मुख्य सामग्री पर जाएं

व्यंजन संधि

व्यंजन संधि तब होती है जब जोड़ की जगह पर व्यंजन बैठा हो। सबसे ज़्यादा प्रश्न त् के बदलने से बने शब्दों पर आते हैं। यहाँ नियम तालिका के साथ 62 शब्द संधि विच्छेद सहित दिए गए हैं।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

व्यंजन संधि — जब जोड़ की जगह पर व्यंजन बैठा हो

अब तक हमने वे मेल देखे जिनमें पहले शब्द के अंत में स्वर था। अब उन शब्दों की बात करते हैं जिनके अंत में व्यंजन आता है — जैसे सत्, उत्, जगत्, वाक्, षट्, सम्, तत्। जब इनके साथ कोई दूसरा शब्द जुड़ता है तो अंतिम व्यंजन अपने पड़ोसी के हिसाब से अपना रूप बदल लेता है। यही व्यंजन संधि है। इसमें बदलाव व्यंजन-व्यंजन के बीच भी हो सकता है और व्यंजन-स्वर के बीच भी।

व्यंजन संधि को रटने की चीज न समझिए। इसके पीछे एक ही सीधा कारण है — उच्चारण का आराम। कठोर व्यंजन (क्, च्, ट्, त्, प्) के आगे कोमल ध्वनि आ जाए तो कठोर व्यंजन भी कोमल हो जाता है, क्योंकि जीभ बीच में रुककर सख्ती नहीं दिखाना चाहती। 'जगत्' के आगे 'ईश' आया तो 'त्' को 'द्' बनना ही था — जगदीश। यह समझ आ जाए तो आधे नियम अपने आप याद रहते हैं।

व्यंजन संधि के मुख्य नियम

क्रमकब लागू होता हैक्या बदलता हैनमूना
1क्, च्, ट्, त्, प् के आगे कोई स्वर या कोमल व्यंजन (ग, ज, ड, द, ब, घ, झ, ढ, ध, भ) या य, र, ल, व आएवह कठोर व्यंजन अपने ही वर्ग का तीसरा अक्षर बन जाता है — क्→ग्, च्→ज्, ट्→ड्, त्→द्, प्→ब्जगत् + ईश = जगदीश
2क्, च्, ट्, त्, प् के आगे न् या म् आएवह व्यंजन अपने वर्ग का पाँचवाँ अक्षर बन जाता है — क्→ङ्, च्→ञ्, ट्→ण्, त्→न्, प्→म्जगत् + नाथ = जगन्नाथ
3त् या द् के आगे च् या छ् आएत्/द् बदलकर च् हो जाता हैसत् + चरित्र = सच्चरित्र
4त् या द् के आगे ज् या झ् आएत्/द् बदलकर ज् हो जाता हैसत् + जन = सज्जन
5त् या द् के आगे ल् आएत्/द् बदलकर ल् हो जाता हैउत् + लास = उल्लास
6त् या द् के आगे ह् आएत् बदलकर द् और ह् बदलकर ध् हो जाता हैउत् + हार = उद्धार
7म् के आगे किसी भी वर्ग का व्यंजन आएम् अनुस्वार (ं) बन जाता हैसम् + तोष = संतोष
8किसी स्वर के बाद छ् आएछ् से पहले च् जुड़ जाता है, यानी च्छ बनता हैवि + छेद = विच्छेद
9ऋ, र् या ष् के बाद न् आए (बीच में स्वर या कुछ वर्ण हों तो भी)न् बदलकर ण् हो जाता हैपरि + नाम = परिणाम

व्यंजन संधि — त् के बदलने से बने शब्द

  • जगदीशजगत् + ईशत् के आगे स्वर आया, इसलिए त् → द्
  • जगदंबाजगत् + अंबा
  • सदाचारसत् + आचार
  • सदुपयोगसत् + उपयोग
  • सद्गतिसत् + गति
  • सद्भावनासत् + भावना
  • तद्रूपतत् + रूप
  • तद्भवतत् + भव
  • भगवद्भक्तिभगवत् + भक्ति
  • उद्योगउत् + योग
  • उद्घाटनउत् + घाटन
  • उद्देश्यउत् + देश्य
  • उद्धारउत् + हारह् भी बदलकर ध् हुआ
  • उद्धरणउत् + हरण
  • जगन्नाथजगत् + नाथत् के आगे न् आया, इसलिए त् → न्
  • सन्मार्गसत् + मार्ग
  • सन्मानसत् + मान
  • उन्नतिउत् + नति
  • उन्मूलनउत् + मूलन
  • तन्मयतत् + मय
  • चिन्मयचित् + मय
  • सच्चरित्रसत् + चरित्रत् के आगे च् आया, इसलिए त् → च्
  • उच्चारणउत् + चारण
  • शरच्चंद्रशरत् + चंद्र
  • सच्चिदानंदसत् + चित् + आनंददो संधियाँ एक साथ
  • सज्जनसत् + जनत् के आगे ज् आया, इसलिए त् → ज्
  • उज्ज्वलउत् + ज्वल
  • सज्जातिसत् + जाति
  • उल्लासउत् + लासत् के आगे ल् आया, इसलिए त् → ल्
  • उल्लंघनउत् + लंघन
  • तल्लीनतत् + लीन
  • विद्युल्लेखाविद्युत् + लेखा

व्यंजन संधि — क्, प्, ज्, ट्-वर्ग तथा म् के बदलने से बने शब्द

  • वागीशवाक् + ईशक् के आगे स्वर आया, इसलिए क् → ग्
  • वाग्जालवाक् + जाल
  • वाग्दानवाक् + दान
  • दिग्गजदिक् + गज
  • दिगंतदिक् + अंत
  • दिग्दर्शनदिक् + दर्शन
  • अब्जअप् + जप् के आगे ज् आया, इसलिए प् → ब्
  • षडाननषट् + आननट् के आगे स्वर आया, इसलिए ट् → ड्
  • षड्दर्शनषट् + दर्शन
  • षड्यंत्रषट् + यंत्र
  • षण्मासषट् + मासट् के आगे म् आया, इसलिए ट् → ण्
  • संतोषसम् + तोषम् अनुस्वार बन गया
  • संकल्पसम् + कल्प
  • संचयसम् + चय
  • संदेहसम् + देह
  • संबंधसम् + बंध
  • संगमसम् + गम
  • संपूर्णसम् + पूर्ण
  • संन्याससम् + न्यास
  • संलापसम् + लाप
  • किंचित्किम् + चित्
  • अहंकारअहम् + कार
  • विच्छेदवि + छेदस्वर के बाद छ् आने पर च्छ बना
  • अनुच्छेदअनु + छेद
  • परिच्छेदपरि + छेद
  • उच्छेदउत् + छेद
  • उच्छ्वासउत् + श्वास
  • परिणामपरि + नामर् के प्रभाव से न् → ण्
  • प्रणामप्र + नाम
  • प्रमाणप्र + मान

व्यंजन संधि पहचानने का व्यावहारिक तरीक़ा

विकल्पों में जहाँ भी सत्, उत्, तत्, जगत्, वाक्, दिक्, षट्, सम्, चित्, विद्युत् जैसे हलंत वाले टुकड़े दिखें, समझ लीजिए कि प्रश्न व्यंजन संधि का है। इन आठ-दस टुकड़ों को अलग से याद कर लेना परीक्षा में बहुत काम आता है, क्योंकि व्यंजन संधि के अधिकांश प्रश्न इन्हीं के आसपास घूमते हैं।

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'जगन्नाथ' का संधि विच्छेद है —

  1. Aजगत् + नाथ
  2. Bजग + नाथ
  3. Cजगन + नाथ
  4. Dजगन् + नाथ

व्याख्या

मूल शब्द 'जगत्' है। त् के आगे न् आने पर त् अपने वर्ग का पाँचवाँ अक्षर न् बन जाता है — यह व्यंजन संधि का नियम है।

प्रश्न 2

'उद्धार' का संधि विच्छेद है —

  1. Aउत् + हार
  2. Bउद्ध + आर
  3. Cउद् + हार
  4. Dउत् + धार

व्याख्या

त् के आगे ह् आने पर त् बदलकर द् और ह् बदलकर ध् हो जाता है। यह व्यंजन संधि का विशेष नियम है।

प्रश्न 3

'उल्लास' में कौन-सा परिवर्तन हुआ है?

  1. Aत् बदलकर द् हुआ
  2. Bविसर्ग बदलकर ल् हुआ
  3. Cत् बदलकर न् हुआ
  4. Dत् बदलकर ल् हुआ

व्याख्या

'उत् + लास' में त् के आगे ल् आया, इसलिए त् भी ल् में बदल गया और दोहरा ल्ल बना — व्यंजन संधि।

प्रश्न 4

'सच्चरित्र' का संधि विच्छेद है —

  1. Aसच् + चरित्र
  2. Bसत् + चरित्र
  3. Cसच्च + रित्र
  4. Dसत + चरित्र

व्याख्या

त् के आगे च् आने पर त् बदलकर च् हो जाता है, जिससे च्च बनता है — व्यंजन संधि का नियम।