प्रकृति, देवता और जीव-जगत के अनेकार्थक शब्द
‘हरि’ विष्णु भी हैं और सिंह भी; ‘नाग’ साँप भी है और हाथी भी; ‘कनक’ सोना भी है और गेहूँ भी। संस्कृत से आए ये शब्द वस्तु को उसके गुण से पुकारते थे, इसलिए एक ही नाम कई चीज़ों पर चिपक गया। यहाँ बाईस ऐसे शब्द हैं, हर एक अपने वाक्य के साथ।
इन शब्दों की एक साझा आदत
इस पृष्ठ के बाईस शब्द संस्कृत से सीधे हिंदी में आए हैं, और इनके अर्थ प्रायः आकाश, जल, पशु-पक्षी और देवताओं के बीच फैले हुए हैं। इसका कारण साहित्यिक है। संस्कृत कवि किसी वस्तु को उसके गुण से पुकारते थे, नाम से नहीं — जो जल धारण करे वह ‘पयोधर’, यानी बादल; पर पर्वत भी जल धारण करता है और तालाब भी, इसलिए वे भी पयोधर हो गए।
इसी आदत ने इन शब्दों को बहु-अर्थी बनाया, और इसी आदत से इन्हें याद भी रखा जा सकता है। ‘द्विज’ का अर्थ है दो बार जन्म लेने वाला। पक्षी दो बार जन्मता है — पहले अंडे के रूप में, फिर अंडे से निकलकर। दाँत दो बार आते हैं। और परंपरा में ब्राह्मण का उपनयन दूसरा जन्म माना गया। तीनों अर्थ एक ही तर्क से निकले हैं, इसलिए तीनों एक साथ याद रहते हैं।
नीचे की तालिका में तीसरा स्तंभ सबसे काम का है। उसमें वह अर्थ वाक्य में रखा गया है जो प्रायः याद नहीं रहता — ‘हरि’ का सिंह, ‘नाग’ का हाथी, ‘कनक’ का गेहूँ। सूची दोहराने के बजाय ये बाईस वाक्य दोहराइए; प्रश्न इन्हीं से बनता है।
प्रकृति, देवता और जीव-जगत — 22 अनेकार्थक शब्द
| शब्द | प्रमुख अर्थ | वाक्य प्रयोग (कोष्ठक में प्रयुक्त अर्थ) |
|---|---|---|
| हरि | विष्णु · सिंह · सूर्य · सर्प · बंदर · इंद्र | वन में हरि की दहाड़ सुनकर सब पक्षी उड़ गए। (सिंह) |
| अर्क | सूर्य · मदार का पौधा · किसी वस्तु का सत्त | वैद्य ने जड़ी-बूटियों का अर्क निकालकर शीशी में भर दिया। (सत्त) |
| खग | पक्षी · तारा · बाण | संध्या होते ही खग अपने घोंसलों की ओर लौट पड़े। (पक्षी) |
| गो | गाय · पृथ्वी · इंद्रिय · वाणी · किरण | सूर्य की पहली गो पर्वत-शिखर पर पड़ी। (किरण) |
| नाग | सर्प · हाथी · सीसा (धातु) | मदमस्त नाग ने सूँड़ उठाकर बरगद की शाखा तोड़ दी। (हाथी) |
| अंबर | आकाश · वस्त्र | संत ने श्वेत अंबर धारण किया और चल पड़े। (वस्त्र) |
| जलज | कमल · मोती · मछली · शंख | गोताखोर सीप तोड़कर उसमें से चमकता जलज निकाल लाया। (मोती) |
| सारंग | मोर · हिरण · बादल · सर्प · कोयल · कामदेव | आकाश में सारंग घिर आए और बूँदें गिरने लगीं। (बादल) |
| पयोधर | बादल · स्तन · पर्वत · तालाब · समुद्र | ग्रीष्म बीतते ही पयोधर आकाश में उमड़ आए। (बादल) |
| केतु | ध्वजा · एक ग्रह · धूमकेतु · चिह्न | सेना के आगे राजा का केतु फहरा रहा था। (ध्वजा) |
| द्विज | ब्राह्मण · पक्षी · दाँत · चंद्रमा | वृद्ध होते-होते उसके सारे द्विज गिर गए। (दाँत) |
| अमृत | देवताओं का अमरता देने वाला पेय · जल · दूध · घी | तपती दुपहरी में कुएँ का ठंडा अमृत मिल गया। (जल) |
| मधु | शहद · वसंत · मदिरा | मधु आते ही आम बौरा गया। (वसंत) |
| कनक | सोना · गेहूँ · धतूरा | खेतों में कनक की बालियाँ झूम रही थीं। (गेहूँ) |
| अक्ष | आँख · पहिये की धुरी · पासा · रुद्राक्ष | रथ का अक्ष टूट गया और पहिया अलग जा गिरा। (धुरी) |
| नग | पर्वत · वृक्ष · रत्न | अंगूठी में जड़ा नग धूप में चमक उठा। (रत्न) |
| मित्र | दोस्त · सूर्य | प्रातः मित्र की किरणें घाटी में उतरीं। (सूर्य) |
| कृष्ण | काला · विष्णु का अवतार · कृष्ण पक्ष | आकाश में कृष्ण मेघ घिर आए और दिन में अँधेरा हो गया। (काला) |
| भूत | प्रेत · बीता हुआ समय · प्राणी · पंचमहाभूत | यह शरीर पाँच भूतों से बना है। (पंचमहाभूत) |
| पतंग | सूर्य · पतंगा · उड़ाई जाने वाली पतंग | पतंग ढलते ही आकाश लाल हो गया। (सूर्य) |
| चपला | बिजली · लक्ष्मी · चंचल स्त्री | बादलों के बीच चपला कौंध गई। (बिजली) |
| वंश | कुल · बाँस · परंपरा | नदी किनारे घना वंश उगा हुआ था। (बाँस) |