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उपसर्ग

किसी शब्द के आगे एक छोटा-सा टुकड़ा जोड़ दीजिए और उसका पूरा अर्थ बदल जाता है। ‘हार’ का मतलब है पराजय, पर उसके आगे ‘प्र’ लगाते ही ‘प्रहार’ बन जाता है — यानी चोट। ‘ज्ञान’ के आगे ‘वि’ लगाइए तो ‘विज्ञान’ हो जाता है। ये छोटे-छोटे टुकड़े अपने आप में कोई पूरा शब्द नहीं होते, अकेले बोलिए तो कुछ समझ नहीं आता, लेकिन किसी शब्द के आगे बैठते ही उसका अर्थ मोड़ देते हैं। व्याकरण में इन्हीं को उपसर्ग कहते हैं। राजस्थान की लगभग हर सरकारी भर्ती परीक्षा के हिंदी खंड में उपसर्ग से प्रश्न आता है, और अच्छी बात यह है कि यह उन थोड़े-से अध्यायों में से है जहाँ नियम साफ़ हैं, अपवाद कम हैं, और एक बार सूची याद हो जाए तो अंक लगभग पक्के हैं। इस पृष्ठ पर हम उपसर्ग को शुरू से समझेंगे — परिभाषा, तीनों वर्ग, हर वर्ग के उपसर्गों की पूरी तालिका, सैकड़ों जाँचे हुए उदाहरण, वह तरीक़ा जिससे आप पहचान सकें कि शब्द के शुरू का अक्षर सचमुच उपसर्ग है या शब्द का अपना हिस्सा, और अंत में पच्चीस अभ्यास प्रश्न।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

उपसर्ग किसे कहते हैं?

उपसर्ग वह शब्दांश है जो किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उस शब्द के अर्थ में बदलाव ले आता है। ‘उपसर्ग’ शब्द स्वयं दो हिस्सों से बना है — ‘उप’ यानी पास या समीप, और ‘सर्ग’ यानी सृष्टि या रचना। अर्थात जो किसी शब्द के पास बैठकर नई रचना कर दे, वही उपसर्ग है। ध्यान रखिए, उपसर्ग हमेशा शब्द के आगे लगता है, पीछे नहीं। पीछे जुड़ने वाले शब्दांश को प्रत्यय कहते हैं, और परीक्षा में यही दोनों आमने-सामने पूछे जाते हैं।

उपसर्ग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता। आप किसी से यह नहीं कह सकते कि ‘मुझे प्र चाहिए’ या ‘वह अनु लाया’। ‘प्र’ और ‘अनु’ तब तक निरर्थक हैं जब तक किसी शब्द के साथ न जुड़ें। जुड़ते ही वे अपना अर्थ उस शब्द को दे देते हैं। इसीलिए व्याकरण में इन्हें शब्द नहीं, शब्दांश कहा जाता है।

अब देखिए कि उपसर्ग अर्थ को कितने अलग-अलग ढंग से बदलता है। कभी वह अर्थ को पूरी तरह उलट देता है — ‘जय’ का उल्टा ‘पराजय’, ‘मान’ का उल्टा ‘अपमान’। कभी वह अर्थ को और गहरा या तीव्र कर देता है — ‘बल’ से ‘प्रबल’, ‘सिद्ध’ से ‘प्रसिद्ध’। कभी वह अर्थ में एक नई दिशा जोड़ देता है — ‘हार’ से ‘आहार’ और ‘प्रहार’, ‘वाद’ से ‘संवाद’ और ‘विवाद’। और कभी वह अर्थ लगभग वही रहने देता है, बस उसमें थोड़ा-सा रंग भर देता है — ‘गम’ से ‘आगम’। इसी कारण एक ही मूल शब्द से अलग-अलग उपसर्ग लगाकर दर्जनों नए शब्द बनाए जा सकते हैं, और यही हिंदी की शब्द-संपदा बढ़ाने का सबसे सस्ता तरीक़ा है।

मूल शब्द ‘हार’ से बने उपसर्ग-युक्त शब्द — एक ही शब्द, अलग-अलग उपसर्ग

  • प्रहारप्र + हारचोट करना — ‘प्र’ ने अर्थ को आगे की ओर मोड़ दिया
  • आहारआ + हारभोजन — जो भीतर की ओर लिया जाए
  • विहारवि + हारघूमना, भ्रमण
  • संहारसम् + हारपूरी तरह नष्ट करना
  • उपहारउप + हारपास लाकर दी गई भेंट
  • परिहारपरि + हारत्याग देना, छोड़ना
  • उद्धारउत् + हारऊपर उठाना — ‘उत्’ का ‘त्’ यहाँ ‘द्ध’ में बदल गया
  • निराहारनिर् + आहारबिना भोजन के — यहाँ दो उपसर्ग हैं

एक वाक्य में पहचान

अगर किसी शब्द के शुरू का हिस्सा हटाने पर बचा हुआ भाग अपने आप में कोई सार्थक शब्द या धातु हो, और हटाया हुआ हिस्सा अकेले बोलने पर निरर्थक लगे — तो वही हिस्सा उपसर्ग है।

उपसर्ग के भेद

हिंदी में उपसर्ग तीन जगहों से आए हैं, और परीक्षा में वर्गीकरण भी इसी आधार पर पूछा जाता है। पहला वर्ग संस्कृत से सीधे आया है — ये तत्सम शब्दों के साथ लगते हैं और इनकी संख्या बाईस मानी जाती है। दूसरा वर्ग हिंदी का अपना है — ये अधिकतर संस्कृत उपसर्गों के ही बिगड़े-सँवरे रूप हैं, जो बोलचाल में घुल-मिलकर अलग पहचान बना चुके हैं। तीसरा वर्ग बाहर से आया है — उर्दू, फ़ारसी और अरबी से, तथा कुछ अंग्रेज़ी से। इन्हें आगत या विदेशी उपसर्ग कहते हैं।

इस बँटवारे को याद रखने का सबसे आसान तरीक़ा यह है कि आप उपसर्ग को नहीं, उसके साथ जुड़े शब्द को देखिए। अगर मूल शब्द तत्सम है — जैसे कार, ज्ञान, मान, गति — तो उपसर्ग भी लगभग हमेशा संस्कृत का होगा। अगर मूल शब्द ठेठ हिंदी का है — जैसे पढ़, मोल, पका, राह — तो उपसर्ग हिंदी का होगा। और अगर मूल शब्द उर्दू-फ़ारसी का है — जैसे कायदा, नसीब, वजह, हाल — तो उपसर्ग भी उसी परिवार का होगा। भाषा अपने ही परिवार के भीतर जुड़ना पसंद करती है।

उपसर्ग के तीन वर्ग — एक नजर में

वर्गकहाँ से आएकितनेकिन शब्दों से जुड़ते हैंनमूना उदाहरण
संस्कृत उपसर्गसंस्कृत भाषा से22 मुख्यतत्सम शब्दों सेप्रहार, अनुशासन, विज्ञान
हिंदी उपसर्गसंस्कृत से बिगड़कर बने तद्भव रूपलगभग 12–15तद्भव और देशज शब्दों सेअनपढ़, अधपका, चौराहा
आगत उपसर्ग (उर्दू-फ़ारसी-अरबी)उर्दू, फ़ारसी, अरबी सेलगभग 15इन्हीं भाषाओं से आए शब्दों सेबेकार, लापरवाह, खुशनसीब
आगत उपसर्ग (अंग्रेज़ी)अंग्रेज़ी से4–5पद और विभाग के नामों सेसबइंस्पेक्टर, हेडमास्टर

परीक्षा में यहीं से प्रश्न बनता है

प्रश्न अक्सर सीधा नहीं आता कि ‘उपसर्ग कौन-सा है’। कई बार पूछा जाता है कि दिए गए चार शब्दों में कौन-सा शब्द संस्कृत उपसर्ग से नहीं बना, या किस शब्द में विदेशी उपसर्ग लगा है। इसलिए उपसर्ग के साथ-साथ यह भी याद रखिए कि वह किस वर्ग का है।

उपसर्ग के तीन वर्ग — विस्तार से पढ़ें

जहाँ अंक सबसे ज़्यादा कटते हैं

आम गलतियाँ — इन्हें दोहरा लीजिए

पहली, संधि के बाद बने रूप को उपसर्ग मान लेना — ‘निष्’, ‘निश्’, ‘दुष्’, ‘दुश्’ उपसर्ग नहीं, ‘निस्’ और ‘दुस्’ हैं। दूसरी, शब्द के अपने पहले अक्षर को उपसर्ग समझ लेना — अनार, कमल, बेटा, सुबह में कोई उपसर्ग नहीं है। तीसरी, वर्ग गड़बड़ा देना — ‘सुगंध’ का ‘सु’ संस्कृत का है पर ‘सुडौल’ का ‘सु’ हिंदी का। चौथी, ‘बेकार’ जैसे शब्दों में ‘बे’ को हिंदी का मान लेना, जबकि वह फ़ारसी से आया आगत उपसर्ग है। पाँचवीं, उपसर्ग और प्रत्यय की जगह उलट देना — जो आगे लगे वह उपसर्ग, जो पीछे लगे वह प्रत्यय।

उपसर्ग से शब्द-भंडार कैसे बढ़ता है

उपसर्ग सिर्फ़ परीक्षा का अध्याय नहीं है, यह भाषा सीखने का सबसे किफ़ायती रास्ता भी है। एक मूल शब्द याद कीजिए और उसके आगे बारी-बारी से अलग-अलग उपसर्ग लगाकर देखिए — दस-बारह नए शब्द अपने आप बन जाएँगे, और हर शब्द का अर्थ भी आपको पहले से पता होगा क्योंकि उपसर्ग का अर्थ आप जानते हैं। ‘हार’ से प्रहार, आहार, विहार, संहार, उपहार, परिहार बने। ‘मान’ से अपमान, सम्मान, अभिमान, परिमाण, प्रमाण की दिशा खुली। ‘गति’ से प्रगति, दुर्गति, सद्गति, अवगति निकले। यानी एक शब्द की जड़ पकड़ लीजिए, उपसर्ग अपने आप शाखाएँ बना देंगे।

अभ्यास का एक तरीक़ा यह है कि रोज़ अखबार पढ़ते समय पाँच ऐसे शब्द छाँटिए जिनके आगे कोई उपसर्ग लगा हो, और उन्हें दो हिस्सों में तोड़कर कॉपी में लिखिए। सरकारी सूचनाओं और समाचारों की भाषा में उपसर्ग वाले शब्द भरे पड़े हैं — अधिसूचना, प्रतिवेदन, निरस्त, पुनर्भरण, उपखंड, अनुमोदन, विज्ञप्ति। एक महीने में आपके पास डेढ़ सौ शब्दों की अपनी सूची तैयार हो जाएगी, और वह किसी भी किताब की सूची से ज़्यादा काम आएगी क्योंकि वह आपकी अपनी लिखी हुई होगी।

एक बात और। उपसर्ग लगने पर कभी-कभी वर्ण बदल जाते हैं — ‘उत्’ का ‘त्’ कहीं ‘द्’ बन जाता है, कहीं ‘न्न’, कहीं ‘ल्ल’। ‘सम्’ का ‘म्’ अनुस्वार बन जाता है। ‘निस्’ का विसर्ग ‘ष्’ या ‘श्’ हो जाता है। ये सब बदलाव संधि के नियमों से होते हैं, उपसर्ग के नियम से नहीं। इसलिए अगर आपने संधि का अध्याय पहले पढ़ लिया है तो उपसर्ग के ये बदले हुए रूप अपने आप समझ में आ जाएँगे, और अगर नहीं पढ़ा तो इतना याद रख लीजिए कि जो रूप जुड़ने के बाद बना है वह उत्तर नहीं है — उत्तर हमेशा उपसर्ग का मूल रूप होता है।

रोज़ का पाँच मिनट का अभ्यास

एक मूल शब्द लीजिए — जैसे ‘योग’। अब मन ही मन उसके आगे उपसर्ग लगाते जाइए — प्रयोग, संयोग, वियोग, उपयोग, नियोग, अनुयोग, दुर्योग। हर बार अर्थ भी बोलिए। यह अभ्यास दोहराव से ज़्यादा असरदार है, क्योंकि इसमें आप शब्द याद नहीं करते, बनाते हैं।

उपसर्ग — एक पन्ने का दोहराव

याद रखने की बातसार
परिभाषाशब्द के आगे जुड़कर अर्थ बदलने वाला शब्दांश
कहाँ लगता हैहमेशा शब्द के आरंभ में
अकेले प्रयोगनहीं — अकेले निरर्थक होता है
भेदसंस्कृत, हिंदी, आगत (उर्दू-फ़ारसी-अरबी तथा अंग्रेज़ी)
संस्कृत उपसर्ग22 — प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आङ्, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप
हिंदी उपसर्गअ, अन, कु, सु, बिन, अध, उन, दु, नि, भर, चौ, पच, औ, स
उर्दू-फ़ारसी-अरबीबा, बे, ला, गैर, हम, हर, कम, खुश, दर, ना, सर, बद, बिला, फ़ी
अंग्रेज़ीसब, डिप्टी, हेड, वाइस
निस् का बदलावक/ख/प/फ से पहले निष्, च/छ से पहले निश्, त/थ/स से पहले निस्, स्वर व घोष से पहले निर्
दुस् का बदलावक/ख/प/फ से पहले दुष्, च/छ से पहले दुश्, त/थ/स से पहले दुस्, स्वर व घोष से पहले दुर्
पहचान का सूत्रहटाने पर बचा भाग सार्थक हो और अर्थ में अपेक्षित बदलाव आए
धोखा देने वाले शब्दअनार, कमल, बेटा, सुबह, निशान, आम, परिंदा, प्रेम
उपसर्ग बनाम प्रत्ययआगे लगे तो उपसर्ग, पीछे लगे तो प्रत्यय
दो उपसर्गप्रत्युपकार, व्याकरण, समाचार, निराकरण, सुप्रसिद्ध

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB पटवारीसंयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड · 22 प्रश्न / 44 अंक वाले संयुक्त हिंदी-अंग्रेज़ी खंड का भाग
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तरप्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB VDOभाषा खंड · 50 प्रश्न / 50 अंक वाले भाषा खंड का भाग
RSSB LDCप्रश्न-पत्र II सामान्य हिंदी · सामान्य हिंदी (75 प्रश्न) का भाग
RPSC RAS मुख्य परीक्षाप्रश्न-पत्र IV, इकाई I (सामान्य हिन्दी) का भाग अ · ‘उपसर्ग एवं प्रत्यय — शब्दों में से उपसर्ग एवं प्रत्यय पृथक् करना’ · 30 अंक वाले भाग का एक बिंदु — पाठ्यक्रम दिनांक 09-01-2026
RPSC पुलिस उप-निरीक्षकप्रश्न-पत्र I सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक वाले प्रश्न-पत्र का भाग
RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड I · खंड I का भाग
RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्न-पत्र, खंड प्रथम · खंड प्रथम का भाग
REETहिंदी भाषा I / II · 30 अंक प्रत्येक
राजस्थान उच्च न्यायालय LDCहिंदी खंड · 50 प्रश्न / 100 अंक वाले हिंदी खंड का भाग

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'अनुशासन' शब्द में कौन सा उपसर्ग है?

  1. Aअनु
  2. Bअन
  3. Cअ
  4. Dअनि

व्याख्या

‘अनु’ का अर्थ है पीछे चलना या क्रम से चलना, और यहाँ ‘शासन’ पूरा सार्थक शब्द बचता है। इसीलिए अलग किया जाने वाला शब्दांश ‘अनु’ है। ‘अन’ हिंदी उपसर्ग है जो ‘अनपढ़’ जैसे तद्भव शब्दों से जुड़ता है, तत्सम ‘शासन’ से नहीं।

प्रश्न 2

'निष्पाप' शब्द में प्रयुक्त मूल उपसर्ग कौन सा है?

  1. Aनिष्
  2. Bनिस्
  3. Cनिर्
  4. Dनि

व्याख्या

विसर्ग संधि का नियम है कि ‘निः’ के बाद क, ख, प या फ आने पर विसर्ग ‘ष्’ में बदल जाता है। ‘पाप’ का ‘प’ सामने होने से ‘निस्’ का रूप ‘निष्’ हो गया। उत्तर में संधि के बाद बना रूप नहीं, मूल उपसर्ग लिखा जाता है।

प्रश्न 3

'दुर्गम' में कौन सा उपसर्ग है?

  1. Aदुस्
  2. Bदु
  3. Cदुर्
  4. Dदूर

व्याख्या

‘ग’ घोष व्यंजन है, और घोष व्यंजन या स्वर से पहले ‘दुः’ का विसर्ग ‘र्’ में बदलता है। इसी नियम से यहाँ ‘दुर्’ रूप बनता है। ‘दुस्’ रूप तब आता है जब आगे त, थ या स हो।

प्रश्न 4

'प्रत्येक' शब्द का सही विग्रह क्या है?

  1. Aप्र + त्येक
  2. Bप्रत् + एक
  3. Cपरा + एक
  4. Dप्रति + एक

व्याख्या

‘प्रति’ का अर्थ यहाँ ‘हर एक’ है। स्वर संधि के अनुसार ‘इ’ के बाद ‘ए’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है, इसलिए प्रति + एक मिलकर ‘प्रत्येक’ बना।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में से किस शब्द में उपसर्ग नहीं है?

  1. Aअनपढ़
  2. Bअनार
  3. Cअनमोल
  4. Dअनजान

व्याख्या

उपसर्ग तभी माना जाता है जब उसे हटाने पर बचा हुआ भाग अपने आप में सार्थक हो। ‘अनार’ में से ‘अन’ हटाने पर ‘आर’ बचता है जो कोई शब्द नहीं, जबकि बाकी तीनों में पढ़, मोल और जान सार्थक शब्द हैं।

प्रश्न 6

'बेकार' शब्द में लगा उपसर्ग किस भाषा का है?

  1. Aसंस्कृत
  2. Bहिंदी
  3. Cफ़ारसी
  4. Dअंग्रेज़ी

व्याख्या

‘बे’ फ़ारसी से आया आगत उपसर्ग है जिसका अर्थ ‘बिना’ होता है। यही उपसर्ग बेईमान, बेहोश और बेशर्म में भी उसी अर्थ में लगता है। हिंदी का अपना निषेधवाचक उपसर्ग ‘अन’ या ‘बिन’ होता है।

प्रश्न 7

'अधमरा' शब्द में कौन सा उपसर्ग है और उसका अर्थ क्या है?

  1. Aअ — अभाव
  2. Bअधि — ऊपर
  3. Cअप — बुरा
  4. Dअध — आधा

व्याख्या

‘अध’ संस्कृत के ‘अर्ध’ का हिंदी रूप है और इसका अर्थ आधा होता है। अधपका, अधजला और अधखिला में भी यही अर्थ मिलता है। ‘अधि’ तत्सम उपसर्ग है जिसका अर्थ ऊपर या श्रेष्ठ है।

प्रश्न 8

'उन्नति' शब्द किन दो हिस्सों से बना है?

  1. Aउत् + नति
  2. Bउन + नति
  3. Cउ + न्नति
  4. Dउप + नति

व्याख्या

‘उत्’ का अर्थ ऊपर की ओर है। व्यंजन संधि के अनुसार ‘त्’ के बाद ‘न’ आने पर ‘त्’ भी ‘न’ में बदल जाता है, जिससे ‘न्न’ बनता है। इसी नियम से उत् + नति = उन्नति।

प्रश्न 9

'स्वागत' शब्द का सही विग्रह है —

  1. Aस्व + आगत
  2. Bस + वागत
  3. Cसु + आगत
  4. Dस्वा + गत

व्याख्या

‘सु’ का अर्थ अच्छा है और ‘आगत’ का अर्थ आया हुआ, यानी अच्छा आगमन। स्वर संधि में ‘उ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘उ’ का ‘व्’ हो जाता है, इसीलिए ‘स्वा’ बना।

प्रश्न 10

'संस्कार' शब्द में कौन सा उपसर्ग है?

  1. Aसन्
  2. Bस
  3. Cसह
  4. Dसम्

व्याख्या

‘सम्’ का अर्थ अच्छी तरह या पूर्णता है। लिखते समय ‘म्’ अनुस्वार के रूप में आ जाता है, इसलिए ‘सं’ दिखता है, पर उपसर्ग ‘सम्’ ही माना जाता है। संगम, संतोष और संचय में भी यही उपसर्ग है।

प्रश्न 11

'पराजय' में 'परा' उपसर्ग का अर्थ क्या है?

  1. Aउल्टा या विपरीत
  2. Bआगे
  3. Cपास
  4. Dनीचे

व्याख्या

‘परा’ अर्थ को उलट देने वाला उपसर्ग है। ‘जय’ का अर्थ जीत है और ‘परा’ लगते ही वह हार बन जाता है। पराभव और परावर्तन में भी यही उलटने का भाव है।

प्रश्न 12

'लापरवाह' में प्रयुक्त उपसर्ग किस भाषा से आया है?

  1. Aफ़ारसी
  2. Bअरबी
  3. Cतुर्की
  4. Dअंग्रेज़ी

व्याख्या

‘ला’ अरबी से आया निषेधवाचक उपसर्ग है जिसका अर्थ ‘नहीं’ या ‘बिना’ है। लाइलाज, लाजवाब और लावारिस में भी यही उपसर्ग लगा है।

प्रश्न 13

'हेडमास्टर' शब्द में उपसर्ग है —

  1. Aहे
  2. Bमास्टर
  3. Cहेडमा
  4. Dहेड

व्याख्या

‘हेड’ अंग्रेज़ी से आया आगत उपसर्ग है जिसका अर्थ मुख्य या प्रधान होता है, और यह पद-नामों के आगे लगता है। हेडक्लर्क तथा हेडकांस्टेबल में भी यही उपसर्ग है।

प्रश्न 14

'निरोग' शब्द का सही विग्रह क्या है?

  1. Aनिर् + रोग
  2. Bनि + रोग
  3. Cनिस् + रोग
  4. Dनिरो + ग

व्याख्या

‘निर्’ का अर्थ रहित है। ‘र्’ के तुरंत बाद फिर ‘र’ आने पर एक ‘र’ लुप्त हो जाता है, इसी से ‘निरोग’ रूप बनता है।

प्रश्न 15

संस्कृत के मान्य उपसर्गों की संख्या कितनी मानी जाती है?

  1. A20
  2. B22
  3. C21
  4. D24

व्याख्या

संस्कृत व्याकरण में प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आङ्, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि और उप — कुल बाईस उपसर्ग गिनाए जाते हैं।

प्रश्न 16

'अत्याचार' शब्द में कितने उपसर्ग लगे हैं?

  1. Aएक
  2. Bतीन
  3. Cदो
  4. Dएक भी नहीं

व्याख्या

इसका विग्रह अति + आ + चार है, यानी ‘अति’ और ‘आ’ दो उपसर्ग मूल शब्द ‘चार’ के आगे लगे हैं। ‘इ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘या’ बन जाने से ‘अत्या’ रूप दिखता है।

प्रश्न 17

'चौराहा' में 'चौ' उपसर्ग का अर्थ क्या है?

  1. Aचार
  2. Bचौड़ा
  3. Cऊँचा
  4. Dचौथा

व्याख्या

‘चौ’ संस्कृत के ‘चतुः’ का हिंदी रूप है और इसका अर्थ चार होता है। चौकोर, चौपाया और चौमासा में भी यही अर्थ मिलता है।

प्रश्न 18

निम्न में से किस शब्द में विदेशी उपसर्ग नहीं लगा है?

  1. Aबदनाम
  2. Bगैरहाजिर
  3. Cनिडर
  4. Dनालायक

व्याख्या

‘निडर’ में ‘नि’ हिंदी का अपना उपसर्ग है जो ‘डर’ जैसे तद्भव शब्द से जुड़ा है। बाकी तीनों में बद, गैर और ना — तीनों उर्दू-फ़ारसी-अरबी परिवार से आए आगत उपसर्ग हैं।

प्रश्न 19

'उपकार' में 'उप' उपसर्ग का अर्थ क्या है?

  1. Aऊपर
  2. Bनिकट या गौण
  3. Cदूर
  4. Dविपरीत

व्याख्या

‘उप’ का अर्थ पास होना, सहायक होना या क्रम में नीचे होना है। उपवन, उपमंत्री और उपनाम में भी यही भाव दिखता है।

प्रश्न 20

'दुश्चरित्र' शब्द में मूल उपसर्ग कौन सा है?

  1. Aदुर्
  2. Bदुश्
  3. Cदु
  4. Dदुस्

व्याख्या

विसर्ग संधि के अनुसार ‘दुः’ के बाद च या छ आने पर विसर्ग ‘श्’ बन जाता है। ‘चरित्र’ का ‘च’ सामने होने से यहाँ ‘दुश्’ रूप बना, पर मूल उपसर्ग ‘दुस्’ ही है।

प्रश्न 21

'अभ्यास' शब्द का सही विग्रह है —

  1. Aअभी + आस
  2. Bअ + भ्यास
  3. Cअभि + आस
  4. Dअभ + यास

व्याख्या

‘अभि’ का अर्थ ओर या सामने है। स्वर संधि में ‘इ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है, जिससे अभि + आस मिलकर ‘अभ्यास’ बनता है।

प्रश्न 22

'कमजोर' शब्द में लगा 'कम' किस वर्ग का उपसर्ग है?

  1. Aआगत — फ़ारसी
  2. Bहिंदी
  3. Cसंस्कृत
  4. Dअंग्रेज़ी

व्याख्या

‘कम’ फ़ारसी से आया उपसर्ग है जिसका अर्थ थोड़ा या न्यून है, और यह उसी परिवार के शब्दों से जुड़ता है। कमअक्ल, कमसिन और कमउम्र में भी यही उपसर्ग है।

प्रश्न 23

'अपमानित' शब्द के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. Aइसमें केवल उपसर्ग लगा है
  2. Bइसमें केवल प्रत्यय लगा है
  3. Cइसमें कोई शब्दांश नहीं लगा
  4. Dइसमें उपसर्ग और प्रत्यय दोनों लगे हैं

व्याख्या

इसका विग्रह अप + मान + इत है। ‘अप’ शब्द के आगे लगा है इसलिए उपसर्ग है, और ‘इत’ शब्द के पीछे लगा है इसलिए प्रत्यय है। जो आगे लगे वह उपसर्ग, जो पीछे लगे वह प्रत्यय।

प्रश्न 24

'पर्यटन' शब्द का सही विग्रह क्या है?

  1. Aपर + अटन
  2. Bपरि + अटन
  3. Cपरी + अटन
  4. Dपर्य + टन

व्याख्या

‘परि’ का अर्थ चारों ओर है और ‘अटन’ का अर्थ घूमना। ‘इ’ के बाद ‘अ’ आने पर ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है, इसी से ‘पर्यटन’ रूप बना।

प्रश्न 25

'व्याकरण' शब्द में कौन-कौन से उपसर्ग लगे हैं?

  1. Aवि + आ
  2. Bकेवल वि
  3. Cकेवल आ
  4. Dव्या

व्याख्या

इसका विग्रह वि + आ + करण है, यानी दो उपसर्ग एक साथ लगे हैं। ‘इ’ के बाद ‘आ’ आने पर ‘या’ बन जाता है, जिससे ‘व्या’ रूप दिखाई देता है।