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तीन शब्दों वाले समश्रुत समूह

दो शब्दों में से चुनना आसान है, तीन में से नहीं — और परीक्षा प्रायः बीच वाले शब्द पर ही प्रश्न बनाती है। यहाँ छह ऐसे समूह हैं जिनमें तीन-तीन मिलते-जुलते शब्द हैं, हर शब्द के अर्थ और अपने वाक्य के साथ।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

दो नहीं, तीन शब्दों वाले समूह

अब तक के तीनों पृष्ठों पर जोड़ियाँ थीं। इस पृष्ठ पर तीन-तीन के समूह हैं, और यही परीक्षा में सबसे अधिक अंक काटते हैं। कारण सीधा है — दो शब्दों में से चुनना आसान है, तीन में से चुनने पर बीच वाला शब्द लगभग हमेशा भुला दिया जाता है। ‘तरणि’ और ‘तरुणी’ तो सब जानते हैं, पर बीच में खड़ी ‘तरणी’ यानी नाव को कम लोग याद रखते हैं, और प्रश्न प्रायः उसी पर बनता है।

इसलिए नीचे हर समूह को अलग तालिका में रखा गया है, एक साथ मिलाकर नहीं। तीनों शब्द एक ही दृष्टि में दिखें, यही इस पृष्ठ की पूरी बनावट का कारण है।

तरणि / तरणी / तरुणी

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
तरणिसूर्यप्रातः तरणि की पहली किरण पर्वत-शिखर पर पड़ी।
तरणीनावतरणी के बिना इस नदी को पार नहीं किया जा सकता।
तरुणीयुवतीतरुणी ने साहस दिखाकर सबको चकित कर दिया।

अंब / अंबु / अंबर

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
अंबमाताकवि ने अंब को धरती के समान सहनशील कहा है।
अंबुजलग्रीष्म में अंबु की एक-एक बूँद मूल्यवान हो जाती है।
अंबरआकाश; वस्त्रसाँझ ढलते ही अंबर लाल हो उठा।

कृत / कृति / कृती

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
कृतकिया हुआयह स्व-कृत भूल थी, इसमें किसी और का दोष नहीं।
कृतिरचनायह कृति उनके जीवन-भर के अनुभव का निचोड़ है।
कृतीनिपुण, कुशलवे अपने क्षेत्र के कृती व्यक्ति माने जाते हैं।

नीर / नीड़ / नीरद

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
नीरजलनीर और क्षीर का भेद हंस ही कर पाता है।
नीड़घोंसलासंध्या होते ही पक्षी अपने नीड़ लौट आए।
नीरदबादलआषाढ़ के नीरद देखकर किसान का मन हरा हो गया।

अवध / अवधि / अवधी

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
अवधएक प्रदेशअवध की भूमि राम के नाम से जुड़ी हुई है।
अवधिसमय-सीमाआवेदन की अवधि इसी माह समाप्त हो रही है।
अवधीएक बोलीतुलसीदास ने रामचरितमानस अवधी में लिखा।

सर / शर / सिर

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
सरतालाबसर के जल में कमल खिले हुए थे।
शरबाणअर्जुन का शर कभी लक्ष्य से नहीं चूका।
सिरमस्तकउसने सम्मान में सिर झुका लिया।

इन छह समूहों को याद करने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा यह है कि तीनों वाक्य एक साथ, एक ही बार में लिखे जाएँ। अलग-अलग दिन लिखने पर बीच वाला शब्द फिर छूट जाता है। एक बैठक में तीनों लिख लेने पर तीनों एक-दूसरे के सहारे याद रहते हैं।