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प्रकृति, देवता और जीव-जगत के अनेकार्थक शब्द

‘हरि’ विष्णु भी हैं और सिंह भी; ‘नाग’ साँप भी है और हाथी भी; ‘कनक’ सोना भी है और गेहूँ भी। संस्कृत से आए ये शब्द वस्तु को उसके गुण से पुकारते थे, इसलिए एक ही नाम कई चीज़ों पर चिपक गया। यहाँ बाईस ऐसे शब्द हैं, हर एक अपने वाक्य के साथ।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

इन शब्दों की एक साझा आदत

इस पृष्ठ के बाईस शब्द संस्कृत से सीधे हिंदी में आए हैं, और इनके अर्थ प्रायः आकाश, जल, पशु-पक्षी और देवताओं के बीच फैले हुए हैं। इसका कारण साहित्यिक है। संस्कृत कवि किसी वस्तु को उसके गुण से पुकारते थे, नाम से नहीं — जो जल धारण करे वह ‘पयोधर’, यानी बादल; पर पर्वत भी जल धारण करता है और तालाब भी, इसलिए वे भी पयोधर हो गए।

इसी आदत ने इन शब्दों को बहु-अर्थी बनाया, और इसी आदत से इन्हें याद भी रखा जा सकता है। ‘द्विज’ का अर्थ है दो बार जन्म लेने वाला। पक्षी दो बार जन्मता है — पहले अंडे के रूप में, फिर अंडे से निकलकर। दाँत दो बार आते हैं। और परंपरा में ब्राह्मण का उपनयन दूसरा जन्म माना गया। तीनों अर्थ एक ही तर्क से निकले हैं, इसलिए तीनों एक साथ याद रहते हैं।

नीचे की तालिका में तीसरा स्तंभ सबसे काम का है। उसमें वह अर्थ वाक्य में रखा गया है जो प्रायः याद नहीं रहता — ‘हरि’ का सिंह, ‘नाग’ का हाथी, ‘कनक’ का गेहूँ। सूची दोहराने के बजाय ये बाईस वाक्य दोहराइए; प्रश्न इन्हीं से बनता है।

प्रकृति, देवता और जीव-जगत — 22 अनेकार्थक शब्द

शब्दप्रमुख अर्थवाक्य प्रयोग (कोष्ठक में प्रयुक्त अर्थ)
हरिविष्णु · सिंह · सूर्य · सर्प · बंदर · इंद्रवन में हरि की दहाड़ सुनकर सब पक्षी उड़ गए। (सिंह)
अर्कसूर्य · मदार का पौधा · किसी वस्तु का सत्तवैद्य ने जड़ी-बूटियों का अर्क निकालकर शीशी में भर दिया। (सत्त)
खगपक्षी · तारा · बाणसंध्या होते ही खग अपने घोंसलों की ओर लौट पड़े। (पक्षी)
गोगाय · पृथ्वी · इंद्रिय · वाणी · किरणसूर्य की पहली गो पर्वत-शिखर पर पड़ी। (किरण)
नागसर्प · हाथी · सीसा (धातु)मदमस्त नाग ने सूँड़ उठाकर बरगद की शाखा तोड़ दी। (हाथी)
अंबरआकाश · वस्त्रसंत ने श्वेत अंबर धारण किया और चल पड़े। (वस्त्र)
जलजकमल · मोती · मछली · शंखगोताखोर सीप तोड़कर उसमें से चमकता जलज निकाल लाया। (मोती)
सारंगमोर · हिरण · बादल · सर्प · कोयल · कामदेवआकाश में सारंग घिर आए और बूँदें गिरने लगीं। (बादल)
पयोधरबादल · स्तन · पर्वत · तालाब · समुद्रग्रीष्म बीतते ही पयोधर आकाश में उमड़ आए। (बादल)
केतुध्वजा · एक ग्रह · धूमकेतु · चिह्नसेना के आगे राजा का केतु फहरा रहा था। (ध्वजा)
द्विजब्राह्मण · पक्षी · दाँत · चंद्रमावृद्ध होते-होते उसके सारे द्विज गिर गए। (दाँत)
अमृतदेवताओं का अमरता देने वाला पेय · जल · दूध · घीतपती दुपहरी में कुएँ का ठंडा अमृत मिल गया। (जल)
मधुशहद · वसंत · मदिरामधु आते ही आम बौरा गया। (वसंत)
कनकसोना · गेहूँ · धतूराखेतों में कनक की बालियाँ झूम रही थीं। (गेहूँ)
अक्षआँख · पहिये की धुरी · पासा · रुद्राक्षरथ का अक्ष टूट गया और पहिया अलग जा गिरा। (धुरी)
नगपर्वत · वृक्ष · रत्नअंगूठी में जड़ा नग धूप में चमक उठा। (रत्न)
मित्रदोस्त · सूर्यप्रातः मित्र की किरणें घाटी में उतरीं। (सूर्य)
कृष्णकाला · विष्णु का अवतार · कृष्ण पक्षआकाश में कृष्ण मेघ घिर आए और दिन में अँधेरा हो गया। (काला)
भूतप्रेत · बीता हुआ समय · प्राणी · पंचमहाभूतयह शरीर पाँच भूतों से बना है। (पंचमहाभूत)
पतंगसूर्य · पतंगा · उड़ाई जाने वाली पतंगपतंग ढलते ही आकाश लाल हो गया। (सूर्य)
चपलाबिजली · लक्ष्मी · चंचल स्त्रीबादलों के बीच चपला कौंध गई। (बिजली)
वंशकुल · बाँस · परंपरानदी किनारे घना वंश उगा हुआ था। (बाँस)

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