व्यंजन के भेद से अर्थ-भेद
यहाँ स्वर वही रहते हैं और बदलता है एक व्यंजन — भ की जगह व, ण की जगह न, श की जगह स। बोलने में यह अंतर अक्सर दब जाता है, लिखने में पूरा शब्द बदल जाता है। कुल 14 युग्म, हर शब्द के साथ उसका अपना वाक्य।
एक व्यंजन, और शब्द कुछ और हो गया
पिछले पृष्ठ के युग्म मात्रा से बनते थे। ये युग्म व्यंजन से बनते हैं, और इसीलिए ज़्यादा ख़तरनाक हैं — मात्रा की भूल आँख पकड़ लेती है, व्यंजन की भूल नहीं पकड़ती, क्योंकि शब्द फिर भी शुद्ध दिखता रहता है। ‘आवेदन शुक्ल’ लिखा हुआ वाक्य देखने में बिलकुल ठीक लगता है, जबकि वहाँ ‘शुल्क’ चाहिए था।
जिन जोड़ियों में श-ष-स या ण-न का अंतर है, उन्हें शब्द शुद्धि के साथ मिलाकर पढ़िए। वहाँ यही ध्वनियाँ वर्तनी की भूल बनती हैं, यहाँ अर्थ की।
व्यंजन-भेद से बने 14 युग्म
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| अभिराम | सुंदर, मनोहर | पर्वत पर उगते सूर्य का दृश्य अत्यंत अभिराम था। |
| अविराम | बिना रुके | नदी का प्रवाह अविराम चलता रहता है। |
| अंश | हिस्सा | इस संपत्ति में सबका बराबर अंश है। |
| अंस | कंधा | उसने सारा बोझ अपने अंस पर उठा लिया। |
| शव | मुर्दा | शव-परीक्षण की रिपोर्ट अगले दिन सौंपी गई। |
| सव | यज्ञ | राजसूय सव की तैयारी महीनों तक चलती रही। |
| परिणाम | नतीजा | परीक्षा का परिणाम अगले माह घोषित होगा। |
| परिमाण | मात्रा | दवा का परिमाण चिकित्सक ही तय करता है। |
| निर्जर | देवता | पुराणों में देवताओं को निर्जर कहा गया है, क्योंकि उन्हें बुढ़ापा नहीं आता। |
| निर्झर | झरना | पहाड़ी से गिरता निर्झर दूर तक सुनाई देता था। |
| कृपण | कंजूस | कृपण व्यक्ति धन जोड़ता तो है, भोगता नहीं। |
| कृपाण | तलवार | सिख परंपरा में कृपाण पाँच ककारों में से एक है। |
| बात | कथन | उसकी बात में दम था, इसलिए सब मान गए। |
| वात | वायु | आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ़ को तीन दोष माना गया है। |
| वसन | वस्त्र | श्वेत वसन धारण कर वे सभा में उपस्थित हुए। |
| व्यसन | बुरी लत | व्यसन मनुष्य को भीतर से खोखला कर देता है। |
| शुक्ल | सफ़ेद; चाँदनी पक्ष | शुक्ल पक्ष की रातें धीरे-धीरे उजली होती जाती हैं। |
| शुल्क | फ़ीस | आवेदन शुल्क ऑनलाइन ही जमा करना होगा। |
| ग्रंथ | पुस्तक | रामचरितमानस हिंदी का एक अमर ग्रंथ है। |
| ग्रंथि | गाँठ | रस्सी की ग्रंथि इतनी कसी हुई थी कि खुल ही नहीं रही थी। |
| चरम | अंतिम, पराकाष्ठा | आंदोलन अपने चरम पर पहुँच चुका था। |
| चर्म | चमड़ा | चर्म उद्योग को नई तकनीक से बल मिला है। |
| जलज | कमल | तालाब में खिले जलज ने पूरा दृश्य बदल दिया। |
| जलद | बादल | आषाढ़ आते ही आकाश में जलद घिर आए। |
| प्रतिषेध | मनाही, रोक | इस क्षेत्र में खनन का पूर्ण प्रतिषेध है। |
| प्रतिशोध | बदला | प्रतिशोध की भावना किसी समस्या का हल नहीं है। |
| अनिष्ट | बुरा, अशुभ | अंधविश्वास में हर अपशकुन को अनिष्ट का संकेत मान लिया जाता है। |
| अनिष्ठ | निष्ठाहीन | अनिष्ठ कर्मचारी के विरुद्ध विभाग ने कार्रवाई की। |
इनमें से कुछ जोड़ियाँ कार्यालयी भाषा में रोज़ काम आती हैं — शुल्क, प्रतिषेध, परिमाण, अभियोग। पारिभाषिक शब्दावली पढ़ते समय ये दोबारा मिलेंगी, और वहाँ इनका प्रयोग सरकारी सन्दर्भ में होगा। दोनों पृष्ठों को साथ रखकर पढ़ने से ये शब्द दो बार अलग-अलग ढंग से दोहरा लिए जाते हैं।