संस्कृत समास: भेद, पहचान और उदाहरण
समास संस्कृत में शब्द-रचना की मुख्य प्रक्रिया है और REET के संस्कृत पेपर में समास-भेद पहचानना या विग्रह करना लगभग हर बार पूछा जाता है। इस पेज में छहों समासों को पहचान के आसान संकेत और शुद्ध उदाहरणों के साथ समझाया गया है।
- 2024 में सीधा PYQ दर्ज नहीं, पाठ्यक्रम-आधारित
- कक्षा 6-8 स्तर
- 10 मिनट पढ़ें
REET में समास कैसे पूछा जाता है
RajStudy के डेटाबेस में इस टॉपिक से जुड़ा कोई REET 2024 प्रश्न अभी दर्ज नहीं है, इसलिए यहाँ प्रश्न-शैली का अनुमान किसी विशेष पिछले प्रश्न पर नहीं बल्कि सीधे आधिकारिक REET पाठ्यक्रम और मानक संस्कृत व्याकरण की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित है — यह ईमानदारी से बता देना जरूरी समझा गया। समास से सामान्यतः दो तरह के प्रश्न बनते हैं — किसी दिए हुए समास-पद (जैसे 'पीताम्बर') का भेद बताना, या किसी भेद (जैसे 'बहुव्रीहि') का सही उदाहरण पहचानना। कर्मधारय व बहुव्रीहि में, और तत्पुरुष व द्वंद्व में विद्यार्थी अक्सर भ्रमित होते हैं — यही सबसे अधिक पूछा जाने वाला भ्रम-बिंदु है।
समास किसे कहते हैं
जब दो या अधिक शब्द आपस में मिलकर, बीच की विभक्ति (कारक-चिह्न) का लोप करके एक नया, संक्षिप्त और सार्थक शब्द बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को 'समास' कहते हैं। बने हुए शब्द को 'समस्त पद' कहा जाता है।
समस्त पद का अर्थ स्पष्ट करने के लिए जब उसे वापस उसके मूल शब्दों में और छूटी हुई विभक्ति के साथ अलग किया जाता है, तो उसे 'समास-विग्रह' कहते हैं — जैसे 'राजपुत्र' का विग्रह है 'राजा का पुत्र'। समास मुख्यतः छह प्रकार के होते हैं: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि।
छह समासों की पहचान
| भेद | प्रधान पद | पहचान का नियम | उदाहरण एवं विग्रह |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पूर्व पद | पहला पद अव्यय होता है और पूरा समास भी अव्यय (अपरिवर्तनीय) बन जाता है | यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार; प्रतिदिन = प्रत्येक दिन |
| तत्पुरुष | उत्तर पद | दोनों पदों के बीच लुप्त कारक-चिह्न (विभक्ति) के आधार पर उपभेद तय होते हैं | राजपुत्र = राजा का पुत्र; रसोईघर = रसोई के लिए घर |
| कर्मधारय | उत्तर पद | पूर्व पद विशेषण और उत्तर पद विशेष्य होता है, दोनों की विभक्ति समान होती है | नीलकमल = नीला कमल; महादेव = महान देव |
| द्विगु | उत्तर पद | पूर्व पद संख्यावाचक होता है और समूह/समाहार का बोध कराता है | त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह; नवरात्रि = नौ रात्रियों का समूह |
| द्वंद्व | दोनों पद | दोनों पद प्रधान होते हैं, विग्रह में 'और' (च) जुड़ता है | माता-पिता = माता च पिता च; सुख-दुःख = सुखं च दुःखं च |
| बहुव्रीहि | अन्य पद (दोनों पद अप्रधान) | समस्त पद स्वयं किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का विशेषण बन जाता है | पीताम्बर = पीत है अम्बर जिसका (अर्थात् विष्णु); दशानन = दस हैं आनन जिसके (अर्थात् रावण) |
पहचान की कुंजी हमेशा 'कौन-सा पद प्रधान है' और 'विग्रह में क्या जुड़ता है' यही दो प्रश्न पूछना है।[स्रोत 2]
तत्पुरुष समास के उपभेद (कारक के अनुसार)
- कर्म तत्पुरुष (द्वितीया)
- ग्रामगत = ग्राम को गया हुआ
- करण तत्पुरुष (तृतीया)
- मनगढ़ंत = मन से गढ़ा हुआ
- संप्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी)
- रसोईघर = रसोई के लिए घर
- अपादान तत्पुरुष (पंचमी)
- ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त
- संबंध तत्पुरुष (षष्ठी)
- राजपुत्र = राजा का पुत्र
- अधिकरण तत्पुरुष (सप्तमी)
- ग्रामवास = ग्राम में वास
कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर कैसे करें
यह वह जगह है जहाँ अधिकांश विद्यार्थी गलती करते हैं। कर्मधारय समास में समस्त पद स्वयं उसी वस्तु का बोध कराता है जिसका वह वर्णन कर रहा है — जैसे 'नीलकमल' स्वयं एक कमल ही है, बस नीले रंग का। इसके विपरीत बहुव्रीहि समास में समस्त पद किसी तीसरे, अलग व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताता है — जैसे 'पीताम्बर' न तो 'पीत' है न 'अम्बर', बल्कि उस व्यक्ति (विष्णु) का नाम है जिसका अम्बर पीत है।
सरल परीक्षण यह है: विग्रह में यदि 'जिसका/जिसकी/जिसके' शब्द आए और अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति की ओर संकेत करे, तो समास बहुव्रीहि है; अन्यथा वह कर्मधारय होगा।
समास पहचानने की पूरी प्रक्रिया
किसी भी समस्त पद का भेद पहचानने के लिए तीन प्रश्न क्रम से पूछना सबसे भरोसेमंद तरीका है। पहला — क्या पहला पद अव्यय है और पूरा पद भी अव्यय बन गया है? यदि हाँ, तो अव्ययीभाव। दूसरा — क्या समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का विशेषण बनकर उसकी ओर संकेत करता है? यदि हाँ, तो बहुव्रीहि। तीसरा — क्या दोनों पद प्रधान हैं और 'और' का भाव है? यदि हाँ, तो द्वंद्व। बाकी बचे मामलों में तत्पुरुष, कर्मधारय व द्विगु के बीच अंतर पूर्व पद के स्वभाव (कारक-चिह्न, विशेषण, या संख्या) से तय होता है।
REET की तैयारी करते समय हर भेद के कम-से-कम तीन-चार शुद्ध उदाहरण कंठस्थ रखना बहुत उपयोगी रहता है, क्योंकि प्रश्नों में अक्सर नया समस्त पद देकर भेद पूछा जाता है, न कि सीधे परिभाषा। जितने अधिक उदाहरण परिचित होंगे, नए शब्द का भेद पहचानना उतना ही आसान होगा।
समास और संधि का आपसी संबंध समझना भी जरूरी है — कई समस्त पदों के अंदर संधि भी छिपी होती है (जैसे 'विद्यालय' समास भी है और इसमें संधि भी है: विद्या+आलय)। इसलिए जब भी किसी समस्त पद का विग्रह करें, पहले यह देखें कि क्या पद के बीच में कोई संधि तो नहीं है, फिर समास का भेद तय करें — यह दो-चरण जाँच परीक्षा में गलत उत्तर से बचाती है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि
कक्षा में रोज़मर्रा के परिचित शब्द (जैसे 'रसोईघर', 'माता-पिता') चुनकर बच्चों से पूछें कि यह किन दो शब्दों से मिलकर बना है — परिचित उदाहरणों से शुरुआत करने पर भेद जल्दी समझ आता है।
शिक्षण सहायक सामग्री
छह समासों का एक रंग-कोडित चार्ट कक्षा में टाँगना, जिसमें हर भेद के सामने एक तस्वीर-उदाहरण हो (जैसे बहुव्रीहि के सामने पीताम्बर धारण किए विष्णु का चित्र) — दृश्य स्मृति को मजबूत करता है।
सामान्य भ्रांति
बच्चे प्रायः कर्मधारय और बहुव्रीहि, तथा तत्पुरुष और द्वंद्व को आपस में बदल देते हैं — दोनों जोड़ियों पर अलग-अलग अभ्यास प्रश्न कराना जरूरी है।
आकलन
पाँच समस्त पद श्यामपट्ट पर लिखकर बच्चों से तुरंत भेद और विग्रह दोनों पूछना एक तेज़ मौखिक आकलन है।
याद रखने की ट्रिक
'बहुव्रीहि में तीसरा कोई और, बाकी सब अपने-अपने प्रधान' — यानी बहुव्रीहि में समास किसी तीसरे व्यक्ति का बोध कराता है, अव्ययीभाव में पहला पद प्रधान, तत्पुरुष-कर्मधारय-द्विगु में दूसरा पद प्रधान, और द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं — यह एक पंक्ति याद रखते ही पूरी तालिका खुल जाती है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'पीताम्बर' किस समास का उदाहरण है?
- Aकर्मधारय
- Bबहुव्रीहि
- Cद्वंद्व
- Dद्विगु
व्याख्या
'पीताम्बर' का विग्रह है 'पीत है अम्बर जिसका' — यह किसी तीसरे व्यक्ति (विष्णु) का बोध कराता है, इसलिए बहुव्रीहि समास है।
प्रश्न 2
'माता-पिता' शब्द किस समास का उदाहरण है?
- Aद्वंद्व
- Bतत्पुरुष
- Cबहुव्रीहि
- Dअव्ययीभाव
व्याख्या
दोनों पद प्रधान हैं और विग्रह में 'च' (और) जुड़ता है — 'माता च पिता च' — यह द्वंद्व समास है।
प्रश्न 3
'राजपुत्र' का सही विग्रह और समास-भेद है
- Aराजा का पुत्र — तत्पुरुष
- Bराजा जैसा पुत्र — कर्मधारय
- Cराजा और पुत्र — द्वंद्व
- Dराजा है जो पुत्र — बहुव्रीहि
व्याख्या
'राजपुत्र' में षष्ठी विभक्ति का लोप है (राजा का पुत्र), अतः यह संबंध तत्पुरुष समास है।
प्रश्न 4
'यथाशक्ति' शब्द किस समास का उदाहरण है?
- Aअव्ययीभाव
- Bद्विगु
- Cकर्मधारय
- Dबहुव्रीहि
व्याख्या
पहला पद अव्यय है और पूरा समस्त पद भी अव्यय बन गया है — 'शक्ति के अनुसार' — यह अव्ययीभाव समास है।
प्रश्न 5
'त्रिभुवन' शब्द किस समास का उदाहरण है?
- Aद्विगु
- Bद्वंद्व
- Cतत्पुरुष
- Dबहुव्रीहि
व्याख्या
पहला पद 'त्रि' संख्यावाचक है और समूह का बोध कराता है (तीन भुवनों का समूह) — यह द्विगु समास है।
प्रश्न 6
'नीलकमल' समास में प्रधान पद कौन-सा है?
- Aपूर्व पद (नील)
- Bउत्तर पद (कमल)
- Cदोनों पद समान रूप से
- Dकोई पद प्रधान नहीं
व्याख्या
कर्मधारय समास में उत्तर पद (विशेष्य) प्रधान होता है — यहाँ 'कमल' प्रधान है और 'नील' उसका विशेषण है।
प्रश्न 7
'रसोईघर' समास का सही विग्रह है
- Aरसोई के लिए घर
- Bरसोई का घर
- Cरसोई में घर
- Dरसोई और घर
व्याख्या
'रसोई के लिए घर' में चतुर्थी विभक्ति का लोप है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष समास है।
प्रश्न 8
दशानन (रावण) शब्द में समास-भेद है
- Aबहुव्रीहि
- Bद्विगु
- Cकर्मधारय
- Dअव्ययीभाव
व्याख्या
'दस हैं आनन (मुख) जिसके' यह किसी तीसरे व्यक्ति रावण का बोध कराता है, अतः बहुव्रीहि समास है, संख्यावाचक होते हुए भी द्विगु नहीं।
प्रश्न 9
समास पढ़ाते समय कक्षा में सबसे उपयोगी गतिविधि कौन-सी है?
- Aकेवल परिभाषा रटवाना
- Bपरिचित रोज़मर्रा के शब्दों से भेद पहचनवाना
- Cसमास को छोड़ देना
- Dकेवल अंग्रेज़ी अनुवाद कराना
व्याख्या
'रसोईघर', 'माता-पिता' जैसे परिचित शब्दों से शुरुआत करने पर बच्चे भेद को व्यावहारिक रूप से, रटे बिना समझ पाते हैं।
प्रश्न 10
'सुख-दुःख' शब्द का विग्रह है
- Aसुखं च दुःखं च
- Bसुख का दुःख
- Cसुख के लिए दुःख
- Dसुख से दुःख
व्याख्या
द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह में 'च' (और) जुड़ता है — सुखं च दुःखं च।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
समास के कितने भेद होते हैं?+
समास के छह प्रमुख भेद हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि। तत्पुरुष के आगे छह उपभेद कारक के अनुसार होते हैं।
समास और संधि में क्या अंतर है?+
संधि दो वर्णों के मेल से बनती है और ध्वनि-परिवर्तन पर आधारित है, जबकि समास दो या अधिक शब्दों के मेल से बनता है और बीच की विभक्ति का लोप करता है — दोनों अलग प्रक्रियाएँ हैं।
बहुव्रीहि समास की पहचान कैसे करें?+
यदि समस्त पद स्वयं उस वस्तु का नाम न होकर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताए (जैसे पीताम्बर = विष्णु), तो वह बहुव्रीहि समास है।
द्विगु और द्वंद्व समास में क्या अंतर है?+
द्विगु में पहला पद संख्यावाचक होता है और समूह का बोध कराता है (जैसे त्रिभुवन), जबकि द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह में 'और' जुड़ता है (जैसे माता-पिता)।
तत्पुरुष समास के कितने उपभेद होते हैं?+
तत्पुरुष समास के छह उपभेद होते हैं, जो छह कारकों (कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण) के अनुसार बनते हैं — जैसे 'राजपुत्र' संबंध तत्पुरुष है क्योंकि इसमें षष्ठी विभक्ति (का/के/की) का लोप है।
अव्ययीभाव समास में समस्त पद अव्यय क्यों बन जाता है?+
अव्ययीभाव समास में पहला पद स्वयं अव्यय (जैसे 'यथा', 'प्रति') होता है, और इस पद के प्रधान होने के कारण पूरा समस्त पद भी अव्यय की तरह व्यवहार करने लगता है, यानी उसमें लिंग-वचन के अनुसार रूप नहीं बदलते।
समास पहचानने में सबसे पहला और सबसे उपयोगी प्रश्न कौन-सा पूछना चाहिए?+
सबसे पहले यह पूछें कि 'दोनों पदों में से कौन-सा प्रधान है, या दोनों प्रधान हैं, या कोई तीसरा (बाहरी) अर्थ प्रधान है' — यह एक प्रश्न ही समास के छह भेदों में से अधिकांश को छाँट देता है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए