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अनेकार्थक शब्द

‘कर’ हाथ भी है और टैक्स भी; ‘हरि’ विष्णु भी हैं, सिंह भी और सूर्य भी। एक ही शब्द जब कई अर्थ ढोता है तो उसे अनेकार्थक कहते हैं — और परीक्षा में प्रश्न प्रायः उस अर्थ से बनता है जो सबसे कम याद रहता है। इसीलिए यहाँ हर शब्द के साथ एक वाक्य दिया गया है, केवल अर्थों की पंक्ति नहीं।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

अनेकार्थक शब्द किसे कहते हैं

जिस एक शब्द के एक से अधिक अर्थ हों, उसे अनेकार्थक शब्द कहते हैं। ‘अनेक’ यानी एक से ज़्यादा और ‘अर्थ’ यानी मतलब — नाम में ही परिभाषा रखी हुई है। ‘कर’ एक ही शब्द है, पर वह हाथ भी है, सरकार को दिया जाने वाला टैक्स भी है, सूरज की किरण भी है, और ‘करना’ क्रिया का रूप भी।

इस अध्याय को पर्यायवाची के ठीक उल्टे सिरे पर रखकर देखिए। पर्यायवाची में अनेक शब्द एक अर्थ की ओर जाते हैं — जल, नीर, वारि, सलिल सब पानी हैं। अनेकार्थक में एक शब्द अनेक अर्थों की ओर जाता है। एक में रास्ते मिलते हैं, दूसरे में बँटते हैं। यही कारण है कि दोनों अध्याय साथ-साथ पढ़ने पर आसान लगते हैं और अलग-अलग पढ़ने पर गड्डमड्ड हो जाते हैं।

अर्थ बदलने का काम यहाँ वाक्य करता है। शब्द अकेला खड़ा हो तो उसके सारे अर्थ बराबर हैं; जैसे ही वह किसी वाक्य में बैठता है, वाक्य उसमें से एक अर्थ चुन लेता है और बाक़ी चुप हो जाते हैं। इसीलिए इस पूरे अध्याय में हर शब्द के साथ एक वाक्य दिया गया है — वह वाक्य उस अर्थ को दिखाता है जो सबसे कम लोगों को याद रहता है, क्योंकि प्रश्न प्रायः वहीं से बनता है।

प्रश्न किस रूप में आता है

आयोग का प्रश्न-पत्र वस्तुनिष्ठ है, इसलिए प्रश्न तीन ही आकार लेता है। पहला — ‘निम्नलिखित में से कौन-सा अर्थ इस शब्द का नहीं है?’ इसमें तीन सही अर्थ और एक बाहरी अर्थ दिया जाता है, और पकड़ना उस बाहरी को है। दूसरा — एक वाक्य देकर पूछा जाता है कि इस वाक्य में रेखांकित शब्द किस अर्थ में आया है। तीसरा — एक अर्थ देकर पूछा जाता है कि यह अर्थ किस शब्द का है।

तीनों में से दूसरा रूप सबसे ज़्यादा अंक गिराता है, क्योंकि उसमें रटा हुआ अर्थ काम नहीं आता। जिसने केवल सूची याद की है, वह चारों विकल्पों को सही मान लेता है — और सही भी हैं, अलग-अलग वाक्यों में। चुनना उस अर्थ को है जो इसी वाक्य में बैठ रहा हो। यही वजह है कि नीचे हर शब्द के साथ वाक्य दिया गया है, केवल अर्थों की पंक्ति नहीं।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘विलोम शब्द, पर्यायवाची एवं अनेकार्थक शब्द’ नाम से — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 01-07-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तरप्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘अनेकार्थक शब्द’ अलग बिंदु के रूप में — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 23-06-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं

सबसे अधिक पूछे जाने वाले 16 अनेकार्थक शब्द — एक नज़र में

शब्दप्रमुख अर्थ
अर्थधन · मतलब · प्रयोजन
करहाथ · टैक्स · किरण · हाथी की सूँड़
हरिविष्णु · सिंह · सूर्य · सर्प · बंदर · इंद्र
कालसमय · मृत्यु · यमराज · अकाल · क्रिया का काल
कनकसोना · गेहूँ · धतूरा
अंबरआकाश · वस्त्र
पत्रपत्ता · चिट्ठी · पंख · वाहन
गुरुशिक्षक · बृहस्पति · भारी · श्रेष्ठ
मधुशहद · वसंत · मदिरा
वर्णरंग · अक्षर · वर्ग
जलजकमल · मोती · मछली · शंख
सारंगमोर · हिरण · बादल · सर्प · कोयल · कामदेव
नगपर्वत · वृक्ष · रत्न
अक्षआँख · पहिये की धुरी · पासा · रुद्राक्ष
द्विजब्राह्मण · पक्षी · दाँत · चंद्रमा
पदपैर · ओहदा · कविता का चरण · व्याकरण का शब्द

पूरा अध्याय — दो पृष्ठों में

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनेकार्थक और पर्यायवाची में क्या अंतर है?+

दिशा का। पर्यायवाची में कई शब्द एक अर्थ पर आकर मिलते हैं — जल, नीर, वारि सब पानी। अनेकार्थक में एक शब्द कई अर्थों में बँट जाता है — ‘हरि’ विष्णु भी, सिंह भी, सूर्य भी। एक जोड़ता है, दूसरा बाँटता है।

क्या हर बहु-अर्थी शब्द अनेकार्थक कहलाएगा?+

नहीं। शर्त यह है कि शब्द एक ही हो — वही वर्तनी, वही उच्चारण — और अर्थ अलग-अलग हों। ‘कुल’ और ‘कूल’ दो अलग शब्द हैं, इसलिए वे समश्रुत भिन्नार्थक हैं, अनेकार्थक नहीं।

वाक्य वाले प्रश्न में सही अर्थ कैसे पहचानें?+

शब्द को हटाकर उसकी जगह हर विकल्प रखकर वाक्य पढ़िए। जिस अर्थ से वाक्य का बाक़ी हिस्सा टिका रहे, वही उत्तर है। ‘राजा ने प्रजा से कर लिया’ में ‘हाथ’ रखते ही वाक्य गिर जाता है, ‘टैक्स’ रखते ही खड़ा हो जाता है।

कितने शब्द याद करने पर्याप्त हैं?+

संख्या से ज़्यादा काम चयन का है। इन दो पृष्ठों के 44 शब्द वे हैं जो बार-बार लौटते हैं। इन्हें अर्थ सहित नहीं, वाक्य सहित याद कीजिए — क्योंकि प्रश्न प्रायः सूची से नहीं, वाक्य से बनता है।