संधि: स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि — REET हिंदी व्याकरण नोट्स
इस पेज पर संधि की परिभाषा, स्वर संधि के पाँचों भेद, व्यंजन और विसर्ग संधि के प्रमुख नियम तथा संधि-विच्छेद की आम गलतियाँ उदाहरण सहित दी गई हैं। REET 2024 में हिंदी से संधि के 5 प्रश्न आए, और नियम पक्के हों तो ये सबसे जल्दी हल होने वाले प्रश्न हैं।
- REET 2024 में 5 प्रश्न
- कक्षा 6–8 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में हिंदी (भाषा I व II) से संधि के 5 प्रश्न आए। इनमें 3 प्रश्न सही संधि-विच्छेद पर थे (तल्लीन, संसार, संस्कृति — तीनों व्यंजन संधि), 1 प्रश्न संधि का नाम पहचानने पर (न्यूनाधिक — दीर्घ) और 1 'किस शब्द में यण् संधि नहीं है' प्रकार का। विकल्प बहुत मिलते-जुलते होते हैं (सम + सार बनाम सम् + सार), इसलिए हलंत (्) और मूल शब्द की पहचान पर ध्यान देना ज़रूरी है।
संधि क्या है?
दो निकटवर्ती वर्णों (ध्वनियों) के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं; जैसे विद्या + आलय = विद्यालय। संधि किए हुए शब्द को फिर से उसके मूल खंडों में अलग करना संधि-विच्छेद कहलाता है। संधि और समास में अंतर याद रखें: संधि में वर्णों का मेल होता है और विच्छेद में '+' लगता है, जबकि समास में पदों (शब्दों) का मेल होता है और विग्रह में कारक चिह्न या 'और' आदि जुड़ते हैं।
संधि के तीन भेद हैं — स्वर संधि (स्वर + स्वर), व्यंजन संधि (व्यंजन + स्वर/व्यंजन, या स्वर + व्यंजन) और विसर्ग संधि (विसर्ग + स्वर/व्यंजन)। हिंदी में संधि वाले अधिकांश शब्द तत्सम (संस्कृत से आए) हैं, इसलिए इसके नियम संस्कृत व्याकरण पर आधारित हैं।
स्वर संधि के पाँच भेद
| भेद | नियम | उदाहरण (विच्छेद) |
|---|---|---|
| दीर्घ संधि | अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ | विद्यालय (विद्या + आलय), न्यूनाधिक (न्यून + अधिक), रवीन्द्र (रवि + इन्द्र), भानूदय (भानु + उदय) |
| गुण संधि | अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर् | नरेन्द्र (नर + इन्द्र), महेश (महा + ईश), सूर्योदय (सूर्य + उदय), महर्षि (महा + ऋषि) |
| वृद्धि संधि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ | सदैव (सदा + एव), एकैक (एक + एक), वनौषधि (वन + औषधि), जलौघ (जल + ओघ) |
| यण् संधि | इ/ई + भिन्न स्वर = य्; उ/ऊ + भिन्न स्वर = व्; ऋ + भिन्न स्वर = र् | इत्यादि (इति + आदि), व्यक्ति (वि + अक्ति), अध्ययन (अधि + अयन), स्वागत (सु + आगत), पित्राज्ञा (पितृ + आज्ञा) |
| अयादि संधि | ए + भिन्न स्वर = अय्; ऐ = आय्; ओ = अव्; औ = आव् | नयन (ने + अन), गायक (गै + अक), पवन (पो + अन), पावक (पौ + अक) |
पहचान का सूत्र: विच्छेद के पहले खंड के अंत में 'इ/उ/ऋ' और अगले में दूसरा स्वर हो तो यण्; 'ए/ऐ/ओ/औ' हो तो अयादि।[स्रोत 1]
व्यंजन संधि के प्रमुख नियम
| नियम | उदाहरण (विच्छेद) |
|---|---|
| वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर या घोष वर्ण → उसी वर्ग का तीसरा वर्ण | दिगंबर (दिक् + अंबर), वागीश (वाक् + ईश), जगदीश (जगत् + ईश), सदाचार (सत् + आचार) |
| पहला/तीसरा वर्ण + न/म → उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण | जगन्नाथ (जगत् + नाथ), उन्नति (उत् + नति), वाङ्मय (वाक् + मय) |
| त्/द् + ल → ल्ल | तल्लीन (तत् + लीन), उल्लास (उत् + लास) |
| त्/द् + च/छ → च्च/च्छ; + ज → ज्ज; + श → च्छ; + ह → द्ध | उच्चारण (उत् + चारण), सज्जन (सत् + जन), उच्छ्वास (उत् + श्वास), उद्धार (उत् + हार) |
| म् + क से भ तक का व्यंजन → अनुस्वार या उसी वर्ग का पंचम वर्ण; म् + य, र, ल, व, श, ष, स, ह → अनुस्वार; म् + म → म्म | संसार (सम् + सार), संकल्प (सम् + कल्प), सम्मान (सम् + मान) |
| सम् + कृ से बने शब्द → बीच में 'स्' का आगम | संस्कृति (सम् + कृति), संस्कार (सम् + कार) |
| स्वर + छ → बीच में च् का आगम (च्छ) | विच्छेद (वि + छेद), परिच्छेद (परि + छेद) |
| अ/आ से भिन्न स्वर के बाद स → ष | अभिषेक (अभि + सेक), विषम (वि + सम) |
| ऋ, र, ष के बाद न → ण (बीच में वर्जित वर्ण न हों) | परिणाम (परि + नाम), प्रमाण (प्र + मान) |
विसर्ग संधि के प्रमुख नियम
| नियम | उदाहरण (विच्छेद) |
|---|---|
| अः + घोष व्यंजन (वर्ग का 3, 4, 5वाँ वर्ण, य र ल व ह) → ओ | मनोबल (मनः + बल), यशोदा (यशः + दा), मनोयोग (मनः + योग) |
| इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन → र् | निराशा (निः + आशा), निर्धन (निः + धन), दुर्गुण (दुः + गुण), आशीर्वाद (आशीः + वाद) |
| विसर्ग + च/छ → श्; + त/थ → स् | निश्चल (निः + चल), दुश्चरित्र (दुः + चरित्र), नमस्ते (नमः + ते), निस्तेज (निः + तेज) |
| इः/उः + क/प → ष् | निष्कपट (निः + कपट), दुष्कर (दुः + कर), निष्पाप (निः + पाप) |
| निः + र → नी (विसर्ग लुप्त, स्वर दीर्घ) | नीरोग (निः + रोग), नीरस (निः + रस) |
निः/दुः वाले शब्द — निर्, निस्, निश्, निष्, नी — सब विसर्ग संधि हैं; अगले वर्ण से तय होता है कि कौन-सा रूप बनेगा।[स्रोत 1]
REET के लिए सावधानियाँ
हर शब्द में संधि नहीं होती। प्रत्यय जुड़कर बने शब्दों (सभ्य + ता = सभ्यता, मानव + ता = मानवता) में संधि नहीं मानी जाती — REET 2024 का 'सभ्यता' वाला प्रश्न इसी पर था। इसलिए यण् वाले विकल्प में यह जाँचें कि विच्छेद में सचमुच इ/उ/ऋ के बाद भिन्न स्वर आता है या नहीं।
विच्छेद में हलंत का ध्यान रखें: 'सम + सार' और 'सम् + सार' अलग हैं; मूल खंड सम्, उत् (उपसर्ग), तत्, सत् हलंत वाले और दुः, निः विसर्ग वाले हैं। 'संस्कृति' में स् का आगम होता है, पर विच्छेद सम् + कृति ही लिखा जाता है — स् अलग खंड नहीं बनता।
एक शब्द में एक से अधिक खंड हों तो सबसे पहले मूल शब्द पहचानें: 'न्यूनाधिक' = न्यून + अधिक (दीर्घ); 'महोत्सव' = महा + उत्सव (गुण); 'अत्यधिक' = अति + अधिक (यण्)। उच्चारण धीरे-धीरे करने से भी जोड़ सुनाई दे जाता है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
स्तर
संधि का औपचारिक अध्ययन उच्च प्राथमिक कक्षाओं (6–8) में होता है; कक्षा 1–5 में बच्चे विद्यालय, सूर्योदय जैसे शब्द पढ़ते-बोलते हुए अनौपचारिक रूप से ही इनसे परिचित होते हैं।
गतिविधि — शब्द जोड़ो कार्ड
आधे-आधे कार्ड बनाएँ (विद्या | आलय, सूर्य | उदय, सम् | मान)। बच्चे जोड़ी मिलाकर पूरा शब्द बोलें और लिखें, फिर देखें कि मिलते समय कौन-सी ध्वनि बदली। नियम बच्चे स्वयं खोजें (आगमन विधि)।
शिक्षण सामग्री
स्वर संधि का रंगीन चार्ट (अ+इ=ए, अ+उ=ओ), पाठ्यपुस्तक के पाठ से संधि वाले शब्दों की सूची और 'शब्द-दीवार'।
आम भ्रांति
बच्चे हर जुड़े दिखने वाले शब्द (सभ्यता, पाठशाला) में संधि मान लेते हैं, या संधि और समास को एक समझते हैं। उपाय: 'वर्ण मिले तो संधि, शब्द मिले तो समास' — दोनों के 5–5 उदाहरणों की तुलनात्मक सारणी बनवाएँ।
आकलन विचार
केवल विच्छेद पूछने के बजाय पाठ के अनुच्छेद में से संधि वाले शब्द छाँटने, उनका भेद लिखने और एक नया उदाहरण स्वयं बनाने का कार्य दें।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
स्वर संधि का क्रम याद रखें — 'दी-गु-वृ-य-अ' (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण्, अयादि)। विच्छेद में इ/उ/ऋ के बाद भिन्न स्वर हो और शब्द में आधे अक्षर के साथ 'य/व/र' दिखे (व्यक्ति, स्वागत, पित्राज्ञा) तो यण्; 'अय/आय/अव/आव' दिखे (नयन, गायक, पवन, पावक) तो अयादि। और विच्छेद के विकल्पों में पहले हलंत वाला मूल खंड (सम्, उत्, तत्) खोजें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 57
‘तल्लीन’ शब्द का सही ‘सन्धि-विच्छेद’ होगा
- Aतल् + लीन
- Bतत् + लीन
- Cत: + लीन
- Dत + ल्लीन
व्याख्या
‘तल्लीन’ = तत् + लीन। यह व्यंजन संधि है: ‘त्’ के बाद ‘ल’ आने पर ‘त्’ का ‘ल्’ हो जाता है, इसलिए तत् + लीन = तल्लीन (जैसे उत् + लास = उल्लास)। ‘तल् + लीन’ मूल शब्द का सही रूप नहीं दर्शाता।
प्रश्न 80
निम्नलिखित में से किस शब्द में यण् संधि नहीं है ?
- Aव्यक्ति
- Bअध्ययन
- Cसभ्यता
- Dव्यवस्था
व्याख्या
यण् संधि में इ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद भिन्न स्वर आने पर क्रमशः य्, व्, र् हो जाता है। व्यक्ति (वि + अक्ति), अध्ययन (अधि + अयन) और व्यवस्था (वि + अवस्था) में यण् संधि है। ‘सभ्यता’ सभ्य + ता (प्रत्यय) से बना है, इसमें यण् संधि नहीं है।
प्रश्न 84
‘संसार’ शब्द का संधि-विच्छेद है-
- Aसम + सार
- Bसन् + सार
- Cसम् + आसार
- Dसम् + सार
व्याख्या
‘संसार’ = सम् + सार। व्यंजन संधि के नियम से ‘म्’ के बाद कोई व्यंजन (यहाँ ‘स’) आए तो ‘म्’ अनुस्वार में बदल जाता है — सम् + सार = संसार।
प्रश्न 35
‘संस्कृति’ शब्द का ‘सन्धि-विच्छेद’ होगा
- Aसु + कृति
- Bसम् + कृति
- Cसन् + कृति
- Dसत् + कृति
व्याख्या
‘संस्कृति’ का विच्छेद सम् + कृति है। ‘सम्’ उपसर्ग के बाद ‘कृ’ धातु से बने शब्द आने पर बीच में ‘स्’ का आगम होता है और म् अनुस्वार बन जाता है (सम् + कृति → संस्कृति)। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है; ‘सु’, ‘सन्’ या ‘सत्’ से यह शब्द नहीं बनता।
प्रश्न 87
‘न्यूनाधिक’ शब्द में संधि है
- Aदीर्घ
- Bगुण
- Cवृद्धि
- Dअयादि
व्याख्या
‘न्यूनाधिक’ = न्यून + अधिक। यहाँ ‘अ’ + ‘अ’ मिलकर ‘आ’ हो गया है। दो सजातीय स्वरों के मिलकर दीर्घ होने को दीर्घ संधि कहते हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'महेश' शब्द में कौन-सी संधि है?
- Aदीर्घ संधि
- Bगुण संधि
- Cवृद्धि संधि
- Dयण् संधि
व्याख्या
महेश = महा + ईश। आ + ई मिलकर 'ए' बनता है, जो गुण संधि का नियम है।
प्रश्न 2
'सदैव' का सही संधि-विच्छेद है
- Aसद + ऐव
- Bसदै + व
- Cसत् + एव
- Dसदा + एव
व्याख्या
सदा + एव में आ + ए मिलकर 'ऐ' बनता है — यह वृद्धि संधि है। अन्य विकल्पों से 'सदैव' शब्द नियमानुसार नहीं बनता।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में से किस शब्द में अयादि संधि है?
- Aपावक
- Bस्वागत
- Cरवीन्द्र
- Dसूर्योदय
व्याख्या
पावक = पौ + अक; औ + अ मिलने पर 'आव्' होता है, जो अयादि संधि है। स्वागत में यण्, रवीन्द्र में दीर्घ और सूर्योदय में गुण संधि है।
प्रश्न 4
'उन्नति' का सही संधि-विच्छेद है
- Aउन् + नति
- Bउ + न्नति
- Cउत् + नति
- Dउद् + नति
व्याख्या
उत् + नति: 'त्' के बाद 'न' आने पर 'त्' उसी वर्ग के पंचम वर्ण 'न्' में बदल जाता है। मूल उपसर्ग 'उत्' है, 'उन्' या 'उद्' नहीं।
प्रश्न 5
'निश्चल' शब्द में कौन-सी संधि है?
- Aस्वर संधि
- Bव्यंजन संधि
- Cविसर्ग संधि
- Dगुण संधि
व्याख्या
निश्चल = निः + चल। विसर्ग के बाद 'च' आने पर विसर्ग 'श्' में बदल जाता है, इसलिए यह विसर्ग संधि है।
प्रश्न 6
'मनोबल' का सही संधि-विच्छेद है
- Aमन + बल
- Bमनो + बल
- Cमनः + बल
- Dमन् + ओबल
व्याख्या
मनः + बल: 'अः' के बाद घोष व्यंजन 'ब' आने पर विसर्ग सहित 'अः' का 'ओ' हो जाता है — यह विसर्ग संधि है।
प्रश्न 7
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- Aनयन — ने + अन
- Bइत्यादि — इति + आदि
- Cसज्जन — सत् + जन
- Dपरिणाम — परि + णाम
व्याख्या
परिणाम का सही विच्छेद परि + नाम है; 'र' के बाद 'न' का 'ण' हो जाता है। शेष तीनों युग्म सही हैं।
प्रश्न 8
निम्नलिखित में से किस शब्द में संधि नहीं है?
- Aमानवता
- Bविद्यालय
- Cनिर्धन
- Dउल्लास
व्याख्या
मानवता = मानव + ता (प्रत्यय); प्रत्यय जुड़ने से बने शब्द में संधि नहीं है। विद्यालय में दीर्घ, निर्धन में विसर्ग और उल्लास में व्यंजन संधि है।
प्रश्न 9
कक्षा 7 के विद्यार्थी 'संधि' और 'समास' को एक ही समझते हैं। शिक्षक के लिए सबसे उपयुक्त तरीका कौन-सा है?
- Aदोनों की परिभाषाएँ दस बार लिखवाना
- Bकेवल परीक्षा में पूछे गए शब्दों की सूची याद करवाना
- Cसमास पढ़ाना छोड़ देना
- Dदोनों के उदाहरणों की तुलनात्मक सारणी बनवाकर बच्चों से अंतर स्वयं निकलवाना
व्याख्या
उदाहरणों की तुलना से बच्चे स्वयं देखते हैं कि संधि में वर्ण और समास में शब्द मिलते हैं; यह आगमन पर आधारित समझ है। रटने से भ्रांति का कारण दूर नहीं होता।
प्रश्न 10
संधि-नियमों को बच्चों के लिए स्थायी और रोचक बनाने की दृष्टि से सबसे उपयुक्त गतिविधि कौन-सी है?
- Aशब्द-खंड कार्ड मिलाकर पूरा शब्द बनाना और बदली ध्वनि पहचानना
- Bव्याकरण पुस्तक से नियम पढ़कर सुनाना
- Cसंधि के नियमों का श्रुतलेख देना
- Dगलत विच्छेद करने पर अंक काटना
व्याख्या
कार्ड मिलाने की गतिविधि में बच्चे सक्रिय रहकर स्वयं ध्वनि-परिवर्तन खोजते हैं, जिससे नियम समझ के साथ याद रहते हैं। केवल नियम सुनाना, श्रुतलेख या अंक काटना सक्रिय खोज का अवसर नहीं देते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में संधि से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में हिंदी भाषा I व II से संधि के कुल 5 प्रश्न आए — अधिकतर संधि-विच्छेद और संधि का भेद पहचानने पर।
संधि के कितने भेद होते हैं?+
संधि के तीन भेद हैं — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। स्वर संधि के पाँच उपभेद हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण् और अयादि।
संधि और समास में क्या अंतर है?+
संधि में दो वर्णों के मेल से परिवर्तन होता है (विद्या + आलय = विद्यालय), जबकि समास में दो या अधिक शब्दों को संक्षिप्त करके एक पद बनाया जाता है (राजा का पुत्र = राजपुत्र)।
यण् संधि की पहचान कैसे करें?+
जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए और वे क्रमशः य्, व्, र् में बदल जाएँ, तो यण् संधि होती है — जैसे इति + आदि = इत्यादि, सु + आगत = स्वागत।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए