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विराम चिह्न

‘रोको, मत जाने दो।’ और ‘रोको मत, जाने दो।’ — शब्द वही हैं, अल्प विराम की जगह बदली है, और आदेश उल्टा हो गया। विराम चिह्न सजावट नहीं, अर्थ का हिस्सा हैं। यहाँ चौदह चिह्न हैं, हर एक का रूप, प्रयोग और उदाहरण सहित।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

विराम चिह्न क्या हैं और हिंदी में कब आए

बोलते समय हम रुकते हैं, स्वर ऊँचा-नीचा करते हैं, और सुनने वाला उसी से समझ जाता है कि वाक्य पूरा हुआ या प्रश्न पूछा गया। लिखने में यह सहारा नहीं रहता। उसी ठहराव और उसी उतार-चढ़ाव को काग़ज़ पर दिखाने के लिए जो चिह्न लगाए जाते हैं, वे विराम चिह्न हैं। ‘विराम’ का अर्थ ही है ठहरना।

संस्कृत में केवल दंड ( । ) और द्विदंड ( ॥ ) चलते थे — एक गद्य के वाक्य के अंत में, दूसरा श्लोक के अंत में। आज हिंदी जिन चौदह-पंद्रह चिह्नों का प्रयोग करती है, उनमें से अधिकांश अंग्रेज़ी के संपर्क से आए और उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में खड़ी बोली के गद्य के साथ स्थिर हुए। इसीलिए इनके हिंदी नाम प्रायः अनूदित लगते हैं — प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, उद्धरण।

एक बात जो पूरे अध्याय पर लागू है: हिंदी का पूर्ण विराम खड़ी पाई ( । ) है, बिंदु नहीं। बिंदु हिंदी में केवल संक्षेप रूपों और अंकों में चलता है। यह सबसे छोटी बात है और प्रश्न-पत्र में सबसे अधिक बार पूछी जाती है।

चिह्न बदलने से अर्थ कैसे पलट जाता है

इस अध्याय का सारा महत्त्व एक बात में है — विराम चिह्न सजावट नहीं, अर्थ का हिस्सा है। एक ही शब्द-क्रम में अल्प विराम की जगह बदल दीजिए और वाक्य उल्टा अर्थ देने लगता है।

‘रोको, मत जाने दो।’ — यहाँ ठहराव ‘रोको’ के बाद है, इसलिए आदेश है कि उसे जाने न दिया जाए। अब वही शब्द, चिह्न की जगह बदली हुई: ‘रोको मत, जाने दो।’ — अब आदेश ठीक उल्टा है, उसे जाने दिया जाए। एक अल्प विराम ने पूरा निर्णय पलट दिया।

परीक्षा में यह प्रश्न दो रूपों में आता है। या तो एक वाक्य देकर पूछा जाता है कि इसमें कौन-सा चिह्न कहाँ लगेगा, या दो वाक्य देकर पूछा जाता है कि अर्थ में क्या अंतर आया। दोनों का उत्तर एक ही समझ से निकलता है: पहले यह तय कीजिए कि वाक्य कहना क्या चाहता है, फिर चिह्न लगाइए — चिह्न पहले लगाकर अर्थ बाद में सोचने से वाक्य बिगड़ता है।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी के पाठ्यक्रम में ‘विराम चिह्न’ नाम से — विस्तृत विज्ञप्ति दिनांक 01-07-2026 · विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं

हिंदी के प्रमुख विराम चिह्न — नाम, रूप, प्रयोग और उदाहरण

चिह्न का नामरूपकब लगता हैउदाहरण
पूर्ण विराम।वाक्य पूरा होने पर। हिंदी में खड़ी पाई लगती है, अंग्रेज़ी वाला बिंदु नहीं।बालक विद्यालय गया।
अल्प विराम,वाक्य के भीतर थोड़ा ठहराव — सूची के बीच, संबोधन के बाद, उपवाक्य अलग करने में।राम, श्याम और मोहन आए।
अर्ध विराम;पूर्ण विराम से कम, अल्प विराम से अधिक ठहराव — दो स्वतंत्र पर जुड़े हुए उपवाक्यों के बीच।वह परिश्रमी है; सफलता निश्चित है।
प्रश्नवाचक चिह्न?प्रश्न पूछने वाले वाक्य के अंत में।तुम कहाँ जा रहे हो?
विस्मयादिबोधक चिह्न!हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा जैसे भाव दिखाने और संबोधन के बाद।वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
उद्धरण चिह्न‘ ’ तथा “ ”किसी के कहे हुए शब्द ज्यों-के-त्यों देने में। इकहरा नाम या शीर्षक के लिए, दुहरा कथन के लिए।गुरुजी ने कहा, “सदा सत्य बोलो।”
योजक चिह्न-दो शब्दों को जोड़ने में — द्वंद्व समास, तुलना और सार्थक जोड़ों में।माता-पिता, सुख-दुःख, दिन-प्रतिदिन
निर्देशक चिह्न—कथन से पहले, तथा विषय का विस्तार या स्पष्टीकरण आगे लाने में। योजक से लंबा होता है।उसने कहा — अब देर हो चुकी है।
कोष्ठक( ) [ ]बीच में आई अतिरिक्त सूचना या अर्थ-स्पष्टीकरण घेरने में।नेताजी (सुभाषचंद्र बोस) का जन्म कटक में हुआ।
विवरण चिह्न:—किसी बात का विवरण, सूची या उदाहरण आगे आने पर।व्याकरण के तीन अंग हैं:— वर्ण-विचार, शब्द-विचार, वाक्य-विचार।
उपविराम (अपूर्ण विराम):किसी शीर्षक, नाम या कथन के बाद जब आगे उसका विस्तार आना हो। विवरण चिह्न ( :— ) से अलग है — वहाँ सूची आती है, यहाँ केवल एक बात।अध्यक्ष : डॉ. रमेश शर्मा
लाघव चिह्न०शब्द को संक्षेप में लिखने पर। परंपरागत रूप से शून्य ( ० ) लगता है; आजकल छपाई में बिंदु ( . ) भी उतना ही चलता है। परीक्षा में चिह्न का नाम पूछा जाता है — लाघव — रूप नहीं।डॉ० / डॉ. , पं० / पं. , ई० / ई.
लोप चिह्न...वाक्य का कुछ अंश छोड़ देने पर।उसने कहा कि मैं कल... ख़ैर छोड़िए।
हंसपद (त्रुटिबोधक)^लिखते समय कोई शब्द छूट जाने पर — छूटे हुए स्थान पर यह चिह्न लगाकर शब्द पंक्ति के ऊपर लिख दिया जाता है।मैं ^ जाऊँगा — ‘कल’ पंक्ति के ऊपर लिखा जाएगा
रेखांकन चिह्न_किसी शब्द पर विशेष ध्यान दिलाने के लिए उसके नीचे रेखा।यह उत्तर पूर्णतः सही है। — यहाँ ‘पूर्णतः’ के नीचे रेखा खींची जाएगी

पाँच भूलें जो सबसे अधिक होती हैं

भूलसही क्या है
वाक्य के अंत में बिंदु ( . ) लगानाहिंदी का पूर्ण विराम खड़ी पाई ( । ) है। बिंदु अंग्रेज़ी का है और हिंदी में उसका काम संक्षेप रूपों (डॉ.) तथा अंकों तक सीमित है — वाक्य के अंत में नहीं।
संबोधन के बाद चिह्न छोड़ देनासंबोधन के बाद अल्प विराम या विस्मयादिबोधक चाहिए — ‘भाइयो और बहनो!’ या ‘राम, इधर आओ।’
योजक और निर्देशक को एक माननायोजक ( - ) छोटा है और शब्दों को जोड़ता है; निर्देशक ( — ) लंबा है और कथन या विवरण आगे लाता है। प्रश्न प्रायः इसी अंतर पर बनता है।
‘तथा/एवं’ से पहले अल्प विरामसूची के अंतिम दो पदों के बीच ‘और/तथा’ आने पर वहाँ अल्प विराम नहीं लगता — ‘राम, श्याम और मोहन’।
पूरा कथन उद्धृत करने पर पूर्ण विराम बाहर रखनाजब पूरा वाक्य उद्धृत हो, उसका पूर्ण विराम उद्धरण चिह्न के भीतर आता है — “सदा सत्य बोलो।” पर जब केवल एक शब्द या अंश उद्धृत हो, तो चिह्न बाहर रहता है — उसने उसे “कायर” कहा।

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदी में पूर्ण विराम के लिए बिंदु क्यों नहीं लगाते?+

क्योंकि हिंदी ने अपना पूर्ण विराम संस्कृत की परंपरा से लिया है, जहाँ वाक्य के अंत में दंड यानी खड़ी पाई ( । ) लगती थी। बिंदु अंग्रेज़ी से आया और हिंदी में उसका काम सीमित है — संक्षेप रूप (डॉ.) और अंक। वाक्य के अंत में खड़ी पाई ही मानक है।

योजक और निर्देशक चिह्न में अंतर कैसे याद रखें?+

लंबाई से। योजक ( - ) छोटा है और उसका काम भी छोटा है — दो शब्दों को जोड़ना, जैसे माता-पिता। निर्देशक ( — ) लंबा है और वह पूरी बात आगे लाता है, जैसे ‘उसने कहा — अब देर हो चुकी है।’ छोटा शब्द जोड़ता है, लंबा वाक्य खोलता है।

क्या विस्मयादिबोधक चिह्न केवल आश्चर्य में लगता है?+

नहीं। यह हर तीव्र भाव के बाद लगता है — हर्ष, शोक, घृणा, भय, आशीर्वाद — और संबोधन के बाद भी, जैसे ‘भाइयो और बहनो!’ आश्चर्य उसके अनेक प्रयोगों में से एक है, पूरा नहीं।

लाघव चिह्न और लोप चिह्न एक ही तो नहीं हैं?+

नहीं। लाघव चिह्न ( ० ) शब्द को संक्षेप में लिखने पर लगता है — डॉ०, पं०। लोप चिह्न ( ... ) वाक्य का कुछ हिस्सा छोड़ देने पर लगता है। एक शब्द छोटा करता है, दूसरा वाक्य अधूरा छोड़ता है।

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