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संयुक्त व्यंजन, ण-न, श-ष-स और ऋ-रि

ये चारों भ्रम सुनने में एक जैसे लगने वाली ध्वनियों से पैदा होते हैं — ण और न, श ष और स, ऋ और रि। बोलने में फ़र्क़ नहीं पड़ता, लिखने में पूरा शब्द बदल जाता है। कुल 87 शब्द शुद्ध रूप सहित।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

संयुक्त व्यंजन की अशुद्धि

संयुक्त व्यंजन वे हैं जहाँ दो व्यंजन बिना स्वर के आपस में जुड़ जाते हैं — ज्व, ह्न, ह्म, द्व, ष्ठ। बोलते समय हम इस जोड़ को ढीला कर देते हैं और लिखते समय वही ढीलापन उतर आता है। ‘उज्ज्वल’ में ‘ज्’ के बाद ‘ज्व’ आता है, पर बोलने में यह ‘उज्जवल’ जैसा सुनाई देता है और वही लिख दिया जाता है। ‘ब्रह्मा’ में ‘ह्म’ है, पर हम ‘ब्रम्हा’ लिख बैठते हैं क्योंकि उच्चारण में ‘म’ पहले सुनाई पड़ता है। ‘चिह्न’ का भी यही हाल है — शुद्ध रूप में ‘ह्न’ है, पर ‘चिन्ह’ चल पड़ा है। दूसरा बड़ा समूह ‘ष्ठ’ और ‘ष्ट’ का है। ‘श्रेष्ठ’, ‘वरिष्ठ’, ‘कनिष्ठ’ में ‘ष्ठ’ है, जबकि ‘दुष्ट’, ‘कष्ट’, ‘इष्ट’ में ‘ष्ट’। इन्हें अलग-अलग याद करने के बजाय यह पकड़िए कि श्रेष्ठता या क्रम बताने वाले शब्दों में प्रायः ‘ष्ठ’ आता है। और ‘मध्याह्न’, ‘पूर्वाह्न’, ‘अपराह्न’ — इन तीनों में अंत ‘ह्न’ से होता है, ‘न्ह’ से नहीं; यह तीनों एक साथ याद कर लेने से एक ही बार में तीन प्रश्न सध जाते हैं।

संयुक्त व्यंजन से जुड़ी अशुद्धियाँ

  • उज्जवलउज्ज्वलसंयुक्त व्यंजन‘ज्’ के बाद ‘ज्व’
  • प्रज्ज्वलितप्रज्वलितसंयुक्त व्यंजन
  • ब्रम्हाब्रह्मासंयुक्त व्यंजन‘ह्म’ चाहिए, ‘म्ह’ नहीं
  • ब्रम्हाण्डब्रह्मांडसंयुक्त व्यंजन
  • ब्राम्हणब्राह्मणसंयुक्त व्यंजन
  • चिन्हचिह्नसंयुक्त व्यंजन‘ह्न’ चाहिए
  • मध्यान्हमध्याह्नसंयुक्त व्यंजन
  • पूर्वान्हपूर्वाह्नसंयुक्त व्यंजन
  • अपरान्हअपराह्नसंयुक्त व्यंजन
  • श्रेष्टश्रेष्ठसंयुक्त व्यंजन
  • वरिष्टवरिष्ठसंयुक्त व्यंजन
  • कनिष्टकनिष्ठसंयुक्त व्यंजन
  • दुश्टदुष्टसंयुक्त व्यंजन
  • कश्टकष्टसंयुक्त व्यंजन
  • उतपन्नउत्पन्नसंयुक्त व्यंजन
  • द्वंदद्वंद्वसंयुक्त व्यंजन
  • सौहार्द्रसौहार्दसंयुक्त व्यंजन
  • पश्चातापपश्चात्तापसंयुक्त व्यंजन
  • अद्ध्यक्षअध्यक्षसंयुक्त व्यंजन
  • सम्वादसंवादसंयुक्त व्यंजन
  • वाल्मिकीवाल्मीकिमात्रा

ण और न का भ्रम

यह भ्रम पूरी तरह उच्चारण से पैदा होता है, क्योंकि हिंदी बोलते समय हम ‘ण’ को ‘न’ जैसा ही बोल जाते हैं। पर लिखने का नियम साफ़ है और संस्कृत से आता है: तत्सम शब्द में यदि ‘ऋ’, ‘र’ या ‘ष’ आ चुका हो, और उसके बाद उसी शब्द में ‘न’ की ध्वनि आए, तो वह ‘न’ बदलकर ‘ण’ हो जाता है। इसी नियम से ‘प्र + मान’ से ‘प्रमाण’ बनता है, ‘परि + नाम’ से ‘परिणाम’, ‘नि + र् + नय’ से ‘निर्णय’, और ‘भूषन’ से ‘भूषण’। ‘रामायण’, ‘व्याकरण’, ‘कल्याण’, ‘निर्माण’ — इन सबमें पहले ‘र’ या ‘ऋ’ मौजूद है, इसीलिए आगे ‘ण’ आया है। जहाँ यह शर्त पूरी नहीं होती, वहाँ सीधा ‘न’ ही रहता है — ‘मनुष्य’, ‘जनता’, ‘नयन’ में कोई ‘ण’ नहीं आता। इसलिए जब भी कोई तत्सम शब्द सामने आए, पहले यह देखिए कि उसमें ‘र’, ‘ऋ’ या ‘ष’ पहले आया है या नहीं। यही एक जाँच आपको इस पूरे वर्ग में लगभग हर बार सही उत्तर तक पहुँचा देगी। ध्यान रहे, यह नियम तत्सम शब्दों पर लगता है, तद्भव और विदेशी शब्दों पर नहीं।

ण और न से जुड़ी अशुद्धियाँ

  • प्रमानप्रमाण‘र’ के बाद ‘न’ का ‘ण’ हो गया
  • परिनामपरिणाम
  • निर्नयनिर्णय
  • प्रानप्राण
  • करुनाकरुणा
  • वर्ननवर्णन
  • पूर्नपूर्ण
  • कल्यानकल्याण
  • रामायनरामायण
  • व्याकरनव्याकरण
  • निर्माननिर्माण
  • प्रनामप्रणाम
  • दक्षिनदक्षिण‘ष’ के बाद ‘ण’
  • लक्षनलक्षण
  • भूषनभूषण
  • श्रवनश्रवण
  • चरनचरण
  • हरनहरण
  • मरनमरण
  • गुनगुण
  • तृनतृण‘ऋ’ के बाद ‘ण’
  • ऋनऋण

श, ष और स का भ्रम

तीनों ऊष्म ध्वनियाँ हैं और बोलचाल में लगभग एक जैसी सुनाई देती हैं, इसलिए यह वर्ग सबसे ज़्यादा अंक काटता है। भेद समझ लीजिए — ‘श’ तालु से बनता है और ‘शरीर’, ‘शिक्षा’, ‘शहर’ जैसे शब्दों में आता है। ‘ष’ मूर्धा से बनता है और तत्सम शब्दों में ‘क’, ‘ट’, ‘ठ’, ‘ण’ या ‘प’ के साथ जुड़कर आता है — ‘मनुष्य’, ‘पुरुष’, ‘कष्ट’, ‘दुष्ट’, ‘वर्ष’। ‘स’ दंत्य है और ‘संसार’, ‘सरल’, ‘समय’ जैसे शब्दों में आता है। एक बहुत काम का सूत्र यह है कि हिंदी में ‘ष’ लगभग हमेशा तत्सम शब्दों में ही मिलता है; किसी तद्भव, देशज या विदेशी शब्द में ‘ष’ आए तो वह प्रायः अशुद्ध है। दूसरा सूत्र यह कि ‘क्ष’ और ‘ष्ट’ जैसे जोड़ हमेशा ‘ष’ से ही बनते हैं, ‘श’ से नहीं — इसलिए ‘कश्ट’ नहीं ‘कष्ट’, ‘विशेस’ नहीं ‘विशेष’। और ‘प्रशंसा’ पर विशेष ध्यान दीजिए: इसमें पहले ‘श’ आता है और बाद में ‘स’, जबकि लोग उलटकर ‘प्रसंशा’ लिख देते हैं।

श, ष और स से जुड़ी अशुद्धियाँ

  • अनुशाशनअनुशासन
  • प्रसंशाप्रशंसापहले ‘श’, फिर ‘स’
  • संतोशसंतोष
  • सासनशासन
  • मनुश्यमनुष्य
  • पुरुशपुरुष
  • विशेसविशेष
  • सिक्षाशिक्षा
  • आकर्शणआकर्षण
  • संसयसंशय
  • सरीरशरीर
  • सुसीलसुशील
  • वर्शवर्ष
  • हर्शहर्ष
  • भाशाभाषा
  • शोसणशोषण
  • अभिशेकअभिषेक
  • आसाआशा
  • सांतिशांति
  • दोशदोष
  • निशेधनिषेध
  • संघर्शसंघर्ष
  • मसीनमशीनविदेशी शब्द में ‘श’ आता है, ‘ष’ कभी नहीं
  • विसविष

ऋ और रि का भ्रम

‘ऋ’ संस्कृत का स्वर है, ‘रि’ दो ध्वनियों का जोड़ है — ‘र’ और ‘इ’। बोलने में हिंदी क्षेत्र में ‘ऋ’ को प्रायः ‘रि’ की तरह ही बोला जाता है, इसीलिए ‘ऋतु’ को ‘रितु’ और ‘ऋषि’ को ‘रिषि’ लिख देना आम है। उलटी दिशा की भूल इससे भी ज़्यादा होती है: जहाँ शब्द के भीतर ‘ृ’ की मात्रा लगनी चाहिए, वहाँ ‘रि’ या ‘र्’ लिख दिया जाता है — ‘कृपा’ की जगह ‘किरपा’, ‘हृदय’ की जगह ‘ह्रदय’, ‘दृष्टि’ की जगह ‘द्रिष्टि’। पहचानने का नियम यह है कि ‘ऋ’ केवल तत्सम शब्दों में मिलता है, और वहाँ वह स्वर की तरह काम करता है, इसलिए उसकी मात्रा व्यंजन के नीचे लगती है — कृ, गृ, दृ, वृ, हृ, मृ, नृ। यदि आपको शब्द के अर्थ से पता चले कि वह संस्कृत से आया है, तो ‘रि’ लिखने से पहले दो बार सोचिए। इस वर्ग का सबसे प्रसिद्ध जाल ‘शृंगार’ है — लोग इसे ‘श्रृंगार’ लिखते हैं, यानी ‘र’ को दो बार डाल देते हैं, जबकि शुद्ध रूप में ‘श’ के नीचे केवल ‘ृ’ की मात्रा लगती है।

ऋ और रि से जुड़ी अशुद्धियाँ

  • रितुऋतु
  • रिषिऋषि
  • रिणऋण
  • किरपाकृपा
  • क्रिषिकृषि
  • प्रकिर्तिप्रकृति
  • संस्किरतिसंस्कृति
  • द्रिष्टिदृष्टि
  • स्रिष्टिसृष्टि
  • व्रिक्षवृक्ष
  • व्रिद्धवृद्ध
  • ह्रदयहृदय‘ह’ के नीचे ‘ृ’ की मात्रा लगती है
  • म्रित्युमृत्यु
  • न्रित्यनृत्य
  • त्रिप्ततृप्त
  • घ्रणाघृणा
  • अमरितअमृत
  • मात्रिभूमिमातृभूमि
  • नेत्रत्वनेतृत्व
  • श्रृंगारशृंगार‘श’ के नीचे केवल ‘ृ’, अतिरिक्त ‘र’ नहीं

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aउज्जवल
  2. Bउज्ज्वल
  3. Cउज्वल
  4. Dउज्ज्वाल

व्याख्या

यहाँ ‘ज्’ के बाद संयुक्त व्यंजन ‘ज्व’ आता है। बोलने में यह जोड़ ढीला पड़ जाता है, इसी से ‘उज्जवल’ लिखा जाने लगा, पर संयुक्त व्यंजन को तोड़ना अशुद्धि है।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aप्रसन्शा
  2. Bप्रशन्सा
  3. Cप्रसंशा
  4. Dप्रशंसा

व्याख्या

इस शब्द में पहले ‘श’ आता है और बाद में ‘स’। बोलचाल में दोनों ऊष्म ध्वनियाँ एक-सी सुनाई देती हैं, इसीलिए लोग क्रम उलटकर ‘प्रसंशा’ लिख बैठते हैं।

प्रश्न 3

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aमनुष्य
  2. Bमणुष्य
  3. Cमनुश्य
  4. Dमनुस्य

व्याख्या

‘ष्य’ में मूर्धन्य ‘ष’ आता है, ‘श’ या ‘स’ नहीं। साथ ही यहाँ ‘ण’ का नियम नहीं लगता, क्योंकि शब्द में पहले कोई ऋ, र या ष नहीं आया — इसलिए ‘मणुष्य’ भी अशुद्ध है।

प्रश्न 4

निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —

  1. Aदुष्ट
  2. Bश्रेष्ट
  3. Cइष्ट
  4. Dकष्ट

व्याख्या

श्रेष्ठता और क्रम बताने वाले शब्दों में ‘ष्ठ’ आता है, इसलिए शुद्ध रूप ‘श्रेष्ठ’ है। ‘कष्ट’, ‘दुष्ट’ और ‘इष्ट’ में ‘ष्ट’ ही सही है।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aपरिणम
  2. Bपरिनाम
  3. Cपरिणाम
  4. Dपरीणाम

व्याख्या

‘परि’ में ‘र’ आ चुका है, इसलिए आगे आने वाला ‘न’ बदलकर ‘ण’ हो जाता है। यही ण-नियम ‘प्रमाण’, ‘निर्णय’ और ‘निर्माण’ में भी काम करता है।

प्रश्न 6

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aह्रिदय
  2. Bह्रदय
  3. Cहिरदय
  4. Dहृदय

व्याख्या

यह तत्सम शब्द है और इसमें ‘ह’ के नीचे ‘ऋ’ की मात्रा लगती है। उसे ‘र’ और ‘इ’ में तोड़ देना ऋ/रि का सबसे आम भ्रम है।

प्रश्न 7

निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —

  1. Aप्रातःकाल
  2. Bमध्याह्न
  3. Cपूर्वाह्न
  4. Dअपरान्ह

व्याख्या

दिन के भागों के नाम ‘अह्न’ से बनते हैं, इसलिए शुद्ध रूप ‘अपराह्न’ है। ‘ह्न’ को उलटकर ‘न्ह’ लिख देना संयुक्त व्यंजन की अशुद्धि है।

प्रश्न 8

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aशिंगार
  2. Bशृंगार
  3. Cश्रृंगार
  4. Dश्रिंगार

व्याख्या

इस शब्द में ‘श’ के नीचे केवल ‘ऋ’ की मात्रा लगती है। लोग उसके साथ एक अतिरिक्त ‘र’ भी जोड़ देते हैं, जिससे ‘श्रृंगार’ बन जाता है — वही सबसे आम अशुद्ध रूप है।

प्रश्न 9

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aअनुषासन
  2. Bअनुशाशन
  3. Cअनुसासन
  4. Dअनुशासन

व्याख्या

इसमें पहले ‘श’ और फिर ‘स’ आता है। ‘शास्’ धातु में ‘श’ है, इसलिए उससे बने हर शब्द में ‘श’ ही आएगा — शासन, अनुशासन, शासक।

प्रश्न 10

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aऋषी
  2. Bरिषि
  3. Cऋषि
  4. Dरीषि

व्याख्या

शब्द के आरंभ में स्वर ‘ऋ’ आता है, ‘रि’ नहीं; और यह तत्सम पुल्लिंग शब्द है, इसलिए अंत प्रायः ह्रस्व ‘इ’ पर होता है।

प्रश्न 11

निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है —

  1. Aनिरनय
  2. Bनिर्ण्य
  3. Cनिर्नय
  4. Dनिर्णय

व्याख्या

‘निर्’ में ‘र’ मौजूद है, इसलिए आगे आने वाला ‘न’ ण-नियम से बदलकर ‘ण’ हो जाता है।

प्रश्न 12

निम्नलिखित में अशुद्ध शब्द है —

  1. Aब्रह्मा
  2. Bब्राह्मण
  3. Cब्रम्हांड
  4. Dब्रह्मचारी

व्याख्या

इन सभी शब्दों में संयुक्त व्यंजन ‘ह्म’ आता है, इसलिए शुद्ध रूप ‘ब्रह्मांड’ है। उच्चारण में ‘म’ पहले सुनाई देने से लोग उसे ‘म्ह’ लिख देते हैं।