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उपसर्ग के भेद से अर्थ-भेद

इस समूह की जोड़ियों में मूल शब्द एक ही है और आगे लगा उपसर्ग अलग — और वही उपसर्ग पूरा अर्थ तय कर देता है। ‘उपकार’ भलाई है, ‘अपकार’ बुराई; ‘अवलंब’ सहारा है, ‘अविलंब’ तुरंत। कुल 12 युग्म, हर शब्द के साथ उसका अपना वाक्य।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

उपसर्ग बदला, अर्थ बदला

यह समूह बाकी तीनों से अलग है, और सबसे आसान भी — क्योंकि यहाँ अनुमान लगाया जा सकता है। बाकी जगह शब्द रटना पड़ता है; यहाँ उपसर्ग का अर्थ पता हो तो पूरे शब्द का अर्थ अपने आप बन जाता है। ‘अप’ बुरा या विपरीत बताता है, इसलिए अपकार बुराई है। ‘अ’ निषेध है, इसलिए अभिज्ञ का उल्टा अनभिज्ञ बनता है। ‘वि’ अलगाव है, इसलिए संग्रह का उल्टा विग्रह।

यही कारण है कि इस पृष्ठ को उपसर्ग वाले अध्याय के तुरंत बाद पढ़ना सबसे उपयोगी रहता है। वहाँ आपने उपसर्ग अलग करना सीखा, यहाँ वही अभ्यास अर्थ तय करने में लग रहा है।

उपसर्ग-भेद से बने 12 युग्म

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
अनुग्रहकृपाआपके अनुग्रह से ही यह कार्य संभव हो सका।
आग्रहहठ; अनुरोधउन्होंने भोजन करने का बार-बार आग्रह किया।
अभिज्ञजानकारवे विधि के अभिज्ञ व्यक्ति हैं, उनसे परामर्श लीजिए।
अनभिज्ञअनजानवह नियमों से पूरी तरह अनभिज्ञ था।
उपकारभलाईउपकार का बदला उपकार से देना चाहिए।
अपकारबुराईअपकार करने वाला अंततः स्वयं ही हानि उठाता है।
प्रवृत्तिझुकावबचत की प्रवृत्ति बचपन से ही डालनी चाहिए।
निवृत्तिहटना, मुक्तिसेवा-निवृत्ति के बाद उन्होंने लेखन आरंभ किया।
संग्रहइकट्ठा करनाउनके पास पुराने सिक्कों का बड़ा संग्रह है।
विग्रहझगड़ा; समास का विच्छेददोनों पक्षों में विग्रह बढ़ता ही चला गया।
उपयोगप्रयोगजल का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।
उपभोगभोगना, खपतउपभोग बढ़ने से संसाधनों पर दबाव पड़ता है।
प्रणामनमस्कारउन्होंने गुरु को प्रणाम कर आशीर्वाद लिया।
परिणामनतीजाजल्दबाज़ी का परिणाम अच्छा नहीं निकला।
अभियोगआरोपउस पर लगे अभियोग की जाँच चल रही है।
अभियानमुहिमस्वच्छता अभियान पूरे ज़िले में चलाया गया।
संस्कृतपरिष्कृत; एक भाषासंस्कृत भारत की प्राचीनतम भाषाओं में गिनी जाती है।
संस्कृतिसभ्यता, रहन-सहनराजस्थान की संस्कृति उसके लोकगीतों में झलकती है।
उद्धारमुक्ति, सुधारगाँव के तालाब का उद्धार श्रमदान से हुआ।
उद्गारमन की बात, भावउन्होंने अपने उद्गार सभा में खुलकर व्यक्त किए।
अवलंबसहारावृद्धावस्था में संतान ही माता-पिता का अवलंब बनती है।
अविलंबतुरंतइस आदेश का पालन अविलंब किया जाए।
अवगतजानकारी में आया हुआविभाग को इस विषय से अवगत करा दिया गया है।
अवगाहनगहराई में उतरनाइस विषय के अवगाहन के बिना निकाला गया निष्कर्ष ठीक नहीं होगा।

इन्हें रटिए मत, उपसर्ग से निकालिए

तालिका के हर युग्म पर एक प्रश्न पूछिए — ‘दोनों में उपसर्ग कौन-सा है और वह क्या कहता है?’ अनुग्रह में ‘अनु’ है, जो पीछे-पीछे चलने का भाव देता है, इसलिए वह झुककर की गई कृपा है; आग्रह में ‘आ’ है, जो खींचने का भाव देता है, इसलिए वह अपनी ओर खींचता हुआ अनुरोध या हठ है। इस तरह निकाला गया अर्थ महीनों टिकता है, जबकि रटा हुआ अर्थ परीक्षा-कक्ष तक भी नहीं पहुँचता।