विसर्ग संधि
विसर्ग संधि में सबसे ज़्यादा गलतियाँ होती हैं, क्योंकि विसर्ग आगे आने वाले अक्षर के हिसाब से पाँच अलग-अलग रूप ले सकता है। यहाँ नियम तालिका के साथ 58 शब्द संधि विच्छेद सहित दिए गए हैं।
विसर्ग संधि — सबसे ज़्यादा गलतियाँ यहीं होती हैं
विसर्ग वह दो बिंदुओं वाला चिह्न है जो 'ः' के रूप में लिखा जाता है — मनः, दुः, निः, अंतः, प्रातः, तपः। जब विसर्ग वाले शब्द के आगे कोई दूसरा शब्द जुड़ता है तो विसर्ग की जगह कोई नया वर्ण आ जाता है, या विसर्ग वैसा ही बना रहता है। इसी बदलाव को विसर्ग संधि कहते हैं।
विसर्ग संधि में विद्यार्थी सबसे अधिक भूल करते हैं, और कारण यह है कि जुड़े हुए शब्द में विसर्ग अक्सर पूरी तरह गायब हो जाता है। 'मनोबल' देखकर कोई अंदाजा नहीं होता कि इसमें विसर्ग छिपा था। इसीलिए इस भाग में उलटा तरीक़ा अपनाइए — पहले वे थोड़े-से शब्द पहचान लीजिए जिनके अंत में विसर्ग आता ही है, और उन्हें याद कर लीजिए। मनः, तपः, यशः, पयः, तेजः, रजः, तमः, अधः, पुरः, वयः, शिरः, निः, दुः, अंतः, प्रातः, बहिः, पुनः, आशीः, धनुः, ज्योतिः — यह सूची बहुत छोटी है और यही सूची विसर्ग संधि के लगभग सारे प्रश्नों की जड़ है।
अब नियम देखिए। सबसे महत्वपूर्ण दो नियम ये हैं — यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और आगे कोई स्वर या कोमल व्यंजन आए तो विसर्ग के साथ मिलकर 'ओ' बन जाता है; और यदि विसर्ग से पहले 'इ' या 'उ' हो और आगे कोई स्वर या कोमल व्यंजन आए तो विसर्ग 'र्' बन जाता है। इन्हीं दो नियमों से विसर्ग संधि के आधे से अधिक शब्द बनते हैं।
विसर्ग संधि के मुख्य नियम
| क्रम | कब लागू होता है | विसर्ग का क्या होता है | नमूना |
|---|---|---|---|
| 1 | विसर्ग से पहले अ हो और आगे स्वर, कोमल व्यंजन (ग, ज, ड, द, ब, घ, झ, ढ, ध, भ) या य, र, ल, व, ह, न, म आए | अ और विसर्ग मिलकर ओ बन जाते हैं | मनः + बल = मनोबल |
| 2 | विसर्ग से पहले इ या उ हो और आगे स्वर या कोमल व्यंजन आए | विसर्ग बदलकर र् हो जाता है | निः + आशा = निराशा |
| 3 | विसर्ग के आगे च् या छ् आए | विसर्ग बदलकर श् हो जाता है | निः + चय = निश्चय |
| 4 | विसर्ग के आगे ट् या ठ् आए | विसर्ग बदलकर ष् हो जाता है | धनुः + टंकार = धनुष्टंकार |
| 5 | विसर्ग के आगे त् या थ् आए | विसर्ग बदलकर स् हो जाता है | निः + तार = निस्तार |
| 6 | विसर्ग के आगे क्, ख्, प् या फ् आए | विसर्ग जैसा है वैसा ही बना रहता है | प्रातः + काल = प्रातःकाल |
| 7 | विसर्ग के आगे र् आए | विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है | निः + रोग = नीरोग |
| 8 | विसर्ग के आगे श्, ष् या स् आए | विसर्ग स् में बदल सकता है या यथावत् भी रह सकता है — दोनों रूप मान्य हैं | निः + संदेह = निस्संदेह |
विसर्ग संधि — अ + विसर्ग मिलकर ओ बनने वाले शब्द
- मनोबलमनः + बल
- मनोरथमनः + रथ
- मनोहरमनः + हर
- मनोयोगमनः + योग
- मनोविकारमनः + विकार
- मनोरंजनमनः + रंजन
- मनोनुकूलमनः + अनुकूल
- तपोबलतपः + बल
- तपोवनतपः + वन
- तपोभूमितपः + भूमि
- यशोदायशः + दा
- यशोगानयशः + गान
- पयोदपयः + द
- तेजोमयतेजः + मय
- अधोगतिअधः + गति
- अधोमुखअधः + मुख
- अधोभागअधः + भाग
- पुरोहितपुरः + हित
- रजोगुणरजः + गुण
- तमोगुणतमः + गुण
- वयोवृद्धवयः + वृद्ध
- शिरोमणिशिरः + मणि
- सरोवरसरः + वर
विसर्ग संधि — विसर्ग बदलकर र् बनने वाले शब्द
- निराशानिः + आशा
- निराधारनिः + आधार
- निरर्थकनिः + अर्थक
- निरुपायनिः + उपाय
- निर्धननिः + धन
- निर्बलनिः + बल
- निर्गुणनिः + गुण
- निर्मलनिः + मल
- निर्झरनिः + झर
- निर्जननिः + जन
- दुरात्मादुः + आत्मा
- दुरुपयोगदुः + उपयोग
- दुर्गमदुः + गम
- दुर्बलदुः + बल
- दुर्जनदुः + जन
- दुर्दशादुः + दशा
- दुर्भाग्यदुः + भाग्य
- बहिर्मुखबहिः + मुख
- पुनर्जन्मपुनः + जन्म
- पुनरागमनपुनः + आगमन
- पुनरपिपुनः + अपि
- आशीर्वादआशीः + वाद
- ज्योतिर्मयज्योतिः + मय
विसर्ग संधि — श्, ष्, स् बनने तथा विसर्ग बने रहने वाले शब्द
- निश्चयनिः + चय
- दुश्चरित्रदुः + चरित्र
- धनुष्टंकारधनुः + टंकार
- निस्तारनिः + तार
- दुस्तरदुः + तर
- नमस्तेनमः + ते
- निस्संदेहनिः + संदेह
- प्रातःकालप्रातः + कालआगे क् है, इसलिए विसर्ग यथावत् रहा
- अंतःकरणअंतः + करण
- अधःपतनअधः + पतन
- नीरोगनिः + रोगआगे र् आया, विसर्ग हटा और इ दीर्घ होकर ई बना
- नीरसनिः + रस
विसर्ग संधि की वे दो बातें जो अकसर छूट जाती हैं
पहली — विसर्ग का 'ओ' में बदलना तभी होता है जब विसर्ग से पहले 'अ' हो। 'निः' और 'दुः' में विसर्ग से पहले इ और उ हैं, इसलिए वहाँ ओ नहीं बनेगा, र् बनेगा। इसीलिए मनः से मनोबल बनता है पर निः से निराशा। दूसरी — 'नीरोग' और 'नीरस' में विसर्ग के आगे र् था, इसलिए विसर्ग गिर गया और इ खिंचकर ई हो गया। इन दो शब्दों को अलग से याद रखिए, ये लगभग हर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'मनोबल' में कौन-सी संधि है?
- Aस्वर संधि
- Bव्यंजन संधि
- Cवृद्धि संधि
- Dविसर्ग संधि
व्याख्या
मूल शब्द 'मनः' के अंत में विसर्ग है। विसर्ग से पहले अ हो और आगे कोमल व्यंजन आए तो अ और विसर्ग मिलकर ओ बनते हैं।
प्रश्न 2
'निराशा' का संधि विच्छेद है —
- Aनि + राशा
- Bनिर + आशा
- Cनिरा + शा
- Dनिः + आशा
व्याख्या
'निः' में विसर्ग से पहले इ है, इसलिए आगे स्वर आने पर विसर्ग बदलकर र् हो गया। यह विसर्ग संधि है।
प्रश्न 3
'तपोवन' का संधि विच्छेद है —
- Aतपो + वन
- Bतपः + वन
- Cतप + वन
- Dतप + ओवन
व्याख्या
मूल शब्द 'तपः' है। विसर्ग से पहले अ और आगे व् होने से अ + विसर्ग मिलकर ओ बने — विसर्ग संधि।
प्रश्न 4
'नीरोग' शब्द कैसे बना?
- Aनिर + ओग
- Bनिः + रोग
- Cनी + रोग
- Dनि + रोग
व्याख्या
विसर्ग के आगे र् आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है और उससे पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है — इ खिंचकर ई बन गया।
प्रश्न 5
'निश्चय' में विसर्ग किसमें बदला है?
- Aश् में
- Bष् में
- Cस् में
- Dर् में
व्याख्या
विसर्ग के आगे च् या छ् आने पर विसर्ग श् में बदल जाता है, इसलिए 'निः + चय' से निश्चय बना।