मुख्य सामग्री पर जाएं
REET Level 1 व 2 · हिंदी (भाषा I/II)

उपसर्ग (Upsarg): परिभाषा, भेद, सूची और पहचान — REET हिंदी व्याकरण

Read this in English →

इस पेज पर उपसर्ग की परिभाषा, उसके स्रोत-आधारित भेद, संस्कृत-हिंदी-उर्दू उपसर्गों की सूची और संधि से छिपे उपसर्ग पहचानने की विधि दी गई है। REET 2024 में इस टॉपिक से 6 प्रश्न आए, इसलिए हिंदी व्याकरण में यह सबसे अधिक अंक देने वाले टॉपिकों में से है।

  • REET 2024 में 6 प्रश्न
  • कक्षा 1–8 स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में उपसर्ग के 6 प्रश्न आए और सभी एक ही ढाँचे के थे: 'अमुक शब्द में उपसर्ग है' या 'अमुक उपसर्ग से बना शब्द कौन-सा है'। पूछे गए शब्द थे — परिश्रम (परि), समन्वित (सम्), पर्याप्त (परि), प्रकृति (प्र), विज्ञान (वि) और प्रत्येक (प्रति)। ध्यान दें कि आधे प्रश्नों में उपसर्ग संधि के कारण बदले रूप में छिपा था (सम् + अन्वित, परि + आप्त, प्रति + एक)। यानी REET केवल सूची याद करने की नहीं, शब्द का सही विच्छेद करने की क्षमता जाँचता है।

उपसर्ग क्या है?

उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी मूल शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन, विशेषता या विपरीतता ला देते हैं। 'उपसर्ग' स्वयं उप + सृज् (जोड़ना/रचना) से बना है — अर्थात् जो पास आकर नया शब्द रचे। जैसे — हार में 'प्र' जुड़कर प्रहार (चोट), 'वि' जुड़कर विहार (भ्रमण), 'आ' जुड़कर आहार (भोजन) और 'सम्' जुड़कर संहार (विनाश) बनता है। मूल शब्द एक है, पर उपसर्ग बदलते ही अर्थ बदल गया।

उपसर्ग की तीन विशेषताएँ परीक्षा में काम आती हैं: (1) उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता, वह सदा किसी शब्द से पहले जुड़कर ही अर्थ देता है; (2) वह शब्द के आरंभ में लगता है, जबकि प्रत्यय अंत में; (3) एक शब्द में एक से अधिक उपसर्ग भी हो सकते हैं — जैसे प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), निराकरण (निर् + आ + करण), समालोचना (सम् + आ + लोचना)।

उपसर्ग लगने से शब्द के अर्थ पर तीन तरह का प्रभाव पड़ता है — अर्थ बिल्कुल बदल जाना (हार → प्रहार), अर्थ में विशेषता आना (बल → प्रबल, ज्ञान → विज्ञान) या अर्थ उलट जाना (मान → अपमान, यश → अपयश)। कुछ शब्दों में अर्थ लगभग वैसा ही रहता है, जैसे — शुद्ध → विशुद्ध।

संस्कृत (तत्सम) उपसर्ग — अर्थ और उदाहरण

उपसर्गअर्थउदाहरण
अतिअधिक, परेअत्यंत, अतिरिक्त, अत्याचार, अतिक्रमण
अधिऊपर, श्रेष्ठअधिकार, अध्यक्ष, अधिनियम, अध्ययन
अनुपीछे, समानअनुकरण, अनुज, अनुसार, अन्वय
अपबुरा, विपरीतअपमान, अपयश, अपव्यय, अपशब्द
अभिसामने, पासअभिमान, अभिनय, अभ्यास, अभिषेक
अवनीचे, हीनअवगुण, अवनति, अवतार, अवशेष
आतक, समेतआजन्म, आगमन, आरक्षण, आजीवन
उत् / उद्ऊपर, श्रेष्ठउत्थान, उत्कर्ष, उद्गम, उद्धार
उपनिकट, सहायक, गौणउपवन, उपकार, उपनाम, उपमंत्री
दुर् / दुस्बुरा, कठिनदुर्जन, दुर्गम, दुष्कर, दुस्साहस
निनीचे, निषेधनिबंध, नियुक्त, निवास, निपात
निर् / निस्बिना, बाहरनिर्धन, निराकार, निश्चल, निष्फल
पराउलटा, पीछेपराजय, पराभव, पराक्रम
परिचारों ओर, पूर्णपरिश्रम, परिक्रमा, परिवार, पर्याप्त
प्रआगे, अधिकप्रकृति, प्रबल, प्रयोग, प्रस्थान
प्रतिप्रत्येक, विरुद्धप्रत्येक, प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रत्युत्तर
विविशेष, भिन्नविज्ञान, विदेश, वियोग, व्यर्थ
सम्अच्छी तरह, साथसंगम, संतोष, समाचार, समन्वित
सुअच्छा, सरलसुगम, सुपुत्र, स्वागत, सुलभ

परंपरा में संस्कृत उपसर्ग 22 माने जाते हैं: दुर्/दुस् और निर्/निस् को अलग-अलग गिनने तथा 'अपि' (जिसका 'अ' लुप्त होकर प्रायः 'पि' रूप मिलता है, जैसे पिधान) जोड़ने पर यह संख्या 22 होती है।

हिंदी, उर्दू-फ़ारसी और अंग्रेज़ी के उपसर्ग

स्रोतउपसर्ग (अर्थ)उदाहरण
हिंदी (तद्भव)अ / अन (नहीं)अछूता, अजान, अनबन, अनपढ़
हिंदी (तद्भव)अध (आधा)अधमरा, अधपका, अधखिला
हिंदी (तद्भव)उन (एक कम)उनतीस, उनचास, उन्नीस
हिंदी (तद्भव)क / कु (बुरा)कपूत, कुचाल, कुढंग
हिंदी (तद्भव)दु (बुरा, दो)दुबला, दुकाल, दुलत्ती
हिंदी (तद्भव)नि (रहित)निडर, निकम्मा, निहत्था
हिंदी (तद्भव)बिन (बिना)बिनबोले, बिनब्याहा, बिनखाया
हिंदी (तद्भव)भर (पूरा)भरपेट, भरपूर, भरसक
हिंदी (तद्भव)स / सु (सहित, अच्छा)सपूत, सजग, सुडौल
उर्दू-फ़ारसीकम (थोड़ा)कमज़ोर, कमसिन, कमबख़्त
उर्दू-फ़ारसीग़ैर (भिन्न, नहीं)ग़ैरहाज़िर, ग़ैरक़ानूनी, ग़ैरसरकारी
उर्दू-फ़ारसीना (नहीं)नालायक, नापसंद, नासमझ
उर्दू-फ़ारसीबद (बुरा)बदनाम, बदबू, बदतमीज़
उर्दू-फ़ारसीबे (बिना)बेईमान, बेचारा, बेकार
उर्दू-फ़ारसीला (बिना)लापरवाह, लाजवाब, लावारिस
उर्दू-फ़ारसीहर (प्रत्येक)हरदिन, हरएक, हरसाल
अंग्रेज़ीसब, हेड, वाइस, हाफ़सब-इंस्पेक्टर, हेडमास्टर, वाइस-चांसलर, हाफ़-टिकट

हिंदी में कुछ संस्कृत अव्यय भी उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होते हैं — जैसे अंतर् (अंतर्राष्ट्रीय), पुनर् (पुनर्जन्म), सह (सहपाठी), स्व (स्वतंत्र), चिर (चिरकाल), बहिर् (बहिष्कार)।

संधि में छिपे उपसर्ग कैसे पहचानें

REET के आधे प्रश्न यहीं फँसाते हैं। जब उपसर्ग के अंत का वर्ण मूल शब्द के पहले स्वर से मिलता है, तो संधि हो जाती है और उपसर्ग का रूप बदल जाता है। नियम है: पहले पूरे शब्द का संधि-विच्छेद करें, फिर देखें कि पहला खंड मानक उपसर्ग सूची में है या नहीं।

यण् संधि वाले उदाहरण: प्रति + एक = प्रत्येक (उपसर्ग 'प्रति', न कि 'प्रत्'), परि + आप्त = पर्याप्त (उपसर्ग 'परि', न कि 'पर्य'), अति + अंत = अत्यंत, अनु + अय = अन्वय, वि + अर्थ = व्यर्थ, सु + आगत = स्वागत। व्यंजन संधि वाले उदाहरण: सम् + अन्वित = समन्वित, सम् + आचार = समाचार, सम् + गम = संगम, उत् + लास = उल्लास, दुर् + गम = दुर्गम, निस् + फल = निष्फल।

दूसरा जाल है ऐसे शब्द जिनका आरंभ उपसर्ग जैसा दिखता है पर होता नहीं। REET 2024 में 'प्र' उपसर्ग वाले शब्द के प्रश्न में प्राचीन, प्रथा, प्रकृति और प्रत्येक दिए गए थे; आधिकारिक उत्तर 'प्रकृति' (प्र + कृति) रहा। 'प्रथा' में 'प्र' हटाने पर 'था' कोई सार्थक मूल शब्द नहीं बचता, और प्रत्येक में उपसर्ग 'प्रति' है। इसी तरह 'सभ्यता' (सभ्य + ता) और 'रहस्य' में कोई उपसर्ग नहीं है, और 'पूर्वाग्रह' (पूर्व + आग्रह) सामासिक/संधि-युक्त शब्द है; इसमें 'पूर्व' मानक उपसर्ग सूची में नहीं है।

उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

आधारउपसर्गप्रत्यय
स्थानशब्द के आरंभ मेंशब्द के अंत में
प्रभावप्रायः अर्थ बदलता हैप्रायः शब्द-भेद/रूप बदलता है (संज्ञा से विशेषण आदि)
उदाहरणअ + ज्ञान = अज्ञानज्ञान + ई = ज्ञानी
संयुक्त प्रयोगवि + ज्ञान + इक = वैज्ञानिक — एक ही शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैंसु + गंध + इत = सुगंधित

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि: शब्द-परिवार पेड़ (कक्षा 4–8)

बोर्ड पर मूल शब्द 'हार' लिखें और शाखाओं पर प्र, वि, आ, सम्, उप जोड़कर प्रहार, विहार, आहार, संहार, उपहार बनवाएँ। हर शब्द का अर्थ वाक्य में प्रयोग कराएँ, ताकि बच्चे देखें कि एक उपसर्ग अर्थ को कैसे बदलता है।

शिक्षण सामग्री

उपसर्ग-कार्ड और मूल-शब्द कार्ड के दो डिब्बे बनाएँ; बच्चे जोड़ी मिलाकर सार्थक शब्द बनाएँ। अख़बार की कतरनों में उपसर्ग वाले शब्दों पर गोला लगवाना भी अच्छा अभ्यास है।

आम भ्रांति

बच्चे समझते हैं कि शब्द का पहला अक्षर ही उपसर्ग है — जैसे 'प्रथा' में 'प्र'। उपाय: 'बचे हुए हिस्से का अर्थ बताओ' नियम सिखाएँ; यदि उपसर्ग हटाने पर बचा भाग सार्थक मूल शब्द न हो, तो वह उपसर्ग नहीं है।

संधि से जोड़कर पढ़ाएँ (कक्षा 6–8)

प्रत्येक, स्वागत, व्यर्थ जैसे शब्द यण् संधि के साथ पढ़ाएँ। बच्चे पहले संधि-विच्छेद लिखें, फिर उपसर्ग रेखांकित करें।

आकलन विचार

10 शब्दों की सूची देकर तीन कॉलम भरवाएँ — उपसर्ग, मूल शब्द, नया अर्थ। साथ में दो 'जाल' शब्द (जैसे प्रथा, सभ्यता) रखें जिनमें उपसर्ग नहीं है।

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

'विच्छेद पहले, उत्तर बाद में': विकल्पों में 'प्रत्', 'पर्य', 'समन्' जैसे आधे-अधूरे रूप दिखें तो सावधान हो जाएँ — ये संधि के बदले रूप हैं। उपसर्ग सदा पूरा मानक रूप होता है: प्रति, परि, सम्। जैसे 'समन्वित' में उपसर्ग 'समन्' नहीं, 'सम्' है (सम् + अन्वित)।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न-संख्या 51 से 58 तक के उत्तर दीजिए । अधिकतर लोग विष्णु को पालनकर्त्ता मानकर उनकी उपासना करते हैं; विष्णु पालन करते हैं तथा महेश संहार करते हैं । इस पर विश्वास करके यदि कृषक को ही विष्णु कहें तो कोई अतिशयोक्ति न होगी । आकाश में उड़ने वाले स्वतंत्र पक्षी, पृथ्वी पर विचरण करने वाला मानव, यहाँ तक कि जलचर भी कृषकों पर ही निर्भर है । तपस्या भरा त्याग, अभिमान रहित उदारता और क्लांति रहित परिश्रम का यदि चित्र देखना है तो आप भारतीय कृषक को देखिए । वह स्वयं न खाकर दूसरों को खिलाता है, स्वयं न पहनकर दूसरों को वस्त्र देता है । उसके अनुपम त्याग की समानता कोई नहीं कर सकता है । भारतीय कृषक की आकृति में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों कोई वीतराग संन्यासी हो । जिसे न दु:ख में दु:ख और न सुख में सुख की कामना है; जिसे न अज्ञान से आत्म-ग्लानि होती है और न दरिद्रता से दीनता । यह वह कर्मयोगी है जो फल प्राप्ति की इच्छा से रहित होकर कर्म में तल्लीन रहता है ।

प्रश्न 54

‘परिश्रम’ शब्द में ‘उपसर्ग’ है

  1. Aश्रम
  2. Bपरा
  3. Cप्र
  4. Dपरि

व्याख्या

‘परिश्रम’ शब्द ‘परि’ उपसर्ग और ‘श्रम’ मूल शब्द से बना है (परि + श्रम)। ‘परि’ का अर्थ है — चारों ओर/पूर्णतः। ‘श्रम’ मूल शब्द है, उपसर्ग नहीं।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 74 से 83 तक के उत्तर दीजिए । प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का प्रकाश विश्व भर में फैल रहा है । इस महान भारतीय संस्कृति के वैशिष्ट्य बिंदु निम्नानुसार है - प्राचीनता-भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यंत प्राचीन है । सरस्वती-सैंधव सभ्यता की खोज एवं उत्खनन से प्राप्त सामग्री का मूल्य आँकना संभव नहीं है । यह प्राप्त सामग्री आज भी हमारा गौरव है । इनका संरक्षण एवं अध्ययन हमारा ध्येय होना चाहिए । निरंतरता-भारतीय संस्कृति की धारा निर्बाध रूप से हजारों वर्षों से बहती चली आ रही है । सैंधव सभ्यता से प्राप्त देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भारतीयों के लिए पूजनीय हैं । अनेक विदेशी आक्रमणों के बावजूद भारतीय संस्कृति ने अपना मूल स्वरूप स्थायी बनाए रखा है । आध्यात्मिकता-अध्यात्म भारतीय संस्कृति का प्राण तत्त्व है । हमारी संस्कृति का विकास तपोवनों और आश्रमों में हुआ है । ग्रहणशीलता-बाहरी तत्त्वों को आत्मसात् करने की क्षमता और समन्वित जीवनशैली भारतीय संस्कृति का प्रमुख गुण है । भारतीय संस्कृति की प्रेरक व्यवस्था व्यक्ति को नैतिक रूप से दृढ़ कर मानव बनाती है । भारतीय संस्कृति का सौंदर्य सार्वभौमिक है ।

प्रश्न 74

‘समन्वित’ शब्द में निम्नलिखित में से उपसर्ग है -

  1. Aस
  2. Bसम
  3. Cसम्
  4. Dसमन्

व्याख्या

‘समन्वित’ = सम् + अन्वित। यहाँ ‘सम्’ उपसर्ग है, जिसके ‘म्’ का ‘अ’ से मेल होकर ‘समन्वित’ बना है (जैसे सम् + आचार = समाचार)। ‘सम’ या ‘समन्’ मानक उपसर्ग रूप नहीं हैं।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31 से 40 तक के उत्तर लिखिए : भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ पर सभी ऋतुएँ समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक रहती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता रहा है और मुक्ति पाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । यद्यपि भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसंद करते थे तथापि वे लोक-व्यवहारों से भी परिचित थे । आज भी वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन शुभ माने जाते हैं ।

प्रश्न 31

‘पर्याप्त’ शब्द में उपसर्ग है –

  1. Aपरि
  2. Bपर्य
  3. Cपरा
  4. Dआप्त

व्याख्या

‘पर्याप्त’ शब्द की रचना परि + आप्त से हुई है; यहाँ ‘परि’ उपसर्ग है और परि + आ में यण् संधि होकर ‘पर्या’ बनता है। ‘पर्य’ कोई स्वतंत्र उपसर्ग नहीं है, वह परि का संधि-रूप मात्र है। ‘आप्त’ मूल शब्द है, उपसर्ग नहीं।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न संख्या 77 से 86 तक के उत्तर दीजिए । भारतीय मन संपूर्ण प्रकृति और नदियों का भी मातृ स्वरूप में दर्शन करता है । गंगा को हम माता कहते हैं, तुलसी को हमने माता माना, अश्वत्थ वृक्ष की हमने पूजा की और इन सबके माध्यम से समाज के मन में प्रकृति के प्रति एक पूज्य भाव उत्पन्न किया । हम तो कबूतरों, चिड़ियों को दाना चुगाते हैं, हम तो चींटियों तक को आटा डालते हैं क्योंकि इन सबके अस्तित्व का कोई प्रयोजन है । इस विश्व के प्रत्येक पेड़-पौधे, जीव-जंतु का अपना प्रयोजन है । इस प्रयोजन को जानकर सारे विश्व की रचना में उसका क्या स्थान है, इसको पहचानकर उसको बनाए रखें, तभी समन्वय ठीक से बैठेगा । इसी को हमारे यहाँ धर्म कहा है । उसको पहचानकर, उसके नियमों को जानकर तदनुसार यदि हम अपनी सारी रचना और विकास-पथ का उपयोग करेंगे तो प्रकृति के साथ शायद हमारा सुसंगत विकास हो सकेगा । हमारी प्राचीन काल से ही यह अवधारणा रही है कि प्रकृति के साथ मिलकर चलो और इसलिए प्रकृति के प्रति पूज्यभाव हमने उत्पन्न किया । पृथ्वी को हमने माता कहा है । धरती धारण करती है इसीलिए उसे माता कहा । वास्तव में जिस धरा और प्रकृति के सहारे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व निर्भर है, वही आज संकटग्रस्त हो गई है । पश्चिम की उपभोगवादी दृष्टि से प्रकृति के अमर्यादित उपभोग का विचार विकसित हुआ है । हमारी प्रथा संयमित उपभोग की है । हमारे वर्तमान के लिए भी यही विकास-पथ श्रेष्ठ है और यही शेष संसार को नष्ट होने के मार्ग से बचाने वाला मार्गदर्शक विकास-पथ हो सकता है ।

प्रश्न 83

निम्नलिखित में से ‘प्र’ उपसर्ग से बना हुआ शब्द है-

  1. Aप्राचीन
  2. Bप्रथा
  3. Cप्रकृति
  4. Dप्रत्येक

व्याख्या

‘प्रकृति’ = प्र (उपसर्ग) + कृति; यहाँ ‘प्र’ स्पष्ट उपसर्ग है। ‘प्रत्येक’ प्रति + एक (उपसर्ग ‘प्रति’) से बना है। ‘प्राचीन’ और ‘प्रथा’ में ‘प्र’ को अलग करने पर सार्थक मूल शब्द शेष नहीं रहता, इसलिए इन्हें ‘प्र’ उपसर्ग से बना नहीं माना गया।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 31-40 तक के उत्तर दीजिए : आम आदमी के लिए विज्ञान का मतलब क्या है ? विज्ञान मानव सभ्यता और संस्कृति का एक रूप है । आधुनिक विज्ञान ने इस नैसर्गिक सादगी व सौन्दर्य को हाशिए पर डाल कर विज्ञान को एक औपचारिक ढाँचे में कैद कर लिया है । विज्ञान एक औजार बन गया है जिससे प्रकृति के रहस्यों को खोलने की कोशिश की जाती हैं । इस प्रक्रिया में आम इंसान का संबंध इससे कट गया है । ‘विज्ञान पूर्वाग्रहों से मुक्त ज्ञान का भण्डार है’- ऐसा कहा जाता है । विज्ञान को विकास से जोड़ा जाता है । यह सरासर गलत है । जिन आदिवासियों ने सदियों प्रकृति के साथ सम्मानजनक रिश्ता बनाए रखा, आज हमने उन्हें ‘अविकसित’ मान लिया है । मानव का मानव से संबंध हानि-लाभ पर निर्धारित हो रहा है ।

प्रश्न 33

निम्नलिखित में से ‘उपसर्ग’ युक्त शब्द है

  1. Aविज्ञान
  2. Bपूर्वाग्रह
  3. Cसभ्यता
  4. Dरहस्य

व्याख्या

‘विज्ञान’ = वि (उपसर्ग) + ज्ञान; यहाँ ‘वि’ उपसर्ग है जो ‘विशेष’ अर्थ देता है। ‘सभ्यता’ में ‘ता’ प्रत्यय है और ‘रहस्य’ मूल शब्द है। ‘पूर्वाग्रह’ मूलतः ‘पूर्व + आग्रह’ का संधि/समस्त पद है, इसलिए आधिकारिक उत्तर (A) विज्ञान है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न संख्या 81 से 90 तक उत्तर दीजिए । ‘संस्कृति’ शब्द का संबंध संस्कार से है जिसका अर्थ है संशोधन करना, उत्तम बनाना, परिष्कार करना । अंग्रेजी शब्द ‘कल्चर’ में वही धातु है जो ‘एग्रीकल्चर’ में है । इसका भी अर्थ ‘पैदा करना, सुधारना’ है । संस्कारों से किसी व्यक्ति अथवा जाति का विकास गतिपूर्वक होता है । जातीय संस्कारों को ही संस्कृति कहते हैं । संस्कृति एक समूहवाचक शब्द है । जलवायु के अनुकूल रहन-सहन की विधियाँ और विचार-परंपराएँ जाति के लोगों में दृढ़मूल हो जाने से जाति के संस्कार बन जाते हैं । इनको प्रत्येक व्यक्ति अपनी निजी प्रकृति के अनुकूल न्यूनाधिक मात्रा में पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त करता है । ये संस्कार व्यक्ति के घरेलू जीवन तथा सामाजिक जीवन में परिलक्षित होते हैं । मनुष्य अकेला रहकर भी इनसे छुटकारा नहीं पा सकता । संस्कृति का बाह्य पक्ष भी होता है और आंतरिक भी । उसका बाह्य पक्ष आंतरिक का प्रतिबिम्ब नहीं तो उससे संबंधित अवश्य रहता है । हमारे बाह्य आचार, हमारे विचारों और मनोवृत्तियों के परिचायक होते हैं । संस्कृति एक देश-विशेष की उपज होती है, उसका संबंध देश के भौतिक वातावरण और उसके पालित, पोषित एवं परिवर्द्धित विचारों से होता है । भाषा संस्कृति का अंग है, फिर भी वह हमारी जातीय मनोवृत्ति की परिचायिका होती है ।

प्रश्न 86

‘प्रत्येक’ शब्द में उपसर्ग है

  1. Aप्र
  2. Bप्रति
  3. Cप्रत्
  4. Dप्रती

व्याख्या

‘प्रत्येक’ = प्रति + एक। यहाँ यण् संधि से ‘इ’ का ‘य्’ हो गया है (प्रति + एक → प्रत्येक)। अतः उपसर्ग ‘प्रति’ है, ‘प्र’ या ‘प्रत्’ नहीं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'अत्याचार' शब्द में उपसर्ग है —

  1. Aअत्
  2. Bअति
  3. Cअत्या
  4. Dआ

व्याख्या

अत्याचार = अति + आचार। 'इ' + 'आ' में यण् संधि होकर 'या' बना है, इसलिए उपसर्ग 'अति' है।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में से किस शब्द में 'अप' उपसर्ग है?

  1. Aअपना
  2. Bअपव्यय
  3. Cअपार
  4. Dअपूर्व

व्याख्या

अपव्यय = अप + व्यय (बुरा/अनुचित खर्च)। 'अपना' रूढ़ शब्द है, 'अपार' = अ + पार और 'अपूर्व' = अ + पूर्व।

प्रश्न 3

'उल्लास' शब्द में उपसर्ग है —

  1. Aउल्
  2. Bउत्
  3. Cउ
  4. Dउप

व्याख्या

उल्लास = उत् + लास। व्यंजन संधि में 'त्' के बाद 'ल' आने पर 'त्' का 'ल्' हो जाता है, पर उपसर्ग मूल रूप में 'उत्' ही है।

प्रश्न 4

उर्दू-फ़ारसी उपसर्ग से बना शब्द है —

  1. Aअनपढ़
  2. Bबेईमान
  3. Cकपूत
  4. Dअधमरा

व्याख्या

'बे' (बिना) उर्दू-फ़ारसी उपसर्ग है — बे + ईमान। अन, क, अध हिंदी (तद्भव) उपसर्ग हैं।

प्रश्न 5

किस शब्द में उपसर्ग नहीं है?

  1. Aविदेश
  2. Bप्रबल
  3. Cप्रथा
  4. Dअनुज

व्याख्या

'प्रथा' रूढ़ शब्द है, इसमें 'प्र' हटाने पर 'था' कोई सार्थक मूल शब्द नहीं बचता। विदेश (वि), प्रबल (प्र) और अनुज (अनु) में उपसर्ग हैं।

प्रश्न 6

'निराकरण' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग हैं —

  1. Aनि, र
  2. Bनिर्, आ
  3. Cनि, आ
  4. Dनिरा

व्याख्या

निराकरण = निर् + आ + करण। इसमें दो उपसर्ग — 'निर्' और 'आ' — एक साथ प्रयुक्त हुए हैं।

प्रश्न 7

'स्वागत' शब्द का सही विच्छेद है —

  1. Aस्व + आगत
  2. Bसु + आगत
  3. Cस + वागत
  4. Dसु + गत

व्याख्या

स्वागत = सु + आगत। 'उ' + 'आ' में यण् संधि होकर 'वा' बनता है; उपसर्ग 'सु' है।

प्रश्न 8

'दुष्कर' में उपसर्ग है —

  1. Aदुष्
  2. Bदु
  3. Cदुस्
  4. Dदुर्

व्याख्या

दुष्कर = दुस् + कर। विसर्ग/स् के बाद 'क' आने पर 'ष्' हो जाता है; उपसर्ग 'दुस्' है।

प्रश्न 9

कक्षा 5 का छात्र 'प्रथा' में 'प्र' उपसर्ग बताता है। शिक्षक के लिए सबसे उपयुक्त तरीका है —

  1. Aउत्तर गलत बताकर आगे बढ़ जाना
  2. Bउपसर्ग हटाकर बचे भाग का अर्थ पूछना और सार्थक मूल शब्द की कसौटी समझाना
  3. Cउपसर्गों की सूची दस बार लिखवाना
  4. Dप्रश्न को पाठ्यक्रम से बाहर बताना

व्याख्या

बचा भाग ('था') कोई सार्थक मूल शब्द नहीं है — यह कसौटी बच्चा स्वयं जाँचकर समझता है। इससे रटने के बजाय अवधारणा बनती है।

प्रश्न 10

उपसर्ग के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. Aउपसर्ग शब्द के आरंभ में लगता है
  2. Bउपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग सामान्यतः नहीं होता
  3. Cउपसर्ग सदा शब्द का अर्थ उलट देता है
  4. Dएक शब्द में एक से अधिक उपसर्ग हो सकते हैं

व्याख्या

उपसर्ग सदा अर्थ नहीं उलटता; वह अर्थ बदल सकता है (हार → प्रहार), विशेषता ला सकता है (बल → प्रबल) या विपरीत अर्थ दे सकता है (मान → अपमान)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में उपसर्ग से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में हिंदी भाषा I व II में उपसर्ग के कुल 6 प्रश्न आए — सभी 'दिए गए शब्द में उपसर्ग पहचानिए' प्रकार के।

संस्कृत के कितने उपसर्ग होते हैं?+

परंपरा के अनुसार संस्कृत के 22 उपसर्ग हैं — प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि और उप।

'प्रत्येक' में उपसर्ग कौन-सा है?+

'प्रत्येक' = प्रति + एक। यहाँ उपसर्ग 'प्रति' है; यण् संधि के कारण 'इ' का 'य्' हो जाता है।

क्या एक शब्द में दो उपसर्ग हो सकते हैं?+

हाँ। जैसे — प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), निराकरण (निर् + आ + करण), समालोचना (सम् + आ + लोचना)।

उपसर्ग और प्रत्यय में मुख्य अंतर क्या है?+

उपसर्ग शब्द के आरंभ में लगकर अर्थ बदलता है (मान → अपमान), जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है (मान → मानी)।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT पाठ्यपुस्तकें — हिंदी (वसंत, दूर्वा आदि) एवं व्याकरण अभ्यास
  2. केंद्रीय हिंदी निदेशालय — देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण
  3. BSER — REET 2024 आधिकारिक प्रश्न-पत्र व अंतिम उत्तर-कुंजी (मूल PDF; बोर्ड पोर्टल पर अब उपलब्ध नहीं)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए