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समास

हिंदी में हम हर दिन ऐसे शब्द बोलते हैं जो असल में दो शब्दों को जोड़कर छोटा कर दिए गए हैं। ‘रसोई के लिए घर’ कहने की जगह हम सीधे ‘रसोईघर’ कह देते हैं, और ‘राजा का पुत्र’ की जगह ‘राजपुत्र’। बीच के शब्द — का, के, की, से, में, के लिए — गायब हो जाते हैं, पर अर्थ पूरा बना रहता है। भाषा के इसी किफ़ायती तरीके को व्याकरण में समास कहते हैं। राजस्थान की लगभग हर भर्ती परीक्षा के हिंदी भाग में समास से प्रश्न आते हैं, और अच्छी बात यह है कि यह पूरा अध्याय याद रखने से ज़्यादा पहचानने का है। एक बार छहों भेदों की पहचान का तरीक़ा बैठ जाए, तो अनदेखा शब्द भी सामने आने पर आप उसका भेद निकाल लेंगे। इस पृष्ठ पर हम शुरुआत परिभाषा और शब्दावली से करेंगे, फिर एक-एक भेद का नियम और उदाहरण देखेंगे, और अंत में उस सीमा-रेखा पर रुकेंगे जहाँ सबसे ज़्यादा अंक कटते हैं — कर्मधारय और बहुव्रीहि का अंतर।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

समास किसे कहते हैं

दो या दो से अधिक शब्दों के बीच का संबंध बताने वाले शब्दों को हटाकर उन्हें एक नया शब्द बना देना समास कहलाता है। ‘समास’ शब्द का अर्थ ही है ‘संक्षेप’ या ‘समेटना’। जब ‘देश के लिए भक्ति’ सिमटकर ‘देशभक्ति’ बनता है, तो कहने में कम शब्द लगते हैं और अर्थ जरा भी कम नहीं होता। ध्यान रखने वाली बात यह है कि समास में बीच के शब्द केवल छिपते हैं, मरते नहीं — जब हम उस शब्द का अर्थ खोलते हैं, वे फिर लौट आते हैं।

इस अध्याय की चार शब्दावली पहले पक्की कर लीजिए, क्योंकि प्रश्नपत्र इन्हीं शब्दों में पूछता है। जो नया जुड़ा हुआ शब्द बना, उसे समस्त पद या सामासिक पद कहते हैं — जैसे ‘राजपुत्र’। इस समस्त पद के पहले हिस्से को पूर्वपद कहते हैं — यहाँ ‘राज’। दूसरे हिस्से को उत्तरपद कहते हैं — यहाँ ‘पुत्र’। और जब हम समस्त पद को तोड़कर उसके बीच के लुप्त शब्द वापस रखकर पूरा अर्थ लिखते हैं — ‘राजा का पुत्र’ — तो उसे विग्रह या समास-विग्रह कहते हैं। परीक्षा में आधे प्रश्न सिर्फ़ इतना ही पूछते हैं कि किसी शब्द का सही विग्रह कौन सा है।

भेद कैसे तय होता है, इसका सूत्र भी सीधा है: देखिए कि समस्त पद में प्रधान कौन है। यदि पूर्वपद प्रधान हो तो अव्ययीभाव, यदि उत्तरपद प्रधान हो तो तत्पुरुष, कर्मधारय और द्विगु, यदि दोनों पद बराबर प्रधान हों तो द्वंद्व, और यदि दोनों में से कोई प्रधान न हो बल्कि अर्थ किसी तीसरी वस्तु या व्यक्ति पर जाकर टिके तो बहुव्रीहि। इस एक पंक्ति को याद रख लेने पर छहों भेद अपने-अपने खाने में बैठ जाते हैं। आगे हम हर भेद के लिए पहचान का अलग चिह्न भी देखेंगे, ताकि अंदाज लगाने की ज़रूरत न पड़े।

पहचान का सबसे छोटा रास्ता

किसी भी शब्द का भेद निकालने से पहले उसका विग्रह मन में बोलिए। विग्रह में जो जोड़ने वाला शब्द आया — ‘का/के/की’, ‘से’, ‘के लिए’, ‘में’, ‘और’, ‘वाला/जिसका’ — वही आपको भेद तक पहुँचा देगा। विग्रह किए बिना भेद बताना अनुमान है, और अनुमान परीक्षा में महँगा पड़ता है।

समास परीक्षा में क्यों पूछा जाता है

इसकी दो सीधी वजहें हैं। पहली, समास यह जाँचने का आसान औजार है कि परीक्षार्थी शब्द के भीतर का अर्थ पकड़ पाता है या नहीं। जो विद्यार्थी ‘पुस्तकालय’ का विग्रह ‘पुस्तकों का आलय’ लिख सकता है, वह अनदेखे शब्दों का अर्थ भी अंदाज लगाकर निकाल लेता है — और सरकारी काम-काज की भाषा ऐसे जुड़े हुए शब्दों से भरी है: कार्यालय, प्रधानमंत्री, राजपत्र, आवेदनपत्र। दूसरी वजह व्यावहारिक है — इस अध्याय पर एक-अंक वाला प्रश्न बनाना परीक्षा-निर्माता के लिए बहुत सुविधाजनक है, क्योंकि उत्तर एक ही होता है और उसमें व्याख्या की गुंजाइश कम रहती है। इसी कारण यह अध्याय हर बार दोहराया जाता है और हर बार अंक देता है।

परीक्षा-कक्ष में समास के प्रश्न हल करने का क्रम भी तय कर लीजिए। सबसे पहले प्रश्न की भाषा पढ़िए — ‘कौन सा समास है’ पूछा गया है या ‘सही विग्रह’ पूछा गया है, क्योंकि दोनों के उत्तर अलग शक्ल के होते हैं। इसके बाद शब्द को मन में तोड़िए और पूर्वपद देखिए: अव्यय मिला तो अव्ययीभाव की जाँच कीजिए, संख्या मिली तो द्विगु और बहुव्रीहि दोनों की जाँच कीजिए, निषेध मिला तो नञ् तत्पुरुष। अगर पूर्वपद कोई साधारण संज्ञा या विशेषण है, तो अंत में यह पूछिए कि शब्द किस चीज का नाम है — उत्तरपद वाली चीज का, या किसी तीसरे का। यह अंतिम सवाल ही आपको कर्मधारय, तत्पुरुष और बहुव्रीहि के बीच सही खाने तक पहुँचाता है, और पूरे अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक इसी सवाल से बचते हैं।

समास और संधि में अंतर

विद्यार्थी इन दोनों को अक्सर एक मान लेते हैं, क्योंकि दोनों में दो शब्द जुड़ते हैं। फ़र्क़ यह है कि संधि वर्णों का मेल है और समास शब्दों का मेल। संधि में जोड़ ठीक उस जगह होता है जहाँ पहले शब्द का अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द का पहला वर्ण मिलते हैं, और मिलने पर वर्ण बदल भी जाता है — ‘विद्या’ और ‘आलय’ मिलकर ‘विद्यालय’ बने तो ‘आ’ और ‘आ’ मिलकर एक हो गए। समास में वर्ण नहीं बदलते, बीच के संबंध-शब्द हटते हैं — ‘राजा का पुत्र’ से ‘का’ हटा और ‘राजपुत्र’ बना। एक ही शब्द में दोनों हो सकते हैं, इसलिए प्रश्न ध्यान से पढ़िए कि पूछा क्या गया है।

संधि और समास — आठ बिंदुओं में फ़र्क़

बिंदुसंधिसमास
किसका मेलदो वर्णों कादो या अधिक शब्दों का
क्या बदलता हैमेल-स्थान पर वर्ण बदल सकता हैवर्ण नहीं बदलते, संबंध-शब्द लुप्त होते हैं
तोड़ने की क्रियाविच्छेदविग्रह
उदाहरणसत् + आनंद = सदानंदनीला कमल = नीलकमल (कर्मधारय)
बीच के शब्दबीच में कोई शब्द लुप्त नहीं होताका, के, की, से, में, के लिए आदि लुप्त होते हैं
भेदस्वर, व्यंजन, विसर्ग संधिअव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि
शर्तदोनों वर्ण आस-पास होना ज़रूरीशब्दों के बीच अर्थ-संबंध होना ज़रूरी
पहचानउच्चारण बदल जाता हैअर्थ संक्षेप में आ जाता है

समास के छह भेद — विस्तार से पढ़ें

जहाँ अंक सबसे ज़्यादा कटते हैं

त्वरित पुनरावृत्ति तालिका

परीक्षा से पहले के अंतिम दस मिनट के लिए यह तालिका बनाई गई है। एक भेद, एक पहचान, एक उदाहरण — इससे अधिक याद रखने की ज़रूरत नहीं, बाकी विग्रह करने पर अपने आप निकल आएगा।

छहों समास — एक नजर में

समासकौन प्रधानविग्रह में क्या आता हैउदाहरण और विग्रह
अव्ययीभावपूर्वपदहर, के अनुसार, तक, बिना, के साथप्रतिदिन — प्रत्येक दिन
तत्पुरुषउत्तरपदको, से, के लिए, का, में, परविद्यालय — विद्या के लिए आलय
कर्मधारयउत्तरपदहै जो, के समान, ही हैमहात्मा — महान है जो आत्मा
द्विगुउत्तरपदसंख्या का समूहत्रिभुज — तीन भुजाओं का समूह
द्वंद्वदोनों पदऔर, अथवामाता-पिता — माता और पिता
बहुव्रीहिअन्य पदजिसका, जिसके, वालालंबोदर — लंबा है उदर जिसका, गणेश

समास हिंदी व्याकरण का वह हिस्सा है जो राजस्थान की लगभग हर भर्ती परीक्षा के भाषा-खंड में आता है, और अच्छी बात यह है कि इसमें अनुमान की जगह बहुत कम है — विग्रह ठीक आ गया तो अंक पक्का। नीचे दी गई परीक्षाओं में इसका स्थान देखकर आप तय कर सकते हैं कि इस अध्याय को कितना समय देना है।

किन परीक्षाओं में पूछा जाता है

परीक्षाकहाँ पूछा जाता है
RSSB पटवारीसंयुक्त हिंदी एवं अंग्रेज़ी खंड के 22 प्रश्न / 44 अंक के भीतर व्याकरण के अंश में
RSSB CET स्नातक स्तरप्रश्न-पत्र 150 प्रश्न / 300 अंक / 3 घंटे · सामान्य हिन्दी व सामान्य अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB CET वरिष्ठ माध्यमिक (12वीं) स्तरप्रश्न-पत्र 120 प्रश्न / 240 अंक / 2 घंटे 30 मिनट · सामान्य हिन्दी एवं अंग्रेजी पाठ्यक्रम में शामिल — विषयवार प्रश्न-संख्या आयोग द्वारा प्रकाशित नहीं
RSSB VDOभाषा खंड के 50 प्रश्न / 50 अंक के भीतर
RSSB LDCपेपर II — सामान्य हिंदी, 75 प्रश्न
RPSC पुलिस उप-निरीक्षकपेपर I — सामान्य हिंदी, 100 प्रश्न / 200 अंक
RPSC वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्नपत्र, खंड I
RPSC विद्यालय व्याख्याता (प्रथम श्रेणी)हिंदी विषय प्रश्नपत्र, खंड प्रथम
REETहिंदी भाषा I / भाषा II, प्रत्येक 30 अंक
Rajasthan High Court LDCहिंदी खंड, 50 प्रश्न / 100 अंक

तैयारी का सुझाया क्रम यह है: पहले विग्रह लिखने का अभ्यास कीजिए, भेद का नाम बाद में। रोज़ पंद्रह शब्द लेकर उनका विग्रह कॉपी में लिखिए और फिर भेद लिखिए — दस दिन में डेढ़ सौ शब्द हो जाएँगे और पहचान अपने आप बैठ जाएगी। जिन शब्दों में आप दो भेदों के बीच झिझकें, उन्हें अलग सूची में रखिए; वही सूची परीक्षा से पहले दोहराने के काम आएगी, क्योंकि प्रश्नपत्र ठीक उन्हीं शब्दों से बनता है।

अंत में एक बात याद रखने योग्य है। समास का यह पूरा अध्याय असल में एक ही आदत सिखाता है — शब्द को सुनकर उसके भीतर छिपे वाक्य को देख लेना। जिस दिन आप ‘देशभक्ति’ सुनते ही मन में ‘देश के लिए भक्ति’ सुनने लगेंगे, उस दिन आपको भेदों के नाम भी अलग से याद करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, वे विग्रह के साथ ही निकल आएँगे। यही आदत आगे चलकर पर्यायवाची, वाक्यांश के लिए एक शब्द और अपठित गद्यांश में भी काम आती है, क्योंकि तीनों जगह अर्थ खोलने की वही क्रिया करनी होती है। इसलिए समास को एक अलग-थलग अध्याय मानकर रटिए नहीं — इसे हिंदी पढ़ने का तरीक़ा मानकर बरतिए, और अंक अपने आप आएँगे।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'पीतांबर' शब्द में जब अर्थ 'पीले वस्त्र धारण करने वाले कृष्ण' लिया जाए, तो कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्विगु
  3. Cतत्पुरुष
  4. Dबहुव्रीहि

व्याख्या

अर्थ उत्तरपद 'अंबर' पर नहीं रुकता, बल्कि किसी तीसरे — कृष्ण — पर जाता है। जहाँ न पूर्वपद न उत्तरपद प्रधान हो और अर्थ अन्य पद पर जाए, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है। विग्रह 'पीत है अंबर जिसका' — 'जिसका' आना ही इसका प्रमाण है।

प्रश्न 2

'यथाशक्ति' में कौन सा समास है?

  1. Aतत्पुरुष
  2. Bद्वंद्व
  3. Cअव्ययीभाव
  4. Dकर्मधारय

व्याख्या

पूर्वपद 'यथा' अव्यय है और पूरा पद अव्यय की तरह अपरिवर्तित रहता है। पूर्वपद प्रधान होने पर अव्ययीभाव समास होता है। विग्रह — शक्ति के अनुसार।

प्रश्न 3

'राजपुत्र' का सही समास-विग्रह कौन सा है?

  1. Aराजा के लिए पुत्र
  2. Bराजा में पुत्र
  3. Cराजा और पुत्र
  4. Dराजा का पुत्र

व्याख्या

विग्रह में संबंध कारक का चिह्न 'का' लुप्त है, इसलिए यह संबंध तत्पुरुष है। तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान होता है — यहाँ अर्थ का भार 'पुत्र' पर है।

प्रश्न 4

'दशानन' में कौन सा समास है?

  1. Aद्विगु
  2. Bअव्ययीभाव
  3. Cकर्मधारय
  4. Dबहुव्रीहि

व्याख्या

संख्या आगे होने पर भी यह दस मुखों का समूह नहीं बताता, बल्कि दस मुख वाले रावण का नाम है। अर्थ अन्य पद पर जाने के कारण यह बहुव्रीहि है, द्विगु नहीं। विग्रह — दस आनन हैं जिसके, अर्थात् रावण।

प्रश्न 5

'माता-पिता' में कौन सा समास है?

  1. Aद्वंद्व
  2. Bद्विगु
  3. Cतत्पुरुष
  4. Dबहुव्रीहि

व्याख्या

दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं और बीच से योजक 'और' लुप्त है — यही द्वंद्व समास का नियम है। विग्रह — माता और पिता।

प्रश्न 6

'अज्ञान' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bअव्ययीभाव
  3. Cनञ् तत्पुरुष
  4. Dद्वंद्व

व्याख्या

पूर्वपद 'अ' निषेध का अर्थ देता है, इसलिए यह तत्पुरुष का विशेष रूप नञ् तत्पुरुष है। विग्रह — न ज्ञान।

प्रश्न 7

'त्रिभुज' में कौन सा समास है?

  1. Aबहुव्रीहि
  2. Bद्विगु
  3. Cकर्मधारय
  4. Dकरण तत्पुरुष

व्याख्या

पूर्वपद संख्यावाचक है और पूरा पद समूह का बोध कराता है — यही द्विगु समास है। विग्रह — तीन भुजाओं का समूह।

प्रश्न 8

'महात्मा' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bबहुव्रीहि
  3. Cसंबंध तत्पुरुष
  4. Dद्वंद्व

व्याख्या

'महान' विशेषण है और 'आत्मा' विशेष्य; दोनों एक ही वस्तु की ओर संकेत करते हैं। विशेषण-विशेष्य संबंध होने पर कर्मधारय समास होता है। विग्रह — महान है जो आत्मा।

प्रश्न 9

'रसोईघर' का सही विग्रह कौन सा है?

  1. Aरसोई का घर
  2. Bरसोई में घर
  3. Cरसोई के लिए घर
  4. Dरसोई और घर

व्याख्या

यहाँ संप्रदान कारक का चिह्न 'के लिए' लुप्त है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष है। 'का' लगाने से उपभेद बदलकर ग़लत हो जाता है।

प्रश्न 10

'लंबोदर' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्विगु
  3. Cअव्ययीभाव
  4. Dबहुव्रीहि

व्याख्या

शब्द का अर्थ लंबे पेट पर नहीं रुकता, बल्कि गणेश तक जाता है। विग्रह 'लंबा है उदर जिसका' में 'जिसका' आना बहुव्रीहि का निश्चित संकेत है।

प्रश्न 11

'पथभ्रष्ट' में तत्पुरुष का कौन सा उपभेद है?

  1. Aकर्म तत्पुरुष
  2. Bअपादान तत्पुरुष
  3. Cसंबंध तत्पुरुष
  4. Dअधिकरण तत्पुरुष

व्याख्या

विग्रह 'पथ से भ्रष्ट' में 'से' अलग होने के अर्थ में आया है, और अलगाव का अर्थ अपादान कारक देता है। इसलिए यह अपादान तत्पुरुष है।

प्रश्न 12

'चरणकमल' में कौन सा समास है?

  1. Aबहुव्रीहि
  2. Bकर्मधारय
  3. Cद्वंद्व
  4. Dतत्पुरुष

व्याख्या

यहाँ उपमान-उपमेय संबंध है — चरण की तुलना कमल से की गई है। उपमान-उपमेय संबंध कर्मधारय के अंतर्गत आता है। विग्रह — कमल के समान चरण।

प्रश्न 13

'आजीवन' में कौन सा समास है?

  1. Aअव्ययीभाव
  2. Bकर्म तत्पुरुष
  3. Cद्विगु
  4. Dकर्मधारय

व्याख्या

पूर्वपद 'आ' अव्यय है जो 'तक' या 'भर' का अर्थ देता है, और पूरा पद अविकारी रहता है — इसलिए अव्ययीभाव। विग्रह — जीवन भर।

प्रश्न 14

'गंगाजल' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्वंद्व
  3. Cसंबंध तत्पुरुष
  4. Dबहुव्रीहि

व्याख्या

विग्रह 'गंगा का जल' में संबंध कारक 'का' लुप्त है और उत्तरपद 'जल' प्रधान है — यही संबंध तत्पुरुष का नियम है।

प्रश्न 15

निम्न में से कौन सा शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण है?

  1. Aनीलकमल
  2. Bचक्रधर
  3. Cनवरात्र
  4. Dभाई-बहन

व्याख्या

'चक्रधर' का अर्थ चक्र या धारण पर नहीं रुकता, वह विष्णु का नाम है — अर्थ अन्य पद पर जाने से बहुव्रीहि। 'नीलकमल' कर्मधारय, 'नवरात्र' द्विगु और 'भाई-बहन' द्वंद्व है।

प्रश्न 16

'सहर्ष' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्वंद्व
  3. Cबहुव्रीहि
  4. Dअव्ययीभाव

व्याख्या

पूर्वपद 'स' अव्यय है जो 'के साथ' का अर्थ देता है और पूरा पद क्रियाविशेषण की तरह काम करता है — इसलिए अव्ययीभाव। विग्रह — हर्ष के साथ।

प्रश्न 17

'हार-जीत' में कौन सा समास है?

  1. Aद्वंद्व
  2. Bद्विगु
  3. Cअव्ययीभाव
  4. Dकर्म तत्पुरुष

व्याख्या

दोनों पद समान प्रधान हैं और बीच से योजक शब्द लुप्त है — यही द्वंद्व का नियम है। विग्रह — हार और जीत।

प्रश्न 18

'नीलकंठ' में जब अर्थ 'नीला कंठ' लिया जाए, तो कौन सा समास है?

  1. Aबहुव्रीहि
  2. Bकर्मधारय
  3. Cद्विगु
  4. Dअपादान तत्पुरुष

व्याख्या

इस अर्थ में शब्द कंठ का ही नाम रहता है और 'नीला' उसकी विशेषता बताता है — विशेषण-विशेष्य संबंध होने से कर्मधारय। शिव के अर्थ में यही शब्द बहुव्रीहि हो जाता है।

प्रश्न 19

'हस्तलिखित' में तत्पुरुष का कौन सा उपभेद है?

  1. Aकरण तत्पुरुष
  2. Bसंप्रदान तत्पुरुष
  3. Cअधिकरण तत्पुरुष
  4. Dकर्म तत्पुरुष

व्याख्या

विग्रह 'हस्त से लिखित' में 'से' साधन के अर्थ में आया है, जो करण कारक है — इसलिए करण तत्पुरुष।

प्रश्न 20

'वनवास' का सही विग्रह कौन सा है?

  1. Aवन का वास
  2. Bवन में वास
  3. Cवन के लिए वास
  4. Dवन और वास

व्याख्या

यहाँ अधिकरण कारक का चिह्न 'में' लुप्त है, इसलिए विग्रह 'वन में वास' और भेद अधिकरण तत्पुरुष है।

प्रश्न 21

'चौराहा' में कौन सा समास है?

  1. Aबहुव्रीहि
  2. Bकर्मधारय
  3. Cद्विगु
  4. Dद्वंद्व

व्याख्या

पूर्वपद 'चौ' संख्यावाचक है और पूरा पद समूह का बोध कराता है — विग्रह 'चार राहों का समूह', इसलिए द्विगु।

प्रश्न 22

'गजानन' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bबहुव्रीहि
  3. Cअव्ययीभाव
  4. Dसंबंध तत्पुरुष

व्याख्या

अर्थ गज या मुख पर नहीं रुकता, गणेश तक जाता है। विग्रह 'गज का आनन है जिसका' — 'जिसका' आने से बहुव्रीहि।

प्रश्न 23

'घर-घर' में कौन सा समास है?

  1. Aअव्ययीभाव
  2. Bद्वंद्व
  3. Cकर्मधारय
  4. Dद्विगु

व्याख्या

दोहराव से बना यह पद वाक्य में क्रिया का ढंग बताता है और अविकारी रहता है, इसलिए अव्ययीभाव। योजक चिह्न देखकर इसे द्वंद्व मान लेना आम ग़लती है — द्वंद्व में बीच में 'और' आता है, यहाँ 'प्रत्येक' का अर्थ निकलता है।

प्रश्न 24

'विद्याधन' में कौन सा समास है और क्यों?

  1. Aबहुव्रीहि — अर्थ तीसरे पद पर जाता है
  2. Bद्वंद्व — दोनों पद प्रधान हैं
  3. Cकर्मधारय — रूपक संबंध है
  4. Dअपादान तत्पुरुष — 'से' लुप्त है

व्याख्या

यहाँ विद्या पर धन का रूप आरोपित किया गया है — विग्रह 'विद्या ही है धन'। रूपक संबंध कर्मधारय के अंतर्गत आता है।

प्रश्न 25

'नासमझ' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्विगु
  3. Cअव्ययीभाव
  4. Dनञ् तत्पुरुष

व्याख्या

पूर्वपद 'ना' निषेध का अर्थ देता है, इसलिए यह नञ् तत्पुरुष है। विग्रह — न समझ।