कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर
समास के प्रश्नों में सबसे ज़्यादा अंक यहीं कटते हैं, क्योंकि एक ही शब्द अर्थ बदलने पर कर्मधारय से बहुव्रीहि बन जाता है। यहाँ आठ बिंदुओं की निर्णय-तालिका, 12 ऐसे दोहरे शब्द, और वे छह गलतियाँ हैं जो सबसे महँगी पड़ती हैं।
कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर — इस पृष्ठ का सबसे ज़रूरी हिस्सा
यदि आप समास के पूरे अध्याय में सिर्फ़ एक चीज पक्की कर सकते हैं, तो वह यही होनी चाहिए। इन दोनों भेदों में उलझन इसलिए होती है कि बहुत बार शब्द एक ही दिखता है, बदलता सिर्फ़ अर्थ है। निर्णय का सिद्धांत एक पंक्ति में यह है: कर्मधारय में शब्द उसी वस्तु का नाम रहता है जो उत्तरपद में है, और बहुव्रीहि में शब्द किसी तीसरी वस्तु या व्यक्ति का नाम बन जाता है। बाकी सब इसी बात के अलग-अलग रूप हैं।
इसे ‘नीलकंठ’ पर चलाकर देखिए। यदि आप इसका अर्थ लेते हैं ‘नीला कंठ’, यानी बात कंठ की ही हो रही है और ‘नीला’ उसकी विशेषता बता रहा है, तो यह कर्मधारय है — क्योंकि शब्द अभी भी कंठ का नाम है। पर यदि आप इसका अर्थ लेते हैं ‘नीला है कंठ जिसका’, यानी शिव, तो शब्द अब कंठ का नाम नहीं रहा, वह एक तीसरे — शिव — का नाम बन गया, और यह बहुव्रीहि है। एक ही शब्द, दो भेद, फ़र्क़ सिर्फ़ इस बात का कि अर्थ उत्तरपद पर रुकता है या आगे चला जाता है। परीक्षा में जब यह शब्द आए तो विकल्पों और वाक्य के संदर्भ को देखिए; ‘शिव’ या ‘महादेव’ का संकेत हो तो उत्तर बहुव्रीहि है।
अब ‘पीतांबर’ लीजिए। ‘पीत है जो अंबर’ यानी पीला वस्त्र — यह कर्मधारय है, क्योंकि बात वस्त्र की ही है। ‘पीत है अंबर जिसका’ यानी पीले वस्त्र धारण करने वाले कृष्ण — यह बहुव्रीहि है, क्योंकि बात अब वस्त्र की नहीं, व्यक्ति की है। ठीक यही कसौटी ‘चतुर्भुज’ पर भी लगती है: चार भुजाओं वाली आकृति के अर्थ में द्विगु, और विष्णु के अर्थ में बहुव्रीहि। इसलिए अभ्यास करते समय शब्द के साथ-साथ उसका अर्थ भी लिखने की आदत डालिए — भेद अर्थ से तय होता है, बनावट से नहीं।
कर्मधारय और बहुव्रीहि — आठ बिंदुओं में निर्णय
| कसौटी | कर्मधारय | बहुव्रीहि |
|---|---|---|
| कौन प्रधान | उत्तरपद प्रधान | कोई पद प्रधान नहीं, अन्य पद प्रधान |
| विग्रह की बनावट | ‘है जो’, ‘के समान’, ‘ही है’ | ‘जिसका’, ‘जिसके’, ‘जिसमें’, ‘वाला’ |
| शब्द किसका नाम | उत्तरपद वाली ही वस्तु का | किसी तीसरी वस्तु या व्यक्ति का |
| पदों का रिश्ता | विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय | दोनों मिलकर बाहर की ओर संकेत |
| उदाहरण | नीलकमल — नीला है जो कमल | नीलकंठ — नीला है कंठ जिसका, शिव |
| दूसरा उदाहरण | पीतांबर — पीला वस्त्र | पीतांबर — पीले वस्त्र वाला, कृष्ण |
| परीक्षा-संकेत | विकल्प में गुण या वस्तु का अर्थ | विकल्प में देवता, पात्र या व्यक्ति का नाम |
| जाँच का प्रश्न | ‘यह क्या है?’ उत्तर उत्तरपद है | ‘यह कौन है?’ उत्तर कोई तीसरा है |
एक शब्द, दो भेद — अर्थ बदलने पर भेद बदल जाता है
- नीलकंठनीला है जो कंठकर्मधारयजब बात कंठ की हो
- नीलकंठनीला है कंठ जिसका — शिवबहुव्रीहिजब बात शिव की हो
- पीतांबरपीत है जो अंबरकर्मधारयपीला वस्त्र
- पीतांबरपीत है अंबर जिसका — कृष्णबहुव्रीहिपीले वस्त्र वाले
- चतुर्भुजचार भुजाओं का समूहद्विगुआकृति के अर्थ में
- चतुर्भुजचार भुजाएँ हैं जिसकी — विष्णुबहुव्रीहिविष्णु के अर्थ में
- अनंतन अंतनञ् तत्पुरुषजिसका अंत न हो, ऐसा गुण
- अनंतजिसका अंत नहीं — ईश्वरबहुव्रीहिईश्वर के अर्थ में
- कमलनयनकमल के समान नयनकर्मधारयबात नयन की
- कमलनयनकमल के समान नयन हैं जिसकेबहुव्रीहिबात उस व्यक्ति की
- नरसिंहसिंह के समान नरकर्मधारयउपमा के अर्थ में — नर की तुलना सिंह से
- नरसिंहनर तथा सिंह दोनों का रूप है जिसका — विष्णु का अवतारबहुव्रीहिअवतार के अर्थ में
जिन छह गलतियों से सबसे ज़्यादा अंक जाते हैं
पहली, संधि और समास के प्रश्न को आपस में मिला देना — ‘विच्छेद’ पूछा जाए तो संधि तोड़िए, ‘विग्रह’ पूछा जाए तो समास। दूसरी, संख्या देखकर सीधे द्विगु लिख देना, जबकि ‘दशानन’ बहुव्रीहि है। तीसरी, ‘अ’ देखकर हर शब्द को नञ् तत्पुरुष मान लेना, जबकि ‘अनुज’ में ‘अनु’ उपसर्ग है। चौथी, विग्रह लिखने में गलत विभक्ति लगाना, जिससे तत्पुरुष का उपभेद बदल जाता है — ‘रसोईघर’ में ‘का’ नहीं, ‘के लिए’ आता है। पाँचवीं, जोड़ चिह्न देखकर हर शब्द को द्वंद्व मानना, जबकि ‘घर-घर’ अव्ययीभाव है। और छठी, सबसे भारी — कर्मधारय और बहुव्रीहि में अर्थ न देखना। शब्द की बनावट दोनों में एक हो सकती है, निर्णय अर्थ से होता है।
इस भाग के अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'पीतांबर' शब्द में जब अर्थ 'पीले वस्त्र धारण करने वाले कृष्ण' लिया जाए, तो कौन सा समास है?
- Aकर्मधारय
- Bद्विगु
- Cतत्पुरुष
- Dबहुव्रीहि
व्याख्या
अर्थ उत्तरपद 'अंबर' पर नहीं रुकता, बल्कि किसी तीसरे — कृष्ण — पर जाता है। जहाँ न पूर्वपद न उत्तरपद प्रधान हो और अर्थ अन्य पद पर जाए, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है। विग्रह 'पीत है अंबर जिसका' — 'जिसका' आना ही इसका प्रमाण है।
प्रश्न 2
'नीलकंठ' में जब अर्थ 'नीला कंठ' लिया जाए, तो कौन सा समास है?
- Aबहुव्रीहि
- Bकर्मधारय
- Cद्विगु
- Dअपादान तत्पुरुष
व्याख्या
इस अर्थ में शब्द कंठ का ही नाम रहता है और 'नीला' उसकी विशेषता बताता है — विशेषण-विशेष्य संबंध होने से कर्मधारय। शिव के अर्थ में यही शब्द बहुव्रीहि हो जाता है।