बहुव्रीहि समास
बहुव्रीहि अकेला ऐसा समास है जिसमें अर्थ दोनों पदों में से किसी का नहीं होता — वह किसी तीसरे की ओर इशारा करता है। नीलकंठ का अर्थ नीला कंठ नहीं, बल्कि वह जिसका कंठ नीला है। यही बनावट यहाँ 29 उदाहरणों से खोली गई है।
बहुव्रीहि समास
जिस समास में न पूर्वपद प्रधान हो न उत्तरपद, बल्कि दोनों मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करें, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। यही इस अध्याय का सबसे अधिक पूछा जाने वाला और सबसे अधिक उलझाने वाला भेद है। ‘चतुर्भुज’ को देखिए — शब्द में ‘चार’ है और ‘भुजा’ है, पर अर्थ न चार का है न भुजा का, अर्थ विष्णु का है, क्योंकि जिनकी चार भुजाएँ हैं वे विष्णु हैं। इस तीसरे अर्थ के आ जाने को ही ‘अन्य पद प्रधान’ कहा जाता है।
पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा विग्रह की बनावट है। बहुव्रीहि का विग्रह हमेशा ‘जिसका’, ‘जिसकी’, ‘जिसमें’, ‘जो’ या ‘वाला’ से बनता है और अंत में वह तीसरी चीज नामित होती है। ‘लंबोदर’ का विग्रह है ‘लंबा है उदर जिसका — गणेश’। ‘नीलकंठ’ का विग्रह है ‘नीला है कंठ जिसका — शिव’। यदि आप विग्रह में ‘जिसका’ नहीं लगा पा रहे और शब्द उसी वस्तु का नाम है जो उत्तरपद में है, तो वह बहुव्रीहि नहीं है। परीक्षा में बहुव्रीहि के अधिकतर शब्द देवताओं, पौराणिक पात्रों और विशेष गुण वाले व्यक्तियों के नाम निकलते हैं — यह भी एक व्यावहारिक संकेत है।
बहुव्रीहि समास — विग्रह की बनावट
| समस्त पद | विग्रह | तीसरा अर्थ |
|---|---|---|
| चतुर्भुज | चार भुजाएँ हैं जिसकी | विष्णु |
| लंबोदर | लंबा है उदर जिसका | गणेश |
| दशानन | दस आनन हैं जिसके | रावण |
| नीलकंठ | नीला है कंठ जिसका | शिव |
| चक्रधर | चक्र को धारण करने वाला | विष्णु |
| गिरिधर | गिरि को धारण करने वाला | कृष्ण |
बहुव्रीहि समास के उदाहरण — विग्रह और तीसरा अर्थ
- चतुर्भुजचार भुजाएँ हैं जिसकी — विष्णु
- लंबोदरलंबा है उदर जिसका — गणेश
- गजाननगज का आनन है जिसका — गणेश
- दशाननदस आनन हैं जिसके — रावण
- नीलकंठनीला है कंठ जिसका — शिवशिव के अर्थ में तथा नीले कंठ वाले पक्षी के अर्थ में — दोनों बहुव्रीहि; केवल कंठ के अर्थ में कर्मधारय
- चक्रधरचक्र को धारण करने वाला — विष्णु
- गिरिधरगिरि को धारण करने वाला — कृष्ण
- त्रिनेत्रतीन नेत्र हैं जिसके — शिव
- चंद्रशेखरचंद्र है शेखर पर जिसके — शिव
- मुरलीधरमुरली को धारण करने वाला — कृष्ण
- पीतांबरपीत है अंबर जिसका — कृष्णव्यक्ति के अर्थ में बहुव्रीहि; पीले वस्त्र के अर्थ में कर्मधारय
- दिगंबरदिशाएँ ही हैं अंबर जिसका — शिव
- चारपाईचार पाए हैं जिसके — खाट
- त्रिलोचनतीन लोचन हैं जिसके — शिव
- वीणापाणिवीणा है पाणि में जिसके — सरस्वती
- पंकजपंक में जन्मा — कमल
- जलजजल में जन्मा — कमल
- निशाचरनिशा में चरने वाला — राक्षस
- मृत्युंजयमृत्यु को जीतने वाला — शिव
- चतुराननचार आनन हैं जिसके — ब्रह्मा
- षडाननछह आनन हैं जिसके — कार्तिकेय
- वज्रपाणिवज्र है पाणि में जिसके — इंद्र
- शूलपाणिशूल है पाणि में जिसके — शिव
- अनंतजिसका अंत नहीं — ईश्वर‘ईश्वर’ अर्थ में बहुव्रीहि; ‘न अंत’ अर्थ में नञ् तत्पुरुष
- एकदंतएक दंत है जिसके — गणेश
- कमलासनकमल है आसन जिसका — ब्रह्मा
- मयूरवाहनमयूर है वाहन जिसका — कार्तिकेय
- गरुड़ध्वजगरुड़ है ध्वज जिसका — विष्णु
- तिरंगातीन रंग हैं जिसमें — राष्ट्रध्वज
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'दशानन' में कौन सा समास है?
- Aद्विगु
- Bअव्ययीभाव
- Cकर्मधारय
- Dबहुव्रीहि
व्याख्या
संख्या आगे होने पर भी यह दस मुखों का समूह नहीं बताता, बल्कि दस मुख वाले रावण का नाम है। अर्थ अन्य पद पर जाने के कारण यह बहुव्रीहि है, द्विगु नहीं। विग्रह — दस आनन हैं जिसके, अर्थात् रावण।
प्रश्न 2
'लंबोदर' में कौन सा समास है?
- Aकर्मधारय
- Bद्विगु
- Cअव्ययीभाव
- Dबहुव्रीहि
व्याख्या
शब्द का अर्थ लंबे पेट पर नहीं रुकता, बल्कि गणेश तक जाता है। विग्रह 'लंबा है उदर जिसका' में 'जिसका' आना बहुव्रीहि का निश्चित संकेत है।
प्रश्न 3
निम्न में से कौन सा शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण है?
- Aनीलकमल
- Bचक्रधर
- Cनवरात्र
- Dभाई-बहन
व्याख्या
'चक्रधर' का अर्थ चक्र या धारण पर नहीं रुकता, वह विष्णु का नाम है — अर्थ अन्य पद पर जाने से बहुव्रीहि। 'नीलकमल' कर्मधारय, 'नवरात्र' द्विगु और 'भाई-बहन' द्वंद्व है।
प्रश्न 4
'गजानन' में कौन सा समास है?
- Aकर्मधारय
- Bबहुव्रीहि
- Cअव्ययीभाव
- Dसंबंध तत्पुरुष
व्याख्या
अर्थ गज या मुख पर नहीं रुकता, गणेश तक जाता है। विग्रह 'गज का आनन है जिसका' — 'जिसका' आने से बहुव्रीहि।