शब्द शुद्धि
हिंदी लिखने वाले अधिकतर लोग व्याकरण से नहीं हारते, वर्तनी से हारते हैं। ‘आशीर्वाद’ को ‘आर्शीवाद’ लिख देना, ‘उज्ज्वल’ को ‘उज्जवल’ कर देना, ‘गृहिणी’ की जगह ‘गृहणी’ बैठा देना — ये भूलें किसी लापरवाही से नहीं होतीं, बल्कि इसलिए होती हैं कि हम शब्द को जैसा बोलते हैं वैसा ही लिख देते हैं। बोलने में जो ध्वनि फिसल जाती है, लिखने में वही अशुद्धि बन जाती है। शब्द शुद्धि का यह अध्याय इसी फ़र्क़ को साधता है। ध्यान दीजिए, इस पृष्ठ पर हमने शब्दों को वर्णक्रम से नहीं सजाया है। वर्णक्रम वाली सूची आपको दो सौ शब्द रटा देगी और दो सौ पहला शब्द आते ही आप फिर वहीं खड़े होंगे। इसलिए यहाँ शब्दों को अशुद्धि के प्रकार के अनुसार बाँटा गया है — मात्रा की गड़बड़ी अलग, अनुस्वार की अलग, ण और न का भ्रम अलग, श-ष-स का अलग। हर वर्ग के पहले यह समझाया गया है कि वह गलती होती क्यों है, यानी कौन-सा नियम टूट रहा है। इस पृष्ठ को अंत तक पढ़ने के बाद आपसे यह अपेक्षा है कि आप नया शब्द देखकर भी बता सकें कि उसमें भूल कहाँ होने वाली है — केवल याद किए हुए शब्द पहचान लेना इस अध्याय की आधी उपलब्धि है, पूरी नहीं।
अशुद्धि होती क्यों है — तीन असली कारण
पहला कारण उच्चारण है। हिंदी बोलते समय ह्रस्व और दीर्घ का अंतर अक्सर मिट जाता है; ‘अतिथि’ बोलने में ‘अतिथी’ जैसा सुनाई देता है, इसलिए लिखने में भी वही उतर आता है। दूसरा कारण बोली का प्रभाव है। राजस्थान, हरियाणा और पूर्वांचल की बोलियों में ‘ष’ प्रायः ‘स’ या ‘श’ की तरह बोला जाता है और ‘ण’ ‘न’ की तरह; यही आदत ‘मनुष्य’ को ‘मनुश्य’ और ‘प्रणाम’ को ‘प्रनाम’ बना देती है। तीसरा और सबसे दिलचस्प कारण अति-सुधार है, यानी सही शब्द को गलत समझकर ‘ठीक’ कर देना। लोग सुनते हैं कि हिंदी में नुक़्ता लगता है, और फिर ‘जोर’ को ‘ज़ोर’, ‘खबर’ को ‘ख़बर’ लिखने लगते हैं, जबकि ये शब्द हिंदी में इतने घुल चुके हैं कि इन पर नुक़्ता नहीं लगता। इसी तरह ‘सौजन्य’ पहले से पूरा शब्द है, पर उसमें ‘ता’ जोड़कर ‘सौजन्यता’ बना देना — यह सुधार नहीं, नई अशुद्धि है। इन तीनों कारणों को पहचान लेना ही इस अध्याय की असली कुंजी है।
अशुद्धि के दस कारण — तीन पेजों में
आख़िरी दोहराव के लिए
ऊँचे अंक देने वाले नियम — एक ही तालिका में
नीचे वे नियम रखे गए हैं जो सबसे ज़्यादा प्रश्नों को अकेले सँभाल लेते हैं। इन्हें याद कर लेने का लाभ यह है कि आप ऐसे शब्दों में भी सही उत्तर निकाल लेंगे जो इस पृष्ठ की सूचियों में नहीं हैं — और परीक्षा में ठीक यही होता है। हर नियम के साथ एक उदाहरण दिया गया है; उदाहरण याद रहेगा तो नियम अपने आप लौट आएगा।
शब्द शुद्धि के उच्च-उपयोगी नियम
| नियम | कब लगता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| ऋ, र या ष के बाद ‘न’ का ‘ण’ | तत्सम शब्द में, जब ऋ/र/ष और ‘न’ के बीच केवल स्वर, ह, य, व, र या क-वर्ग/प-वर्ग का व्यंजन आए | परि + नाम = परिणाम; प्र + मान = प्रमाण; भूषन (अशुद्ध) → भूषण |
| ण का नियम केवल तत्सम पर | तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों पर यह नियम नहीं लगता | सुनार, पानी, जवान, मकान — इनमें ण कभी नहीं आता |
| तत्सम शब्दों में, जहाँ नासिक्य व्यंजन संयुक्त रूप में है | नासिक्य ध्वनि के बाद क, च, ट, त, प वर्ग का व्यंजन आए | अंक, चंचल, संत, चिंता, संसार |
| तद्भव शब्दों में स्वर की नासिकता पर चंद्रबिंदु | शब्द तद्भव हो और नाक की ध्वनि पूरे व्यंजन के रूप में न बोली जाए | आँख, गाँव, दाँत, साँप, हँसना |
| ष केवल तत्सम में | किसी तद्भव या विदेशी शब्द में ष आए तो वह अशुद्ध है | मशीन (मसीन/मषीन नहीं), शहर (षहर नहीं) |
| क्ष और ष्ट सदा ष से | इन जोड़ों में श कभी नहीं आता | कष्ट, दुष्ट, परीक्षा, शिक्षा |
| ष्ठ बनाम ष्ट | श्रेष्ठता या क्रम बताने वाले शब्दों में प्रायः ष्ठ | श्रेष्ठ, वरिष्ठ, कनिष्ठ — पर दुष्ट, कष्ट, इष्ट |
| तत्सम पुल्लिंग प्रायः ह्रस्व पर, स्त्रीलिंग प्रायः दीर्घ पर — अपवाद हैं | संदेह हो तो लिंग देखिए, पर हानि, विधि, निधि जैसे स्त्रीलिंग शब्द ह्रस्व भी लेते हैं | मुनि, ऋषि, कवि, अतिथि — पर नारी, देवी, नदी |
| भाववाचक शब्द में फिर ‘ता’ नहीं | शब्द पहले से भाव बता रहा हो | सौजन्य, माधुर्य, सामर्थ्य, गौरव, लाघव |
| विशेषण बनाते समय आदि स्वर की वृद्धि होती है (अ→आ, इ→ऐ, उ→औ) | तत्सम संज्ञा से ‘इक’ प्रत्यय जोड़ने पर | व्यवहार → व्यावहारिक; प्रमाण → प्रामाणिक; इतिहास → ऐतिहासिक |
| ऋ की मात्रा व्यंजन के नीचे | संस्कृत मूल के शब्दों में, ‘रि’ के रूप में नहीं | कृपा, हृदय, दृष्टि, मृत्यु, शृंगार |
| अह्न वाले शब्दों में ह्न | दिन के भागों के नाम में | मध्याह्न, पूर्वाह्न, अपराह्न |
| नुक़्ता केवल अ-हिंदीकृत विदेशी ध्वनि पर | शब्द अब भी मूल ध्वनि में बोला जाता हो | ज़रूरत, बाज़ार, वक़्त, फ़र्क़ — पर जोर, खबर, गरीब |
| अंग्रेज़ी के ऑ पर अर्धचंद्र | अंग्रेज़ी से आए शब्दों में | डॉक्टर, कॉलेज, ऑफ़िस |
| क्रिया संज्ञा के लिंग-वचन पर चलती है | वाक्य में विशेषण, क्रिया और सर्वनाम | ‘मेरी पुस्तक’, ‘दही खट्टा है’, ‘पुस्तकें फटी हैं’ |
जाल — वे शब्द जो पहले से शुद्ध हैं
अब तक आपने देखा कि अशुद्धि कैसे बनती है। अब उलटी दिशा देखिए, क्योंकि परीक्षा की सबसे चतुर चाल यही है। प्रश्न में चार विकल्प रखकर पूछा जाता है कि इनमें अशुद्ध कौन-सा है, और तीन विकल्प ऐसे रख दिए जाते हैं जो देखने में गलत लगते हैं पर हैं बिलकुल शुद्ध। जो अभ्यर्थी नियम आधा-अधूरा जानता है, वह इन्हें ‘सुधारकर’ अपना अंक गँवा देता है। सबसे बड़ा जाल नुक़्ते का है — ‘जोर’, ‘खबर’, ‘गरीब’, ‘फसल’, ‘इज्जत’, ‘जबान’, ‘हजार’, ‘किस्मत’, ‘सफेद’, ‘जहर’, ‘नुकसान’, ‘खुद’, ‘खर्च’, ‘जल्दी’, ‘जमाना’ — ये सब हिंदी में इतने रच-बस चुके हैं कि इन पर बिंदी नहीं लगती, और इन्हें ‘ज़ोर’ या ‘ख़बर’ बना देना अशुद्धि है। दूसरा जाल उन शब्दों का है जिनका उच्चारण भ्रामक है पर वर्तनी सही है, जैसे ‘चिह्न’, ‘उपर्युक्त’, ‘संन्यासी’ और ‘अनुगृहीत’ — इन्हें देखकर हाथ तुरंत ‘सुधारने’ को बढ़ता है। तीसरा जाल उन जोड़ियों का है जहाँ दोनों शब्द शुद्ध हैं पर अर्थ अलग है; वहाँ प्रश्न वर्तनी का नहीं, अर्थ का होता है।
दोनों रूप शुद्ध, पर अर्थ अलग — यहाँ भूल अर्थ की होती है, वर्तनी की नहीं
| शब्द | अर्थ | दूसरा शब्द | उसका अर्थ |
|---|---|---|---|
| ग्रह | आकाश का पिंड | गृह | घर |
| हंस | एक पक्षी | हँस | हँसने की क्रिया |
| कुल | वंश अथवा कुल जोड़ | कूल | नदी का किनारा |
| दिन | दिवस | दीन | गरीब, विनम्र |
| सुत | पुत्र | सूत | धागा अथवा सारथी |
| अनल | आग | अनिल | हवा |
सबसे आम भूलें — इन्हें अलग कागज पर लिख लीजिए
पहली — ‘आशीर्वाद’ को ‘आर्शीवाद’ लिख देना; ‘र’ अपनी जगह से हिलता नहीं। दूसरी — ‘उज्ज्वल’ में से एक ‘ज’ की जगह बदल देना और ‘उज्जवल’ लिख बैठना। तीसरी — ‘चिह्न’ को ‘चिन्ह’ कर देना; शुद्ध रूप में ‘ह्न’ है। चौथी — भाववाचक शब्दों में दोबारा ‘ता’ जोड़ देना, जैसे ‘सौजन्यता’ या ‘माधुर्यता’। पाँचवीं — ‘व्यावहारिक’ की जगह ‘व्यवहारिक’ लिखना, यानी प्रत्यय लगने पर होने वाले स्वर-वृद्धि को भूल जाना। छठी — ‘शृंगार’ में एक अतिरिक्त ‘र’ डालकर ‘श्रृंगार’ बना देना। और सातवीं, जो सबसे महँगी पड़ती है — हर ‘ज’ और ‘ख’ पर बिंदी लगा देना। नुक़्ता वहीं लगता है जहाँ शब्द आज भी अपनी मूल ध्वनि में बोला जाता है; ‘जोर’, ‘खबर’ और ‘गरीब’ पर वह कभी नहीं लगता।
उत्तर चुनने का व्यावहारिक क्रम
प्रश्न सामने आते ही सीधे उत्तर मत ढूँढ़िए; तीन जाँचें क्रम से लगाइए। पहली जाँच — क्या शब्द तत्सम है? यदि हाँ, तो ण, ष और ऋ वाले नियम उस पर लागू होंगे; यदि नहीं, तो वे नियम वहाँ लगेंगे ही नहीं और आधे विकल्प वहीं कट जाएँगे। दूसरी जाँच — नासिक्य चिह्न सही जगह है या नहीं; इसके लिए शब्द को धीरे बोलकर देखिए कि नाक से निकली ध्वनि के बाद कोई व्यंजन टकराता है या नहीं। तीसरी जाँच — कहीं कोई प्रत्यय या वर्ण बेवजह तो नहीं जुड़ा। इन तीन जाँचों के बाद भी दो विकल्प बचें, तो उसे चुनिए जो कम ‘सुधारा हुआ’ दिखता हो, क्योंकि इस अध्याय में अति-सुधार ही सबसे बड़ा जाल है।
परीक्षा में यह अध्याय कहाँ आता है
शब्द शुद्धि उन थोड़े-से अध्यायों में है जो हर स्तर की परीक्षा में आते हैं — दसवीं स्तर की भर्ती से लेकर व्याख्याता तक। छोटे स्तर पर प्रश्न सीधा होता है: चार शब्द दिए जाते हैं और उनमें से शुद्ध या अशुद्ध चुनना होता है। ऊँचे स्तर पर वही प्रश्न वाक्य के भीतर छिपाकर पूछा जाता है, जहाँ आपको पूरे वाक्य में से अशुद्ध अंश पहचानना पड़ता है और लिंग-वचन की भूल भी इसी में जुड़ जाती है। तैयारी करते समय दोनों रूपों का अभ्यास कीजिए।
किन परीक्षाओं में पूछा जाता है
| परीक्षा | कहाँ पूछा जाता है |
|---|---|
| RSSB पटवारी | संयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड · 22 प्रश्न / 44 अंक वाले खंड का भाग |
| RSSB CET स्नातक स्तर | प्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तर | प्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं |
| RSSB VDO | भाषा खंड · 50 प्रश्न / 50 अंक वाले खंड का भाग |
| RSSB LDC | प्रश्न-पत्र II — सामान्य हिंदी · 75 प्रश्न |
| RPSC RAS मुख्य परीक्षा | प्रश्न-पत्र IV, इकाई I (सामान्य हिन्दी) का भाग अ · ‘शब्द शुद्धि’ · 30 अंक वाले भाग का एक बिंदु — पाठ्यक्रम दिनांक 09-01-2026 |
| RPSC पुलिस उप-निरीक्षक | प्रश्न-पत्र I — सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक |
| RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I · खंड I का भाग |
| RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी) | हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम · खंड प्रथम का भाग |
| REET | हिंदी भाषा I / II · 30 अंक प्रत्येक |
| राजस्थान उच्च न्यायालय LDC | हिंदी खंड · 50 प्रश्न / 100 अंक |
अंतिम बात — अभ्यास कैसे करें
इस अध्याय में सूची पढ़ने से कम और लिखने से ज़्यादा लाभ होता है, क्योंकि भूल हाथ की है, आँख की नहीं। रोज़ दस शब्द लीजिए और उन्हें बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए। जो शब्द गलत निकले उसे काटकर सही लिखने भर से काम नहीं चलेगा — उसके सामने यह भी लिखिए कि भूल किस वर्ग की थी, मात्रा की, अनुस्वार की, या ण की। दो सप्ताह में आपके पास अपनी ही भूलों की एक छोटी सूची बन जाएगी, और वही सूची इस पृष्ठ की पूरी सामग्री से ज़्यादा काम आएगी, क्योंकि हर व्यक्ति की भूलें अलग होती हैं और वे बार-बार वही लौटती हैं। दूसरा उपयोगी अभ्यास यह है कि अखबार या कोई सरकारी सूचना पढ़ते समय उसमें अशुद्धियाँ ढूँढ़िए — वे मिलेंगी, और उन्हें पकड़ पाना इस बात का पक्का प्रमाण है कि नियम आपके भीतर बैठ चुका है। तीसरा, ऊपर दी गई नियम-तालिका को सप्ताह में एक बार पढ़िए। शब्द भूल जाएँ तो चलेगा; नियम याद रहा तो नया शब्द भी सध जाएगा।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aआशीर्वाद
- Bआर्शिवाद
- Cआर्शीवाद
- Dआशिर्वाद
व्याख्या
यह शब्द ‘आशीः’ और ‘वाद’ के मेल से बना है, इसलिए ‘र’ ‘शी’ के बाद ही आएगा। उसे आगे खिसकाकर ‘आर्शीवाद’ लिखना वर्ण-विपर्यय की भूल है, और ‘शि’ को ह्रस्व कर देना मात्रा की भूल।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aउज्जवल
- Bउज्ज्वल
- Cउज्वल
- Dउज्ज्वाल
व्याख्या
यहाँ ‘ज्’ के बाद संयुक्त व्यंजन ‘ज्व’ आता है। बोलने में यह जोड़ ढीला पड़ जाता है, इसी से ‘उज्जवल’ लिखा जाने लगा, पर संयुक्त व्यंजन को तोड़ना अशुद्धि है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aचिह्न
- Bसंन्यासी
- Cसौजन्यता
- Dअनुगृहीत
व्याख्या
‘सौजन्य’ स्वयं भाववाचक संज्ञा है, इसलिए उसमें फिर से ‘ता’ जोड़ना एक ही भाव को दो बार कहना है। शेष तीनों शब्द शुद्ध हैं — ‘चिह्न’ में ‘ह्न’ है, ‘संन्यासी’ ‘सम् + न्यास’ से बना है इसलिए दो ‘न’ आते हैं।
प्रश्न 4
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aप्रसन्शा
- Bप्रशन्सा
- Cप्रसंशा
- Dप्रशंसा
व्याख्या
इस शब्द में पहले ‘श’ आता है और बाद में ‘स’। बोलचाल में दोनों ऊष्म ध्वनियाँ एक-सी सुनाई देती हैं, इसीलिए लोग क्रम उलटकर ‘प्रसंशा’ लिख बैठते हैं।
प्रश्न 5
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aमनुष्य
- Bमणुष्य
- Cमनुश्य
- Dमनुस्य
व्याख्या
‘ष्य’ में मूर्धन्य ‘ष’ आता है, ‘श’ या ‘स’ नहीं। साथ ही यहाँ ‘ण’ का नियम नहीं लगता, क्योंकि शब्द में पहले कोई ऋ, र या ष नहीं आया — इसलिए ‘मणुष्य’ भी अशुद्ध है।
प्रश्न 6
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aदुष्ट
- Bश्रेष्ट
- Cइष्ट
- Dकष्ट
व्याख्या
श्रेष्ठता और क्रम बताने वाले शब्दों में ‘ष्ठ’ आता है, इसलिए शुद्ध रूप ‘श्रेष्ठ’ है। ‘कष्ट’, ‘दुष्ट’ और ‘इष्ट’ में ‘ष्ट’ ही सही है।
प्रश्न 7
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aपरिणम
- Bपरिनाम
- Cपरिणाम
- Dपरीणाम
व्याख्या
‘परि’ में ‘र’ आ चुका है, इसलिए आगे आने वाला ‘न’ बदलकर ‘ण’ हो जाता है। यही ण-नियम ‘प्रमाण’, ‘निर्णय’ और ‘निर्माण’ में भी काम करता है।
प्रश्न 8
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aह्रिदय
- Bह्रदय
- Cहिरदय
- Dहृदय
व्याख्या
यह तत्सम शब्द है और इसमें ‘ह’ के नीचे ‘ऋ’ की मात्रा लगती है। उसे ‘र’ और ‘इ’ में तोड़ देना ऋ/रि का सबसे आम भ्रम है।
प्रश्न 9
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aज़ोर
- Bवक़्त
- Cज़रूरत
- Dबाज़ार
व्याख्या
नुक़्ता केवल उन विदेशी शब्दों पर लगता है जो आज भी अपनी मूल ध्वनि में बोले जाते हैं। ‘जोर’ हिंदी में पूरी तरह घुल चुका है, इसलिए उस पर बिंदी नहीं लगती — यह अति-सुधार की भूल है।
प्रश्न 10
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aअथिति
- Bअतिथि
- Cअतीथि
- Dअतिथी
व्याख्या
यह तत्सम पुल्लिंग शब्द है और ऐसे शब्दों का अंत प्रायः ह्रस्व ‘इ’ पर होता है, जैसे ‘तिथि’, ‘मुनि’, ‘कवि’। बोलने में खिंचाव आ जाने से लोग इसे दीर्घ कर देते हैं।
प्रश्न 11
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aआन्ख
- Bआंख
- Cआँख
- Dआख
व्याख्या
यहाँ नासिक्यता स्वर पर ही रहती है और उसके बाद कोई स्पर्श व्यंजन नहीं टकराता, इसलिए चंद्रबिंदु लगता है। बिंदु तब लगता जब आगे क, च, ट, त या प वर्ग का व्यंजन आता, जैसे ‘अंक’ में।
प्रश्न 12
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aप्रातःकाल
- Bमध्याह्न
- Cपूर्वाह्न
- Dअपरान्ह
व्याख्या
दिन के भागों के नाम ‘अह्न’ से बनते हैं, इसलिए शुद्ध रूप ‘अपराह्न’ है। ‘ह्न’ को उलटकर ‘न्ह’ लिख देना संयुक्त व्यंजन की अशुद्धि है।
प्रश्न 13
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aव्यावहारिक
- Bव्यावहारीक
- Cव्यवाहरिक
- Dव्यवहारिक
व्याख्या
तत्सम संज्ञा से ‘इक’ प्रत्यय जोड़कर विशेषण बनाते समय आदि स्वर की वृद्धि होती है (अ→आ, इ→ऐ, उ→औ) — व्यवहार से व्यावहारिक, प्रमाण से प्रामाणिक, इतिहास से ऐतिहासिक।
प्रश्न 14
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aशिंगार
- Bशृंगार
- Cश्रृंगार
- Dश्रिंगार
व्याख्या
इस शब्द में ‘श’ के नीचे केवल ‘ऋ’ की मात्रा लगती है। लोग उसके साथ एक अतिरिक्त ‘र’ भी जोड़ देते हैं, जिससे ‘श्रृंगार’ बन जाता है — वही सबसे आम अशुद्ध रूप है।
प्रश्न 15
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aपुरस्कार
- Bतिरस्कार
- Cपुरुस्कार
- Dनमस्कार
व्याख्या
‘पुरस्कार’ में ‘पुरः’ और ‘कार’ का मेल है; बीच में ‘उ’ जोड़ देना वर्ण-आगम की भूल है। शेष तीनों शब्द उसी बनावट के हैं और शुद्ध हैं।
प्रश्न 16
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aअनुषासन
- Bअनुशाशन
- Cअनुसासन
- Dअनुशासन
व्याख्या
इसमें पहले ‘श’ और फिर ‘स’ आता है। ‘शास्’ धातु में ‘श’ है, इसलिए उससे बने हर शब्द में ‘श’ ही आएगा — शासन, अनुशासन, शासक।
प्रश्न 17
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aकवयित्री
- Bकवियित्री
- Cकवयत्री
- Dकवियत्री
व्याख्या
‘कवि’ का स्त्रीलिंग रूप संधि के नियम से ‘कवयित्री’ बनता है, जहाँ ‘इ’ बदलकर ‘य’ हो जाता है। उच्चारण की सुविधा से बना ‘कवियत्री’ अशुद्ध है।
प्रश्न 18
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aस्वास्थ्य
- Bअत्याधिक
- Cहस्तक्षेप
- Dअध्ययन
व्याख्या
शुद्ध रूप ‘अत्यधिक’ है, जो ‘अति’ और ‘अधिक’ के मेल से बना है; बीच में दीर्घ मात्रा बढ़ा देना वर्ण-आगम की भूल है। शेष तीनों शब्द शुद्ध हैं।
प्रश्न 19
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aऋषी
- Bरिषि
- Cऋषि
- Dरीषि
व्याख्या
शब्द के आरंभ में स्वर ‘ऋ’ आता है, ‘रि’ नहीं; और यह तत्सम पुल्लिंग शब्द है, इसलिए अंत प्रायः ह्रस्व ‘इ’ पर होता है।
प्रश्न 20
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aनिरनय
- Bनिर्ण्य
- Cनिर्नय
- Dनिर्णय
व्याख्या
‘निर्’ में ‘र’ मौजूद है, इसलिए आगे आने वाला ‘न’ ण-नियम से बदलकर ‘ण’ हो जाता है।
प्रश्न 21
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aगौरवता
- Bलाघव
- Cमाधुर्य
- Dसामर्थ्य
व्याख्या
‘गौरव’ पहले से भाववाचक संज्ञा है, इसलिए उसमें ‘ता’ जोड़ना अनावश्यक और अशुद्ध है। यही भूल ‘माधुर्यता’ और ‘सामर्थ्यता’ में भी की जाती है, पर यहाँ वे शुद्ध रूप में दिए गए हैं।
प्रश्न 22
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aमुहूरत
- Bमुहूर्त
- Cमूहुर्त
- Dमुहुर्त
व्याख्या
इसमें ‘हू’ दीर्घ है और उसके बाद ‘र्त’ आता है। बोलने में दीर्घ स्वर दब जाता है, इसी से ‘मुहुर्त’ लिखा जाने लगता है।
प्रश्न 23
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aउपर्युक्त
- Bपुनरावृत्ति
- Cवापिस
- Dइकट्ठा
व्याख्या
शुद्ध रूप ‘वापस’ है; बीच में ‘इ’ की मात्रा जोड़ देना वर्ण-आगम की भूल है। ‘उपर्युक्त’ ‘उपरि’ और ‘उक्त’ की संधि से बना शुद्ध शब्द है।
प्रश्न 24
निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —
- Aबीमारि
- Bबिमारि
- Cबिमारी
- Dबीमारी
व्याख्या
पहले स्वर पर दीर्घ ‘ई’ आती है और अंत में भी दीर्घ ‘ई’। दोनों जगह मात्रा घटा देना इस शब्द की सबसे आम भूल है।
प्रश्न 25
निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —
- Aब्रह्मा
- Bब्राह्मण
- Cब्रम्हांड
- Dब्रह्मचारी
व्याख्या
इन सभी शब्दों में संयुक्त व्यंजन ‘ह्म’ आता है, इसलिए शुद्ध रूप ‘ब्रह्मांड’ है। उच्चारण में ‘म’ पहले सुनाई देने से लोग उसे ‘म्ह’ लिख देते हैं।