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तत्पुरुष समास

तत्पुरुष समास में विग्रह करते समय बीच का कारक-चिह्न लौट आता है — को, से, के लिए, का, में। कौन-सा चिह्न लौटता है, उसी से उपभेद तय होता है। यहाँ छहों उपभेद और नञ् तत्पुरुष, कुल 99 उदाहरण विग्रह सहित।

29 सितंबर 2026 को सत्यापित

तत्पुरुष समास

जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो और दोनों पदों के बीच कोई कारक-चिह्न लुप्त हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसे समझने का सबसे सीधा तरीक़ा यह है कि विग्रह करते ही बीच में कोई विभक्ति — को, से, के लिए, का/के/की, में, पर — आ बैठती है। ‘राजपुत्र’ का विग्रह ‘राजा का पुत्र’ है, तो बीच में ‘का’ आया, और अर्थ का भार ‘पुत्र’ पर है, ‘राजा’ पर नहीं — इसलिए यह तत्पुरुष है। परीक्षा में सबसे अधिक शब्द इसी भेद के आते हैं, इसलिए इसकी उपश्रेणियाँ अलग से पहचानना ज़रूरी है।

तत्पुरुष के भेद उसी विभक्ति के नाम पर रखे जाते हैं जो विग्रह में लुप्त थी। कर्ता और संबोधन कारक में समास नहीं बनता, इसलिए कुल छह उपभेद मिलते हैं — कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध और अधिकरण तत्पुरुष। इन्हें रटने की ज़रूरत नहीं; विग्रह लिखकर देखिए कि कौन सा चिह्न निकला, वही उपभेद का नाम तय कर देगा। अभ्यास में यही तरीक़ा सबसे भरोसेमंद निकलता है, क्योंकि अनदेखे शब्द पर भी काम करता है।

तत्पुरुष समास के कारक-आधारित उपभेद

उपभेदलुप्त कारक-चिह्नउदाहरणविग्रह
कर्म तत्पुरुषकोगृहागतगृह को आगत
करण तत्पुरुषसे, के द्वाराकरुणागतकरुणा से आगत
संप्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघररसोई के लिए घर
अपादान तत्पुरुषसे (अलग होने के अर्थ में)पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
संबंध तत्पुरुषका, के, कीराजपुत्रराजा का पुत्र
अधिकरण तत्पुरुषमें, परगृहप्रवेशगृह में प्रवेश

एक बात यहाँ साफ़ कर लेनी चाहिए, क्योंकि प्रश्नपत्र इसी पर खेलता है। तत्पुरुष में विग्रह करते समय जो विभक्ति आप लगाते हैं, वही उपभेद का नाम तय करती है — इसलिए गलत विभक्ति लगाने पर शब्द तो सही रहता है पर उत्तर गलत हो जाता है। ‘रसोईघर’ में ‘का’ लगाकर ‘रसोई का घर’ कह देना आसान लगता है, पर घर रसोई का नहीं है, घर रसोई करने के लिए है — इसलिए ‘के लिए’ आएगा और उपभेद संप्रदान होगा। इसी तरह ‘पथभ्रष्ट’ और ‘हस्तलिखित’ दोनों में ‘से’ लगता है, पर पहले में ‘से’ अलग होने का अर्थ देता है, जो अपादान है, और दूसरे में साधन का, जो करण है। विभक्ति एक जैसी दिखने पर भी अर्थ अलग होता है, और यही अंतर पूछा जाता है।

कर्म तत्पुरुष — बीच में ‘को’ लुप्त

  • गृहागतगृह को आगत
  • स्वर्गगतस्वर्ग को गत
  • शरणागतशरण को आगत
  • ग्रामगतग्राम को गत
  • जलपिपासुजल को पीने की इच्छा रखने वाला
  • मनोहरमन को हरने वाला
  • यशप्राप्तयश को प्राप्त
  • आशातीतआशा को अतीत
  • नेत्रसुखदनेत्रों को सुख देने वाला
  • मुँहतोड़मुँह को तोड़ने वाला
  • गिरहकटगिरह को काटने वाला
  • जेबकतराजेब को कतरने वाला

करण तत्पुरुष — बीच में ‘से’ या ‘के द्वारा’ लुप्त

  • मनचाहामन से चाहा
  • रेखांकितरेखा से अंकित
  • शोकाकुलशोक से आकुल
  • करुणागतकरुणा से आगत
  • मदांधमद से अंधा
  • रोगग्रस्तरोग से ग्रस्त
  • तुलसीरचिततुलसी द्वारा रचित
  • कष्टसाध्यकष्ट से साध्य
  • हस्तलिखितहस्त से लिखित
  • श्रमसाध्यश्रम से साध्य
  • अकालपीड़ितअकाल से पीड़ित
  • जन्मांधजन्म से अंधा
  • ईश्वरप्रदत्तईश्वर द्वारा प्रदत्त

संप्रदान तत्पुरुष — बीच में ‘के लिए’ लुप्त

  • रसोईघररसोई के लिए घर
  • विद्यालयविद्या के लिए आलय
  • देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
  • स्नानघरस्नान के लिए घर
  • यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
  • गौशालागौ के लिए शाला
  • डाकगाड़ीडाक के लिए गाड़ी
  • सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रह
  • हथकड़ीहाथ के लिए कड़ी
  • परीक्षाभवनपरीक्षा के लिए भवन
  • विश्रामगृहविश्राम के लिए गृह
  • देवालयदेव के लिए आलय

अपादान तत्पुरुष — अलग होने के अर्थ में ‘से’ लुप्त

  • पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
  • धर्मभ्रष्टधर्म से भ्रष्ट
  • देशनिकालादेश से निकाला
  • ऋणमुक्तऋण से मुक्त
  • पदच्युतपद से च्युत
  • जातिच्युतजाति से च्युत
  • बंधनमुक्तबंधन से मुक्त
  • रोगमुक्तरोग से मुक्त
  • भयभीतभय से भीत
  • नेत्रहीननेत्र से हीन
  • धनहीनधन से हीन
  • गुणहीनगुण से हीन

संबंध तत्पुरुष — बीच में ‘का / के / की’ लुप्त

  • राजपुत्रराजा का पुत्र
  • गंगाजलगंगा का जल
  • राजसभाराजा की सभा
  • राजकुमारीराजा की कुमारी
  • देशसेवादेश की सेवा
  • विद्याभ्यासविद्या का अभ्यास
  • मातृभक्तिमाता की भक्ति
  • जलधाराजल की धारा
  • सेनापतिसेना का पति
  • राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति
  • आत्मकथाआत्मा की कथा
  • जीवनसाथीजीवन का साथी
  • पुस्तकालयपुस्तकों का आलय
  • राजाज्ञाराजा की आज्ञा
  • मृगशावकमृग का शावक
  • गृहस्वामीगृह का स्वामी
  • विद्यार्थीविद्या का अर्थी
  • राजमहलराजा का महल

अधिकरण तत्पुरुष — बीच में ‘में’ या ‘पर’ लुप्त

  • गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
  • आत्मविश्वासआत्मा पर विश्वास
  • जलमग्नजल में मग्न
  • वनवासवन में वास
  • कार्यकुशलकार्य में कुशल
  • शोकमग्नशोक में मग्न
  • कलाप्रवीणकला में प्रवीण
  • आपबीतीअपने पर बीती
  • नरोत्तमनरों में उत्तम
  • दानवीरदान में वीर
  • रणधीररण में धीर
  • ध्यानमग्नध्यान में मग्न
  • पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम
  • पुरुषश्रेष्ठपुरुषों में श्रेष्ठ

नञ् तत्पुरुष समास

तत्पुरुष का एक विशेष रूप नञ् तत्पुरुष है, जिसमें पूर्वपद निषेध का अर्थ देने वाला ‘न’ होता है। हिंदी और संस्कृत में यह निषेध अ, अन्, ना, न, गैर जैसे रूपों में आगे जुड़ता है — ‘ज्ञान’ से ‘अज्ञान’, ‘आदि’ से ‘अनादि’, ‘समझ’ से ‘नासमझ’। नियम याद रखने योग्य है: जिस शब्द से जुड़ना है वह व्यंजन से शुरू हो तो ‘अ’ लगता है, और स्वर से शुरू हो तो ‘अन्’ — इसीलिए ‘अधर्म’ बनता है पर ‘अनिच्छा’। विग्रह में इसे ‘न’ या ‘नहीं’ लगाकर खोला जाता है, जैसे ‘अज्ञान’ का विग्रह ‘न ज्ञान’।

नञ् तत्पुरुष में यहाँ चूक होती है

हर ‘अ’ से शुरू होने वाला शब्द नञ् तत्पुरुष नहीं होता। ‘अनुज’ में ‘अनु’ उपसर्ग है, निषेध नहीं — यह नञ् तत्पुरुष नहीं है। इसी तरह ‘अंगद’ या ‘अवसर’ जैसे शब्दों में ‘अ’ शब्द का ही हिस्सा है। जाँच का तरीक़ा एक ही है: ‘अ’ हटाकर देखिए कि बचा हुआ शब्द अपने आप में उलटा अर्थ देता है या नहीं। ‘अधर्म’ से ‘अ’ हटाने पर ‘धर्म’ बचता है और अर्थ ठीक उलटा है — यह नञ् है।

नञ् तत्पुरुष समास के उदाहरण

  • अज्ञानन ज्ञान
  • अधर्मन धर्म
  • असत्यन सत्य
  • अन्यायन न्याय
  • अनादिन आदि
  • अनंतन अंत
  • अनिच्छान इच्छा
  • अनुपस्थितन उपस्थित
  • अशोकन शोक
  • अभावन भाव
  • अनुचितन उचित
  • अस्वस्थन स्वस्थ
  • अविश्वासन विश्वास
  • नास्तिकन आस्तिक
  • नासमझन समझ
  • नाराजीन राजी
  • गैरहाजिरन हाजिर
  • अनपढ़न पढ़ा हुआ

इस भाग के अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'राजपुत्र' का सही समास-विग्रह कौन सा है?

  1. Aराजा के लिए पुत्र
  2. Bराजा में पुत्र
  3. Cराजा और पुत्र
  4. Dराजा का पुत्र

व्याख्या

विग्रह में संबंध कारक का चिह्न 'का' लुप्त है, इसलिए यह संबंध तत्पुरुष है। तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान होता है — यहाँ अर्थ का भार 'पुत्र' पर है।

प्रश्न 2

'अज्ञान' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bअव्ययीभाव
  3. Cनञ् तत्पुरुष
  4. Dद्वंद्व

व्याख्या

पूर्वपद 'अ' निषेध का अर्थ देता है, इसलिए यह तत्पुरुष का विशेष रूप नञ् तत्पुरुष है। विग्रह — न ज्ञान।

प्रश्न 3

'रसोईघर' का सही विग्रह कौन सा है?

  1. Aरसोई का घर
  2. Bरसोई में घर
  3. Cरसोई के लिए घर
  4. Dरसोई और घर

व्याख्या

यहाँ संप्रदान कारक का चिह्न 'के लिए' लुप्त है, इसलिए यह संप्रदान तत्पुरुष है। 'का' लगाने से उपभेद बदलकर ग़लत हो जाता है।

प्रश्न 4

'पथभ्रष्ट' में तत्पुरुष का कौन सा उपभेद है?

  1. Aकर्म तत्पुरुष
  2. Bअपादान तत्पुरुष
  3. Cसंबंध तत्पुरुष
  4. Dअधिकरण तत्पुरुष

व्याख्या

विग्रह 'पथ से भ्रष्ट' में 'से' अलग होने के अर्थ में आया है, और अलगाव का अर्थ अपादान कारक देता है। इसलिए यह अपादान तत्पुरुष है।

प्रश्न 5

'गंगाजल' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्वंद्व
  3. Cसंबंध तत्पुरुष
  4. Dबहुव्रीहि

व्याख्या

विग्रह 'गंगा का जल' में संबंध कारक 'का' लुप्त है और उत्तरपद 'जल' प्रधान है — यही संबंध तत्पुरुष का नियम है।

प्रश्न 6

'हस्तलिखित' में तत्पुरुष का कौन सा उपभेद है?

  1. Aकरण तत्पुरुष
  2. Bसंप्रदान तत्पुरुष
  3. Cअधिकरण तत्पुरुष
  4. Dकर्म तत्पुरुष

व्याख्या

विग्रह 'हस्त से लिखित' में 'से' साधन के अर्थ में आया है, जो करण कारक है — इसलिए करण तत्पुरुष।

प्रश्न 7

'वनवास' का सही विग्रह कौन सा है?

  1. Aवन का वास
  2. Bवन में वास
  3. Cवन के लिए वास
  4. Dवन और वास

व्याख्या

यहाँ अधिकरण कारक का चिह्न 'में' लुप्त है, इसलिए विग्रह 'वन में वास' और भेद अधिकरण तत्पुरुष है।

प्रश्न 8

'नासमझ' में कौन सा समास है?

  1. Aकर्मधारय
  2. Bद्विगु
  3. Cअव्ययीभाव
  4. Dनञ् तत्पुरुष

व्याख्या

पूर्वपद 'ना' निषेध का अर्थ देता है, इसलिए यह नञ् तत्पुरुष है। विग्रह — न समझ।