उपसर्ग (Upsarg): परिभाषा, भेद, सूची और पहचान — REET हिंदी व्याकरण
इस पेज पर उपसर्ग की परिभाषा, उसके स्रोत-आधारित भेद, संस्कृत-हिंदी-उर्दू उपसर्गों की सूची और संधि से छिपे उपसर्ग पहचानने की विधि दी गई है। REET 2024 में इस टॉपिक से 6 प्रश्न आए, इसलिए हिंदी व्याकरण में यह सबसे अधिक अंक देने वाले टॉपिकों में से है।
- REET 2024 में 6 प्रश्न
- कक्षा 1–8 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में उपसर्ग के 6 प्रश्न आए और सभी एक ही ढाँचे के थे: 'अमुक शब्द में उपसर्ग है' या 'अमुक उपसर्ग से बना शब्द कौन-सा है'। पूछे गए शब्द थे — परिश्रम (परि), समन्वित (सम्), पर्याप्त (परि), प्रकृति (प्र), विज्ञान (वि) और प्रत्येक (प्रति)। ध्यान दें कि आधे प्रश्नों में उपसर्ग संधि के कारण बदले रूप में छिपा था (सम् + अन्वित, परि + आप्त, प्रति + एक)। यानी REET केवल सूची याद करने की नहीं, शब्द का सही विच्छेद करने की क्षमता जाँचता है।
उपसर्ग क्या है?
उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी मूल शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विशेषता या विपरीतता ला देते हैं। 'उपसर्ग' स्वयं उप + सृज् (जोड़ना/रचना) से बना है — अर्थात् जो पास आकर नया शब्द रचे। जैसे — हार में 'प्र' जुड़कर प्रहार (चोट), 'वि' जुड़कर विहार (भ्रमण), 'आ' जुड़कर आहार (भोजन) और 'सम्' जुड़कर संहार (विनाश) बनता है। मूल शब्द एक है, पर उपसर्ग बदलते ही अर्थ बदल गया।
उपसर्ग की तीन विशेषताएँ परीक्षा में काम आती हैं: (1) उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता, वह सदा किसी शब्द से पहले जुड़कर ही अर्थ देता है; (2) वह शब्द के आरंभ में लगता है, जबकि प्रत्यय अंत में; (3) एक शब्द में एक से अधिक उपसर्ग भी हो सकते हैं — जैसे प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), निराकरण (निर् + आ + करण), समालोचना (सम् + आ + लोचना)।
उपसर्ग लगने से शब्द के अर्थ पर तीन तरह का प्रभाव पड़ता है — अर्थ बिल्कुल बदल जाना (हार → प्रहार), अर्थ में विशेषता आना (बल → प्रबल, ज्ञान → विज्ञान) या अर्थ उलट जाना (मान → अपमान, यश → अपयश)। कुछ शब्दों में अर्थ लगभग वैसा ही रहता है, जैसे — शुद्ध → विशुद्ध।
संस्कृत (तत्सम) उपसर्ग — अर्थ और उदाहरण
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अति | अधिक, परे | अत्यंत, अतिरिक्त, अत्याचार, अतिक्रमण |
| अधि | ऊपर, श्रेष्ठ | अधिकार, अध्यक्ष, अधिनियम, अध्ययन |
| अनु | पीछे, समान | अनुकरण, अनुज, अनुसार, अन्वय |
| अप | बुरा, विपरीत | अपमान, अपयश, अपव्यय, अपशब्द |
| अभि | सामने, पास | अभिमान, अभिनय, अभ्यास, अभिषेक |
| अव | नीचे, हीन | अवगुण, अवनति, अवतार, अवशेष |
| आ | तक, समेत | आजन्म, आगमन, आरक्षण, आजीवन |
| उत् / उद् | ऊपर, श्रेष्ठ | उत्थान, उत्कर्ष, उद्गम, उद्धार |
| उप | निकट, सहायक, गौण | उपवन, उपकार, उपनाम, उपमंत्री |
| दुर् / दुस् | बुरा, कठिन | दुर्जन, दुर्गम, दुष्कर, दुस्साहस |
| नि | नीचे, निषेध | निबंध, नियुक्त, निवास, निपात |
| निर् / निस् | बिना, बाहर | निर्धन, निराकार, निश्चल, निष्फल |
| परा | उलटा, पीछे | पराजय, पराभव, पराक्रम |
| परि | चारों ओर, पूर्ण | परिश्रम, परिक्रमा, परिवार, पर्याप्त |
| प्र | आगे, अधिक | प्रकृति, प्रबल, प्रयोग, प्रस्थान |
| प्रति | प्रत्येक, विरुद्ध | प्रत्येक, प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रत्युत्तर |
| वि | विशेष, भिन्न | विज्ञान, विदेश, वियोग, व्यर्थ |
| सम् | अच्छी तरह, साथ | संगम, संतोष, समाचार, समन्वित |
| सु | अच्छा, सरल | सुगम, सुपुत्र, स्वागत, सुलभ |
परंपरा में संस्कृत उपसर्ग 22 माने जाते हैं: दुर्/दुस् और निर्/निस् को अलग-अलग गिनने तथा 'अपि' (जिसका 'अ' लुप्त होकर प्रायः 'पि' रूप मिलता है, जैसे पिधान) जोड़ने पर यह संख्या 22 होती है।
हिंदी, उर्दू-फ़ारसी और अंग्रेज़ी के उपसर्ग
| स्रोत | उपसर्ग (अर्थ) | उदाहरण |
|---|---|---|
| हिंदी (तद्भव) | अ / अन (नहीं) | अछूता, अजान, अनबन, अनपढ़ |
| हिंदी (तद्भव) | अध (आधा) | अधमरा, अधपका, अधखिला |
| हिंदी (तद्भव) | उन (एक कम) | उनतीस, उनचास, उन्नीस |
| हिंदी (तद्भव) | क / कु (बुरा) | कपूत, कुचाल, कुढंग |
| हिंदी (तद्भव) | दु (बुरा, दो) | दुबला, दुकाल, दुलत्ती |
| हिंदी (तद्भव) | नि (रहित) | निडर, निकम्मा, निहत्था |
| हिंदी (तद्भव) | बिन (बिना) | बिनबोले, बिनब्याहा, बिनखाया |
| हिंदी (तद्भव) | भर (पूरा) | भरपेट, भरपूर, भरसक |
| हिंदी (तद्भव) | स / सु (सहित, अच्छा) | सपूत, सजग, सुडौल |
| उर्दू-फ़ारसी | कम (थोड़ा) | कमज़ोर, कमसिन, कमबख़्त |
| उर्दू-फ़ारसी | ग़ैर (भिन्न, नहीं) | ग़ैरहाज़िर, ग़ैरक़ानूनी, ग़ैरसरकारी |
| उर्दू-फ़ारसी | ना (नहीं) | नालायक, नापसंद, नासमझ |
| उर्दू-फ़ारसी | बद (बुरा) | बदनाम, बदबू, बदतमीज़ |
| उर्दू-फ़ारसी | बे (बिना) | बेईमान, बेचारा, बेकार |
| उर्दू-फ़ारसी | ला (बिना) | लापरवाह, लाजवाब, लावारिस |
| उर्दू-फ़ारसी | हर (प्रत्येक) | हरदिन, हरएक, हरसाल |
| अंग्रेज़ी | सब, हेड, वाइस, हाफ़ | सब-इंस्पेक्टर, हेडमास्टर, वाइस-चांसलर, हाफ़-टिकट |
हिंदी में कुछ संस्कृत अव्यय भी उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होते हैं — जैसे अंतर् (अंतर्राष्ट्रीय), पुनर् (पुनर्जन्म), सह (सहपाठी), स्व (स्वतंत्र), चिर (चिरकाल), बहिर् (बहिष्कार)।
संधि में छिपे उपसर्ग कैसे पहचानें
REET के आधे प्रश्न यहीं फँसाते हैं। जब उपसर्ग के अंत का वर्ण मूल शब्द के पहले स्वर से मिलता है, तो संधि हो जाती है और उपसर्ग का रूप बदल जाता है। नियम है: पहले पूरे शब्द का संधि-विच्छेद करें, फिर देखें कि पहला खंड मानक उपसर्ग सूची में है या नहीं।
यण् संधि वाले उदाहरण: प्रति + एक = प्रत्येक (उपसर्ग 'प्रति', न कि 'प्रत्'), परि + आप्त = पर्याप्त (उपसर्ग 'परि', न कि 'पर्य'), अति + अंत = अत्यंत, अनु + अय = अन्वय, वि + अर्थ = व्यर्थ, सु + आगत = स्वागत। व्यंजन संधि वाले उदाहरण: सम् + अन्वित = समन्वित, सम् + आचार = समाचार, सम् + गम = संगम, उत् + लास = उल्लास, दुर् + गम = दुर्गम, निस् + फल = निष्फल।
दूसरा जाल है ऐसे शब्द जिनका आरंभ उपसर्ग जैसा दिखता है पर होता नहीं। REET 2024 में 'प्र' उपसर्ग वाले शब्द के प्रश्न में प्राचीन, प्रथा, प्रकृति और प्रत्येक दिए गए थे; आधिकारिक उत्तर 'प्रकृति' (प्र + कृति) रहा। 'प्रथा' में 'प्र' हटाने पर 'था' कोई सार्थक मूल शब्द नहीं बचता, और प्रत्येक में उपसर्ग 'प्रति' है। इसी तरह 'सभ्यता' (सभ्य + ता) और 'रहस्य' में कोई उपसर्ग नहीं है, और 'पूर्वाग्रह' (पूर्व + आग्रह) सामासिक/संधि-युक्त शब्द है; इसमें 'पूर्व' मानक उपसर्ग सूची में नहीं है।
उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर
| आधार | उपसर्ग | प्रत्यय |
|---|---|---|
| स्थान | शब्द के आरंभ में | शब्द के अंत में |
| प्रभाव | प्रायः अर्थ बदलता है | प्रायः शब्द-भेद/रूप बदलता है (संज्ञा से विशेषण आदि) |
| उदाहरण | अ + ज्ञान = अज्ञान | ज्ञान + ई = ज्ञानी |
| संयुक्त प्रयोग | वि + ज्ञान + इक = वैज्ञानिक — एक ही शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैं | सु + गंध + इत = सुगंधित |
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि: शब्द-परिवार पेड़ (कक्षा 4–8)
बोर्ड पर मूल शब्द 'हार' लिखें और शाखाओं पर प्र, वि, आ, सम्, उप जोड़कर प्रहार, विहार, आहार, संहार, उपहार बनवाएँ। हर शब्द का अर्थ वाक्य में प्रयोग कराएँ, ताकि बच्चे देखें कि एक उपसर्ग अर्थ को कैसे बदलता है।
शिक्षण सामग्री
उपसर्ग-कार्ड और मूल-शब्द कार्ड के दो डिब्बे बनाएँ; बच्चे जोड़ी मिलाकर सार्थक शब्द बनाएँ। अख़बार की कतरनों में उपसर्ग वाले शब्दों पर गोला लगवाना भी अच्छा अभ्यास है।
आम भ्रांति
बच्चे समझते हैं कि शब्द का पहला अक्षर ही उपसर्ग है — जैसे 'प्रथा' में 'प्र'। उपाय: 'बचे हुए हिस्से का अर्थ बताओ' नियम सिखाएँ; यदि उपसर्ग हटाने पर बचा भाग सार्थक मूल शब्द न हो, तो वह उपसर्ग नहीं है।
संधि से जोड़कर पढ़ाएँ (कक्षा 6–8)
प्रत्येक, स्वागत, व्यर्थ जैसे शब्द यण् संधि के साथ पढ़ाएँ। बच्चे पहले संधि-विच्छेद लिखें, फिर उपसर्ग रेखांकित करें।
आकलन विचार
10 शब्दों की सूची देकर तीन कॉलम भरवाएँ — उपसर्ग, मूल शब्द, नया अर्थ। साथ में दो 'जाल' शब्द (जैसे प्रथा, सभ्यता) रखें जिनमें उपसर्ग नहीं है।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
'विच्छेद पहले, उत्तर बाद में': विकल्पों में 'प्रत्', 'पर्य', 'समन्' जैसे आधे-अधूरे रूप दिखें तो सावधान हो जाएँ — ये संधि के बदले रूप हैं। उपसर्ग सदा पूरा मानक रूप होता है: प्रति, परि, सम्। जैसे 'समन्वित' में उपसर्ग 'समन्' नहीं, 'सम्' है (सम् + अन्वित)।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 54
‘परिश्रम’ शब्द में ‘उपसर्ग’ है
- Aश्रम
- Bपरा
- Cप्र
- Dपरि
व्याख्या
‘परिश्रम’ शब्द ‘परि’ उपसर्ग और ‘श्रम’ मूल शब्द से बना है (परि + श्रम)। ‘परि’ का अर्थ है — चारों ओर/पूर्णतः। ‘श्रम’ मूल शब्द है, उपसर्ग नहीं।
प्रश्न 74
‘समन्वित’ शब्द में निम्नलिखित में से उपसर्ग है -
- Aस
- Bसम
- Cसम्
- Dसमन्
व्याख्या
‘समन्वित’ = सम् + अन्वित। यहाँ ‘सम्’ उपसर्ग है, जिसके ‘म्’ का ‘अ’ से मेल होकर ‘समन्वित’ बना है (जैसे सम् + आचार = समाचार)। ‘सम’ या ‘समन्’ मानक उपसर्ग रूप नहीं हैं।
प्रश्न 31
‘पर्याप्त’ शब्द में उपसर्ग है –
- Aपरि
- Bपर्य
- Cपरा
- Dआप्त
व्याख्या
‘पर्याप्त’ शब्द की रचना परि + आप्त से हुई है; यहाँ ‘परि’ उपसर्ग है और परि + आ में यण् संधि होकर ‘पर्या’ बनता है। ‘पर्य’ कोई स्वतंत्र उपसर्ग नहीं है, वह परि का संधि-रूप मात्र है। ‘आप्त’ मूल शब्द है, उपसर्ग नहीं।
प्रश्न 83
निम्नलिखित में से ‘प्र’ उपसर्ग से बना हुआ शब्द है-
- Aप्राचीन
- Bप्रथा
- Cप्रकृति
- Dप्रत्येक
व्याख्या
‘प्रकृति’ = प्र (उपसर्ग) + कृति; यहाँ ‘प्र’ स्पष्ट उपसर्ग है। ‘प्रत्येक’ प्रति + एक (उपसर्ग ‘प्रति’) से बना है। ‘प्राचीन’ और ‘प्रथा’ में ‘प्र’ को अलग करने पर सार्थक मूल शब्द शेष नहीं रहता, इसलिए इन्हें ‘प्र’ उपसर्ग से बना नहीं माना गया।
प्रश्न 33
निम्नलिखित में से ‘उपसर्ग’ युक्त शब्द है
- Aविज्ञान
- Bपूर्वाग्रह
- Cसभ्यता
- Dरहस्य
व्याख्या
‘विज्ञान’ = वि (उपसर्ग) + ज्ञान; यहाँ ‘वि’ उपसर्ग है जो ‘विशेष’ अर्थ देता है। ‘सभ्यता’ में ‘ता’ प्रत्यय है और ‘रहस्य’ मूल शब्द है। ‘पूर्वाग्रह’ मूलतः ‘पूर्व + आग्रह’ का संधि/समस्त पद है, इसलिए आधिकारिक उत्तर (A) विज्ञान है।
प्रश्न 86
‘प्रत्येक’ शब्द में उपसर्ग है
- Aप्र
- Bप्रति
- Cप्रत्
- Dप्रती
व्याख्या
‘प्रत्येक’ = प्रति + एक। यहाँ यण् संधि से ‘इ’ का ‘य्’ हो गया है (प्रति + एक → प्रत्येक)। अतः उपसर्ग ‘प्रति’ है, ‘प्र’ या ‘प्रत्’ नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'अत्याचार' शब्द में उपसर्ग है —
- Aअत्
- Bअति
- Cअत्या
- Dआ
व्याख्या
अत्याचार = अति + आचार। 'इ' + 'आ' में यण् संधि होकर 'या' बना है, इसलिए उपसर्ग 'अति' है।
प्रश्न 2
निम्नलिखित में से किस शब्द में 'अप' उपसर्ग है?
- Aअपना
- Bअपव्यय
- Cअपार
- Dअपूर्व
व्याख्या
अपव्यय = अप + व्यय (बुरा/अनुचित खर्च)। 'अपना' रूढ़ शब्द है, 'अपार' = अ + पार और 'अपूर्व' = अ + पूर्व।
प्रश्न 3
'उल्लास' शब्द में उपसर्ग है —
- Aउल्
- Bउत्
- Cउ
- Dउप
व्याख्या
उल्लास = उत् + लास। व्यंजन संधि में 'त्' के बाद 'ल' आने पर 'त्' का 'ल्' हो जाता है, पर उपसर्ग मूल रूप में 'उत्' ही है।
प्रश्न 4
उर्दू-फ़ारसी उपसर्ग से बना शब्द है —
- Aअनपढ़
- Bबेईमान
- Cकपूत
- Dअधमरा
व्याख्या
'बे' (बिना) उर्दू-फ़ारसी उपसर्ग है — बे + ईमान। अन, क, अध हिंदी (तद्भव) उपसर्ग हैं।
प्रश्न 5
किस शब्द में उपसर्ग नहीं है?
- Aविदेश
- Bप्रबल
- Cप्रथा
- Dअनुज
व्याख्या
'प्रथा' रूढ़ शब्द है, इसमें 'प्र' हटाने पर 'था' कोई सार्थक मूल शब्द नहीं बचता। विदेश (वि), प्रबल (प्र) और अनुज (अनु) में उपसर्ग हैं।
प्रश्न 6
'निराकरण' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग हैं —
- Aनि, र
- Bनिर्, आ
- Cनि, आ
- Dनिरा
व्याख्या
निराकरण = निर् + आ + करण। इसमें दो उपसर्ग — 'निर्' और 'आ' — एक साथ प्रयुक्त हुए हैं।
प्रश्न 7
'स्वागत' शब्द का सही विच्छेद है —
- Aस्व + आगत
- Bसु + आगत
- Cस + वागत
- Dसु + गत
व्याख्या
स्वागत = सु + आगत। 'उ' + 'आ' में यण् संधि होकर 'वा' बनता है; उपसर्ग 'सु' है।
प्रश्न 8
'दुष्कर' में उपसर्ग है —
- Aदुष्
- Bदु
- Cदुस्
- Dदुर्
व्याख्या
दुष्कर = दुस् + कर। विसर्ग/स् के बाद 'क' आने पर 'ष्' हो जाता है; उपसर्ग 'दुस्' है।
प्रश्न 9
कक्षा 5 का छात्र 'प्रथा' में 'प्र' उपसर्ग बताता है। शिक्षक के लिए सबसे उपयुक्त तरीका है —
- Aउत्तर गलत बताकर आगे बढ़ जाना
- Bउपसर्ग हटाकर बचे भाग का अर्थ पूछना और सार्थक मूल शब्द की कसौटी समझाना
- Cउपसर्गों की सूची दस बार लिखवाना
- Dप्रश्न को पाठ्यक्रम से बाहर बताना
व्याख्या
बचा भाग ('था') कोई सार्थक मूल शब्द नहीं है — यह कसौटी बच्चा स्वयं जाँचकर समझता है। इससे रटने के बजाय अवधारणा बनती है।
प्रश्न 10
उपसर्ग के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
- Aउपसर्ग शब्द के आरंभ में लगता है
- Bउपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग सामान्यतः नहीं होता
- Cउपसर्ग सदा शब्द का अर्थ उलट देता है
- Dएक शब्द में एक से अधिक उपसर्ग हो सकते हैं
व्याख्या
उपसर्ग सदा अर्थ नहीं उलटता; वह अर्थ बदल सकता है (हार → प्रहार), विशेषता ला सकता है (बल → प्रबल) या विपरीत अर्थ दे सकता है (मान → अपमान)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में उपसर्ग से कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में हिंदी भाषा I व II में उपसर्ग के कुल 6 प्रश्न आए — सभी 'दिए गए शब्द में उपसर्ग पहचानिए' प्रकार के।
संस्कृत के कितने उपसर्ग होते हैं?+
परंपरा के अनुसार संस्कृत के 22 उपसर्ग हैं — प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि और उप।
'प्रत्येक' में उपसर्ग कौन-सा है?+
'प्रत्येक' = प्रति + एक। यहाँ उपसर्ग 'प्रति' है; यण् संधि के कारण 'इ' का 'य्' हो जाता है।
क्या एक शब्द में दो उपसर्ग हो सकते हैं?+
हाँ। जैसे — प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), निराकरण (निर् + आ + करण), समालोचना (सम् + आ + लोचना)।
उपसर्ग और प्रत्यय में मुख्य अंतर क्या है?+
उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगकर अर्थ बदलता है (मान → अपमान), जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है (मान → मानी)।
आगे पढ़ें
आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए