संस्कृत संधि: स्वर, व्यंजन एवं विसर्ग संधि के नियम
संधि संस्कृत व्याकरण का सबसे अधिक पूछा जाने वाला टॉपिक है — लगभग हर संस्कृत पेपर में स्वर, व्यंजन या विसर्ग संधि पर एक प्रश्न जरूर होता है। इस पेज में तीनों संधियों के नियम उदाहरण सहित इस तरह समझाए गए हैं कि संधि करना और संधि-विच्छेद करना, दोनों आसानी से आ जाएँ।
- 2024 में सीधा PYQ दर्ज नहीं, पाठ्यक्रम-आधारित
- कक्षा 6-8 स्तर
- 9 मिनट पढ़ें
REET में संधि कैसे पूछी जाती है
RajStudy के डेटाबेस में इस टॉपिक से जुड़ा कोई REET 2024 प्रश्न अभी दर्ज नहीं है, इसलिए यहाँ प्रश्न-शैली का अनुमान किसी विशेष पिछले प्रश्न पर नहीं बल्कि सीधे आधिकारिक REET पाठ्यक्रम और मानक संस्कृत व्याकरण की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित है — यह ईमानदारी से बता देना जरूरी समझा गया। सामान्यतः दो प्रकार के प्रश्न आते हैं — पहला, दो शब्द देकर सही संधि-युक्त रूप पहचानना (जैसे 'देव + इन्द्र = ?'), और दूसरा, संधि-युक्त शब्द देकर सही संधि-विच्छेद पहचानना (जैसे 'देवेन्द्र का विच्छेद क्या है?')। तीनों संधियों — स्वर, व्यंजन, विसर्ग — के कम-से-कम एक-एक उदाहरण याद रखना जरूरी है।
संधि किसे कहते हैं
जब दो वर्ण — चाहे दोनों स्वर हों, या एक व्यंजन और दूसरा स्वर/व्यंजन, या विसर्ग किसी स्वर/व्यंजन के — पास-पास आते हैं, तो उनके मेल से जो ध्वनि-परिवर्तन होता है उसे 'संधि' कहते हैं। संधि तीन प्रकार की होती है: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि।
बने हुए शब्द को अलग-अलग मूल शब्दों में तोड़ने की प्रक्रिया 'संधि-विच्छेद' कहलाती है। परीक्षा की दृष्टि से दोनों दिशाओं — संधि बनाना और संधि तोड़ना — का अभ्यास बराबर जरूरी है, क्योंकि प्रश्न किसी भी रूप में आ सकता है।
स्वर संधि के नियम
| संधि का नाम | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ संधि | अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ | धर्म+अर्थ=धर्मार्थ; गिरि+ईश=गिरीश; भानु+उदय=भानूदय |
| गुण संधि | अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर् | देव+इन्द्र=देवेन्द्र; महा+उत्सव=महोत्सव; देव+ऋषि=देवर्षि |
| वृद्धि संधि | अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ | सदा+एव=सदैव; महा+औषध=महौषध |
| यण् संधि | इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र् | यदि+अपि=यद्यपि; सु+अल्प=स्वल्प; इति+आदि=इत्यादि |
| अयादि संधि | ए+अ=अय्; ऐ+अ=आय्; ओ+अ=अव्; औ+अ=आव् | ने+अन=नयनम्; नै+अक=नायकः; पो+अन=पवनम् |
पाँचों स्वर-संधियाँ REET में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं — हर एक का कम-से-कम एक उदाहरण कंठस्थ रखें।[स्रोत 2]
व्यंजन संधि — प्रमुख उदाहरण
| नियम (संक्षेप में) | उदाहरण |
|---|---|
| त्/द् के बाद घोष वर्ण (ज, ग, ड, ब आदि) आने पर त्/द् उसी वर्ग के घोष वर्ण में बदल जाता है | सत्+जन=सज्जन; जगत्+ईश=जगदीश; उत्+लास=उल्लास |
| क्/ग् या अन्य वर्गों में भी स्वर/घोष वर्ण आने पर सजातीय घोष वर्ण होता है | दिक्+गज=दिग्गज; वाक्+ईश=वागीश |
| त् के बाद च/छ आने पर त् 'च्' में बदलता है | सत्+चित्=सच्चित् |
व्यंजन संधि के नियम विस्तृत हैं; REET में सामान्यतः ऊपर जैसे प्रचलित शब्द-उदाहरण ही पूछे जाते हैं, इसलिए नियम से ज्यादा उदाहरण याद रखना उपयोगी है।
विसर्ग संधि — प्रमुख उदाहरण
| नियम (संक्षेप में) | उदाहरण |
|---|---|
| विसर्ग के बाद घोष व्यंजन/स्वर आने पर विसर्ग प्रायः 'ओ' या 'र्' में बदलता है | रामः+वनम्=रामो वनम्; मनः+रथ=मनोरथ; तपः+वन=तपोवन |
| विसर्ग के बाद च/छ आने पर विसर्ग 'श्' में बदलता है | निः+चल=निश्चल |
| विसर्ग के बाद र आने पर विसर्ग का लोप होकर पूर्व स्वर दीर्घ हो जाता है | निः+रोग=नीरोग |
विसर्ग संधि पहचानने का आसान तरीका है — शब्द के अंत में 'ः' देखें, वही विसर्ग-संधि का संकेत है।
संधि क्यों जरूरी है और परीक्षा में इसे कैसे साधें
संधि केवल एक अलग-थलग व्याकरण-नियम नहीं है — यह लगभग हर संस्कृत शब्द, वाक्य और श्लोक में मौजूद रहती है। शब्द रूप और धातु रूप के जो अंतिम रूप हम रटते हैं, उनमें से कई वास्तव में संधि के नियमों से ही बनते हैं (जैसे 'रामः वनम् गच्छति' बोलचाल में 'रामो वनं गच्छति' बन जाता है)। इसलिए संधि को अलग टॉपिक समझने की बजाय बाकी सभी व्याकरण-टॉपिकों की नींव मानना चाहिए, और इसे सबसे पहले पक्का करना चाहिए।
परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे कारगर तरीका है कि रोज़ पाँच नए संधि-उदाहरण किसी पाठ्यपुस्तक या श्लोक से चुनकर उनका विच्छेद खुद करने की कोशिश करें, फिर उत्तर मिलाएँ। शुरुआत में गलतियाँ स्वाभाविक हैं, पर नियमित अभ्यास से पैटर्न अपने-आप स्मृति में बैठने लगता है। यह भी ध्यान रखें कि REET में संधि प्रायः स्वतंत्र प्रश्न के रूप में तो आती ही है, साथ ही शब्द-रूप या वाक्य-रचना के प्रश्नों के अंदर छिपी हुई भी आ सकती है।
एक और उपयोगी अभ्यास यह है कि जब भी कोई नया संधि-युक्त शब्द दिखे, तो उसे केवल पहचानने की बजाय ज़ोर से बोलकर देखें कि दोनों मूल शब्द जोड़ने पर ध्वनि स्वाभाविक रूप से कैसे बदलती है — जैसे 'देव' और 'इन्द्र' को जल्दी-जल्दी बोलने पर 'देवेन्द्र' जैसी ध्वनि अपने-आप निकलती महसूस होती है। यह सुनने-बोलने वाला अभ्यास नियमों को याद रखने से कहीं अधिक टिकाऊ समझ बनाता है, क्योंकि तब नियम रटे हुए नहीं बल्कि अनुभव किए हुए लगते हैं।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि
दो अलग रंग के कार्ड पर दो शब्द (जैसे 'देव' और 'इन्द्र') लिखकर बच्चों को जोड़ने दें और बताएँ कि जुड़ते समय ध्वनि कैसे बदली — इससे नियम स्मरण की बजाय अनुभव से समझ में आता है।
शिक्षण सहायक सामग्री
स्वर-चार्ट (अ, आ, इ, ई... की तालिका) कक्षा में लगाकर हर संधि के समय उसी पर उँगली रखकर दिखाना बच्चों को दृश्य रूप से नियम याद रखने में मदद करता है।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर संधि और संधि-विच्छेद को उल्टा कर देते हैं, या दीर्घ संधि व गुण संधि में भ्रमित हो जाते हैं — दोनों दिशा में बार-बार मौखिक अभ्यास कराने से यह भ्रम दूर होता है।
आकलन
श्यामपट्ट पर पाँच शब्द-युग्म लिखकर मौखिक रूप से तुरंत संधि पूछना एक तेज़ और प्रभावी कक्षा-आकलन है।
याद रखने की ट्रिक
गुण संधि याद रखने की सरल पंक्ति: 'अ/आ के बाद इ-ई हो तो ए, उ-ऊ हो तो ओ, ऋ हो तो अर्' — इसे जोर से दोहराकर याद करें, फिर वृद्धि संधि (ए/ऐ से ऐ, ओ/औ से औ) को गुण संधि की 'अगली सीढ़ी' के रूप में जोड़ें।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'देव + इन्द्र' की संधि क्या होगी?
- Aदेवइन्द्र
- Bदेवेन्द्र
- Cदेवैन्द्र
- Dदेवोइन्द्र
व्याख्या
अ/आ के बाद इ/ई आने पर गुण संधि से 'ए' बनता है, अतः देव+इन्द्र=देवेन्द्र।
प्रश्न 2
'महा + औषध' में कौन-सी संधि है?
- Aगुण संधि
- Bयण् संधि
- Cवृद्धि संधि
- Dदीर्घ संधि
व्याख्या
अ/आ के बाद ओ/औ आने पर वृद्धि संधि से 'औ' बनता है — महा+औषध=महौषध।
प्रश्न 3
'सु + अल्प = स्वल्प' किस संधि का उदाहरण है?
- Aगुण संधि
- Bयण् संधि
- Cअयादि संधि
- Dदीर्घ संधि
व्याख्या
उ के बाद असमान स्वर आने पर उ का 'व्' हो जाता है, यही यण् संधि है।
प्रश्न 4
'गिरि + ईश' का संधि-युक्त रूप है
- Aगिर्यीश
- Bगिरीश
- Cगिरेश
- Dगिरयीश
व्याख्या
इ/ई + इ/ई = ई (दीर्घ संधि), अतः गिरि+ईश=गिरीश।
प्रश्न 5
'निः + चल' की संधि से बनता है
- Aनिश्चल
- Bनिचल
- Cनिःचल
- Dनिर्चल
व्याख्या
विसर्ग के बाद च/छ आने पर विसर्ग 'श्' में बदल जाता है — निः+चल=निश्चल।
प्रश्न 6
'सत् + जन' की व्यंजन संधि से बना शब्द है
- Aसत्जन
- Bसज्जन
- Cसद्जन
- Dसज्जान
व्याख्या
त् के बाद घोष वर्ण 'ज' आने पर त् भी उसी वर्ग के घोष वर्ण 'ज्' में बदलकर सज्जन बनता है।
प्रश्न 7
'ने + अन' में अयादि संधि से बना शब्द है
- Aनयनम्
- Bनायनम्
- Cनेअनम्
- Dनवनम्
व्याख्या
ए के बाद अ आने पर 'अय्' हो जाता है, अतः ने+अन=नयनम्।
प्रश्न 8
'मनः + रथ' का सही संधि-युक्त रूप है
- Aमनःरथ
- Bमनोरथ
- Cमनरथ
- Dमनारथ
व्याख्या
विसर्ग के बाद घोष वर्ण आने पर विसर्ग 'ओ' में बदल जाता है — मनः+रथ=मनोरथ।
प्रश्न 9
'भानु + उदय' में कौन-सी संधि है?
- Aगुण संधि
- Bवृद्धि संधि
- Cदीर्घ संधि
- Dयण् संधि
व्याख्या
उ/ऊ के बाद उ/ऊ आने पर दीर्घ संधि से 'ऊ' बनता है — भानु+उदय=भानूदय।
प्रश्न 10
कक्षा में संधि पढ़ाते समय शिक्षक के लिए सबसे प्रभावी तरीका कौन-सा है?
- Aकेवल नियम रटवाना
- Bशब्द-कार्ड जोड़कर व्यावहारिक अभ्यास कराना
- Cकेवल पाठ्यपुस्तक पढ़ाना
- Dसंधि को छोड़ देना
व्याख्या
शब्द-कार्ड जोड़कर बच्चों को स्वयं संधि बनाते देखने का अनुभव देने से नियम रटने की बजाय समझ बनती है, जो दीर्घकालिक स्मरण में मदद करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संधि के कितने भेद होते हैं?+
संधि के तीन मुख्य भेद हैं — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। स्वर संधि के भी पाँच उपभेद होते हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण् और अयादि संधि।
REET में संधि से कितने प्रश्न आते हैं?+
निश्चित संख्या हर वर्ष बदल सकती है, पर संस्कृत व्याकरण खंड में संधि सबसे नियमित रूप से पूछे जाने वाले टॉपिकों में से एक है, इसलिए इसे कभी हल्के में न लें।
संधि और संधि-विच्छेद में क्या अंतर है?+
दो शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाना 'संधि' है, जबकि बने हुए संधि-शब्द को वापस उसके मूल दो शब्दों में अलग करना 'संधि-विच्छेद' कहलाता है।
यण् संधि किसे कहते हैं?+
जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आता है, तो इ/ई का 'य्', उ/ऊ का 'व्' और ऋ का 'र्' हो जाता है — इसे यण् संधि कहते हैं, जैसे 'यदि+अपि=यद्यपि'।
विसर्ग संधि पहचानने का सबसे आसान तरीका क्या है?+
जिस शब्द के अंत में विसर्ग (ः) हो और उसके बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में बदलाव हो, वहाँ विसर्ग संधि होती है — जैसे 'निः+चल=निश्चल'।
क्या संधि केवल संस्कृत तक सीमित है?+
संधि मूल रूप से संस्कृत व्याकरण की अवधारणा है, पर हिंदी में प्रयुक्त होने वाले कई तत्सम शब्द (जैसे 'विद्यालय', 'सूर्योदय') भी संस्कृत संधि-नियमों से ही बने हैं, इसलिए यह हिंदी व्याकरण की परीक्षा में भी काम आती है।
गुण संधि और वृद्धि संधि में क्या अंतर है?+
गुण संधि में अ/आ के बाद इ/ई से 'ए' और उ/ऊ से 'ओ' बनता है, जबकि वृद्धि संधि में अ/आ के बाद ए/ऐ से 'ऐ' और ओ/औ से 'औ' बनता है — दोनों एक जैसी प्रक्रिया के दो अलग स्तर हैं।
क्या संधि याद रखने के लिए संस्कृत बोलना आना जरूरी है?+
नहीं, संधि के नियम व्यवस्थित रूप से (स्वर-चार्ट, उदाहरण-तालिका के ज़रिए) भी अच्छी तरह सीखे जा सकते हैं; बोलने का अभ्यास सहायक जरूर है, पर अनिवार्य नहीं।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए