वर्षा का बिलकुल न होना। ‘अल्पवृष्टि’ कम वर्षा बताता है, जो कमी तो है पर पूरा उलटा नहीं। यही थोड़ा-सा अंतर सही और गलत विकल्प के बीच खड़ा रहता है।
प्रश्न 11
निम्न में से किस शब्द का विलोम ‘अन’ उपसर्ग से नहीं बनता?
- Aआदर
- Bउचित
- Cधर्म
- Dइच्छा
व्याख्या
‘अन’ उपसर्ग स्वर से आरंभ होने वाले शब्दों के आगे लगता है — अनादर, अनुचित, अनिच्छा। ‘धर्म’ व्यंजन से शुरू होता है, इसलिए उसके आगे केवल ‘अ’ लगकर अधर्म बनता है। यही एक नियम दर्जनों प्रश्न हल कर देता है।
प्रश्न 12
‘प्रवृत्ति’ का विलोम है —
- Aप्रगति
- Bविकृति
- Cसंवृत्ति
- Dनिवृत्ति
व्याख्या
प्रवृत्ति यानी किसी काम में लगना और निवृत्ति यानी उससे हट जाना। यहाँ ‘प्र’ के सामने ‘नि’ बैठता है।
प्रश्न 13
‘ह्रस्व’ का विलोम है —
- Aदीर्घ
- Bलघु
- Cसूक्ष्म
- Dसंक्षिप्त
व्याख्या
स्वरों के संदर्भ में छोटा स्वर ह्रस्व और बड़ा स्वर दीर्घ कहलाता है, इसलिए यही जोड़ी बनती है। ‘लघु’ का जोड़ा ‘गुरु’ है। दोनों जोड़ियाँ छोटे-बड़े का भाव रखती हैं, पर अलग-अलग प्रसंगों की हैं।
प्रश्न 14
‘गुरु’ शब्द का विलोम ‘लघु’ किस अर्थ में होगा?
- Aशिक्षक के अर्थ में
- Bभारी या दीर्घ के अर्थ में
- Cपूज्य के अर्थ में
- Dबड़े भाई के अर्थ में
व्याख्या
‘गुरु’ के दो अर्थ हैं। शिक्षक के अर्थ में उसका विलोम ‘शिष्य’ है, और भारी या दीर्घ के अर्थ में ‘लघु’। जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ हों, उनमें पहले अर्थ तय कीजिए, फिर विकल्प देखिए।
प्रश्न 15
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा विलोम नहीं है?
- Aआदान — प्रदान
- Bआरोह — अवरोह
- Cआगामी — वर्तमान
- Dआसक्ति — विरक्ति
व्याख्या
आगामी यानी आने वाला; उसका उलटा वह है जो बीत चुका, यानी विगत या गत। वर्तमान अभी की स्थिति है, जो न आने वाली है और न बीती हुई — इसलिए वह बीच की स्थिति है, विलोम नहीं।
प्रश्न 16
‘स्थावर’ का विलोम है —
- Aचंचल
- Bचर
- Cअस्थिर
- Dजंगम
व्याख्या
स्थावर वह है जो अपनी जगह से हिल न सके, जैसे भूमि या भवन; जंगम वह है जो चल-फिर सके। ‘चंचल’ और ‘अस्थिर’ स्वभाव बताते हैं, वस्तु की श्रेणी नहीं — इसीलिए वे यहाँ उत्तर नहीं बनते।
प्रश्न 17
‘कृपण’ का विलोम है —
- Aउदार
- Bकृपालु
- Cकठोर
- Dनिर्दय
व्याख्या
कृपण का अर्थ कंजूस है, इसलिए उसका उलटा खुले हाथ वाला यानी उदार होगा। ‘कृपालु’ शब्द देखने में कृपण से मिलता-जुलता लगता है, पर उसका संबंध कृपा से है, धन देने या रोकने से नहीं।
प्रश्न 18
‘सार्थक’ का विलोम है —
- Aअसार्थक
- Bनिरर्थक
- Cअनर्थ
- Dविसार्थक
व्याख्या
‘निर् + अर्थक’ मिलकर निरर्थक बनता है, जिसका अर्थ है अर्थ से रहित। ‘अनर्थ’ का अर्थ अनिष्ट या विपरीत अर्थ है, वह ‘अर्थ’ का विलोम है, ‘सार्थक’ का नहीं।
प्रश्न 19
निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा विलोम नहीं है?
- Aशुक्ल — कृष्ण
- Bश्वेत — श्याम
- Cशांत — मौन
- Dशीत — उष्ण
व्याख्या
शांत और मौन दोनों एक ही दिशा के भाव हैं — एक मन की स्थिरता बताता है, दूसरा न बोलना; ये पर्याय जैसे हैं, विलोम नहीं। शांत का विलोम अशांत या क्षुब्ध होगा।
प्रश्न 20
‘उन्मुख’ का विलोम है —
- Aसम्मुख
- Bप्रमुख
- Cअभिमुख
- Dविमुख
व्याख्या
उन्मुख यानी जिसका मुख किसी ओर लगा हो; विमुख यानी जो मुँह फेर ले। ‘सम्मुख’ और ‘अभिमुख’ भी सामने होने का ही भाव देते हैं, इसलिए वे उन्मुख के निकट हैं, उलटे नहीं।
प्रश्न 21
‘अथ’ का विलोम है —
- Aइति
- Bअंतिम
- Cअस्त
- Dअवसान
व्याख्या
‘अथ’ ग्रंथ या कथा के आरंभ का सूचक है और ‘इति’ उसके समाप्त होने का। यह जोड़ी संस्कृत परंपरा से आई है और इसी रूप में पूछी जाती है, इसलिए इसे अलग से याद रखिए।
प्रश्न 22
‘मितव्ययी’ का विलोम है —
- Aव्ययी
- Bअपव्ययी
- Cकिफ़ायती
- Dसंचयी
व्याख्या
मितव्ययी वह है जो नाप-तौलकर खर्च करे; अपव्ययी वह जो बेहिसाब खर्च करे। ‘किफ़ायती’ तो मितव्ययी का ही भाव है, इसलिए वह विकल्प पर्याय है, विलोम नहीं।
प्रश्न 23
‘सु’ जोड़कर बनाया गया निम्न में से कौन-सा रूप भाषा में प्रचलित नहीं है?
- Aसुगम
- Bसुमति
- Cसुभाग्य
- Dसुपात्र
व्याख्या
‘सु’ और ‘भाग्य’ जुड़ने पर संधि के कारण रूप ‘सौभाग्य’ बनता है, ‘सुभाग्य’ नहीं। उपसर्ग जोड़ने के बाद कई बार संधि भी लगती है, इसलिए जोड़कर बनाया हुआ रूप हमेशा सही नहीं होता।
प्रश्न 24
‘शत्रुता’ का विलोम है —
- Aमित्र
- Bस्नेह
- Cसहयोग
- Dमित्रता
व्याख्या
प्रश्न का शब्द भाववाचक संज्ञा है, इसलिए उत्तर भी भाववाचक संज्ञा ही होगा — मित्रता। ‘मित्र’ व्यक्ति बताता है, भाव नहीं। विलोम में शब्द-भेद बदलना सबसे आम और सबसे महँगी भूल है।
प्रश्न 25
‘तटस्थ’ का विलोम है —
- Aपक्षपाती
- Bनिष्पक्ष
- Cउदासीन
- Dमध्यस्थ
व्याख्या
तटस्थ वह है जो किसी पक्ष में न जाए; उसका उलटा वह है जो किसी एक पक्ष की ओर झुक जाए, यानी पक्षपाती। ‘निष्पक्ष’, ‘उदासीन’ और ‘मध्यस्थ’ तीनों तटस्थ के ही निकट अर्थ वाले शब्द हैं।