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व्यंजन के भेद से अर्थ-भेद

यहाँ स्वर वही रहते हैं और बदलता है एक व्यंजन — भ की जगह व, ण की जगह न, श की जगह स। बोलने में यह अंतर अक्सर दब जाता है, लिखने में पूरा शब्द बदल जाता है। कुल 14 युग्म, हर शब्द के साथ उसका अपना वाक्य।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

एक व्यंजन, और शब्द कुछ और हो गया

पिछले पृष्ठ के युग्म मात्रा से बनते थे। ये युग्म व्यंजन से बनते हैं, और इसीलिए ज़्यादा ख़तरनाक हैं — मात्रा की भूल आँख पकड़ लेती है, व्यंजन की भूल नहीं पकड़ती, क्योंकि शब्द फिर भी शुद्ध दिखता रहता है। ‘आवेदन शुक्ल’ लिखा हुआ वाक्य देखने में बिलकुल ठीक लगता है, जबकि वहाँ ‘शुल्क’ चाहिए था।

जिन जोड़ियों में श-ष-स या ण-न का अंतर है, उन्हें शब्द शुद्धि के साथ मिलाकर पढ़िए। वहाँ यही ध्वनियाँ वर्तनी की भूल बनती हैं, यहाँ अर्थ की।

व्यंजन-भेद से बने 14 युग्म

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
अभिरामसुंदर, मनोहरपर्वत पर उगते सूर्य का दृश्य अत्यंत अभिराम था।
अविरामबिना रुकेनदी का प्रवाह अविराम चलता रहता है।
अंशहिस्साइस संपत्ति में सबका बराबर अंश है।
अंसकंधाउसने सारा बोझ अपने अंस पर उठा लिया।
शवमुर्दाशव-परीक्षण की रिपोर्ट अगले दिन सौंपी गई।
सवयज्ञराजसूय सव की तैयारी महीनों तक चलती रही।
परिणामनतीजापरीक्षा का परिणाम अगले माह घोषित होगा।
परिमाणमात्रादवा का परिमाण चिकित्सक ही तय करता है।
निर्जरदेवतापुराणों में देवताओं को निर्जर कहा गया है, क्योंकि उन्हें बुढ़ापा नहीं आता।
निर्झरझरनापहाड़ी से गिरता निर्झर दूर तक सुनाई देता था।
कृपणकंजूसकृपण व्यक्ति धन जोड़ता तो है, भोगता नहीं।
कृपाणतलवारसिख परंपरा में कृपाण पाँच ककारों में से एक है।
बातकथनउसकी बात में दम था, इसलिए सब मान गए।
वातवायुआयुर्वेद में वात, पित्त और कफ़ को तीन दोष माना गया है।
वसनवस्त्रश्वेत वसन धारण कर वे सभा में उपस्थित हुए।
व्यसनबुरी लतव्यसन मनुष्य को भीतर से खोखला कर देता है।
शुक्लसफ़ेद; चाँदनी पक्षशुक्ल पक्ष की रातें धीरे-धीरे उजली होती जाती हैं।
शुल्कफ़ीसआवेदन शुल्क ऑनलाइन ही जमा करना होगा।
ग्रंथपुस्तकरामचरितमानस हिंदी का एक अमर ग्रंथ है।
ग्रंथिगाँठरस्सी की ग्रंथि इतनी कसी हुई थी कि खुल ही नहीं रही थी।
चरमअंतिम, पराकाष्ठाआंदोलन अपने चरम पर पहुँच चुका था।
चर्मचमड़ाचर्म उद्योग को नई तकनीक से बल मिला है।
जलजकमलतालाब में खिले जलज ने पूरा दृश्य बदल दिया।
जलदबादलआषाढ़ आते ही आकाश में जलद घिर आए।
प्रतिषेधमनाही, रोकइस क्षेत्र में खनन का पूर्ण प्रतिषेध है।
प्रतिशोधबदलाप्रतिशोध की भावना किसी समस्या का हल नहीं है।
अनिष्टबुरा, अशुभअंधविश्वास में हर अपशकुन को अनिष्ट का संकेत मान लिया जाता है।
अनिष्ठनिष्ठाहीनअनिष्ठ कर्मचारी के विरुद्ध विभाग ने कार्रवाई की।

इनमें से कुछ जोड़ियाँ कार्यालयी भाषा में रोज़ काम आती हैं — शुल्क, प्रतिषेध, परिमाण, अभियोग। पारिभाषिक शब्दावली पढ़ते समय ये दोबारा मिलेंगी, और वहाँ इनका प्रयोग सरकारी सन्दर्भ में होगा। दोनों पृष्ठों को साथ रखकर पढ़ने से ये शब्द दो बार अलग-अलग ढंग से दोहरा लिए जाते हैं।