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संधि और संधि विच्छेद

हिंदी व्याकरण में संधि वह अध्याय है जहाँ शब्द एक-दूसरे से मिलकर नया रूप ले लेते हैं। जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि टकराती हैं, और इस टकराव से जो बदलाव पैदा होता है उसी को संधि कहते हैं। 'विद्या' और 'आलय' अलग-अलग बोलिए तो दो शब्द हैं, पर साथ बोलिए तो 'विद्यालय' बन जाता है — यही संधि है। राजस्थान की लगभग हर सरकारी भर्ती परीक्षा में हिंदी का प्रश्नपत्र संधि से शुरू होता है, क्योंकि यह ऐसा भाग है जिसमें उत्तर पूरी तरह निश्चित होता है — न कोई राय चलती है, न कोई अनुमान। नियम याद हो तो अंक पक्के, और नियम गड्डमड्ड हो जाएँ तो सीधा नुकसान। इस पाठ में हम संधि को शुरू से, बिना जल्दबाजी, इस तरह समझेंगे कि परीक्षा में कोई भी शब्द आए, आप उसका विच्छेद स्वयं निकाल सकें — रटकर नहीं, पहचानकर।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

संधि किसे कहते हैं — पहले परिभाषा

संधि का शाब्दिक अर्थ है 'मेल' या 'जोड़'। व्याकरण की भाषा में — दो वर्णों के परस्पर मिलने से उनमें जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। ध्यान रखिए, परिभाषा में 'वर्ण' कहा गया है, 'शब्द' नहीं। संधि शब्दों का मेल नहीं, ध्वनियों का मेल है। इसीलिए संधि हमेशा दो जगह पर घटती है — पहले शब्द के अंतिम वर्ण पर और दूसरे शब्द के प्रथम वर्ण पर। बीच के वर्णों से इसका कोई लेना-देना नहीं।

जुड़े हुए शब्द को उसके मूल टुकड़ों में फिर से अलग कर देना संधि विच्छेद कहलाता है। परीक्षा में अधिकतर प्रश्न इसी दिशा में आते हैं — जुड़ा शब्द दिया जाता है और आपसे टुकड़े पूछे जाते हैं। इसलिए पढ़ाई का ढंग भी उलटी दिशा में होना चाहिए: शब्द देखकर पहचानिए कि जोड़ की जगह पर कौन-सी ध्वनि बैठी है, और फिर उस ध्वनि से पीछे लौटिए।

एक बात शुरू में ही साफ कर लें। संधि के तीन बड़े भेद हैं और उनका आधार यह है कि जोड़ की जगह पर पहले शब्द के आखिर में क्या था। यदि वहाँ स्वर था तो स्वर संधि, व्यंजन था तो व्यंजन संधि, और विसर्ग (ः) था तो विसर्ग संधि। तीनों को पहचानने का यही एक सूत्र है, और यही सबसे पहले पक्का करना है।

संधि के तीन भेद — पहचान का आधार

भेदपहले शब्द का अंतिम वर्णउदाहरणकुल उपभेद
स्वर संधिकोई स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)देव + आलय = देवालयपाँच — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण्, अयादि
व्यंजन संधिकोई व्यंजन (क्, त्, प्, म्, न् आदि)जगत् + नाथ = जगन्नाथकई नियम, निश्चित संख्या नहीं
विसर्ग संधिविसर्ग (ः)मनः + बल = मनोबलकई नियम, निश्चित संख्या नहीं

संधि और समास — यहीं सबसे ज़्यादा भूल होती है

परीक्षा में विद्यार्थी संधि और समास को आपस में मिला देते हैं, क्योंकि दोनों में शब्द जुड़ते हैं। फ़र्क़ याद रखने का आसान तरीक़ा यह है — संधि में ध्वनि बदलती है, समास में अर्थ का संबंध जुड़ता है। 'राजपुत्र' में कोई ध्वनि नहीं बदली, बस 'राजा का पुत्र' अर्थ जुड़ गया, इसलिए यह समास है। 'महेश' में 'आ' और 'ई' मिलकर 'ए' बन गए — ध्वनि बदली, इसलिए यह संधि है। एक और पक्की जाँच: समास तोड़ने पर बीच में विभक्ति या कोई जोड़ने वाला शब्द लगाना पड़ता है (राजा का पुत्र), संधि तोड़ने पर कुछ भी जोड़ना नहीं पड़ता, केवल दो टुकड़े मिलते हैं।

संधि और समास का अंतर — एक नजर में

बिंदुसंधिसमास
किसका मेलदो वर्णों (ध्वनियों) कादो या अधिक शब्दों का
क्या बदलता हैजोड़ की जगह की ध्वनि बदल जाती हैध्वनि नहीं बदलती, शब्द ज्यों के त्यों रहते हैं
तोड़ने की प्रक्रिया का नामसंधि विच्छेदसमास विग्रह
तोड़ने पर बीच में क्या लगता हैकुछ नहीं, केवल + चिह्नविभक्ति या योजक शब्द — का, के, में, और
अर्थ पर असरअर्थ जुड़ता है पर मुख्य खेल ध्वनि का हैपूरा खेल अर्थ-संबंध का है
उदाहरणहिम + आलय = हिमालयराजपुत्र = राजा का पुत्र
दूसरा उदाहरणसूर्य + उदय = सूर्योदयचौराहा = चार राहों का समूह

एक सेकंड में पहचानिए

दिए गए शब्द को धीरे-धीरे बोलिए और देखिए कि जोड़ की जगह पर कोई नई ध्वनि बनी है या नहीं। 'सूर्योदय' में 'यो' कहाँ से आया? यह 'य' और 'उ' के मेल से बना, यानी संधि। 'नीलकमल' में कोई नई ध्वनि नहीं बनी, यानी समास। नई ध्वनि बनी = संधि, नहीं बनी = समास।

स्वर संधि — पाँच भेद, पाँच पहचान

जब पहले शब्द के अंत में स्वर हो और दूसरे शब्द के आरंभ में भी स्वर हो, तो दोनों स्वर मिलकर जो बदलाव लाते हैं उसे स्वर संधि कहते हैं। इसके पाँच भेद हैं और इन पाँचों को अलग-अलग करने का आधार यह है कि मिलने वाले दो स्वर एक ही जाति के हैं या अलग-अलग जाति के, और मिलकर उन्होंने कौन-सा नया स्वर बनाया।

एक ज़रूरी बात पहले समझ लीजिए — 'सजातीय' या 'समान' स्वर का मतलब है एक ही परिवार के स्वर। अ और आ एक परिवार, इ और ई एक परिवार, उ और ऊ एक परिवार। इन परिवारों को याद रख लेने से दीर्घ और गुण संधि की गड़बड़ी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

स्वर संधि के पाँच भेद — एक-एक करके पढ़ें

व्यंजन और विसर्ग संधि

वे शब्द जिनका विच्छेद विद्यार्थी अकसर गलत करते हैं

अब कुछ ऐसे शब्द देखिए जिनमें गलती होने की संभावना सबसे ज़्यादा है। इनमें दिक्कत नियम की नहीं, आँख की है — शब्द देखकर मन में जो पहला टुकड़ा आता है वही गलत होता है। इन्हें एक बार ध्यान से पढ़ लीजिए, फिर परीक्षा में धोखा नहीं होगा।

सही और गलत विच्छेद — आमने-सामने

शब्दप्रचलित गलत विच्छेदसही विच्छेदकारण
महेशमहे + शमहा + ईशआ और ई मिलकर ए बने — गुण संधि
नायकना + यकनै + अक'यक' कोई शब्द नहीं; ऐ टूटकर आय् बना — अयादि संधि
पवनप + वनपो + अन'प' अकेला सार्थक नहीं; ओ टूटकर अव् बना — अयादि संधि
सदैवसद + ऐवसदा + एवआ और ए मिलकर ऐ बने — वृद्धि संधि
मनोबलमनो + बलमनः + बलमूल शब्द मनः है, मनो नहीं — विसर्ग संधि
निराशानिरा + शानिः + आशाविसर्ग र् में बदला — विसर्ग संधि
जगन्नाथजगन् + नाथजगत् + नाथमूल शब्द जगत् है — व्यंजन संधि
उद्धारउद् + हारउत् + हारत् से द् और ह् से ध् बना — व्यंजन संधि
स्वागतस्वा + गतसु + आगतउ बदलकर व् बना — यण् संधि
अत्यंतअत् + यंतअति + अंतइ बदलकर य् बना — यण् संधि
परोपकारपरो + पकारपर + उपकारअ और उ मिलकर ओ बने — गुण संधि
महर्षिमहर् + षिमहा + ऋषिआ और ऋ मिलकर अर् बने — गुण संधि
नीरोगनी + रोगनिः + रोगविसर्ग हटा और इ दीर्घ हुआ — विसर्ग संधि
प्रत्येकप्रत् + येकप्रति + एकइ बदलकर य् बना — यण् संधि

परीक्षा में ये पाँच भूलें सबसे भारी पड़ती हैं

पहली — गुण और वृद्धि को उलट देना; याद रखिए ए/ओ बने तो गुण, ऐ/औ बने तो वृद्धि। दूसरी — यण् और अयादि को एक मान लेना; यण् में मूल में इ/उ/ऋ था, अयादि में मूल में ए/ऐ/ओ/औ था। तीसरी — विसर्ग वाले शब्दों को 'मनो', 'निरा', 'दुर्' से शुरू मान लेना, जबकि मूल रूप मनः, निः, दुः हैं। चौथी — व्यंजन संधि में हलंत लगाना भूल जाना; 'सत' और 'सत्' अलग चीजें हैं और परीक्षक यही देखता है। पाँचवीं — समास के प्रश्न में संधि का उत्तर लिख देना; प्रश्न ध्यान से पढ़िए, 'विच्छेद' पूछा है या 'विग्रह'।

पूरी संधि एक पन्ने में — रिवीजन तालिका

परीक्षा से एक रात पहले पूरा पाठ दोहराने का समय नहीं होता। उस समय के लिए यह तालिका बनाई गई है। इसमें हर भेद का सूत्र और एक पक्का उदाहरण है — इतना भर याद रह जाए तो संधि के सारे प्रश्न हल हो जाएँगे।

संधि की सम्पूर्ण रिवीजन तालिका — आखिरी दोहराव के लिए

भेदपहचान का सूत्रपरिणामपक्का उदाहरण
दीर्घअ/आ + अ/आ, इ/ई + इ/ई, उ/ऊ + उ/ऊआ, ई, ऊहिम + आलय = हिमालय
गुणअ/आ + इ/ई; अ/आ + उ/ऊ; अ/आ + ऋए, ओ, अर्महा + ईश = महेश
वृद्धिअ/आ + ए/ऐ; अ/आ + ओ/औऐ, औसदा + एव = सदैव
यण्इ/ई, उ/ऊ, ऋ के आगे असमान स्वरय्, व्, र्सु + आगत = स्वागत
अयादिए, ऐ, ओ, औ के आगे कोई स्वरअय्, आय्, अव्, आव्पौ + अक = पावक
व्यंजनअंत में व्यंजन (सत्, उत्, जगत्, वाक्, सम्)पड़ोसी के अनुसार बदलावजगत् + नाथ = जगन्नाथ
विसर्गअंत में विसर्ग (मनः, निः, दुः, प्रातः)ओ, र्, श्, ष्, स् या यथावत्मनः + बल = मनोबल

दो मिनट की रणनीति

परीक्षा में संधि विच्छेद का प्रश्न आते ही यह क्रम अपनाइए। पहला कदम — देखिए शब्द में कहीं हलंत वाला टुकड़ा या विसर्ग की गुंजाइश है या नहीं; हो तो व्यंजन या विसर्ग संधि। दूसरा कदम — न हो तो जोड़ की जगह की मात्रा देखिए: आ/ई/ऊ है तो दीर्घ, ए/ओ है तो गुण, ऐ/औ है तो वृद्धि। तीसरा कदम — शब्द के बीच य् या व् जुड़ा दिखे तो यण् या अयादि में से चुनिए। यही तीन कदम हर प्रश्न का उत्तर दे देते हैं।

राजस्थान की किन परीक्षाओं में संधि पूछी जाती है

संधि किसी एक परीक्षा का विषय नहीं है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और राजस्थान लोक सेवा आयोग — दोनों की भर्तियों में हिंदी व्याकरण का भाग रहता है और उसमें संधि लगभग तय रूप से आती है। नीचे उन परीक्षाओं की सूची है जिनमें यह अध्याय आपके काम आएगा।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB पटवारीहिंदी + अंग्रेज़ी का संयुक्त भाग · 22 प्रश्न / 44 अंक (संयुक्त)
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तरप्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB VDOभाषा भाग · 50 प्रश्न / 50 अंक
RSSB LDCपेपर II — सामान्य हिंदी · 75 प्रश्न
RPSC पुलिस उप-निरीक्षकपेपर I — सामान्य हिंदी · 100 प्रश्न / 200 अंक
RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्नपत्र — खंड I · विषय प्रश्नपत्र का भाग
RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्नपत्र — खंड प्रथम · विषय प्रश्नपत्र का भाग
REETहिंदी भाषा I / भाषा II · प्रत्येक 30 अंक
राजस्थान उच्च न्यायालय LDCहिंदी भाग · 50 प्रश्न / 100 अंक

एक काम की जानकारी

संधि उन भागों में है जो कम मेहनत में पक्के अंक देते हैं। CET, पटवारी, VDO या LDC में से किसी एक की भी तैयारी हो, तो संधि छोड़ने का कोई बहाना नहीं बनता — नियम गिने-चुने हैं, उदाहरण दोहराए जाते हैं, और विकल्पों में से सही विच्छेद पहचानना अभ्यास से आसान हो जाता है।

आगे क्या पढ़ें

संधि पक्की हो जाने पर सबसे अच्छा अगला कदम समास है, क्योंकि परीक्षा में दोनों साथ पूछे जाते हैं और एक की समझ दूसरे को मज़बूत करती है। उसके बाद उपसर्ग-प्रत्यय लीजिए — 'निः', 'सु', 'प्र', 'अति', 'अनु' जैसे टुकड़े जो संधि में आपने बार-बार देखे, वे असल में उपसर्ग ही हैं, इसलिए वह अध्याय आपको आधा पढ़ा हुआ मिलेगा। नीचे दिए 25 अभ्यास प्रश्न हल कीजिए और जहाँ गलती हो, वहाँ ऊपर की तालिका पर लौटकर वही एक नियम दोबारा पढ़िए। संधि पूरी याद करने की चीज नहीं है, पहचानने की चीज है — और पहचान अभ्यास से आती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'हिमालय' का संधि विच्छेद है —

  1. Aहिम + लय
  2. Bहिम + आलय
  3. Cहिमाल + य
  4. Dहिमा + लय

व्याख्या

यहाँ 'हिम' के अंत में अ और 'आलय' के आरंभ में आ है। एक ही जाति के दो स्वर मिलने पर दीर्घ आ बनता है, इसलिए यह दीर्घ संधि है।

प्रश्न 2

'महेश' में कौन-सी संधि है?

  1. Aदीर्घ संधि
  2. Bवृद्धि संधि
  3. Cयण् संधि
  4. Dगुण संधि

व्याख्या

'महा + ईश' में आ और ई मिलकर ए बने हैं। अ/आ के आगे इ/ई आने पर ए बनना गुण संधि का नियम है।

प्रश्न 3

'सदैव' का संधि विच्छेद है —

  1. Aसदै + व
  2. Bसदा + एव
  3. Cसदा + ऐव
  4. Dसद + ऐव

व्याख्या

मूल शब्द 'सदा' और 'एव' हैं। आ के आगे ए आने पर ऐ बनता है, जो वृद्धि संधि का नियम है।

प्रश्न 4

'स्वागत' में प्रयुक्त संधि है —

  1. Aअयादि संधि
  2. Bदीर्घ संधि
  3. Cयण् संधि
  4. Dगुण संधि

व्याख्या

'सु + आगत' में उ के आगे असमान स्वर आ आया, इसलिए उ बदलकर व् हो गया। इ/उ/ऋ का य्/व्/र् बनना यण् संधि है।

प्रश्न 5

'पावक' का सही संधि विच्छेद कौन-सा है?

  1. Aपा + वक
  2. Bपो + अक
  3. Cपाव + क
  4. Dपौ + अक

व्याख्या

औ के आगे स्वर आने पर औ टूटकर आव् बनता है, इसलिए पौ + अक = पावक। यह अयादि संधि है। 'पो + अक' से पवक बनता, पावक नहीं।

प्रश्न 6

'जगन्नाथ' का संधि विच्छेद है —

  1. Aजगत् + नाथ
  2. Bजग + नाथ
  3. Cजगन + नाथ
  4. Dजगन् + नाथ

व्याख्या

मूल शब्द 'जगत्' है। त् के आगे न् आने पर त् अपने वर्ग का पाँचवाँ अक्षर न् बन जाता है — यह व्यंजन संधि का नियम है।

प्रश्न 7

'मनोबल' में कौन-सी संधि है?

  1. Aस्वर संधि
  2. Bव्यंजन संधि
  3. Cवृद्धि संधि
  4. Dविसर्ग संधि

व्याख्या

मूल शब्द 'मनः' के अंत में विसर्ग है। विसर्ग से पहले अ हो और आगे कोमल व्यंजन आए तो अ और विसर्ग मिलकर ओ बनते हैं।

प्रश्न 8

'निराशा' का संधि विच्छेद है —

  1. Aनि + राशा
  2. Bनिर + आशा
  3. Cनिरा + शा
  4. Dनिः + आशा

व्याख्या

'निः' में विसर्ग से पहले इ है, इसलिए आगे स्वर आने पर विसर्ग बदलकर र् हो गया। यह विसर्ग संधि है।

प्रश्न 9

'अत्यंत' में कौन-सी संधि है?

  1. Aअयादि संधि
  2. Bयण् संधि
  3. Cगुण संधि
  4. Dदीर्घ संधि

व्याख्या

'अति + अंत' में इ के आगे असमान स्वर अ आया, इसलिए इ बदलकर य् हो गया — यण् संधि का नियम।

प्रश्न 10

'सूर्योदय' का संधि विच्छेद है —

  1. Aसूर्य + ओदय
  2. Bसूर्यो + दय
  3. Cसूर्य + उदय
  4. Dसूर्या + उदय

व्याख्या

'सूर्य' के अंत का अ और 'उदय' का उ मिलकर ओ बने हैं। अ + उ = ओ गुण संधि का नियम है।

प्रश्न 11

'महर्षि' में कौन-सी संधि है और परिणाम क्या बना?

  1. Aवृद्धि संधि, ऐ बना
  2. Bदीर्घ संधि, आ बना
  3. Cयण् संधि, र् बना
  4. Dगुण संधि, अर् बना

व्याख्या

'महा + ऋषि' में आ के आगे ऋ आया। अ/आ + ऋ = अर् गुण संधि का तीसरा नियम है, इसलिए महर्षि बना।

प्रश्न 12

'उद्धार' का संधि विच्छेद है —

  1. Aउत् + हार
  2. Bउद्ध + आर
  3. Cउद् + हार
  4. Dउत् + धार

व्याख्या

त् के आगे ह् आने पर त् बदलकर द् और ह् बदलकर ध् हो जाता है। यह व्यंजन संधि का विशेष नियम है।

प्रश्न 13

'नयन' शब्द में प्रयुक्त संधि है —

  1. Aगुण संधि
  2. Bयण् संधि
  3. Cअयादि संधि
  4. Dदीर्घ संधि

व्याख्या

'ने + अन' में ए के आगे स्वर आने पर ए टूटकर अय् बना। ए/ऐ/ओ/औ का टूटना अयादि संधि है।

प्रश्न 14

'परमौषध' में कौन-सी संधि है?

  1. Aवृद्धि संधि
  2. Bगुण संधि
  3. Cविसर्ग संधि
  4. Dदीर्घ संधि

व्याख्या

'परम + औषध' में अ के आगे औ आया और औ ही बना रहा। अ/आ + ओ/औ = औ वृद्धि संधि का नियम है।

प्रश्न 15

'प्रत्येक' का संधि विच्छेद है —

  1. Aप्रत् + येक
  2. Bप्र + त्येक
  3. Cप्रति + एक
  4. Dप्रत्य + एक

व्याख्या

'प्रति' के इ के आगे असमान स्वर ए आया, इसलिए इ बदलकर य् हो गया — यण् संधि।

प्रश्न 16

'तपोवन' का संधि विच्छेद है —

  1. Aतपो + वन
  2. Bतपः + वन
  3. Cतप + वन
  4. Dतप + ओवन

व्याख्या

मूल शब्द 'तपः' है। विसर्ग से पहले अ और आगे व् होने से अ + विसर्ग मिलकर ओ बने — विसर्ग संधि।

प्रश्न 17

'उल्लास' में कौन-सा परिवर्तन हुआ है?

  1. Aत् बदलकर द् हुआ
  2. Bविसर्ग बदलकर ल् हुआ
  3. Cत् बदलकर न् हुआ
  4. Dत् बदलकर ल् हुआ

व्याख्या

'उत् + लास' में त् के आगे ल् आया, इसलिए त् भी ल् में बदल गया और दोहरा ल्ल बना — व्यंजन संधि।

प्रश्न 18

'गायक' का संधि विच्छेद है —

  1. Aगे + अक
  2. Bगाय + क
  3. Cगा + यक
  4. Dगै + अक

व्याख्या

ऐ के आगे स्वर आने पर ऐ टूटकर आय् बनता है, इसलिए गै + अक = गायक। यह अयादि संधि है।

प्रश्न 19

'नीरोग' शब्द कैसे बना?

  1. Aनिर + ओग
  2. Bनिः + रोग
  3. Cनी + रोग
  4. Dनि + रोग

व्याख्या

विसर्ग के आगे र् आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है — इ खिंचकर ई बन गया।

प्रश्न 20

'कवींद्र' में कौन-सी संधि है?

  1. Aवृद्धि संधि
  2. Bयण् संधि
  3. Cदीर्घ संधि
  4. Dगुण संधि

व्याख्या

'कवि + इंद्र' में इ और इ — एक ही जाति के दो स्वर मिले, इसलिए दीर्घ ई बना। यह दीर्घ संधि है।

प्रश्न 21

'सच्चरित्र' का संधि विच्छेद है —

  1. Aसच् + चरित्र
  2. Bसत् + चरित्र
  3. Cसच्च + रित्र
  4. Dसत + चरित्र

व्याख्या

त् के आगे च् आने पर त् बदलकर च् हो जाता है, जिससे च्च बनता है — व्यंजन संधि का नियम।

प्रश्न 22

'हितैषी' में कौन-सी संधि है?

  1. Aवृद्धि संधि
  2. Bगुण संधि
  3. Cअयादि संधि
  4. Dदीर्घ संधि

व्याख्या

'हित + एषी' में अ के आगे ए आया और दोनों मिलकर ऐ बने। अ/आ + ए/ऐ = ऐ वृद्धि संधि है।

प्रश्न 23

'पित्राज्ञा' में ऋ का क्या हुआ?

  1. Aऋ बदलकर र् हुआ
  2. Bऋ का लोप हुआ
  3. Cऋ बदलकर अर् हुआ
  4. Dऋ बदलकर ई हुआ

व्याख्या

'पितृ + आज्ञा' में ऋ के आगे असमान स्वर आ आया, इसलिए ऋ बदलकर र् हुआ — यण् संधि का तीसरा नियम। ऋ का अर् बनना गुण संधि में होता है, यण् में नहीं।

प्रश्न 24

'निश्चय' में विसर्ग किसमें बदला है?

  1. Aश् में
  2. Bष् में
  3. Cस् में
  4. Dर् में

व्याख्या

विसर्ग के आगे च् या छ् आने पर विसर्ग श् में बदल जाता है, इसलिए 'निः + चय' से निश्चय बना।

प्रश्न 25

निम्नलिखित में कौन-सा शब्द संधि से नहीं, समास से बना है?

  1. Aअत्याचार
  2. Bहिमालय
  3. Cराजपुत्र
  4. Dदेवालय

व्याख्या

'राजपुत्र' में जोड़ की जगह पर कोई ध्वनि नहीं बदली, केवल 'राजा का पुत्र' अर्थ-संबंध जुड़ा है, इसलिए यह समास है। शेष तीनों में ध्वनि परिवर्तन हुआ है, इसलिए वे संधि से बने हैं।