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REET लेवल 1 व 2 · हिंदी

समास

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समास दो या अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया, संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया है। REET में हर बार गद्यांश से जोड़कर या सीधे शब्द देकर समास पहचानने के प्रश्न पूछे जाते हैं, और सबसे ज्यादा उलझन द्वंद्व व कर्मधारय, तथा तत्पुरुष व बहुव्रीहि में होती है।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • कक्षा 6-8 स्तर की गहराई
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के सभी चार प्रश्न एक ही पैटर्न पर आधारित थे — गद्यांश या सीधे दिए गए युग्म शब्दों (जैसे ‘देवी-देवताओं’, ‘फल-फूलों’, ‘जीव-जंतु’, ‘हानि-लाभ’) में समास पहचानना, और चारों का सही उत्तर द्वंद्व समास निकला। यह दिखाता है कि योजक चिह्न (-) से जुड़े और ‘और’ से विग्रह होने वाले शब्द-युग्मों को पहचानना REET में बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए द्वंद्व समास को कर्मधारय व अन्य भेदों से अलग करना जरूर आना चाहिए।

समास क्या है?

जब दो या अधिक शब्द आपस में मिलकर एक नया, संक्षिप्त और सार्थक शब्द बनाते हैं तथा उनके बीच की विभक्ति (कारक-चिह्न) का लोप हो जाता है, तो इस प्रक्रिया को समास कहते हैं। बने हुए नए शब्द को समस्त पद या सामासिक शब्द कहा जाता है, और उसे मूल रूप में वापस अलग-अलग शब्दों में लिखना समास-विग्रह कहलाता है — जैसे ‘राजपुत्र’ का विग्रह है ‘राजा का पुत्र’।

समास में सामान्यतः दो पद होते हैं — पूर्वपद (पहला शब्द) और उत्तरपद (दूसरा शब्द)। हिंदी व्याकरण में समास के छह प्रमुख भेद माने जाते हैं: अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि।

समास और संधि को अक्सर एक-दूसरे से जोड़कर देखा जाता है क्योंकि दोनों में शब्द छोटे और संक्षिप्त होते हैं, पर दोनों की प्रक्रिया अलग है। संधि में दो वर्णों (ध्वनियों) के पास-पास आने पर उनमें ध्वनि-परिवर्तन होता है (जैसे विद्या + आलय = विद्यालय, जहाँ आ+आ मिलकर आ बना), जबकि समास में दो पूरे शब्दों (पदों) के बीच केवल विभक्ति (कारक-चिह्न) का लोप होता है, ध्वनि नहीं बदलती (राजा का पुत्र = राजपुत्र)। कई सामासिक शब्दों में समास और संधि दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ भी हो सकती हैं, जैसे ‘विद्यालय’ शब्द में पहले संधि (विद्या+आलय) होती है और फिर वह एक स्वतंत्र शब्द के रूप में समास के उदाहरणों में भी गिना जा सकता है — इसलिए परीक्षा में इन दोनों में अंतर स्पष्ट होना जरूरी है। परीक्षा में अक्सर यही दोनों प्रक्रियाएँ मिलाकर भ्रम पैदा किया जाता है, इसलिए वर्ण-स्तर के परिवर्तन (संधि) और पद-स्तर के लोप (समास) को हमेशा अलग-अलग जाँचें।

समास के छह भेद

भेदपहचानउदाहरण व विग्रह
अव्ययीभाव समासपूर्वपद अव्यय होता है, समस्त पद भी अव्यय (क्रिया-विशेषण) की तरह प्रयुक्त होता हैयथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
तत्पुरुष समासउत्तरपद प्रधान; बीच की विभक्ति का लोपराजपुत्र = राजा का पुत्र
कर्मधारय समासएक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य, या एक उपमान और दूसरा उपमेयनीलकमल = नीला कमल
द्विगु समासपूर्वपद संख्यावाची और समस्त पद किसी समूह/समाहार का बोध कराएनवरत्न = नौ रत्नों का समूह
द्वंद्व समासदोनों पद प्रधान; विग्रह में ‘और/या/अथवा’ आता है, प्रायः योजक चिह्न (-) से जुड़ते हैंमाता-पिता = माता और पिता
बहुव्रीहि समासदोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) अर्थ की ओर संकेत करेंदशानन = दस मुखों वाला अर्थात् रावण

कर्मधारय-द्विगु और तत्पुरुष-बहुव्रीहि में अंतर कैसे करें

कर्मधारय और द्विगु दोनों में पहला पद विशेषण जैसा दिखता है, इसलिए भ्रम होता है। पहचान यह है — द्विगु में पूर्वपद हमेशा संख्यावाची (एक, दो, नौ, चार...) होता है और अर्थ किसी समूह/समाहार का निकलता है (त्रिलोक = तीन लोकों का समूह)। कर्मधारय में पूर्वपद गुणवाचक विशेषण होता है, संख्या नहीं (नीलकमल = नीला कमल, यहाँ ‘समूह’ का भाव नहीं है)।

तत्पुरुष और बहुव्रीहि में भी समान भ्रम होता है क्योंकि दोनों में विभक्ति का लोप दिखता है। अंतर यह है — तत्पुरुष में समस्त पद का अर्थ अपने ही दोनों पदों तक सीमित रहता है (राजपुत्र यानी राजा का पुत्र ही, कोई तीसरा अर्थ नहीं)। बहुव्रीहि में समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का विशेषण बन जाता है — जैसे ‘पीतांबर’ का शाब्दिक अर्थ ‘पीले वस्त्र’ है, पर व्यवहार में यह ‘पीले वस्त्र धारण करने वाले’ अर्थात् श्रीकृष्ण के लिए प्रयुक्त होता है — तीसरा अर्थ ही असली अर्थ है।

एक और उपयोगी जाँच यह है कि विग्रह करने पर वाक्य किस तरह पूरा होता है। तत्पुरुष में विग्रह के बाद भी दोनों पद अपने मूल अर्थ में ही रहते हैं (राजा का पुत्र = राजा + पुत्र, कोई तीसरा भाव नहीं जुड़ता), जबकि बहुव्रीहि में विग्रह के बाद भी वाक्य अधूरा लगता है जब तक ‘वह’ या ‘जिसका/जिसकी’ जोड़कर तीसरे व्यक्ति की ओर इशारा न किया जाए (जैसे ‘दस मुख हैं जिसके’ = वह रावण)। इसी तरह द्वंद्व और द्विगु में भी विग्रह करते समय ध्यान रखें कि द्वंद्व में हर पद स्वतंत्र संज्ञा रहता है, जबकि द्विगु में विग्रह के बाद ‘का समूह’ या ‘का समाहार’ जैसा शब्द अनिवार्य रूप से जुड़ता है।

कक्षा में इसका उपयोग

गतिविधिउदाहरण
ब्लैकबोर्ड पर दो-दो शब्द जोड़कर समस्त पद बनवाना‘राजा’ + ‘पुत्र’ → राजपुत्र (तत्पुरुष)
समाचार-पत्र की सुर्खियों से सामासिक शब्द ढूँढ़ना‘माता-पिता दिवस’ में द्वंद्व समास पहचानना
योजक चिह्न (-) वाले शब्दों की सूची बनवानाजीव-जंतु, दिन-रात, सुख-दुख — सभी द्वंद्व समास

हर भेद के दो-दो अतिरिक्त उदाहरण

भेदउदाहरण 1उदाहरण 2
अव्ययीभाव समासआजीवन = जीवन भरप्रतिवर्ष = हर वर्ष
तत्पुरुष समासगंगाजल = गंगा का जलरसोईघर = रसोई के लिए घर
कर्मधारय समासमहापुरुष = महान पुरुषकमलनयन = कमल जैसे नयन
द्विगु समाससप्ताह = सात दिनों का समूहचौराहा = चार राहों का समूह
द्वंद्व समासअन्न-जल = अन्न और जलराजा-रानी = राजा और रानी
बहुव्रीहि समासलंबोदर = लंबा है उदर जिसका, अर्थात् गणेशत्रिनेत्र = तीन नेत्रों वाला, अर्थात् शिव

REET में अक्सर एक ही तरह के उदाहरण दोहराए जाते हैं, इसलिए हर भेद के 2-3 उदाहरण याद रखना पर्याप्त है।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

अगर दो शब्द योजक चिह्न (-) से जुड़े हों और विग्रह में ‘और’ आता हो (जैसे फल-फूल, हानि-लाभ, जीव-जंतु), तो बिना सोचे द्वंद्व समास मान लें — REET 2024 में इसी पैटर्न के चारों प्रश्न आए थे।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 74 से 83 तक के उत्तर दीजिए । प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का प्रकाश विश्व भर में फैल रहा है । इस महान भारतीय संस्कृति के वैशिष्ट्य बिंदु निम्नानुसार है - प्राचीनता-भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यंत प्राचीन है । सरस्वती-सैंधव सभ्यता की खोज एवं उत्खनन से प्राप्त सामग्री का मूल्य आँकना संभव नहीं है । यह प्राप्त सामग्री आज भी हमारा गौरव है । इनका संरक्षण एवं अध्ययन हमारा ध्येय होना चाहिए । निरंतरता-भारतीय संस्कृति की धारा निर्बाध रूप से हजारों वर्षों से बहती चली आ रही है । सैंधव सभ्यता से प्राप्त देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भारतीयों के लिए पूजनीय हैं । अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना मूल स्वरूप स्थायी बनाए रखा है । आध्यात्मिकता-अध्यात्म भारतीय संस्कृति का प्राण तत्त्व है । हमारी संस्कृति का विकास तपोवनों और आश्रमों में हुआ है । ग्रहणशीलता-बाहरी तत्त्वों को आत्मसात् करने की क्षमता और समन्वित जीवनशैली भारतीय संस्कृति का प्रमुख गुण है । भारतीय संस्कृति की प्रेरक व्यवस्था व्यक्ति को नैतिक रूप से दृढ़ कर मानव बनाती है । भारतीय संस्कृति का सौंदर्य सार्वभौमिक है ।

प्रश्न 75

गद्यांश में प्रयुक्त ‘देवी-देवताओं’ शब्द में कौन-सा समास है ?

  1. Aअव्ययीभाव समास
  2. Bद्विगु समास
  3. Cबहुव्रीहि समास
  4. Dद्वंद्व समास

व्याख्या

‘देवी-देवताओं’ का विग्रह है — देवी और देवता। जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह में ‘और/या’ आता हो, वह द्वंद्व समास होता है। इसलिए यहाँ द्वंद्व समास है।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31 से 40 तक के उत्तर लिखिए : भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ पर सभी ऋतुएँ समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक रहती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता रहा है और मुक्ति पाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक-व्यवहारों से भी परिचित थे । आज भी वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन शुभ माने जाते हैं ।

प्रश्न 36

‘फल-फूलों’ में समास है –

  1. Aतत्पुरुष समास
  2. Bकर्मधारय समास
  3. Cद्वन्द्व समास
  4. Dद्विगु समास

व्याख्या

‘फल-फूल’ का विग्रह है ‘फल और फूल’। जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह में ‘और/या’ आता हो, वह द्वन्द्व समास होता है। प्रायः द्वन्द्व समास के पदों के बीच योजक चिह्न (-) लगता है।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न संख्या 77 से 86 तक के उत्तर दीजिए । भारतीय मन संपूर्ण प्रकृति और नदियों का भी मातृ स्वरूप में दर्शन करता है । गंगा को हम माता कहते हैं, तुलसी को हमने माता माना, अश्वत्थ वृक्ष की हमने पूजा की और इन सबके माध्यम से समाज के मन में प्रकृति के प्रति एक पूज्य भाव उत्पन्न किया । हम तो कबूतरों, चिड़ियों को दाना चुगाते हैं, हम तो चींटियों तक को आटा डालते हैं क्योंकि इन सबके अस्तित्व का कोई प्रयोजन है । इस विश्व के प्रत्येक पेड़-पौधे, जीव-जंतु का अपना प्रयोजन है । इस प्रयोजन को जानकर सारे विश्व की रचना में उसका क्या स्थान है, इसको पहचानकर उसको बनाए रखें, तभी समन्वय ठीक से बैठेगा । इसी को हमारे यहाँ धर्म कहा है । उसको पहचानकर, उसके नियमों को जानकर तदनुसार यदि हम अपनी सारी रचना और विकास-पथ का उपयोग करेंगे तो प्रकृति के साथ शायद हमारा सुसंगत विकास हो सकेगा । हमारी प्राचीन काल से ही यह अवधारणा रही है कि प्रकृति के साथ मिलकर चलो और इसलिए प्रकृति के प्रति पूज्यभाव हमने उत्पन्न किया । पृथ्वी को हमने माता कहा है । धरती धारण करती है इसीलिए उसे माता कहा । वास्तव में जिस धरा और प्रकृति के सहारे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व निर्भर है, वही आज संकटग्रस्त हो गई है । पश्चिम की उपभोगवादी दृष्टि से प्रकृति के अमर्यादित उपभोग का विचार विकसित हुआ है । हमारी प्रथा संयमित उपभोग की है । हमारे वर्तमान के लिए भी यही विकास-पथ श्रेष्ठ है और यही शेष संसार को नष्ट होने के मार्ग से बचाने वाला मार्गदर्शक विकास-पथ हो सकता है ।

प्रश्न 85

‘जीव-जंतु’ शब्द में समास है-

  1. Aअव्ययीभाव समास
  2. Bकर्मधारय समास
  3. Cतत्पुरुष समास
  4. Dद्वंद्व समास

व्याख्या

‘जीव-जंतु’ का विग्रह है ‘जीव और जंतु’। दोनों पद प्रधान हैं और विग्रह में ‘और’ आता है, इसलिए यहाँ द्वंद्व समास है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31-40 तक के उत्तर दीजिए : आम आदमी के लिए विज्ञान का मतलब क्या है ? विज्ञान मानव सभ्यता और संस्कृति का एक रूप है । आधुनिक विज्ञान ने इस नैसर्गिक सादगी व सौन्दर्य को हाशिए पर डाल कर विज्ञान को एक औपचारिक ढाँचे में कैद कर लिया है । विज्ञान एक औजार बन गया है जिससे प्रकृति के रहस्यों को खोलने की कोशिश की जाती हैं । इस प्रक्रिया में आम इंसान का संबंध इससे कट गया है । ‘विज्ञान पूर्वाग्रहों से मुक्त ज्ञान का भण्डार है’- ऐसा कहा जाता है । विज्ञान को विकास से जोड़ा जाता है । यह सरासर गलत है । जिन आदिवासियों ने सदियों प्रकृति के साथ सम्मानजनक रिश्ता बनाए रखा, आज हमने उन्हें ‘अविकसित’ मान लिया है । मानव का मानव से संबंध हानि-लाभ पर निर्धारित हो रहा है ।

प्रश्न 32

हानि-लाभ में समास है

  1. Aतत्पुरुष समास
  2. Bअव्ययीभाव समास
  3. Cकर्मधारय समास
  4. Dद्वन्द्व समास

व्याख्या

‘हानि-लाभ’ का विग्रह ‘हानि और लाभ’ होता है। जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह में ‘और/या’ आता हो, वह द्वन्द्व समास होता है। अतः यहाँ द्वन्द्व समास है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

‘चतुर्भुज’ शब्द में कौन-सा समास है?

  1. Aद्वंद्व समास
  2. Bद्विगु समास
  3. Cबहुव्रीहि समास
  4. Dकर्मधारय समास

व्याख्या

‘चतुर्भुज’ का शाब्दिक विग्रह है ‘चार भुजाओं वाला’, पर यह शब्द किसी तीसरे अर्थ यानी भगवान विष्णु के लिए प्रयुक्त होता है। जब समस्त पद किसी अन्य (तीसरे) की ओर संकेत करे, तो वह बहुव्रीहि समास होता है, द्विगु नहीं।

प्रश्न 2

‘यथाशक्ति’ शब्द में समास है

  1. Aअव्ययीभाव समास
  2. Bतत्पुरुष समास
  3. Cद्वंद्व समास
  4. Dकर्मधारय समास

व्याख्या

‘यथाशक्ति’ का विग्रह है ‘शक्ति के अनुसार’, और यह पूरा शब्द क्रिया-विशेषण अव्यय की तरह प्रयुक्त होता है। जिस समास में पूर्वपद अव्यय हो और समस्त पद भी अव्यय की तरह काम करे, वह अव्ययीभाव समास कहलाता है।

प्रश्न 3

‘राजपुत्र’ शब्द का सही विग्रह है

  1. Aराजा और पुत्र
  2. Bराजा का पुत्र
  3. Cराजा जैसा पुत्र
  4. Dराजाओं का समूह

व्याख्या

‘राजपुत्र’ में उत्तरपद ‘पुत्र’ प्रधान है और बीच की विभक्ति ‘का’ का लोप हुआ है — यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है, विग्रह होगा ‘राजा का पुत्र’।

प्रश्न 4

‘पंचवटी’ में कौन-सा समास है?

  1. Aद्वंद्व समास
  2. Bद्विगु समास
  3. Cबहुव्रीहि समास
  4. Dअव्ययीभाव समास

व्याख्या

‘पंचवटी’ का विग्रह है ‘पाँच वटवृक्षों का समूह’। पूर्वपद संख्यावाची (पंच) है और अर्थ समूह का निकल रहा है, इसलिए यह द्विगु समास है।

प्रश्न 5

‘नीलकमल’ शब्द में समास है

  1. Aद्विगु समास
  2. Bद्वंद्व समास
  3. Cकर्मधारय समास
  4. Dतत्पुरुष समास

व्याख्या

‘नीलकमल’ का विग्रह है ‘नीला कमल’ — यहाँ ‘नीला’ विशेषण है और ‘कमल’ विशेष्य। जब एक पद विशेषण और दूसरा विशेष्य हो, तो वह कर्मधारय समास कहलाता है; यहाँ संख्या या समूह का भाव नहीं है, इसलिए द्विगु नहीं।

प्रश्न 6

‘सुख-दुख’ शब्द में समास है

  1. Aद्वंद्व समास
  2. Bतत्पुरुष समास
  3. Cबहुव्रीहि समास
  4. Dद्विगु समास

व्याख्या

‘सुख-दुख’ का विग्रह है ‘सुख और दुख’। दोनों पद बराबर महत्व के हैं और विग्रह में ‘और’ आता है, अतः यह द्वंद्व समास है।

प्रश्न 7

समास में दो पदों के बीच किसका लोप होता है?

  1. Aस्वर का
  2. Bविभक्ति (कारक-चिह्न) का
  3. Cमात्रा का
  4. Dउपसर्ग का

व्याख्या

समास में दो या अधिक पद मिलकर नया शब्द बनाते समय उनके बीच की विभक्ति यानी कारक-चिह्न (का, से, के लिए आदि) का लोप हो जाता है — जैसे ‘राजा का पुत्र’ से ‘राजपुत्र’ बनने में ‘का’ लुप्त हो गया।

प्रश्न 8

‘गिरिधर’ (पर्वत को धारण करने वाला, अर्थात् श्रीकृष्ण) में समास है

  1. Aतत्पुरुष समास
  2. Bबहुव्रीहि समास
  3. Cद्विगु समास
  4. Dअव्ययीभाव समास

व्याख्या

‘गिरिधर’ का शाब्दिक अर्थ ‘पर्वत को धारण करने वाला’ है, पर यह शब्द वास्तव में किसी तीसरे व्यक्ति (श्रीकृष्ण) की ओर संकेत करता है। समस्त पद जब किसी अन्य के विशेषण के रूप में तीसरा अर्थ दे, तो वह बहुव्रीहि समास कहलाता है।

प्रश्न 9

विद्यार्थी अक्सर द्वंद्व और द्विगु समास में भ्रमित हो जाते हैं। इस भ्रम को कक्षा में दूर करने का सबसे उपयुक्त तरीका है

  1. Aकेवल परिभाषा दोहराते रहना
  2. Bयोजक चिह्न वाले बनाम संख्यावाची शब्दों की अलग-अलग सूची बनवाकर तुलना कराना
  3. Cविद्यार्थियों को परीक्षा में सीधे रटने को कहना
  4. Dइस भेद को पढ़ाना ही छोड़ देना

व्याख्या

द्विगु में पूर्वपद हमेशा संख्यावाची होता है जबकि द्वंद्व में दोनों पद बराबर व स्वतंत्र संज्ञाएँ होती हैं जिनके बीच ‘और’ आता है। दोनों तरह के उदाहरणों को साथ-साथ सूची बनाकर तुलना कराने से यह अंतर स्थायी रूप से स्पष्ट होता है।

प्रश्न 10

‘हाथोंहाथ’ शब्द में समास है

  1. Aअव्ययीभाव समास
  2. Bद्वंद्व समास
  3. Cद्विगु समास
  4. Dकर्मधारय समास

व्याख्या

‘हाथोंहाथ’ का विग्रह है ‘हाथ ही हाथ में’ और यह पूरा शब्द क्रिया-विशेषण अव्यय की तरह प्रयोग होता है (जैसे ‘सामान हाथोंहाथ बँट गया’)। ऐसे शब्द-युग्म जो दोहराव से बनकर अव्यय का काम करें, अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समास के कितने भेद होते हैं?+

हिंदी व्याकरण में समास के छह प्रमुख भेद माने जाते हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि।

समास से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में समास से 4 प्रश्न आए थे, सभी द्वंद्व समास पहचानने पर आधारित। हर साल भाषा-I/II में 1-3 प्रश्न इस टॉपिक से मिलना सामान्य है।

समास और संधि में क्या अंतर है?+

संधि में दो वर्णों के मेल से ध्वनि-परिवर्तन होता है, जबकि समास में दो या अधिक पूरे शब्दों के मेल से नया शब्द बनता है और विभक्ति का लोप होता है।

द्वंद्व समास को कैसे पहचानें?+

जिस सामासिक शब्द के दोनों पद बराबर महत्व के हों और विग्रह करने पर बीच में ‘और’, ‘या’ या ‘अथवा’ आए, वह द्वंद्व समास है — जैसे माता-पिता, सुख-दुख।

समास में पूर्वपद और उत्तरपद किसे कहते हैं?+

समस्त पद में पहले आने वाले शब्द को पूर्वपद और दूसरे शब्द को उत्तरपद कहते हैं। किस समास में कौन-सा पद प्रधान है (पूर्वपद या उत्तरपद), यही समास का भेद तय करने में मदद करता है।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए